गुना: भीषण सड़क हादसे में गयी 8 मजदूरों की जान, 55 घायल

गुना (guna) के कैंट थाना इलाके के पास रात करीब ढाई बजे ये हादसा हुआ. टक्कर इतनी ज़बरदस्त थी कि 8 मजदूरों (labours) की वहीं मौके पर मौत हो गयी

गुना के नज़दीक एक भीषण सड़क (road accident) हादसे में 8 मजदूरों (labours) की मौत और करीब 55 घायल हो गए. ये हादसा कंटेनर और यात्री बस की आमने-सामने की टक्कर से हुआ. सभी मज़दूर कंटेनर में सवार थे. सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अफसर मौके पर पहुंच गए और घायलों को तुरंत ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया. मृतकों की फिलहाल पहचान नहीं हो पायी है. बस इतना पता चला है कि सभी उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे और महाराष्ट्र से लौट रहे थे.

गुना के कैंट थाना इलाके के पास रात करीब ढाई बजे ये हादसा हुआ. यात्री बस और कंटेनर में ज़बरदस्त टक्कर के बाद चीख-पुकार मच गयी. टक्कर इतनी ज़बरदस्त थी कि 8 मजदूरों की वहीं मौके पर मौत हो गयी. इस दुर्घटना में 55 मजदूर घायल हो गए. सभी मजदूर अपने परिवार के साथ कंटेनर में सवार थे . दुर्घटना होते ही कंटेनर का ड्राइवर घटना स्थल से भाग गया. बताया जा रहा है कि सभी श्रमिक महाराष्ट्र से अपने घर उत्तर प्रदेश जा रहे थे.घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

रेत का अवैध कारोबार नहीं रुका तो भिंड जिले में पुलिकर्मियों पर गिरी गाज

ग्वालियर।।भिण्ड में चल रहे अवैध उत्खनन को लेकर नवागत डीआईजी और एसपी ने मिलकर अवैध उत्खनन वाले इलाकों में निरीक्षण करने के लिये पहुंचे वहां उत्खनन संबंधित कई अनियमिततायें पाई गयी। अवैध रेत उत्खनन, भण्डारण और परिवहन के विरूद्ध कार्यवाही करने के लिये कई बार निर्देश दिये जाने के बाद भी थाना प्रभारी उमरी, अमायन और रौन के द्वारा समुचित कार्यवाही नहीं की गयी। इन अनियमितताओं को लेकर थाना प्रभारी अमायन एसआई जितेन्द्र सिंह तोमर, रौन थाना प्रभारी संजीव नयन शर्मा और थाना प्रभारी उमरी महेश शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए पुलिस लाईन भिण में अटैच कर दिये हैं।
थाना प्रभारी उदयभान सिंह लाईन अटैच कर विभागीय कार्यवाही
भिण्ड सिटी कोतवाली के थाना प्रभारी उदयभान सिंह के द्वारा अपराधिक प्रकरण में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अनर्गल वार्तालाप कर दुराचरण कर अनुशासनहीनता करने के आरोप में भिण्ड पुलिस लाईन अटैच करते हुए विभागीय कार्यवाही करने के आदेश दिये गये हैं।
गोहद थाना प्रभारी अशोक इक्का लाईन अटैच
थाना प्रभारी गोहद अशोक इक्का और हैडकान्स्टेबल कमलकिशोर को प्रशासनिक दृष्टि से भिण्ड स्थित पुलिस लाईन में अटैच किया गया है।

मंत्री बनने की हमें चिन्ता नहीं, कांग्रेसी परेशान , ग्वालियर में बोलीं इमारती देवी

ग्वालियर।। मंत्री बनने की हमें चिन्ता नहीं है लेकिन कांग्रेस के नेताओं को ज्यादा चिंता हो रही है। ग्वालियर कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में भाग लेने पहुंची पूर्व मंत्री इमारती देवी ने यह बात कही।

