भारत ने चीन को दिया एक और झटका, दुनिया भर के 62 देश आए एक साथ

विश्व स्वास्थ्य संगठन की सोमवार से वार्षिक बैठक शुरू हो गई है. इस बैठक में कोरोना वायरस की महामारी का मुद्दा छाना स्वाभाविक है. कोरोना वायरस को लेकर दुनिया भर के कई देश चीन की भूमिका को संदिग्ध मान रहे हैं. कोरोना वायरस की महामारी और चीन की भूमिका को लेकर भारत अब तक चुप था लेकिन यह चुप्पी अब टूटती दिख रही है. सबसे पहले केंद्रीय परिवहन और सड़क निर्माण मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि यह वायरस प्राकृतिक नहीं है और इसे लैब में तैयार किया गया है. 

नितिन गडकरी ने ये बयान दिया तो ऐसा लग रहा था कि यह उनकी निजी राय होगी और भारत सरकार उनसे सहमत नहीं होगी. लेकिन WHO की बैठक के लिए ड्राफ्ट प्रस्ताव के अनुसार भारत ने उस जांच का समर्थन किया है जिसमें पता करना है कि कोरोना वायरस जानवरों से इंसान में कैसे आया और विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस महामारी को लेकर भूमिका कितनी निष्पक्ष रही.

इससे पहले यूरोप और ऑस्ट्रेलिया की तरफ से इस तरह की जांच की मांग उठती रही है. भारत ने पहली बार इस तरह की जांच में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से हामी भरी है.  

कोरोना वायरस का संक्रमण चीन के वुहान शहर से पिछले साल दिसंबर महीने में शुरू हुआ था और अब तक इससे तीन लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च में जी-20 समिट में विश्व स्वास्थ्य संगठन में सुधार और पारदर्शिता की बात कही थी. 

चीन पर आरोप लगता रहा है कि उसने कोरोना वायरस के संक्रमण की शुरुआत में सूचनाओं को छुपाया और पारदर्शिता नहीं बरती इसलिए पूरी दुनिया में यह संक्रमण फैल गया. इसे लेकर अमेरिका और चीन के बीच जमकर कहासुनी भी हुई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलेआम कहा कि कोरोना वायरस चीन की लैब में पैदा किया गया और इसे लेकर उनके पास पर्याप्त सबूत हैं. 

दूसरी तरफ चीन ने कहा कि वुहान में कोरोना वायरस अमेरिकी सैनिकों के जरिए आया और इसके लिए अमेरिका जिम्मेदार है. विश्व स्वास्थ्य संगठन पर भी ट्रंप ने आरोप लगाया कि वो चीन परस्त है. इसे लेकर ट्रंप ने WHO का फंड भी रोकने की घोषणा कर दी. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका चीन से कई गुना ज्यादा फंड देता है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन चीन का बचाव कर रहा है.

कोरोना वायरस महामारी की जांच का 62 देशों ने समर्थन किया है जिसमें भारत के साथ बांग्लादेश, कनाडा, रूस, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूके और जापान भी शामिल हैं. हालांकि, WHO के प्रस्ताव में चीन या वुहान का जिक्र नहीं है. लेकिन ये कहा गया है कि WHO इस बात की जांच करे कि वायरस कहां से पैदा हुआ और जानवर से इंसान में कैसे आया. 

सात पन्नों के प्रस्ताव में WHO की भूमिका की भी जांच की बात कही गई है. कहा जा रहा है कि यह प्रस्ताव चीन के खिलाफ है और उसे जवाब देना होगा. कोरोना महामारी की उत्पत्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय जांच को समर्थन मिलने से चीन को अपनी छवि को नुकसान पहुंचने का भी डर है.

चीनी मीडिया में भी इस प्रस्ताव को लेकर खूब चर्चा है. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि कोरोना वायरस महामारी के फैलने की जांच निष्पक्ष होनी चाहिए. अखबार का कहना है कि जांच राजनीतिक ना होकर वैज्ञानिक और पारदर्शी होनी चाहिए. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, “चीन किसी भी वैज्ञानिक जांच को लेकर विरोध नहीं कर रहा है लेकिन अमेरिकी एजेंडे के हिसाब से जांच का विरोध करता है. जो देश अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के प्रोपेगैंडा में उसका साथ दे रहे हैं, उनकी चीन के प्रति राजनीतिक मंशा जाहिर हो जाती है.”

