शिवराज का दावा- मध्य प्रदेश का रिकवरी रेट बेहतर, देश की तुलना में केवल 2% पॉजिटिव मिले

मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 8797 पर पहुंच गई है। 5479 कोरोना संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं। लेकिन, संक्रमण अभी काबू होता नहीं दिख रहा। अनलॉक के शुरुआती 4 दिन में प्रदेश में 702 मरीज मिले हैं। शुक्रवार की सुबह भोपाल में 35 नए केस मिले। राजधानी में 41 मरीज स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज भी किए गए। इसके अलावा बाजार खुल गए हैं, जिससे आम दिनों से ज्यादा भीड़ देखने को मिल रही है। इससे संक्रमण और ज्यादा बढ़ने का अंदेशा है। प्रदेश में 24 घंटे में कोरोना के 203 नए केस सामने आए। हमारी कोरोना रिकवरी रेट 64.3 प्रतिशत है, जबकि देश की 47.9 प्रतिशत है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया कि कोरोना संक्रमण की निरंतर कमी के चलते मध्य प्रदेश अब देश में 7वें स्थान पर आ गया है। पहले 6वें स्थान पर था और उत्तरप्रदेश 7वें नंबर पर था। मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में कहा कि पूरे देश की तुलना में मध्य प्रदेश में लगभग 2 प्रतिशत नए संक्रमित मरीज पाए गए, जबकि पहले ये 8 प्रतिशत तक थे।प्रदेश में पिछले 24 घंटे में 192 मरीज स्वस्थ होने पर अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए। कोरोना से 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई। अब तक 377 लोग जान गवां चुके हैं। इंदौर में 36 नए केस मिले। यहां मरीजों की संख्या 3633 हो गई। यहां अब तक 145 की मौत हुई है और 2184 व्यक्ति स्वस्थ हो गए हैं। 1304 लोगों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। इसी तरह भोपाल में कुल संक्रमितों की संख्या 1665 हो गई है और 61 की मौत हो चुकी है। यहां पर 1100 मरीज कोरोना से स्वस्थ हो गए हैं और 458 का इलाज किया जा रहा है।

कपास फैक्ट्री में भीषण आग, मालिक बोले- एक करोड़ रुपए से ज्यादा का माल जल गया

बड़वानी. बड़वानी में कपास फैक्ट्री में शुक्रवार अलसुबह भीषण आग लग गई। आगजनी में एक करोड़ रुपए से ज्यादा की कपास गठान और कांकडे जल कर राख हो गए। आग की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी राजेश यादव टीम समेत मौके पर पहुंचे। आग इतनी भीषण थी कि चार अलग-अलग शहरों से आई फायर टीम ने करीब सात घंटे की मशक्कत के बाद काबू पाया। जिनिंग मालिक के अनुसार, आग में एक करोड़ रुपए से ज्यादा की नुकसानी हुई है।

आग बड़वानी के नवलपुरा स्थित कपास फैक्ट्री में शुक्रवार तड़के तीन से साढ़े 3 बजे के बीच लगी थी। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी राजेश यादव तत्काल मौके पर पहुंचे। यहां आग लगातार बढ़ती जा रही थी। मौके पर बड़वानी के साथ राजपुर, सेंधवा और अंजड़ से भी तत्काल फायर बिग्रेड को बुलवाया गया। फायर टीम ने आग के फैलाव को रोकने के लिए बची हुई कपास को गीला करना शुरू किया। करीब 7 घंटे तक लगातार पानी के छिड़काव के बाद आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि इसके बाद भी कपास की गठानों में काफी देर तक धुआं उठता रहा।

जिनिंग फैक्ट्री संचालक नवीन कुमार जैन की मानें तो आग देर रात लगी थी। आगजनी में 1200 रुई गठान और 1000 बोरी का कांकड़ा जलकर खाक हो गया है। जैन के अनुसार आगजनी में एक करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है। आग किन करणों से लगी, इसकी जानकारी नहीं है।

स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के बाल सखा बालेंद्र शुक्ला पहले कांग्रेस फिर भाजपा अब फिर कांग्रेस मैं वापस आए

