रामायण: रामानंद सागर ने कौवे के आगे जोड़े हाथ, कहा- संकट में हूं, शूट करवा दो

चर्चित टीवी शो रामायण की शूटिंग के बेशुमार किस्से हैं और सारे के सारे काफी दिलचस्प हैं. ऐसे ही किस्सों में से है वो किस्सा जब एक कौवे ने रामायण का एक खास एपिसोड शूट करवाया था. मालूम हो कि जब भगवान शिव मां पार्वती को भगवान राम की कथा सुना रहे थे तो कागभुसुंडि जी चुपके से पीछे बैठकर सुन रहे थे. उन्हीं की वजह से ये कथा धरती पर आई. उन्होंने इस कथा को पंछियों की महासभा में इसे सुनाया और इस तरह आगे बढ़ते-बढ़ते ये संत तुलसीदास तक पहुंच गई.

रामायण में एक छोटा सा सीक्वेंस है कि एक बार दशरथ के महल में छोटा सा बालक जो कि विष्णु अवतार भगवान श्रीराम थे. वो बालक रोटी खाता हुआ रो रहा था और मां को पुकार रहा था. कागभुसुंडि जी ने जब देखा तो सोचा कि ये छोटा सा बालक भगवान हो सकता है जो अपनी रोटी नहीं बचा सकता? उन्हें लगा कि ये जरूर कोई ढोंगी है. मैं जाकर इसकी परीक्षा लेता हूं. कागभुसुंडि ने जाकर उस बालक की रोटी छीन ली.

प्रेम सागर ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके पिता रामानंद सागर ने ये किस्सा सोच तो लिया लेकिन इसे शूट कैसे करना है ये उन्हें समझ नहीं आ रहा था. वो उस वक्त उमरगांव में शूटिंग कर रहे थे. जगह थी वृंदावन स्टूडियो. इस जगह पर बहुत पेड़ थे और शाम को सूरज डूबते ही सारे कौवे चिल्लाने लगते थे.

रामानंद सागर ने सारा यूनिट काम पर लगा दिया कि कौवे पकड़ो हमें सुबह शूटिंग के लिए एक कौआ चाहिए. कौवे को पकड़ना आसान काम नहीं है. सभी ने इस बारे में ढेरों आइडिया दिए लेकिन एक भी कौआ नहीं पकड़ा गया.

किसी तरह रात को 12 बजे तक 4 कौवे पकड़ में आए. रात को उन्हें सेफ्टी के चलते एक एल्यूमिनियम चेन से बांध कर रख दिया गया. कौओं ने इन चेन्स के साथ उड़ने की कोशिश करना और बेतहाशा शोर मचाना शुरू कर दिया.

सुबह 9 बजे से शूटिंग शुरू होनी थी. जब पकड़े गए कौवों को देखा गया तो उनमें से 3 भाग चुके थे. एक ही बचा था. अगले हफ्ते इस एपिसोड की टेलीकास्ट थी दूरदर्शन पर. एक दिन का भी लेट करना संभव नहीं था.

कभी नहीं परेशान होने वाले रामानंद सागर उस रोज थोड़े तनाव में दिखे. आखिरकार उनके चेहरे पर एक मुस्कान दिखी. वो उठे और लाइट से लेकर कैमरा तक सब तैयार कर दिया गया. बच्चे को बिठा दिया गया और फिर रामानंद सागर ने पूरे मन से ये बात कही, “कागभुसुंडि जी को बुलाइए.”

प्रेम सागर ने बताया कि कौवा इतना शोर कर रहा था कि पूरा स्टूडियो गूंज रहा था. इसके बाद रामानंद सागर कौवे के पास गए और आत्मिक रूप से उसे नमस्कार किया. उन्होंने कहा, “हे कागभुसुंडि जी. मैं संकट में हूं. आप मेरी मदद कीजिए. अगले हफ्ते एपिसोड जाना है. करोड़ों लोग देखेंगे.”