इमरती देवी ने कहा कि ‘सिंधिया के सभी समर्थक मंत्री बनेंगें’. उन्होंने ये भी कहा कि ‘अगर कोरोना महामारी  का फेर नहीं होता तो सिंधिया जी अब तक केंद्र में मंत्री बन गए होते’. इस दौरान इमरती देवी ने कांग्रेस  पर चुटकी लेते हुए कहा कि उनके और सिंधिया जी के मंत्री बनने की चिन्ता बीजेपी से ज्यादा कांग्रेसियों को है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्यपाल लालजी टंडन की मुलाकात पर सिंधिया गुट की पूर्व मंत्री इमरती देवी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा है कि ‘शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमण्डल का विस्तार तय है लेकिन चूंकि देश में इस समय कोरोना महामारी फैली है और जान है तो जहान है इसलिए पहले इससे निपटने की तैयारियां जरूरी हैं. वैसे अगर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी राज्यपाल से मुलाकात कर रहे हैं तो मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है’.

माखीजानी बन सकते हैं सत्ता और संगठन की परेशानी.. दिल्ली पहुंची पूरी कहानी

ग्वालियर जिले के शहर जिलाध्यक्ष कमल माखीजानी को हटाने के लिए पार्टी में अब विरोध तेज होता जा रहा है। पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष देवेश शर्मा ने जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर नाराजगी जाहिर की है।

वहीं जिले के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस नियुक्ति पर अपना तीव्र विरोध प्रकट किया है। उनका कहना है कि माखीजानी को हटाए जाने तक कोई समझौता नहीं होगा। ऐसे में पार्टी में तेजी से उठते विरोध के स्वर को भॉंपते हुए प्रदेश व राष्ट्रीय नेतृत्व ने इसे गंभीरता से लिया है। पूरा मामला अब प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा, महामंत्री सुहास भगत से लेकर प्र्रदेश प्रभारी एवं सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा तक पहुंच गया है। इस मामले में अब प्रदेश व राष्ट्रीय नेतृत्व ही निर्णय करेगा।
ग्वालियर में होने हैं विधानसभा चुनाव
प्रदेश में आगामी महीनों में 24 विधानसभा क्षेत्रों में उप-चुनाव होना हैं। ग्वालियर जिले में भी तीन सीटों पर चुनाव होंगे। इनमें से शहरी क्षेत्र की ग्वालियर और ग्वालियर पूर्व दो सीटें शामिल हैं। सत्ता में बने रहने के लिए पार्टी को ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतना जरूरी हैं। ऐसे में नव नियुक्त जिलाध्यक्ष का विरोध सत्ता और संगठन पर भारी न पड़ जाए। इन बातों को ध्यान में रखते हुए पार्टी का वरिष्ठ नेतृत्व किसी प्रकार का कोई जोखिम उठाने की फिराक में नहीं है। माना जा रहा है, माखीजानी का पिछले दिनों एक थाना प्रभारी के साथ हुए वार्तालाप में बिगड़ैल बोल और उससे संबंधित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से पार्टी की मुश्किल बढ़ी हैं। इसके साथ ही पार्टी की छवि पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। इस घटनाक्रम ने पार्टी नेतृत्व को असहज किया है। यह पूरा घटनाक्रम भी निकट भविष्य में मुश्किल का सबब बन सकता है। 

