परशुराम और चाणक्य को वर्तमान समाज ने अपेक्षित सम्मान नहीं दिया – धैर्यवर्धन शर्मा

आज अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भाजपा नेता धैर्यवर्धन ने समाज को शुभकामनाएं देने के साथ अपने मन की पीड़ा को भी जगजाहिर किया है ।
भाजपा की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य धैर्यवर्धन ने कहा कि समाज में गलत धारणा और दुष्प्रचार के कारण भगवान परशुराम और महर्षि चाणक्य को समाज ने यथोचित आदर नहीं दिया जितना की भारतीय समाज इन दोनों का ऋणी है ।
भाजपा नेता धैर्यवर्धन ने कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की भूरि भूरि प्रशंसा की जानी चाहिए कि उन्होंने भगवान परशुराम जी के प्राकट्य दिवस पर पिछले कार्यकाल में ही शासकीय अवकाश घोषित किया था ।
आत्ममुग्ध , बड़बोले और शातिरों ने एक को क्षत्रिय विरोधी बता दिया तो दूसरे को कुटिल राजनीतिज्ञ ।

भगवान परशुराम ने भगवान राम को भी अपनी शक्ति, अस्त्र, शस्त्र दिए । क्या राम जी के सभी उपासकों को दिल से भगवान परशुराम के श्री चरणों में अपना शीश नहीं झुकना चाहिए ? जबकि स्वयं प्रभु श्री राम ने उनको बारंबार सम्मान दिया हो ।

धैर्यवर्धन के अनुसार
” कह जय- जय- जय रघुकुल केतु,
भ्रगुपति गए वनहिं तप हेतु ।।

दोनों ने परस्पर प्रणाम कर राजा जनक जी के यहां मौजूद देश देश के राजाओं, महाबलियों और सभासदों को एक दूसरे की महत्ता से अवगत कराया ।

भगवान श्री रामचन्द्र की प्रदक्षिणा करके भगवान परशुराम वन को चले गए थे ।
मान्यता है कि अमर और अविनाशी परशुराम जी भगवान कल्कि के गुरु होंगे और उन्हें युद्धकौशल की शिक्षा प्रदान करेंगे क्योंकि हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान परशुराम अमर हैं वे कभी मृत्यु को प्राप्त नहीं होंगे । इसी लोक में विचरण करेंगे ।

भाजपा नेता धैर्यवर्धन ने कहा कि परशुराम जी ने तो गंगा पुत्र भीष्म को भी शस्त्र और शास्त्र का ज्ञान दिया था । पितामह भीष्म बारम्बार इसका उच्चारण करके अपने गुरुदेव के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित भी करते रहते थे । क्या पितामह भीष्म विशुद्ध क्षत्रिय कुल गौरव नहीं थे । फिर परशुराम जी क्षत्रिय विरोधी कैसे हुए !

रामायण के अनुसार हनुमान जी महाराज को बल बुद्धि की निपुणता भी उनके गुरु परशुराम ने ही दी ।

