दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जुटे सत्ता वापिसी की तैयारी मेॆ

ग्वालियर  ज्योतिरादित्य सिंधिया के दल बदल करने के बाद सत्ता गंवाने के बाद घायल कांग़ेस के वरिष्ठ नेता अब पूरी ताकत होने वाले विधानसभा उपचुनावों मेे झौंक देना चाहते हैं और इसी को लेकर प़देश की समूची कांग़ेस अंदर ही अंदर मोहरे बिठाने में लगी है सूत्र बताते हैं कि कमलनाथ से लेकर सभी बड़े और छोटे कार्यकर्ता भावी रणनीति बनाने में दिग्विजय सिंह के साथ मंथन करने मेे जुटे हुये हैं । पार्टी अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसके लिए नेताओं को क्षेत्रवार जिम्मेदारी भी सौंपी है। ग्वालियर-चंबल अंचल की 16 सीटों की जिम्मेदारी पूर्व मंत्री डॉ.गोविंद सिंह और पार्टी के उपाध्यक्ष रामनिवास रावत को सौंपी है। सूत्र बताते हैं कि जिम्मेदारी मिलने के बाद से दोनों नेताओं में ग्वालियर-चंबल अंचल का सर्वमान्य नेता बनने की होड़ शुरू हो गई है। गौरतलब है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद कांग्रेस के पास इस समय इस क्षेत्र में यही दो बड़े नेता हैं। अब ये दोनों नेता सिंधिया की जगह पाने की कोशिश में लग गए हैं।
पंद्रह माह बाद ही प्रदेश की सत्ता से बाहर हुई कांग्रेस उप चुनावों को सत्ता में दोबारा वापसी के मौके के रूप में देख रही है। आने वाले महीनों में प्रदेश में 24 विधानसभा सीटों पर उप चुनाव होना है, जो कुल विधानसभा सीटों की 10 प्रतिशत हैं। कांग्रेस उप चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में जुट गई है। कांग्रेस का मानना है कि कांग्रेस के पूर्व बागी विधायकों के प्रति कांग्रेसियों और संबंधित विधानसभा क्षेत्र के लोगों में नाराजगी है। अब जब ये विधायक भाजपा के टिकट पर उप चुनाव लड़ेंगे, तो उन्हें लोगों की नाराजगी के साथ ही भितरघात का सामना करना पड़ेगा, जिसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। यही वजह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने उप चुनाव को लेकर मोर्चा संभाल लिया है। वे फोन पर उन जिलों में कांग्रेस नेताओं और पदाधिकारियों से सतत संपर्क कर विभिन्न पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं, जहां उप चुनाव होना है।

गौरतलब है कि ग्वालियर-चंबल अंचल की 16 सीटों का परिणाम जहां सत्ता का रूख तय करेगा, वहीं किसी भी नेता को फर्श से अर्श पर पहुंचा देगा। यह पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाला क्षेत्र है। इसलिए कांग्रेस ने इस क्षेत्र की जिम्मेदारी पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह और रामनिवास रावत को सौंप दी है। यह गोविंद सिंह और रामनिवास रावत के लिए एक सुनहरा मौका भी है। ताकि वे इस क्षेत्र की सीटें जिताकर सिंधिया के बराबर अपने आप को खड़ा कर सकें।

वर्तमान समय में गोविंद सिंह लहार विधानसभा सीट के विधायक हैं, वहीं रामनिवास रावत विगत विधानसभा और लोकसभा चुनाव दोनों हार चुके हैं। गोविंद सिंह का प्रभाव भिंड जिले में है, वहीं रावत का श्योपुर और मुरैना में प्रभाव है। अब इन नेताओं की कोशिश यह है कि उपचुनाव के दौरान वे ग्वालियर-चंबल संभाग के सभी जिलों में अपना प्रभाव स्थापित करें। इसके लिए दोनों नेता अपने समर्थकों के माध्यम से सक्रिय हो गए हैं। सूत्र बताते हैं कि दोनों की कोशिश है कि वे अधिक से अधिक क्षेत्रों में अपना प्रभाव जमा सकें। वहीं पार्टी के एक नेता का कहना है कि दोनों में अगर वर्चस्व की होड़ बढ़ी तो खेल बिगड़ भी सकता है।
नेता प्रतिपक्ष की भी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश
सूत्र बताते हैं कि ग्वालियर-चंबल अंचल की सीटों की जिम्मेदारी मिलने के साथ ही दोनों नेताओं ने नेता प्रतिपक्ष की दावेदारी मजबूत करने की कोशिश भी शुरू कर दी है। दरअसल, पार्टी की भी मंशा है कि इस अंचल की 16 सीटों को साधने के लिए नेता प्रतिपक्ष भी इसी क्षेत्र के नेता को बनाएं। ऐसे में इस समय जो नाम सबसे तेजी से सामने आया है वह है गोविंद सिंह का। वही सूत्रों का कहना है कि रावत भी इस कोशिश में लगे हैं कि नेता प्रतिपक्ष उन्हें बनाया जाए।
कमलनाथ रोजाना कर रहे मंथन
उधर, उपचुनाव को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ रोजाना पार्टी पदाधिकारियों के साथ चर्चा कर रहे हैं। पीसीसी चीफ विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति, पूर्व मंत्री डॉ.गोविंद सिंह, सज्जन सिंह वर्मा, तरुण भनोत, जीतू पटवारी, हर्ष यादव के साथ ही प्रदेश पदाधिकारी चंद्रप्रभाष शेखर, प्रकाश जैन और राजीव सिंह से लगातार संपर्क में हैं और उप चुनाव को लेकर रणनीति बना रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस उप चुनाव में अपनी सवा साल की उपलब्धियों- किसान कर्जमाफी, 100 रुपए में 100 यूनिट बिजली, किसानों का बिजली बिल हाफ करने, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में राशि बढ़ाकर 51 हजार रुपए करने आदि मुद्दे लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी में है। इसके साथ ही कांग्रेस भाजपा द्वारा विधायकों की खरीद-फरोख्त कर सरकार गिराने के मुद्दे को भी भुनाने की तैयारी में है, ताकि उप चुनाव में वोटर्स की सहानुभूति ली जा सके।

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