शिवपुरी में गेंहूं उपार्जन केंद्रों पर किसानों को सरेआम लूटा जा रहा है, विधायक रघुवंशी ने पकड़ी चोरी.


शिवपुरी किसानों को सरकारी गेहूं उपार्जन केंद्रों पर सरेआम लूटा जा रहा है. गेहूं के सेंपल पास कराने के लिये उपार्जन केंद्रों पर सर्वेयर और सोसाईटी के प्रबंधकों द्वारा एक ट्राली पर एकहजार से लेकर दो हजार रुपये की घूस ली जा रही है.
कोलारस विधायक वीरेंद्र रघुवंशी ने शिवपुरी जिले की बूढ़ाडोंगर और बिजरोनी उपार्जन केंद्र पर गेंहू की तौल माप से अधिक करना और गेंहू का सेंपल पास कराने के लिये रुपये लिये जाने की शिकायतों को स्वयं उपार्जन केंद्रों पर जाकर देखा और सही पाया है.
जिसमें बिजरोनी उपार्जन केंद्र के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ 420 सी का मुकदमा भी संबंधित जांच अधिकारियों द्वारा बदरबास थाने पर दर्ज करवाया गया है लेकिन जांच अधिकारियों द्वारा बूड़ाडोंगर गेहूं उपार्जन केंद्र पर भी इसी तरह की शिकायत मिलने के बाबजूद बिना कार्यवाही किये छोड़ दिया गया है.
शिवपुरी जिले के उपार्जन केंद्रों पर किसानों के गेंहूं पास कराने के एवज में खुलेआम रुपये लेना किसान के गेंहूं की तौल माप से अधिक करना आम बात हो गई है ऐसा लगता है किसानों से रोजाना जो लूट की जा रही है वह लाखों में पहुंच रही है और इस लूट की बंदरबांट में समूचा प्रशासनिक अमला भी शामिल है.
शिवपुरी, पड़ोरा, पिछोर पोहरी, कोलोरस में रोजाना लाखों रुपये की चपत किसानों की मेहनत की कमाई में से लगाई जा रही है.
एक तरफ मौसम की मार दूसरी तरफ कोरोना के कारण किसानों को मैसेज न मिलना और इसी का फायदा भ्रष्ट अधिकारी उठा रहे हैं.
कोरोना के कारण विधायक और जनप्रतिनिधि अपने अपने हाथ कटे से महसूस कर रहे हैं सारी शक्ति केवल मुख्यमंत्री और अधिकारियों तक सिमट कर रह गई है.
लेकिन अगर किसान मजदूर और जनता को इसी तरह लूटा जाता रहा तो आगे उपचुनाव हैं और कुछ भी हो सकता है.

चेन्नई, अहमदाबाद, इंदौर और भोपाल से आए लोग निकले कोरोना संक्रमित,कलेक्टर ने की पुष्टि

ग्वालियर। ग्वालियर शहर में लगा तार कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को जिले में पांच मरीजों के मिलने से मचा हड़कंप थमा नहीं था कि शनिवार को फिर से जिले में पांच नए मरीज मिलने से हड़कंप मच गया। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने तुरंत इस मामले में एक्टिव होते हुए सभी पॉजिटिव मरीजों को jah परिसर स्थित corona वार्ड में भर्ती करते हुए जिन इलाकों से मरीज मिले हैं उन सभी क्षेत्रों की नाकेबंदी करते हुए सभी इलाकों को सील कर दिया है। गौरतलब है कि जिले में corona मरीजों की संख्या दर्जन भर से अधिक हो चुकी है और मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। सबसे अधिक चिन्ता की बात ये है कि जो मरीज सामने आ रहे हैं वे देश के दूसरे शहरों से यहां आए हैं शनिवार को जो मरीज मिले हैं उनमें चेन्नई, अहमदाबाद, इंदौर, भोपाल से वापस लौट कर आए लोग हैं। जो मरीज सामने आए हैं उनमें मुबीन निवासी गुडागुड़ी का नाका,मुस्कान, चंदन नगरमिथुन,डीडी नगर ,संजय सिंह, सागर ताल न बीन गुप्ता  जीवाजीगंज शामिल हैं।

