बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय थे:बुद्ध.

▪बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष.
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➖डा.भूपेन्द्र विकल➖
आज से 3000 वर्ष पूर्व वैशाखी पूर्णिमा के दिन महामानव तथागत गौतम बुद्ध का अवतरण हुआ था।

उन्होंने दया, प्रेम, शांति कर समता का दर्शन देकर संपूर्ण विश्व को आलोकित किया। आज के दिन आषाढ़ी पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा और भारतवर्ष को गुरु होने का गोवव प्राप्त हुआ।
बुद्ध का जन्म एसे युग में हुआ था। जब समाज में जाति व्यवस्था जातिभेद प्रबंध हो रहा था ।धार्मिक, अंधविश्वास ,कर्मकांड व पाखंड का बोलबाला था। इस समय सामाजिक कुरीतियों से भारतीय समाज आहत हो रहा था। समाज का हर वर्ग प्रचलित व्यवस्था से दुखी था तथा समाज में आमूलचूल परिवर्तन के लिए उद्वेलित हो रहा था।
ऐसे समय में भगवान बुद्ध का आविर्भाव भारत भूमि पर हुआ। उन्होंने प्रचलित सामाजिक धार्मिक मान्यताओं का कड़ा विरोध किया और समता स्वतंत्रता वंधुता, नैतिकता ,वैज्ञानिक सोच की स्वस्थ परंपरा स्थापित की बुद्ध ने पंचशील द्वारा समाज में मानवता उत्तरजीवी मैत्री करुणा प्रेम शांति व क्षमता जैसे नैतिक मूल्यों की स्थापना की आज देश में जातिवाद को जलाने की बजाय खींचा जा रहा है।तमाम आधुनिक जीवन शैली के बावजूद धार्मिक, अंधविश्वास, कर्मकांड व पाखंड का अंधेरा गहराता जा रहा है।
हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार के रूप में नैतिकता का पतन हो रहा है।
विवेक , वैज्ञानिक सोच का गला घोंटा जा रहा है ऐसे दौर में बुध के चिंतन व दर्शन की प्रसंगिकता और भी बढ़ जाती है।
गौतम बुद्ध ने कहा था ‘मानव तुम शेर का सामना करना, सामने जाकर मुकाबला ही बहादुरी की परीक्षा है ।तुम तलवार का सामना करने से भी भयभीत मत होना व त्याग की कसौटी है। तुम धधकती ज्वाला उसे भी मत डरना यह स्वर्ण परीक्षा है। लेकिन शराब से हमेशा भयभीत रहना क्योंकि है बुराई है गरीबी व दुराचार की जननी है।’ वह को उस सम्यक मार्ग अनुसरण करने को कहते थे। लेकिन वह आवश्यकता से अधिक धन संग्रह की प्रवृत्ति के विरोधी थे। तृष्णा होगी तो बुराइयां पैदा होंगी ।जीवन में अच्छा आचरण यानी सदाचार बौद्ध धर्म सदाचार को ही सील कहा गया है। पंचशील सदाचार के पांच शुभम है जीव हिंसा करना, चोरी ना करना, तथा नशाखोरी से दूर रहना ।
गौतम बुद्ध ने कहा कि किसीबात को इसलिए मत मानो जोकि सदियों से होता आया है। इसलिए मत मानो कि किस धर्म के अंत में लिखा हुआ है ।
किसी साधू की बात को आंख बंद कर मत मान लेना। किसी बात को सिर्फ इसलिए मत मान लेना कि मैं तुमसे कह रहा हुँ, बल्कि हर बात को तर्क विवेक चिंतन की कसोटी पर तोलकर ही मानना है।
बुद्ध ने समाज में व्याप्त जड़ता धार्मिक दास्तां को खत्म कर व्यक्ति के स्वतंत्र चिंतन बुद्धि से करने की बात कही है ।
क्योंकि जो धर्म दिमागी गुलामी आता है ।चमत्कारों कल्पना अंधविश्वासों के सारे चलता है वह कतई आगे नहीं बढ़ सकता संसार मे।
बुद्ध के चिन्तन- विचार ने संसार को नई दिशा दी।आज के दिन बुद्ध के विषय मे जाने हम सभी इन्टरनेट से जान सकते है।हमे जानना चाहिए बुद्ध को …।
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