ग्वालियर विधानसभा से कांग़ेस प़त्याशी कौन..?

ग्वालियर, उपचुनाव के लिए दोनों दलों में आंतरिक तैयारियां शुरू हो गई हैं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रमुख समर्थक सुनील शर्मा की तकनीकी त्रूटि बताकर की गई वापसी से साफ हो गया है कि कांग्रेस उपचुनाव में मंत्री व विधायकी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए प्रद्युम्न सिंह तोमर को आसानी से जीतने नहीं देगी। साथ ही यहां से ब्राह्मण प्रत्याशी उतरने पर मंथन चल रहा है। अब कांग्रेस के सामने दो नाम हैं, पहला सुनील शर्मा और दूसरा अशोक शर्मा का हैं। बदले राजनीतिक परिदृश्य में महाराज सिंह पटेल ने भी चुनाव लड़ने की इच्छा जताई हैं।
कांग्रेस में प्रद्युम्न के मुकाबले सुनील होते थे-
राजनीतिक समीकरण बदलने से पहले कांग्रेस में रहते हुए प्रद्युम्न सिंह तोमर को सुनील शर्मा से कड़ी चुनौती मिलती थी। दोनों के जुड़े होने के कारण महल में दुविधा में फंस जाता था। लेकिन महल का पल्ला प्रद्युम्न सिंह तोमर की तरफ झुक जाता था। पिछले विधानसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सुनील शर्मा को प्रद्युम्न सिंह तोमर का साथ देने के लिए राजी किया था। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रद्युम्न से राजीनामा कराने के बाद सुनील शर्मा विधानसभा चुनाव में उनके साथ मजबूरीवश खड़े नजर आए थे। चुनाव के बाद दोनों ने फिर रास्ते अलग-अलग कर लिए थे। कांग्रेस में चर्चा थी कि सुनील शर्मा को किसी प्राधिकरण व मंडल की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती हैं।
तकनीकी त्रृटि के बहाने कांग्रेस से निलंबन समाप्त किया- प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष रामनिवास रावत व अशोक सिंह ने ग्वालियर विधानसभा में होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस से मजबूत प्रत्याशी का नाम तलाशने के लिए कांग्रेसियों से चर्चा की। क्योंकि यह तय है कि उपचुनाव में भाजपा से प्रद्युम्न सिंह तोमर प्रत्याशी होंगें। चर्चा में यह बात सामने आईं कि ब़ाह्मण प्रत्याशी यहां टक्कर दे सकता हैं। जिसकी पकड़ अनुसूचित जाति व अल्पसंख्यकों में भी हो। सबसे पहला नाम सुनील शर्मा का आया। च्‌ूंकि सुनील शर्मा को पार्टी से निष्कासित किया जा चुका था। इसलिए दूसरे नाम पर विचार किया जा रहा था। साथ ही प्रद्युम्न और सुनील शर्मा के बीच पहले से छत्तीस का आंकड़ा होने पर कुछ स्थानीय नेताओं को सुनील शर्मा से संपर्क करने की जिम्मेदारी सौ’पी गई थी। सुनील शर्मा को यह बात समझानी थी कि वर्षों की क्षेत्र में की गई मेहनत का प्रतिफल मिलने का अब मौका आया है। इसका लाभ उठाना चाहिए। चर्चा है कि सुनील शर्मा की वरिष्ठ नेताओं से बात कराई गई है और उन्होंने सुनील शर्मा को कांग्रेस में वापसी कर चुनाव की तैयारी करने के संकेत दिए हैं।
मैं तो कांग्रेस में ही था- सुनील शर्मा का कहना है कि मैं कांग्रेस में था और रहूंगा। कांग्रेस मेरी मां हैं और मां के आंचल से कौन दूर जा सकता हैं। ग्वालियर विधानसभा चुनाव से लड़ने के सवाल पर उनका कहना है कि यह वरिष्ठ नेतृत्व तय करेगा कि यहां से कौन प्रत्याशी होगा।
अशोक शर्मा के नाम पर भी वरिष्ठ नेता विचार कर सकते हैं, ग्वालियर विधानसभा के लिये अशोक शर्मा का नाम जाना पहचाना है और हर वर्ग में उनकी पकड़ है ।

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