सरकार खोकर भी नहीं लिया सबक, विस उपचुनाव से पहले कमलनाथ-दिग्विजय सिंह खेमें में बंटी कांग्रेस

नई दिल्ली, । मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने और मात्र 15 महीने में सरकार गंवाने के बाद भी कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान थम नहीं रही है। प्रदेश की 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले राज्य में कांग्रेस पार्टी, कमलनाथ और दिग्विजय सिंह खेमों में बंट गई है। यही वजह है कि दो दिन पहले पार्टी आलाकमान को प्रदेश के 11 जिलाध्यक्षों के नाम दिल्ली से तय करने पड़े थे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का मामला भी इसी वजह से अधर में लटका है। फिलहाल ये दोनों पद कमलनाथ ही संभाल रहे हैं।

उपचुनाव से ठीक पहले कमलनाथ और दिग्विजय सिंह खेमों में बंटी दिख रही प्रदेश कांग्रेस के पीछे की ताजा वजह चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी की पार्टी में होने वाली वापसी है। चौधरी राकेश सिंह उपनेता प्रतिपक्ष रहे हैं। वे भाजपा में आ गए थे, लेकिन नाखुश रहे और लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा छोड़ चुके हैं। पूर्व विधायक होने के नाते उनकी वापसी एआईसीसी (AICC) के माध्यम से होनी है।

ऐसा है कमलनाथ व दिग्विजय खेमा

चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी की वापसी के साथ ही, कमलनाथ खेमे के नेता उन्हें भिंड के मेहगांव से विधानसभा उपचुनाव लड़ाना चाहते हैं। यहां ब्राह्मण मतदाताओं का बाहुल्य है। इससे दोनों नेता और उनके समर्थक आमने-सामने आ गए हैं। कमलनाथ के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति जैसे नेता हैं। वहीं दिग्विजय सिंह के खेमें में डॉ. गोविंद सिंह, अजय सिंह और केपी सिंह जैसे नेता शामिल हो गए हैं। प्रदेश कांग्रेस में आपसी खींचतान की वजह से ही पार्टी को उपचुनाव में टिकट वितरण में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

सिंधिया प्रकरण से भी नहीं लिया सबक

मध्य प्रदेश कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को देखकर लगता है कि पार्टी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रकरण से भी कोई सबक नहीं लिया। पार्टी में गुटबाजी इतनी बढ़ चुकी है कि 20 मई को जिला कांग्रेस अध्यक्ष तक की नियुक्तियां, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) को करनी पड़ी। आम तौर पर ये नियुक्तियां प्रदेश कांग्रेस स्तर पर होती हैं। एआईसीसी ने जिन 11 जिलों में कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति की है। जिन 11 जिलों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति हुई है उसमें श्योपुर, ग्वालियर ग्रामीण, विदिशा, सीहोर, रतलाम शहर, शिवपुरी, गुना शहर व ग्रामीण, होशंगाबाद, सिंगरौली शहर और देवास ग्रामीण शामिल है। इनमें से चार जिले ग्वालियर, शिवपुरी, गुना और देवास में उप चुनाव होने हैं।

टिकट बंटवारे पर भी उठापटक शुरू

विधानसभा उपचुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर भी प्रदेश कांग्रेस में उठापटक शुरू हो गई है। आलम ये है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा बुलाई जा रही विशेष बैठकों में भी नेताओं के तेवर खुलकर सामने आने लगे हैं। पिछले दिनों ऐसी ही एक बैठक में चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को भिंड जिले के मेहगांव से प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर जैसे ही चर्चा शुरू हुई, विरोध के सुर उठने लगे। बैठक में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने उनके नाम पर आपत्ति जताते, उनके पार्टी में शामिल होते ही टिकट देने पर आपत्ति जताई थी। बैठक में मौजूद कुछ अन्य नेताओं ने भी अजय सिंह का समर्थन किया है।