नहीं आए संभागीय संगठन मंत्री
जिलाध्यक्ष के नाम को लेकर शुरू हुए विरोध को देखते हुए बुधवार को संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी को ग्वालियर आना था। लेकिन प्रदेश व राष्ट्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के कारण अब उन्हें इस मामले से अलग कर दिया गया है। इसके चलते वे नहीं आए और अब मामला दिल्ली दरबार में ही निपटाया जाएगा।
भोपाल-इंदौर में भी विरोध के हालात
ऐसा नहीं कि जिलाध्यक्ष को लेकर अकेले ग्वालियर में ही विरोध हो रहा है। भोपाल-इंदौर सहित अन्य जिलों में भी विरोधी सुर सुनाई दे रहे हैं। भोपाल में सुमित तिवारी के नाम पर हाहाकार मचा हुआ है। आलोक संजर, विश्वास सारंग, आलोक शर्मा एवं रामेश्वर शर्मा जैसे वरिष्ठों की अनदेखी कर उन्हें नवाजा गया है। इंदौर में कैलाश विजयवर्गीय के खास माने जाने वाले गौरव रणदिवे की ताजपोशी हुई है। पूर्व विधायक भंवर सिंह शेखावत ने इसे सत्ता और संगठन के लिए आत्मघाती और पक्षपाती कदम बताया है। इसके साथ ही सागर में गौरव सिरौठिया और देवास में राजीव खंडेवाल के नाम को लेकर कार्यकर्ताओं में आक्रोश पनप रहा है।
प्रदेश के वरिष्ठ नेतृत्व की अनदेखी
भाजपा सदैव अनुशासन के लिए जानी जाती है। सबको साथ लेकर चलती है और सामूहिक रूप से कोई निर्णय लेती है। लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि जिलाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति के मामले में पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की अनदेखी की गई। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं महामंत्री ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव तक से चर्चा नहीं की गई। सबसे हैरान करने वाली बात तो यह है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक को अंधेरे में रखा गया।

चम्बल अंचल में 32 हजार से अधिक मजदूर लौटे अपने गृह जिले में

मुरैना । चम्बल संभाग में प्रदेश के अन्य जिलों एवं अन्य राज्यों के अन्य जिलों में फंसे मजदूरों में से अभी तक 32 हजार 493 प्रवासी मजदूर अपने-अपने गृह जिलों में आ गये है। इनमें सर्वाधिक 14 हजार 385 प्रवासी मजदूर मुरैना जिले में आये। भिण्ड जिले में 12 हजार 15 और श्योपुर जिले में 6 हजार 93 मजदूर आयें है।
चम्बल संभाग मुरैना, भिण्ड और श्योपुर जिलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुरैना जिले में अभी तक प्रदेश के अन्य जिलों एवं अन्य राज्यों से 14 हजार 385 प्रवासी श्रमिक आए हैं, जिनमे सभी का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। मध्यप्रदेश के अन्य जिलों से मुरैना में 8 हजार 625 एवं देश के अन्य राज्यों से 6 हजार 733 प्रवासी श्रमिक जिले में आयें हैं। इसके अलावा अन्य राज्यों एवं जिलों से मुरैना जिले की सीमा से होकर गुजरने वाले 17 हजार 742 लोंगो की स्क्रीनिंग की गई। इसके अलावा 9 हजार 117 लोंगो को मुरैना से स्क्रीनिंग करके प्रदेश के अन्य जिलों के लिये बसों द्वारा रवाना किया गया।
भिण्ड जिले में अभी तक 12 हजार 15 प्रवासी मजदूर आये
भिण्ड जिले में अभी तक प्रदेश के अन्य जिलों एवं अन्य राज्यों से 12015 श्रमिक आए हैं जिनमे सभी का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। प्रदेश के अन्य जिलों से भिण्ड में 7060 एवं देश के अन्य राज्यों से 4955 ,कुल 12015 श्रमिक जिले में आयें हैं।
श्योपुर जिले में अन्य राज्यों से आयें 6093 मजदूर
श्योपुर जिले में मप्र के अलावा अन्य राज्यों से 6093 मजदूर 11 मई 2020 तक आ चुके है। इसके बावजूद भी राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों से मजदूरों का आगमन जारी है। जिसमें श्योपुर जिले के 2490 एवं मप्र के विभिन्न जिलों के 3603 कुल 6093 मजदूर आ चुके है। जिनको जिला प्रशासन द्वारा श्योपुर के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों में आवश्यक सुविधाओं सहित बस के माध्यम से भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा चुकी है।
कलेक्टर श्री राकेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मप्र के प्रवासी मजदूरों को प्रदेश के विभिन्न जिलों में 28 अपै्रल से 11 मई 2020 तक श्योपुर जिले के बाॅर्डर सामरसा पर सभी सुविधाएं प्रदान की जाकर उनके घर बस से पहुंचाने की कार्यवाही सुनिश्चित की गई है। जिसमें प्रवासी मजदूर श्योपुर के 2490, झाबुआ के 87, बालाघाट के 06, बैतुल का 01, कटनी के 66, मण्डला के 03, मुरैना के 57, भिण्ड के 918, सिवनी के 51, डिण्डौरी के 452, छिंदवाडा का 01, विदिशा के 14, पन्ना के 262, रीवा के 18, शहडोल के 44, शाजापुर के 10, शिवपुरी के 196, सीधी के 71 मजदूरों को सभी सुविधाएं प्रदान की जाकर बस के द्वारा उनके घर पहुंचाये जा चुके है।
इसी प्रकार सतना के 33, उमरिया के 167, दमोह के 57, दतिया के 291, छतरपुर के 41, जबलपुर के 34, टीकमगढ के 65, आगर के 06, अनूपपुर के 08, ग्वालियर के 158, गुना के 225, अशोकनगर के 27, सागर के 43, सिंगरोली के 03, भोपाल के 25, देवास के 04, मदंसौर के 05, राजगढ के 03, इन्दौर के 09, उज्जैन के 09, पोरसा के 32 एवं धार का 01 इस प्रकार से कुल 6093 प्रवासी मजदूर श्योपुर जिले के बाॅर्डर पर आकर स्क्रीनिंग, भोजन, पानी, शौचालय की सुविधा के बाद बस के माध्यम से उनके घर पहुंचाने की की व्यवस्था की जा चुकी है।

