अब वेस्ट यूपी में विदेशी जमातियों की मुश्किलें बढ़ीं, जेल भेजने का फैसला एक-दो दिन में

मेरठ
यूपी में बहराइच पुलिस के 17 विदेशियों को जेल भेजे के बाद अब पश्चिमी यूपी में भी तबलीगी जमात में शामिल होने वाले विदेशी जमातियों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। अब यहां के विदेशी जमातियों के खिलाफ भी पासपोर्ट अधिनियम और वीजा मानदंडों का उल्लंघन करने के मामले में कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है।

बता दें कि मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर, हापुड़, शामली बुलंदशहर और बागपत में पुलिस ने बड़ी तादाद में जमातियों की तलाश कर उनका टेस्ट कराया था। इनमें सूडान, केन्या, इंडोनेशिया, थाईलैंड, कजाकिस्तान के लोग शामिल थे। कइयों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। सभी को क्वारंटीन किया गया था।

ज्यादातर जमाती दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में हुए खास आयोजन में शामिल होकर देश के अलग-अलग हिस्से में धर्म के प्रचार के लिए निकले थे। वेस्ट यूपी में भी विदेशी समेत दूसरे प्रदेश और जिलों के जमाती आए थे। मेरठ जोन में 29 और 30 मार्च को पुलिस ने जमाती खोजो मुहिम चलाई थी। इसके बाद कोरोना पॉजिटिव पाए गए विदेशी जमातियों और उनके साथियों के खिलाफ कई जगह एफआईआर दर्ज कर उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए थे।

एक-दो दिन में होगा फैसला
निजामुद्दीन मरकज से निकले विदेशी जमाती मेरठ (20), सहारनपुर (57), बिजनौर (16), हापुड़ (9), शामली (22), बुलंदशहर (16), बागपत (28) समेत बाकी जिलों में भी मिले थे। विदेशी जमातियों को वीजा और पासपोर्ट नियमों के उल्लंघन का दोषी मानते हुए जेल भेजने की तैयारी है। पुलिस अफसरों का कहना है कि मेरठ जोन में 15 अप्रैल के बाद विदेशी जमातियों की क्वारंटीन टाइम पूरा होगा। मंगलवार और बुधवार को विदेशी जमातियों के खिलाफ आगे के ऐक्शन पर निर्णय लिया जाएगा।

जमातियों को पनाह देने वालों पर भी शिकंजा
दिल्ली के निजामुद्दीन में आयोजित तबलीगी जमात से लौटने के बाद विदेशी और भारतीय जमातियों को जगह-जगह मस्जिदों और घरों में रोकने वालों पर भी जल्द ऐक्शन होगा। पुलिस अफसरों के मुताबिक, बार-बार की अपील के बाद भी इन लोगों ने जमातियों को छिपाया था इसलिए उनके खिलाफ मेरठ जोन के हर जिले में एफआईआर दर्ज की गई है।

अभी वतन नहीं जा पाएंगे जमाती
उत्तर प्रदेश में विदेशियों जमातियों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर के बाद उनके देशों की तरफ से वापस बुलाने की कोशिश शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार से वहां के राजदूत संपर्क में हैं, लेकिन इसमें कानून रोड़ा बन सकता है। जानकारों के मुताबिक, भारत में एफआईआर दर्ज होने के बाद अदालत में ट्रायल होगा। ऐसे में उनकी अभी वतन वापसी मुश्किल है।

हिस्ट्री खोजने में जुटी एटीएस और एसटीएफ
दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज से निकले जमातियों की हिस्ट्री खंगालने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी खास जांच एजेंसी एटीएस और एसटीएफ को भी लगा दिया है। एजेंसियों को अलग-अलग टास्क मिला है। एजेंसियां जमातियों की वॉट्सऐप चैटिंग, सर्विलांस और जमातियों को ढूंढ़ने में जुटाई गई है। दरअसल, जमातियों के मिलने का क्रम जारी है, लेकिन उनके संपर्क में आए लोगों की तादाद काफी ज्यादा मानी जा रही है। उनको तलाशना चुनौती भरा है।

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