PM संग CM की चर्चा में दो राज्यों को छोड़ सभी ने दिया लॉकडाउन हटाने का सुझाव

संक्रमण के चलते जारी लॉकडाउन के दौरान उनकी मुख्यमंत्रियों के साथ यह चौथी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग है। बैठक में तीन मुद्दों पर चर्चा हुई है। एक, राज्यों में कोरोना संक्रमण की मौजूदा स्थिति और रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयास। दूसरे 20 अप्रैल से गृह मंत्रालय द्वारा प्रदत्त छूटों के क्रियान्वयन पर राज्यों का फीडबैक और तीसरे, तीन मई के बाद की क्या रणनीति हो।
देश में कोरोना संकट की शुरुआत के बाद 22 मार्च से अब तक प्रधानमंत्री मोदी राज्यों के
मुख्यमंत्रियों के साथ चार बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बैठक कर चुके हैं। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन के अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय एवं अन्य संबद्ध मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की। इसके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

कोरोना वायरस पर जारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आज की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी शामिल हुए। वहीं, इस चर्चा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। हालांकि इस दौरान राज्यों की तरफ से भी अपने मुद्दे रखे गए। इनमें आर्थिक पैकेज की मांग प्रमुख हैं।

-चर्चा के दौरान मेघालय के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी से लॉकडाउन को तीन मई के आगे बढ़ाने का सुझाव दिया।कोरोना वायरस को लेकर जारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन शामिल नहीं हुए हैं। एएनआई ने सूत्रों के हवाले से कहा कि केरल ने अपने सुझाव लिखित में दिए हैं।

उत्तराखंड के सीएम ने कहा कि पर्यटन और तीर्थयात्री लॉकडाउन से बहुत प्रभावित हुए हैं। पीएम के हस्तक्षेप से हम जल्द ही अपने उद्योग और अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित कर पाएंगे। सभी एहतियाती उपायों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ, व्यापार और व्यापार गतिविधियां चरण-वार तरीके से शुरू होनी चाहिए। हमें धीरे-धीरे स्थिति को सामान्य करने के लिए लोगों के जीवन को आसान बनाना होगा। मिजोरम के मुख्यमंत्री ने इस बारे में बात की कि लॉकडाउन के बाद केंद्र के निर्देशों का किस तरह पालन होगा।

-पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने राज्य के स्वास्थ्य संबंधी योद्धाओं के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) और अन्य चिकित्सा उपकरण प्रदान करने के लिए केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने तीन मई को लॉकडाउन खत्म होने पर उद्योग शुरू करने की इच्छा व्यक्त की और कोविद -19 से लड़ने के लिए भारत सरकार से वित्तीय सहायता मांगी।

-ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा कि वह लॉकडाउन जारी रखने के पक्ष में हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि आर्थिक गतिविधियों को इजाजत दी जाए। पटनायक ने कहा, “मैं केंद्र सरकार से विनती करता हूं कि हम अर्थव्यवस्था के उपायों को शुरू करें क्योंकि हम बीमारी पर लगाम लगाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

–मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इंदौर, भोपाल, उज्जैन और जबलपुर सहित एक दर्जन जिलों को   छोड़कर अन्य इलाकों में राहत देना चाहते हैं | साथ ही वे लोगों को रोजगार दिलाने और किसानों को उपज को उचित तरीके से बेचने के बेहतर इंतजाम करना चाहते हैं |

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा रविवार शाम जारी आंकड़ों के अनुसार देश में कोरोना रोगियों की संख्या बढ़कर 26917 हो गई है। इस बीच 5914 लोगों को अस्पताल से छुटी दी जा चुकी है। सरकार का दावा है कि कोरोना मरीजों के स्वस्थ होने के प्रतिशत में भी लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है तथा यह बढ़कर 21.90 फीसदी तक पहुंच गया है। बाकी 20177 लोगों का देश के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। उधर, कैबिनेट सचिव ने भी राज्यों के मुख्य सचिवों एवं पुलिस महानिदेशकों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बात की। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में ज्यादा मामले हैं, वे लॉकडाउन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं तथा चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाएं।

भारत मे समान नागरिक संहिता लागू हो.

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➖सुधाकर चतुर्वेदी➖
    23 नवंबर 1948 को समान नागरिक विस्तृत चर्चा के बाद संविधान में अनुच्छेद 44 जोड़ा गया और सरकार को निर्देश दिया गया कि सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू करें. संविधान निर्माताओं की मंशा थी कि अलग-अलग धर्म के लिए अलग-अलग कानूनों के बजाय सभी नागरिकों के लिए धर्म जाति भाषा क्षेत्र और लिंग निरपेक्ष एक ‘भारतीय नागरिक संहिता’ लागू होना चाहिए   अंग्रेजो द्वारा 1860 में बनाई गई भारतीय दंड संहिता, 1961 में बनाया गया पुलिस ऐक्ट, 1872 में बनाया गया एविडेंस एक्ट और 1908 में बनाया गया सिविल प्रोसीजर कोड सहित सैकड़ों अंग्रेजी कानून सभी भारतीय नागरिकों पर समान रूप से लागू हैं. पुर्तगालियों द्वारा 1867 में बनाया गया पुर्तगाल सिविल कोड गोवा के सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू है लेकिन विस्तृत चर्चा के बाद बनाया गया आर्टिकल 44 लागू करने के लिए कभी गंभीर प्रयास नहीं किया गया. आजतक भारतीय नागरिक संहिता का एक मसौदा भी नहीं बनाया गया. परिणाम स्वरूप बहुत कम लोगों को ही इससे होने वाले लाभ के बारे में पता है.

भारतीय नागरिक संहिता के लागू नहीं होने से अनेक समस्याएं हैं:

1 मुस्लिम कानून मे एक पति-चार पत्नी की छूट है लेकिन अन्य धर्मो पर एक पति-एक पत्नी का कठोर नियम लागू है, बाझपन या नपुंसकता जैसे उचित कारण होने पर भी दूसरा विवाह अपराध है और इसके लिए जेल जाना पड़ता है. जेल से बचने के लिए कई लोग मुस्लिम धर्म अपना लेते हैं. पाकिस्तान में बिना पहली पत्नी की सहमति से दूसरा विवाह नहीं हो सकता हैं.

मुस्लिम लड़कियों की वयस्कता की उम्र अस्पष्ट है इस कारण 13 वर्ष की उम्र मे भी लड़कियों का विवाह होता है जबकि अन्य धर्मो मे लड़कियों की उम्र 18 वर्ष और लड़को की उम्र 21 वर्ष है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 20 वर्ष से पहले गर्भधारण करना जच्चा-बच्चा दोनों के लिए हानिकारक है इसलिए लड़का-लड़की की विवाह की न्यूनतम उम्र 21 करना बहुत जरूरी है

3 तत्काल तीन तलाक गैरकानूनी होने के बावजूद तलाक-ए-हसन एवं तलाक-ए-अहसन मान्य है और इनमें तलाक का आधार बताने की बाध्यता नहीं है. केवल 3 महीने प्रतीक्षा करना है लेकिन अन्य धर्मो मे केवल न्यायालय के माध्यम से ही विवाह-विच्छेद किया जा सकता है. इन तलाकों का न्यायपालिका के प्रति जवाबदेही नहीं होने के कारण मुस्लिम औरतों को भय के वातावरण में रहना पड़ता है. टर्की जैसे मुस्लिम बाहुल्य देश में भी किसी तरह का मौखिक तलाक मान्य नहीं है. हिंदू ईसाई और पारसी दम्पत्ति आपसी सहमति से भी मौखिक विवाह विच्छेद की सुविधा से वंचित है.