क्या भारत ने इस जांच का समर्थन कर चीन को नाराज कर दिया है? ऑस्ट्रेलिया ऐसी नाराजगी पहले से ही झेल रहा है. ऑस्ट्रेलिया को चीन ने धमकी दी है कि वो वहां से जौ और बीफ का आयात बंद करने जा रहा है. ऑस्ट्रेलिया के लिए चिंता की बात है क्योंकि उसके जौ और बीफ का चीन सबसे बड़ा खरीददार है. लेकिन भारत के साथ ऐसी बात नहीं है.

भारत और चीन के बीच कारोबारी साझेदारी में नुकसान भारत का है. दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में घाटा भारत का है क्योंकि भारत निर्यात की तुलना में चीन से आयात ज्यादा करता है. ट्रंप ने भी इसी आधार पर चीन के साथ ट्रेड वॉर छेड़ रखा है. ट्रंप का कहना है कि वो चीन से हर तरह के संबंध तोड़ सकते हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने तर्क दिया था कि अगर वो चीन से हर तरह का संबंध खत्म करते हैं तो इससे अमेरिका को हर साल 500 अरब डॉलर का फायदा होगा क्योंकि अमेरिका सालाना इतनी ही रकम का सामान चीन से खरीदता है.

भारत ने इससे पहले भी चीन के खिलाफ एक कदम उठाया था. पिछले महीने भारत ने चीन से होने वाले निवेश के ऑटोमैटिक रूट को बंद कर दिया था और अब कोई भी चीनी निवेश आने से पहले भारत सरकार की मंजूरी जरूरी है. भारत को डर था कि कोरोना वायरस की महामारी में भारतीय कंपनियों का कारोबार ठप पड़ा है और इसका फायदा उठाकर चीन सस्ते में टेकओवर ना कर ले. 

अब इसी तरह की मांग यूरोप में भी चीन के खिलाफ उठ रही है. जर्मनी ने भी भारत की तरह से चीन से आने वाले निवेश के लिए नियम कड़े कर दिए हैं. भारत के इस कदम को चीन ने एकतरफा और विश्व व्यापार संगठन के नियमों के खिलाफ बताकर नाराजगी भी जताई थी. 

लॉकडाउन4,,,,दुकान खुलते ही बाजारों में उमड़ी भीड़

ग्वालियर

Lockdown 4 लागू होने के बाद अब केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लोगों को तमाम सारी रियायत दे दी गई लेकिन लोग इन रियासतों का बेजा इस्तेमाल करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं आलम यह है कि सोमवार सुबह शहर भर के बाजारों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और कहीं भी सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन नहीं हो पाया।

    लॉक डाउन तीन के खत्म होने के बाद भले ही लोग डाउन 4 लागू हो गया है लेकिन इस बार लोक डाउन फॉर में तमाम सारी सहूलियत लोगों को दी गई है इसके साथ ही व्यापारियों को भी व्यापार के लिए छूट दी गई है लेकिन यही छट अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है सोमवार को जैसे ही केंद्र सरकार की नई गाइडलाइंस जारी होने की सूचना के बाद लोग घरों से निकले तो वे सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना भूल गए आलम यह था कि शहर के कई बाजारों में लोगों को काफी सेट कर और बिना मास के घूमते हुए देखा गया वहीं व्यापारियों ने भी लॉक डाउन 4 के नए नियम की अनदेखी कर सुबह से अपनी दुकान खोल ली।

लोगों को संभालने पुलिस को करनी पड़ी कड़ी मशक्कत

सोमवार सुबह जैसे ही बाजारों में लोगों की भीड़ उमड़ना शुरू हुई वैसे ही पुलिस महकमा भी सक्रिय हो गया इसके साथ ही जिन बाजारों में लोग नियमों को तोड़ते नजर आए पुलिस ने उन्हें सबक भी सिखाया पुलिस के अनुसार लॉक डाउन में भी पिछले सभी नियम कायदे जारी रहेंगे और जो लोग इन नियमों का पालन नहीं करेंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पान मसाला बिक्री को लेकर व्यापारियों में रहा कन्फ्यूजन

