शिवराज सिंह चौहान ने बनाया मंत्रिमंडल 5 मंत्रियों ने ली शपथ

भोपाल 29 दिन बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बनाया अपना मंत्रिमंडल. 5 मंत्रियों ने ली शपथ. भाजपा से डॉ.नरोत्तम मिश्रा, कमल पटेल, मीना सिंह बनी मंत्री. सिंधिया कैम्प से तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को बनाया गया मंत्री.

सभी को साधने की कोशिश 
कमलनाथ सरकार को गिराने के लिए भाजपा ने हर स्तर पर अपनी तैयारी की थी। ऐसे में अब सभी गुटों को साथ लेकर चलना उसकी मजबूरी है। इसी के चलते सभी को साधने की कोशिश की गई है। मंत्रिमंडल में जातिगत समीकरणों को भी साधा गया है। स्वर्ण समाज से डॉ. नरोत्तम मिश्रा व गोविंद सिंह राजपूत, आदिवासी वर्ग से मीना सिंह, ओबीसी से कमल पटेल और अनुसूचित जति वर्ग से तुलसी सिलावट को रखा गया है। हालांकि मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए हर गुट के लिए लोग उतावले हो रहे थे। लेकिन मुख्यमंत्री के लिए सभी को संतुष्ट कर पाना संभव नहीं था। ऐसे में पार्टी आलाकमान ने बीच का रास्ता निकाला और सभी गुटों को सांकेतिक प्रतिनिधित्व देकर उन्हें फिलहाल साधने की कोशिश की गई है। 

मुख्यमंत्री शिवराज की कैबिनेट गठन में चली नहीं इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। जिस तरीके कमल पटेल को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है वह चौंकाने वाला नाम है। कमल पटेल को पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के गुट का माना जाता है। वे पहले भी शिवराज सरकार में मंत्री रह चुके हैं और समय -समय पर कई मुद्दों पर सरकार का विरोध भी करते रहे हैं।

जिससे शिवराज को फजीहत का सामना करना पड़ा था। शिवराज सोमवार की रात तक गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह को कैबिनेट में शामिल करने के प्रयास में रहे लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके। नरोत्तम की अनदेखी का सवाल ही नहीं उठता और सिंधिया गुट के लोगों को लेना उनकी मजबूरी थी। कैबिनेट की नई तस्वीर देखने के बाद सवाल फिर उठने लगे हैं कि क्या मंत्रियों के मामले में उनकी पसंद और नापसंद का ख्याल नहीं रखा गया या फिर उनकी चली ही नहीं?

और ये सोचते ही रह गए ….

कांग्रेस सरकार को गिराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले और फिर सिंधिया गुट के लोगों के साथ भाजपा की सदस्यता लेने वाले ये तीन पूर्व विधायकों के तो सपने ही अधूरे रह गए और ये मंत्री बनने की सोचते ही रह गए। इनमें पूर्व मंत्री एंदल सिंह कंषाना, बिसाहूलाल सिंह और हरदीप सिंह डंग शामिल हैं। भाजप के वरिष्ठ नेताओं ने इन्हें व्यक्तिगत रूप से मत्री बनाने का भरोससा दिलाया था।

और कामयाब रहे सिंधिया

राजनीतिक पंडितों की मानें तो भाजपा मंत्रिमंडल के बहाने एक तीर से कई निशाने करने में लगी हुई थीं। वह यह भी जताना चाह रही थी कि कांग्रेस छोड़कर आए लोगों को भाजपा अपने हिसाब से चलाएगी और बिना किसी दबाव के सरकार चलाएगी। ऐसे सिंधिया समर्थकों को एक साथ पॉवर में नहीं लाना भी इसी रणनीति का हिस्सा था। लेकिन सिंधिया भी अड़ गए आखिर उनकी प्रतिष्ठा का सवाल जो ठहरा। उन्होंने पार्टी हाईकमान से स्पष्ट कह दिया यदि पूर्ण रूप से कैबिनेट का गठन होगा तो उनके कम से कम 10 लोगों को मंत्री बनाया जाएगा। छोटा मंत्रिमंडल बनता है तो फिर उसमें भी सम्मानजनक रूप से सदस्य संख्या रखी जाना चाहिए। नतीजा सामने पांच  सदस्यीय मंत्रिमंडल में दो सिंधिया के होने से 40 फीसदी की हिस्सेदारी हो गई। इस लिहाज से देखा जाए तो शिवराज पर भारी पड़ गए सिंधिया।