लायंस फाउंडेशन की राहत सामग्री को सिंधिया फाउंडेशन की बता दानी बने ज्योतिरादित्य : दिग्विजय

कोरोना की आपदा में मध्य प्रदेश में सियासी वार जारी है। सियासी जंग कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया और और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बीच चल रही है। सिंधिया और दिग्विजय सिंह एक-दूसरे को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं। कभी सिंधिया वार करते हैं तो कभी दिग्गी पलटवार। लेकिन इस बार दिग्विजय सिंह ने सिंधिया पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने राहत के नाम पर रिलायंस फाउंडेशन की सामग्री को सिंधिया फाउंडेशन के नाम दिए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। पहली बार ऐसा हुआ है जब दिग्विजय सिंह खुलकर सिंधिया के विरोध में आए हैं। खबर लिखे जाने तक सिंधिया की ओर इस मामले में उनकी कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। आइए आप भी जानिए आखिर क्या है पूरा मामला?

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस क्या छोड़ी ? वे कांग्रेसियों के दुश्मन बन गए हैं। अब वे लगातार कांग्रेसियों के निशाने पर हैं और कांग्रेस किसी न किसी मुद्दे को लेकर उन पर आक्रामक बनी हुई है। अब ताजा मुद्दा बनी है रिलायंस फाउंडेशन की राहत सामग्री। जिस पर प्रधानमंत्री मोदी और सिंधिया सहित सिंधिया फाउंडेशन का टैग लगाकर बांटा जा रहा है।
पहले इस मामले को कांग्रेस ने मुद्दा बनाया। लेकिन इस मामले में अब दिग्विजय सिंह भी सीधे तौर पर मैदान में कूंद पड़े हैं। क्योंकि सिंधिया की ओर से दिग्विजय सिंह और उनके बेटे पर सीधे तौर पर हमला करने के बाद अब दिग्विजय ने भी उन पर पलटवार करते हुए जोरदर जवाब दिया है। उन्होंने एक ट्वीट के माध्यम से सिंधिया को निशाना बनाया है। अक्सर देखा गया है कि दिग्विजय ने कभी खुले तौर पर सिंधिया का विरोध नहीं किया है लेकिन यह पहली बार हो रहा है, जब उन्होंने उनके पूर्वजों का भी उल्लेख कर दिया है और सिंधिया को खरी-खोटी कह डाली हैं।
दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट किया है…. उसकी भाषा कुछ इस अंदाज में है।

”महाराज, आपके पूर्वज इतना छोड़ गए हैं। आपके इतने सारे ट्रस्ट हैं। संकट की इस घड़ी में उनके जरिए लोगों को राहत पहुंचाई जा सकती थी। फिर रिलायंस फाउंडेशन की राहत सामग्री पर सिंधिया फाउंडेशन का टैग लगाना कितना उचित है?”

    राहत सामग्री से जुड़ा यह है पूरा मामला
 
यह पूरा मामला ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र का है जहां से वे सांसद का चुनाव लड़ते रहे हैं। उस इलाके में कांग्रेस ने राहत सामग्री के वितरण पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सिंधिया ने जिस राहत सामग्री को अपना बताकर लोगों में बांटा, वह रिलायंस फाउंडेशन की ओर से उपलब्ध कराई गई थी।
सिंधिया समर्थक का ट्वीट बना मुसीबत
विवाद की शुरुआत पूर्व मंत्री और सिंधिया समर्थक नेता महेंद्र सिंह सिसोदिया के एक ट्वीट से हुई थी। सिसोदिया ने पिछले दिनों एक ट्वीट में जानकारी दी थी कि सिंधिया फाउंडेशन द्वारा गुना एवं बमौरी के जरूरतमंद नागरिकों के लिए 2000 राशन के पैकेट उपलब्ध करवाये गए। नर सेवा नारायण सेवा को चरितार्थ करने वाले सिंधिया को कोटि-कोटि धन्यवाद।