पूर्व केंद्रीय मन्त्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हो गये तो आज कांग्रेस ने उनके पिता स्व माधव राव सिंधिया के बाल सखा रहे और एक जमाने मे कांग्रेस के बड़े नेता और एक दशक से भाजपा में काम कर रहे बालेंदु शुक्ला की फिर कांग्रेस में  वापिसी कर ली । हालांकि उनकर जाने से भाजपा को भले ही कोई नुकसान न हो लेकिन कांग्रेस को खासा फायदा होने की उम्मीद है।

बीते  दशक से भाजपा में काम कर रहे पूर्व मन्त्री बालेंदु शुक्ला ने आज फिर अपने पुराने दल कांग्रेस में वापिसी कर ली । उंन्होने पूर्व मुख्यमंत्री और पीसीसी के अध्यक्ष कमलनाथ के घर पर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली ।

माधव राव के बाल सखा है बालेंदु

बालेंदु शुक्ला दिवंगत माधव राव सिंधिया के अत्यंत खास लोगो मे माने जाते थे इसकी वजह भी साफ थी क्योंकि वे सिंधिया के समर्थक ही नही उनके बाल सखा भी थे । इन दोनों की मित्रता तब हुई थी जब ये दोनों सिंधिया स्कूल में साथ – साथ पढ़ते थे । बाद में श्री शुक्ला भारतीय स्टेट बैंक दतिया में प्रोवेशनरी ऑफिसर बन गए और सिंधिया गुना से सांसद । जब स्व  सिंधिया ने 1979 में कांग्रेस जॉइन की तो उन्होंने आपने मित्र बालेंदु को नौकरी छुड़वाकर सियासत में ले आये । इसके बाद वे उनके सियासी सलाहकार बनकर रहे । कहा जाता है कि जयविलास में बालेंदु की एंट्री हर जगह थी । वे अनेक बार मन्त्री रहे और सिंधिया खेमे के सबसे ताकतवर नेता ।

माधवराव सिंधिया के निधन और ज्योतिरादित्य की ताजपोशी के बाद बढ़ी दूरियां

     लेकिन 2001 में माधवराव सिंधिया के असामयिक निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया जब मुखिया बने तो उनकी उपेक्षा शुरू हो गई । उनका रसूख घटा तो उन्होंने महल से दूरियां बढ़ा ली । शनै: शनै:दोनों परिवारों में संपर्क समाप्त हो गए । बाद में बालेंदु शुक्ला ने बहुजन समाज पार्टी जॉइन की और ग्वालियर दक्षिण से चुनाव भी लड़ा लेकिन हार गए और फिर शिवराज सिंह के कहने पर वे भाजपा में शामिल हो गए । उंन्होने उन्हें केबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया ।

सिंधिया भाजपा में तो बालेंदु कांग्रेस में 

माना जा रहा है कि बालेंदु शुक्ल ने भाजपा ज्योतिरादित्य सिंधिया की बजह से ही छोड़ी । सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए तो उन्हें लगा कि अब परिस्थितियां उनके अनुकूल नही रहेंगी लिहाजा उंन्होने घर वापिसी की राह आसान की और अंततः आज फिर कांग्रेस में वापिसी कर ली ।

क्या कांग्रेस को होगा फायदा

लगभग अपना जनाधार खो चुके श्री शुक्ला पार्टी में अपनी उपेक्षा से दुखी थे
हालांकि श्री शुक्ला के पार्टी छोड़ने से भाजपा को कोई बड़ा नुकसान होगा इसकी कोई संभावना नही है लेकिन कांग्रेस को फायदा होने की उम्मीद है । दरअसल सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद उनके बड़ी संख्या में समर्थक कार्यकर्ता और नेता भाजपा में नही जाना चाहते क्योंकि वहां उन्हें अपना कोई भविष्य नज़र नही आ रहा लेकिन  अंचल में अभी उनकी पूछ परख करने वाला कोई नही है सो वे असमंजस में थे अब संभाग भर में ऐसे कार्यकर्ता उनके जरिये कांग्रेस में काम कर सकेंगे ।

PM मोदी के इस कदम से चीन में बेचैनी, भारत को किया आगाह

आर्थिक महाशक्ति के दम पर पूरी दुनिया में आक्रामक रूप से विस्तारवादी नीति पर चल रहे चीन के खिलाफ अमेरिका और भारत ही नहीं बल्कि ऑस्ट्रेलिया-जापान समेत तमाम देश लामबंद हो गए हैं. दुनिया में भू-राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव के ऐसे संकेत दिख रहे हैं जो चीन के सामने चुनौती पेश कर सकते हैं. चीन भी इन संकेतों को समझ रहा है और इसीलिए वहां की मीडिया में इसे लेकर चिंता देखने को मिल रही है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को जी-7 का विस्तार करके उसमें भारत को शामिल करने का प्रस्ताव दिया था जिसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, मोदी ने ट्रंप से टेलिफोन पर हुई बातचीत में उनकी दूरदृष्टि और सृजनात्मक रवैये की तारीफ की और कहा कि कोविड-19 के बाद की दुनिया के बाद की हकीकत के साथ ऐसे फोरम का विस्तार जरूरी है. 

