अपनों के निशाने पर सरकार-शिवराज को गोपाल भार्गव का बाउंसर, कमलनाथ ने बोला हमला

भोपाल। मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार के 1 महीने हो गए हैं। पहली बार शिवराज के दावों पर पार्टी के बड़े नेता ने सवाल उठाया है। सवाल बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने उठाया है। कोरोना काल में बाहर फंसे मजदूरों को शिवराज सरकार ने 1 हजार रुपये उनके खाते में ट्रांसफर करने का वादा किया है। सरकार का दावा है कि मजदूरों के खाते में पैसे ट्रांसफर हो गए हैं। जबकि पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव का कहना है कि हमारे क्षेत्र के लोगों को मिला ही नहीं है।

भार्गव के सवाल पर अब पूर्व सीएम कमलनाथ ने शिवराज सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। दरअसल, वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए बीजेपी टॉस्क फोर्स की मीटिंग हुई है। मीटिंग के दौरान टॉस्क फोर्स के सभी सदस्य और सीएम शिवराज सिंह चौहान मौजूद थे। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न इलाकों की स्थिति पर चर्चा हो रही थी। इसी को लेकर गोपाल भार्गव ने मजदूरों के खाते में दी जाने वाली राशि को लेकर सवाल उठाया।
मेरे क्षेत्र के लोगों को नहीं मिला
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि मजदूरों के खाते में 1 हजार रुपये देना अच्छा है, लेकिन मैंने जो अपने क्षेत्र के मजदूरों की सूची सौंपी थी, उनके खातों में अभी तक यह पैसा नहीं पहुंचा है। भार्गव के सवाल पर शिवराज की मुश्किलें बढ़ गई हैं। साथ ही सियासी गलियारे में कई सवाल भी तैरने लगे हैं। इस मामले पर भार्गव का पक्ष जानने के लिए फोन किया तो उनका फोन बंद मिला।
कमलनाथ ने सरकार को घेरा
वहीं, पूर्व सीएम कमलनाथ ने इसे लेकर शिवराज सरकार पर हमला किया है। कमलनाथ ने लिखा कि शिवराज सरकार दावा कर रही है कि मजदूरों के खातों में 1-1 हजार रुपये डाल दिए गए हैं। पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव इनकार कर रहे हैं कि उनके क्षेत्र में मजदूरों के खाते में पैसे नहीं पहुंचे। आखिरी सच्चाई क्या है। सरकार ऐसे संकट के दौर में अपनी घोषणाओं पर अमल करे, गरीब मजदूरों के खाते में तत्काल राशि डाले।
बीजेपी ने किया इनकार
बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कमलनाथ के आरोपों पर कहा कि मजदूरों के खाते में जो पैसे उनके अकाउंट को वेरीफाई करने के बाद डाले जा रहे हैं। यह एक ऑनलाइन प्रक्रिया है। अग्रवाल ने कहा कि भार्गव जी किस सूची की बात कर रहे हैं, ये दोनों अलग-अलग विषय है। एक जनधन खाते और दूसरा मजदूरों का खाता। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि प्रोसेस होने में टाइम लगा हो। यही एक मात्र कारण हो सकता है और कोई कारण नहीं हैं।
आपको बता दें कि 23 मार्च को शपथ लेने के 28 दिन बाद शिवराज सिंह चौहान ने कैबिनेट का विस्तार किया है। इसमें 5 लोगों को शामिल किया गया है। गोपाल भार्गव पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, पूर्व में भी वह मंत्री रहे हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि कोरोना क्राइसिस के बीच उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। ऐसे में सवाल है कि क्या भार्गव अपनी अनदेखी से नाराज हैं?

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