Lockdown 4 के लिए तैयार नई गाइडलाइन में केंद्र सरकार द्वारा पान मसाला और बीड़ी सिगरेट की बिक्री की छूट दे दी गई है लेकिन अभी राज्य सरकारों द्वारा इस पर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है इसके कारण सोमवार को व्यापारियों में पान मसाला की बिक्री को लेकर कन्फ्यूजन रहा ऐसे में कई व्यापारियों ने तो खुलेआम इनकी बिक्री की तो कई व्यापारी चोरी छुपे ग्राहकों को माल बेचते नजर आए।

घड़ी मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक व्यापारी अभी करेंगे होम डिलीवरी

लॉक डाउन फॉर में केंद्र सरकार द्वारा जहां व्यापारियों को कई सारी दी गई हैं तो वही अभी कुछ क्षेत्रों के व्यापारियों को मार्केट खोलकर व्यापार की अनुमति नहीं दी गई विशेषकर घड़ी मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स के व्यापारी अभी सीधे ग्राहकों को दुकान से माल ना देकर होम डिलीवरी करेंगे लेकिन व्यापारियों का कहना है कि उनका माल अभी दुकानों में ही फंसा है ऐसे में उन्हें सामान निकालने के लिए शासन को दुकान खोलने की अनुमति देनी चाहिए.

स्कूल संचालकों के नाम खुला खत लिखा धैर्यवर्धन ने


भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य धैर्यवर्धन ने कोरोना विभीषिका के दौरान निजी स्कूल संचालकों से खुले खत के माध्यम से सोशल मीडिया पर मार्मिक निवेदन करते हुए दो माह की फीस न लिए जाने का आग्रह किया है । धैर्यवर्धन ने कहा कि आप बच्चों के माता पिता को अभिभावक/पालक के तौर पर न सही,
अपने परमानेंट ग्राहक मानकर ही विचार करें तो भी मदद का रास्ता निकाल सकते हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता धैर्यवर्धन ने कहा कि जैसी कन्सेशन/छूट/सहूलियत/ऑफर की व्यावसायिक परम्परा अपने कस्टमर्स को होती है, प्रति माह शुल्क जमा कराने वाले लोग भी आपकी शुभेच्छा के हकदार हैं ।

जारी प्रेस विज्ञप्ति में धैर्यवर्धन ने कहा कि आप केवल व्यवसाई नहीं है शिक्षादाता महानुभाव हैं । आप लोग भी शहर के भामाशाह हैं अतः दरियादिली दिखाकर लोगों की अवाम विद्यार्थियों की नजर में प्रेरक व्यक्तिव के तौर पर नए सिरे से उभर सकते हैं ।
व्यक्तिगत तौर पर हुई चर्चा में
कई स्कूल संचालक अंतर्मन से इस संकट काल में मदद के लिए तैयार भी हैं पर स्कूल एसोसिएशन ही इस संबंध में अंतिम निर्णय ले सकेगी ।
शायद दिल पर एसोसिएशन का दिमाग और नियम कायदा भारी है ।

भाजपा नेता धैर्यवर्धन ने पत्र में लिखा कि ईश्वर ने आपको सक्षम बनाया है ताकि आपके खुले हाथों से लोगों की मदद होती रहे ।

मैं कई स्कूल संचालकों को व्यक्तिगत तौर पर जानता हूं जो इस समय गरीब मजदूरों को भोजन आदि के प्रबंध में सेवारत टोली को आर्थिक सहयोग कर रहे हैं , अंतर्मन से आभार आपका ।

पहले आओ,
पहले पाओ की तर्ज पर इस मदद के अभियान का बढ़ चढ़कर प्रारंभ कर विद्यालय संचालकों को लोगों की दुआ बटोरनी चाहिए ।
जो स्कूल संचालक उदारता पूर्वक मार्च अप्रैल की फीस माफी की घोषणा करेंगे उनको इस सत्र में एडमिशन भी ज्यादा मिलेंगे ।
उन संस्थानों को बिन मांगे भावनात्मक सहयोगी/प्रचारक भी मिल जाएंगे सो अलग ।
मिशनरी स्कूल से मुझे उम्मीद कम ही है, अतः उसके बारे में भी अभिभावक सोचें कि क्यों हम दूसरे ज्यादा पैसे वालों की नकल में अपने बच्चों को इनके अखाड़े की भारी भीड़ में जाकर के नौनिहालों को जमा कर देते हैं !
एडमिशन देने में अहसान अलग जताते हैं। कोई कमी बताने यदि पालक जाएं तो कड़वे मुंह के साथ उल्टी नसीहत अलग लेकर लौटते हैं ।
मुस्लिम संचालक तो रोजे के दौरान इस पवित्र रमजान महीने में ऐसी उदारता का संकल्प ले ही चुके होंगे क्योंकि यह भी खुदा को खुश कर देने वाला कदम होगा ।