जी-7 दुनिया की सात सबसे बड़ी और उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं. अब ट्रंप जी-7 का विस्तार कर इसे जी-11 या जी-12 बनाना चाहते हैं. जी-7 में भारत की एंट्री को लेकर चीनी मीडिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. चीन की सरकार के मुखपत्र कहे जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि जी-7 के विस्तार की योजना को हवा देकर भारत आग से खेल रहा है.

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, जी-7 के विस्तार का विचार भू-राजनीतिक समीकरणों को लेकर है और साफ तौर पर ये चीन को रोकने की कोशिश है. अमेरिका सिर्फ इसलिए भारत के साथ नहीं है कि वह दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है बल्कि अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति का भी अहम हिस्सा है. अमेरिका हिंद-प्रशांत में चीन को रोकने के लिए भारत को मजबूत करना चाहता है.

ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है, “ट्रंप की योजना को लेकर भारत का उत्साहजनक रुख हैरान करने वाला नहीं है. शक्ति की महत्वाकांक्षा में भारत लंबे वक्त से दुनिया के शीर्ष अंतरराष्ट्रीय संगठनों का हिस्सा बनने की कोशिश कर रहा है. हालिया दिनों में भारत और चीन के सीमा पर तनाव के बीच, भारत अमेरिका के जी-7 योजना को समर्थन देकर चीन को भी संदेश देना चाहता है. कई भारतीय रणनीतिकारों का कहना है कि चीन पर दबाव बढ़ाने के लिए भारत को अमेरिका के करीब जाना चाहिए.”

कोरोना महामारी के बाद से ऑस्ट्रेलिया के साथ भी चीन के संबंधों में कड़वाहट आई है. ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस महामारी की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की तो चीन ने नाराज होकर उसे आर्थिक चोट पहुंचाने वाले कई कदम उठाए. दूसरी तरफ, मंगलवार को भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ वर्चुअल बैठक की जिसमें व्यापार समेत तमाम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत और ऑस्ट्रेलिया क्षेत्रीय व वैश्विक मामलों में एक-दूसरे के रुख को समझते हैं. दुनिया के कई देशों में चीन के प्रति नाराजगी को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच ये बैठक काफी अहमियत रखती है.

अमेरिका समेत दुनिया के तमाम देशों के साथ भारत की मजबूत होती साझेदारी भी चीनी मीडिया को खटक रही है. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, जब से मोदी दूसरी बार सत्ता में आए हैं, भारत का चीन के प्रति रवैया बदल गया है. भारत चतुष्कोणीय रणनीतिक वार्ता को लेकर तेजी से आगे बढ़ रहा है यानी भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के साथ अपना गठजोड़ मजबूत कर रहा है. 

चीनी अखबार ने ट्रंप के भारत दौरे का भी जिक्र किया है. अखबार ने लिखा है, ट्रंप के फरवरी महीने के दौरे में भारत और अमेरिका ने समावेशी वैश्विक रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने की बात कही थी. इसका मतलब ये है कि भारत अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति को लागू करने में मदद करने के लिए तैयार है. इसके बदले में वह अमेरिका से वैश्विक ताकत बनने और अपनी अन्य योजनाओं में मदद चाहता है.

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कोरोना महामारी की पृष्ठभूमि में भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी और न्यूजीलैंड, साउथ कोरिया और वियतनाम ने मार्च महीने में टेलिकॉन्फ्रेंस की थी. इस बैठक को आयोजित कराने में भारत ने अहम भूमिका अदा की थी. हालांकि दावा किया गया कि यह कोरोना मुद्दे को लेकर है लेकिन चारों देशों के गुट को संस्था के तौर पर पेश करना और इसे न्यूजीलैंड, साउथ कोरिया और वियतनाम तक विस्तारित करने के इरादे को हल्के में नहीं लिया जा सकता है.