वीडियो के जरिए खुली मामले की पोल 

सिसोदिया के इस ट्वीट के बाद योगेंद्र सिंह चौहान के फेसबुक एकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया गया जिसमें बताया गया कि रिलायंस फाउंडेशन की राहत सामग्री में धांधली हुई है। पोस्ट के साथ एक वीडियो भी टैग किया गया है जिसमें एक व्यक्ति बता रहा है कि ये राहत सामग्री रिलायंस रिलीफ फंड की है, जो नगर पालिका में रखी गई थी। सिंधिया जी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए पैकेटों पर लगी रिलायंस की स्लिम हटाकर अपनी और पीएम मोदी की फोटो लगवा दी। अब देखना होगा कि सिंधिया का इस मामले में क्या जवाब होगा?

कमल मखीजानी बने शहर ग्वालियर बीजेपी के नए अध्यक्ष व ग्रामीण बीजेपी के अध्यक्ष बने कौशल शर्मा

ग्वालियर
कमल कीचड़ में ही नहीं,
कभी कभी चट्टान फोड़ कर भी निकलता है
भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष के रूप में कमल मखीजानी और कौशल शर्मा के अलावा 22 नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति कर दी गई है

मरीज बढ़ते ही सड़क पर उतरी पुलिस,चेकिंग बढ़ी

ग्वालियर । 
ग्वालियर में कल अचानक पांच नए कोरोना संक्रमित निकल पड़े । इनमे एक डॉक्टर,एक एसएएफ का जवान और तीन अहमदावाद से आये लोग हैं । जिनके साथ ही मरीजों की संख्या बढ़कर 11 हो गई । अभी इनसे संपर्क में आये लोगो की जांच रिपोर्ट आना है जिले में कोरोना संक्रमितों की लगातार हो रही बढ़ोत्तरी से चिंतित प्रशासन ने अब लॉक डाउन को कड़ाई से लागू करने की रणनीति बनानी शुरू कर दी है । हालांकि जिला पहले से ही रेड जोन में है और उसी की अनुसार सहूलियतें भी मिल रही है लेकिन आज सड़को पर सबेरे से ही पुलिस एक्टिव दिखी । थोक मेडिकल स्टार्स चार घण्टे पहले ही बन्द करा दिए गए ।

जिले में कल पांच नए कोरोना पॉजिटिव मरीज आने के बाद प्रशासन चिंतित हो उठा । हालांकि अभी तक जिला प्रशासन ने औपचारिक तौर पर अपने दिशा निर्देशों में कोई परिवर्तन नही किया लेकिन आज शहर में सड़कों पर घूम रहे लोगो से पूछताछ की जा रही है अनावश्यक घूमने वाले या सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने वालो पर कार्यवाही भी की जा रही है । महाराज बाड़ा, हजीरा और बारादरी मुरार पर पुलिज़ चेकिंग लगाई गई ।

चार घण्टे पहले कराई दुकाने बन्द

प्रशासन ने जो गाइडलाइन जांरी की थी उसके अनुसार थोक दवाई की दुकानें आज दोपहर चार बजे तक खुलनी थी क्योंकि दवाई लेने संभाग भर से मेडिकल व्यवसाई दवा लेने ग्वालियर आते है लेकिन आज पुलिस बारह बजे ही हुजरात रोड स्थित थोक दवा मार्किट में जाकर डंडा खटखटाना शुरू कर दिया और दुकाने बन्द करवा दीं । व्यापारी ड्रग इंस्पेक्टर और प्रशासनिक अफसरों को फ़ोन लगाते रहे।

कांग्रेस उपचुनाव में ‘कांटे से कांटा’ निकालने की तैयारी में.