4 मुस्लिम कानून मे मौखिक वसीयत एवं दान भी मान्य है लेकिन अन्य धर्मो मे केवल पंजीकृत वसीयत एवं दान ही मान्य है. मुस्लिम कानून मे एक-तिहाई से अधिक सम्पत्ति का वसीयत नहीं किया जा सकता है जबकि अन्य धर्मो मे समस्त सम्पत्ति का वसीयत किया जा सकता है.
5 मुस्लिम कानून मे उत्तराधिकार की व्यवस्था अत्यधिक जटिल है, पैत्रिक सम्पत्ति में पुत्र एवं पुत्रियों के मध्य अत्यधिक भेदभाव है, अन्य धर्मो में भी विवाहोपरान्त अर्जित सम्पत्ति में पत्नी के अधिकार अपरिभाषित हैं और उत्तराधिकार के कानून जटिल हैं, विवाह के बाद पुत्रियों के पैत्रिक सम्पत्ति में अधिकार सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं है और विवाहोपरान्त अर्जित सम्पत्ति में पत्नी के अधिकार अपरिभाषित हैं.

6  मुस्लिम गोद नहीं ले सकता और अन्य धर्मो मे पुरुष प्रधानता के साथ गोद व्यवस्था लागू है.

   उपरोक्त सभी विषय मानव अधिकार से सम्बन्धित हैं जिनका न तो धर्म से संबंध है और न इन्हें धार्मिक व्यवहार कहा जा सकता है फिर धर्म के नाम पर भेदभाव क्यों? हमारे संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 44 के माध्यम से भारतीय नागरिक संहिता की बात की थी ताकि देश की एकता और अखंडता मजबूत हो. गोवा में एक कानून सभी लोगों पर लागू है. न तो मुस्लिम के लिए और न हिंदू के लिए कोई छूट है फिर यह व्यवस्था पूरे देश मे क्यों नहीं लागू हो सकती?।

भारतीय नागरिक संहिता के एक नहीं अनेक लाभ हैं

1 इससे देश और समाज को सैकड़ों जटिल कानूनों से मुक्ति मिलेगी.

2  वर्तमान समय में लागू ब्रिटिश कानूनों से सबके मन में हीनभावना पैदा होती है. इसलिए भारतीय नागरिक संहिता से हम हीन भावना से मुक्त हो सकेंगे.

3  ‘एक पति-एक पत्नी’ की अवधारणा सभी भारतीयों पर लागू होगी और अपवाद का लाभ सभी भारतीयों को मिलेगा, चाहे वह पुरुष हो या महिला, हिंदू हो या मुसलमान, पारसी हो या इसाई.

4  न्यायालय के माध्यम से विवाह-विच्छेद करने का एक सामान्य नियम सबके लिए लागू होगा. विशेष परिस्थितियों में मौखिक तरीके से विवाह विच्छेद करने की अनुमति सभी नागरिकों को होगी, चाहे वह पुरुष हो या महिला, हिंदू हो या मुसलमान, पारसी हो या इसाई.

5 पैतृक संपति में पुत्र-पुत्री तथा बेटा-बहू को समान अधिकार प्राप्त होगा और संपति को लेकर धर्म जाति क्षेत्र और लिंग आधारित विसंगति समाप्त होगी.

6   विवाह-विच्छेद की स्थिति में विवाहोपरांत अर्जित संपति में पति-पत्नी को समान अधिकार होगा.

7   वसीयत दान धर्मजत्व संरक्षकत्व बंटवारा गोद इत्यादि के संबंध में सभी भारतीयों पर एक समान कानून लागू होगा और धर्म जाति क्षेत्र तथा लिंग आधारित विसंगति समाप्त होगी.

8   राष्ट्रीय स्तर पर एक समग्र एवं एकीकृत कानून मिल सकेगा.

9  जाति धर्म क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग कानून होने से पैदा होने वाली अलगाववादी मानसिकता समाप्त होगी और एक अखण्ड राष्ट्र के निर्माण की दिशा में हम आगे बढ़ सकेंगे.

10 अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग कानून होने के कारण अनावश्यक मुकदमेबाजी में उलझना पड़ता है. सबके लिए एक नागरिक संहिता होने से न्यायालय का बहुमूल्य समय बचेगा.

11 मूलभूत धार्मिक अधिकार जैसे पूजा, नमाज या प्रार्थना करने, व्रत या रोजा रखने तथा मन्दिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा का प्रबंधन करने या धार्मिक स्कूल खोलने, धार्मिक शिक्षा का प्रचार प्रसार करने या विवाह-निकाह की कोई भी पद्धति अपनाने या मृत्यु पश्चात अंतिम संस्कार के लिए कोई भी तरीका अपनाने में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं होगा.

    अनुच्छेद 44 पर बहस के दौरान बाबासाहब अंबेडकर ने कहा था- ”व्यवहारिक रूप से इस देश में एक सिविल संहिता है जिसके प्रावधान सर्वमान्य हैं और समान रूप से पूरे देश में लागू हैं. केवल विवाह और उत्तराधिकार का क्षेत्र है जहां समान कानून लागू नहीं है. यह बहुत छोटा सा क्षेत्र है जिस पर हम समान कानून नहीं बना सके हैं, इसलिए हमारी इच्छा है कि अनुच्छेद 35 को संविधान का भाग बनाकर सकारात्मक बदलाव लाया जाए. यह आवश्यक नहीं है कि उत्तराधिकार के कानून धर्म द्वारा संचालित हों. धर्म को इतना विस्तृत और व्यापक क्षेत्र क्यों दिया जाना चाहिए कि वह संपूर्ण जीवन पर कब्जा कर ले और विधायिका को इन क्षेत्रों में हस्तक्षेप करने से रोके”

    संविधान सभा के सदस्य के.एम. मुंशी ने कहा “हम एक प्रगतिशील समाज हैं और ऐसे दौर में धार्मिक क्रियाकलापों में हस्तक्षेप किए बिना हमें देश को एकीकृत करना चाहिए, बीते कुछ वर्षों में धार्मिक क्रियाकलाप ने जीवन के सभी क्षेत्रों को अपने दायरे में ले लिया है, हमें ऐसा करने से मना करने का निर्णय लेना पड़ेगा और कहना होगा कि ये मामले धार्मिक नहीं बल्कि धर्मनिरपेक्ष कानून के विषय हैं. यह अनुच्छेद इसी बात पर बल देता है. मैं अपने मुस्लिम मित्रों को अहसास कराना चाहता हूं कि जितना जल्दी हम जीवन के पृथक्करणीय दृष्टिकोण को भूल जाएंगे, देश और समाज के लिए उतना ही अच्छा होगा. धर्म उस परिधि तक सीमित होना याहिए जो नियमत: धर्म की तरह दिखता है और शेष जीवन इस तरह से विनियमित, एकीकृत और संशोधित होना चाहिए कि हम जितनी जल्दी संभव हो, एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्र में निखर सके”