पांडवों और कौरवों के गुरु ऋषि द्रौणाचार्य भी परशुराम जी के ही शिष्य थे ।
भगवान परशुराम ने ही सूर्य पुत्र कर्ण ( तत्कालीन शूद्र पुत्र ) को धनुर्धारी बनाया ।
वे तो आतताईयों और अत्याचारी शासकों के विनाशक रहे फिर वह राजा किसी भी समाज का क्यों न रहा हो ।
मान्यता है कि केरल, कोंकण और गोवा राज्य की स्थापना भी भगवान परशुराम ने ही की है । समुद्र किनारे लोगों को बसाकर वहां छोटे छोटे गांवों में वैदिक संस्कृति की स्थापना एवम् कृषि कार्य प्रारंभ कराया । मनुष्यों को बसाने के लिए समुद्र से एक विशेष आकार की भूमि प्राप्त कर वहां लोगों की बसाहट की ।
केरल के मार्शल आर्ट कलरीपायट्टू की उत्तरी शैली वडेक्कनकलरी के संस्थापक आचार्य एवम् आदि गुरु परशुराम जी ही हैं । यह युद्ध कला आज भी केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पूर्वोत्तर श्रीलंका एवम् मलेशिया देश के मलयाली समुदाय में प्रचलित है ।
भगवान परशुराम जी ने किसी भी जीते हुए राज्य पर राजा बनकर राज्य नहीं किया वल्कि जनहितैषी किसी योग्य व्यक्ति को राज काज सौंपकर वहां से चले जाते थे ।
उन्होंने महर्षि अत्रि की धर्मपत्नी देवी अनुसुइया जी , महर्षि अगस्त्य की धर्मपत्नी देवी लोपामुद्रा जी एवम् अपने प्रिय शिष्य अक्रतवण आदि के सहयोग से नारी जागृति अभियान चलाया ।
मध्यप्रदेश में इंदौर के महू के पास जानापाव में उनकी जन्मस्थली है पर अरूणांचल प्रदेश के लोहित जिला की उत्तर पूर्व दिशा में 24 किलोमीटर दूर परशुराम कुंड ( प्रभु कुठार दूसरा प्रचलित नाम ) है जहां मकर संक्रांति पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जाते हैं ।
हिमांचल प्रदेश के सिरमौर जिले में नाहन से 40 किलोमीटर दूर रेणुका झील नामक तीर्थस्थल है ।
गुजरात में खंभात की खाड़ी के नजदीक जहां पवित्र नर्मदा नदी का समुद्र मिलन है वहीं भरूच शहर में भ्रगु ऋषि का आश्रम है । कहते हैं यह क्षेत्र भ्रगु ऋषि और कालांतर में भगवान परशुराम जी की तपस्थली रहा है ।
श्री ” भार्गवराघवीयम ” संस्कृत महाकाव्य की रचना जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी ने की है जिसमें प्रभु श्रीराम और भगवान परशुराम के बारे में 2121 श्लोक लिखे गए हैं । रामभद्राचार्य जी को 2005 में संस्कृत साहित्य अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ । इस पवित्र पुस्तक का विमोचन भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री, महान साहित्यकार, कविश्रेष्ठ भारतरत्न माननीय अटल बिहारी वाजपेई जी द्वारा 30 अक्टूबर 2002 को किया गया था ।
भगवान परशुराम जी के जन्मदिवस अक्षय तृतीया के दिन जो भी शुभ कार्य किया जाता है उसका अक्षय फल प्राप्त होता है । पवित्रतम मुहूर्त होने के कारण अक्षय तृतीया के दिन भारत की बहुत सारी जातियां सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित कर उन्हीं प्रभु का आशीर्वाद लेकर शांतिपूर्ण और सुखद वैवाहिक जीवन जीती हैं ।
आज भी तो आई एस आई एस , लिट्टे, लश्करे तैयबा , इनामी डकैतों को मार गिराकर समाज में शांति की स्थापना के प्रयास निरंतर किए जाते हैं । शांतिभंग करने वाले उपद्रवी को दण्डित करके कोई साधारण आदमी जब अपने मोहल्ले में लोगों के द्वारा सराहा जाता है । बलात्कार अथवा क्रूर अपराधों को करने वाले व्यक्ति को पुलिस गिरफ्तार करती है, न्यायाधीश सजा मुकर्रर करते हैं और जल्लाद फांसी चढ़ा देता है तब हम इस सम्पूर्ण कार्यवाही को समाज के हित में मानते हैं तो फिर उस समय के बलशाली, बुद्धि निपुण, दूरदर्शी लोगों के द्वारा चिन्हित अत्याचारियों को दण्डित किया गया तो वे श्रद्धेय विभूतियां अचानक से किसी जाति या वर्ग की आलोचना के पात्र कैसे हो सकते हैं ।
क्या भगवान के अवतार या देवता किसी जाति के विरोधी हो सकते हैं। कदापि नहीं, ऐसा सोचना भी पाप है । लोगों ने तो भगवान राम और अन्य देवी देवताओं को भी नहीं बख्शा । कुछ भी अनर्गल बोलते हैं, बोलते रहे, सदैव से ही ।
किसी शहर , बस्ती, नगर का समझदार, उदारमना व्यक्ति, प्रतिष्ठित , प्रभावशाली , सरल आदमी जब गरीबों की मदद के लिए अग्रेसर बन जाता है । अपनी अर्जित पूंजी भी लोगों पर दान करता है तो देवत्व को प्राप्त महामानव, भगवान, श्रेष्ठ जन क्या यह नहीं जानते होंगे कि –
” परहित सरिस धरम नहीं भाई
पर पीड़ा सम नहीं अधमायी ।।”
वे पुण्य आत्माएं कैसे किसी निर्दोष प्राणी का अहित कर सकते थे ?
भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य धैर्यवर्धन ने बताया कि
विष्णुगुप्त चाणक्य
अपने समय के महान अर्थशास्त्री, महान नीतिशास्त्री , विश्व विख्यात राजनीति सिद्धांत के प्रतिपालक, महान देशभक्त, विकट आत्मबल और साहस के धनी, एक चरवाहे के बच्चे चन्द्रगुप्त मौर्य को निपुण कर राजा बनाने वाले अंत्योदय के प्रवल समर्थक थे । विष्णूगुप्त चाणक्य जो शुरुआत में तक्षशिला विश्वविद्यालय के आचार्य / प्रोफेसर थे बाद में एक देश के निष्ठावान प्रधानमंत्री रहे लेकिन कभी राजा बनने की चेष्टा नहीं की क्योंकि वे सत्ता लोलुप नहीं थे । उनका उद्देश्य अपने मार्गदर्शन के माध्यम से नर नारी को सुखमय राज्य प्रदान करना था । सुखकारी परिस्थिति देने वाला राज्य जिनके विचार आज भी प्रासंगिक, जीवंत और सामयिक हैं ।
वे ईमानदारी और नैतिकता के पर्याय थे । छोटी सी कुटिया में रहने वाले चाणक्य दुर्बलों के उत्थान, निर्धन, अपंग, मजदूर, स्त्रियों आदि के भरण पोषण एवम् सुरक्षा के प्रबल पक्षधर थे । धैर्यवर्धन ने कहा कि इतिहास गवाह है कि महाअमात्य / प्रधानमंत्री के तौर पर उन्होंने अपने राज्य में ऐसे अनेक कार्य और योजनाएं संचालित किए ।
उनके मार्गदर्शन में एक लोक कल्याणकारी राज्य , सुशासन की स्थापना की थी । खंड खंड में बंटे भारत को हिमालय से समुद्र पर्यंत तक एक सूत्र में बांधने के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया ।
क्या देश की सभी जातियों को भी इन पुण्यात्माओं का पावन स्मरण वैसे ही नहीं करना चाहिए जैसे अन्य महापुरुषों की जयंती, प्राकट्य दिवस पर सभी देशवासी एक दूसरे को शुभकामनाएं देकर नमन करते हैं ।
यह कोई बहुत पुरानी घटना नहीं है , चीनी पर्यटक, विद्वानों ने उनसे साक्षात्कार किया । अनेक विद्वानों ने उनसे प्रत्यक्ष भेंट और शास्त्रार्थ किए । आज सहज उपलब्ध अनेकों पुस्तकें, उनके द्वारा लिखित/ प्रतिपादित श्लोक, सूक्तियां, सिद्धांत पढ़कर भारतवासी उनके बारे में अपनी धारणा को नवीन रूप प्रदान कर सकते हैं ।
महर्षि चाणक्य ने नीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र के अलावा ज्योतिष पर विष्णूगुप्त सिद्धांत, आयुर्वेद पर वैद्यजीवन जैसी अनेक पुस्तकें लिखी हैं ।
धैर्यवर्धन ने कहा कि दोनों ही प्रातः स्मरणीय व्यक्तित्व ने उस समय के गरीब, अपेक्षित, दीन हीन , असहाय, वनवासी, दूरस्थ अंचल के निवासी , व्यवसाई अर्थात साधारण प्रजा का हित संवर्धन किया था ।
देश के सभी नगरों, बस्तियों के मंदिरों में भगवान परशुराम जी की एवं चौराहों पर अन्य महापुरुषों की तरह महर्षि चाणक्य की प्रतिमा/स्टेच्यू लगाई जाए ताकि आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा मिल सके ।

