अमित शाह के पोस्टर लहराकर AAP कार्यकर्ताओं ने पूछा- करंट लगा क्या?

दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक बार फिर प्रचंड जीत हासिल करने की ओर बढ़ रही आम आदमी पार्टी ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है. पार्टी के दफ्तर में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता होली मना रहे हैं और ढोल-नाच गाना जारी है. जश्न के बीच AAP के दफ्तर में एक पोस्टर दिख रहा है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तस्वीर चस्पा है. पोस्टर पर लिखा है, ‘करंट लगा है’.

आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता नाच गा रहे हैं और इसी पोस्टर को लहरा रहे हैं. दिल्ली में शाहीन बाग को भारतीय जनता पार्टी ने मुद्दा बनाया था और खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी AAP पर हमला बोला था. एक सभा में अमित शाह ने कहा था, ‘दिल्ली वालों ईवीएम का बटन इतनी जोर से दबाना कि वोट यहां मिले और करंट शाहीन बाग में लगे’.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी कई सभाओं में शाहीन बाग के प्रदर्शन को राजनीति से प्रेरित बताया था. उन्होंने कहा था कि दिल्ली के नतीजे बता दें कि आप शाहीन बाग वालों के साथ हैं या फिर भारत माता का नारा लगाने वालों के साथ. भाजपा ने 22 जनवरी के बाद चुनावी कैंपेन में रफ्तार तेज की थी और शाहीन बाग को मसला बनाया था.

मॉडल टाउन से उम्मीदवार कपिल मिश्रा ने अपने एक ट्वीट में तो शाहीन बाग को मिनी पाकिस्तान बता दिया था, जिसके बाद चुनाव आयोग ने उनपर बैन भी लगाया था. वहीं बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने भी कहा था कि ये लोग आपके घर में घुस जाएंगे, मां-बहनों का रेप करेंगे और आपको मारेंगे.

हाईवे पर बस और जीप की आमने-सामने टक्कर, 2 साल की बच्ची समेत 7 की मौत

जयपुर. राजस्थान के भीलवाड़ा-काेटा हाईवे पर साेमवार रात बस ने जीप को टक्कर मार दी। हादसे में जीप में सवार 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 लोग घायल हाे गए। हादसा इतना भीषण था कि जीप का आधा हिस्सा पूरी तरह खत्म हाे गया। बस का भी ड्राइवर की ओर वाला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हाे गया। हादसे की वजह फिलहाल पता नहीं लगी है।

जीप में बैठे लोग मध्य प्रदेश के थे

भीलवाड़ा डिपो की रोडवेज बस साेमवार रात करीब नाै बजे कोटा से आ रही थी। त्रिवेणी और बीगोद के बीच पावन धाम के पास ये बस सामने से आती जीप से टकरा गई। जीप में सवार लाेग मध्य प्रदेश के मंदसाैर जिले के संधारा गांव के हैं। सभी लोग भीलवाड़ा में शादी में शामिल होकर गांव वापस जा रहे थे।

‘घायलों को बेहतर इलाज मिले’

उधर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर दुर्घटना पर गहरा दुख जताया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराया जाए।

दिल्ली में आप की सरकार बनते ही . मध्य प्रदेश के कार्यकर्ताओं ने उत्सव मनाया.