अशासकीय स्कूलों को मान्यता नवीनीकरण के लिए एक वर्ष की छूट

ग्वालियर /  कोविड-19 के संक्रमण के चलते अशासकीय स्कूलों की मान्यता नवीनीकरण के लिये एक वर्ष की छूट दी गई है। यह अवधि पूर्व में दो बार बढ़ाई जा चुकी है। लॉकडाउन अवधि 3 मई तक बढ़ाए जाने पर संस्थाओं को होने वाली कठिनाईयों और छात्रहित को ध्यान में रखते हुए 31 मार्च 2021 तक के लिये अशासकीय स्कूलों की मान्यता को यथावत मान्य किया गया है।
मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध ऐसे समस्त अशासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकण्डरी स्कूल, जिनकी मान्यता 31 मार्च, 2020 को समाप्त हो गई है, उन्हें म.प्र. माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शालाओं के मान्यता नियम 2017 (यथा संशोधित दिनांक 3 मार्च 2020) के नियम 6 अनुसार मान्यता नवीनीकरण के लिये इस वर्ष आवेदन प्रक्रिया से छूट दी गई है। ऐसे विद्यालयों की मान्यता 31 मार्च 2021 तक की अवधि के लिये यथावत मान्य होगी। ऐसे सभी विद्यालयों को मान्यता नियमों में वर्णित मापदण्डों एवं शर्तों का पालन किया जाना अनिवार्य होगा।
इन सभी विद्यालयों को शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिये मान्यता नवीनीकरण के लिये निर्धारित शुल्क आगामी सत्र तक के लिये स्थगित किया गया है। भविष्य में मान्यता नवीनीकरण के लिये आवेदन किये जाते समय यह शुल्क जमा करना होगा।
शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिये नवीन मान्यता के लिये एम.पी. ऑनलाइन के मान्यता पोर्टल पर आवेदन अपलोड करने की समय सीमा 30 अप्रैल से बढ़ाकर 30 मई 2020 कर दी गई है।

एमपी में एक और पुलिस अफसर कोरोना से लड़ते हुआ शहीद

आज एमपी में एक और जांबाज पुलिस अफसर कोरोना संक्रमण का ग्रास बन गया । उज्जैन के नीलगंगा थाना प्रभारी निरीक्षक भी आज नही रहे । वे ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमित हो गए थे और जीवन और मृत्यु से संघर्ष कर रहे है । कोरोना से यह पुलिस अफसर की दूसरी मौत है ।

उज्जैन नीलगंगा थाना प्रभारी यशवंत पाल की कोरोना से मौत, 59 वर्ष के अम्बर कालोनी कंटेमेंट एरिये में ड्यूटी के दौरान कोरोना पॉजिटिव होने के बाद आज इंदौर के अरविंदो अस्पताल में आज सुबह 5.10 पर मौत हो गयी। पिछले 10-12 दिनों से श्री पाल अरविंदो में एडमिट थे वे जब से आए थे तभी से क्रिटिकल स्थिति में रहे रिपोर्ट भी पॉजिटिव ही रही ।

अरविंदो हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ विनोद भंडारी के अनुसार
टीआई नीलगंगा उज्जैन यशवंत पाल का दुखद निधन आज सुबह 5:10 पर हो गया उन्हें आज से 10 दिन पहले सीरियस कंडीशन में यहां लाया गया था। उस समय उनके दोनों फेफड़ों में निमोनिया था और उन्हें सांस लेने में काफी तकलीफ थी उस समय उनका ऑक्सीजन का रेशों भी 60% था निरंतर इलाज के बाद भी उनमें कोई इंप्रूवमेंट नहीं आया उन्हें 48 घंटे भी वेंटिलेटर पर रखा गया क्योंकि उन्हें एक्यूट रेस्पिरेट्री डिस्ट्रक्ट सिंड्रोम काफी सीवियर था हर संभव प्रयास के बाद भी हम उन्हें बचा नहीं पाए।