      संविधान सभा के सदस्य कृष्णास्वामी अय्यर ने कहा “कुछ लोगों का कहना है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड बन जाएगा तो धर्म खतरे में होगा और समुदाय मैत्रियता के साथ नहीं रह सकते. इस अनुच्छेद का उद्देश्य ही मैत्रियता लाना है. यह मैत्रियता को समाप्त नहीं बल्कि मजबूत करेगा. उत्तराधिकार या इस प्रकार के अन्य मामलों में अलग-अलग व्यवस्थाएं ऐसे कारक हैं जो भारत के तमाम लोगों में भिन्नता पैदा करते हैं. समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य है कि शादी-विवाह उत्तराधिकार के मामलों में एक समान सहमति तक पहुंचने का प्रयास करना है. जब ब्रिटिश हमारे देश की सत्ता पर काबिज हुए तो उन्होंने कहा कि इस देश के सभी नागरिक चाहे हिंदू हों या मुसलमान, पारसी हो या ईसाई, सबके लिए समान रूप से लागू होने वाला भारतीय दंड संहिता लागू करने जा रहे हैं. क्या तब मुस्लिम अपवाद बने रह पाए और क्या वे आपराधिक कानून की एक व्यवस्था को लागू करने के लिए ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ विद्रोह कर सके? भारतीय दंड संहिता हिंदू और मुसलमान पर एक समान रूप से लागू होता है.यह कुरान द्वारा नहीं बल्कि विधिशास्त्र द्वारा संचालित है. इसी तरह संपत्ति कानून  इंग्लिश विधिशास्त्र से लिए गए हैं”.

      1985 में शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था: “यह अत्यधिक दुख का विषय है कि हमारे संविधान का अनुच्छेद 44 मृत अक्षर बनकर रह गया है. यह प्रावधानित करता है कि सरकार सभी नागरिकों के लिए एक यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाए लेकिन समान नागरिक संहिता बनाने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास किए जाने का कोई साक्ष्य नहीं मिलता है, कॉमन सिविल कोड विरोधाभासी विचारों वाले कानूनों के प्रति पृथक्करणीय भाव को समाप्त कर राष्ट्रीय अंखडता के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयोग करेगा”.

     1995 में सरला मुदगल केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा: “संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत व्यक्त की गई संविधान निर्माताओं की इच्छा को पूरा करने में सरकार और कितना समय लेगी? उत्तराधिकार और विवाह को संचालित करने वाले परंपरागत हिंदू कानून को बहुत पहले ही 1955-56 में संहिताकरण करके अलविदा कर दिया गया है. देश में यूनिफॉर्म सिविल संहिता को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित करने का कोई औचित्य नहीं है. कुछ प्रथाएं मानवाधिकार एंव गरिमा का अतिक्रमण करते हैं. धर्म के नाम पर सिविल एवं भौतिक आजादी का गला घोटना स्वराज्य नहीं बल्कि निर्दयता है, इसलिए यूनिफॉर्म सिविल कोड का होना निर्दयता से सुरक्षा प्रदान करने और राष्ट्रीय एकता एवं सौहार्द को प्रोत्साहित करने के लिए बहुत जरूरी है”.

      2003 में जॉन बलवत्तम केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा: “यह दुख की बात है कि संविधान के अनुच्छेद 44 को आज तक लागू नहीं किया गया, संसद को अभी भी देश में कॉमन सिविल कोड के लिए कदम उठाना है. कॉमन सिविल कोड वैचारिक मतभेदों को दूर कर देश की एकता-अखंडता को मजबूत करने में सहायक होगा.”

      2017 में शायरा बानो केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा “हम भारत सरकार को निर्देशित करते हैं कि वह उचित विधान बनाने पर विचार करें, खासतौर पर ‘तलाक-ए-विद्दत के संदर्भ में, हम आशा एवं अपेक्षा करते हैं कि आने वाला यह विधान व्यक्तिगत कानून- शरीयत में हुए सुधारों, जैसा कि वैश्विक पटल पर। और यहाँ तक कि इस्लामिक देशों में भी कानूनों के माध्यम से किया गया है, पर भी विचार करेगा. जब ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीय दंड संहिता के माध्यम सबके लिए एक कानून लागू किया जा सकता है तो स्वतन्त्र भारत में पीछे रह जाने का कोई कारण नहीं पाते है”.

      2019 में जोस पाउलो केस में सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा कि पिछले 63 सालों में समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार की तरफ से कोई प्रयास नहीं किया गया. कोर्ट ने अपने टिप्पणी में गोवा का उदाहरण दिया और कहा कि “1956 में हिंदू लॉ बनने के 63 साल बीत जाने के बाद भी पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया.

        प्रमुख समाजवादी नेता डॉ राम मनोहर लोहिया ने कहा था: “एक ही विषय पर हिंदू मुस्लिम ईसाई पारसी के लिए अलग अलग कानून, धर्मनिरपेक्षता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों और देश की एकता-अखंडता के लिए अत्यधिक खतरनाक है”

      पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने कहा था: “मेरी समझ में नहीं आ रहा है, जब संविधान निर्माताओं ने शादी-विवाह के लिए एक कानून बनाने की सिफारिश की है और कहा है कि राज्य इसकी तरफ ध्यान देगा, तो क्या वे साम्प्रदायिक थे, क्या यह संप्रदायिकता मुद्दा है? क्रिमिनल लॉ एक है तो सिविल लॉ क्यों नहीं एक हो सकता है?”.

       पूर्व केंद्रीय मंत्री और केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां कहते हैं: “यदि आप किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं चाहते हैं तो इसे व्यक्तिगत बनाये रखें, यदि न्यायालय से शरीयत के अपने अधिकार को सुरक्षित करना चाहते हैं तो देखना पड़ेगा कि किसे सुरक्षित करने की मांग की जा रही है”.

·      अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सदस्य ताहिर महमूद कहते हैं: “परंपरागत कानून के लिए धार्मिक राजनीतिक दबाव बनाने की बजाय मुसलमानों को समान नागरिक संहिता की मांग करना चाहिये.

       आर्टिकल 37 में स्पस्ट लिखा है कि नीति निर्देशक सिद्धांतों को लागू करना सरकार की फंडामेंटल इयूटी है. जिस प्रकार संविधान और कानून का पालन सभी नागरिकों की फंडामेंटल ड्यूटी है वैसे ही संविधान को शतप्रतिशत लागू करना सरकार की नैतिक ड्यूटी है. सेक्युलर देश में धार्मिक आधार पर अलग-अलग कानून नहीं होता है लेकिन हमारे यहाँ आज भी हिंदू मैरिज एक्ट, पारसी मेरिज एक्ट और ईसाई मेरिज एक्ट लागू है, जब तक भारतीय नागरिक संहिता लागू नहीं होगी तब तक भारत को सेक्युलर कहना सेक्युलर शब्द को गाली देना जैसा है.