●डा.भूपेन्द्र विकल●
इंदौर ।दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनते ही मध्य प्रदेश मैं पार्टी के कार्यकर्ताओं ने धूमधाम से उत्सव मनाया जारहा है, मिठाइयांबाँटी जा रही है,जुलूस निकाले जा रहे है और एक दूसरे को बधाइयां दी जा रही है।
ज्ञातव्य हो किसंपूर्ण मध्यप्रदेश में आम आदमी पार्टी के गठन के उपरांत पहले लोकसभा चुनाव और उसके उपरांत विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतार कर पार्टी ने 2% मत प्राप्त किए थे।
प्रत्येक विधानसभा की पोलिंग तक आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मेहनत करके अपनी पार्टी की बात को रखा था।यानि की पार्टी के विचार को घर घर पहुँचा दिया।
आम आदमी पार्टी का जब गठन हुआ उसके उपरांत अरविंद केजरीवाल मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में आये और उन्होंने अपनी देखरेख में ही पार्टी के प्रदेश संयोजक अभय वर्मा को बनाया और एक कोर कमेटी का गठन किया ।इसके उपरांत लोकसभा चुनाव आते ही अधिकांश लोकसभा सीटों पर प्रत्याशियों का चयन किया गया और ईमानदार प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा पार्टी का विचार एवं चुनाव चिन्ह प्रत्येक पोलिंग तक पहुंचा पूरे देश के साथ ही म.प्र. भी मे आम आदमी पार्टी के पक्ष में वातावरण का निर्माण हुआ ।
दिल्ली में आप की सरकार बनने के बाद संपूर्ण देश के साथ ही मध्यप्रदेश में भी उन्हें एक कोर कमेटी बनी और आम आदमी पार्टी के साथ सैकड़ों नौजवान बुद्धिजीवी जुड़े इसके तत्काल बाद विधानसभा चुनाव के पहले पार्टी की कमान नर्मदा आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता आलोक अग्रवाल को सौंपी गई ।
प्रदेश संयोजकआलोक अग्रवाल ने अपने सैकडों साथियों के साथ कडी मेहनत कर पार्टी का मध्य प्रदेश के प्रत्येक जिले में गठन किया ।साथ ही चार यात्राएं संपूर्ण प्रदेश मे निकाली इससें पार्टी को मजबूती प्रदान हुई प्रत्येक पोलिंग तक आम आदमी पार्टी का कार्य करने लगा और विधानसभा चुनाव में पार्टी ने समस्त विधानसभाओं से अपने प्रत्याशी खड़े किए और इसका नतीजा यह हुआ कि आम आदमी पार्टी 2% वोट ले आई ।
मध्य प्रदेश में पार्टी ने अपना जनाधार बनाया। पार्टी के प्रमुख एवं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल,उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री एवं प्रदेश प्रभारी गोपाल राय , राज्य सभा सांसद संतोष सिंह ,वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष सहित एक सैकड़ा से ज्यादा आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मध्य प्रदेश में अनेक स्थानों पर आकर कार्यकर्ताओं की एकजुटता के लिए बैठकर आम सभाएं करते रहे हैं ।
आज जब दिल्ली में सरकार बनी तो मध्य प्रदेश के कार्यकर्ताओं ने में भारी उत्साह दिखाई दे रहा है,और उनको भी एक दिशा दिखाई देने लगी है ।आज संपूर्ण मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में मिठाइयों का वितरण , जुलूस निकाले जा रहे है।कार्यकर्ताओ द्धारा अनेक स्थानों पर वेनर ,पोस्टर लगा दिये है। पार्टी के कार्यकर्ताओ के चेहरे पर रौनक है और उत्साह है ।प्रदेश मे पुन:पार्टी जोर शोर से कार्य करेगी।

कॉमन सिविल कोड. राम मंदिर के बाद क्या अब कॉमन सिविल कोड की बारी? जानें क्या है यह कानून


नई दिल्ली

Uniform Civil Code यूनिफॉर्म या कॉमन सिविल कोड को लेकर एक बार फिर चर्चा जोर पकड़ चुकी है . क्या मोदी सरकार द्वारा तीन तलाक, धारा 370 और राम मंदिर जैसे मसले हल करने के बाद अब अपने इस एजेंडे पर काम करेगी.

यूनिफॉर्म सिविल कोड एक बार फिर चर्चा में आ गया हैराम मंदिर, 370, तीन तलाक के मसले हल हो चुके हैंअब मोदी सरकार क्या कदम उठाएगी, इसकी चर्चायूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना है बीजेपी का अजेंडाराम मंदिर, 370, तीन तलाक के मसले हल हो चुके हैंअब मोदी सरकार क्या कदम उठाएगी, इसकी चर्चायूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना है बीजेपी का अजेंडाअब मोदी सरकार क्या कदम उठाएगी, इसकी चर्चायूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना है बीजेपी का अजेंडायूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना है बीजेपी का अजेंडा

देश में पिछले कुछ समय से यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर चर्चा फिर जोर पकड़ चुकी है जिसे कॉमन सिविल कोड या समान नागरिक संहिता के रूप में भी जानते हैं. मोदी सरकार द्वारा तीन तलाक, धारा 370 को निष्प्रभावी बनाने और राम मंदिर बनाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब बहुत लोगों को लग रहा है कि बीजेपी सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड के अपने वादे को पूरा करेगी और संसद में इसके लिए एक्ट लेकर आएगी. आइए जानते हैं कि आख‍िर यह कोड क्या है और इससे क्या फायदे या नुकसान हो सकते हैं?

यूनिफॉर्म सिविल कोड आखिर है क्या?

यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब है देश में हर नागरिक के लिए एक समान कानून का होना, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति से ताल्लुक क्यों न रखता हो. फिलहाल देश में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं. यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने से हर धर्म के लिए एक जैसा कानून आ जाएगा. हिंदू हो, मुसलमान, सिख या ईसाई सबके लिए शादी, तलाक,पैृतक संपत्ति जैसे मसलों पर एक तरह का कानून लागू हो जाएगा. महिलाओं का अपने पिता की संपत्ति पर अधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में.

क्यों होता है विरोध

देश में जब भी सभी समुदायों के लिए एक जैसा कानून और नियम लाने की बात होती है तो उसका विरोध होता रहा है. इसी तरह जब-जब कॉमन सिविल कोड की बात सामने आई उसका विरोध शुरू हो गया. आजादी के तत्काल बाद 1951 में भी जब तत्कालीन कानून मंत्री डॉ. बीआर अंबेडकर ने  हिंदू समाज के लिए हिंदू कोड बिल लाने की कोशिश की तो न सिर्फ इसका जोरदार विरोध हुआ बल्कि सिर्फ एक धर्म विशेष के लिए ऐसा कानून लाने पर सवाल उठाए गए. 

देश में जबरदस्त विरोध के बाद इस बिल को चार हिस्सों में बांट दिया गया था. इसके अलावा जब भी कॉमन सिविल कोड को लाने की कोश‍िश हुई, इसका एक वर्ग द्वारा जोरदार विरोध हुआ.

क्या हैं समर्थकों और विरोध‍ियों के तर्क

जब-जब यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बहस छिड़ी है, विरोधियों का यही कहना रहा है कि ये सभी धर्मों पर हिंदू कानून को लागू करने जैसा है. भारत में काफी विविधता है और अलग-अलग धर्मों ही नहीं बल्कि तमाम समुदायों, जनजातियों की अपनी अलग सामाजिक व्यवस्था है. उन पर एक समान कानून थोपना उनकी परंपरा को खत्म करना और एक तरह की ज्यादती होगी.

इसका समर्थन करने वाली बीजेपी और अन्य समर्थकों का कहना है कि समान नागरिक संहिता या यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब हर धर्म के पर्सनल लॉ में एकरूपता लाना है. इस कानून के द्वारा जाति, धर्म, लिंग, वर्ग के सभी तरह के भेदभाव खत्म होने का दावा किया जाता है.

इसके तहत हर धर्म के कानूनों में सुधार और एकरूपता लाने पर काम होगा. यूनियन सिविल कोड का अर्थ एक निष्पक्ष कानून है, जिसका किसी धर्म से कोई ताल्लुक नहीं है.

क्यों है जरूरी?

इसके समर्थकों के मुताबिक विभिन्न धर्मों के विभिन्न कानून से न्यायपालिका पर बोझ पड़ता है. कॉमन सिविल कोड आ जाने से इस मुश्किल से निजात मिलेगी और न्यायालयों में वर्षों से लंबित पड़े मामलों के निपटारे जल्द होंगे. सभी के लिए कानून में एकसमानता से एकता को बढ़ावा मिलेगा और देश का विकास तेज होगा. इससे मुस्लिम महिलाओं की स्थिति भी बेहतर होगी.

भारत की छवि एक धर्मनिरपेक्ष देश की है. ऐसे में कानून और धर्म का एक-दूसरे से कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए. सभी लोगों के साथ धर्म से परे जाकर समान व्यवहार होना जरूरी है. हर भारतीय पर एक समान कानून लागू होने से राजनीति में भी बदलाव आएगा यानी वोट बैंक और ध्रुवीकरण की राजनीति पर लगाम लगेगी.

लोगों के धार्मिक अधिकाराें का क्या होगा ?

ऐसा नहीं है कि समान नागरिक संहिता लागू होने से लोगों को अपनी धार्मिक मान्यताओं को मानने का अधिकार छिन जाएगा.लोगों के बाकी सभी धार्मिक अध‍िकार रहेंगे, लेकिन शादी,पैतृक संपत्ति, संतान, विरासत जैसे मसलों पर सबको एक नियम का पालन करना होगा. संविधान के अनुच्छेद 44 में यूनिफॉर्म सिविल कोड का पक्ष लिया गया है, लेकिन ये डायरेक्टिव प्रिंसपल हैं. यानी इसे लागू करना या न करना पूरी तरह से सरकार पर निर्भर करता है.

गोवा में कॉमन सिविल कोड लागू है. दूसरी तरफ संविधान के अनुच्छेद 25 और 29 कहते हैं कि  किसी भी वर्ग को अपनी धार्मिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों को मानने की पूरी आजादी है. यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हो जाने से हर धर्म के लोगों को सिर्फ समान कानून के दायरे में लाया जाएगा, जिसके तहत शादी, तलाक, प्रॉपर्टी और गोद लेने जैसे मामले शामिल होंगे. ये लोगों को कानूनी आधार पर मजबूत बनाएगा.