अखबार ने लिखा है, ये कहना बिल्कुल सही है कि चीन को टारगेट करने वाली अमेरिका की कई योजनाओं में भारत सक्रिय रहा है. लेकिन महामारी के बाद अगर चीन की ताकत और इसके वैश्विक दर्जे में कोई कमी नहीं आती है और अमेरिका का पतन जारी रहता है तो इसकी संभावना कम ही है कि भारत तब भी चीन को रोकने के लिए अमेरिका के साथ खड़ा होगा.

आर्टिकल में आगे कहा गया है कि भारत के रणनीतिकार और नीति-निर्माता एक छोटे से समूह के हाथ में है जो चीन के खिलाफ नकारात्मक सोच रखते हैं. चीन का उभार और भारत-चीन के बीच शक्ति के मामले में बढ़ता अंतर चीन के प्रति भारत की बैचेनी और बढ़ा रहा है.

ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय मीडिया की कुछ रिपोर्ट्स का जिक्र किया है जिसमें ट्रंप के जी-7 के विस्तार को चीन के खिलाफ भू-राजनीतिक समीकरण बताया गया है. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, अमेरिका चीन के खिलाफ भारत को समर्थन दे रहा है. इससे भारत की भी चीन के प्रति रणनीतिक सोच का भी पता चलता है. वैश्विक रणनीतिक परिस्थितियों को लेकर भारत का फैसला चीन से बिल्कुल अलग है. उन्हें लगता है कि पश्चिमी देश अभी भी ज्यादा मजबूत स्थिति में हैं और अगर वे अमेरिका के साथ खड़े होते हैं तो उन्हें फायदा होगा.

ग्लोबल टाइम्स ने अंत में भारत को आगाह किया है कि अगर वह चीन को काल्पनिक दुश्मन मानने वाले छोटे-छोटे समूहों से जल्दबाजी में हाथ मिलाता है तो चीन-भारत के संबंध खराब हो जाएंगे और ये भारत के हित में नहीं होगा.

चीन की सरकार के मुखपत्र ने लिखा है, “दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध पहले से ही तनावपूर्ण चल रहे हैं. चीन-भारत के संबंध एक ऐसी स्थिति में है कि केवल शीर्ष नेता ही भविष्य तय कर सकते हैं. एक बार संबंधों के खराब होने पर उन्हें फिर से सुधारना इतना आसान नहीं होगा.”

लद्दाख में चीन के पीछे हटते ही पाकिस्तान के भी सुर बदले, कहा- हम तो शांति चाहते हैं

इस्लामाबाद. लद्दाख में चीन के 2 किलोमीटर पीछे हटने के बाद अब पाकिस्तान के सुर भी बदले-बदले नज़र आ रहे हैं. पाकिस्तानी उच्चायोग के दो अधिकारियों को जासूसी के आरोप में भारत से निष्कासित किए जाने के बाद आक्रामक नज़र आ रहा पाकिस्तान अब शांति और सद्भावना की बात कर रहा है. गुरुवार को पाकिस्तान ने कहा कि हम भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव नहीं चाहते हैं और इसके लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं. पाकिस्तान ने अपने दोनों जासूसों को भी ‘निर्दोष’ बताया है.

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता आइशा फारुकी ने कहा, ‘पाकिस्तान की तनाव बढ़ाने की कोई मंशा नहीं है. हमने संयम बरतते हुए प्रतिक्रिया दी है. हालांकि राजनयिक नियमों का उल्लंघन और भारत का लगातार आक्रामक रवैया क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा है.’ पाकिस्तान ने गुरूवार को कहा कि उसने नयी दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के दो अधिकारियों को जासूसी के आरोप में भारत से निष्कासित किए जाने के मद्देनजर पड़ोसी देश के साथ तनाव बढ़ने से रोकने के लिए ‘संयम बरतते हुए प्रतिक्रिया’ दी है.

पकड़े गए जासूसों को बता रहा अधिकारी!