      भारत में विद्यमान धर्म जाति क्षेत्र लिंग आधारित अलग-अलग कानून देश के धर्म-आधारित विभाजन के बुझ चुके आग में सुलगते हुए धुंए की तरह है जो विस्फोटक होकर देश की एकता को कभी भी खण्डित कर सकता है इसलिए इन्हें समाप्त कर एक भारतीय नागरिक संहिता बनाना न केवल धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखने के लिए बल्कि देश की एकता-अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए भी अतिआवश्यक है. दुर्भाग्य से भारतीय नागरिक संहिता को हमेशा धार्मिक तुष्टिकरण के चश्मे देखा जाता रहा है.

       जिस दिन भारतीय नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार हो जाएगा और आम जनता को इसके लाभ के बारे में पता चल जाएगा, उस दिन कोई भी इसका विरोध नहीं करेगा. वर्तमान समय में जिन लोगों को इसके बारे में कुछ भी नहीं पता वे भी इसका विरोध कर रहे हैं. भारतीय नागरिक संहिता से रूढ़िवाद, कट्टरवाद, जातिवाद, सम्प्रदायवाद, क्षेत्रवाद और भाषावाद समाप्त होगा तथा वैज्ञानिक सोच विकसित होगी. सच्चाई तो यह है कि भारतीय नागरिक संहिता का फायदा हिंदू-बहन बेटियों को ज्यादा नहीं मिलेगा क्योंकि हिंदू मैरिज ऐक्ट में महिला-पुरुष को लगभग समान अधिकार पहले से ही प्राप्त है. इसका सबसे ज्यादा फायदा मुस्लिम बहन-बेटियों को मिलेगा क्योंकि शरिया कानून में उन्हें पुरुषों के बराबर नहीं माना जाता है. भारतीय नागरिक संहिता लागू होने से हिंदू मुस्लिम पारसी ईसाई की बहन बेटियों के अधिकारों मे भेदभाव खत्म होगा.

       कुछ लोग आर्टिकल 25 में प्रदत्त धार्मिक आजादी की दुहाई देकर भारतीय नागरिक संहिता का विरोध करते है लेकिन आर्टिकल 25 की शुरुआत ही होती है ‘सब्जेक्ट टू पब्लिक ऑर्डर, हेल्थ एंड मोरैलिटी’ अर्थात कुप्रथा और भेदभाव को धार्मिक स्वतंत्रता नहीं मान सकते हैं. यदि महिला पुरुष में गैर बराबरी हो रही है तो वह रीति नहीं बल्कि कुरीति है और उसे धार्मिक स्वतंत्रता नहीं माना जाएगा, क्योंकि यह देश वेद पुराण गीता रामायण बाइबिल या कुरान से नहीं बल्कि संविधान से चलता है और समता समानता समान अवसर तथा समान अधिकार संविधान की मूल भावना है.

       सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट सरकार से कानून बनाने के लिए नहीं कह सकता  लेकिन वह अपनी भावना व्यक्त कर सकता है और बार-बार यही कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट एक जुडिशियल कमीशन या एक्सपर्ट कमेटी बनाने का निर्देश दे सकता है जो विकसित देशों की समान नागरिक संहिता और भारत में लागू कानूनों का अध्ययन करे और सबकी अच्छाइयों को मिलाकर एक भारतीय नागरिक संहिता का एक ड्राफ्ट तैयार हो ।जिससे इस विषय पर सार्वजनिक चर्चा शुरू हो सके।
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▪लेखक:-पं.सुधाकर चतुर्वेदी.
मालेगांव बम ब्लास्ट केस के मुख्य आरोपी रहे है.
अभिनव भारत संगठन के राष्ट्रीय महासचिव रहे है,इस संगठन को सरकार ने रोक लगादी है.
वर्तमान मे राष्ट्रीय अध्यक्ष है-उतिष्ठ भारत,के.
🤳92609-19277
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अंतत: पत्रकारों के दबाव में कलेक्टर ने विवादास्पद एसडीएम गुर्जर को हटाया
बडे बेआबरू अंदाज में हुई विदाई, अरविंद बाजपेई बने नए एसडीएम



शिवपुरी। विवादों से घिरे और भ्रष्टाचार के आरोपों और अभद्र व्यवहार के लिए चर्चित शिवपुरी एसडीएम अतेंद्र सिंह गुर्जर को अंतत: कलेक्टर अनुग्रह पी ने हटा दिया है। उन्हें भोपाल के लिए रिलीव कर दिया गया है और उनके स्थान पर अरविंद बाजपेई को शिवपुरी एसडीएम बनाया गया है। श्री बाजपेई पहले करैरा के एसडीएम रह चुके हैं। हटाए गए एसडीएम गुर्जर को हटाने के लिए शिवपुरी के पत्रकारों ने संयुक्त मोर्चा बनाकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था और ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, विधायक, सांसद, पूर्व सांसद, संभाग के प्रभारी मंत्री और गृह मंत्री को भी सौंपी थी और सभी जनप्रतिनिधियों ने इस मामले में पत्रकारों को समर्थन देते हुए कलेक्टर को एसडीएम गुर्जर को हटाने के लिए कहा था। वहीं दूसरी ओर एसडीएम गुर्जर की समर्थक लॉबी ने भी उन्हें पद पर बनाए रखने के लिए दबाव डाला था। लेकिन अंतत: आज जब शिवपुरी के पत्रकार कलेक्ट्रेट एसडीएम को हटाने के लिए अंतिम रूप से अल्टीमेटम देने के लिए कलेक्टर के पास पहुंचे तो यहां एडीएम आरएस बालौदिया ने पत्रकारों को बताया कि एसडीएम गुर्जर को रिलीव कर दिया गया है और नया एसडीएम डिप्टी कलेक्टर अरविंद बाजपेई को बनाया गया है।
विवादास्पद एसडीएम लगभग 15 माह से शिवपुरी मेें जमे हुए थे और उन्हें कलेक्टर का विश्वासपात्र माना जाता था। इस भरोसे उन्होंने एक नहीं बल्कि अनेक बार अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया, सीमा से बाहर निकले। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे और आम जनता से तानाशाहीपूर्ण व्यवहार किया। इस कारण उनके हौंसले इतने बुलंद हो गए जिसके चलते 22 अप्रैल को उन्होंने शिवपुरी के तीन अधिमान्य पत्रकारों के साथ अपने निवास स्थान पर अभद्र व्यवहार किया। उन पर कोरोना फैलाने के झूठे आरोप लगाए और अपने अधीनस्थों से कहकर तीनों को धक्के मारकर बाहर निकाल देने का आदेश दिया। एसडीएम के इस तानाशाहीपूर्ण रवैये से पत्रकारों में रौष छा गया और पत्रकारों ने पहले जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एचपी वर्मा को 22 अप्रैल को ज्ञापन सौंपा और उनसे तुरंत विवादास्पद एसडीएम गुर्जर को पद से हटाने के लिए कहा। इसके बाद पत्रकारों ने 23 अप्रैल को कलेक्टर अनुग्रह पी को ज्ञापन सौंपा और उनको एसडीएम की विवादास्पद कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताया। जिसे कलेक्टर ने काफी गंभीरता से सुना और वह इस बात से सहमत हुई कि एसडीएम ने पत्रकारों के साथ ठीक व्यवहार नहीं किया। कलेक्टर ने पत्रकारों से कहा कि वह शीघ्र ही इस संबंध में निर्णय लेंगी। लेकिन तात्कालिक रूप से इतनी जल्दी इसलिए निर्णय नहीं ले सकती क्योंकि उनके पास अधिकारियों की कमी है और कोरोना जैसी महामारी का प्रकोप छाया हुआ है। पत्रकारों ने उनसे समय सीमा बताने का आग्रह किया। लेकिन कलेक्टर ने असमर्थतता जाहिर की। परंतु कहा कि वह जितनी जल्दी हो सकेगा, उतनी जल्दी निर्णय लेंगी। पत्रकारों ने इस मामले मेें शिवपुरी विधायक और पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, सांसद केपी यादव, भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, संभाग के प्रभारी मंत्री, कमिशनर आदि को भी भेजी गई। खास बात यह रही कि सभी जनप्रतिनिधियों ने माना कि पत्रकारों के साथ एसडीएम ने अभद्र व्यवहार किया है। सूत्रों के अनुसार इस संबंध में यशोधरा राजे सिंधिया ने नाराजी व्यक्त करते हुए कलेक्टर अनुग्रह पी से तत्काल एसडीएम को रिलीव करने को कहा। लेकिन कलेक्टर ने व्यवस्था होने तक यशोधरा राजे से 48 घंटे का समय मांगा। सूत्र बताते हैं कि पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और सांसद केपी यादव ने भी कलेक्टर अनुग्रह पी से एसडीएम को हटाने के लिए कहा। भाजपा मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने इस संबंध में कमिशनर से भी बातचीत की और उन्हें पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। श्री पाराशर ने पत्रकारों को यह भी आश्वासन दिया कि वह इस पूरी घटना की जानकारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को देंगे तथा ऐसे अभद्र व्यवहार करने वाले एसडीएम को शिवपुरी जैसे शांत जिले में नहीं रहने देंगे। भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य धैर्यवर्धन शर्मा और सुरेंद्र शर्मा ने भी कलेक्टर से एसडीएम गुर्जर को हटाने के लिए कहा। लेकिन 48 घंटे के बाद भी कलेक्टर ने एसडीएम गुर्जर को नहीं हटाया। लेकिन वह पत्रकारों को आश्वासन अवश्य देती रहीं कि जैसे ही व्यवस्था होगी वह एसडीएम गुर्जर को रिलीव कर देंगी। इसके बाद पत्रकारों ने आज अपने साथियों की आवश्यक बैठक बुलाई जिसमें निर्णय लिया गया कि कलेक्टर को अंतिम रूप से आज फिर ज्ञापन सौंपा जाए और उन्हें अल्टीमेटम दिया जाए कि यदि आज शाम तक एसडीएम गुर्जर को रिलीव नहीं किया गया तो कल 28 अप्रैल मंगलवार से सभी पत्रकार शासकीय प्रेस नोटों का बहिष्कार कर धरना प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद सभी पत्रकार सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां अधिकारियों के साथ कलेक्टर अनुग्रह पी की बैठक चल रही थी। कलेक्टर ने ज्ञापन लेने के लिए किसी डिप्टी कलेक्टर को भेजा। लेकिन पत्रकारों ने कहा कि वह कलेक्टर से बातचीत कर उन्हें अपनी चेतावनी से अवगत कराएंगे। तब तक वह मीटिंग समाप्त होने तक यहीं इंतजार करेंगे। इसके बाद एडीएम आरएस बालौदिया पत्रकारों के बीच पहुंचे और उन्होंने कलेक्टर अनुग्रह पी की बात पत्रकारों के समक्ष रखते हुए कहा कि एसडीएम गुर्जर को रिलीव कर दिया गया है और अरविंद बाजपेई को शिवपुरी एसडीएम बनाया गया है। इससे पत्रकारों में हर्ष छा गया और पत्रकारों ने एक-दूसरे को इसके लिए बधाई दी। पत्रकारों के इस आंदोलन में मुख्य रूप से वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव, अशोक कोचेटा, उमेश भारद्वाज, अशोक अग्रवाल, ब्रजेश तोमर, अजय खैमरिया, रंजीत गुप्ता, डॉ. रामकुमार शिवहरे, धु्रव शर्मा, नरेंद्र शर्मा, रिंकू जैन, राजकुमार शर्मा, रोहित मिश्रा, विजय विंदास, लालू शर्मा, ललित मुदगल, सतेंद्र उपाध्याय मोंटू तोमर, वीरेंद्र चौधरी, अभय कोचेटा, मुकेश चौधरी, नेपाल सिंह बघेल, योगेंद्र जैन, ट्विंकल जोशी, केके दुबे, इस्लाम शाह, दीपक अग्रवाल, भूपेद्र शर्मा, राजवर्धन सिंह, बंटी धाकड़, सौरभ दुबे, शुभम गर्ग, गुड्डू खान, मनीष भारद्वाज, सुरेश कुशवाह, राजू यादव, कुलदीप गुप्ता, मोहम्मद अशरफ, पवन भार्गव, उत्कर्ष भार्गव, जीतू रघुवंशी, जितेंद्र चौधरी, भूपेंद्र शर्मा, पवन भार्गव, अन्नु श्रीधर, नीरज रजक, धर्मेंद्र बाथम आदि पत्रकारगण उपस्थित रहे।
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विवादास्पद एसडीएम गुर्जर के कारण हुई जिला प्रशासन की छवि धूमिल
अपने 15 माह के कार्यकाल के पश्चात रिलीव किए गए एसडीएम अतेंद्र सिंह गुर्जर के तानाशाहीपूर्ण अभद्र और कथित भ्रष्टाचारपूर्ण रवैये के कारण जिला प्रशासन की छवि खासी धूमिल हुई। उन पर मिर्ची सेठ से नजदीकी के आरोप भी लगे। जिसके चलते शहर के कई नागरिकों को निशाना बनाया गया। पूर्व विधायक सुरेश राठखेड़ा के पीए ओपी शर्मा से अभद्र व्यवहार का मामला भी खूब उछला। नमोनगर कॉलोनी में अग्रवाल समाज के अध्यक्ष गौरव सिंघल के मकान को अवैध बताते हुए ढहा दिया गया और उन्हें लाखों रूपए की क्षति पहुचंाई गई। श्री सिंघल ने पत्रकारवार्ता आयोजित कर आरोप लगाया कि प्रशासन के कतिप्य दलाल मिर्ची सेठ ने उनसे पांच लाख रूपए की मांग की थी। जिसे न देने पर उनके मकान को जमींदोज कर दिया गया। जबकि उनके पास नामांतरण और रजिस्ट्री से लेकर सभी दस्तावेज थे। इस मामले को लेकर अग्रवाल समाज ने रैली निकालकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। लेकिन इस पर भी उनके खिलाफ प्रशासन ने कोई संज्ञान नहीं लिया। उन पर यह भी आरोप है कि लॉकडाउन के समय एक व्यापारी के गोदाम का ताला बिना उन्हें बुलाए और सूचित करे एसडीएम ने तुड़वा दिया था और जब इस संबंध में व्यापारी ने जब उनसे शिकायत की तो उन्होंने कहा कि तुझसे क्या पूछे क्या तू कलेक्टर है। इस तरह से लगातार अपने अभद्र व्यवहार से एसडीएम गुर्जर ने जिला प्रशासन की छवि को तार-तार करने का प्रयास किया।
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रिलीव करने के बाद भी इज्जत बनाने की प्रशासन ने की कोशिश
पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों के दबाव के बाद कलेक्टर ने एसडीएम गुर्जर को रिलीव तो कर दिया। लेकिन इसके बाद भी प्रशासन ने उनकी इज्जत बनाने की कोशिश की। उनके सम्मान में जनसम्पर्क कार्यालय के माध्यम से एक समाचार भी डाला गया। जिसमें उनकी तारीफ के कसीदे काड़ते हुए लिखा गया है कि शिवपुरी एसडीएम के पद पर रहते हुए उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ किया और लोकसभा चुनाव में कड़ी मेहनत से काम किया। आर्मी भर्ती में भी उनका काम सराहनीय रहा। अतिक्रमण विरोधी अभियान हो या कोरोना वायरस बचाव के लिए किए जा रहे प्रयास। हर कार्य का उन्होंने निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ किया। आमतौर पर अधिकारियों के स्थानांतरण पर इस तरह के चापलूसी भरे प्रेस नोट कभी जारी नहीं किए जाते। स्थानांतरण एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन इसके बाद भी श्री गुर्जर के पक्ष में इस तरह से अतिरंजित उनकी प्रशंसा के प्रेस नोट जारी होना इस बात का धोतक है कि उन्हें मजबूरीवश ही जिला प्रशासन ने रिलीव किया है।

