जुलाई में भारत को मिलेंगे 4 राफेल विमान, अंबाला एयरबेस पर होंगे तैनात

जुलाई के आखिरी हफ्ते में आएंगे विमान

अंबाला एयरबेस पर किया जाएगा तैनात

ऐसे समय में जब चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ सरहदों पर तनाव का सामना करना पड़ रहा है, भारतीय वायुसेना को जुलाई में बड़ी ताकत मिलेगी जब इसके बेड़े में अंबाला में राफेल लड़ाकू विमान शामिल होना शुरू हो जाएंगे.

टॉप सरकारी सूत्रों ने आजतक/इंडिया टुडे को बताया, “कोरोना वायरस के कारण कुछ हफ्तों की देरी हुई है, लेकिन अब राफेल विमान जुलाई में आने शुरू हो जाएंगे. ये हवाई युद्ध क्षमताओं में देश की फायर पावर को बढ़ाने में हमारी मदद करेंगे.”

विमान हवा से हवा में मार करने वाली मीटीअर मिसाइलों में से एक हैं और दुश्मन के विमानों को 150 किलोमीटर से अधिक दूरी पर ही मार गिराने की क्षमता रखते हैं. चीन और पाकिस्तान दोनों ही इतनी दूरी पर मिसाइल लॉन्च नहीं कर सकते हैं. राफेल अपनी बहुक्षमताओं के साथ उनके किसी भी विमान पर आसानी से हवा में निशाना लगा सकता है.

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वायु सेना के पूर्व प्रमुख बीएस धनोआ ने कहा था कि अगर राफेल भारतीय बेड़े में शामिल हो जाता है, तो पाकिस्तानी भारतीय क्षेत्र के करीब आक्रामक तरीके से आने की हिम्मत तक नहीं करेंगे.

भारत आने वाले विमानों के पहले बैच में तीन ट्रेनर और एक लड़ाकू विमान शामिल होंगे. वहीं फ्रांस के Bordeaux में दस्सू एविएशन सुविधा में अधिक विमानों का उत्पादन जारी रहेगा.

पहले बैच के चार विमान

पहले बैच के चारों विमान अंबाला एयरफोर्स बेस पर पहुंचेंगे. राफेल स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर इन्हें उड़ा कर लाएंगे. भारत ने 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर 36 राफेल विमानों के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. प्रधानमंत्री दक्षिण एशिया के आकाश में भारतीय वायु सेना की बढ़त को बरकरार रखना चाहते थे. फिलहाल, पाकिस्तान और चीन दोनों ही देश की शांति और सुरक्षा में बाधा पैदा कर रहे हैं. दोनों ही मोर्चों पर तनाव है.

पाकिस्तान की ओर से आतंकियों को भारत में भेजना जारी है. ऐसे में उरी और बालाकोट जैसे किसी भारतीय रिस्पॉन्स की संभावना को देखते हुए पाकिस्तान ने आकाश में निगरानी बढ़ा रखी है.

जहां तक चीन का सवाल है, तो चीनी सैनिक आक्रामक रूप से भारतीय सैनिकों के साथ उत्तर में लद्दाख से लेकर उत्तर पूर्व में सिक्किम तक पूरी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर उलझने की कोशिश आए दिन करते रहते हैं. LAC के पास जहां-जहां भारत अपने मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ा रहा है वहां भी चीन के आक्रामकता के साथ पेश आना अपेक्षित है. भारत ने किसी भी एयरस्पेस उल्लंघन को रोकने के लिए लड़ाकू विमान का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है.

चीन को सबक सिखाने के लिए अमेरिका का ‘प्लान 18’, भारत को लेगा साथ

कोरोना वायरस की संक्रमण से जूझ रहेअमेरिका में चीन के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है। कई अमेरिकी नेता चीन के ऊपर संक्रमण संबंधी डेटा को छुपाने और जांच में सहयोग न करने का खुलेआम आरोप भी लगा चुके हैं। इस बीच अमेरिका के एक शीर्ष सांसद ने चीन की सरकार को कोविड-19 वैश्विक महामारी का कारण बनने वाले उसके झूठ, छल और बातों को गुप्त रखने की कोशिशों के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने को लेकर 18 सूत्री योजना सामने रखी है। भारत के साथ सैन्य संबंध बढ़ाना इस योजना का एक हिस्सा है।
चीन ने जानबूझकर फैलाया वायरस
सीनेटर थॉम टिलिस ने चीनी प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि वहां की कम्यूनिस्ट सरकार ने दुर्भावनापूर्वक कोरोना वायरस को फैलाया है जिससे लाखों अमेरिकी पीड़ित हैं। यह ऐसा देश है जो अपने ही देश को लोगों को डिटेंशन कैंपों में कैद कर रही है और हमारे सहयोगियों के संप्रभुता को धमकी दे रही है।

चीन को बनाया जाए जवाबदेह
सीनेटर ने कहा कि अमेरिका के लिए यह जागने का समय है। मेरी यह योजना चीनी सरकार को कोरोना वायरस के बारे में झूठ बोलने के लिए जवाबदेह बनाएगी। इसके जरिए अमेरिकी लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा और अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान की भरपाई के लिए चीन पर प्रतिबंध भी लगाया जाएगा।

मित्र देशों से सैन्य सहयोग बढ़ाए अमेरिका

इस योजना के अंतर्गत पैसिफिक डिटरेंस इनिशिएटिव नाम के एक कार्यक्रम के शुरू करने की मांग की गई है। जिसमें 20 बिलियन डॉलर के सैन्य साजो-सामान की फंडिग भी अमेरिका की तरफ से की जाएगी। इस इनिशिएटिव के जरिए क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ सैन्य संबंधों को मजबूत किया जाएगा।

भारत को दे स्टेट ऑफ द ऑर्ट हथियार
इसके अलावा सीनेटर ने भारत, ताइवान और वियतनाम को स्टेट ऑफ द आर्ट सैन्य उपकरणों के बिक्री को मंजूरी देने की मांग भी की है। उन्होंने जापान और दक्षिण कोरिया को सेना के पुर्नगठन और घातक मिलिट्री साजो-सामान के लिए मदद देने की अपील भी की।