सरकार गिरते ही शुरू हो गया था दिग्विजय का विरोध

मार्च 2020 में कमलनाथ की सरकार गिरते ही राज्य की सियासत में दिग्विजय सिंह का विरोध शुरू हो गया था। ये विरोध मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनावों में प्रत्याशियों के नाम तय करने को लेकर देखा गया था। दरअसल कमलनाथ सरकार गिरने के बाद राज्य में विधानसभा की 24 सीटों पर उपचुनाव होने हैं। इन उपचुनाव में अजा-अजजा वोट बैंक का फायदा उठाने के लिए प्रदेश कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने फूलसिंह बरैया के पक्ष में पार्टी हाईकमान को पत्र लिखा था। पत्र में दिग्विजय सिंह की जगह, फूलसिंह बरैया को राज्यसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के तौर पर प्राथमिकता देने की मांग की गई थी। दरअसल प्रदेश के राज्यसभा चुनावों के लिए दिग्विजय सिंह और फूलसिंह बरैया दोनों प्रत्याशी बनाए गए थे। लेकिन सरकार गिरने के बाद प्रदेश में राज्यसभा सीटों का समीकरण भी बदल गया। मौजूदा समीकरण में कांग्रेस प्रदेश की केवल एक राज्यसभा सीट ही जीत सकती है।

दिग्विजय पर कमलनाथ को धोखा देने का आरोप

कमलनाथ सरकार गिरने में भी दिग्विजय सिंह की भूमिका को लेकर भी उसी वक्त से सवाल उठ रहे हैं। सरकार गिरने के बाद पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने तो खुलकर कहा था कि दिग्विजय सिंह ने अपने परिवार-रिश्तेदारों के लिए मध्य प्रदेश समेत गुजरात और उत्तर प्रदेश में भी राजनीतिक जमावट कर ली है। मध्य प्रदेश में बेटे जयवर्धन सिंह, भाई लक्षमण सिंह व रिश्तेदार प्रियव्रत सिंह को और गुजरात व उत्तर प्रदेश में भी अपने रिश्तेदारों को विधायक बनवा दिया है। नायक ने तब आरोप लगाया था कि कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह को संकट मोचक समझा और उन्होंने ही धोखा दे दिया। कमलनाथ के इस्तीफे से ठीक पहले तक दिग्विजय सिंह शक्ति परीक्षण में जीतने की बात कहते रहे और फिर अचानक अल्पमत में होने की बात कहकर सरकार गिरवा दी।

चीन के बाद अब पाक बढ़ा रहा सीमा पर जमावड़ा, तोपें और अतिरिक्त सैन्य डिवीजन तैनात की

श्रीनगर, । कोरोना से पैदा हालात में भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग का असर जम्मू कश्मीर में वास्तविक नियंत्रण रेखा, नियंत्रण रेखा और अंतराष्ट्रीय सीमा पर नजर आने लगा है। लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर इलाके में चीन ने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है तो पाकिस्तान ने सांबा व हीरानगर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अतिरिक्त सैन्य डिवीजनों को तैनात कर दिया है। इसके अलावा पाक ने तोपखाना आगे लाने के साथ विमानभेदी तोपों को तैनात किया है।

विमानभेदी तोपें तैनात की

रक्षा सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी सेना ने अप्रैल से एलओसी से सटे इलाकों में गतिविधियां तेज की थीं। शुरू में इसे जम्मू कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ को सुनिश्चित बनाने की उसकी रणनीति का हिस्सा समझा जा रहा था लेकिन अब इस तैनाती ने सवाल खड़े किए हैं। पाकिस्‍तान ने तोपखाने को आगे लाया है और बीते 15 दिन के दौरान उसने नियंत्रण रेखा में विमानभेदी तोपों को भी तैनात किया है। ऐसे में पाकिस्‍तान की इस हरकत को यूं ही नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है।

सबसे ज्‍यादा तोड़ा संघर्ष विराम

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी सेना द्वारा बीते एक माह के दौरान पुंछ सेक्टर में सबसे ज्यादा बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है। हीरानगर सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी। उसकी इन गतिविधियों के आकलन और खुफिया रिपोर्टो के आधार पर पता चला है कि उसने यह कार्रवाई न सिर्फ घुसपैठ को सुनिश्चित बनाने के लिए की है बल्कि उसने इनके जरिए भारतीय सेना का ध्यान बंटा, अग्रिम इलाकों में सैन्य तैयारियों को गति दी है।

बस्तियों के बीच तैनात किए ऑपरेशनल केंद्र

पाक सेना ने अग्रिम नागरिक बस्तियों के बीच अपने ऑपरेशनल केंद्र भी स्थापित किए हैं। पाकिस्तान अपनी सेना के आर्डर ऑफ बैटल में आंशिक बदलाव लाया है, जिसके आधार पर कहा जा सकता है कि वह इसे अगले चंद दिनों में बदलने जा रही है। सूत्रों ने बताया कि नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार जहां पाक सेना में असामान्य हलचल हो रही है तो वहीं पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा भी इसी दौरान चीनी सेना की गतिविधियां तेज हुई हैं।