चिकित्सकों को उलब्ध कराई जा रहीं राज्य में ही तैयार पी.पी.ई.किट्स

भोपाल / मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ राज्य में कोरोना नियंत्रण के लिए किए जा रहे कार्य पर चर्चा कर उनके सुझाव प्राप्त किए। श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में कोरोना वायरस को परास्त करने के लिए विभिन्न स्तरों पर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना नियंत्रण में संलग्न चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए पीपीई किट्स की आपूर्ति अब तक प्रदेश के बाहर से हो रही थी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से अनुमोदन के बाद अब राज्य में ही पी.पी.ई. किट्स तैयार हो रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में रोजाना करीब 10 हजार पी.पी.ई. किट्स तैयार हो रही हैं। इन्हें आवश्यकतानुसार चिकित्सकों को उपलब्ध करवाने की व्यवस्था को और अधिक कारगर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इससे निश्चित ही वायरस नियंत्रण में काफी सहयोग प्राप्त होगा। मास्क के निर्माण और वितरण के कार्य में सरकार के साथ स्वैच्छिक संगठनों, समाज सेवियों ने काफी अच्छी भागीदारी की है।
आनंद विभाग निभाएगा कोरोना नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आनंद विभाग एक महत्वपूर्ण विभाग है, जिसे कोरोना नियंत्रण के कार्य में सक्रिय बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। अस्पतालों में जहाँ कोरोना से संक्रमित रोगी भर्ती हैं, उन्हें संगीत और फिल्म के साथ ही हल्का-फुल्का मनोरंजन उपलब्ध करवाने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए आनंद विभाग सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर आवश्यक गतिविधियाँ संचालित करेगा।
जनता समझ रही लॉकडाउन का महत्व
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में कोरोना के संक्रमण की टेस्टिंग का कार्य बड़े पैमाने पर बढ़ा है। आमजन को जागरूक करने की गतिविधियां भी तेजी से चल रही हैं। लॉकडाउन के महत्व को समझते हुए लोग इसके पालन के प्रति गंभीर हुए हैं। श्री चौहान ने कहा कि चिकित्सकों का रोग नियंत्रण में महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है। हम निश्चित ही जीतेंगे।
घरों तक पहुँचेगा आयुर्वेदिक काढ़ा
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश की करीब एक करोड़ आबादी का इम्यूनिटी पावर बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक काढ़ा उनके घरों तक पहुँचाया जाएगा। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में होम्योपैथिक दवा के डोज भी राज्य की जनता को दिए गए हैं। भविष्य में भी इनका उपयोग किया जाता रहेगा। आयुष विभाग इस कार्य में सक्रिय भूमिका निभाएगा।

जनता के मन से भय निकलना जरूरी
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि लोगों के मन से यह भय निकलना जरूरी है कि किसी भी तरह के सर्दी-जुकाम और बुखार से कोरोना हो ही जाएगा। हड़कंप और तबाही जैसे शब्द उपयोग में आने पर जिस तरह निराशा का भाव बढ़ाता है, उसे भी चिकित्सकों, मीडिया के साथियों और स्वैच्छिक संगठनों के सहयोग से नियंत्रित किया जाएगा।

जानें तरबूज खाने के ये 9 फायदे और 4 नुकसान.