चीन से मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों को वापस लाएं

उन्होंने अपनी योजना में यह भी कहा है कि चीन में मौजूद सभी अमेरिकी मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों को अपने देश वापस लाया जाए। वहीं, चीन के ऊपर सामान के लिए निर्भरता को खत्म भी किया जाए। उन्होंने कहा कि हमें चीन को अपनी तकनीकी को चोरी करने से भी रोकना होगा और अमेरिकी कंपनियों को हमारे तकनीकी लाभ को हासिल करने के लिए आगे बढ़ाना होगा।

सभी देश लगाएं चीन पर प्रतिबंध
सीनेटर ने अमेरिकी राष्ट्रपति से अपील करते हुए कहा कि उन्हें अपने सहयोगी देशों से भी ऐसे ही प्रतिबंध लगाने के लिए कहना चाहिए। जिससे चीन को उसके किए की सजा मिल सके। हम मिलकर चीनी हैकर्स को भी रोके और अपनी साइबर सुरक्षा को मजबूत करें।

ट्रंप ने चीन से अमेरिकी पेंशन निधि निवेश निकाला
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि उनके प्रशासन ने चीन से अरबों डॉलर के अमेरिकी पेंशन निधि निवेश निकालने के लिए कहा है और इसी तरह के अन्य कदमों पर विचार किया जा रहा है। चीन पर बौद्धिक संपदा और अनुसंधान कार्य से जुड़ी जानकारियां चोरी करने का भी आरोप लगाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अरबों डॉलर, अरबों … हां, मैंने इसे वापस ले लिया।
एजेंसी

मुंबई, पुणे में 31 मई तक बढ़ा लाक डाउन


महाराष्ट्र ,मुंबई
देश में कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा असर महाराष्ट्र में देखने को मिला है। अब प्रदेश की उद्धव ठाकरे सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए हॉट स्पॉट इलाकों जैसे Mumbai, Pune, Malegaon, Aurangabad और Solapur में लॉकडाउन 31 मई तक बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान भी उद्धव ठाकरे ने इच्छा जताई थी कि प्रदेश के हॉट स्पॉट इलाकों में अभी लॉकडाउन में छूट नहीं दी जाना चाहिए। इसके बाद गुरुवार को भी प्रदेश के प्रमुख मंत्रियों और अधिकारियों की अहम बैठक हुई थी।

Mumbai, Pune, Malegaon, Aurangabad और Solapur में 31 मई तक लॉकडाउन रहेगा। शेष हिस्से में केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक व्यवस्था रहेगी। केंद्र की गाइडलाइन एक दो दिन में आ सकती है। पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा था कि देश में लॉकडाउन 4.0 लागू होगा, लेकिन इसका रंग-रूप अलग होगा।

WHO ने दी चेतावनी- कभी खत्म नहीं होगा कोरोना वायरस

कोरोना का कोहराम जारी है और इससे बचने के लिए अब तक कोई वैक्सीन या दवा नहीं बन सकी है. वहीं अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए पूरी दुनिया अब लॉकडाउन खोलने पर विचार कर रही है. इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि  COVID-19 हमारे आस-पास लंबे समय तक रह सकता है और यह भी हो सकता है कि यह कभी ना जाए.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक शीर्ष अधिकारी ने चेतावनी दी कि संभव है कि कोरोना वायरस हमारे साथ ही रहे. एक प्रेस ब्रीफिंग में डॉक्टर माइकल रेयान ने कहा, ‘हो सकता है कि यह वायरस कभी दूर ना जाए’. उन्होंने कहा कि वैक्सीन के बिना पर्याप्त मात्रा में इम्यूनिटी बढ़ाने में लोगों को कई साल लग सकते हैं. 

डॉक्टर रेयान ने कहा, ‘मुझे लगता है कि लोगों के सामने यह बात लाना जरूरी है. हो सकता है कि यह वायरस हमारे बीच एक और स्थानीय वायरस बन कर रह जाए, ठीक वैसे ही जैसे कि एचआईवी जैसे अन्य रोग जो कभी खत्म नहीं हो सके लेकिन इनके प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं.’

डॉक्टर रेयान ने कहा, ‘हम एक वास्तविक दुनिया में जी रहे हैं और मुझे नहीं लगता कि कोई भी यह भविष्यवाणी कर सकता है कि यह बीमारी कब तक खत्म हो पाएगी. मुझे लगता है कि इस स्थिति में कोई भी वादा करना या वायरस खत्म होने की बात कहना सही नहीं होगा. यह बीमारी लंबी भी चल सकती है और नहीं भी’.

हालांकि, उन्होंने कहा कि दुनिया ने काफी हद तक इस पर नियंत्रण करने की कोशिश की है लेकिन हमें अपने प्रयासों को और बढ़ाना होगा और कोरोना की वैक्सीन आने के बाद भी हमें यह कोशिशें जारी रखनी होंगी.

कोरोना वारस पर अब तक 100 से भी ज्यादा वैक्सीन बनाए जा रहे हैं, कई के क्लीनिकल ट्रायल भी हो चुके हैं लेकिन अब भी विशेषज्ञों को कुछ सकारात्मक नतीजे नहीं मिल पाए हैं जो कोरोना के असर को खत्म कर सकें. रेयान ने कहा कि खसरा जैसी बीमारी की वैक्सीन बनने के बाद भी इसे अब तक खत्म नहीं किया जा सका है.

वहीं WHO के डायरेक्टर  ने कहा कि  ‘इस वायरस को खत्म करने की जिम्मेदारी हम सबकी है और इस महामारी को रोकने में हम सभी को अपना योगदान देना चाहिए.

पूरी दुनिया लॉकडाउन खोलने का विचार कर रही है लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोरोना के नए मामलों को रोकने के लिए हमें बहुत सावधान रहना होगा. डॉक्टर रेयान ने कहा कि सीमाएं खोलने में उतना खतरा नहीं है जितना कि हवाई यात्राओं को शुरू करने में, जो कि एक अलग तरह की चुनौती हो सकती है.