प्रेम सागर ने बताया कि जंगली हो चुका कौवा बेहद शांत हो गया था. इसके बाद रामानंद सागर ने उसकी चेन खोल दी और कैमरा के पीछे आ गए. इसके बाद जो भी रामानंद सागर ने कौवे से कहा वो उस कौवे ने माना.

पुलित्‍जर पुरस्‍कर पाने वालों पर भड़के अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप, पत्रकारों को बताया ‘चोर’

वॉशिंगटन 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि रूसी जांच की कवरेज के लिए पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले समाचार-पत्रों को पत्रकारिता के सर्वोच्च सम्मान को लौटा देना चाहिए। ट्रंप ने वाइट हाउस के ओवल ऑफिस में संवाददाताओं से कहा, ‘वे पत्रकार नहीं हैं। वे चोर हैं। वे सभी पत्रकार जिन्हें हम पुलित्जर पुरस्कार के साथ देखते हैं, उन्हें पुरस्कार लौटाने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए क्योंकि वे सभी गलत थे।’ 
अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप ने कहा, ‘आपने आज देखा और दस्तावेज सामने आ रहे हैं जो कह रहे हैं कि रूस के साथ किसी तरह की मिलीभगत नहीं थी।’ उन्होंने यह बात तब कही जब न्याय मंत्रालय ने कहा कि वह ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल (सेवानिवृत्त) माइकल फिन के अभियोजन को समाप्त कर रहा है। 

ट्रंप ने कहा, ‘पुलित्जर पुरस्कार लौटाए जाने चाहिए क्योंकि आपको पता है वे गलत काम के लिए दिए गए। सब फर्जी खबरें थीं। उन पुलित्जर पुरस्कारों को तत्काल लौटाया जाना चाहिए और पुलित्जर समिति या जो कोई भी ये पुरस्कार देता है, उनके लिए शर्म की बात है। उन्हें पुलित्जर पुरस्कार उन खबरों के लिए मिले हैं जो गलत साबित हुई।’ 

उन्होंने कहा, ‘पुलित्जर पुरस्कार उन लोगों को मिलना चाहिए जिन्होंने सही खबर दी थी और मैं आपको उन नामों की भी लंबी सूची दे सकता हूं और आपको पता होगा कि मैं किसकी बात कर रहा हूं।’ ट्रंप ने कहा कि फ्लिन बेकसूर व्यक्ति थे। उन्होंने कहा, ‘फ्लिन एक भद्र पुरुष थे, उन्हें ओबामा प्रशासन ने निशाना बनाया और उन्हें निशाना इसलिए बनाया गया ताकि राष्ट्रपति को नीचे गिराने की कोशिश कर सकें और उन्होंने जो किया वह शर्म की बात है और मुझे लगता है कि इसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी। हमारे देश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ।’ उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकार निर्वाचित राष्ट्रपति के पीछे पड़े रहे। 

तेज हवाओं से पत्ते की तरह हिलने लगा लोहे का पुल, गाड़ियों से उतर कर भागे लोग

बीजिंग. चीन के गुआंगदोंग   प्रांत के एक पुल का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. ये वही पुल है जो बीते दिनों तेज हवा में काफी जोर-जोर से हिलने लगा जिसके बाद इसे सुरक्षा की दृष्टि से बंद करना पड़ा. ये पुल गुआंगदोंग में बहने वाली पर्ल नदी पर बनाया गया है. हालांकि तेज हवाओं के चलते फ़िलहाल इसे आम जनता के लिए बंद कर दिया गया है.

CGTN के इस वीडियो में साफ़ नजर आ रहा है कि तेज हवाओं कि गति से पुल काफी तेज हिलने लगता है. जिस वक़्त पुल ऐसे हिल रहा होता है तब इस पर सैंकड़ों कारें भी मौजूद थीं. पुल को हिलता देख जयादातर गाड़ी वाले गति धीमी कर लेते हैं और कुछ लोग उतर कर भागने भी लगते हैं. ये वीडियो इसी पुल पर लगे सिक्योरिटी कैमरे की है. सीसीटीवी फुटेज में जिस तरह पुल हिलता नज़र आ रहा है वो काफी डरावना है.