हर शहर में तुलनात्मक कम फी वाले कई प्रतिष्ठित स्कूल हैं जिनमें कहीं ज्यादा अच्छी पढ़ाई होती है ।
बच्चों के माता – पिता भी बाकायदा सोशल मीडिया पर उन संस्थानों को लिखित धन्यवाद भी प्रेषित करेंगे ताकि बाकी के शहर वालों को भी प्रेरणा मिल सके ।

या सद्भावना का सिद्धांत भी है,
पालकों की नैतिकता भी है
और
मेरे दिल से निकली दुआ भी है। 🙏

बुरा न मानें यह सुझाव है
आशा है कि मेरी पाती को स्कूल संचालक मित्र भी सकारात्मक ही लेंगे ।

कोरोना राहत: 21 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज में सरकार का खर्च होगा सिर्फ 1.5 लाख करोड़!

पीएम मोदी ने किया था 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज देने का ऐलान

वित्त मंत्री ने करीब 21 लाख करोड़ का पैकेज घोषित कर दिया

इसमें से सरकार की जेब से महज 1.5 लाख करोड़ जाएंगे

कोरोना से इकोनॉमी और जनता को राहत देने के लिए पीएम मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज देने का ऐलान किया था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पांच दिन लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इससे भी ज्यादा करीब 21 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा कर दी है. लेकिन जानकारों का कहना है कि इसमें से सरकार की जेब से वास्तव में सिर्फ 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे.

जीडीपी के एक फीसदी से भी कम

पीएम मोदी ने कहा था कि आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत जीडीपी के करीब 10 फीसदी के बराबर का राहत पैकेज दिया जाएगा, लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे पैकेज पर सरकार के खजाने से करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे जो जीडीपी का महज 0.75 फीसदी है.

ब्रिटिश ब्रोकरेज फर्म बार्कलेज की एक रिसर्च रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. बाकी पैसा असल में कई स्रोत से आ रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने नकदी बढ़ाने के उपाय के तहत करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये के उपायों की घोषणा की है. इसके अलावा अन्य पैकेज का हिस्सा सरकार की क्रेडिट गारंटी, भंडार से दिए जाने वाले अनाज या अन्य गैर मौद्रिक उपायों के रूप में हैं

क्या कहा गया रिपोर्ट में

बार्कलेज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, ‘सरकार का कुल वित्तीय सपोर्ट करीब 21 लाख करोड़ रुपये का है. इसमें करीब 8 लाख करोड़ रुपये का रिजर्व बैंक का सपोर्ट शामिल है. हमारा अनुमान है कि सरकार के बजट पर इसका असर महज 1.5 लाख करोड़ रुपये का होगा जो कि जीडीपी का 0.75 फीसदी है.’

पीएम ने किया था ऐलान

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई को 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया. जिसके बाद पांच दिनों में 13 से 17 मई तक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक पैकेज को अंतिम रूप दिया. उन्होंने बताया कि ये पैकेज आर्थिक रिफॉर्म के लिए है, और इससे देश की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ेगी. सरकार की ओर से नए-पुराने ऐलान को मिलाकर कुल 20,97,053 करोड़ रुपये का ब्योरा दिया गया है.

देश में COVID-19 मरीज़ों का आंकड़ा 96,169 हुआ, 24 घंटों में सबसे ज़्यादा नए मामले सामने आए

कोरोनावायरस (Coronavirus) के बढ़ते मामलों के मद्देनजर देश में लगाए गए लॉकडाउन (Lockdown 4.0) के चौथे चरण का आज पहला दिन है. इस बीच, सोमवार को भारत में Covid-19 संक्रमितों का कुल आंकड़ा 96,000 के पार पहुंच गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोरोनावायरस से अब तक 3029 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि संक्रमितों की संख्या 96,169 हो गई है. वहीं, पिछले 24 घंटों में कोरोना के 5242 नए मरीज मिले हैं और 157 लोगों की जान गई है. 24 घंटों में कोरोना के मामले में यह अब तक का सबसे बड़ा उछाल है. हालांकि, राहत की बात यह है कि 36,824 मरीज कोरोना को मात देने में कामयाब हुए हैं. रिकवरी रेट सुधर कर 38.29  प्रतिशत पर पहुंच गया है.   

