आयकर की विश्वास योजना के अन्तर्गत करोड़ों की वसूली रुकी.

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▪सरकार को करोड़ो रुपया का घाटा होगा.
➖डा.भूपेन्द्र विकल➖
इन्दोर। कोरोना वायरल संक्रमण का प्रभाव आयकर विभाग की वसूली पर भी बुरी तरह से पड़ा है।

इसके चलते कामकाज प्रभावित हुआ है। यही वजह है कि अब विवादित मामलों में फंसे करोड़ोरो की कर वसूली के लिए शुरू की गई थी।
विवाद से विश्वास योजना की अवधि में भी वृद्धि करनी पड़ी है। जिसके कारण करोडो रुपयो की बसूली अभी नहीं हो पायेगी।

खास बात यह है कि बैंकों और जीवन बीमा निगम से पॉलिसी और आवास ऋण की किस्तें जमा नहीं करने वालों को भी अब 30 जून तक की मोहलत दे दी गई है।

हालांकि उपभोक्ताओं को मोहलत की अवधि का ब्याज देना होगा। उन्हें किस्त देर से जमा करने पर पेनाल्टी नहीं भरनी होगी।
आयकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि उसे कर वसूली और असेसमेंट के जिन मामलों में 31 मार्च तक नोटिस जारी करना थे ।उसके लिए अब 30 जून तक की मोहलत मिल गई है। इनमें आयकर अधिनियम की धारा 263 के तहत ‘रिव्यू’ के नए-पुराने मामलों को खोलने के मामले भी शामिल हैं। इसी तरह से विभाग द्वारा शुरू की गई ‘विवाद से विश्वास’ योजना की अंतिम तिथी भी 31 मार्च की जगह 30 जून कर दी गई है।
पहले इसमें पेनाल्टी का प्रावधान था लेकिन अब विभाग ने कहा है कि विवादित मामलों में 50 फीसदी कर जमा करने पर मामले वापस लिए जाएंगे।

ऑटो, आवास ऋण के मामलों में बैंक और बीमा कंपनियों को तीन महीने (अप्रैल, मई व जून-20) तक ईएमआई जमा करने से छूट देने को कहा है।
इसके बाद भी बैंकों और बीमा कंपनियों से बड़ी संख्या में मार्च-अप्रैल की लंबित किस्त जमा करने के लिए ग्राहकों को नोटिस भेजे गए हैं।
इस पर एलआईसी के क्षेत्रीय प्रबंधक सचिन जोशी का कहना है कि ऐसे नोटिस को लेकर परेशान न हों, ये सभी कम्प्यूटर से ‘ऑटो जेनरेट’ हुए हैं।
यह व्यवस्था दो महीने पहले से शुरू हो जाती है इसलिए उसी के तहत ये नोटिस जारी हुए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि तीन महीने तक ईएमआई भरने की मोहलत दे दी गई है।

लेकिन ग्राहकों को ब्याज देना होगा। उसके लिए दो विकल्प रहेंगे या तो एकत्र ब्याज दे दें या फिर मूल ऋण राशि में उसे जोड़ दिया जाएगा।
यदि आवास ऋण जीवन बीमा निगम से लिया है तो ‘एलआईसी हाउसिंग डॉट कॉम’ पर ग्राहकों को दो विकल्प में से किसी एक पर अपनी सहमति देना होगी।

विश्वास योजना से सरकार को क्या करोडो का लाभ होगा।50प्रतिशत जमा करने पर यह योजना विफल सावित होगी ओर करोड़ो का घाटा सरकार को उठाना पडेगा।

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