ये ह्यूमेन ब्रिज इतनी तेज कैसे हिलने लगा इसकी फ़िलहाल जांच की जा रही है और गुआंगदोंग पुलिस ने इसे बंद कर दिया है. हालांकि शुरूआती जांच में यही सामने आया है कि हवाओं की रफ़्तार सामान्य से काफी ज्यादा है जो पुल के इस तरह हिलने का कारण बन रही हैं.

पुल खाली कराए जाने के बाद भी इसी तरह हिलता देखा गया है, लेकिन पुल को कोई नुकसान नहीं हुआ है. सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को खूब शेयर कर रहे हैं, कुछ लोगों ने इसे काफी डरावना अनुभव भी बताया है. जानकारों का मानना है कि संस्पेंशन ब्रिज को तेज हवाओं की स्थिति के लिए ही डिजाइन किया जाता है इसमें घबराने वाली बात नहीं है.

भारत को कामयाबी, 17 हजार फीट की ऊंचाई पर चीनी सीमा तक सड़क तैयार

कोरोना वायरस के इस लॉकडाउन दौर में भारत ने पिथौरागढ़ से लगी चीन सीमा तक सड़क बनाने में सफलता पा ली है. शुक्रवार को नई दिल्ली से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सड़क का ऑनलाइन उद्घाटन भी कर दिया है.

दरअसल, कैलाश-मानसरोवर यात्रा मार्ग के रूप में प्रसिद्ध धारचूला से लिपुलेख (चीन सीमा) तक बीआरओ द्वारा निर्मित सड़क राष्ट्र को समर्पित हो गई है. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सड़क का उद्घाटन करते हुए कहा कि चीन सीमा तक सड़क बनने से देश मजबूत हुआ है.

राजनाथ सिंह ने कहा कि सड़क बनने से कैलाश मानसरोवर यात्रा सुगम होगी और सेना, आईटीबीपी, एसएसबी के जवान अग्रिम चौकियों तक वाहनों से पहुंच सकेंगे. यह सड़क सामरिक और धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. हमारी सेना को भी अब चीन सीमा तक पहुंचने में आसानी होगी.  

इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भी उपस्थित थे. इसके अलावा कैलाश मानसरोवर की यात्रा भी अब आसान होगी.

बीआरओ ने 80 किलोमीटर की इस सड़क से धारचूला को लिपुलेख से जोड़ा है. यह विस्तार 6000 से 17060 फीट की ऊंचाई पर है.

बता दें कि जनपद पिथौरागढ़ के तहसील धारचूला के ब्यास घाटी के उच्च हिमालयी क्षेत्र के इस सड़क का निर्माण कार्य बीआरओ द्वारा पूरा किया गया है. 2003 में बीआरओ को इस सड़क के निर्माण का जिम्मा सौंपा गया था. यहां की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण निर्माण कार्य अब पूरा हुआ है.

इस सड़क के निर्माण के साथ अब कैलाश मानसरोवर की यात्रा में भी एक और नया अध्याय जुड़ गया है. उत्तराखंड के पारंपरिक लिपुलेख सीमा तक की सड़क बन जाने के बाद तीर्थयात्री सड़क मार्ग से कैलाश मानसरोवर के दर्शन करके एक-दो दिन में ही भारत लौट सकेंगे.  

दरअसल, यह रोड कैलाश मानसरोवर को जोड़ने वाले लिपुलेख तक जाएगी. इस रोड का काम कई सालों से चल रहा था लेकिन ऊंचे पहाड़ और मुश्किल हालात से इसमें काफी दिक्कतें आ रही थी. अभी तक कैलाश मानसरोवर जाने में 3 हफ्ते से ज्यादा का वक्त लगता है जबकि लिपुलेख के रास्ते अब मात्र 90 किलोमीटर की सड़क यात्रा कर कैलाश मानसरोवर पहुंचा जा सकेगा.