अभी किस तरह के हैं पर्सनल कानून

अभी सभी धर्मों के पर्सनल कानून अलग-अलग हैं.

हिंदू पर्सनल लॉ

हिंदुओं के लिए 1951 में तत्कालीन कानून मंत्री डॉ. बीआर अंबेडकर ने  हिंदू कोड बिल पेश किया था. लेकिन देश में जबरदस्त विरोध के बाद इस बिल को चार हिस्सों में बांट दिया गया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसे हिंदू मैरिज एक्ट (Hindu Marriage Act), हिंदू सक्सेशन एक्ट (Hindu Succession Act), हिंदू एडॉप्शन ऐंड मैंटेनेंस एक्ट (Hindu Adoption and Maintenance Act) और हिंदू माइनॉरिटी ऐंड गार्जियनशिप एक्ट (Hindu Minority and Guardianship Act) में बांट दिया था (इसके तहत बौद्ध, सिख, जैन भी आते हैं).

इन कानूनों ने हिंदू महिलाओं को सीधे तौर पर सशक्त बनाया. इनके तहत महिलाओं को पैतृक और पति की संपत्ति में अधिकार मिलता है. इसके अलावा अलग-अलग जातियों के लोगों को एक-दूसरे से शादी करने का अधिकार है लेकिन कोई व्यक्ति एक शादी के रहते दूसरी शादी नहीं कर सकता.

मुस्लिम पर्सनल लॉ क्या कहता है

मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत पहले तीन तलाक प्रथा को मान्यता थी जिसके तहत एक पति अपनी पत्नी को महज तीन बार तलाक कहकर तलाक दे सकता था, लेकिन मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में कानून बनाकर इसे प्रथा को गैरकानूनी बना दिया गया.  इसके अलावा मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत मुसलमान पुरुषों को चार शादियां तक करने का अध‍िकार है. इसके अलावा शादी, विरासत जैसे कई मसले अभी इस पर्सनल कानून के हिसाब से तय होते हैं, जो कॉमन सिविल कोड लागू होने के बाद खत्म हो सकते हैं.

मोदी सरकार ने तीन तलाक को गैरकानूनी बना दिया है

शाह बानो केस अहम

ये एक ऐसा मामला था, जिसने देश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया था. इस केस में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने के लिए राजीव गांधी सरकार मुस्लिम महिला अधिनियम, 1986 लेकर आई. 1978 में इंदौर की रहने वाली 62 साल की मुस्लिम महिला शाह बानो को उसके पति ने तलाक दे दिया था. 5 बच्चों की बुजुर्ग मां ने गुजारा भत्ता पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी.

1985 में सुप्रीम कोर्ट ने उसके हक में फैसला सुनाया. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने फैसले का विरोध किया तो तत्कालीन कांग्रेस सरकार नया अधिनियम लेकर आई, जिससे केस जीतने के बावजूद शाह बानो को उसका हक नहीं मिल सका. इस केस ने देश में मुस्लिम महिलाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए थे.

ईसाइयों का पर्सनल लॉ कैसा है

ईसाइयों के पर्सनल कानून में दो बातें अहम हैं. एक शादीशुदा जोड़े को तलाक के लिए दो साल तक अलग रहना जरूरी होता है. इसके अलावा लड़की का मां की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होता.

इन देशों में है यूनिफॉर्म सिविल कोड

एक तरफ जहां भारत में सभी धर्मों को एक समान कानून के तहत लाने पर विवाद है, वहीं पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, तुर्की, इंडोनेशिया, सूडान और इजिप्ट जैसे कई देश इसे लागू कर चुके हैं. हालांकि, इनमें से कई देशों में इस्लाम धर्म राजधर्म की तरह है और सभी पर इस्लामी कानून लागू होते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने भी किया समर्थन

सुप्रीम कोर्ट भारत सरकार को कई बार यह सलाह दे चुका है कि  जेंडर की समानता के लिए एक यूनिफॉर्म सिविल कोड लाया जाए और पर्सनल लॉ के नाम पर चल रहे सदियों पुराने दस्तूरों को खत्म किया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में  एक मामले में टिप्पणी करते हुए कहा था कि देश में समान नागरिक आचार संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) लागू करने के लिए अभी तक कारगर प्रयास नहीं किए गए हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने गोवा के एक संपत्ति विवाद मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की थी. जस्टिस दीपक गुप्ता की अगुवाई वाली बेंच ने कहा था कि गोवा बेहतरीन उदाहरण है वहां पुर्तगाल सिविल कोड 1867 लागू है जिसके तहत उत्तराधिकार और विरासत का नियम लागू है.