चीन भी तरेर रहा आंख

चीनी सेना के साथ तीन बार टकराव की स्थिति भी बनी है। पैंगांग झील की लहरों पर भारत और चीन के सैनिक अपनी गश्ती मोटरबोट में एक दूसरे के सामने बैनरों के साथ डटे थे। अक्साई चिन इलाके में चीन ने अपने सैनिकों की संख्या को अचानक बढ़ाया है। दो दशकों में ऐसा पहली बार हुआ है। वहीं, भारत ने भी पहली बार चीन के साथ सटे इलाकों में युद्धक विमानों को उड़ाया है।

किसी भी हालात से निपटने में सक्षम

उत्तरी कमान के एक वरिष्ठ सैन्याधिकारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से लेकर पूर्वी लद्दाख में चीन से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार होने वाली सभी गतिविधियों पर हमारी नजर है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए समर्थ हैं। पड़ोसी मुल्कों के इरादों को देखते हुए हमने भी अपनी व्यापक तैयारी की है। जो जैसा करेगा उसे उसके हिसाब से समुचित जवाब दिया जाएगा।

चीन दबाव बनाने का कर रहा प्रयास

रक्षा मामलों के विशेषज्ञ मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) गोवर्धन सिंह जम्वाल ने कहा कि चीन हमेशा आगे बढ़ने का बहाना तलाशता है। भारत उसके लिए बड़ी चुनौती है। कोरोना संकट के चलते अमेरिका और चीन में तल्खी बढ़ी है। वहीं, भारत-अमेरिका के रिश्तों में सुधार हुआ है। चीन पूर्वोत्‍तर में ही नहीं लद्दाख के साथ सटे इलाकों में सैन्य गतिविधियां तेज कर भारत पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है।

हांगकांग के आंदोलन को दबाने के लिए चीन लागू करेगा नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी

हांगकांग की तरफ से लगातार किए जा रहे हिंसक आंदोलन से परेशान चीन नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लाने जा रहा है। संसद में आज इसके लिए प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इस कानून को लाने के बाद चीन देश द्रोह जैसे मामले से और सख्ती से निपटेगा साथ ही साथ उसे हांगकांग में हो रहे हिंसक प्रदर्शन को दबाने के लिए और ज्यादा अधिकार प्राप्त हो जाएंगे।

वहीं चीन की ओर से कानून में संशोधन प्रक्रिया की आधिकारिक पुष्टि के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए  कहा है कि चीन ने यदि इस तरह के कदम उठाए तो अमेरिका बेहद कड़ी कार्रवाई करेगा।

लोकतंत्र समर्थक सांसदों और कार्यकर्ताओं ने इस मामले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि सरकार द्वारा जल्दबाजी में लाया जा रहा यह कानून हांगकांग को खत्म करने की एक साजिश है। सांसदो ने आगे कहा कि सरकार हांगकांग के लोगों की आवाज को दबाना चाहती है। 

हालांकि चीन ने स्पष्ट कर दिया है कि कड़ी चेतावनी के बावजूद हांगकांग में प्रदर्शनकारियों ने लगातार सात महीने तक बड़े पैमाने पर आंदोलन को जारी रखा और कभी-कभी इसे हिंसक रूप भी दिया। इसलिए अब हम इस नए सुरक्षा कानून के द्वारा यहां शांति स्थापित करने की कोशिश करेंगे।

बता दें कि हांगकांग के छोटे से संविधान में अनुच्छेद 23 के तहत लिखा है कि चीनी सरकार अपने खिलाफ देशद्रोह, अलगाव, तोड़फोड़ को रोकने के लिए इस तरह के कानून को बना सकती है। बता दें कि इससे पहले वर्ष 2003 में अनुच्छेद 23 को अधिनियमित करने का प्रयास किया गया था लेकिन विरोध में 5 लाख से अधिक लोग सड़क पर उतर गए और इस वजह से इसे पास नहीं किया जा सका।