मास्क बनायें, प्रति मास्क मिलेंगे 11 रुपये ,शिवराज की जीवन शक्ति योजना 0755 2700800 पर फोन करें.केवल महिलायें


मुख्यमंत्री श्री चौहान की पहल पर योजना को मिला बेहतर प्रोत्साहन 

प्रदेश में बड़े पैमाने पर मास्क निर्माण के लिये जीवन शक्ति योजना लागू की गयी है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर योजना के क्रियान्वयन के पहले दिन प्रदेश में 4200 शहरी महिलाओं ने अपना पंजीयन कराया है। योजना को बेहतर प्रोत्साहन मिल रहा है। इस योजना में सौ प्रतिशत कॉटन से दोहरी परत वाले मास्क बनाये जाएंगे। ये मास्क कोरोना वायरस की रोकथाम में प्रभावशील रहेंगे।

पहले घण्टे में 325 पंजीयन

जीवन शक्ति योजना लागू होने के पहले घण्टे में ही शहरी महिलाओं द्वारा 325 पंजीयन कराये गये। पंजीयन की प्रक्रिया निरंतर जारी है। इस योजना में शहरी क्षेत्र की महिलाएँ लाभांवित होंगी। पोर्टल पर पंजीकृत महिलाओं को मास्क बनाने के लिये राज्य शासन द्वारा सीधा आदेश दिया जाएगा। आदेश के अनुसार बनाएं गये मास्क को जमा करने पर उसी दिन महिलाओं के खाते में राशि अंतरित की जाएगी। राज्य सरकार ने योजना में शामिल होने के लिये हेल्पलाइन नम्बर 0755-2700800 जारी किया है।

महिलाओं ने की योजना की सराहना

उज्जैन की श्रीमती गरिमा महावर सहित विभिन्न अंचलों की महिलाओं ने जीवन शक्ति योजना को महिलाओं को घर बैठे सम्मानजनक रोजगार देने की दिशा में सराहनीय पहल बताया है। महिलाओं ने कहा है कि इस योजना से हम महिलाओं को भी कोरोना के विरूद्ध युद्ध में राज्य सरकार को सहयोग करने का अवसर मिला है। महिलाओं ने जीवन शक्ति योजना लागू करने पर मुख्यमंत्री श्री चौहान का आभार व्यक्त किया है।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि आमजन को कोरोना से बचाव के लिये निश्चित न्यूनतम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण मास्क उपलब्ध करवाने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिये जीवन शक्ति योजना लागू की गयी है।

⭐कोरोना वायरस संकमण:भूख की भीषण समस्या बनी. ▪देश मे 4 करोड़ नागरिक भूख से पीड़ित .

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➖डा.भूपेन्द्र विकल➖
इन्दोर ।रबी की फसलों की खरीदी हो रही है | 1मार्च 2020के आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में करोड़ टन खाद्यान्न जमा था |
इसमें 2.75 करोड़ टन गेहूं और 5.20करोड़ टन चावल शामिल है।
सरकार के पास यह अन्न भंडारण अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है, यह सरकार द्वारा तय किये मानकों से भी बहुत ज्यादा है|
▪खाद्य सुरक्षा की समस्या.

कोरोना वायरस संकमण
के कारण खाद्य सुरक्षा की समस्या और भी भीषण बन गयी है|
लाखों प्रवासी मजदूरों कई शहरों से अपने घरों की ओर वापस लौट चुके हैं या लौट रहे हैं |
ये शहरी गरीबों के साथ समाज के उस कमजोर वर्ग के लोग हैं, जो अपनी आजीविका छिन जाने के साथ अचानक ही खाद्य असुरक्षा के शिकार हो गये हैं| यही आस लिए तेलंगाना के पेरूर गांव से12 साल की मासूम पैदल अपने छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के गांव आदेड़ के लिए चली। रास्ते में तबीयत बिगड़ गई, फिर भी तीन दिन में करीब 110 किमी का सफर पूरा किया। लेकिन अपने गांव से महज 14 किमी पहले बच्ची ने दम तोड़ दिया। उसके साथ गांव के 11 दूसरे लोग भी थे, लेकिन जंगल के रास्ते उसे किसी तरह का इलाज नहीं मिल सका।इसी तरह के अनेकों खबरे सारे देश से आ रही है।

मौजूदा ऐसे दृश्य को क्या कहें – एक तरफ भारत में बढ़ती भूख और अनाज का संकट दिख रहा है और दूसरी ओर सरकार के पास मौजूद अन्न का यह विशाल भंडार | देश की एक अनोखी विडंबना है।
इसके पहले भी कई बार इस तरह की भीषण समस्या सामने आ चुकी है|
एक तरफ जन सामान्य को अनाज नहीं मिला ।अनाज बन्दरगाहों पर सड़ा और बाद में से शराब बनाने वालो को मुफ्त के भाव देना पड़ा |
▪खाधान्न खरीद का उद्देश्य.