गौरतलब है कि इससे पहले तीन रोज़  पहले इंदौर के एक टीआई देवेंन्द्र चंद्रवंशी की भी कोरोना से ग्रसित होकर जान जान जा चुकी है 

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग. की हालत गंभीर मीडिया रिपोर्ट्स

जानकारी के मुताबिक किम के ब्रेन डेड होने की खबरें भी आ रही हैं लेकिन इन पर भरोसा करना काफी मुश्किल है. किम जोंग की उम्र अभी 36 साल है लेकिन उनकी तबियत को लेकर काफी वक्त से तमाम अटकलें लगाई जाती रही हैं.

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन गंभीर रूप से बीमार हैं और मौत से जंग लड़ रहे हैं. खबरों के मुताबिक एक सर्जरी के बाद उनकी हालत काफी खराब है. उनका कार्डियोवस्कलर के कारण इलाज जारी थी लेकिन उनकी स्थिति खराब होने पर सर्जरी की गई थी. फिलहाल ये माना जा रहा है कि उनका बचना काफी मुश्किल है.

अमेरिकी चैनल सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कई महीनों से किम जोंग की तबियत खराब चल रही थी. दरअसल उन्हें ना केवल मोटापे की बीमारी है बल्कि वो धूम्रपान भी बहुत ज्यादा करते रहे हैं.

11 अप्रैल को उन्हें आखिरी बार देखा गया था. यही नहीं 15 अप्रैल को वो अपने दादा के जन्मदिन पर होने वाले कार्यक्रम में भी दिखाई नहीं दिए थे.

जानकारी के मुताबिक किम के ब्रेन डेड होने की खबरें भी आ रही हैं लेकिन इन पर भरोसा करना काफी मुश्किल है क्योंकि उत्तर कोरिया के लोग उन्हें काफी मानते हैं और इसी वजह से किम से जुड़ी सूचनाएं बाहर आना काफी कठिन होता है.

फिलहाल इस खबर की ऑफिशियल पुष्टि नहीं हो सकी है इसलिए इस पर दावा करना काफी जल्दबाजी होगा.

ऐसी जानकारी भी है कि कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में उनकी दिल की सर्जरी हुई है. पिछले हफ्ते ही उत्तर कोरिया ने अपने संस्थापक किम इल सुंग की जयंती मनाई थी और किम जोंग इस उत्सव में नहीं दिखे थे.

तभी से कयास लगाए जाने शुरू हो गए थे कि उनकी तबियत ठीक नहीं है. दरअसल इस दिन उत्तर कोरिया में बड़ा जश्न होता है और सार्वजनिक अवकाश रहता है.

किम जोंग की उम्र अभी 36 साल है लेकिन उनकी तबियत को लेकर काफी वक्त से तमाम अटकलें लगाई जाती रही हैं. इन अटकलों को पश्चिमी मीडिया का दुष्प्रचार बताया जाता है लेकिन इस बार मामला वाकई काफी गंभीर लग रहा है.

अमेरिका में कच्चा तेल हुआ पानी से सस्ता

नई दिल्ली

अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत भले ही बोतलबंद पानी से कम हो गई हो फिर भी भारत में आपको पेट्रोल या डीजल मुफ्त में या सस्ते में नहीं मिलेगा. जानिए इसके पीछे क्या कारण है.

कोरोना की मार से कच्चे तेल के दाम में ऐतिहासिक गिरावट आई है. अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत बोतलबंद पानी से कम यानी लगभग 77 पैसे प्रति लीटर हो गई. अंतरराष्ट्रीय बजार में अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल का भाव गिरते-गिरते लगभग शून्य तक पहुंच गया, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हिंदुस्तान में तेल मुफ्त में मिलने लग जाएगा.

