ज्योतिरादित्य सिंधिया कोटे से कौन मंत्री बनेगा अटकलें तेज, जल्दी मंत्रिमंडल का गठन.

भोपाल. 
कांगेस  के बागियों की बगाबत से शिवराज सिंह को मुख्यमंत्री की कुर्सी तो मिल गई अब उनके सामने मंत्रिमंडल में किस को लेना है, किसको नहीं बड़ी चुनौती से निकलना है ।  सूत्रों का कहना है 20 अप़ेल को मंत्रिमंडल का गठन हो सकता है।
जातिगत, क्षेत्रीय और दिग्गज समर्थकों का संतुलन साधना है। इसे लेकर गुरुवार को माथापच्ची चलती रही।
मंत्रिमंडल गठन को लेकर सीएम ने गुरुवार को केंद्रीय नेतृत्व से फोन पर चर्चा की। ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों में से कौन और कितने सदस्य मंत्रिमंडल में शामिल होंगे, इसका निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करेगा। उधर, मंत्रिमंडल गठन की सुगबुगाहट के बीच कई नेता भोपाल पहुंच चुके हैं। इसमें गोपाल भार्गव, नरोत्तम मिश्रा, संजय पाठक और राजेंद्र शुक्ला शामिल हैं।

कम लोगों को मंत्री बनाने के कारण जातिगत समीकरण साधना बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि उनके मंत्रिमंडल में हर वर्ग का प्रतिनिधित्व हो, लेकिन कई दिग्गज दावेदारों को जातिगत समीकरण के चक्कर में घर बैठाना भी असंतोष का कारण बन सकता है।

शिवराज मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए चार ब्राह्मण विधायक तगड़े दावेदार हैं। इसमें गोपाल भार्गव, नरोत्तम मिश्रा, राजेंद्र शुक्ला और संजय पाठक के नाम शामिल हैं। भार्गव ने नेता प्रतिपक्ष रहते अहम भूमिका निभाई है तो नरोत्तम और पाठक ऑपेरशन लोटस के बड़े किरदार रहे हैं।
अरविंद भदौरिया, गोविंद राजपूत और रामपाल सिंह क्षत्रिय समाज के बड़े दावेदार हैं। यहा भी कोई सिंधिया कैंप से है तो कोई शिवराज का करीबी है। ऐसे में यहां भी चयन चुनौती बन गया है।

अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग को भी ध्यान में रखना होगा। सिंधिया समर्थक तुलसी सिलावट, प्रभुराम चौधरी और इमरती देवी अनुसूचित जाति से तो बिसाहूलाल सिंह अनुसूचित जनजाति से दावेदार हैं। अगर इन चारों को ही मंत्री बनाया जाता है तो भाजपा के दिग्गज जगदीश देवड़ा, मीना ङ्क्षसह, कुंवर विजय शाह, गोपीलाल जाटव, महेंद्र हार्डिया जैसे बड़े दावेदारों का क्या होगा।

बुंदेलखंड में एक ही जिले सागर से तीन बड़े दावेदार कतार में हैं तो मालवा से भी दावेदारों की कतार है। ऐसे में पार्टी को महाकौशल, विंध्य, ग्वालियर-चंबल अंचल से कम लोगों को मौका मिलने पर असंतोष उभ सकता है।

मुख्यमंत्री के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि उन्हें भाजपा के कुछ बड़े नेताओं के समर्थकों का भी ध्यान रखना है। ग्वालियर-चंबल में जहां केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और ज्योतिरादित्य सिंधिया के दावेदार हैं तो मालवा में भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और केंद्रीय मंत्री थावरंचद गहलोत के दावेदारों की लाइन है।
आगे उपचुनाव भी हैं और एक परीक्षा शिवराज सिंह को जनता के सामने देना है, किसान,मजदूर, व्यापारी यदि नाराज हो गये तो कुछ भी हो सकता है, फिर कुछ असंतुष्ट भी पैदा होंगे तो आगे आने वाला समय चुनौतियों भरा है दूसरी तरफ कोरोना मुंह फैलाये खड़ा है ।

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