WHO की महामारी विशेषज्ञ मारिया वान केरखोव ने ब्रीफिंग में कहा, ‘हमें अपने दिमाग में यह बिठा लेना चाहिए कि इस महामारी से बाहर निकलने में अभी कुछ और समय लगेगा.’

वैश्विक गरीबी में वृद्धि

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने पूर्वानुमान लगाया है कि कोरोना वायरस महामारी विश्व अर्थव्यवस्था को इस वर्ष 3.2 फीसदी तक घटा सकती है, जो 1930 के दशक की मंदी के बाद सबसे खराब आर्थिक गिरावट होगी. संयुक्त राष्ट्र की मध्यवर्षीय रिपोर्ट बुधवार को जारी की गई, जिसमें कहा गया है कि COVID-19 की वजह से वैश्विक आर्थिक उत्पादन में लगभग 8.5 ट्रिलियन डॉलर की कमी आने की उम्मीद है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार ये गिरावट पिछले 2 साल की सभी आर्थिक फायदों पर भारी पड़ने वाली है. संयुक्त राष्ट्र विश्व आर्थिक स्थिति और संभावना रिपोर्ट में कहा गया है कि यह महामारी गरीबी और असमानता को भी बढ़ावा देगी. इसके अलावा 2020 में करीब 3 करोड़ 40 लाख लोगों के गरीबी रेखा से नीचे जाने की संभावना है. इनमें से 56 फीसदी लोग सिर्फ अफ्रीका के हो सकते हैं.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक करीब 13 करोड़ लोग अत्यधिक गरीब श्रेणी में शामिल हो सकते हैं, जो गरीबी और भूख को मिटाने के वैश्विक प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है.

वैज्ञानिकों ने किया आगाह

इससे पहले कई वैज्ञानिक इस बात को लेकर चेतावनी जारी कर चुके हैं कि कोरोना वायरस अपना रूप बदल रहा है जो पहले से ज्यादा खतरनाक हो सकता है. वैज्ञानिकों का दावा है कि कोरोना का यह नया रूप अपने वास्तविक रूप से कहीं ज्यादा संक्रामक हो सकता है. अमेरिका के Los Alamos National Laboratory के वैज्ञानिकों ने एक नई स्टडी में इस बात का जिक्र किया है. 

शोधकर्ताओं ने लिखा है कि कोरोना का नया रूप फरवरी में सबसे पहले यूरोप में दिखाई दिया, जो जल्दी ही अमेरिका और फिर मार्च तक दुनिया भर में फैल गया. रिपोर्ट में इस बात की भी चेतावनी दी गई है कि तेजी से फैलने के अलावा यह वायरस लोगों को इतना कमजोर बना सकता है कि उन्हें दोबारा इंफेक्शन भी हो सकता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव कोरोना वायरस के बाहरी हिस्से के स्पाइक में हो रहा है, जो श्वसन कोशिकाओं को अपना निशाना बना है. रिपोर्ट के लेखकों का कहना है कि उन्हें प्रारंभिक चेतावनी देने की जरूरत महसूस हुई ताकि दुनिया भर में बन रहे कोरोना की वैक्सीन और ड्रग, वायरस के इस बदलते रूप को ध्यान में रख कर बनाई जाएं.

यह रिपोर्ट जर्मनी के संगठन ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर शेयरिंग ऑल इन्फ्लुएंजा डेटा द्वारा इकट्ठा किए गए दुनिया भर के 6,000 से अधिक कोरोना वायरस के मामले के कम्प्यूटर विश्लेषण पर आधारित है. इस विश्लेषण में हर बार यही पाया गया कि कोरोना का नया स्वरूप पुराने पर हावी हो चुका है.

भारत को तेवर दिखाना PAK को पड़ रहा भारी, विरोध में उतरीं दवा कंपनियां

पाकिस्तान भारत से दुश्मनी निभाने के चक्कर में खुद ही तमाम मुश्किलों में फंस गया है. अगस्त महीने में जब नरेंद्र मोदी सरकार ने कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किया तो पाकिस्तान ने भारत के साथ व्यापार पर पूरी तरह से बैन लगाने जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया. कोरोना वायरस की महामारी के दौर में अब पाकिस्तान की ही दवा कंपनियां अपनी सरकार को भारत से आयात बैन करने को लेकर आगाह कर रही हैं.

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान में भारत से दवाओं के आयात को लेकर हंगामा मचा हुआ है. भारत से व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के कुछ दिनों बाद ही पाकिस्तान ने जीवनरक्षक दवाओं के आयात को लेकर छूट दे दी थी. हालांकि, जीवनरक्षक दवाओं की आड़ में भारत से विटामिन्स से लेकर सरसों का तेल भी मंगाया जाने लगा. जब ये बात सामने आई तो पाकिस्तान की सरकार सवालों के घेरे में आ गई. विवाद बढ़ने पर पाकिस्तान की सरकार ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. हालांकि, पाकिस्तान सरकार की संभावित कार्रवाई को लेकर वहां की फार्मा इंडस्ट्री में खलबली मच गई है.

पाकिस्तान की फार्मा मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन ने सरकार को चेतावनी दी है कि भारत के कच्चे माल पर भारी निर्भरता को देखते हुए इसके आयात पर बैन लगाने का कदम ना उठाया जाए. एसोसिएशन ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो दवाओं के उत्पादन में 50 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ेगा. इससे ना केवल पाकिस्तान में दवाओं की किल्लत होगी बल्कि कोरोना वायरस से देश की लड़ाई भी कमजोर पड़ जाएगी.

फार्मा एसोसिएशन (पीपीएमए) के वाइस चेयरमैन सैय्यद फारूक बुखारी ने कहा कि जब देश में कोरोना वायरस के मरीज बढ़ रहे हैं तो केंद्रीय कैबिनेट को भारत या किसी भी दूसरे देश से दवाओं और उसके लिए जरूरी कच्चे माल के आयात को बैन करने जैसा कोई फैसला नहीं लेना चाहिए.

