गुटबाजी के कारण दिल्ली से हुई मप्र जिला कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति

भोपाल, मध्य प्रदेश में ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया प्रकरण के बाद भी कांग्रेस में गुटबाजी नहीं थम रही है। आलम यह है कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष तक की नियुक्तियां प्रदेश कांग्रेस कमेटी नहीं बल्कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआइसीसी) को करना पड़ रही है।
एआइसीसी ने बुधवार को 11 जिला कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति आदेश जारी किए हैं। जिन जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है, इनमें से चार जिलों में उपचुनाव होना हैं।
बुधवार को 11 जिला अध्यक्षों के नियुक्ति आदेश हुए जारी
कोरोना लॉकडाउन-4 में राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है। भाजपा के बाद अब प्रदेश कांग्रेस ने 11 नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की है। मालूम हो, प्रदेश में कुछ महीने में ही विधानसभा उप चुनाव होने हैं। इसके लिए कांग्रेस को ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने के बाद संगठन में आई रिक्तता को भरने की चुनौती है। काफी समय से प्रस्तावित नियुक्तियों में से एआइसीसी ने बुधवार को श्योपुर, ग्वालियर ग्रामीण, विदिशा, सीहोर, रतलाम शहर, शिवपुरी, गुना शहर व ग्रामीण, होशंगाबाद, सिंगरौली शहर और देवास ग्रामीण को हरी झंडी दी है।
इनमें से ग्वालियर, शिवपुरी, गुना और देवास जिलों में उप चुनाव होना है। आमतौर पर ये नियुक्तियां प्रदेश कांग्रेस स्तर पर ही होती हैं, लेकिन कांग्रेस में चल रहे आंतरिक संग्राम के कारण प्रदेश कांग्रेस ने अपनी सिफारिशें राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजी थी, जहां से आदेश जारी हुए।
कांग्रेस में चुनावी तैयारियों पर नेताओं के तीखे सुर
मप्र में कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद वरिष्ठ नेताओं के तेवर बदलते दिख रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ द्वारा बुलाई जा रही विशेष बैठकों में नेताओं के तेवर खुलकर सामने आने लगे हैं। मंगलवार को ग्वालियर-चंबल संभाग की बैठक में प्रदेश के करीब 20 नेता कमल नाथ के निवास पर पहुंचे। इतनी बड़ी संख्या में नेताओं के पहुंचने पर शारीरिक दूरी के मापदंड का कितना पालन हुआ होगा, इसका अंदाज लगाया जा सकता है।
बताया जाता है कि ग्वालियर-चंबल संभाग की बैठक में चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी के भिंड जिले के मेहगांव से कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा पर नेताओं ने आपत्ति की। सूत्र बताते हैं कि पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि भाजपा से जिन्हें आना है, उनका स्वागत है लेकिन उन्हें पार्टी में आते ही टिकट देना गलत है। उन्हें सशर्त पार्टी में लिया जाए और कहा जाए कि वे चार साल काम करें, फिर टिकट दिया जाएगा।
सिंह ने कहा कि उन्होंने पार्टी के साथ धोखा किया था। वहां पहुंचकर भाई व खुद टिकट लिया और हार गए। अजय सिंह के इस वक्तव्य का बैठक में मौजूद कुछ अन्य नेताओं ने समर्थन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के अलावा नेता प्रतिपक्ष का मामला भी इसी वजह से अटका है। डॉ. गोविंद सिंह के नाम पर पिछले महीने ही नेतृत्व ने विचार कर लिया था लेकिन कुछ वरिष्ठ नेताओं ने उप चुनाव तक दोनों पदों पर कमल नाथ को रहने का सुझाव दिया।

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