🌸कांगेस से बागी हुये “सरदार न घर के रहे न घाट” के🌸

देश में लॉकडाउन 3 मई तक बढ़ा दिया गया है, मध्यप़देश में कांग़ेस से बागी हुये सदस्य और सरदारों का आज मनोबल फिर से नीचे गिर गया होगा, फिर एक बार उम्मीदों पर पानी फिर गया है जिस जोशो खरोश से बागियों ने कांग़ेस की हरी भरी सत्ता रुपी बगिया को तहस नहस किया था आज वक्त भी बड़ी बेरहमी से उनके साथ खिलवाड़ कर न जाने किस बात का बदला ले रहा है.
बड़ों की कहावत है कि दगा किसी का सगा नहीं होता है लौटकर हिसाब किताब चुकता करता है. लेकिन यहां इतनी जल्दी बागियों के मंसूबों पर पानी फेरेगा इसकी कोई उम्मीद नहीं थी. किसी के लिये कोरोना वॉयरस मनहूसियत लेकर आया है और किसी की झोली में सत्ता की कुर्सी दिलवा दी है.
शिवराज सिंह चौहान आज कोरोना की आड़ में समूची सत्ता की ताकत को अपने तक ही समेटे बैठे हैं, उनके दल के उनके साथी भी मन मसोस कर रह जाते होंगे, लेकिन मोदी नाम की दहसत के आगे कौन जुबान खोल सकता है.
ज्योतिरादित्य सिंधिया जिनके किरदार ने मध्यप़देश की तख्ता पलटी में मुख्य भूमिका निभाई थी और उनको उम्मीद थी कि 26 मार्च तक राज्यसभा की सांसदी मिल ही जायेगी , आज उनको भी मायुसी के दौर ने चपेट लिया होगा. कांग़ेस के समय में शंहशाही करने वाले महाराज आज थाली बजाते, दिया जलाते नजर आ रहे हैं. आज जब सारे मंत्रीयों ने अपने महकमे संभाल लिये हैं जनसेवा का ढोल पीटने वाले महाराज कमरों में बंद हैं इससे अच्छा समय जन सेवा का कौनसा हो सकता है.
समय का फेर है सबको आईना दिखाता है और इन बागियों को भी दिखा रहा है,शायद कांग़ेस के उन छोटे छोटे कार्यकर्ता की बददुआ कोरोना वॉयरस का रुप लेकर इन लोगों के मंसूबों के साथ खिलवाड़ कर घरों में बंद करने पर मजबूर किये हुये है. कहते हैं किसी का फलता फूलता घर और पेड़ कभी नहीं उजाड़ना चाहिये.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *