मध्यप्रदेश: जन अभियान परिषद को सरकार पुनः अस्तित्व मे लायेगी.

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➖डा.भूपेन्द्र विकल➖
इन्दोर।काग्रेंस की कमलनाथ सरकार ने भाजपा सरकार मे पूर्व सांसद एवं प्रख्यात समाजसेवी स्ब.श्री अनिल दवे की पहल पर सरकार द्धारा गठित जन अभियान परिषद नामक संस्था को बंद करने बाली थी।
भाजपा की शिवराज सिंह चोहान की सरकार बनते ही पूरी तरह से अस्तित्व मे आ गई है।
सत्ता बदलने के बाद सरकार द्वारा अब इस संस्था को कोरोना से लड़ाई के मोर्चे पर जिलों में सहयोगी के तौर पर काम करने का दायित्व दे दिया है।
दरअसल जन अभियान परिषद का गांव-गांव में स्वैच्छिक संगठनों का बड़ा नेटवर्क है।

कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के पूर्व वर्ष 2018 में जन अभियान परिषद के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ।
एक बाकायदा आरोप पत्र भी जारी किया था और चुनाव आयोग तक में शिकायत की थी।
आचार संहिता के दौरान पन्ना में परिषद के संभागीय समन्वयक के वाहन से भाजपा की चुनाव सामग्री भी पकड़ी गई थी। जिसके बाद चुनाव आयोग ने परिषद की सभी गतिविधियों पर प्रतिबंधित लगा दिया था।

चुनाव के समय ही होशंगाबाद में भी इसी तरह का मामला सामने आया था।

प्रदेश में कांग्रेस की कमल नाथ सरकार बनने के बाद से ही जन अभियान परिषद पर नकेल कसना शुरू कर दिया गया था।
योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग ने महालेखाकार से विशेष ऑडिट भी कराया था।

करीब 22 पेज की ऑडिट रिपोर्ट मिलने के बाद इसे नोटशीट के साथ तत्कालीन वित्त मंत्री तरुण भनोत ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ को भेज दिया था। इसके बाद मामले में अपर मुख्य सचिव को प्रकरण आर्थिक अपराध अनुसंधान प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को देने के निर्देश भी दिए थे।
इसके साथ ही जन अभियान परिषद को बंद करने का निर्णय लेने के लिए प्रस्ताव कैबिनेट में लाने की तैयारी करली थी ।
कैबिनेट की बैठक मे इस प्रस्ताव को रखा नहीं जा सका ओर राजनीतिक घटनाक्रम के तहत काग्रेंस की कमलनाथ सरकार बदल गई।

▪परिषद के कर्मचारियों को राहत.
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प्रदेश में फिर काबिज हुई भाजपा की शिवराज सरकार बनते ही जन अभियान परिषद के कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है।
उन्हें उम्मीद है कि अब सब-कुछ ठीक हो जाएगा। कोरोना संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जन अभियान परिषद की क्षमता का उपयोग करने का निर्णय लिया है।
विगत दिनों वीडियो कांफ्रेंस के जरिए मुख्यमंत्री शिव राज सिंह ने जन अभियान परिषद और जन संगठनों के प्रतिनिधियों से बात की। इस दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि परिषद के 416 कर्मचारी जिला एवं ब्लॉक स्तर पर काम कर रहे हैं। इनका लगभग 27 हजार संस्थाओं के जरिए ग्रामीणों से संपर्क हैं। परिषद गैर सरकारी संगठनों से कोरोना संकट से निपटने में सहयोग ले।
स्थानीय प्रशासन की मदद से जरूरतमंदों को भोजन, आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी दवाओं के वितरण में कराये।
▪परिषद मे भष्ट्राचार.
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जन अभियान परिषद मे सन 2016 से 2018 तक 21.10 करोड़ रुपये खर्च हुए लेकिन वार्षिक लेखों में नमामि देवी नर्मदे यात्रा पर 23.30 करोड रुपये खर्च बताया गया।

उद्योगों, कारखानों, नालों, सुलभ शौचालयों से गंदा पानी नर्मदा नदी में मिलने से रोकने की जानकारी एकत्र नहीं की गई जोकि यात्रा का एक उद्देश्य इस प्रोजेक्ट मे था।
◆बिना अनुमोदन के राशि खर्च की गई।
निकायो मे सन 2011-12, 2013-14, 2015-16, और 2017-18, में बैठक ही नहीं हुई।
दीनदयाल उपाध्याय एकात्म यात्रा के लिए दिए गए 933.61 लाख रुपये का लेखांकन नहीं किया गया।

इसी तरह से नर्मदा सेवा यात्रा में बसों के किराए के लिए पर्यटन विकास निगम को 30 हजार का ज्यादा भुगतान किया।
एलसीडी प्रोजेक्टर खरीदी में प्रक्रिया का पालन नहीं किया। प्रमाणीकारण न होने से उपयोगिता सिद्घ नहीं हो पाई।
बिना अनुमति 14 लाख रुपये से ज्यादा की लागत से कांफ्रेंस हॉल को सुसज्जित किया गया।
अमरकंटक में आयोजित कार्यक्रम और परिवहन में लगभग 13 करोड़ रुपये खर्च किए गए।जिसका परिषद से कोई संबंध नहीं था।
जिस जन अभियान परिषद पर गंभीर भष्टाचार व अनिमियतायो के आरोप लगे है ।उसका राजनैतिक लाभ लेने के लिए भाजपा सरकार अस्तित्व मे ला रही है।
भाजपा सरकार पहले परिषद मे किये गये भष्टाचार की जाँच कराये ओर दोषियों को सजा दे इसके बाद इसे अस्तित्व मे लाये।
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