इसे ऐसे समझें साल की शुरुआत में कच्चा तेल 67 डॉलर प्रति बैरल यानी 30.08 रुपए प्रति लीटर था. वहीं 12 मार्च को जब भारत में कोरोना के मामले की शुरुआत हुई तो कच्चे तेल की कीमत 38 डॉलर प्रति बैरल यानी 17.79 रुपए प्रति लीटर हो गई. वहीं 1 अप्रैल को कच्चे तेल की कीमत गिरकर 23 डॉलर प्रति बैरल यानी प्रति लीटर 11 रुपए पर आ गई.

इसके बावजूद दिल्ली में 1 अप्रैल को पेट्रोल का बेस प्राइस 27 रुपए 96 पैसे तय किया गया. इसमें 22 रुपए 98 पैसे की एक्साइज ड्यूटी लगाई गई. 3 रुपए 55 पैसा डीलर का कमीशन जुड़ गया और फिर 14 रुपए 79 पैसे का वैट भी जोड़ दिया गया. अब एक लीटर पेट्रोल की कीमत 69 रुपए 28 पैसे हो गई. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल भले ही सस्ता हो जाए, लेकिन आपको पेट्रोल की कीमत ज्यादा ही चुकानी पड़ती है.

क्यों आई ऐतिहासिक गिरावट

दरअसल, मई महीने में तेल का करार निगेटिव हो गया है. मतलब ये कि खरीदार तेल लेने से इनकार कर रहे हैं. खरीदार कह रहे हैं कि तेल की अभी जरूरत नहीं, बाद में लेंगे, अभी अपने पास रखो. वहीं, उत्पादन इतना हो गया है कि अब तेल रखने की जगह नहीं बची है. ये सबकुछ कोरोना की महामारी की वजह से हुआ है.

योगी आदित्यनाथ के पिता जब पोती के साथ लाईन में लगे

दो साल पूर्व हरिद्वार में लगाए गए रोजगार मेले में सीएम योगी की भतीजी नौकरी मांगने पहुंची थी, उनके साथ आनंद सिंह बिष्ट भी पहुंचे थे। उनकी ये सादगी देखकर हर कोई प्रभावित हो गया था।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के छोटे भाई मानेंद्र सिंह की बेटी भी रोजगार मेले में नौकरी के लिए पहुंची थी। इस दौरान सीएम योगी के पिता भी उनके साथ थे।
हरिद्वार के भल्ला इंटर कालेज में सेवायोजन एवं कौशल विकास विभाग की ओर से रोजगार मेला लगा था ।

सरकार के मंत्रियों ने मंच पर बैठाकर दिया था सम्मान

बीए उत्तीर्ण अर्चना बिष्ट ऑफिस मैनेजमेंट की डिप्लोमा धारक है। अर्चना ने ऊधमसिंहनगर की कंपनी स्नाइटर में साक्षात्कार दिया था। अर्चना के साथ-साथ आनंद सिंह बिष्ट ने अपनी बेटी की पुत्री लक्ष्मी रावत को भी नौकरी दिलाने के लिए साक्षात्कार कराया था।
उन्होंने बताया था कि अन्य अभ्यर्थियों की तरह वह मेले में अपनी पोती और नातिन को नौकरी दिलाने के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने अपने पुत्र योगी आदित्यनाथ से इस संबंध में कोई वार्ता तक नहीं की थी।
रोजगार मेले में उनके पहुंचने पर प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने मंच पर बैठाकर सम्मान दिया था। युवाओं के बीच भी वह आकर्षण का केंद्र बने थे और अभ्यर्थियों ने उनके साथ सेल्फी ली थी।

लंदन HC से प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका खारिज, अब विजय माल्या के पास 14 दिन का समय

नई दिल्ली

भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को इंग्लैंड की हाई कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने विजय माल्या की याचिका को खारिज कर दिया है. माल्या ने भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दी थी. अब यह मामला होम सेक्रेटरी के पास चला गया है.