घटियाबगढ़ से लेकर लिपुलेख तक करीब 75.54 किलोमीटर रोड का काम बीआरओ कर रहा है. लिपुलेख की तरफ 62 किलोमीटर तक रोड का काम पूरा हो चुका है. घटियाबगढ़ से आगे की तरफ पहाड़ काटकर सड़क बनाने में ऊंचे पहाड़ होने के वजह से बहुत मुश्किलें आई.

वर्तमान में लिपुलेख दर्रे के दुर्गम मार्ग से पैदल यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को करीब एक से डेढ़ लाख रुपए प्रति यात्री खर्च होता है. सुविधाओं के अभाव में यात्रियों को काफी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता है. दूसरा इस यात्रा में 15-16 दिन का समय लगता है.

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे सिक्किम में नाथुला मार्ग खोलने का आग्रह किया था, जिसे उन्होंने मान लिया था. लिपुलेख दर्रे के पार चीन में सीमा से मानसरोवर की दूरी महज 72 किलोमीटर है और सीमा से वहां चीन ने शानदार सड़क पहले ही बना रखी है.

मौसम बुलेटिन में गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद, एनएसए अजीत डोभाल ने पाकिस्तान को दिए ये 3 संदेश

मौसम रिपोर्ट और अनुमान में पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) के गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद को शामिल किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले ने पाकिस्तान को भारत की बदली रणनीति के अहम संकेत दे दिए हैं। इस मामले से जुड़े लोगों ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि कैसे सरकार ने यह फैसला लिया और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार इससे पाकिस्तान को क्या-क्या संदेश देना चाहते हैं। 

सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि इस कदम की कल्पना ‘कुछ समय पहले ‘ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने की थी। औपचारिक प्रस्ताव करीब 3 महीने पहले तैयार किया गया और डेप्युटी नेशनल सिक्यॉरिटी अडवाइजर (स्ट्रैटिजिक अफेयर्स) राजिंदर खन्ना के ऑफिस से 3 फरवरी को विदेश और गृह मंत्रालय के सचिवालय और भारत के दो प्रमुख इंटेलिजेंस एजेंसियों इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और रिसर्च ऐंड एनालिसिस विंग (RAW) को भेजा गया। उन्होंने औपचारिक मंजूरी पिछले सप्ताह दी।

यह मेरा क्षेत्र है’
इस प्रस्ताव को तैयार करने के लिए शुरुआती चर्चाओं का जिक्र करते हुए इस मामले से जुड़े अधिकारी ने बताया कि कैसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा था कि इस एक कदम से पाकिस्तान को कई संदेश जाएंगे। अधिकारी ने कहा कि केंद्रबिंदु यह था, ”यह मेरा क्षेत्र है और मैं सभी कदम उठाकर अपनी संप्रभुता का हक जता रहा हूं।”
  
दूरदर्शन को आदेश, निजी चैनल भी तैयार
इस सप्ताह सरकार ने दूरदर्शन से कहा कि पीओके के मीरपुर, मुजफ्फराबाद और उत्तरी इलाके गिलगित को भी मौसम की खबरों में शामिल किया जाए, जिसे पाकिस्तान गिलगित बाल्टिस्तान कहता है। कुछ निजी समाचार चैनलों ने भी कहा है कि वे भी वेदर बुलेटिन में बदलाव करते हुए इसे शामिल करेंगे। दूरदर्शन से वह वेदर मैप इस्तेमाल करने को कहा गया है कि जिसमें जम्मू-कश्मीर के संपूर्ण क्षेत्र को दर्शाया गया हो। इससे भारत के पक्ष की प्रतिदिन और सार्वजनिक पुनरावृत्ति होगी। 

एक अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि इस कदम ने भारत के दृष्टिकोण में एक बदलाव को दिखाता है, जो पाकिस्तान और उसके सहयोगियों और दुनिया को डंके की चोट पर बताने के लिए है कि इस्लामाबाद ने जम्मू-कश्मीर के 86 हजार स्क्वायर किलोमीटर भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। 