भोपाल मध्य प्रदेश में आने वाले उपचुनाव में कांग्रेस पूरी ताकत से आना चाहती है, भाजपा द्वारा कांग्रेस छोड़ भाजपा में आये पूर्व मंत्री और विधायकों को तरजीह न दिये जाने के कारण बागी पूर्व विधायक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और ये बात कांग्रेस को मजबूती प्रदान कर रही है। हो सकता है ग्वालियर संभाग के एक दो बागी पूर्व मंत्री विधायकों को मंत्री पद से धता बता दिया जाये। कमल नाथ सरकार को गिराने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह के दांव-पेच अपनाएं, ठीक उसी तर्ज पर कांग्रेस राज्य विधानसभा की 24 सीटों के आगामी उपचुनाव में भाजपा को मात देना चाहती है। कांग्रेस के निशाने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं, जिन्हें मात देने के लिए उपचुनाव में कांग्रेस उन भाजपा नेताओं पर दांव लगाना चाहती है जो 2018 के मप्र विस चुनाव में भाजपा के टिकट पर सिंधिया समर्थक तत्कालीन कांग्रेस नेताओं से विधानसभा चुनाव हारे थे। ऐसे नेताओं को टिकट देकर कांग्रेस ‘कांटे से कांटा’ निकालने की तैयारी कर रही है। इसके लिए कांग्रेस के अलग-अलग नेताओं को पिछले चुनाव में पराजित भाजपा नेताओं से बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ग्वालियर में भाजपा का बागी तलाश रहे
ग्वालियर सीट से 2018 के विधानसभा चुनाव में वरिष्ठ नेता जयभान सिंह पवैया भाजपा के टिकट पर कांग्रेस प्रत्याशी प्रद्युम्न सिंह तोमर से हार गए थे। अब 2020 में होने वाले उपचुनाव में पवैया को तोमर का साथ देना होगा। पवैया पर कार्यकर्ताओं का भी दबाव है, पर वे आरएसएस की विचारधारा से जुड़े होने के कारण बागी नहीं होंगे। सूत्रों का कहना है कि इस परिस्थिति को भांपकर कांग्रेस यहां भाजपा के ऐसे बागी की तलाश कर रही है, जिसे भाजपा का परंपरागत वोट भी मिल सके।
सांची में मुदित शेजवार पर डोरे
रायसेन जिले का अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र सांची भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री गौरीशंकर शेजवार की परंपरागत सीट रही है। 2018 के चुनाव में डॉ. शेजवार ने अपने बेटे मुदित शेजवार को यहां से भाजपा का टिकट दिलवाया था। मुदित के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर डॉ. प्रभुराम चौधरी ने चुनाव लड़ा और जीता। अब चौधरी भाजपा के टिकट पर खड़े होंगे। जाहिर है, शेजवार आसानी से चौधरी का समर्थन नहीं करने वाले। कांग्रेस अब मुदित शेजवार पर डोरे डाल रही है।
दीपक जोशी हाटपिपल्या में चुनौती
पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे और पूर्व मंत्री दीपक जोशी की देवास जिले की हाटपिपल्या सीट भी उनके हाथों से खिसक रही है। जोशी को उनके विरोधी मनोज चौधरी ने कांग्रेस के टिकट पर 2018 में चुनाव हराया था। अब चौधरी विधानसभा से इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ेंगे।
जज्जी की जाति को चुनौती
पोहरी में भाजपा के पूर्व विधायकों पर कांग्रेस डोरे डाल रही है, लेकिन उम्मीद कम है. यहां से हरिबल्लभ शुक्ला और राजेंद्र गुर्जर का नाम भी चल रहा है.

इधर अशोकनगर के पूर्व विधायक जजपाल सिंह जज्जी की जाति को लेकर चल रहे मामले में अब कांग्रेस इसे अदालत में चुनौती देगी। जज्जी पर अलग-अलग जातियों से अलग-अलग चुनाव लड़ने का आरोप है।
इन विस सीटों पर उपचुनाव
मध्य प्रदेश के दो विधायकों के निधन और कांग्रेस के 22 बागी विधायकों के इस्तीफे से रिक्त हुई विधानसभा की कुल 24 सीटों पर अब एक साथ उपचुनाव होंगे। प्रदेश के किसी भी विधानसभा के कार्यकाल में इतनी बड़ी तादाद में उपचुनाव नहीं हुए हैं। जिन सीटों पर उपचुनाव होना है, उनमें जौरा, आगर (अजा), ग्वालियर, डबरा (अजा), बमोरी, सुरखी, सांची (अजा), सांवेर (अजा), सुमावली, मुरैना, दिमनी, अंबाह (अजा), मेहगांव, गोहद (अजा), ग्वालियर (पूर्व), भांडेर (अजा), करैरा (अजा), पोहरी, अशोक नगर (अजा), मुंगावली, अनूपपुर (अजजा), हाटपिपल्या, बदनावर, सुवासरा शामिल हैं।