अहमदाबाद से आए युवक ने जहर खाकर की आत्महत्या

मुरैना।

 पोरसा में राम भरोसी चक्की के पास अटेर रोड पर रहने वाले कैलाश श्रीवास ने गेहूं की गोली खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली बताया जाता है कि मृतक कैलाश श्रीवास  रात में  अहमदाबाद से आया था और रात में अपने मकान के बाहर बने दुकानों में खटिया बिछाकर कर सो गया था जब सुबह हुई तो लोगों ने देखा कैलाश श्रीवास मृत अवस्था में पड़ा है तुरंत ही पोरसा पुलिस को सूचित किया मौके पर पुलिस पहुंची देखा गया तो सल्फास की गोली की डिब्बी और शराब का क्वार्टर पढ़ा पाया गया था तुरंत ही पंचनामा बनवा कर पोरसा हॉस्पिटल लेकर आए और पीएम करवाकर परिजनों को बॉडी सुपुर्द की गई  पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच में जुट गई है।

MP उपचुनाव: बागियों की एंट्री से BJP में बगावत के सुर तेज, दीपक जोशी ने दिए संकेत

मध्य प्रदेश में उपचुनाव से पहले बीजेपी में बगावत तेज

पूर्व सीएम कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी के बदले सुर

मध्य प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव की सियासी बिसात बिछाई जाने लगी हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक 22 बागी विधायकों की बीजेपी में एंट्री के बाद पिछले चुनाव में कमल के टिकट पर किस्मत आजमाने वाले नेताओं को अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता सता रही है. ऐसे में बीजेपी के अंदर बगावती सुर उठने लगे हैं और उन्होंने नए सियासी ठिकाने की धमकी देनी शुरू कर दी है.

देवास जिले की हटपिपल्या विधानसभा सीट से विधायक रहे चुके बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री दीपक जोशी के राजनीतिक सुर उपचुनाव से पहले बदल गए हैं. दीपक जोशी ने aajtak.in से बातचीत करते हुए कहा कि वो तीन बार के विधायक हैं और 57 साल की उम्र में अगर पार्टी उनके साथ नाइंसाफी करती है तो वह दूसरे विकल्प पर विचार कर सकते हैं.

जोशी ने कहा कि मैं तीन बार का विधायक हूं और मेरे पिता की मध्य प्रदेश में अपनी राजनीतिक हैसियत रही है. विधानसभा क्षेत्र के लोगों की अपेक्षाएं हमसे जुड़ी हुई हैं और उनकी राजनीतिक भावनाओं के लिए हम मैदान तो नहीं छोड़ देंगे. दीपक जोशी ने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी है तो वो मैच खेलेगा, नेशनल नहीं तो रणजी तो खेलेगा ही. अगर एक टीम से नहीं खेलेगा तो दूसरी टीम से खेलेगा. उन्होंने कहा कि अगर कोई आया है तो ग्राउंड पर उतरे देखे कि किसमें कितना तम है.