माल्या ने भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ दी थी याचिकाअब यह मामला होम सेक्रेटरी के पास चला गया है

भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को इंग्लैंड की हाई कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने विजय माल्या की याचिका को खारिज कर दिया है, माल्या ने भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दी थी. अब यह मामला होम सेक्रेटरी के पास चला गया है.

दरअसल, विजल माल्या को 9,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भारत की जांच एजेंसियां भगोड़ा घोषित कर चुकी है. माल्या ने फरवरी में इंग्लैंड और वेल्स की हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. कोर्ट में मामले को देखने के बाद कहा कि माल्या के खिलाफ भारत में कई बड़े आरोप लगे हैं.

सीबीआई ने बताई जीत

माल्या के खिलाफ सीबीआई और ईडी की जांच चल रही है. अब इस फैसले को सीबीआई बड़ी जीत मान रही है. सीबीआई का कहना है कि लंदन कोर्ट में एजेंसी ने अपना पक्ष जोरदार तरीके से रखा था और अब फैसला उसके पक्ष में आया है. माल्या को भारत लाने की कड़ी में यह एक बड़ी सफलता है.

माल्या के पास बचे हैं 14 दिन

अब इस मामले में अंतिम फैसले के लिए इसे ब्रिटेन की गृह सचिव प्रीति पटेल के पास भेजा जाएगा. विजय माल्या के पास हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अब अगले 14 दिन में सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प बचा है. अगर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका स्वीकार नहीं करती है तो फिर 28 दिनों के भीतर गृह सचिव को प्रत्यर्पण पत्रों पर हस्ताक्षर करने होंगे.

Covid-19 को लेकर WHO प्रमुख की बड़ी चेतावनी, इससे भी बुरा वक्त अभी आने वाला है

जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख ने कोरोना वायरस महामारी के बारे में चेतावनी देते हुए कहा है कि ‘इससे भी बुरा वक्त अभी आने वाला है।’ ऐसे हालात पैदा होने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि कुछ देश ऐसे हैं, जिन्होंने अब पाबंदियां लगानी शुरू की हैं।
WHO के निदेशक डॉ. टेड्रोस एडेहनम ग्रेब्रेयेसुस ने हालांकि यह नहीं बताया कि उन्हें ऐसा क्यों लगता है कि हालात आगे चल कर बद से बदतर होंगे। अमेरिका के जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय द्वारा एकत्र किए गए आंकड़े के अनुसार, कोरोना वायरस से लगभग 25 लाख लोग संक्रमित हुए हैं जबकि 1.66 लाख लोगों की मौत हुई है।

कुछ लोगों ने हालांकि इंगित किया है कि भविष्य में संक्रमण अफ्रीकी देशों में फैलेगा, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं बेहद खराब हैं। जिनेवा में संवाददाताओं से बातचीत में टेड्रोस ने कोरोना वायरस संक्रमण की तुलना 1918 की स्पैनिश फ्लू से की है। उन्होंने कहा, ‘यह बहुत खतरनाक स्थिति है और यह हो रहा है…1918 फ्लू की तरह, जिसमें एक करोड़ के करीब लोगों की मौत हुई थी।’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन अब हमारे पास प्रौद्योगिकी है, हम इस आपदा से बच सकते हैं, हम उस तरह का संकट पैदा होने से बच सकते हैं।’ टेड्रोस ने कहा, ‘हम पर विश्वास करें। सबसे बुरा वक्त अभी आने वाला है।’ उन्होंने कहा, ‘आएं, इस आपदा को रोका जाए। यह ऐसा वायरस है जिसे अभी भी लोग समझ नहीं पा रहे हैं।’

उन्होंने यह भी कहा कि डब्ल्यूएचओ शुरुआत से ही कोरोना वायरस के खतरे को लेकर चेतावनी देता आ रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम पहले दिन से चेतावनी दे रहे हैं कि यह ऐसा शैतान है जिससे हम सभी को मिलकर लड़ना है।’
वहीं, अमेरिका के संदर्भ में टेड्रोस ने कहा कि कोरोना वायरस के संबंध में पहले दिन से ही अमेरिका से कुछ भी छुपा हुआ नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों की उपस्थिति में उन्होंने कहा, ‘पहले दिन से, अमेरिका से कुछ भी छुपा हुआ नहीं है।’ (भाषा)