पीसीसी चीफ कमलनाथ ने अशोक सिंह को किया जिलाध्यक्ष नियुक्त

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कमलनाथ ने ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष मोहन सिंह राठौर के कांग्रेस छोडने के बाद ग्वालियर जिला ग्रामीण जिला ग्वालियर के कांग्रेस अध्यक्ष पद पर अशोक सिंह को नियुक्त किया है। अशोक सिंह अभी प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष हैं, लेकिन ग्वालियर में उनको यह जिम्मेदारी कांग्रेस की मजबूती के लिये दी गई है।

ग्वालियर. मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कमलनाथ ने ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष मोहन सिंह राठौर के कांग्रेस छोडने के बाद ग्वालियर जिला ग्रामीण जिला ग्वालियर के कांग्रेस अध्यक्ष पद पर अशोक सिंह को नियुक्त किया है। अशोक सिंह अभी प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष हैं, लेकिन ग्वालियर में उनको यह जिम्मेदारी कांग्रेस की मजबूती के लिये दी गई है। कांग्रेस के संगठन महामंत्री लतीफ खान मल्लू ने इसकी जानकारी देकर बताया कि अब ग्वालियर ग्रामीण में कांग्रेस को एक नई उर्जा मिलेगी।

मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, शिवराज सरकार ने 50 आईएएस अफसरों के किए तबादले

मध्यप्रदेश में बड़े स्तर पर सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल किया है। राज्य की शिवराज सरकार ने शनिवार देर रात प्रशासन स्तर पर फेरबदल करते हुए करीब 38 आईएएस अफसरों को इधर से उधर कर दिया।
सरकार की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक जनसंपर्क आयुक्त पी नहररि को हटा कर सुदाम पी खाड़े को अब जनसंपर्क विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वहीं अनुपम राजन को जनसंपर्क विभाग के साथ उच्च शिक्षा विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही वरिष्ठ आईएस अधिकारी श्रीमन शुक्ला को प्रबंध संचालक सड़क विकास निगम का जिम्मा सौंपा गया है।

एम गोपाल रेड्डी को राजस्व मंडल का अध्यक्ष बनाया गया। आबकारी आयुक्त राजेश बहुगुणा को हटाकर राजीवचंद्र दुबे को जिम्मेदारी दी गई है। नरेश कुमार पाल को शहडोल संभाग का आयुक्त, रेनु तिवारी को आयुक्त सामाजिक न्याय एवं निशक्तजन कल्याण, अजीत कुमार को आयुक्त नगर और ग्राम निवेश बनाया गया है

आशीष सक्सेना को आयुक्त सहकारिता,मोहन लाल मीना को प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, स्वाति मीणा नायक को संचालक महिला एवं बाल विकास, छवि भारद्धाज को संचालक एनआरएचएम, विशेष गढ़पाले को प्रबंध संचालक मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड,तेजस्वी एस नायक को प्रबंध संचालक जल निगम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पल्लवी जैन गोविल को प्रमुख सचिव स्वास्थ्य से हटा कर उनकी जगह फैज अहमद किदवई को विभाग की कमान सौंपी गई है। पल्लवी जैन गोविल को आदिम जाति कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव का जिम्मा दिया गया है।
प्रतीक हजेला को प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। हाल ही में गठित शिवराज सरकार के इस कार्यकाल में यह पहला और बड़ा प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है।

Labour Law: UP, MP व गुजरात में बदला कानून, 10 बिन्दुओं में जानें अहम बदलाव और आप पर असर