बीजेपी छोड़ने और कांग्रेस में शामिल होने के सवाल पर दीपक जोशी ने कहा कि मैं पार्टी के साथ हूं. उपचुनाव के लिए पार्टी ने किसी का नाम तय नहीं किया है, लेकिन चर्चाएं हो रही हैं. ऐसे में अगर पार्टी हमारे लिए नहीं सोचती है तो फिर सारे विकल्प खुले हैं और वक्त आने पर इस पर विचार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर राजनीति का यही रूप है तो इसका प्रयोग मैं भी करूंगा, क्योंकि मैं भी मनुष्य हूं.

बीजेपी से तीन बार के विधायक रहे दीपक जोशी दीपक जोशी 2013 में मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार में स्कूल, उच्च शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट मंत्री भी थे. 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मनोज चौधरी ने बीजेपी के दीपक जोशी को मात दे दी थी, लेकिन पिछले दिनों चौधरी ने सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है. ऐसे में हटपिपल्या सीट का समीकरण बदल गया है और बीजेपी के मनोज चौधरी को टिकट मिलना कन्फर्म है.

पूर्व विधायक दीपक जोशी मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे हैं. दीपक जोशी देवास जिले में पार्टी के बड़े नेता हैं. हटपिपल्या सीट से बीजेपी कश्मकश में पड़ गई है और अगर मनोज चौधरी को टिकट देती है तो दीपक जोशी बगावत का झंडा बुलंद कर सकते हैं. ऐसे में पार्टी के सामने दीपक जोशी सरीखे नेता के साथ समन्वय बैठाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होगा.

महिला की आंख में 20 दिन तक रहा कोरोना वायरस, सभी को जरूर बरतनी चाहिए ये सावधानियां

महिला की आंख में 20 दिन तक रहा कोरोना वायरस, सभी को जरूर बरतनी चाहिए ये सावधानियां
कोरोना वायरस के एक से एक अजीब किस्से सामने आ रहे हैं। अब इटली से खबर है कि यहां कोरोना वायरस एक महिला के आंखों में करीब 20 दिन तक रहा। इस महिला की पूरी कहानी दुनिया को अलर्ट करने के लिए काफी है। एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसीन में प्रकाशित इस केस स्टडी के अनुसार, 65 साल की वह महिला 29 जनवरी को चीन के वुहान शहर में थी, जहां कोरोना वायरस का जन्म हुआ है। महिला इटली लौटी तो उसे सूखी खांसी आ रही थी और गले में दर्द हो रहा था। रोम के अस्पताल ने कोरोना वायरस संदिग्ध मानकर सैम्पल लिए और जांच के लिए भेजे। उसी दौरान महिला की दोनों आंखों में कंजंक्टिवाइटिस हुआ था। चौथे दिन महिला के शरीर का तापमान 100.4 डिग्री पहुंच गया। चार दिन बाद जब रिपोर्ट आई तो पता चला कि महिला को कोरोना वायरस है। इस दौरान कंजंक्टिवाइटिस बना रहा। इसके बाद आंख से कंजंक्टिवाइटिस का नमूना लिया गया और जांच की गई। इस दौरान सभी लक्षणों का इलाज जारी रखते हुए कंजंक्टिवाइटिस के नमूने की लगभग रोज जांच की गई। 15वें दिन से जैसे-जैसे कंजंक्टिवाइटिस कम होना शुरू हुआ, महिला के शरीर से कोरोना वायरस भी खत्म होने लगा। जैसे ही कंजंक्टिवाइटिस खत्म हुआ, महिला कोरोना वायरस से भी मुक्त हो गई।