वर्ष 1997 से पहले हांगकांग के लोग एक एग्रीमेंट के तहत स्वतंत्र रूप से जिंदगी जी रहे थे लेकिन 1997 के बाद ब्रिटेन से चीन के कब्जे में आने के बाद हांगकांग में पहली बार इतनी विषम स्थिति पैदा हुई और फिर से स्वतंत्र होने के लिए आंदोलन तेज कर दी गई, जो कि अभी तक जारी है।

गुटबाजी के कारण दिल्ली से हुई मप्र जिला कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति

भोपाल, मध्य प्रदेश में ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया प्रकरण के बाद भी कांग्रेस में गुटबाजी नहीं थम रही है। आलम यह है कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष तक की नियुक्तियां प्रदेश कांग्रेस कमेटी नहीं बल्कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआइसीसी) को करना पड़ रही है।
एआइसीसी ने बुधवार को 11 जिला कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति आदेश जारी किए हैं। जिन जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है, इनमें से चार जिलों में उपचुनाव होना हैं।
बुधवार को 11 जिला अध्यक्षों के नियुक्ति आदेश हुए जारी
कोरोना लॉकडाउन-4 में राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है। भाजपा के बाद अब प्रदेश कांग्रेस ने 11 नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की है। मालूम हो, प्रदेश में कुछ महीने में ही विधानसभा उप चुनाव होने हैं। इसके लिए कांग्रेस को ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने के बाद संगठन में आई रिक्तता को भरने की चुनौती है। काफी समय से प्रस्तावित नियुक्तियों में से एआइसीसी ने बुधवार को श्योपुर, ग्वालियर ग्रामीण, विदिशा, सीहोर, रतलाम शहर, शिवपुरी, गुना शहर व ग्रामीण, होशंगाबाद, सिंगरौली शहर और देवास ग्रामीण को हरी झंडी दी है।
इनमें से ग्वालियर, शिवपुरी, गुना और देवास जिलों में उप चुनाव होना है। आमतौर पर ये नियुक्तियां प्रदेश कांग्रेस स्तर पर ही होती हैं, लेकिन कांग्रेस में चल रहे आंतरिक संग्राम के कारण प्रदेश कांग्रेस ने अपनी सिफारिशें राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजी थी, जहां से आदेश जारी हुए।
कांग्रेस में चुनावी तैयारियों पर नेताओं के तीखे सुर
मप्र में कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद वरिष्ठ नेताओं के तेवर बदलते दिख रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ द्वारा बुलाई जा रही विशेष बैठकों में नेताओं के तेवर खुलकर सामने आने लगे हैं। मंगलवार को ग्वालियर-चंबल संभाग की बैठक में प्रदेश के करीब 20 नेता कमल नाथ के निवास पर पहुंचे। इतनी बड़ी संख्या में नेताओं के पहुंचने पर शारीरिक दूरी के मापदंड का कितना पालन हुआ होगा, इसका अंदाज लगाया जा सकता है।
बताया जाता है कि ग्वालियर-चंबल संभाग की बैठक में चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी के भिंड जिले के मेहगांव से कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा पर नेताओं ने आपत्ति की। सूत्र बताते हैं कि पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि भाजपा से जिन्हें आना है, उनका स्वागत है लेकिन उन्हें पार्टी में आते ही टिकट देना गलत है। उन्हें सशर्त पार्टी में लिया जाए और कहा जाए कि वे चार साल काम करें, फिर टिकट दिया जाएगा।
सिंह ने कहा कि उन्होंने पार्टी के साथ धोखा किया था। वहां पहुंचकर भाई व खुद टिकट लिया और हार गए। अजय सिंह के इस वक्तव्य का बैठक में मौजूद कुछ अन्य नेताओं ने समर्थन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के अलावा नेता प्रतिपक्ष का मामला भी इसी वजह से अटका है। डॉ. गोविंद सिंह के नाम पर पिछले महीने ही नेतृत्व ने विचार कर लिया था लेकिन कुछ वरिष्ठ नेताओं ने उप चुनाव तक दोनों पदों पर कमल नाथ को रहने का सुझाव दिया।

