🔯संसार के मजदूरो की एकजुटता.

▪मजदूर दिवस पर विशेष:-


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➖डा.भूपेन्द्र विकल➖

अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस मनाने की शुरूआत 1 मई 1886 से मानी जाती है।
जब अमेरिका की मज़दूर यूनियनो नें काम का समय 8 घंटे से ज़्यादा न रखे जाने के लिए हड़ताल की थी।इस हडताल से सम्पूर्ण संसार के मजदूर एकजुट हुये थे।

इस हड़ताल के दौरान शिकागो की मार्केट में बम धमाका हुआ था। यह बम किस ने फेंका किसी का कोई पता नहीं।
इसके बाद पुलिस ने मज़दूरों पर गोली चला दी और सात मज़दूर मार दिए।
“भरोसेमंद गवाहों ने तस्दीक की कि पिस्तौलों की सभी फलैशें नली के केंद्र की तरफ से आईं जहाँ पुलिस खड़ी थी और भीड़ की तरफ़ से एक भी फ्लैश नहीं आई। इस से भी आगे वाली बात, प्राथमिक अखबारी रिपोर्टों में भीड़ की तरफ से गोलीबारी का कोई ज़िक्र नहीं।
मौके पर एक टेलीग्राफ खंबा गोलियों के साथ हुई छेद से पुर हुआ था, जो सभी की सभी पुलिस वाले तरफ़ से आईं थीं।”इसका बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा था लेकिन कुछ समय के बाद अमेरिका में 8 घंटे काम करने का समय निश्चित कर दिया गया था।

मौजूदा समय भारत और अन्य मुल्कों में मज़दूरों के 8 घंटे काम करने से संबंधित क़ानून लागू है।

आज 1मई को अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस पर सडको पर विशाल रैली निकालकर जनसभा कर संसार के मजदूर एकजुटता का प्रदर्शन करते है।इस समय संसार भर मे लाकडाउन चल रहा है इसलिए मजदूर जुलूस नही निकाल पा रहे ।
मजदूर अपने घरो मे ही उत्सव मना रहे है ओर सोशल मीडिया पर भी अनेक संदेश प्रेशित कर रहे है।
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