इस केस का अध्ययन करने के बाद डॉक्टर निष्कर्ष पर पहुंचे कि गले और नाक से लिए गए सैम्पल में कोरोना वायरस नहीं था, लेकिन कंजंक्टिवाइटिस के रूप में आंखों में संक्रमण था, जिसका बाद में पता चला। इसके बाद ही डॉक्टरों को भी यह जानकारी हुई कि आंख में मौजूद तरल पदार्थ भी कोरोना वायरस का वाहक हो सकता है।

अजीब केस के बाद डॉक्टर दे रहे यह सलाह
यह केस सामने आने के बाद डॉक्टर वहीं सलाह दोहरा रहे हैं कि बार-बार नाक, मुंह और आंखों पर हाथ न लगाएं। यदि ऐसा कर रहे हैं, तो बार-बार हाथ साफ करें। आंख, नाक या कान में कोई हलचल हो रही है, जो साथ में रुमाल या कपड़ा रखें और उसका इस्तेमाल करें। घर से बाहर जा रहे हैं तो मास्क से साथ ही अपनी आंखों को कवर करने का बंदोबस्त भी करें।

एम्स के डॉ. अजय मोहन के अनुसार, कोरोना वायरस एक तरह का वायरल इंफेक्शन है जो मुख्य रूप से श्वसन तंत्र, नाक और गले को प्रभावित करता है। हालांकि, हालिया रिपोर्ट में आंखों की जलन भी कोरोना वायरस का एक लक्षण सामने आया है। ईरान में इस तरह के कई केस सामने आए हैं।

कोरोना वायरस के दौर में जरूर रखें इन बातों का ख्याल
डॉ. मेघावी अग्रवाल के अनुसार, आंखों में किसी भी तरह का संक्रमण जोखिम भरा हो सकता है। यदि बिना किसी कारण के आंख में जलन रहो रही है, दर्द, चुभन या खुजली हो रही है तो तत्काल अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें। जरूरी नहीं है कि आंख में होने वाली हर हलचल का संबंध कोरोना वायरस से ही हो, लेकिन मौजूदा समय में जितना सावधानी बरती जाए, उतना बेहतर है।

कहीं दूध ना बन जाए आपकी बीमारी का कारण? दूध लेते समय ध्यान में यह रखें यह सावधानियां

जल के बाद दूध हमारी प्राथमिक आवश्यकता है। इस समय दूध खरीदते समय ओर काम में लेते समय इसमें कई सावधानियों की जरूरत है। इस बारे में विज्ञान के ख्याति नाम शिक्षक राजेश मुखीजा ने यह टिप्स बताए।
ये हैं टिप्स-
दूध बेचने वाले लोगों को चाहिए कि वह दूध के काम में आने वाले बर्तनों को अच्छे से साफ रखें।
दूध धोने से पहले अपने हाथों, में बर्तनों व पशु के थनों को गर्म पानी से अच्छी प्रकार धोना चाहिए।
दूधिया को मास्क व दस्ताने पहनकर ही दूध वितरण का कार्य करना चाहिए ।
-यदि हम थैली वाला दूध खरीदते हैं तो घर लाते ही उन थैलियों को भी हल्के गर्म पानी से धो कर रखना चाहिए.
दूध को हमेशा गर्म कर उबाल कर काम में लेना चाहिए ।
दूधिए को हमेशा सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना चाहिए वह कुछ इस तरह के उपकरण रखें कि इसकी पालना हो सके
उच्च तापमान पर जीवाणु तेजी से वृद्धि करते हैं अत: दूध को फ्रिज में कम तापमान पर रखना चाहिए।
फ्रिज में दूध को शेल्फ में पीछे की ओर निचले भाग में रखना चाहिए।
दूध यदि आप बोतल या किसी बर्तन से लेते हैं तो उसमें विशेष ध्यान रखें कि दूधियां कही अपना हाथ टच नहीं करें।
दूध की समय -समय अलवर डेयरी में जांच करवाए जिससे उसकी गुणवत्ता पता लग सके।
दूध वाले की सेहत पर आवश्यक नजर रखे, यदि उसमें कोरोना के लक्षण नजर आए तो प्रशासन को सूचना देंवे।