सायलो केन्द्र पड़ोरा शिवपुरी पर 5 किमी लंबी लाईन तपती दुुपहरिया में किसान परेशान

कोलारस क्षेत्रांतर्गत आने बाला सायलो खरीद केन्द्र जहां इन दिनों किसान का गेंहू सरकार द्वारा खरीदा जा रहा है वह विगत वर्ष की भांति इस बार भी क्षेत्र के किसानों के लिये बड़ी मुसीबत का सवब बनता नजर आ रहा है। आये दिन यहां नाना प्रकार से वाद-विवाद का होना आम सा हो गया है इसके अलावा सरकार द्वारा खरीद केन्द्र पर सुलभ खरीद हेतु कोई पुखता इंतजाम नहीं किये गये हैं। जबकि विगत वर्ष सामने आईं समस्याओं से सीख लेकर सरकार को इस बार सुविधाजनक इंतजाम करने की आवश्यक्ता थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ पूर्वानुसार ही अव्यवस्थाओं के बीच इस बार भी खरीद आरम्भ कर दी गई, जिसके चलते वर्तमान भीषण गर्मी के मौसम में अपनी फसल तुलवाने के लिये किसान लंबी-लंबी कतारों में रात दिन खड़ा होकर अनेकों समस्याओं से जूझ रहा है. जिसकी सुध न तो सरकार लेने को तैयार है और न ही प्रशासन?

पड़ोरा बैहटा स्थित सायलो खरीद केन्द्र के ताजा हालात यह हैं कि यहां से लेकर फोरलेन हाईवे स्थित गांधी पेट्रोल पंप तक किसानों के ट्रेक्टर-ट्रालीयों की लगभग 5 किलोमीटर लंबी लाइन लगी हुई है जहां किसान को अपनी फसल तुलवाने के लिये तीन-तीन दिन तक लाइन में लगना पड़ रहा है।

सायलो खरीद केन्द्र पर शिवपुरी की तीन तथा कोलारस विधानसभा की पांच सोसायटी अर्थात कुल मिलाकर 9 सोसायटीयों के किसानों का गेंहू तुलना है जबकि  यहां मशीन की क्षमता कम है ऐसे में क्षमता से अधिक भार के कारण व्यवस्था का एकाएक विगड़ना लाजमी है। इस पर क्षेत्रीय विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी द्वारा विगत वर्ष भी प्रशासन को समस्याओं से अवगत करा, व्यवस्था दुरूस्त करने हेतु चेताया गया था और इस बार भी रघुवंशी द्वारा प्रशासन को सुझाव दिया गया था कि उक्त खरीद केन्द्र पर या तो मशीनें बढ़ाई जाऐं या फिर 9 में से तीन सोसायटी के किसानों का गेंहू अलग स्थान पर तुलवाया जाऐ जिससे व्यवस्था बनी रहे और किसानों को किसी प्रकार की कोई समस्याओं का सामना न करना पड़े लेकिन प्रशासन ने विधायक रघुवंशी के सुझाव को दरकिनार करते हुऐ पुनः अव्यवस्थाओं के बीच खरीद आरम्भ कर दी जिसका खामियाजा आज क्षेत्रीय किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

प्रदेश में 1391 फीवर क्लीनिक हुए चालू,ग्वालियर जिले में टैस्ट के एक प्रतिशत से कम पॉजिटिव

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश के सभी जिलों में 1391 फीवर क्लीनिक ने कार्य करना प्रारंभ कर दिया है जिनमें अभी तक 42 हजार 151 व्यक्तियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें से 30 हजार 555 व्यक्तियों को ‘होम आइसोलेशन’ में रहने की सलाह दी गई तथा 6050 व्यक्तियों के कोरोना टेस्ट के लिए सैम्पल लिए गए। टेस्ट किए गए व्यक्तियों में से 2959 व्यक्तियों को कोविड केयर सेंटर्स/अस्पताल में भिजवाया गया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश में कोरोना की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, डीजीपी श्री विवेक जौहरी, एसीएस हैल्थ श्री मोहम्मद सुलेमान आदि उपस्थित थे।

कोरोना का इलाज और आसान होगा

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि फीवर क्लीनिक के माध्यम से जनता के लिए स्वास्थ्य जाँच एवं उपचार और आसान होगा। ये फीवर क्लीनिक धीरे-धीरे हर मोहल्ले, वार्ड, क्षेत्र में प्रारंभ की जाएंगी। ये शासकीय एवं निजी दोनों होंगी। यहां कोई भी व्यक्ति जाकर आसानी से स्वास्थ्य जाँच करवा सकेगा तथा चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त कर सकेगा। इसके अलावा सभी शासकीय एवं अनुबंधित चिकित्सालयों में कोरोना की नि:शुल्क जाँच व उपचार की सुविधा पूर्ववत जारी रहेगी।