किसान क्रेडिट कार्ड बिना भी किसानी के लिए मिल सकता है 20 लाख रुपये तक का लोन

इन स्कीमों की जानकारी के लिए सरकार की ओर से हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। आप 1800 425 1556 या फिर 9951851556 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके जानकारी हासिल कर सकते हैं।

जानें, कैसे किसानी के लिए मिल सकता है 20 लाख रुपये का लोन
खेती के जरिए किसानों की आय में इजाफे के लिए सरकार तेजी से प्रयास कर रही है। इसी के तहत एग्री बिजनेस को बढ़ावा देने का भी प्लान तैयार किया है, जिसके जरिए आप 20 लाख रुपये तक का लोन हासिल कर काम शुरू कर सकते हैं। एग्री क्लिनिक और एग्री बिजनेस सेंटर स्कीम के जरिए आप यह राशि हासिल कर सकते हैं। इसके लिए आपको स्कीम के तहत 45 दिनों की ट्रेनिंग लेनी होगी। इसके बाद यदि आपका प्लान योग्य पाया जाता है तो नाबार्ड यानी नेशनल बैंक फॉर एग्रिकल्चर ऐंड रूरल डिवेलपमेंट की ओर से आपको लोन की राशि मुहैया कराई जा सकती है।

कैसे कर सकते हैं आवेदन: यदि आप इन स्कीमों के तहत ट्रेनिंग लेना चाहते हैं तो https://www.agriclinics.net/ लिंक पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इसक बाद आपको हैदराबाद स्थित नेशनल एग्रिकल्चरल एक्सटेंशन मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट से जुड़े किसी सेंटर से ट्रेनिंग मिलेगी। यह संस्थान भारतीय कृषि मंत्रालय के तहत ही आता है।

क्या है इन स्कीमों का मकसद: दरअसल सरकार यह लोन इसलिए दे रही है ताकि एग्रिकल्चर ग्रैजुएट्स, पोस्ट ग्रैजुएट्स या फिर कृषि से जुड़े किसी डिप्लोमा कोर्स करने वाले एग्रिकल्चर के जरिए 12वीं पास करने वाले छात्रों को खेती-किसानी से जुड़े किसी बिजनेस को करने में मदद मिल सके। इससे एक तरफ युवाओं को रोजगार मिल सकेगा और इससे किसानों को भी सुविधा हो सकेगी। इन युवाओं की ओर से ऐसे प्लान को सरकार की ओर से मंजूरी दी जाएगी जो पेमेंट लेकर या मुफ्त में ही अपने बिजनेस प्लान के मुताबिक किसानों को सहायता पहुंचाते हों। इसे एग्रीप्रेन्योर कहा जा रहा है।

लोन पर सब्सिडी भी मिल रही: इन स्कीमों के तहत नाबार्ड की ओर से व्यक्तिगक प्लान के लिए 20 लाख रुपये का लोन दिया जा रहा है। हालांकि किसी के प्लान में अधिक संभावनाएं पाए जाने पर उसे अधिकतम 25 लाख रुपये तक की रकम दी जा सकती है। इसके अलावा यदि ऐसे 5 लोग मिलकर किसी प्लान पर काम कर रहे हों तो फिर 1 करोड़ रुपये तक की रकम का लोन सरकार की ओर से जारी किया जा सकता है। यही नहीं जनरल कैंडिडेट्स को 36 फीसदी एवं अनुसूचित जाति-जनजाति एवं महिला आवेदकों को 44 फीसदी की छूट दी जाएगी।

कहां मिलेगी जानकारी: इन स्कीमों की जानकारी के लिए सरकार की ओर से हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। आप 1800 425 1556 या फिर 9951851556 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके जानकारी हासिल कर सकते हैं। ध्यान रखें कि इन नंबरों पर सुबह 10 बजे से शाम बजे तक ही सेवाएं उपलब्ध हैं।