डॉकडाउन का चौथे फेज आज से शुरू 
आज से कोरोनावायरस लॉकडाउन (Coronavirus Lockdown) का पहला चरण शुरू हो रहा है. लॉकडाउन का यह चरण 31 मई तक चलेगा. गृह मंत्रालय ने रविवार शाम को गाइलाइन जारी की. जिसमें बताया गया है कि चौथे चरण में क्या-क्या रियायतें दी गई है और किन पर प्रतिबंध जारी रहेगा. लॉकडाउन के चौथे चरण के दौरान दुकानें और बाजार खोलने की इजाजत दी जाएगी. स्थानीय अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि रोस्टर के अनुसार अलग-अलग समय पर दुकानें खुली रहें, ताकि सोशल डिस्टेंस सुनिश्चित हो सके. इसके अलावा, अंतरराज्यीय बसों की अनुमति दी गई है. वहीं, हवाई और मेट्रो सेवा, शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट आदि पहले ही तरह बंद रहेंगे. हालांकि, रेस्टोरेंट किचन से होम डिलीवरी की जा सकती है.

इंदरगंज थाना इलाके के रोशनी घर रोड पर हुआ हादसा मौत बनकर आई आग, सात की मौत ,कई मरणासन्न

ग्वालियर के इंदरगंज थाना इलाके के रोशनी घर रोड पर सोमवार की सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया जिसमें एक पेंट की दुकान में भीषण आग लगने से दुकान के ऊपर बने मकान में पूरा परिवार आग की चपेट में आ गया इस भीषण आगजनी की घटना में मकान में मौजूद तीन बच्चे और दो महिलाएं बुरी तरह आग में झुलस गई वही आगजनी की सूचना पर तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंच गई और कड़ी मशक्कत बाद आग पर काबू पाकर आग में झुलसे लोगों को मकान से बाहर निकालकर jah के लिए रवाना किया आगजनी कि घटना में तीन बच्चियों और एक महिला की मौत हो गई एवं एक अन्य बुरी तरह से झुलस गई फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है और पुलिस आग लगने के कारणों का पता लगा रही है।

आग लगने की यह घटना रोशनी घर रोड स्थित एक पेंट की दुकान में लगी । इसमें रासायनिक सामान भी रखा था । इस दुकान के ऊपर ही रंगवाला परिवार भी रहता है । जब तक लोग कुछ समझ पाते तब तक आग ने पूरे घर को चपेट में ले लिया ।

खबर पाने के बाद फायरब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंची और सात लोगो को निकाला गया लेकिन इनमे दो बच्चे एकदम भुने हुए निकले जबकि बाकी पांच की हालत गंभीर है । तीन लोगों के मरने की पुष्टि हुई है । कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह और एसपी नवनीत भसीन मौके पर पहुंच गए है ।

भाजपा के कद्दावर नेता गोपाल भार्गव शराब के नशे मे मस्त.

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▪सोशल मीडिया पर बायरल खबर..राजनैतिक गलियारों मे चर्चा.

राजनैतिक संवाददाता

इन्दोर।प्रदेश सरकार के प्रतिपक्ष नेता और मौजूदा सरकार में दमदार विभाग के लिए खम ठोक रहे भाजपा के कद्दावर नेता गोपाल भार्गव अपने कार्यकर्ताओं के साथ किस हद तक जमीन पर अा जाते हैं।
इसका नजारा सोशल मीडिया मे बायलर हो रही खबर मे देखने को मिला। अपने नाती पोतों की उम्र के युवाओं के साथ ही जाम छलकाने बैठ गए। इस सुरा महफ़िल का आयोजन जिस घर में किया गया, वह व्यक्ति धारा ३०७ का घोषित आरोपी है और पुलिस की नजर में फरार है।
मामला महज दो तीन दिन पुराना है। भाजपा के कद्दावर नेता गोपाल भार्गव ने अपने गृह क्षेत्र के एक गांव छल्ला में एक दारू पार्टी में शिरकत की।
पार्टी का आयोजन ग्राम छल्ला के सरपंच किशन वीर का निवास पर आयोजित की गई थी।
सूत्र बताते हैं कि किशन पिछले एक साल से धारा 307 का आरोपी है और पुलिस की नजर में वह फरार करार दिया गया है।