ग्वालियर जिले में टैस्ट के एक प्रतिशत से कम पॉजिटिव

ग्वालियर जिले की समीक्षा में बताया गया कि जिले में अभी तक 9617 कोरोना टेस्ट किए गए, उनमें से 83 पॉजिटिव निकले जो एक प्रतिशत से भी कम है। सभी मरीज अच्छी हालत में हैं। गाइडलाइन अनुसार बाजार खोले जाने एवं रात्रिकालीन प्रतिबंध जारी रखने के निर्देश दिए गए।

मुरैना में 58 में 25 स्वस्थ

मुरैना जिले की समीक्षा में बताया गया कि जिले के 58 कोरोना मरीजों में से 25 ठीक होकर घर चले गए हैं। कोई डैथ नहीं है। मरीजों की हालत अच्छी है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पूरी सावधानी रखें, संक्रमण फैलना नहीं चाहिए।

बारात नहीं निकाली जा सकती

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गाइडलाइन के नियम अनुसार संक्रमित क्षेत्रों के बाहर  शादी में दोनों पक्षों से 25-25 अधिकतम 50 सदस्य शामिल होने की अनुमति दी गई है, परंतु विवाह समारोह नहीं किया जा सकता और न ही बारात निकाली जा सकती है। नियम तोड़ने पर एफआईआर दर्ज की जाए। बताया गया कि जाटखेड़ी भोपाल में एक बारात आई जिसमें दुल्हन संक्रमित हुई तथा 35 बारातियों को क्वारेंटाइन किया गया है।

उपचुनाव : सिंधिया समर्थक मंत्रियों और पूर्व विधायकों को शिकस्त देने कांग्रेस लगाएगी बड़ा दांव

मध्य प्रदेश में मात्र 15 महीने में सत्ता से हाथ धोने के कारण कांग्रेस बेहद आहत है। भाजपा और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से इसका बदला लेने के लिए कांग्रेस 24 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव में कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रही है। उपचुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस ने अपने प्रचार अभियान की रणनीति बनाने का काम प्रशांत किशोर को दिया है। बिहार में नीतीश कुमार को जीत दिलाने में प्रशांत किशोर की अहम भूमिका रही है। पिछले विधानसभा (2018) चुनाव में भी प्रशांत ही कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने वाले मुख्य रणनीतिकार थे।
कांग्रेस के प्रचार अभियान की कमान संभालने के लिए पार्टी ने तीन कंपनियों के प्रस्ताव पर विचार किया था। हालांकि इसमें प्रशांत के नाम पर मुहर लगी। भाजपा को घेरने के लिए कांग्रेस का वॉर रूम भोपाल में न होकर ग्वालियर में होगा। कांग्रेस सिंधिया समर्थक नेताओं के खिलाफ बेहद मजबूत प्रत्याशी उतारने की रणनीति बना रही है।
दिग्गजों को घेरने की रणनीति, सुरखी से अजय सिंह
पार्टी नेताओं की मानें तो शिवराज सरकार के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ सुरखी से पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ’राहुल भैया’ को उपचुनाव लड़ाने पर विचार किया जा रहा है। इससे पहले भी अजय सिंह अपना गृहक्षेत्र छोड़ 1993 में पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के खिलाफ भोजपुर विधानसभा से चुनाव लड़ चुके हैं।

सिलावट के खिलाफ गुड्डू
दूसरे मंत्री तुलसी सिलावट के खिलाफ पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू को लड़ाने पर कांग्रेस गंभीरता से विचार कर रही है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सांवेर सीट से गुड्डू पहले भी एकबार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस के ही टिकट पर भाजपा के प्रकाश सोनकर को विधानसभा चुनाव 1998 में हराया था। पिछले चुनाव में गुड्डू भाजपा में शामिल हो गए थे। पार्टी ने उनके बेटे अजय बोरासी को विधानसभा का टिकट दिया था।

सुवासरा से मीनाक्षी का नाम

इसी तरह मंदसौर की सुवासरा सीट से मीनाक्षी नटराजन को भी उपचुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस के नेता तैयार कर रहे हैं। मीनाक्षी मंदसौर से सांसद भी रही हैं। इस सीट से कांग्रेस छोड़ने वाले हरदीप सिंह डंग इस उपचुनाव में भाजपा के प्रत्याशी होंगे। डंग को नटराजन का ही समर्थक माना जाता था।