चीन के लिए लिहाज से भी अहम
संप्रभुता पर यह जोर इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा गिलगित बाल्टिस्तान से होकर गुजरता है, जो क्षेत्रफल में केरल से करीब दोगुना है। कुछ सालों पहले चीन ने जब बेल्ट ऐंड रोड इनिशिटिव की शुरुआत की तो उसे उम्मीद थी कि भारत इसमें शामिल होगा, यद्यपि यह पीओके से गुजर रहा था। जब भारत ने इसका विरोध किया तो बीजिंग ने कहा कि नई दिल्ली इसमें शामिल हो क्योंकि इससे दो देशों के बीच विवाद के रूप में कश्मीर की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा। 

पीओके के लोगों की दुर्दशा भी आएगी सामने
अधिकारी ने कहा, ”हर दिन के मौसम रिपोर्ट का नक्शा जम्मू-कश्मीर के संपूर्ण भाग को लेकर भारत के संदेश को हर दिन पुष्ट करेगा।” अधिकारियों ने कहा कि टेलीविजन पर भारत का नक्शा कई तरीकों से यहां रह रहे लोगों की दुर्दशा के बारे में भी बताएगा कि इस्लामाबाद किस तरह इनके अधिकारों का हनन कर रहा है। 

ब्रिटेन को सभी संदेश
इसके अलावा भारत इस कदम से ब्रिटेन के राजनीतिक प्रतिष्ठान को भी संदेश भेजना चाहता है कि वे किसा का पक्ष ना लें। पाकिस्तानी प्रवासियों की एक बड़ी संख्या जो ब्रिटेन में रहती है वह मीरपुर से है, जिनकी लेबर पार्टी के नेताओं जैसे जेरमी कोर्बयन से निकटता है जिन्होंने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के लिए प्रस्ताव पेश किया था। 

अगले कुछ दिनों में रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन की संशोधित सूची होगी जारी: स्वास्थ्य मंत्रालय

कोरोना वायरस से निपटने के लिए देश लॉकडाउन के तीसरे दौर से गुजर रहा है. 14 दिन के इस लॉकडाउन में सरकार की ओर से रियायतें दी गईं हैं. लॉकडाउन 3.0 में देश को तीन जोन में बांटा गया है. ये जोन रेड, ग्रीन और ऑरेंज हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय से शुक्रवार को जब सवाल किया गया कि क्या इन जोन की संशोधित सूची जारी की जाएगी. इसपर स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि डेटा के विश्लेषण के बाद कुछ दिनों में जोन की एक संशोधित सूची जारी की जाएगी.

बता दें कि फिलहाल अभी 130 जिले रेड, 284 ऑरेंज और 319 जिले ग्रीन जोन में हैं. हालांकि छूट के बाद कुछ इलाकों में कोरोना के मामले बढ़े हैं. उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जो ऑरेंज जोना में आता है, यहां मार्च और अप्रैल में कोरोना पर नियंत्रण था, लेकिन लॉकडाउन 3.0 में मिली छूट के बाद यहां पर कोरोना के मामले बढ़ गए हैं.

किस जोन में है कितनी छूट

रेड जोन- रेड जोन में वो जिले हैं जहां कोरोना के एक्टिव केस हैं. इसमें कोरोना केस की कुल संख्या, कंफर्म केस दोगुनी होने की दर, जिलों से प्राप्‍त कुल परीक्षण (टेस्टिंग) और निगरानी सुविधा संबंधी जानकारियों को ध्यान में रखा जाता है. देश के 130 जिले रेड जोन में हैं.

ग्रीन जोन- ग्रीन जोन में ऐसे जिलों को रखा गया है ज‍हां या तो अब तक कोरोना वायरस का कोई भी कंफर्म मामला नहीं आया है या पिछले 21 दिनों में कोई कंफर्म केस सामने नहीं आया है. यानी जो जिले फिलहाल कोरोना से पूरी तरह मुक्त हैं, उन्हें ग्रीन जोन में रखा गया है.

