▪16विधानसभाओ के उपचुनाव मे. 🔹कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिधिंया को मायावती का सहारा चाहिए.


➖डा.भूपेन्द्र विकल➖

इन्दोर।प्रदेश में विधानसभा मे उपचुनाव होना है ।
इनमे से ग्वालियर-चंबल श्रेत्र की 16 विधानसभा है जिनमें उपचुनाव होना है ।इनमे अनुसूचित जाति व जनजाति के मतदाता जादातर है ।इन विधानसभा मे पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ व ग्वालियर -चंबल मे सबसे जादा ताकतवर हालही मे भाजपा का दामन थाम चुके पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिधिंया को सपा सुप्रीमो मायावती को मनाना होगा। काग्रेंस प्रत्याशी की जीत हो या भाजपा की बसपा जीत का कारक होगी।
इसकी वजह है इन विधानसभाओ मे बसपा का प्रभाव है।
दरअसल ग्वालियर-चंबल की इन विधानसभाओ
पर कांग्रेस के लिए बीते कई चुनावों में बसपा खतरा बनती रही है।इसी तरह से भाजपा के प्रत्याशी के लिए भी खतरा बनी रही है।
अब प्रदेश की बदली हुई राजनैतिक परिस्थियों में माना जा रहा है कि कमलनाथ व ज्योतिरादित्य सिधिया इसे लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती से जल्द ही सम्पर्क कर उपचुनावों में बसपा उम्मीदवार नहीं उतारने के लिए तैयार कर सकते हैं।
कमलनाथ ने तो पूर्व मे ही रणनीति बनाकर इन विधानसभाओ के मतदाताओं मे गहरी पेठ रखने बाले,प्रख्यात दलित नेता व बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक फूल सिह बरैया को काग्रेस मे सामिल कर राजसभा का प्रत्याशी भी बना दिया था।
कमलनाथ जानते है कि बसपा सुप्रीमो मायावती नहीं मानती तो उन्हे फूल सिंह बरैया के सहारे काग्रेंस प्रत्याशी को जिताना होगा।यह भी सत्य है कि
बसपा अगर चुनाव नहीं लड़ती है तो ही कांग्रेस उम्मीदवारों की स्थिति इन विधानसभाओ मे मजबूत हो होगी।
इसी तरह से ज्योतिरादित्य सिधिंया को भी अपने प्रभाव को स्थापित करने के लिए बसपा से सहयोग माँगना होगा ।इनका बसपा सहयोग नहीं करती तो इन्हें भी दलित नेताओं का सहारा लेकर ही अपने समर्थकों की जितना होगा।