रामनिवास रावत को भी मैदान में उतार सकती है कांग्रेस

कांग्रेस कद्दावर नेताओं को चुनाव में उतरने के क्रम में पूर्व मंत्री रामनिवास रावत के नाम पर भी विचार कर रही है। उन्हें पोहरी या करैरा सीट से प्रत्याशी बनाया जा सकता है। पोहरी से अशोक सिंह का भी नाम है। लोकसभा चुनाव में उन्हें पोहरी से ज्यादा वोट मिले थे। कुछ अन्य सीटों पर भी कांग्रेस दमदार प्रत्याशी उतार सकती है। बदनावर से क्षत्रिय और ग्वालियर में प्रद्युम्न सिंह तोमर के खिलाफ ब्राह्मण नेता को उतारने पर पार्टी विचार कर रही है।

मास्क पहनने को कहा तो युवक ने दो कांस्टेबलों पर किया हमला

अशोक नगर । मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले के बहादुरपुर थाना परिसर में गुरुवार सुबह एक युवक को असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (एएसआइ) ने मास्क पहनने को कहा तो उसने दो कांस्टेबलों पर चाकू से हमला कर दिया। युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। बहादुरपुर के थाना प्रभारी नरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि धीरा चक्क झागर बमुरिया निवासी 20 वर्षीय हल्के आदिवासी थाना परिसर में आ रहा था।

वहां मौजूद एएसआइ राधाचरण यादव ने उसे मास्क पहनने को कहा। इसके बाद युवक ने कांस्टेबल शाहिद खान की गर्दन पर चाकू से हमला कर दिया। निशाना चूकने से चाकू कनपटी पर लगा और बायां कान कट गया। जब दूसरा कांस्टेबल राजेश परिहार शाहिद को बचाने आया तो युवक ने उस पर भी चाकू से हमला कर दिया। हमले में राजेश के बांये हाथ की दो अंगुलियां कट गईं। हमला करने के बाद युवक ने भागने का प्रयास किया लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ लिया।

फोरलेन के लिए CM योगी ने गोरखनाथ मंदिर की 200 दुकानों पर चलवाया बुल्डोजर

17 किमी लंबे फोरलेन के लिए तोड़े गए दुकान

दुकानदारों के लिए बनेगा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स

उत्‍तर प्रदेश
उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने एक नई परंपरा शुरू कर दी है. वह देश के अकेले ऐसे सीएम हैं, जिसने विकास की खातिर अपनी ही दुकानों और उस मंदिर की चहारदीवारी पर बुल्‍डोजर चलवा दिया, जिसके वह पीठाधीश्‍वर हैं. मामला गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर का है.

दरअसल, मुख्‍यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्‍वर महंत योगी आदित्‍यनाथ के आदेश से गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर की एक-दो नहीं, दो सौ से ज्‍यादा दुकानें जमींदोज की जा रही हैं. यह सब हो रहा है गोरखपुर में मोहद्दीपुर से जंगल कौड़िया तक बन रहे 17 किलोमीटर लंबे फोरलेन के लिए.

मंदिर परिसर की करीब दो सौ और उससे लगी सौ अन्‍य दुकानें फोरलेन के आड़े आ रही थीं. पिछले चार दिन से इन दुकानों को तोड़े जाने का सिलसिला जारी है. मंदिर की दुकानें तोड़ने की इजाजत खुद मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने दी है. इस आदेश के पूरा प्रशासनिक अमला दुकानों को तोड़ने में लगा है.

हालांकि, इन दुकानदारों के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने नई जगह की व्यवस्था करने के निर्देश मंदिर प्रबंधन को दिए हैं. इसके बाद मंदिर प्रबंधन ने मल्टीस्टोरी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने का फैसला किया है. बताया जा रहा है कि कॉम्पलेक्स के लिए जीडीए ने मानचित्र को अप्रूव कर दिया है.

सीएम योगी आदित्यनाथ के इस फैसले से गोरखपुर के लोगों को जाम की समस्या से मुक्ति मिलेगी. ये फोरलेन जंगल कौड़िया में ही सोनौली जाने वाली हाइवे से मिल जाएगी. साथ ही शहर में प्रवेश करने वाले लोगों को जाम का सामना नहीं करना पड़ेगा.