फारुकी ने दोहराया कि पाकिस्तानी अधिकारियों पर लगाए गए आरोप ‘झूठे’ एवं ‘बेबुनियाद’ हैं. उन्होंने भारत पर नियंत्रण रेखा पर ‘बिना उकसावे के गोलीबारी’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान ‘किसी भी आक्रामक कार्रवाई के खिलाफ अपना बचाव करने के लिए तत्पर है.’ उन्होंने चीन एवं भारत के बीच तनाव संबंधी प्रश्न के उत्तर में कहा कि पाकिस्तान चीन एवं भारत की सीमा के पास हालात पर नजर रखे हुए है और उसे उम्मीद है कि यह मामला आपसी सहमति से सुलझा लिया जाएगा.

बता दें कि भारत ने यहां पाकिस्तानी उच्चायोग के दो अधिकारियों को जासूसी के आरोप में रविवार को देश में निषिद्ध करते हुए उन्हें 24 घंटे के अंदर देश छोड़कर जाने का आदेश दिया था. नयी दिल्ली में आधिकारिक सूत्रों ने बताया था आबिद हुसैन और मोहम्मद ताहिर नाम के अधिकारियों को दिल्ली पुलिस ने उस वक्त गिरफ्तार किया, जब वे रुपयों के बदले एक भारतीय नागरिक से भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठानों से संबंधित संवेदनशील दस्तावेज हासिल कर रहे थे.
गिलगित-बाल्टिस्तान में बौद्ध धरोहर नष्ट करने की ख़बरों को बताया गलत

पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान में बौद्ध धरोहर को नष्ट करने की खबरों पर बृहस्पतिवार को भारत की चिंताओं को खारिज किया और इन्हें ‘निरर्थक’ करार दिया. भारत ने बुधवार को ‘पाकिस्तान के अवैध और जबरन कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र के तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान स्थित अमूल्य भारतीय बौद्ध धरोहर को तोड़ने, विरूपित करने’ की खबरों पर पाकिस्तान को अपनी कड़ी चिंता से अवगत कराया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने नयी दिल्ली में कहा कि प्राचीन सभ्यतागत और सांस्कृतिक धरोहर के प्रति इस तरह की ‘घृणित गतिविधियां अत्यंत निंदनीय’ हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारत से संबंधित क्षेत्र पर अवैध कब्जे को खत्म करना चाहिए.

श्रीवास्तव ने मुद्दे पर मीडिया के एक सवाल पर कहा कि भारत ने अमूल्य पुरातात्विक धरोहर को फिर से पूर्व स्वरूप में बहाल करने और इसके संरक्षण के लिए क्षेत्र तक अपने विशेषज्ञों की तत्काल पहुंच की मांग की है. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान में बौद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ी भारत सरकार की आपत्ति ‘निरर्थक’ है और यह ‘पाकिस्तान विरोधी दुष्प्रचार’ का हिस्सा है. इसने एक बयान में कहा, ‘भारत के आरोप ऐतिहासिक तथ्यों, अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों के विपरीत हैं.’

लद्दाख में पैंगोंग झील के बीच क्या है फिंगर 4, जिस पर चीन से है विवाद

दोनों देशों के बीच लद्दाख के चुशूल में होने वाली है बैठक

सीमा विवाद पर तनाव को लेकर बात करेंगे मिलिट्री कमांडर्स

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच तनाव को करीब एक महीना हो गया है. इस मसले पर भारत और चीन के मिलिट्री कमांडर्स के बीच लद्दाख के चुशूल में मीटिंग होनी है. अब तक 8 मीटिंग्स फेल हो चुकी हैं और 6 जून को होने वाली इस मीटिंग से पहले भी तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियां लगातार हो रही हैं.

छह जून की बातचीत से पहले भारत सरकार को सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से लद्दाख में चीनी गतिविधियों की पूरी रिपोर्ट मिल गई है. सुरक्षा एजेंसियों ने जानकारी दी है कि पूर्वी लद्दाख के अलग अलग सेक्टरों में चीनी सेना ने कहां अपने सैनिकों को तैनात किया है. कहां भारी हथियार रखे गये हैं. लेकिन इससे पहले जानते हैं पैंगोंग त्सो झील के आसपास क्या चल रहा है.

सीमा पर क्या हैं हालात

असल में, फिंगर 4 और 8 के बीच चीन और भारत की सेना गश्त करती है. आम तौर पर भारतीय सेना फिंगर 8 तक गश्त करती है, और इसी रास्ते में चीनी सेना भी गश्ती करती है. लेकिन कई बार दोनों देशों की सेना की टुकड़ियां आमने-सामने होती हैं और इनके बीच झड़प हो जाती है. कोरोना वायरस संकट को देखते हुए भारतीय सेना से कहा गया था कि वो अपनी गतिविधियों को सीमित रखे ताकि कोरोना का संक्रमण न फैले.