गर्मी में हमारे शरीर में पानी की मात्रा कम होने लगती है. जिसकी पूर्ति कई तरह के फल कर सकते हैं. उसमें एक तरबूज (Watermelon) भी है. दरअसल, यह स्वाद में रसीला के साथ-साथ कई गुणों से भरपूर है. आइये जानते हैं यह फल किन बीमारियों में लाभदायक है और किन्हें इसे खाने से करना चाहिए परहेज.

बाजार में वैसे तो बहुत सारे तरबूज मौजूद है, लेकिन, आपको इसे खरीदने से पहले दस बार सोचना चाहिए. दरअसल, रसीला दिखने वाला तरबूज अंदर से कुछ और भी निकल सकता है. इसे इंजेक्ट भी किया जाता है, इसके साइज को बढ़ाने के लिए.

जानें तरबूज खाने के ये 9 फायदे

तरबूज एक ऐसा फल है जिसमें लाइकोपिन पाया जाता है जो त्वचा की चमक को और निखारता है.

इसमें विटामिन-ए की प्रचुर मात्रा होती है जो आंखों के साथ-साथ हमारे इम्यून सिस्टम के लिए काफी लाभदायक होता है.

इसका तासीर ठंडी होती है, यही वजह है कि यह हमारे दिमाग को कूल रखता है. जिसके कारण क्रोध कम आता है.

तरबूज सिर्फ खाने ही नहीं इससे मसाज करने से ब्लैकहेड्स हट जाते हैं और चेहरे में रौनक आ जाती है.

तरबूज हृदय संबंधी बीमारियों को भी रोकने में काफी कारगार माना गया है. यह हमारे बैड कोलस्ट्रॉल को कम करता है.

इसके बीच भी कई तरह से लाभदायक है. इसे पीसकर चेहरे पर लगाने से निखार आता है. साथ ही साथ इसका लेप सिर दर्द को छूमंतर कर सकता है.

इसे खाने से कब्ज की समस्या से मुक्ति मिलती है.

यह हमारे शरीर में खून की कमी को दूर करता है.

अंग्रेजी वेबसाइट verywellfit के अनुसार यह मोटापा को कम करने का सबसे पौष्टिक फल है. इसमें

कैलोरी की मात्रा : 46

वसा: 0.2 ग्रा

सोडियम: 1.5 मि.ग्रा

कार्बोहाइड्रेट: 11.6 जी

फाइबर: 0.6 ग्रा

शक्कर: 9.5 ग्रा

प्रोटीन: 0.9 जी

विटामिन सी: 12.5mg होती है.

तरबूज खाना काफी नुकसानदायक भी साबित हो सकता है. ऐसे लोगों को भ्वूल के भी नहीं खाना चाहिए यह फल

खरबूजा खाने के बाद कभी फौरन पानी नहीं पीना चाहिए. इससे हैजा की बीमारी हो सकती है.

भूल के भी खरबूजा खाली पेट नहीं खाना चाहिए. क्योंकि यह आपके एबडोमन में पित्त संबंधी समस्‍याओं को बढ़ा सकता है.

प्रेग्नेंसी के दौरान तरबूज भी नहीं खाएं तो ही अच्छा होगा. हालांकि, इसमें खून की मात्रा बढ़ाने वाले गुण है लेकिन, यह काफी भारी भी होता है. ऐसे में इसके सेवन से आपको हाजमे संबंधित प्रॉब्लम से जुझना पड़ सकता है.

अगर आपको सामान्य फ्लू है, खांसी और जुकाम से आप पीड़ित रहते हैं तो तरबूज खाने से बचें क्योंकि यह काफी ठंड करता है.

घर में चमगादड़ घुसने से उड़े अमिताभ के होश, बोले- कोरोना पीछा नहीं छोड़ रहा

कोरोना वायरस को लेकर शुरू से ही ये खबर आ रही है कि ये चमगादड़ के जरिए इंसान में फैला. इस खबर के आने के बाद से लोग चमगादड़ को लेकर काफी सतर्क हैं. अब अगर ऐसे में कोई चमगादड़ आपके घर में घुस आए और जाने का नाम ना ले तो क्या हो? शायद इस बात को सोच कर आप भी डर जाएंगे. बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन के साथ बिलकुल ऐसा ही हुआ है.

अमिताभ ने इस बात की जानकारी ट्विटर पर दी. उन्होंने बताया कि उनके बंगले जलसा के एक कमरे में चमगादड़ घुस आया जिसे निकालने में उन्हें काफी मुश्किल का सामना करना पड़ा. आमिताभ ने ट्वीट किया, ‘जूरी के देवियों और सज्जनों, इस घंटे की खबर…ब्रेकिंग न्यूज…क्या आप यकीन करेंगे एक चमगादड़ जलसा में तीसरे फ्लोर पर मेरे कमरे में घुस आया. बड़ी मुश्किल से उसे बाहर निकाला. कोरोना पीछा छोड़ ही नहीं रहा.

अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं. अक्सर वो ट्विटर पर अपनी जिंदगी से और करियर से जुड़ी कुछ ना कुछ बातें पोस्ट करते रहते हैं. उनकी हर पोस्ट को उनके फैन्स बेहद पसंद करते हैं. अब इस ट्वीट पर भी लोग काफी मजे ले रहे हैं. कुछ दिन पहले ही अमिताभ ने एक पोस्ट कर कोरोना वॉरियर्स का आभार भी जताया था.

उनके प्रोजेक्ट्स की बात करें तो अमिताभ ने प्रियंका चोपड़ा, दिलजीत दोसांझ, रणबीर कपूर, रजनीकांत, आलिया भट्ट और अन्य सुपरस्टार्स के साथ मिलकर एक घर में बनाई शॉर्ट फिल्म फैमिली में काम किया था. ये फिल्म कोरोना वायरस की जागरूकता फैलाने के लिए थी.

कोरोना अपडेट / पीथमपुर के 96 उद्योग आज से शुरू होंगे; 91 नए मरीज, आंकड़ा 1176 पर, 350 निगेटिव

इंदौर. मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने पीथमपुर की 96 बड़ी व मध्यम इंडस्ट्री को उत्पादन शुरू करने की मंजूरी दे दी। इससे पहले 110 इंडस्ट्री को मंजूरी दी गई थी। यानी रविवार से 206 इंडस्ट्री में काम शुरू हो जाएगा। इंदौर शहर के औद्योगिक क्षेत्रों को शुरू करने पर भी विचार शुरू हो गया है। हालांकि ये 3 मई के बाद ही खुल सकेंगे। इस राहतभरी खबर के बीच 91 नए पॉजिटिव मिले हैं। शनिवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक अब शहर में 1176 संक्रमित हो चुके हैं। नए संक्रमितों में एमजीएम की एक एसोसिएट प्रोफेसर और रेसिडेंसी एरिया का एक कर्मचारी व एमवाय के तीन मेल नर्स भी हैं। इनमें से दो की ड्यूटी चेस्ट वार्ड और एक की ड्यूटी टीबी अस्पताल में थी। 11 मार्च से जिला जेल में बंद कैदी सद्दाम पॉजिटिव निकला है। वह चंदननगर में पुलिस पर पत्थरबाजी का आरोपी है। इधर, अब पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका है, पुडुचेरी में 606 सैंपल की रिपोर्ट दो-तीन दिन में आएगी, जबकि 500 सैंपल अहमदाबाद की सुप्रा लैब भेजे हैं। उनकी रिपोर्ट रविवार रात मिल जाएगी।
संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी ने बताया कि 500 और सैंपल इस लैब को भेज रहे हैं। इस तरह 1600 सैंपलों की रिपोर्ट आएगी। हालांकि ये सभी संदेही मरीज क्वारेंटाइन में हैं। इसी बीच मेडिकल कॉलेज की लैब में 400 सैंपल की जांच होने के साथ ही टीबी अस्पताल की सीबी नेट मशीन से कार्टेज पद्धति से जांच शुरू हो गई है। ऐसा करने वाला इंदौर मप्र का पहला शहर है। इस तकनीक से 22 सैंपल जांचे गए। अब और कॉर्टेज की व्यवस्था की जा रही है, ताकि हर दिन 110 सैंपल जांचे जा सकें।

नई मशीन के लिए किट की व्यवस्था कर रहे
यश टेक्नोलॉजी ने बेंगलुरु से मंगवाकर 60 लाख की हाईटेक पीसीआर मशीन प्रशासन को दी है। इससे एक दिन में 800 टेस्ट हो सकेंगे। त्रिपाठी ने बताया कि इसके लिए किट की व्यवस्था कर रहे हैं।
उद्योगपतियों से मांगे एआईएमपी ने सुझाव
उद्योगों को पुन: शुरू करने को लेकर एसो. ऑफ इंडस्ट्री मप्र (एआईएमपी) ने उद्योगपतियों को वॉट्सएप, ई-मेल पर एक फॉर्म भेजा है, जिसमें पूछा है कि वे किस तरह की इंडस्ट्री चलाते हैं, श्रमिकों को लेकर उनके पास क्या व्यवस्था है और वह क्या चाहते हैं। जवाब मिलने के बाद इन्हें सरकार को भेजेंगे, ताकि उद्योग शुरू किए जा सकें।

फूड, स्टील और ऑटो इंडस्ट्री को मिली मंजूरी
फूड में पराग, डाबर, स्टील सेक्टर में टाटा स्टील, मान एल्युमिनियम, ऑटो सेक्टर में वीई कमर्शियल, सुरिन, मदरसन सूमि, एग्रो इंडस्ट्री की शक्ति पंप, पैकेजिंग में पॉलीमर पैकेजिंग, प्रिंट पाइंट फार्मा पैकेजिंग, टेक्सटाइल में एजीएम टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग में माहले, जश इंजीनियरिंग आदि को मंजूरी दी गई है।