बुखारी ने कहा, ऐसे वक्त में जब केंद्र और प्रांतीय सरकारें देश में बढ़ते कोरोना के मामलों से निपटने के लिए ज्यादा से ज्यादा क्वारंटीन सेंटर्स, आइसोलेशन फैसिलिटी और अस्पतालों में विशेष वार्ड बनाने में जुटी हुई है, तो कोरोना मरीजों के लिए जरूरी दवाओं की आपूर्ति भी सुनिश्चित किए जाने की भी सख्त जरूरत है. उन्होंने कहा, कोरोना से निपटने के लिए पाकिस्तान की फार्मा इंडस्ट्री को अपनी पूरी क्षमता से दवाओं का उत्पादन करना होगा लेकिन इसके लिए अंतरराष्ट्रीय क्लाइंट से कच्चे माल की आपूर्ति जारी रखनी होगी.

उन्होंने कहा, भारत से फार्मा उद्योग के लिए जरूरी कच्चे माल का आयात तमाम नियामक संस्थाओं और प्रशासन की निगरानी में किया जा रहा था. भारत से आयात को वाणिज्य मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) से भी मंजूरी मिली थी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस सप्लाई चेन को बाधित किया जाता है तो इससे पाकिस्तान में कोरोना वायरस के इलाज पर बेहद बुरा असर पड़ेगा.

पीपीएमए के पूर्व चेयरमैन डॉ. केसर वहीद ने भी सरकार को आगाह किया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में 95 फीसदी ड्रग (दवा) उत्पादन दूसरे देशों से लाए गए कच्चे माल पर निर्भर है. इसमें से भारत की हिस्सेदारी 50 फीसदी है जबकि बाकी चीन और कुछ यूरोपीय देशों से भी आयात किया जाता है. भारत से बहुत कम रेडीमेड दवाएं आती हैं, इनमें वैक्सीन इत्यादि शामिल हैं. 

उन्होंने कहा, भारत से दवा आयात के पूरे मामले को सरकार के सामने ठीक तरह से पेश नहीं किया जा सका. स्वस्थ शरीर और मन के लिए सभी दवाइयां जरूरी होती हैं. विटामिन्स भी दूसरी दवाओं की तरह ही जरूरी हैं क्योंकि उनकी कमी से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

पाकिस्तान की संसद में विपक्षी दल इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री इमरान खान पर हमलावर हैं. पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के सेक्रेटरी जनरल नैय्यर हुसैन बुखारी ने कहा कि भारत से व्यापार बैन के बावजूद अरबों रुपये की दवाइयों के आयात कराने की संसदीय समिति द्वारा जांच होनी चाहिए. बुखारी ने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है. 

इससे पहले, पाकिस्तान की मुस्लिम लीग-एन (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष शहबाज शरीफ भी दवाओं के घोटाले को लेकर संसदीय समिति से जांच की मांग कर चुके हैं. विपक्षी नेता ने कहा कि अगर उनकी सरकार के दौरान ऐसा कुछ होता तो इमरान खान ने उनकी सरकार के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा कर दिया होता.