नई दिल्ली । कोरोना महामारी से निपटने के लिए दुनिया भर में चल रहे लॉकडाउन से भारत समेत विश्वभर की अर्थव्यवस्था डगमगा गई है। इससे निपटने के लिए सभी देश अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों संग बैठक कर उद्योग-धंधों को दोबारा एहतियात के साथ शुरू कराने को लेकर चर्चा की थी। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्रियों से कहा था कि भारत के पास ये अच्छा मौका है कि वह चीन से पलायन करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपनी तरफ आकर्षित करे। प्रधानमंत्री के इस आव्हान के बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश व गुजरात ने अपने लेबर कानूनों में बड़े बदलावों की घोषणा कर दी है।

तीनों राज्यों ने तीन वर्ष के लिए उद्योगों को न केवल लेबर कानून से छूट दी है, बल्कि उनके रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को भी ऑनलाइन व सरल कर दिया है। नए उद्योगों को अभी लेबर कानून की विभिन्न धाराओं के तहत पंजीकरण कराने और लाइसेंस प्राप्त करने में 30 दिन का वक्त लगता था, अब वह प्रक्रिया 1 दिन में पूरी होगी। इसके साथ ही उद्योगों को उत्पादन बढ़ाने के लिए शिफ्ट में परिवर्तन करने, श्रमिक यूनियनों को मान्यता देने जैसी कई छूट दी गई हैं। राज्य सरकारों की इन घोषणाओं से एक तरफ उद्योग जगत राहत महसूस कर रहा है तो वहीं श्रमिक संगठन आशंका जता रहे हैं कि इससे कर्मचारियों पर काम का दबाव और बढ़ेगा। आइये जानते हैं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व गुजरात द्वारा लेबर कानून में किए गए अहम बदलावों और श्रमिकों पर पड़ने वाले उसके असर के बारे में।

क्यों बदले गए लेबर कानून

जैसा की प्रधानमंत्री ने चीन से पलायन करने वाली कंपनियों को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्रियों का आव्हान किया था, उसी को आधार बनाते हुए राज्य सरकारों ने लेबर कानूनों में बदलाव किया है। इसके पीछे सरकारों का तर्क है कि इन बदलावों से उद्योगों को राहत मिलेगी। साथ ही प्रदेश में नए उद्योगों को लाना आसान होगा। प्रदेश में नए उद्योग आएंगे तो इससे लोगों के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे। विशेष तौर पर अन्य राज्यों से पलायन कर अपने घरों को वापस लौटने वाले श्रमिकों को उनके गृह जनपद में रोजगार की संभावना बढ़ेगी।

उत्तर प्रदेश के लेबर कानून में हुए प्रमुख बदलाव

मध्य प्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 मई को लेबर कानूनों में बदलाव की घोषणा की है। यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अगले 1000 दिन के लिए लेबर कानूनों में कई अहम बदलाव किये हैं। यूपी सरकार ने इसके लिए ‘उत्तर प्रदेश टेंपरेरी एग्जेम्प्शन फ्रॉम सर्टेन लेबर लॉज ऑर्डिनेंस 2020’ को मंजूरी प्रदान कर दी है। आइये जानतें हैं कानून में किए गए प्रमुख बदलावों के बारे में…संसोधन के बाद यूपी में अब केवल बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स एक्ट 1996 लागू रहेगा।

उद्योगों को वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट 1923 और बंधुवा मजदूर एक्ट 1976 का पालन करना होगा।

उद्योगों पर अब ‘पेमेंट ऑफ वेजेज एक्ट 1936’ की धारा 5 ही लागू होगी।

श्रम कानून में बाल मजदूरी व महिला मजदूरों से संबंधित प्रावधानों को बरकरार रखा गया है।

उपर्युक्त श्रम कानूनों के अलावा शेष सभी कानून अगले 1000 दिन के लिए निष्प्रभावी रहेंगे।

औद्योगिक विवादों का निपटारा, व्यावसायिक सुरक्षा, श्रमिकों का स्वास्थ्य व काम करने की स्थिति संबंधित कानून समाप्त हो गए।

