सिंधिया के गढ़ में कांग्रेस देगी टक्कर।


ग्वालियर चंबल सम्भाग में महल का बोल बोला रहता था अब तक फिर चाहे वो कांग्रेस में हो य बी जे पी , राजमाता विजया राजे सिंधिया जब तक इस दुनिया मे रही तब का बी जे पी में वही हुआ जो राजमाता ने चाहा राजमाता के बाद उन की छोटी बेटी यशोधराराजे सिंधिया के हाथों में बी जे पी की कमान आई वही कांग्रेस में जब तक महाराज माधवराव सिंधिया जीवित रहे उन की ही चली फिर चाहे अर्जुन सिंह की सत्ता रही हो य दिग्विजय सिंह मोती लाल वोरा की ,सिंधिया के बाद कांग्रेस की कमान ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथों में आई लेकिन समय के साथ बी जे पी महल का दबदबा कम होना शुरु हो गया वही अब सत्ता का सुख य अपनी उपेक्षा से दुखी हो के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने 22 विधायको के साथ जिनमें 6 मन्त्री थे कांग्रेस को मझधार में छोड़ कर बी जे पी में चले गए। जाहिर हर नेता कहता है कि वो राजनीती जनता की सेवा के लिए करता है पर ऐसा होता नही नेता सिर्फ सत्ता का सुख पाने को ही राजनीति करता है । यदि जन सेवा ही करना है तो सत्ता की य किसी पार्टी की जरूरत क्या है बिना सत्ता में रहे भी राजनीति की जा सकती है। सिंधिया ने बी जे पी से क्या क्या शर्तो पर समझौता किया ये तो वो ही जाने पर हम तो इतना कह सकते हैं जो मांन सम्मान कांगेस ने सिंधिया को दिया वो बी जे पी कभी नही मिलेगा बाकी समय बताएगा।

पहली बार इस इलाके में सिंधिया के वगैर कांग्रेस सिंधिया के खिलाफ ही चुनाव मैदान में उतरेगी।जिन 24 सीटों पर चुनाव होना में उन में सबसे अधिक 16 सीट इन दोनों संभागों की ही है। अभी हम शिवपुरी जिले की बात करते हैं यहां करेरा ओर पोहरी दो सीटों पर चुनाव होना है करेरा आरक्षित सीट है और पोहरी सामान्य इन दोनों सीटों पर पूर्व विधायको को ही बी जे पी टिकट देगी जो कांगेस छोड़ कर बी जे पी में आये हैं। करेरा कोटे में चले जाने से दावेदार कम होंगे लेकिन पोहरी से ज्यादा दावेदार होंगे पोहरी में नरवर मगरौनी सहित करेरा के कुछ ग्राम आने से इस इलाके के नेता भी टिकट मांगेंगे वैसे पोहरी से तीन बार विधायक रहे हरिबल्लभ शुक्ला ओर पूर्व विधायक हिमांशु शर्मा के परिवार वाले भी दावेदारी करेगे वही धाकड़ समाज के नेता भी टिकट के लिए दम भरेंगे वही कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष ओर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव के करीबी राजेन्द्र गुर्जर भी दावेदारी करगे। राजेंद़ गुर्जर की नरवर, मगरोनी के गांवों में अच्छी पकड़ है ।पिछली बार भी राजेन्द्र गुर्जर ने टिकट मांगा था नाम ऊपर तक चला भी था पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के वीटो पवार से राजेन्द गुर्जर का टिकट कट गया और सुरेश धाकड़ को मिल गया। इस बार परिस्थिती बदल गई है सिंधिया बी जे पी में चले गए हैं इस लिए राजेन्द्र गुर्जर का रास्ता साफ हो सकता है राजेन्द़ गुर्जर को भोपाल में बैठे नेताओ के अलावा देहली के कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं का साथ मिल सकता है। पोहरी विधानसभा में अभी तक धाकड़ य पंडित समाज का ही विधायक बनता रहा है य इन दोनों समाजो में से कोई एक समाज जिस नेता का साथ खुल कर दे देगा वो चुनाव जीत जाएगा। अभी चुनाव दूर है पर तैयारी बी जे पी ओर कांग्रेस दोनों ने शुरु कर दी है अभी बी जे पी सत्ता में लेकिन कांगेस ने अगर नए ओर जनता के बीच के नेता को मैदान में उतारा तो ये सीट कांग्रेस फिर जीत सकती है।
एक नाम और पोहरी विधानसभा के लिये उपचुनाव में उम्मीदवारी के लिये लिया जा रहा है वह लक्ष्मीनारायण धाकड वकील हैं, इनकी भी पोहरी विधान सभा और धाक़ड समाज के साथ साथ अन्य समाजों के वोटरों पर अच्छी पकड़ है।


खैर टिकिट किसी को मिले कांग़ेस के लोगों का कहना है कि सब एक जुट होकर चुनाव लड़ेंगे और फिर से मध्यप़देश की सत्ता में वापिसी करेंगे, ऐसा हो भी सकता है क्योंकि ये जनता है कब पाला बदल ले कोई कह नहीं सकता है।
गढ़ को तो पहले ही जनता ने लोकसभा चुनाव में तहस नहस कर दिया है । कोलारस विधानसभा से भी इसका उदाहरण दिया जा सकता है।
*पोहरी संवाददाता की कलम स

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