सरकारी कर्मचारी से लेकर युवा फोज तक
बताया जाता है कि गोपाल भार्गव की मौजूदगी वाली इस शराब पार्टी में जहां ग्राम छल्ला के सरपंच मौजूद थे, वहीं बेरखेड़ी पंचायत में पदस्थ सरकारी टीचर यशवंत लंबरदार भी चुस्कियां ले रहे थे।
इस शराब पार्टी में गोपाल भार्गव के साथ उनके नाती पोतों की उम्र के युवाओं की भी मौजूदगी थी।

▪शराब सिर पर, कार्यकर्ता पैरों में.
शराब ने जब अपना सुरूर नेता जी के माथे चढ़कर बोलना शुरू किया तो वे मुगल ए आजम की मुद्रा में अा गए और उनके हमप्याला साथी उनकी रियाया बन गए। अपने नेता के पैरों में तलुवे सहलाते हुए वे चरणावत हो गए और शराब के नशे में चूर भार्गव इन्हें आशीर्वाद से नवाजते रहे।

▪ न मास्क, न सामाजिक दूरी का ख्याल.

कोरोना वायरस के चलते प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक एहतियात बरतने की सलाह देते नजर आ रहे हैं। लेकिन गोपाल भार्गव की दारू पार्टी में इन दोनों नेताओं (जो इनकी ही पार्टी के अगुआ हैं) के इरादे, कोशिश और किए जा रहे काम बेमानी होते नजर आए। भार्गव और उनके साथियों ने न तो इस दौरान मास्क पहनकर कोई एहतियात बरतने की दलील पेश की ओर न ही सामाजिक दूरी रखने की जरूरत पर कोई ध्यान दिया।
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दिन में छूट पर रात में कर्फ्यू, मध्य प्रदेश में कुछ ऐसा होगा लॉकडाउन 4.0

भोपाल. प्रदेश की शिवराज सरकार ने लॉकडाउन 4.0 के स्वरूप को लेकर आम और बुद्धिजिवियों के सुझाव पर रोडमौप तैयार कर लिया है और इसको फाइलन करने के लिए केन्द्र सरकार के पास भेज दिया है। केन्द्र सरकार की मुहर लगने के बाद ही इसे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
प्रस्ताव में क्या है
शिवराज सरकार ने केन्द्र को जो प्रस्ताव भेजा है उसके अनुसार, संक्रमित क्षेत्र को पूरी तरह सील रखा जाएगा। इसके अलावे ग्रीन जोन में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ अधिकतर गतिविधियों को चालू करन के बात कही गई है। साथ ही रेड जोन में जहां संक्रमण नहीं है, वहां चरणबद्ध तरीके से गतिविधियां चालू करने का भी प्रस्ताव है।
12 घंटे छूट और 12 घंटे कर्फ्यू
राज्य की शिवराज सरकार ने 12 घंटे छूट और 12 घंटे कर्फ्यू का भी प्रस्ताव रखा है। इससे पहले भी राज्य सरकार लॉकडाउन एक से लॉकडाउन तीन तक इसी फॉर्मूले को ही अपनाया है। ऐसे में लॉकडाउन 4 में भी इसी फॉर्मूले पर काम करने की तैयारी कर रही है।
क्या-क्या रह सकते हैं बंद
लॉकडाउन 4 में स्कूल, कॉलेज, आंगनबाड़ी, शैक्षणिक संस्थान और भीड़ जुटने वाली जगहें पूरी तरह बंद रहेगी। बताया जा रहा है कि निजी कंपनियों में 30 फीसदी फॉर्मूले के साथ छूट मिल सकती है। इसके अलावे मॉल, रेस्टोरेंट, सिनेमाघर, टूरिज्स स्पॉट, स्वीमिंग पूल आदि फिलहाल बंद रहेंगे।
ये खुल सकते हैं
प्रदेश की शिवराज सरकार ने ग्रीन और ऑरेंज जोन में छोटे बाजार खोलने का प्रस्ताव रखा है, साथ ही कंटेनमेंट जोन वाले इलाकों में पूरी तरह पाबंदी रखने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावे ग्रीन जोन में यातायात की सुविधा बहाल करने का भी प्रस्ताव है, वहीं अन्य जोन में पूरी तरह पाबंदी रहेगी। निजी वाहनों को छूट मिल सकती है।
अंतिम निर्णय केन्द्र सरकार लेगी
शिवराज सरकार ने लॉ़कडाउन 4 का रोडमैप तैयार कर केन्द्र को भेज दिया है। हालांकि इस ड्राफ्ट पर अंतिम निर्णय केन्द्र सरकार को लेना है। उम्मीद की जा रही है कि लॉकडाउन 4 की रूपरेखा 17 मई तक जारी हो सकता है।

संत देवप्रभाकर शास्त्री दद्दाजी ने देह त्यागी, सोमवार को कटनी में होगा अंतिम संस्कार

गृहस्थ संत देवप्रभाकर शास्त्री की हालत गंभीर थी और वे वेंटीलेटर पर थेमुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त किया.