सरकार द्वारा खाद्यान्नों की खरीद और जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की व्यवस्था मुख्यउद्देश्य हैं- खाद्य सुरक्षा, खाद्य मूल्य स्थिरता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आधार पर किसानों के लिए पर्याप्त आय सुनिश्चित करना| एक ही साधन से इन तीनों साध्यों को साधना, अपने आम में एक बड़ी खामी है|कोई युक्ति फौरन सोचना चाहिए | इसके अलावा, देश की विशाल नौकरशाही की अकुशलता, केंद्र तथा राज्यों की एजेंसियों के बीच समन्वय का अभाव, अनाज की चोरी और बर्बादी और भंडारण क्षमता के नाकाफी होने को खाद्य पदार्थों के आयात-निर्यात को लेकर बगैर सोचे-समझे किये गये फैसले जैसे अन्य कारकों से जोड़ दिया जाये, तो साफ़ नजर आता है कि यह व्यवस्था अभी तो हमारे देश में भूख की भीष समस्या बनी हुई है।
▪वैश्विक भूख सूचकांक मे 102

पिछले वर्ष वैश्विक भूख सूचकांक पर 117 देशों के बीच नौ पायदान फिसल कर भारत की स्थिति 102 थी, तब सरकार ने इस रैंकिंग का विरोध करते हुए यह कहा था कि इसकी गणना प्रणाली में खामी है और इसने पुराने आंकड़े इस्तेमाल किये हैं|

स्वयं सरकार के ही अनुसार इस रैंकिंग में भारत को 91 वें पायदान पर होना चाहिए था, पर इसे भी गर्व करने लायक नहीं कहा जा सकता है| सरकार के पास इस विषय पर अभी कोई ठोस योजना नहीं है |
कोरोना वायरस संकमण के बीच खाद्य सुरक्षा की समस्या और भी भीषण हो गयी है|

लाखों प्रवासी मजदूरों और कई शहरों से अपने घरों की ओर वापस लौट चुके हैं |शहरी गरीबों समेत ये सब उस कमजोर वर्ग के लोग हैं।जो अपनी आजीविका छिन जाने के साथ अचानक ही खाद्य असुरक्षा के शिकार हो गये|
▪जनहित याचिका दायर,सरकार का जवाब.

देश के सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर यह अनुरोध किया गया कि वह सरकार को तुरंत इन कामगारों और उनके परिवारों की तकलीफें दूर करने का निर्देश दे|
अपने जवाब में सरकार ने निजी कंपनियों, गैर-सरकारी संगठनों तथा राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों का हवाला देते हुए यह कहा कि ‘कुल मिलाकर ८५ लाख से भी अधिक लोगों को खाद्य अथवा राशन मुहैया किया जा रहा है|’
यह सारे आंकड़े फरेब देने वाले और राहत देने में नाकाफी है, क्योंकि खाद्य असुरक्षा झेल रहे लोगों की तादाद चार करोड़ से भी ज्यादा हो सकती है|
कहने को सरकार ने अधिकाधिक राहत देने की कोशिश की है, पर उसे और ज्यादा करने की जरूरत है|
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किम जोंग जिंदा है और स्वस्थ भी दक्षिण कोरिया से खबर है.

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग 15 अप्रैल को अपने दादा के जन्मदिन के समारोह में शामिल नहीं हुए. इसी के बाद से किम की सेहत को लेकर तरह तरह की अटकलें लगने लगी. लेकिन अब सच सामने आ गया है.

दुनिया के लिए किम जोंग शैतान है लेकिन उत्तर कोरिया में उसे भगवान की तरह पूजना मजबूरी है. 2015 में किम जोंग ने पूरे देश के लिए हेयर स्टाइल तय कर दिया. 28 हेयर स्टाइल को सरकारी मंजूरी मिली हुई है. पुरुष हैं तो हेयर स्टाइल वही होगी जैसी किम जोंग की है. दो सेंटीमीटर से ज्यादा बडे बाल हो ही नहीं सकते. बुजुर्ग हैं तो पौने तीन सेंटीमीटर बाल की लंबाई हो सकती है. महिलाओँ के लिए हेयर स्टाइल है किम जोंग की पत्नी वाली. किम जोंग के दादा और पहले शासक किम इल सुंग के जमाने से ऐसा हेयर स्टाइल उत्तर कोरिया में देखा जाता है लेकिन अब ये कानून है. किम जोंग का मानना है कि इससे उसके प्रति आस्था बनी रहेगी.

दुनिया में इस वक्त अगर कोरोना के बाद किसी की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है तो वो हैं किम जोंग. वजह है, पिछले तीन हफ्ते से किम जोंग को किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं देखा जाना. अब उत्तर कोरिया के सबसे बड़े दुश्मन देश दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन के एक शीर्ष सुरक्षा सलाहकार ने इन अफवाहों को खारिज कर दिया है.

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मून चुंग-इन ने रविवार (26 अप्रैल) को सीएनएन के साथ एक बातचीत में कहा, “किम जोंग उन जीवित हैं और स्वस्थ हैं.” हालांकि किम जोंग पर दक्षिण कोरिया के प्रेसिडेंट ऑफिस ने पिछले हफ्ते एक बयान में कहा था, “हम कुछ भी पुष्टि नहीं कर सकते. उत्तर कोरिया के अंदर कोई विशेष आंदोलन का पता नहीं चला है.”

किम जोंग उत्तर कोरिया का वही कुख्यात तानाशाह है, जिसकी मिसाइलों से अमेरिका भी कांपता है, जिसने एक मीटिंग में नींद की झपकी लेने पर अपने रक्षा मंत्री को तोप के आगे बांधकर उड़वा दिया था.

किम जोंग के मौत की खबर कहां से आई
इंटरनेट पर वायरल तीन तस्वीरों ने किम जोंग की सेहत को लेकर अफवाहों को और हवा दी. चीन समर्थित पत्रकार कोम ब्रोकसोर ने ट्विटर पर लिखा, ‘अब ये साफ है कि शनिवार रात किम जोंग की मृत्यु हो गई.’ एक दूसरे ट्विटर यूजर बट सीम ने दुनिया को बताया, अविश्वसनीय, उत्तर कोरिया के 36 साल के नेता किम जोंग नहीं रहे. इसी तरह कंबोडियन पोस्टर नाम के एक ट्विटर हैंडल से एक तस्वीर भी पोस्ट की गई जिसमें किम के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने का दावा किया.

अभी उत्तर कोरिया के तानाशाह के रहस्यमयी तरीके से गायब होने पर चर्चा गर्म ही हो रही थी कि 21 अप्रैल को अमेरिका के वॉशिंगटन में मौजूद नॉर्थ कोरिया मॉनिटरिंग प्रोजेक्ट ने इस सैटेलाइट इमेज में किम जोंग की निजी ट्रेन को उत्तर कोरिया के पूर्वी तट पर मौजूद Wonsan complex के पास देखने का दावा किया गया है. कहा गया कि किम जोंग इस रेलवे स्टेशन के पास मौजूद रिसॉर्ट में मौजूद हैं और अंतिम सांसे गिन रहे हैं. अमेरिकी चैनल CNN ने भी दावा किया कि हार्ट सर्जरी के बाद से किम की जान खतरे में है. खबर ये आई कि किम जोंग की जान बचाने के लिए चीन ने कुछ डॉक्टरों को उत्तर कोरिया भेजा है…

तो फिर किम की मौत का सच क्या है?
कंबोडियन पोस्टर नाम के ट्विटर हैंडल से जो तस्वीर पोस्ट की गई वो दरअसल किम के दादा के अंतिम संस्कार की तस्वीरें हैं.