ट्रेड यूनियनों को मान्यता देने वाला कानून भी 1000 दिन के लिए खत्म कर दिया गया है।

अनुबंध श्रमिकों व प्रवासी मजदूरों से संबंधित कानून भी 1000 दिन के लिए समाप्त कर दिए गए हैं।

यूपी सरकार द्वारा लेबर कानून में किए गए बदलाव नए और मौजूदा, दोनों तरह के कारोबार व उद्योगों पर लागू हउद्योगों को अपनी सुविधानुसार शिफ्ट में काम कराने की छूट दी गई है।

मध्य प्रदेश के लेबर कानून में हुए प्रमुख बदलाव

मध्य प्रदेश के शिवराज सरकार ने उद्योगों को राहत व बढ़ावा देने के लिए सबसे पहले लेबर कानूनों में बदलाव की घोषणा की थी। मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में अगले 1000 दिनों (लगभग ढाई वर्ष) के लिए श्रम कानूनों से उद्योगों को छूट दे दी है। आइये जानते हैं शिवराज सरकार ने श्रम कानून में क्या अहम बदलाव किये हैं…छूट की इस अवधि में केवल औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 25 लागू रहेगी।

1000 दिनों की इस अवधि में लेबर इंस्पेक्टर उद्योगों की जांच नहीं कर सकेंगे।

उद्योगों का पंजीकरण/लाइसेंस प्रक्रिया 30 दिन की जगह 1 दिन में ऑनलाइन पूरी होगी।

अब दुकानें सुबह 6 से रात 12 बजे तक खुल सकेंगी। पहले ये समय सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक था।

कंपनियां अतिरिक्त भुगतान कर सप्ताह में 72 घंटे ओवर टाइम करा सकती हैं। शिफ्ट भी बदल सकती हैं।

कामकाज का हिसाब रखने के लिए पहले 61 रजिस्टर बनाने होते थे और 13 रिटर्न दाखिल करने होते थे।

संशोधित लेबर कानून में उद्योगों को एक रजिस्टर रखने और एक ही रिटर्न दाखिल करने की छूट दी गई है।

20 से ज्यादा श्रमिक वाले ठेकेदारों को पंजीकरण कराना होता था। ये संख्या बढ़ाकर अब 50 कर दी गई है।

50 से कम श्रमिक रखने वाले उद्योगों व फैक्ट्रियों को लेबर कानूनों के दायरे से बाहर कर दिया गयासंस्थान सुविधानुसार श्रमिकों को रख सकेंगे। श्रमिकों पर की गई कार्रवाई में श्रम विभाग व श्रम न्यायालय का हस्तक्षेप नहीं होगा।

गुजरात के लेबर कानून में हुए प्रमुख बदलाव

मध्य प्रदेश व यूपी के बाद गुजरात ने भी शुक्रवार देर शाम को लेबर कानूनों में बदलाव की घोषणा कर दी है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 1000 दिन की छूट के मुकाबले गुजरात ने 200 दिन ज्यादा के लिए कानूनी छूट की घोषणा की है। गुजरात में उद्योगों को 1200 दिनों (3.2 साल) के लिए लेबर कानून से छूट प्रदान की गई है। जानते हैं गुजरात सरकार द्वारा किए गए अहम बदलावों के बारे में…नए उद्योगों के लिए 7 दिन में जमीन आवंटन की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।

नए उद्योगों को काम शुरू करने के लिए 15 दिन के भीतर हर तरह की मंजूरी प्रदान की जाएगी।

नए उद्योगों को दी जाने वाली छूट उत्पादन शुरू करने के अगले दिन से 1200 दिनों तक जारी रहेगी।

चीन से काम समेटनी वाली जापानी, अमेरिकी, कोरियाई और यूरोपीयन कंपनियों को लाने का है लक्ष्य।

गुजरात ने नए उद्योगों के लिए 33 हजार हेक्टेयर भूमि की चिन्हित।

नए उद्योगों के रजिस्ट्रेशन व लाइसेंस आदि की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है।

नए उद्योगों को न्यूनतम मजदूरी एक्ट, औद्योगिक सुरक्षा नियम और कर्मचारी मुआवजा एक्ट का पालन करना होगा।