ऑरेंज जोन- इसमें वो जिले आते हैं, जिन्हें न तो रेड जोन और न ही ग्रीन जोन में रखा गया है. यानी बचे हुये जिले ऑरेंज जोन में माने जायेंगे. फिलहाल, 284 जिले इस जोन में हैं.

216 जिलों में एक भी केस नहीं

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि जिन इलाकों को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है, वहां और पाबंदियां लागू करनी होंगी. अब तक ऐसे 216 जिले हैं, जहां अब तक एक भी केस दर्ज नहीं किए गए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देशभर के 42 जिले ऐसे हैं, जहां बीते 28 दिनों से कोरोना वायरस संक्रमण के एक भी मामले सामने नहीं आए हैं. 29 जिले ऐसे हैं जहां बीते 21 दिनों में कोरोना संक्रमण के एक भी मामले सामने नहीं आए हैं.

देश में 36 ऐसे जिले हैं, जहां बीते 14 दिनों से संक्रमण के एक भी केस सामने नहीं आए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक कुल 46 जिले ऐसे हैं, जहां बीते 7 दिनों में कोरोना वायरस संक्रमण का एक भी केस सामने नहीं आया है.

भाजपा Vs कांग्रेस: कमलनाथ सरकार के फैसलों पर CM शिवराज की नजर, तबादला उद्योग पर बैठेगी जांच!

भोपाल. शिवराज सरकार की टेढ़ी नज़र कमलनाथ सरकार के दौरान हुए तबादला उद्योग पर है और वो कमलनाथ सरकार के 13 महीने के कामकाज की जांच करने के मूड में है. खासतौर से कांग्रेस सरकार के आखिरी 6 महीने में हुए फैसलोंं की जांच कराने की तैयारी कर रही है. सरकार को आशंका है कि सत्ता जाने के पहले तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने गलत तरीके से फैसले लेकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया.

बीजेपी सरकार को आशंका है कि कमलनाथ सरकार में हुए फैसलों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है. जबकि शिवराज मंत्रिमंडल की शुक्रवार को हुई अनौपचारिक बैठक में इस मुद्दे को लेकर चर्चा की गई. बैठक में इस बात का सुझाव आया कि ग्रुप ऑफ मिनिस्टर की समिति बनाकर पूरे मामले की पड़ताल की जाए. यदि जांच में तथ्य सही पाए जाते हैं तो उन तथ्यों के आधार पर मौजूदा सरकार पिछली सरकार के खिलाफ एफआईआर तक कर सकती है.

तबादला उद्योग पर नज़र

मध्‍य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि पूर्व सरकार में तबादला उद्योग पनपा था जिसमें बड़े स्तर पर लेनदेन किया गया था. इसके अलावा आखिरी समय में लिए गए फैसलों में भी भ्रष्टाचार होने की संकेत मिले हैं. ऐसे में अब सरकार चाहती है कि पूरे मामले की जांच कर तथ्यों का पता लगाया जाए.

कांग्रेस का पलटवार
शिवराज सिंह चौहान सरकार में पिछली सरकार के फैसलों की जांच की खबर पर कांग्रेस भड़क उठी है. पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हर स्तर की जांच के लिए तैयार है.लेकिन मौजूदा सरकार को उन मामलों की भी जांच करना चाहिए जिनकी जांच तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने शुरू की थी. पीसी शर्मा ने जांच के नाम पर प्रदेश की जनता का ध्यान कोरोना संकट से हटाने का आरोप लगाया है.