समाजवादी आन्दोलन में महिलाओं का अमूल्य योगदान।


एड. आराधना भार्गव
कांग्रेस समाजवादी दल के स्थापना सन् 1934 में हुई थी, जो कि भारत का एक राजनैतिक दल था। समाजवाद एक आर्थिक सामाजिक दर्शन है। समाजवादी व्यवस्था में धन-सम्पत्ति का स्वामित्व और वितरण समाज के नियंत्रण के अधीन रहते है। समाजवाद निजी सम्पत्ति पर अधारित अधिकारों का विरोध करता है। 17 मई 1934 को समाजवादियों का एक सम्मेलन पटना में सम्पन्न हुआ, जिसकी अध्यक्षता आचार्य नरेन्द्रदेव ने की और संयोजन जयप्रकाश नारायण ने किया। कांग्रेस समाजवादी दल ने अपना अपना संविधान औन नियमावली बनाने के लिए 21 सदस्यों की एक कमेटी बनाई जिसमें कमलादेवी चट्टोपाध्यजी भी थी। किसी भी सरकार के नकेल कसने के लिए विपक्ष का मजबूत होना बहुत जरूरी होता है। लोकतंत्र में यह माना जाता है कि यदि विपक्ष कमजोर पड़ जाता है तो सरकार निरंकुश हो जाती है। आज के परिवेश में विपक्ष की भूमिका हम समाजवादियों को निभानी होगी क्योकि विपक्ष में बैठी कांग्रेस को सुप्त अवस्था में पड़ी है।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भी अहम् भूमिका थी। मैं आज आपसे उनमें से कुछ स्वतंत्रता संग्राम महिलाओं के सम्बंध में चर्चा करूंगी।
कमलादेवी चट्टोपाध्याय –
कमलादेवीजी का जन्म 03 अप्रैल 1903 में कर्नाटक के मंगलौर के एक ब्राम्हाण परिवार में हुआ था, इनके पिता मंगलौर के डी.एम. याने कलेक्टर थे, माँ भी बहुत विदुशी महिला थी। और दादी को भारतीय संस्कृति का अच्छा ज्ञान था। 07 वर्ष की उम्र में कमलादेवीजी के पिता का देहांत हो गया और मुसीबतों का पहाड़ परिवार पर टूट पड़ा। स्कूली शिक्षा उन्होंने मंगलौर से ली थी, 14 वर्ष की उम्र में उनका बालविवाह करवा दिया गया। 2 वर्ष पश्चात् उनके पति का देहांत हो गया। जो उम्र खेलन और पढ़ने की थी स्कूली शिक्षा के दौरान ही वे विधवा हो गई। 1919 में कमलाजी विधवा हुई और उसी वर्ष में उनकी मुलाकात सरोजनी नाईडू के भाई हरीन्द्रनाथजी से हुई, मुलाकात दोस्ती में बदली, दोस्ती प्यार में बदली, और प्यार के पश्चात् कमलाजी ने अपनी पसंद से हरीन्द्रनाथ उपाध्यायजी से दूसरा विवाह कर लिया। एक तो ब्राम्हण, दूसरा विधवा, तीसरा मनपसंद विवाह, परिवार और समाज इसके लिए कतई तैयार नही था, किन्तु परिवार एवं समाज की परवाह ना करते हुए अपने अरमानों के पंख लगाकर कमलादेवी जी अपने पति हरीन्द्रनाथ उपाध्यायजी के साथ लन्दन चली गई। हरीन्द्रनाथजी लेखक, कवि तथा रंगकर्मी थे। कमलादेवीजी ने लन्दन में लन्दन विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र का डिप्लोमा प्राप्त किया। 4 पुस्तकें लिखी, फिर उन्होंने फिल्मों में अपना भाग्य अजमाना चहा। उस समय फिल्मों में महिलाओं का काम करना समाज अच्छा नही मानता था। कमलाजी ने जो पहली फिल्म में नाईका के बतौर भूमिका निभाई थी वह मूक फिल्म थी। उन्होंने 4 फिल्मों में काम किया शिव-पार्वती तथा तानसेन जैसी फिल्में तो बहुत चली। मेरे नानाजी जो ईटारसी के जाने माने डाॅक्टर जमुना दुबे कमलादेवीजी जैसे नाईका के प्रसंशक थे, तानसेन फिल्म का गाना ‘‘जब दिल ही टूट गया हम जी के क्या करेगें’’ गाना गुनगुनाते हुए सुनती थी। कमलाजी का जीवन आराम से गुजर रहा था।
कमलाजी को लन्दन में ही खबर लगी कि भारत में गांधीजी का अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आन्दोलन चल रहा है, और उन्हें लगा देश की आजादी के लिए उन्हें गांधी जी का साथ देना चाहिए और वे 1923 से गांधी जी से जुड़ गई। उन्होंने पुनः अपने देश भारत लौटने का मन बनाया। वैवाहिक सुख को त्याग कर देश की आजादी के लिए अपना जीवन लगाना उचित समझा। भारत आने पर उन्होंने राष्ट्रसेवा दल तथा गांधीवादी संस्थाओं के साथ काम करना शुरू किया। वे गांधीजी के पास पहुँची तब गांधीजी का सविनय अवज्ञा आन्दोलन चल रहा था। उन्होंने गांधीजी से कहा देश की आजादी के आन्दोलन में महिलाओं की भूमिका अहम् है और आप आन्दोलन में महिलाओं के शामिल होने की अनुमति दें। गांधीजी तैयार हुए और नमक बनाने के कानून को तोड़ने वाले आन्दोलन में संख्य महिलाओं के साथ कमलादेवीजी आन्दोलन में कूद पड़ी। नमक आन्दोलन में उन्होंने बाम्बे स्टाक एक्सचेन्ज के बाहर महात्मा गांधी की जय बोलते हुए नमक बेचा, इस पर उनकी गिरफ्तारी हुई, तो हाईकोर्ट के जज के सामने उन्होंने कहा कि हमने जो नमक बनाया है वह आपको भी खरीदना चाहिए। देश के आजाद होने के बाद कमलादेवी चट्टोपाध्यायजी शरणार्थीयों को बसाने में लगी थी। और फरीदाबाद शहर उनके द्वारा ही बसाया गया है। महिलाओं की आजादी के लिए उन्होंने आॅल इण्डिया वुमेन काॅन्फ्रेस की स्थापना किया और इस दौरान उन्होंने कई यूरोपियन देशों की यात्रा की, जिस समय नारी अधिकार जैसे शब्दों को लोगों ने जाना भी नही था उस पर उन्होंने काम किया। महिलाओं को आर्थिक स्वावलम्बी बनाने के लिए उन्होंने देश के कोने कोने में घूमकर हस्तशिल्प, हाथकरघा को तलाशा वा समझा इसके लिए आर्थिक सहयोग जुटाने के लिए सहकारिता का सहारा लिया। जब वे बुनकरों और हस्तशिल्पी के बीच से गुजरती थी, तो वे लोग अपनी पगड़ी उनके पैरों पर रखते थे और उन्हें हथकरघा माँ कहते थे। उन्होंने विभिन्न देशों की यात्रा की तथा हाथकरघा, मिट्टी के बर्तन, मूर्तिकला, धातु निर्माण, खिलौने बनाने आदि का अध्ययन किया, उन्होंने बुनकरों के उत्पादों का विपणण करने और उन्हें ़ऋण प्रदान करने के लिए सहकारी संघ का गठन किया। बुनकरों तथा हस्तशिल्पीयों का उत्साह वर्धन करने के लिए कई पुरूस्कारों की स्थापना करवाई। राज्य सरकारों से बिचैलियों को बाहर निकालने के लिए बुनकरों एवं हस्तशिल्पियों के बिक्री केन्द्र खोलने का आग्रह किया। उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, संगीत नाटक अकदमी और इंण्डिया इंटरनेशनल सेंटर जैसी मशहूर संस्थाओं की स्थापना की।
राजनीति में भी उन्होंने अपना भाग्य अजमाना चहा। 1958 में मद्रास से उन्होंने विधान सभा का चुनाव लड़ा ये बात अलग है कि वे चुनाव हार गई। उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण तथा मेग्नेसेस पुरूस्कार से भी सम्मानित किया गया। कमलादेवी चट्टोपाध्याय जी ने देश की स्वतंत्रता के लिये अपना योगदान तो दिया ही साथ में महिलाओं के लिए उनके द्वारा दिखाये गये रास्ते, यह राष्ट्र कभी भी भूल नही सकता। कमलादेवी चट्टोपाध्यज जी की आज इस देश को बहुत अधिक अवश्यकता है भारत और पकिस्तान के विभाजन के पश्चात् जो स्थिति शरर्णाथियों की थी उससे बत्तर स्थिति आज प्रवासी मजदूरों की है। प्रवासी मजदूरों को बसाने तथा उनके लिये रोजगार के साधन उपलब्ध कराना हम समाजवादियों की जिम्मेदारी है। और इस पथ पर में मेधापाटकरजी, गीता अम्मा, माधुरी बहन, सुनिति ताई को चलते हुए देख रही हूँ।
