ज्योतिरादित्य सिंधिया क्या फिर से अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे.


ग्वालियर
मध्यप़देश में मंत्रिमंडल गठन की खबरें आ रहीं हैं और इन खबरों के बीच कांग़ेस छोड़ भाजपा में गये पूर्व मंत्रियों के चेहरों पर बैचेनी साफ नजर आ रही है , कांग़ेस की सरकार गिराने के पहले उनसे जो वादे किये गये थे उसपर भाजपा के कर्णधार खरे उतरते नजर नहीं आ रहे हैं। दिल्ली से भी मंत्री मंडल के गठन के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान को हरी झंडी मिल गई है। लेकिन प्रद्युम्न व इमरती के मंत्री बनने पर कोरोना का ग्रहण लगता नजर आ रहा है। भाजपा के रणनीतिकारों ने छोटा मंत्री मंडल के गठन के संकेत देकर पेच फंसा दिया है। इस पेच से ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ अपना मंत्री पद व विधायकी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए प्रद्युम्न सिंह तोमर व इमरती देवी की सांसे अटकी हुई है। क्योंकि अभी तक सिंधिया समर्थकों में से केवल तुलसी सिलावट को मंत्री मंडल में लिए जाने के स्पष्ट मैसेज भाजपा खेमे से मिल रहे हैं। सिंधिया भी अपने लोगों को शिवराज मंत्री मंडल में एडजस्ट कराने के लिए दिल्ली में पूरा जोर लगा रहे हैं। इसलिए उनके समर्थक खामोश बैठकर भोपाल से बुलावा आने का इंतजार कर रहे हैं। अंचल से एंदल सिंह कंषाना ने कांग्रेस से बगावत ही मंत्री पद नहीं मिलने के कारण की थी। उन्हें भाजपा कैसे नजर अंदाज कर सकती है।
5 साल विपक्ष में बैठकर सत्ता का इंतजार करने की बजाय सवा साल में ही भाजपा बैकडोर से प्रदेश में सत्ता हासिल करने में सफल हो गई। इसमें कांग्रेस की नीतियों से नाराज चल रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया व उनके समर्थकों की प्रमुख भूमिका रही। सिंधिया समर्थक मंत्री व विधायक पद और विधायकी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। इससे कमल नाथ सरकार गिर गई। उस समय सियासी गलियारे में चर्चा थी कि सिंधिया व भाजपा नेतृत्व के बीच समझौता हुआ है कि कांग्रेस में छोड़कर आने वाले मंत्री व विधायकों को उनका वो ही सम्मान भाजपा में दिया जाएगा। उपचुनाव में इ्‌स्तीफा देने वाले विधायक ही भाजपा के चुनाव-चिन्ह पर उसी विधानसभा से चुनाव लड़ेंगें और पहले चरण में ही मंत्री पद का त्याग करने वालों को भाजपा सरकार में स्थान दिया जाएगा। हालांकि यह समझौता एक दूसरे पर भरोसे का था।
भाजपा सरकार के गठन से पहले ही कोरोना का संकट शुरू हो गया। इसके कारण शिवराज सिंह चौहान ने राजभवन जाकर अकेले मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। भाजपा ने इस बात के संकेत दिए कि 14 अप्रैल को लॉकडाउन समाप्त होने के बाद मंत्री मंडल का गठन किया जाएगा। लेकिन लॉकडाउन 3 मई तक जारी रहने के कारण शिवराज पर संकट के समाधान से पहले ही मंत्री मंडल के गठन के लिए दवाब हैं। भाजपा नेताओं ने मंत्री मंडल को छोटा रखने के संकेत देकर सिंधिया समर्थक छह मंत्रियों के रिजर्व कोटे को कट करने का रास्ता तलाशने का प्रयास किया है।

कांग्रेस की उपचुनाव रणनीति साफ है, उसकी कोशिश होगी की वह कांग्रेस छोड़कर चुनाव मैदान में जाने वाले अपने बागियों को घेरने के लिए भाजपा पर खरीद-फरोख्त के आरोप लगाएगी। कांग्रेस जनता के बीच जाकर यह कहकर सहानुभूति अर्जित करने का प्रयास करेगी कि भाजपा ने जनादेश पर डाका डालकर सत्ता हासिल की है। भाजपा कांग्रेस के इसी हमले से बचने के लिए मंत्री मंडल को छोटा रखकर सभी 6 सिंधिया समर्थकों को पहले ही चरण में शपथ दिलाने के पक्ष में नजर नहीं आ रही है।
उपचुनाव में सिंधिया समर्थकों को हो सकता नुकसान अगर पहले ही चरण में सिंधिया समर्थक प्रद्युम्न सिंह तोमर व इमरती देवी को मंत्री मंडल में शामिल नहीं किया जाता है तो उनको दोबारा से विधानसभा में पहुंचने का रास्ता कठिन हो जाएगा। इन लोगों को रामायण व महाभारत की उपमाएं देकर कांग्रेस को इन्हें घेरने का पूरा मौका मिल जाएगा। ज्योतिरादित्य सिंधिया एक बार फिर अपना हक लेने और समर्थकों को उनका अधिकार दिलाने के मुद्दे पर कमजोर साबित होंगे। फिलहाल ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थकों की बैचेनी की दवा दिल्ली से हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
मध्यप़देश की भाजपा सरकार को अभी उपचुनाव में जनता के बीच जाना है , जनता क्या फैंसला लेती है इसबात की गारंटी कोई नहीं दे सकता है ।

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