250 डॉक्टरों का खानसामा संदिग्ध, किचन बंद किया
एक माह से मेडिकल कॉलेज के 250 जूनियर डॉक्टर्स के लिए खाने की व्यवस्था संभाल रहे लायंस क्लब ने अचानक किचन बंद कर दिया। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि यहां के खानसामा की सुबह तबीयत बिगड़ी। उसे तुरंत एमवाय की ओपीडी में दिखवाया गया और जांच के लिए सैंपल लिया गया।

इसके बाद एहतियात के तौर पर काम रोक दिया गया। लायंस क्लब के सहयोग से कोविड-19 के मरीजों की तीमारदारी में लगे जूनियर डॉक्टरों और अन्य स्टॉफ के लिए खाना बनवाया जा रहा था। क्लब अन्य सदस्य खाना पैक कर डॉक्टर्स तक पहुंचाते थे। एक महीने से यह व्यवस्था चल रही है। सुबह खाना बनाने वाले कर्मचारी ने सिरदर्द की शिकायत की। जिसके बाद उसका परीक्षण कर जांच के लिए सेंपल भेजा गया। लायंस क्लब ने इसकी सूचना एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन को दी। साथ ही एक-दो दिन किसी अन्य माध्यम से खाने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया। लायंस क्लब के सतीश भल्ला बताते है कि डॉक्टर्स की सुरक्षा में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरत सकते। सुबह आते ही जब कर्मचारी ने सिरदर्द की बात कही। हमने काम रोक दिया। रविवार तक जांच रिपोर्ट भी आ जायेगी। सोमवार से दोबारा काम शुरू कर देंगे। किचन को सेनितटाययज़ भिनकार्रवा दिया गया है।

मुस्लिम समाज ने दिखाई सूझबूझ… रमजान के पहले दिन घर-मस्जिद में दूरी के साथ इबादत

शनिवार से शुरू हुए रमजान माह में मुस्लिम समाजजनों ने घरों में ही इबादत की। मस्जिदो में नमाज के वक्त 4 से 5 लोग ही मौजूद रहे। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए रोजा इफ्तारी भी की। समाज का हर व्यक्ति ऐसी ही सूझबूझ दिखाए तो कोरोना से जंग आसान होगी।

कलेक्टर एसपी ने चेकिंग पॉइंट्स पर जाकर देखा बाहर से कैसे घुस रहे है बाहरी

कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने चैक पोस्टों का किया निरीक्षण, देखी व्यवस्थाएं 

ग्वालियर/ कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण को रोकने हेतु जिले में किए जा रहे उपायों एवं चैक पोस्ट पर की गई व्यवस्थाओं का कलेक्टर श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह एवं पुलिस अधीक्षक श्री नवनीत भसीन ने अधिकारियों के साथ जायजा लिया। इस दौरान आयुक्त नगर निगम श्री संदीप माकिन, अपर कलेक्टर श्री अनूप कुमार सिंह, अपर कलेक्टर श्री रिंकेश वैश्य, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुमन गुर्जर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री पंकज पाण्डेय साथ थे।

कलेक्टर श्री सिंह एवं पुलिस अधीक्षक श्री भसीन कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने एवं चैक पोस्टों पर तैनात कर्मचारियों की उपस्थिति को देखा तथा आवश्यक निर्देश दिए। चिरवाई नाका, बेला की बावड़ी आदि स्थानों पर पहुँचकर चैक पोस्ट पर कार्यरत दल के अधिकारी-कर्मचारियों से चर्चा की। कलेक्टर ने चैक पोस्टों पर तैनात दल के सभी सदस्यों को निर्देश दिए कि संधारित की जाने वाली पंजी में आने एवं जाने वालों की पूर्ण जानकारी मोबाइल नम्बर सहित दर्ज करें। साथ ही वाहन नम्बर भी अंकित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की जानकारी होने पर त्वरित इंसीडेंट कमांडर को बताएं। उन्होंने चैक पोस्ट पर चिकित्सक एवं पैरामेडीकल स्टाफ उपलब्धता की जानकारी ली।

पुलिस अधीक्षक श्री नवनीत भसीन ने चैक पोस्टों पर पुलिस दल के सदस्यों को पीपीई किट्स के संबंध में चर्चा करते हुए निर्देश दिए कि आवश्यकता पड़ने पर ही उपयोग करें। लेकिन मास्क एवं दस्ताने आवश्यक रूप से पहनें। उन्होंने पुलिस कर्मियों को निर्देश दिए कि जो पीपीई किट्स उपलब्ध कराई गई हैं उसका उपयोग करने के बाद किसी डिब्बे में रखें, खुले में न रखें। इन्हें विनिष्टीकरण हेतु वाहन लेकर जा सकें।

कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने चैक पोस्टों के निरीक्षण के पूर्व सिटी सेंटर स्थित स्वास्थ्य एवं प्रबंधन संस्थान, सत्कार गेस्ट हाउस, आरआई प्रशिक्षण केन्द्र का भी अवलोकन किया।

नो बैंड,बाजा, बारात लेकिन हो जाएगी शादी

लॉकडाउन के दौरान आयोजित शादियों में वर एवं वधु पक्ष से 4 – 4 लोग उपस्थित हो सकेंगे

