यह ठग बिना पेमेंट करता था भारत की सैर, यूं पहुंचा जेल

मुंबई 
कुछ भी खरीदने, कहीं भी घूमने के लिए पेमेंट करना पड़ता था, लेकिन 25 साल के निखिल सुमन ने अपनी अनूठी मोडस ऑपरेंडी से पूरा देश भी घूम लिया और एक रुपया भी खर्च नहीं किया। उसकी यह इस कहानी तब सामने आई, जब मुंबई क्राइम ब्रांच के प्रॉपर्टी सेल ने उसे गोल्ड ठगी के केस में गिरफ्तार किया। इस केस में उसने एक जूलर को पांच लाख रुपये से ज्यादा की चपत लगाई थी।

निखिल एक कार्पोरेटर का बेटा है, लेकिन वह अपने घर बहुत कम रहता था। वह किसी भी दुकान में कुछ खरीदारी के बहाने जाता था। महंगा सामान खरीदता था और फिर दुकानदार से कहता था कि आप मुझे अपना अकाउंट नंबर बताओ, मैं अभी NEFT के जरिए बैंक के ऐप से आपको पेमेंट कर देता हूं। दुकानदार अपना अकाउंट नंबर दे देता था, लेकिन निखिल का बैंक बैलेंस कभी भी दो से तीन हजार रुपये से ज्यादा नहीं रहता था, इसलिए दुकानदार को ऐप में लिखी गई रकम कभी ट्रांसफर नहीं होती थी। हां, उसके ऐप में ऊपर अंग्रेजी में बड़ा सा Success लिखा आ जाता था। हां, उसके नीचे छोटे फांट में लिखा होता था- your transfer has been successfully scheduled. 

यूं करता था खेल 
बाद में निखिल दुकानदार को इस लाइन को दिखा देता था। जब दुकानदार अपने मोबाइल में चेक करता था और बैंक की तरफ से कोई एसएमएस नहीं देखता था, तो वह कहता था कि आपके मोबाइल में नेटवर्क का प्रॉब्लम होगा। चिंता न करिए। जब यहां पर Success दिखा रहा है, तो रकम आपके अकाउंट में पहुंच गई है। इसके बाद वह दुकान से उठ लेता था और फिर लाल पीली टैक्सी या ऑटो करके कुछ किलोमीटर आगे चला जाता था। इसके बाद वह लंबे टूर के लिए किसी टूर ऐंड ट्रेवल एजेंसी से कोई गाड़ी हायर करता था। उस गाड़ी को किसी एक शहर छोड़कर एजेंसी मालिक को भी मोबाइल ऐप से रकम ट्रांसफर करने का दावा करता था और फिर उसे भी कोई पेमेंट किए बिना किसी महंगे होटल में कमरा बुक कर देता था। इस होटल में कई दिन रहने, खाने पीने के बाद वह इसी मोबाइल ऐप से होटल का भी ‘फर्जी पेमेंट’ कर देता था। जब तक होटल प्रबंधन को अहसास होता कि होटल के अकाउंट में रकम ट्रांसफर नहीं हुई है, वह वहां से भाग लेता था। 

ट्रेन, प्लेन से नहीं करता था सफर 
उसने कश्मीर से कन्याकुमारी तक, हर जगह भ्रमण किया। रास्ते में हर जगह उसने ठगी की और फिर वहां से भाग लिया। इंस्पेक्टर लक्ष्मीकांत सालुंखे, सुनील माने, अमित भोसले और धीरज कोली की जांच में सामने आया कि वह कभी भी प्लेन या ट्रेन से नहीं जाता था, क्योंकि उसे इसमें पकड़े जाने का खतरा था, लेकिन चूंकि उसने मोबाइल बैकिंग से ठगी की, इसलिए मोबाइल से ही जांच अधिकारियों को उसका लोकेशन मिल गया और अंतत: उसे गिरफ्तार कर लिया गया। क्राइम ब्रांच के बाद अब मुंबई में एक दर्जन से ज्यादा पुलिस स्टेशन उसकी कस्टडी लेने वाले हैं। 

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