देश की जीडीपी में गुजरात की हिस्सेदारी 7.9 फीसद है। कुल निर्यात में हिस्सेदारी करीब 20 फीसद है।

उद्योगों को लेबर इंस्पेक्टर की जांच और निरीक्षण से मुक्नी सुविधानुसार शिफ्ट में परिवर्तन करने का अधिकार।

आप पर क्या होगा असरउद्योग-धंधे बंद होने से नौकरियां खतरे में हैं और वेतन कटौती का सिलसिला शुरू हो चुका है। उद्योग शुरू होने से स्थिति सुधरेगी।

राज्य अगर चीन से पलायन करने वाली या अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाने में सफल होते हैं तो ये अर्थव्यवस्था और रोजदार दोनों के लिए लाभकारी होगा।

प्रतिमाह 15000 रुपये या कम वेतन वाले कर्मचारी की तनख्वाह में कटौती नहीं की जा सकती है।

पंजीकरण व लाइसेंसी प्रक्रिया तेज होने से उद्योगों के लिए अब कार्य विस्तार करना आसान होगा। इससे रोजगार भी बढ़ेगा।

काम के घंटे बढ़ाकर लॉकडाउन में कम लेबर से भी काम किया जा सकेगा और सोशल डिस्टेंसिंग भी बरकरार रहेगी।

इतिहास की सबसे बड़ी बेरोजगारी व मंदी से बचने में काफी हद तक मददगार साबित हो सकता है।

श्रमिकों के शोषण जैसी आशंका पर विशेषज्ञ कहते हैं, इस वक्त जब बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा या लोग लॉकडाउन में फंसे हुए हैं, उद्योगों को भी श्रमिकों की जरूरत उद्योग शुरू होने से सरकार को भी राजस्व प्राप्त होगा, जो कोरोना की जंग लड़ने में सबसे अहम है।

आपके लिए संभावित खतरासंगठनों को आशंका है कि उद्योगों को जांच और निरीक्षण से मुक्ति देने से कर्मचारियों का शोषण बढ़ेगा।

शिफ्ट व कार्य अवधि में बदलाव की मंजूरी मिलने से हो सकता है लोगों को बिना साप्ताहिक अवकाश के प्रतिदिन ज्यादा घंटे काम करना पड़े। हालांकि, इसके लिए ओवर टाइम देना होगा।

श्रमिक यूनियनों को मान्यता न मिलने से कर्मचारियों के अधिकारों की आवाज कमजोर पड़ेगी।

उद्योग-धंधों को ज्यादा देर खोलने से वहां श्रमिकों को डबल शिफ्ट करनी पड़ सकती है। हालांकि, इसके लिए भी ओवर टाइम का प्रावधान किया गया है।

पहले प्राधान था कि जिन उद्योग में 100 या ज्यादा मजदूर हैं, उसे बंद करने से पहले श्रमिकों का पक्ष सुनना होगा और अनुमति लेनी होगी। अब ऐसा नहीं होगा।

श्रमिक संगठनों को आशंका है कि मजदूरों के काम करने की परिस्थिति और उनकी सुविधाओं पर निगरामी खत्म हो जाएगी।

आशंका है कि व्यवस्था जल्द पटरी पर नहीं लौटी तो उद्योगों में बड़े पैमाने पर छंटनी और वेतन कटौती शुरू हो ग्रेच्युटी से बचने के लिए उद्योग, ठेके पर श्रमिकों की हायरिंग बढ़ा सकते हैं।

बदलावों और उसके प्रभाव पर नजर डालें तो पता चलता है कि कानून में संशोधन के बाद के संभावित खतरों से कहीं ज्यादा खतरा श्रमिकों के लिए उद्योग शुरू न होने पर है। संशोधन के बाद जो संभावित खतरें हैं, उनमें से कई की शुरूआत लॉकडाउन के दौरान कानून बदले जाने से पहले ही हो चुकी है। उम्मीद है कि संशोधन के बाद स्थिति में कुछ सुधार आएगा।