अन्य राज्यो में फंसे लोग भी आ सकेंगे मध्यप्रदेश

भोपाल। अपर मुख्य सचिव एवं प्रभारी स्टेट कंट्रोल रूम आईसीपी केशरी द्वारा विभिन्न श्रेणी के पास जारी करने के संबंध में नए निर्देश जारी किए गए हैं।
मध्यप्रदेश के निवासी जो अन्य राज्यों में हैं,
अन्य राज्यों के हॉटस्पॉट जिलों से प्रदेश के जिलों में आने की व्यवस्था पहले नहीं थी। किंतु अब मध्य प्रदेश के निवासी जो अन्य राज्यों के हॉटस्पॉट जिलों में फंसे हुए हैं, वे पास के लिए मैप आईटी पोर्टल http://mapit.gov.in/covid-19 पर वाहन पंजीयन क्रमांक सहित आवेदन कर सकेंगे। ऐसे पास केवल एक बार अन्य राज्यों से मध्यप्रदेश में आने के लिए जारी किये जा सकेंगे। इस व्यवस्था का उपयोग बार-बार आवागमन में नहीं किया जा सकेगा।
प्रदेश के अन्य जिलों में फँसे प्रदेशवासी
पहले के आदेश में इंदौर, उज्जैन, भोपाल, धार, खंडवा एवं खरगोन जिलों से अन्य जिलों के लिए मात्र मेडिकल इमरजेंसी, मृत्यु और विवाह के लिए ही ई-पास किए जा रहे थे। इसमें शिथिलता देते हुए अब इन जिलों से भी अन्य जिलों की तरह कलेक्टर द्वारा प्रदेश के अंदर एवं अन्य जिलों में यात्रा की अनुमति दी जाएगी किंतु यह अनुमति मात्र एक बार ही दी जा सकेगी, जिससे इसका दुरुपयोग न किया जाए। जिस जिले में यह अनुमति दी जा रही है तथा जिस जिले के लिए दी जा रही है, की जानकारी मेप आईटी के पोर्टल पर संबंधित जिलों को दिखाई देती है।
इसका उपयोग कर वे जिलों में आने वाले नागरिकों का चिकित्सीय परीक्षण करवाने के बाद संदिग्ध कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर अनिवार्य रुप से 14 दिन के लिए इंस्टीट्यूशनल क्वॉरेंटाइन और संदिग्ध पाए जाने पर होम क्वॉरेंटाइन करवाया जाए। इन सभी यात्रियों को आरोग्य सेतु /सार्थक एप डाउनलोड करवाया जाए।

ग्वालियर में कोविड-19 की जांच में एक डॉक्टर सहित चार और नए मरीज पॉजिटिव पाए गए

ग्वालियर । जिले में कोरोना को लेकर आज फिर एक बुरी खबर आई । आज पांच और सेम्पल कोरोना पॉजिटिव पाए गए । चिंता की बात ये है कि इनमे एक जूनियर डॉक्टर भी है जो सुपर  स्पेशलिटी हॉस्पिटल में कार्यरत है जहां कोरोना पेशेंट्स का उपचार चल रहा है ।

आज जो रिपोर्ट्स आई उनमें पांच पॉजिटिव आई । इनमे से तीन लोग अहमदाबाद से आये थे । हजीरा पर रहने वाले धर्मवीर,बेहट निवासी भूरी बाक और बेहट के ही देवेंद्र कुशवाह विगत दिनों अहमदावाद से लौटे थे जबकि चौदवीं बटालियन कम्पू निवासी राजेन्द्र कुमार माझी भोपाल से ग्वालियर आये थे और कोरेंटीन थे । इनकी रिपोर्ट पॉजिटिव मिलने के बाद इन्हें सुर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया ।

लेकिन चिंता की बात है सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में कार्यरत जूनियर डॉक्टर डॉ आकाश की रिपोर्ट पॉजिटिव आना । इसके बाद प्रशासन और चिकित्सा महकमे में हड़कम्प है हालांकि वे डॉक्टर्स के लिए बने कोरेंटइन सेंटर में ही रुकते थे फिर भी हॉस्पिटल में कार्यरत सहकर्मियों के टेस्ट कराए जा रहे है और सेंटर आदि के लोगो के साथ उनके मेल मिलाप वाले लोगो की हिस्ट्री भी तलाशी जा जा रही है ताकि उनके भी सेम्पल लिए जा सकें ।