अरूणा आशिफ अली-
अरूणा जी का जन्म हरियाणा में एक ब्राम्हण परिवार में हुआ था। उनकी शिक्षा नैनीताल में हुई क्योकि उनके पिता की होटल नैनीताल में था। वे पढ़ाई लिखाई में बहुत चतुर थी बुद्धि के बल पर ही उन्होंने अपनी पहचान बनाई थी, बाल्यकाल से ही कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करती थी। शिक्षा पूरी करने के बाद वे कलकत्ता में गोखले मेमोरियल काॅलेज में अध्यापिका के बतौर काम करने लगी। पिता के साथ वे इलहाबाद आई जहाँ उनकी मुलाकात आशिफ अली जी से हुई, जो की कांग्रेस के नेता थे साथ ही वकील भी थे। शहीद भगतसिंगजी के प्रकरण की पैरवी आशिफ अलीजी ने ही की थी। अरूणा जी की दोस्ती आशिफ अली जी से हुई दोस्ती प्यार में बदली और प्यार शादी में। आशिफ अलीजी अरूणा जी से 23 साल बड़े थे, तथा मुस्लिम थे, अतः अरूणा जी के पिताजी इस शादी के लिए तैयार नही हुए, किन्तु अरूणा जी ने इसकी कोई परवाह नही की, और आशिफ अलीजी के साथ विवाह कर अपना वैवाहिक जीवन शुरू किया। पति की प्रेरणा से वे देश की आजादी के आन्दोलन में कूद पड़ी। सन् 1930, 1932, 1941 के दौरान वे कई बार जेल गई और जेल की यातनाऐं झेली। जब वे जेल के अन्दर होती थी तो कैदियों के साथ होने वाले अत्याचार के खिलाफ उन्होंने भूख हड़ताल की और कैदियों के हक में कानून बनाने के लिए सरकारों को बाध्य किया, जिससे कैदियों को बहुत राहत मिली। जब वे जेल से छुटकर आई तो उन्हें 10 साल के लिए आन्दोलन से अलग कर दिया गया। ब्रिटिस सरकार ने उन पर आवारा होने का अरोप लगाया और उन्हें 1 साल की सजा सुना दी।
सन् 1941 के पूर्व तक भारत के लोग उन्हे बहुत अच्छे से नही जानते थे, लेकिन 1942 के ‘‘अंग्रेजों भारत छोड़ों’’ आन्दोलन में देश के सभी नेता गिरफ्तार हो गए और अंग्रेज यह सोच बैठे कि भारतीयों का यह आन्दोलन अब खत्म हो गया है। तब अरूणा जी स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन की एक बड़ी नाईका के तौर पर उभरी, और उन्होंने बम्बई के गोबालिया टेंक मैदान में कांग्रेस का झण्डा फहराया। इसके परिणाम स्वरूप देश के नवजवानों में देश की आजादी के लिये कुर्बान होने की एक लहर पैदा हुई। 1942 से 1946 देश भर में सक्रिय रही। अरूणाजी को पकड़ने के लिए पुलिस ने बहुत प्रयास किये, परन्तु वे पुलिस के हाथ नही लगी, भूमिगत होकर उन्होंने देश की आजादी के लिए आन्दोलन चलाया। उनकी गिरफ्तारी के लिए सरकार ने 5000/- रूपये ईनाम की घोषणा की, उनकी सम्पूर्ण सम्पत्ति नीलाम कर दी, उसके पश्चात् भी उन्होंने अपनी गिरफ्तारी नही दी। जब उनका गिरफ्तारी वारेंट जारी हुआ और उनका स्वास्थ्य अत्यधिक खराब रहने लगा, तब महात्मा गांधी ने उन्हें समर्पण की सलाह दी। 1958 में वे दिल्ली की मेयर चुनी गई, और उस दौरान उन्होंने दिल्ली वासियों के लिए स्वास्थ्य, सफाई तथा पानी की उत्तम व्यवस्था की। इसके बाद राजनीति से उनका मन उचट गया।
उन्हें लेनिंग पुरूस्कार, पद्म भूषण, पद्म विभूषण तथा ज्वाहर लाल नेहरू जैसे पुरूस्कारों से सम्मानित किया गया। मारणोपरांत उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
1960 में उन्होंने एक मीडिया पब्लिक हाऊस की स्थापना की। आज हमें अरूणा जी जैसी महिलाओं की आवश्यकता है, क्योकि प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रश्न चिन्ह् खड़ा है।
डाॅ. उषा मेहता –
उषा जी का जन्म गुजरात में सूरत जिले के सरसगांव छोटे से कस्बे में हुआ था। इनके पिताजी ब्रिटिस सरकार में जज थे। उषा जी जब 7 वर्ष की थी तभी उनकी मुलाकात गांधीजी से हो गई थी। बाल नेता के तौर पर उनकी पहचान बनी थी। गांधीजी के विचारों से वे बहुत प्रभावित थी, और गांधीजी के हर कैम्प में उपस्थित रहती थी। उन्होंने शान और शौकत की जिन्दगी छोड़कर एक आदर्श और साधारण तरीके से जीवन जीना पसन्द किया था। एक बार का किस्सा है उनके पिता ने उन्हें आगे की पढ़ाई करने के लिए कहा तो, उन्होंने कहा अभी पढ़ाई में पैसा खर्च करने की जरूरत नही है, यह पैसा देश के आन्दोलन के लिए आवश्यक है। 1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ों आन्दोलन के दौरान देश के सभी नेता गिरफ्तार कर लिये गये। सरकार ने सभी रेडियों के प्रसारण पर रोक लगा दी। सरकार का ईरादा स्पष्ट था कि देश के आजादी के आन्दोलन के खबर देश की जनता तक ना पहुँचे। उस वक्त उषा मेहताजी ने गुप्त रहकर खुफिया कांग्रेस रेडियों की स्थापना की उनके इस काम में डाॅ. राम मनोहर लौहिया जी ने बहुत सहयोग दिया। 41.72 बेंड पर रेडियों का प्रसारण होता था। सबसे पहला प्रसारण उषा मेहता जी के आवाज में हुआ। अंग्रेज रेडियों का प्रसारण बन्द ना करवा दे तथा उषा मेहता जी की गिरफ्तारी ना हो जाए इससे बचने के लिए हर बार रेडियो का स्थान बदल दिया जाता था। रेडियों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के भाषण तथा संदेश का प्रसारण हिन्दी तथा अंग्रेजी में सुबह, शाम होता था। इस रेडियों से 88 प्रसारण किये गए उसके बाद उषा मेहता जी के गिरफ्तारी हो गई। उन्होंने 1941 में कानून की पढ़ाई की और आगे अध्ययन के लिए अमेरिका चली गईं। 1928 में साईमन वापस जाओं के नारे ने उन्हें नेता की पहचान दी। उन्होंने कई पुस्तकें लिखी। गांधीजी के सामाजिक और राजनैतिक विचारों पर उन्होंने पी.एच.डी. किया और डाॅ. की उपाधि प्राप्त की इसके बाद वे डाॅ. उषा मेहता कहलाने लगी।
आज इस देश को अपनी ही चुनी हुई सरकार के खिलाफ लड़ने तथा देश की प्राकृतिक सम्पदा जल, जंगल, जमीन के लूट के खिलाफ आवाज उठाने की आवश्यकता है। ताकि इस देश की जनता तक प्राकृतिक संसाधनों की लूट की खबर पहुँच सकें। और देश की जनता पूंजीपति को छूट और किसानों की लूट के खिलाफ अपनी अवाज बुलंद कर सके।
एड. आराधना भार्गव
प्रदेश उपाध्यक्ष
किसान संघर्ष समिति
पता:- 100 बी, वर्धमान सिटी, छिन्दवाड़ा म.प्र., मोबा. 9425146991, मेल abhargava45@gmail.com