ग्वालियर / कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए जिले में 3 मई 2020 तक लागू लॉकडाउन की अवधि के दौरान आयोजित होने वाले शादी-समारोह अपने-अपने घरों में सम्पन्न होंगे। जिसमें वर एवं वधु पक्ष की ओर से 4 – 4 व्यक्ति पंडित एवं काजी आदि की उपस्थिति में विवाह करायेंगे।
जिला मजिस्ट्रेट श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने इस संबंध में बताया कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देशों के तहत लॉकडाउन की अवधि में विवाह समारोह आयोजन के संबंध में जिला मजिस्ट्रेट को अधिकृत किया है। जारी आदेश में उल्लेख किया है कि लॉकडाउन की अवधि में आयोजित होने वाले विवाह समारोह में आयोजनकर्ता अपने-अपने घरों पर वर एवं वधु पक्ष 4 – 4 व्यक्ति, पंडित एवं काजी सहित अदि की उपस्थिति में विवाह करा सकते हैं।
ऐसे प्रकरणों में जहां वधु या वर पक्ष को विवाह समारोह हेतु ग्वालियर जिले से बाहर जाने की स्थिति में वाहन में ड्रायवर सहित दो व्यक्तियों की अनुमति होगी। आयोजनकर्ता ऐसे अधिकतम दो वाहन की अनुमति संबंधित क्षेत्र के एसडीएम से प्राप्त कर सकेगा। जिसमें जाने वाले व्यक्तियों के नाम, पते एवं मोबाइल नम्बर की जानकारी प्रस्तुत करनी होगी।
जिला ग्वालियर अंतर्गत आयोजित होने वाले विवाह समारोह की सूचना आयोजनकर्ता को क्षेत्रीय एसडीएम को विवाह में सम्मिलित होने वाले वर-वधु पक्षों की जानकारी मय स्थायी पते व मोबाइल नम्बर सहित उपलब्ध कराना आवश्यक होगी। एसडीएम को सूचना किए बगैर विवाह समारोह आयोजित नहीं किए जा सकेंगे। सार्वजनिक स्थलों पर विवाह एवं सामूहिक विवाह पूर्णत: प्रतिबंधित रहेंगे। विवाह समारोह में सोशल डिस्टेंसिंग तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कोरोना संक्रमण के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। आदेश का उल्लंघन भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-188 एवं अन्य सुसंगत अधिनियम के तहत दण्डनीय होगा।

Covid-19: बुखार से शुरू होकर मौत के मुंह तक, कोरोना वायरस के मरीजों में ऐसे होते हैं लक्षण, ये है टाइमलाइन

वैज्ञानिक हर रोज इस पर रिसर्च कर रहे हैं और इसका इलाज ढूंढ़ने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अभी तक वे इसकी वैक्सीन बनाने में नाकाम रहे हैं। जानते हैं इस बीमारी के लक्षणों की टाइमलाइन-

Covid-19: बुखार से शुरू होकर मौत के मुंह तक, कोरोना वायरस के मरीजों में ऐसे होते हैं लक्षण, ये है टाइमलाइन
कोरोना वायरस का कहर पूरी दुनिया पर टूट रहा है। सामान्य लक्षणों के साथ शुरू होने वाली इस बीमारी ने अब तक दुनियाभर में करीब 2 लाख लोगों की जान ले ली है। इस वायरस के लक्षण बाकी मौसमी बीमारियों के जैसे ही होते हैं लेकिन इसमें इतना फर्क है कि इस वायरस के कारण सांस लेने में मरीज को काफी तकलीफों सामना करना पड़ता है।

वैज्ञानिक हर रोज इस पर रिसर्च कर रहे हैं और इसका इलाज ढूंढ़ने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अभी तक वे इसकी वैक्सीन बनाने में नाकाम रहे हैं। अपने रिसर्च में वे हर दिन इस वायरस से जुड़ी नई-नई जानकारियां सबके सामने ला रहे हैं जो हर किसी को हैरान करने के लिए काफी है। शुरुआत में इसके बेहद सामान्य लक्षण सामने आए थे मसलन बुखार, सांस लेने में तकलीफ, कफ की समस्या।

बाद में वैज्ञानिकों ने अपने शोध के बाद बताया कि इसके लक्षण में आंखों का लाल होना भी हो सकता है। इसके बाद के रिसर्च में ये भी सामने आया कि पैरों में इन्फेक्शन या एलर्जी भी कोरोना वायरस के लक्षण हो सकते हैं। हर रोज नई जानकारियां इस महामारी से छुटकारा दिलाने में भी एक बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही है। जब तक इस बीमारी को कोई अच्छे से समझ पाता है तब तक दूसरे दिन इससे जुड़ी एक नई चौंकाने वाली जानकारी सबके सामने आ जाती है जिससे ये समस्या दिन पर दिन और जटिल होती जा रही है।

जानते हैं कोरोना वायरस के लक्षण की पूरी टाइमलाइन के बारे में (वैज्ञानिकों के द्वारा बनाई गई टाइमलाइन)