मगर इसी का फायदा उठाते हुए चीन की सेना फिंगर 4 के पास आकर बैठ गई और यही पर विवाद शुरू हो गया है. चीनी सेना भारतीय सेना के जवानों को फिंगर 4 से आगे जाने नहीं दे रहे हैं. भारत की मांग है कि चीनी सेना वापस चली जाए. यानी फिंगर 4 के पास दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है. नक्शे को अंतिम रूप नहीं दिए जाने की वजह से दोनों देशों में तनाव बना हुआ है.

क्या है फिंगर 4 और 8

इस बीच, फिंगर 4 और फिंगर 8 को लेकर तनाव बना हुआ. आखिर ये फिंगर्स क्या हैं. इससे समझते हैं. पिछले कुछ सालों से चीन की सेना पैंगोंग झील के किनारे सड़कें बना रही है. 1999 में जब पाकिस्तान से करगिल की लड़ाई चल रही थी उस समय चीन ने मौके का फायदा उठाते हुए भारत की सीमा में झील के किनारे पर 5 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई थी.

झील के उत्‍तरी किनारे पर बंजर पहाड़ियां हैं. इन्हें स्थानीय भाषा में छांग छेनमो कहते हैं. इन पहाड़ियों के उभरे हुए हिस्‍से को ही भारतीय सेना ‘फिंगर्स’ कहती है. भारत का दावा है कि एलएसी की सीमा फिंगर 8 तक है. लेकिन वह फिंगर 4 तक को ही नियंत्रित करती है.

फिंगर 8 पर चीन का पोस्ट है. वहीं, चीन की सेना का मानना है कि फिंगर 2 तक एलएसी है. छह साल पहले चीन की सेना ने फिंगर 4 पर स्‍थाई निर्माण की कोशिश की थी, लेकिन भारत के विरोध पर इसे गिरा दिया गया था.

पेट्रोलिंग के लिए चीन की सेना हल्‍के वाहनों का उपयोग करती है. गश्‍त के दौरान अगर भारत की पेट्रोलिंग टीम से उनका आमना-सामना होता है तो उन्‍हें वापस जाने को कह दिया जाता है. क्योंकि दोनों देशों की पेट्रोलिंग गाड़ियां उस जगह पर घुमा नहीं सकते. इसलिए गाड़ी को वापस जाना होता है.

भारतीय सेना के जवान पैदल गश्ती भी करते हैं. अभी के तनाव को देखते हुए इस गश्ती को बढ़ाकर फिंगर 8 तक कर दिया गया है. मई में भारत और चीन के सैनिकों के बीच फिंगर 5 के इलाके में झगड़ा हुआ है. इसकी वजह से दोनों पक्षों में असहमति है.

चीनी सेना ने भारतीय सैनिकों को फिंगर 4 से आगे बढ़ने से रोक दिया था. बताया जाता है कि चीन के 5,000 जवान गलवान घाटी में मौजूद हैं. सबसे ज्यादा दिक्कत होती है पैंगोंग लेक के आसपास. यहीं पर दोनों देशों के जवानों के बीच भिड़ंत हो चुकी है.

लॉकडाउन में कानून का पालन न करने पर 18360 लोगों पर 42 लाख 9 हजार रुपए का जुर्माना