▪किस सीट पर कैसी रही बसपा.
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सुमावली- बसपा वर्ष 2008 के चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी के रुप में ऐंदल सिंह कंसाना ने जीत दर्ज की थी, लेकिन तब बसपा के अजब सिंह कुशवाह 36 हजार से ज्यादा वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे थे। जबकि वर्ष 2013 के चुनाव में ऐंदल सिंह कंसाना तीसरी नंबर पर पहुंच गए थे। इस दौरान बसपा के अजब सिंह कुशवाह फिर से 48 हजार मतों के साथ दूसरे नंबर पर आए थे। बीते 2018 के चुनाव में भी यहां पर बसपा को 31 हजार से ज्यादा वोट मिले थे।
दिमनी- वर्ष 2008 में यह सीट भाजपा के शिवमंगल सिंह सुमन को बसपा के रविंद्र सिंह तोमर से महज ढाई सौ वोट अधिक मिले थे। हाल ही में कांग्रेस छोडक़र भाजपा में गए गिर्राज दंडौतिया उस वक्त तीसरे नंबर पर आए थे। 2014 में इस सीट से बसपा के बलवीर सिंह दंडौतिया जीते थे। कांग्रेस के रविंद्र सिंह तोमर दूसरे नंबर पर और भाजपा के शिवमंगल सिंह सुमन तीसरे नंबर पर थे। वर्ष 2018 में हुए चुनाव में बसपा को यहांपर लगभग 15 हजार वोट मिले थे।
मुरैना- वर्ष 2008 में यह सीट बसपा के परसराम मुद्गल ने जीती थी। कांग्रेस दूसरे नंबर पर थी, उस वक्त यहां से सौभरन सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे और भाजपा तीसरे नंबर पर रही थी। वर्ष 2014 में भाजपा के टिकट से रुस्तम सिंह यहां से जीते थे। बसपा के रामप्रकाश राजौरिया दूसरे नंबर पर थे। कांग्रेस की जमानत जब्त हो गई थी। सवा साल पहल हुए चुनाव में बसपा के बलवीर सिंह को लगभग 21 हजार वोट मिले थे।
ग्वालियर- इस सीट से वर्ष 2008 में प्रद्युम्न सिंह तोमर जीते थे। उन्होंने जयभान सिंह पवैया को हराया था। इस चुनाव में बसपा के सुरेंद्र सिंह तोमर को 14 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। अगले चुनाव में फिर से मुकाबला जयभान सिंह पवैया और प्रद्युम्न सिंह तोमर के बीच हुआ। तोमर करीब 15 हजार वोटों से हारे। बसपा की रेखा चंदन राय को इस चुनाव में 14 हजार 417 वोट मिले थे। पिछले चुनाव में यहां पर बसपा को करीब पांच हजार वोट मिले थे।
ग्वालियर पूर्व-वर्ष 2008 के चुनाव में यहां से बसपा के ब्रजेश शर्मा को लगभग 15 हजार वोट मिले थे। इस चुनाव में भाजपा के अनूप मिश्रा ने मुन्नालाल गोयल को 1400 के करीब वोटों से हरा दिया था। वर्ष 2014 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर फिर से चुनाव लड़े मुन्नालाल गोयल को भाजपा की माया सिंह ने हरा दिया था। गोयल यह चुनाव भी करीब 1100 वोटों से हारे थे। इस चुनाव में बसपा के आनंद शर्मा करीब 18 हजार वोट मिले थे। वर्ष 2018 के चुनाव में बसपा को करीब साढ़े पांच हजार वोट मिले थे।
अम्बाह- वर्ष 2008 में यहां से भाजपा से कमलेश जाटव जीते थे। बसपा के सत्यप्रकाश यहां पर दूसरे नंबर पर थे, तीसरे नंबर पर कांग्रेस के सुरेश जाटव थे। उन्हें लगभग 16 हजार वोट ही मिल सके थे। इसके अगले चुनाव में बसपा से सत्यप्रकाश सखवार जीते। भाजपा के बंशीलाल जाटव दूसरे नंबर पर रहे जबकि कांग्रेस के अमर सिंह सखवार को 20 हजार के लगभग वोट ही मिल सके थे। वर्ष 2018 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार सत्यप्रकाश सखवार को 22 हजार से ज्यादा वोट मिले थे।
मेहगांव- कांग्रेस वर्ष 2008 के चुनाव में तीसरे नंबर पर थी, जबकि बसपा चौथे नंबर पर थी। कांग्रेस और बसपा के वोटों में महज दो हजार का अंतर था। यहां से उस वक्त भाजपा के राकेश शुक्ला जीते थे। इसके अगले चुनाव में यहां से भाजपा के चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी जीते। उन्होंने कांग्रेस के ओपीएस भदौरिया को करीब साढ़े बारह सौ वोटों से हराया था। इस चुनाव में बसपा के रंजीत सिंह गुर्जर 15 हजार से ज्यादा वोट ले गए थे। इस सीट से पिछले चुनाव में बसपा को 7500 वोट मिल थे, वहीं बहुजन संघर्ष दल को 28 हजार और राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी को 15 हजार से ज्यादा वोट मिले थे।
गोहद- 12 साल पहले हुए चुनाव में कांग्रेस के माखनलाल जाटव चुनाव जीते थे। उन्होंने भाजपा के लालसिंह आर्य को करीब डेढ़ हजार वोटों से हराया था। इस चुनाव में बसपा 18 हजार से ज्यादा वोट ले गई थी। अगले चुनाव में कुछ स्थिति बदली थी और बसपा की जगह पर बहुजन संघर्ष दल से मैदान में उतरे फूल सिंह बरैया करीब 15 हजार वोट ले गए। कांग्रेस इस चुनाव में करीब 20 हजार वोटों से हारी थी। पिछले चुनाव में यहां से बसपा के टिकट पर व्यापमं के आरोपी जगदीश सिंह सगर को 15 हजार से ज्यादा वोट मिले थे।
इन सीटों पर भी बसपा का असर
करैरा में पिछले चुनाव में बसपा उम्मीदवार को चालीस हजार के लगभग वोट मिले थे। पौहरी में लगभग 53 हजार वोट 2018 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार कैलाश कुशवाह को मिले थे। बमौरी, भांडेर, अशोकनगर, मुंगावली में भी बसपा अच्छे खासे वोट पाती रही है।
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