कोरोना संकट पर PM मोदी ने बिल गेट्स से की बात, वैक्सीन तैयार करने पर भी हुई चर्चा

नई दिल्ली.  कोरोना वायरस (Coronavirus) के बढ़ते संक्रमण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi ) ने माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और गेट्स फाउंडेशन के प्रमुख बिल गेट्स (Bill gates) से बातचीत की है. ये लंबी बातचीत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई. पीएम मोदी ने इस दौरान कोरोना से लड़ने के लिए उनके सुझाव भी मांगे. साथ ही उन्हें ये भी बताया कि भारत कैसे कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है. इसके अलावा कोरोना की वैक्सीन पर भी बातचीत हुई.

दोनों ने सहयोग की बात की

वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सह अध्यक्ष बिल गेट्स ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि वैश्विक प्रयासों में योगदान करने की भारत की इच्छा और क्षमता को देखते हुए, ये महत्वपूर्ण है कि महामारी को लेकर प्रतिक्रिया के समन्वय के लिए वैश्विक चर्चा में नई दिल्ली को शामिल किया जाए. मोदी ने स्वास्थ्य संकट के खिलाफ लड़ाई में भारत द्वारा अपनाए गए सचेत दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया.

वैक्सीन तैयार करने पर भी हुई चर्चा

प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘बिल गेट्स के साथ विस्तार से बातचीत की. हमने कोरोना वायरस से लड़ने में भारत के प्रयास से लेकर, कोविड-19 से निपटने में गेट्स फाउंडेशन के काम, प्रौद्योगिकी, नवाचार की भूमिका और बीमारी के इलाज के लिए टीके के उत्पादन तक के मुद्दों पर चर्चा की. ‘

पीएम ने बताया कोरोना से कैसे लड़ रहा है भारत

सरकारी बयान में कहा गया कि भारत का दृष्टिकोण उचित संदेश के माध्यम से लोगों को शामिल करने पर आधारित है. मोदी ने बताया कि कैसे जन केंद्रित दृष्टिकोण ने भौतिक दूरी को स्वीकार करने, अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे कर्मियों के लिए सम्मान, मास्क लगाना, उचित स्वच्छता रखना और लॉकडाउन के प्रावधानों का आदर कराने में मदद की.

काम आए पिछले कदम

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि सरकार की पिछली विकास संबंधी कुछ पहल जैसे कि वित्तीय समावेशन का विस्तार, स्वास्थ्य सेवाओं की अंतिम पायदान तक आपूर्ति को मजबूत करना, स्वच्छता को लोकप्रिय बनाना, लोगों की प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए भारत के आयुर्वेदिक ज्ञान के इस्तेमाल ने महामारी के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया की प्रभावशीलता को बढ़ाने में मदद की.

पीएम ने की तारीफ

मोदी ने गेट्स फाउंडेशन द्वारा भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में किए जा रहे स्वास्थ्य संबंधी कार्यों की सराहना की, जिसमें कोविड-19 के खिलाफ वैश्विक प्रतिक्रिया का समन्वय शामिल है.

ग्वालियर में बढ़ता संक्रमण / ग्वालियर में 6, भिंड में 2 और पॉजिटिव, ग्रीन जोन में शामिल दतिया में भी कोरोना, पहली बार 4 मरीज मिले