ग्वालियर 04 जून 2020/ कोविड-19 की महामारी के चलते लॉकडाउन के दौरान भी लोग कानून तोड़ने से बाज नहीं आए। कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ग्वालियर पुलिस द्वारा 23 मार्च 2020 से 3 जून 2020 के बीच कुल 18360 वाहन चालकों के खिलाफ 42 लाख 9 हजार 402 रुपए का जुर्माना किया।
ग्वालियर कलेक्टर श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि कोविड-19 की महामारी के दौरान पूरे देश भर में लॉकडाउन था तथा ग्वालियर शहर में भी लॉकडाउन का पालन कराने के लिए जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने शहर भर में सघन अभियान चलाया और इस दौरान जो भी वाहन चालक कानून का उल्लंघन करते हुए पाया गया उसके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की गई। जिसमें मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ग्वालियर पुलिस द्वारा 8 हजार 668 वाहन चालकों के खिलाफ 26 लाख 9 हजार रुपए के जुर्माने की कार्रवाई की गई। वहीं लॉकडाउन के दौरान कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ रेड क्रॉस मद के तहत 9692 वाहन चालकों के खिलाफ 16 लाख 402 रुपए के जुर्माने की कार्रवाई की गई।
कलेक्टर श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने शहर के नागरिकों से अपील की कि शासन द्वारा लागू लॉकडाउन तथा अन्य दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन करें और शासन द्वारा निर्धारित समयानुसार तथा तय की गई दुकानें ही खोलें और बाजारों में सोशल डिस्टेंसिंग का पूर्णत: पालन करें तथा आवश्यक होने पर ही घर से निकलें व घर से मास्क लगाकर ही निकलें और कोविड-19 को फैलने से रोकने में मदद करें।
कलेक्टर ने की सावधानी बरतने की अपील
कलेक्टर श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने जिले के निवासियों से नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिये सावधानी बरतने की अपील भी की है। उन्होंने कहा है कि अनावश्यक रूप से लोग घर से न निकलें। घर से निकलते समय मास्क का उपयोग अवश्य करें। इसके साथ ही अपने हाथों को निरंतर धोते रहें और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में न जाएं।

26 की उम्र में सांसद से मुख्यमंत्री तक, ऐसा है योगी आदित्यनाथ का सियासी सफर

26 साल की उम्र में योगी गोरखपुर सीट से सांसद बने
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45 साल की उम्र में योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने
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अवैद्यनाथ ने अजय बिष्ट को योगी आदित्यनाथ बनाया
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को 48 साल से हो गए हैं. उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के पंचूर गांव में पांच जून 1972 जन्मे अजय सिंह बिष्ट गोरखपुर पहुंचकर योगी आदित्यनाथ बन गए. देश के सबसे बड़े सूबे की सत्ता के सिंहासन पर योगी विराजमान हैं. महज 26 साल की उम्र में संसद पहुंचने वाले योगी आदित्यनाथ 45 साल की उम्र में यूपी के सीएम बने. प्रदेश की नहीं बल्कि देश की सियासत में उन्हें हिंदुत्व के चेहरे के तौर पर जाना जाता है.

योगी आदित्यनाथ का जन्म उत्तराखंड के सामान्य राजपूत परिवार में हुआ. इनके पिता का नाम आनंद सिंह बिष्ट और माता का नाम सावित्री देवी है. योगी ने 1989 में ऋषिकेश के भरत मंदिर इंटर कॉलेज से 12वीं पास की और 1992 में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में बीएससी की पढ़ाई पूरी की . छात्र जीवन में ही वो राममंदिर आंदोलन से जुड़ गए थे.

90 के दशक में राममंदिर आंदोलन के दौरान ही योगी आदित्यनाथ की मुलाकात गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक कार्यक्रम हुई. इसके कुछ दिनों बाद योगी अपने माता-पिता को बिना बताए गोरखपुर जा पहुंचे और जहां संन्यास धारण करने का निश्चय लेते हुए गुरु दीक्षा ले ली. महंत अवैद्यनाथ भी उत्तराखंड के रहने वाले थे. जिन्होंने अजय सिंह बिष्ट को योगी आदित्यनाथ बनाने का काम किया.

गोरखनाथ मंदिर के महंत की गद्दी का उत्तराधिकारी बनाने के चार साल बाद ही महंत अवैद्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी बना दिया. गोरखपुर से महंत अवैद्यनाथ चार बार सांसद रहे, उसी सीट से योगी 1998 में 26 वर्ष की उम्र में लोकसभा पहुंचे और फिर लगातार 2017 तक पांच बार सांसद रहे.

सियासत में कदम रखने के बाद योगी आदित्यनाथ की छवि एक कठोर हिंदुत्ववादी नेता के तौर पर उभरी. सांसद रहते हुए गोरखपुर जिले को अपने नियम अनुसार चलाने और त्वरित फैसलों से सबको चकित किया. इसी के चलते योगी के सियासी दुर्ग को न तो मुलायम सिंह का समाजवादी भेद पाया और न ही मायावती की सोशल इंजीनियरिंग काम आई. गोरखपुर में योगी का हिंदुत्व कार्ड ही हावी रहा.