जबलपुर. गृहस्थ संत पंडित देवप्रभाकर शास्त्री दद्दाजी रविवार को ब्रम्हलीन हो गए। उन्होंने कटनी स्थित दद्दा आश्रम में रात 8.27 बजे देह त्यागी। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार थे। उन्हें 8 मई को माइनर पैरालिसिस अटैक आने पर दिल्ली ले जाया गया था। शनिवार की शाम गंगाराम अस्पताल से उन्हें छुट्टी दे दी गई। जिसके बाद उन्हें एयर एंबुलेंस से जबलपुर होते हुए कटनी लाया गया था।दद्दाजी के निधन पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर श्रद्धांजलि अर्पित की है।

दद्दाजी के अस्वस्थ होने की जानकारी लगते ही रविवार को बड़ी संख्या में दद्दा शिष्य मंडल के सदस्य कटनी पहुंचे। इनमें फिल्म जगत की हस्तियों से लेकर राजनेता और अन्य लोग शामिल थे।फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा, राजपाल यादव एवं पदम सिंह ठाकुर, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, लखन घनघोरिया, संजय पाठक एवं अर्चना चिटनिस, मुख्यमंत्री की पत्नी साधनासिंह, विधायक रमेश मेदोला, गोपाल सिंह चौहान डग्गी राजा, आलोक चतुर्वेदी, नारायण त्रिपाठी, नीरज दीक्षित, प्रद्युम्न सिंह, मुन्ना राजा सहित बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर उनके दर्शन किए। दद्दा शिष्य मंडल के प्रवक्ता वीरेन्द्र गौर ने बताया सोमवार को कटनी स्थित दद्दा आश्रम में ही उनकी पार्थिव देह पंचतत्व में सर्मपित की जाएगी।

दमोह से द्ददाजी का गहरा लगाव रहा है। दमोह के पुरा पायरा में उनकी ससुराल थी और हटा रोड पर कुआंखेड़ा में उनके मामा का परिवार था। वर्तमान में प्रोफेसर कॉलोनी में उनके बड़े बेटे व्याख्यता डॉ. अनिल त्रिपाठी परिवार के साथ रहते हैं। रिटायर्ड पीटीआई और दद्दाजी के रिश्ते में मामा ने बताया कि दद्दा जी की पत्नी कुंती देवी का 29 मार्च को निधन हो गया था। लंबे समय से द्ददा जी दमोह नहीं आए। करीब दो साल से वे कटनी में अपने निवास पर थे, कटनी के कूड़ा गांव में भी दद्दा जी का आश्रम है, वहां पर भी उनका आना जाना था।

सनातन संस्कृति के इतिहास में दद्दा जी जैसे संत दुर्लभ

पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव ने कहा कि आज परम पूज्य गृहस्थ संत श्री देव प्रभाकर जी शास्त्री जिन्हें हम सभी “दद्दा जी” के नाम से, प्रेम भाव से स्मरण करते थे, हमारे बीच नही रहें। अपने जीवन के 60 वर्ष उन्होंने गृहस्थ सन्त के रूप बितायें, जो कि सनातन संस्कृति के इतिहास में दुर्लभ है। पूज्य शास्त्री जी परम ज्ञानी, तपस्वी एवं सिद्ध पुरुष थे। उनका निधन सनातन धर्म अनुयायियों के पितृ पुरूष का प्रयाण है। वह साक्षात भगवत पुत्र थे।भार्गव ने कहा कि दद्दा जी वैसे तो वह परम शिव भक्त और कृष्ण भक्त होने के नाते स्वर्ग प्राप्ति के प्रथम अधिकारी हैं। भगवन चरणों में उनका स्थान चीर आरक्षित था। उनके सभी अनुयायियों को प्रभु यह गहन दुख सहने की शक्ति दे।