तेलगंना में’लॉक’ शिवपुरी के 9वीं क्लास के 22 बच्चों की आस अब मामा शिवराज और ज्योतिरादित्य सिंधिया से.

तेलगंना में’लॉक’ हैं शिवपुरी के 9वीं क्लास के 22 स्टूडेंट, फूट-फूटकर रो रहे हैं घर आने को तडप रहे हैं

शिवपुरी खबर मन को द्रवित करने वाली हैं,इस कारोना जैसी आपदा में जिसने एक देश को नही बल्कि पूरे विश्व को हिला दिया हैं। धैर्यवान लोगो के भी धैर्य जबाब दे रहे हैं। सरकार भी इस आपदा में आमजन से धैर्य धारण करने की कह रही हैं,लेकिन सरकार का एक मामले में धैर्य जिले के 22 परिवारो के प्रतिदिन रोने और तडपने को मजबूर कर रहा हैं।

शिवपुरी जिले के नरवर कस्बे के पास स्थिल नवोदय विदयालय में पढने वाले 9वीं क्लास के बच्चे माईग्रेन नीति के कारण गैर हिन्दी भार्षी प्रदेश तेलगना भेजे गए। बच्चे पूरे 1 साल से वहां पढ रहे थें।

उनका 21 मार्च को लौटकर आना था। सब कुछ तय था। बच्चे खुश थे कि उनके पेपर खत्म हो गए घर पहुंचने वाले हैं। परिवार से मिलेंगें। लेकिन देश में एक कोरोना संक्रमण ना दिखाई न देने वाले शत्रु का हमला हो गया। लॉकडाउन की घोषणा हो गई बच्चे वही फस गए।

तेलगाना के जिला आदिलावाद के कागजनगर के नवोदय विदयालय में बच्चे स्वस्थय हैं खाने पीने ओर सुरक्षा का पूर्ण इंतजाम हैं। लेकिन फिर भी बच्चो का मन बैचेन हैं तडप हैं घर आने की, उन्है डर सता रहा हैं। बच्चो के परिजनो से बात की तो उन्होने बताया कि फोन पर फूट—फूट कर रोते हैं कि किसी भी तरह हमे वापस बुला लो,जिद करते हैं,लेकिन हमारे हाथ में कुछ नही हैं सब भगवान के भरोसे छोड दिया हैं। बच्चो की माता पिता भी उनसे बात करके रोते है।

मप्र में 53 नवोदय विदयालय हैं प्रत्यके विदयालय से लगभग 20 से लेकर 25 बच्चे गैर हिन्दी भाषी स्टेटो में माइ्ग्रेन नीति के कारण गए है। अगर टोटल बच्चो की बात करे तो लगभग 1200 बच्चे मप्र के फसे हैं। अभी मप्र सरकार में कोटा में तैयारी करने गए बच्चे वापस बुलाए हैं। मजदूरो की भी वापसी शासन कर रहा हैं,लेकिन इनकी सुध अभी तक किसी नही ली,बडा सवाल हैं ऐसा क्यों

नवोदय विदयालय में ग्रामीण क्षेत्रो के बच्चे पढने जाते हैं। प्रत्येक जिले में यह आंकडा 25 से अधिक नही हैं। ग्रामीण सीधे कलेक्टर या नेताओ ओर मीडिया तक नही पहुंच सकते। अगर जिले की विधानसभा के हिसाब से बात करे  तो 5 विधानसभाओ में 5 बच्चे एक ही विधानसभा के नही हैं। इसमें से पोहरी और करैरा विधान सभाए ग्वालियर ओर लोकसभा में आती हैं।

कुल मिलाकर अभी तक इन बच्चो को लाने कही कोई सुगबुहाट नही हैं। शिवुपरी जिले के जनप्रतिनिधियो के संज्ञान में शायद यह मामला नही हैं। केवल कलेकटर शिवपुरी को यह मामला संज्ञान में हैं,उनका कहना हैं कि प्रयास जारी हैं।

इस काम के लिए स्लीपर वह भी बॉल्वो बस उपयुक्त रहेगी। इन बसो में सारी सुविधाए होती हैं अटेच लैट बाथ होत हैं। एक स्लीपर एक बच्चा आ सकता हैं। बस सफर में आराम दायक रहेंगी। बिना रूके इन बसो से लोग लंबा सफर करते है। अब देखना यह हैं कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठता हैं। बच्चो को कब और कैसे लेकर आता हैं।

यह है बच्चे और उनके नाम और पता

 विनय रघुवंशी -मि उग़सेन रघुवंशी  lukwasa

Devansh -mr.Devendra Raghuvanshi Anantpur

Santosh Sahu-mr.mayaram Sahu,karera

Abhishek Gautam-mr.preetam Gautam,bamor Kala

Hero lodhi-mr.surajbhan lodhi,barodi

Prashant Agarwal-mr.Bhagvati Agrawal,Berad

Amit Dhakad-mr.Ramkumar Dhakad,morena

Sumit Ahirwar-mr Dhaniram Ahirwar,pichor

Kushal Lodhi-mr Mohan Singh lodhi,kolaras

Saransh Gupta -mr Bipin Kumar Gupta,Bamor Kala

Amardeep Rajouriya-mr. Ashok Rajouriya,magroni

Bhanu Yadav -mr.Banvari Yadav,Berad

Harshdeep -mr.Mahendra Gupta,pichore

Anshul Koli -mr.Bindravan Koli,Khaniyadana

Tulsi khatik – mr.Santosh khatik,lukwasa

Deepti Ahirwar-mr. Kailash Ahirwar,khaniyadana

Deepa Baghel -mr.Hukum singh,narwar

Raksha Kushwah- mr Mohar Singh Kushwah,karera

Sandeep Kaur -mr. Amarjeet Singh,Magroni

Monika Lodhi-mr Purushottam,indar

Swati Yadav ,. Deeraj Singh, karera

Saloni baish,. Bhoopendra Singh narwar

saloni khathik  udesh khatik ,lukwasa

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