हिंदू युवा वाहिनी बनाई

योगी आदित्यनाथ ने अपनी निजी सेना हिंदू युवा वाहिनी का निर्माण किया जो गौ सेवा करने व हिंदू विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए बनाई गई. हिंदू युवा वाहिनी ने गोरखपुर में ऐसा माहौल तैयार किया, जिसके चलते आज तक उन्हें कोई चुनौती नहीं दे सका. एक तेजतर्रार राजनीतिज्ञ के रूप में अपनी छवि योगी आदित्यनाथ ने बना ली थी.

योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी खासियतों में एक है कि वह जनता से सीधा संवाद करने में विश्वास रखते हैं. 2017 में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला तो सीएम के लिए कई चेहरे दावेदार थे, लेकिन बाजी योगी के हाथ लगी. योगी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने फैसलों से अपनी राजनीतिक इच्छा को जाहिर कर दिया. हालांकि प्रदेश में हुए एनकाउंटरों के कारण विपक्ष ने उंगलियां भी उठाईं, लेकिन कानून-व्यवस्था पर सख्त योगी पर इसका खास प्रभाव नहीं हुआ. कोरोना संकट में सीएम योगी सीधे तौर पर सक्रिय नजर आए हैं, जिससे उनकी लोकप्रियता में और भी इजाफा हुआ है.

MP Online 12th Admit Card : मध्य प्रदेश में 9 जून से शुरू होंगी 12वीं की परीक्षा, ये हैं तैयारी

MP Online 12th Admit Card : मध्य प्रदेश में 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 9 जून से शुरू होने जा रही है। कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए परीक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। लॉकडाउन व अन्य कारणों से कई विद्यार्थी अपने निवास के बजाय प्रदेश के अन्य जिलों में फंसे हुए थे। ऐसे विद्यार्थी जहां हैं उस जिले के परीक्षा केंद्र पर परीक्षा दे सकेंगे। इसके लिए उन्हें एमपी ऑनलाइन के कियोस्क व पोर्टल और माध्यमिक शिक्षा मंडल के मोबाइल ऐप के माध्यम से आवेदन कर अनुमति ले सकते हैं।

इसके साथ ही वे जिले के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, समन्वयक संस्था, मंडल के संभागीय कार्यालयों के माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं। विद्यार्थियों को जिला परिवर्तन करने की स्थिति में नवीन चयनित जिले के जिला मुख्यालय पर ही जाकर परीक्षा देना होगी। यदि कोई छात्र जिले की अन्य तहसील में रह रहा है तो उसे परीक्षा केंद्र बदलने की सुविधा नहीं मिलेगी।

इनमें से कई ऐसे विद्यार्थी थे जिनके पास ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में एक जून को लॉकडाउन खुलने के बाद वे परीक्षा के लिए आवेदन कर रहे हैं। पहले ये आवेदन की तारीख 28 मई तक ही थी।

एक घंटे पहले पहुंचना होगा

12वीं के परीक्षार्थियों को एक घंटे पहले ही सेंटर पहुंचना होगा। यहां स्क्रीनिंग के बाद उन्हें प्रवेश दिया जाएगा। कोरोना को लेकर शारीरिक दूरी का ध्यान रखते हुए सभी को दूर-दूर बैठाया जाएगा।

तिथि – प्रथम पाली – द्वितीय पाली

9 जून – केमिस्ट्री – भूगोल

10 जून – बुक कीपिंग एंड एकाउंटेंसी प्रथम प्रश्न पत्र वोकेशनल कोर्स

11 जून – जीव विज्ञान

12 जून – व्यवसायिक अर्थशास्त्र – एनिमल हस्बेण्ड्री मिल्कट्रेड पोल्ट्री फार्मिंग एंड फिसरीज

13 जून -राजनीति शास्त्र शरीर रचना क्रिया-विज्ञान एवं स्वास्थ्य, स्टिल लाइफ एंड डिजाइन, द्वितीय प्रश्नपत्र वोकेशनल कोर्स

15 जून – हायर मेथेमेटिक्स विज्ञान के तत्व, भारतीय कला का इतिहास, तृतीय प्रश्नपत्र वोकेशनल कोर्स

16 जून – अर्थशास्त्र – क्रॉप प्रोडक्शन एंड हर्टिकल्चर