उत्तर कोरिया के सबसे बड़े दुश्मन देश दक्षिण कोरिया ने भी आधिकारिक बयान में किम जोंग की मौत की खबरों का खंडन किया है. दक्षिण कोरिया ने कहा है कि किम जिंदा हैं और पूरी तरह स्वस्थ भी. दक्षिण कोरिया के मुताबिक किम 13 अप्रैल से ही Wonsan complex में मौजूद हैं और यहां ऐसी कोई भी संदिग्ध गतिविधि नहीं देखी गई है जिसके आधार पर कहा जाए कि किम जोंग उन की मौत हो गई

इन दिनों कफवर्धक खाद्य पदार्थो के सेवन से बचें

कोरोना वायरस फेफड़ों में कफ-बलगम को बढ़ाकर व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत पैदा करता है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को इस संभावित व्याधि से बचने के लिए इन दिनों कफवर्धक खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए और यथासंभव कफनाशक खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. नीलम यादव के अनुसार आयुर्वेद के हिसाब से प्रत्येक खाद्य वस्तु के गुण बताए गए हैं। जैसे हर खाद्य पदार्थ अपनी प्रकृति के अनुसार या तो कफनाशक (कफ को नष्ट करने वाले) होता है या कफवर्धक (कफ को बढ़ाने वाले) होता है। कफवर्धक खाद्य पदार्थों में मांस, अंडा, घी, तेल, दूध, लस्सी, पनीर, दही, आलू, उड़द की दाल, चने की दाल, अरबी, शकरकंद, फूलगोभी, टमाटर, मशरूम, केला, ग्लूकोज, मैदा बिस्कुट, गेहूं का आटा एवं मैदा ब्रेड आदि मुख्य हैं। वहीं कफनाशक खाद्य पदार्थो में गरम पानी, अदरक, हल्दी, तुलसी, काली मिर्च, शिलाजीत, मुलेठी, आमलकी रसायन, काला बांसा, जौ की रोटी, मूंग दाल, घीया, तोरई, जीरा, सेंधा नमक आदि मुख्य हैं।
खानपान एवं जड़ीबूटियों का प्रयोग आयुर्वेदिक पद्धति के हिसाब से करना चाहिए। आज घर-घर में गरम मसाले को अनेक प्रकार से प्रयोग किया जा रहा है। अदरक, काली मिर्च, तुलसी, लौंग, बड़ी इलायची और दालचीनी का प्रयोग चाय में अथवा काढ़ा बनाकर भी लोग खूब उपयोग कर रहे हैं। इस प्रकार तैयार चाय अथवा काढ़े का दिन में दो बार प्रयोग भी काफी कारगर सिद्ध हो रहा है।

लॉक डाउन में छूट मिलते ही सड़को पर बढ़ी भीड़

ग्वालियर । हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए घोषित किये गए देशव्यापी लॉक डाउन 2.0 का समय बीतने में अभी कुछ रोज बकाया है । यह 3 मई तक है लेकिन ग्वालियर प्रशासन द्वारा प्रतिदिन समीक्षा के बाद जो ढील दी जा रही है उससे घरों में कैद लोग थोड़ी बहुत राहत महसूस कर रहे है । हालांकि इस दौरान लोगों की भीड़ उमड़ पड़ने के चलते अनेक स्थानों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नही हो पा रहा है और इसके लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है ।

रविवार को प्रशासन ने अनेक छूट दी । सुबह अखबार,दूध,अंडा,ब्रेड आदि की दुकान तीन घण्टे खोलने की इजाज़त दी वही फल और सब्जी की सप्लाई निर्बाध जांरी रखी । इसके अलावा आज लगातार दूसरे दिन छोटे खेरिज किराना और जनरल स्टोर्स को भी दिन भर खोला गया जिसके चलते लोगों ने बाज़ार जाकर अपनी जरूरत की चीजें खरीदीं ।

Jharkhand : कोरोना से घबराएं नहीं ! सिर्फ विटामिन सी से परास्त हो रहा यह खतरनाक वायरस

बोकारो विटामिन सी से कोरोना का वायरस हार गया। बोकारो जनरल अस्पताल से शनिवार को चार कोरोना मरीजों को छुïट्टी दी गई। पहले ढाका और उसके बाद निजामुद्दीन की तब्लीगी जमात में जाकर संक्रमित हुई महिला को भी विटामिन सी की गोली खाकर कोरोना के वायरस से मुक्ति मिल गई।

अभी तक कोरोना के इलाज की दवा नहीं बन सकी है। बोकारो में कोरोना के मरीजों के इलाज के दौरान अध्ययन में यह बात आयी है कि जिनके भीतर रोग प्रतिरोधक क्षमता सबल होगी, वह कोरोना को परास्त कर देगा। विटामिन सी शरीर में रोग प्रतिरोध की क्षमता बढ़ाता है। बोकारो जनरल अस्पताल में कोरोना के नौ मरीजों का इलाज चल रहा था। सभी को संतुलित आहार के साथ विटामिन सी की गोलियां दवा के तौर पर दी गई। चिकित्सकों की सोच थी कि रोग प्रतिरोध की क्षमता बढ़ेगी तो मरीज ठीक हो जायेंगे। किसी मरीज को बुखार, बदन में अकड़, गला में दर्द या खांसी की शिकायत नहीं हुई। चार मरीज स्वस्थ होकर अस्पताल को अलविदा कर चुके हैं। पांच और मरीज इलाजरत है। कोविड अस्पताल के चिकित्सकों का आकलन है कि उनकी भी सेहत में तेजी से सुधार है।
विटामिन सी से जीवाणु या वायरस हो जाते परास्त
प्रतिरक्षा प्रणाली दमदार है तो शरीर के भीतर हमला करने वाले अलग-अलग रोगों के जीवाणु या वायरस परास्त हो जाते हैं। विटामिन सी की कमी नहीं हो तो सर्दी-खांसी जैसी बीमारी दूर रहती है। बोकारो अस्पताल के चिकित्सक बताते हैं, विटामिन-सी की कमी से शरीर में विशेष ऊतक की कमी होती है। इससे रक्त स्राव का खतरा बढ़ता है।

विटामिन सी के लिए इनका करें सेवन
आंवला, नारंगी, नींबू, संतरा, अंगूर, टमाटर, अमरूद, सेव, केला, बेर, बेल, कटहल, पुदीना, मूली पत्ता, मुनक्का, दूध, चुकंदर, चौलायी साग, बंद गोभी, हरा धनिया और पालक।
कोरोना के मरीजों को विटामिन सी की गोली दी जा रही है। खांसी, बुखार या गले में दर्द जैसी शिकायत नहीं थी। इसलिए कोई और दवा नहीं दी गयी। चार मरीज वायरस से मुक्त हो चुके हैं। शेष मरीजों की हालत में सुधार है।

-डॉक्टर अशोक कुमार पाठक, सिविल सर्जन, बोकारो