शिवराज सिंह चौहान ने बनाया मंत्रिमंडल 5 मंत्रियों ने ली शपथ

भोपाल 29 दिन बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बनाया अपना मंत्रिमंडल. 5 मंत्रियों ने ली शपथ. भाजपा से डॉ.नरोत्तम मिश्रा, कमल पटेल, मीना सिंह बनी मंत्री. सिंधिया कैम्प से तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को बनाया गया मंत्री.

सभी को साधने की कोशिश 
कमलनाथ सरकार को गिराने के लिए भाजपा ने हर स्तर पर अपनी तैयारी की थी। ऐसे में अब सभी गुटों को साथ लेकर चलना उसकी मजबूरी है। इसी के चलते सभी को साधने की कोशिश की गई है। मंत्रिमंडल में जातिगत समीकरणों को भी साधा गया है। स्वर्ण समाज से डॉ. नरोत्तम मिश्रा व गोविंद सिंह राजपूत, आदिवासी वर्ग से मीना सिंह, ओबीसी से कमल पटेल और अनुसूचित जति वर्ग से तुलसी सिलावट को रखा गया है। हालांकि मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए हर गुट के लिए लोग उतावले हो रहे थे। लेकिन मुख्यमंत्री के लिए सभी को संतुष्ट कर पाना संभव नहीं था। ऐसे में पार्टी आलाकमान ने बीच का रास्ता निकाला और सभी गुटों को सांकेतिक प्रतिनिधित्व देकर उन्हें फिलहाल साधने की कोशिश की गई है। 

मुख्यमंत्री शिवराज की कैबिनेट गठन में चली नहीं इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। जिस तरीके कमल पटेल को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है वह चौंकाने वाला नाम है। कमल पटेल को पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के गुट का माना जाता है। वे पहले भी शिवराज सरकार में मंत्री रह चुके हैं और समय -समय पर कई मुद्दों पर सरकार का विरोध भी करते रहे हैं।

जिससे शिवराज को फजीहत का सामना करना पड़ा था। शिवराज सोमवार की रात तक गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह को कैबिनेट में शामिल करने के प्रयास में रहे लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके। नरोत्तम की अनदेखी का सवाल ही नहीं उठता और सिंधिया गुट के लोगों को लेना उनकी मजबूरी थी। कैबिनेट की नई तस्वीर देखने के बाद सवाल फिर उठने लगे हैं कि क्या मंत्रियों के मामले में उनकी पसंद और नापसंद का ख्याल नहीं रखा गया या फिर उनकी चली ही नहीं?

और ये सोचते ही रह गए ….

कांग्रेस सरकार को गिराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले और फिर सिंधिया गुट के लोगों के साथ भाजपा की सदस्यता लेने वाले ये तीन पूर्व विधायकों के तो सपने ही अधूरे रह गए और ये मंत्री बनने की सोचते ही रह गए। इनमें पूर्व मंत्री एंदल सिंह कंषाना, बिसाहूलाल सिंह और हरदीप सिंह डंग शामिल हैं। भाजप के वरिष्ठ नेताओं ने इन्हें व्यक्तिगत रूप से मत्री बनाने का भरोससा दिलाया था।

और कामयाब रहे सिंधिया

राजनीतिक पंडितों की मानें तो भाजपा मंत्रिमंडल के बहाने एक तीर से कई निशाने करने में लगी हुई थीं। वह यह भी जताना चाह रही थी कि कांग्रेस छोड़कर आए लोगों को भाजपा अपने हिसाब से चलाएगी और बिना किसी दबाव के सरकार चलाएगी। ऐसे सिंधिया समर्थकों को एक साथ पॉवर में नहीं लाना भी इसी रणनीति का हिस्सा था। लेकिन सिंधिया भी अड़ गए आखिर उनकी प्रतिष्ठा का सवाल जो ठहरा। उन्होंने पार्टी हाईकमान से स्पष्ट कह दिया यदि पूर्ण रूप से कैबिनेट का गठन होगा तो उनके कम से कम 10 लोगों को मंत्री बनाया जाएगा। छोटा मंत्रिमंडल बनता है तो फिर उसमें भी सम्मानजनक रूप से सदस्य संख्या रखी जाना चाहिए। नतीजा सामने पांच  सदस्यीय मंत्रिमंडल में दो सिंधिया के होने से 40 फीसदी की हिस्सेदारी हो गई। इस लिहाज से देखा जाए तो शिवराज पर भारी पड़ गए सिंधिया।

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