पहले दिन- बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द, सूखी खांसी। सूखी खांसी के साथ बुखार शुरू होता है। इसके साथ ही मांसपेशियों में दर्द व थकान की शिकायत भी होती है। इसके अलावा गले में खराश के साथ-साथ नाक बहना भी शुरू हो जाता है बीच-बीच में छींकभी आती है। वुहान में किए गए स्टडी के मुताबिक 10 फसदी लोगों में डायरिया के लक्षण भी पाए गए।

पांचवें दिन- सांस लेने में तकलीफ। वुहान के झोंगनान अस्पताल के द्वारा 138 मरीजों पर किए गए स्टडी में ये सामने आया कि उनमें सांस लेने की समस्या भी है। वे छाती में टाइटनेस और सफोकेशन महसूस करते हैं।

सातवें दिन- सांस लेने में अधिक समस्या है तो अस्पताल में भर्ती। अधिकांश बीमारियों में एक सप्ताह के अंदर सारे लक्षण दिख जाते हैं। स्टडी के मुताबिक इन मरीजों में 85 फीसदी लोग कोरोना वायरस के मरीज पाए गए। इसके बाद इन्हें आइसोलेशन में रखा गया। उन्हें करीब 14 दिनों के लिए अपने परिवार से दूर अस्पताल में आइसोलेट रखा गया। घर का पहला सदस्य जिस दिन बीमार हुआ उस दिन से 14 दिन की गिनती की जाती है।

आठवें दिन- रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी। इसमें मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। इसमें जान जाने का भी खतरा रहता है क्योंकि इसमें फेफड़ा इतना कमजोर हो जाता है कि वह शरीर के अंगों को ऑक्सीजन पहुंचाने में सक्षम नहीं रह जाता है। इसमें सांस लेने में समस्या भी बढ़ जाती है। इस स्टेज में फेफड़ों में इन्फेक्शन हो जाता है और जिस कारण वह ठीक से काम करना बंद कर देता है। इसमें बेहोश होने की भी फीलिंग आती रहती है, क्योंकि शरीर बिल्कुल सुस्त और कमजोर हो जाता है।

दसवें दिन- काफी ज्यादा केयर की जरूरत। इसमें मरीज को सांस लेने में तकलीफ ज्यादा बढ़ जाती है जिसके बाद उसे वेंटीलेटर पर रखने की जरूरत आ पड़ती है। इस दौरान मरीज को सबसे ज्यादा केयर की जरूरत होती है।

12वें दिन- बुखार समाप्त। इस स्टेज पर बीमारी का सबसे पहला लक्षण बुखार समाप्त हो जाता है। हालांकि कफ की समस्या बनी रहती है। स्टडी के मुताबिक 191 में 45 फीसदी मरीजों में 12वें दिन डिस्चार्ज के बाद भी कफ की समस्या देखी गई।

13वें दिन- सांस लेने की तकलीफ खत्म। 13वें दिन वो दिन होता है जो ये फैसला करता है कि जो सांस लेने की तकलीफ को सहन करके बच गया वह बच गया वरना मरीज की मौत हो जाती है।

कोरोना वायरस महामारी के एपीसेंटर वुहान में किए गए एक स्टडी के मुताबिक कोविड-19 बीमारी के मरीज में सबसे ज्यादा लक्षण बुखार के दिखते हैं, इसके बाद थकान और फिर सांस लेने की समस्या आती है। ये सब लक्षण एक के बाद एक करके आते हैं। इसी स्टडी में ये भी बताया गया कि कोविड-19 के ऐसे मरीज जिन्हें 29 दिसंबर 2019 के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया वे 31 जनवरी 2020 तक या तो डिस्चार्ज कर दिए गए या फिर उनकी मौत हो गई।

कृषि मंत्री बनने के बाद पटेल ने दी अन्नदाता को राहत, किसानों को मंडी में नहीं देना होगी तुलावटी

भोपाल कृषि मंत्री बनने के बाद कमल पटेल ने किसानों को कोरोना संकट में बड़ी राहत दी है। मंत्रालय में आयोजित बैठक में निर्देश दिये हैं कि रबी उपार्जन में किसानों से उनकी उपज की तुलावटी नहीं ली जायेगी। पटेल ने बताया कि तुलावटी की राशि का वहन राज्य सरकार करेगी। कृषि मंत्री ने विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया द्वारा प्रदेश में विभिन्न मण्डियों में किसानों से अलग-अलग दर पर तुलावटी की राशि लिये जाने की शिकायत पर यह निर्देश दिये।

कृषि मंत्री ने बताया कि इस प्रकार की शिकायतें अन्य विधायकों द्वारा भी की जा रही थीं। किसान सीधे व्यापारी को बेच सकेंगे अपनी उपज मंत्री पटेल ने कहा कि रबी उपार्जन के अंतर्गत मण्डी से पर्ची कटवाकर किसान सीधे अपनी उपज व्यापारियों को बेच सकेंगे। किसानों से तुलावटी का पैसा नहीं लिया जायेगा। बैठक में मण्डी बोर्ड के महाप्रबंधक संदीप यादव और अपर संचालक मण्डी बोर्ड केदार सिंह उपस्थित थे।