ग्वालियर. कोरोना संक्रमण के मामले में ग्वालियर-चंबल संभाग में अब तक अछूता रहने से ग्रीन जोन में शामिल दतिया जिला भी अब संक्रमण की चपेट में आ गया है। गुरुवार को आई रिपार्ट में यहां पहली बार चार कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके साथ ही ग्वालियर में 6 आैर भिंड में 2 नये मरीज मिले हैं। ग्वालियर में पाये गये नये मरीजों में से तीन तो मुंबई से शहर में आये हैं। जबकि गोमती की फड़ी क्षेत्र में रहने वाली एक युवती तो अपने घर से बाहर तक नहीं निकली लेकिन उसकी रिपोर्ट भी पॉजिटव है। उधर मुरार के बंधा गांव में भी एक आैर संक्रमित मिला है। इस परिवार के दो सदस्य पहले से ही कोरोना की चपेट में आने के कारण सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती हैं। इस परिवार के कुछ सदस्य हाल ही में अहमदाबाद से लौटे हैं।
उधर दतिया छह मई को अहमदाबाद से लौटे सिरसा गांव के तीन लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इन लोगों के सैंपल तब लिए गए थे, जब इनके साथ आए बेहट के दो लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। अहमदबाद से सिरसा के दस लोग लौटे थे। इनमें से तीन के अलावा शेष की रिपोर्ट निगेटिव आई है। हालांकि इनके संपर्क में आए अन्य लोगों को पहले ही क्वारेंटाइन कर दिया गया था। इधर, मुंबई से लौटा दतिया के भलका गांव का एक युवक अाैर पाॅजिटिव पाया गया है। हालांकि वह अपने गांव तक नहीं पहुंच पाया था।
वहीं भोपाल में गुरुवार को 27 नए कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इनमें चार सुभाष नगर इलाके से हैं और तीन एक ही परिवार के हैं। क्षेत्र नया कंटेनमेंट जोन बन गया है। बुरहानपुर में 14, उज्जैन में 10, धार में 7, झाबुआ में 5, सागर में 4 नए मरीज मिले हैं।

संक्रमण की चपेट में आई युवती तो लाॅकडाउन के बाद घर से बाहर ही नहीं निकली

. दीपा कुंदवानी (26): गोमती की फड़ी निवासी युवती के गले में दर्द की समस्या थी। 12 मई को माधव डिस्पेंसरी में चेकअप के बाद सैंपलिंग कराई। सैंपल देने के बाद वापस घर चली गई। इसके अलावा वह घर से बाहर नहीं निकली।

. रामजीलाल (44) मुंबई के सेनापति बापट मार्ग स्थित हनुमान जी के मंदिर में पुजारी रामजीलाल व चेंबूर स्थित निजी बैंक में कार्यरत राजेश 12 मई को सड़क मार्ग से ग्वालियर पहुंचे। माधव डिस्पेंसरी में उनके सैंपल लिए गए। इसके बाद उन्हें मकोड़ा रोड स्थित छात्रावास में क्वारेंटाइन किया गया।

. सविता (22): मुरैना के अंबाह की रहने वाली हैं। वह केआरएच में भर्ती थीं। डिलीवरी के पहले उनका सैंपल लिया गया था। जिसमें वह पॉजिटिव निकलीं।

. नितिन श्रीवास (34): गंजी वाला मोहल्ला निवासी 12 मई को पत्नी व बेटी के साथ ग्वालियर आया। सैंपल देने के बाद गंजीवाला मोहल्ला स्थित ससुराल में रह रहा था। निजी कंपनी में काम करता है।
. रिंकू (20): बंधा निवासी कुछ दिन पहले दिल्ली से परिवार के अन्य लोगों के साथ ग्वालियर आया था। अन्य परिजन की कोरोना रिपोर्ट पाॅजिटिव आने के बाद रिंकू का भी सैंपल लिया गया था। 
. योगेश (24): नयापुरा, अजयपुर निवासी बहन, जीजा व उनके बच्चों के लेने मंदसौर गया था। 13 मई को सैंपल लिया गया था। शुक्रवार को उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

12 दिन तक नया मरीज नहीं मिला ताे ही रेड जाेन से बाहर आ सकेगा ग्वालियर

ग्वालियर रेडजाेन से तभी बाहर हाे सकेगा जब अगले 12 दिन काेई नया केस नहीं मिलेगा। लेकिन ऐसा होना संभव होता नहीं दिख रहा। वजह ये है कि बाहर से आने वाले लोगों के संक्रमित पाए जाने का खतरा बना हुआ है। इनमें भी रेड जोन से आने वाले लोग सबसे अधिक संक्रमित हैं। इस कारण प्रशासन ने सैपलिंग का फोकस भी इन्हीं पर बना रखा है।

रेडजोन से आ रहे लोगों के कारण बढ़ा संक्रमण

ग्वालियर में रेड जोन से आ रहे लोगों के पॉजिटिव मिलने के कारण मरीज बढ़ गए हैं। गुरुवार को भी तीन पॉजिटिव मुंबई से लौटे। इससे पहले दिल्ली, अहमदाबाद, भाेपाल, इंदाैर से लाैटे लाेगाें में संक्रमण पाया गया है। लगातार बाहर से अा रहे मजदूर भी संक्रमित मिल रहे हैं।

▪कल16मई को 250 किसान संगठन मनाएंगे”किसान सम्मान दिवस”

इन्दोर। किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ.सुनीलम ने बताया कि 250 किसान संगठनों के मंच 'अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति' द्वारा देश भर में कल 16 मई को सुबह 9 बजे किसान सम्मान दिवस मनाया जाएगा।

डॉ सुनीलम ने कहा कि कोरोना काल में किसानों ने जब देश भर में लॉकडाउन जारी है,तब अपनी जान हथेली पर रखकर खेती किसानी का काम जारी रखा जिसके चलते देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई है । किसानों को अपनी उपज सब्जियां एवं दुध बहुत कम दामों में बेचना पड़ा ,लाखों किसानों की फसल खेत में ही बर्बाद हो गई तथा दुध खराब हो गया ।
डॉ.सुनिलम ने कहा कि किसानों का योगदान का सम्मान करते हुए किसानों के कर्जे माफ करने तथा किसानों की फसलें समर्थन मूल्य पर खरीदने के लिए पैकेज की घोषणा करनी चाहिए थी,इसके साथ साथ सब्जी पैदा करने वाले किसानों और दुग्ध उत्पादक किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार को पैकेज देना चाहिए था। सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है ,इसके बावजूद किसान खेती करने में गर्व महसूस करता है तथा 135 करोड़ देशवासियों के लिए अनाज उत्पादन करता है।
डॉ.सुनीलम ने कहा कि कल 16 मई को “गर्व से कहो मैं किसान हूँ “के नारे के साथ किसान अपने खेतों में या घरों में कृषि उपकरणों एवं राष्ट्रीय ध्वज या संगठन ध्वज के साथ नारा लगाते हुए खड़े होंगे । इस अवसर पर किसानों का सम्मान भी किया जाएगा ।
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