लॉ कमीशन ने कहा था- अभी जरूरत नहीं

यूनिफॉर्म सिविल कोड, पर्सनल लॉ को लेकर लॉ कमीशन की रिपोर्ट साल 2018 में पेश की गई थी तब कमीशन ने कहा था कि इस स्टेज पर यूनिफॉर्म सिविल कोड की जरूरत नहीं है. मौजूदा पर्सनल कानूनों में सुधार की जरूरत है. धार्मिक परम्पराओं और मूल अधिकारों के बीच सामंजस्य बनाने की जरूरत है.  

सबसे पहले कब हुई थी चर्चा

देश के सभी नागरिकों के लिए एक कॉमन सिविल कोड की चर्चा सबसे पहले 1840 में ही ब्रिटिश सरकार के दौरान आई थी, जब लेक्स लॉसी रिपोर्ट के आधार पर अपराध, साक्ष्य और कॉन्ट्रैक्ट के लिए समान कानून बनाए गए थे. हालांकि, तब भी हिंदू और मुस्लिम पर्सनल कानूनों को छेड़ने का साहस तत्कालीन सरकार नहीं कर पाई थी. आजादी के बाद जब देश के संविधान बनाने के लिए बनी संविधान सभा ने भी इस तरह का प्रयास किया, लेकिन विरोध को देखते हुए इसे अनुच्छेद 44 के पार्ट 4 में नीति निर्देशक तत्व यानी डायरेक्टवि प्रिंसिपल्स के रूप में शामिल किया गया.

बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी में मध्य प्रदेश सरकार

भोपाल : मध्य प्रदेश में तबादलों का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। बीते महिनों कई विभागों में थोकबंद तबादले हुए हैं। अब प्रदेश की कमलनाथ सरकार जल्द ही बड़ी प्रशासनिक सर्जरी कर सकती है। खबर है कि आने वाले दिनों में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी हो सकती है।इसमें सीनियर आईएएस अधिकारियों के साथ आईपीएस अफसर भी शामिल होंगे।इसके अलावा जिनकी मंत्रियों से पटरी नही बैठ रही, जो अपने बयानों से सुर्खियां बटोर रहे और जिनका कार्यकाल समाप्त होने वाला है, आदि शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इसी हफ्ते अफसरों के तबादलों की लिस्ट जारी हो सकती है।

दरअसल, सबसे पहले मंडला कलेक्टर का नाम है, जो सीएए को लेकर सुर्खियों में हैं।केन्द्र ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। माना जा रहा है कलेक्टर हटाए जा सकते है। वही इंदौर कलेक्टर सचिव पद पर प्रमोट हो चुके हैं। अशोक नगर कलेक्टर मंजू शर्मा जून में, देवास कलेक्टर श्रीकांत पांडे सितंबर में रिटायर होंगे। शहडोल, होशंगाबाद और छतरपुर के एसपी डीआईजी पद पर प्रमोट हो चुके हैं। छतरपुर और जबलपुर के डीआईजी भी आईजी बन चुके हैं। इसलिए फेरबदल में ये भी शामिल हो सकते हैं।राजगढ़ में कलेक्टर-एसपी में विवाद के बाद माना जा रहा है कि एसपी को कहीं भेजा जा सकता है। इसी तरह हरिरंजन राव के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने, गौरी सिंह के नौकरी छोड़ने और प्रमोद अग्रवाल के कोल इंडिया के सीएमडी बनने के बाद वीएल कांताराव और नीलम शमी राव भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले हैं।

इन मंत्रियों की नही बैठ रही अधिकारियों से पटरी

खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की प्रमुख सचिव नीलम शमी राव से।
मंत्री ओमकार सिंह मरकाम की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी से।
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी से।
महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी की प्रमुख सचिव अनुपम राजन से।
मंत्री तरुण भनोत की अपर मुख्य सचिव अनुराग जैन से।
मंत्री जयवर्धन सिंह की प्रमुख सचिव संजय दुबे से

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 30,000 रुपये प्रतिमाह वेतन पर स्पेशलिस्ट कैडर ऑफिसर्स के पदों पर भर्तिया निकाली

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India) ने स्पेशलिस्ट कैडर ऑफिसर्स (SBI Specialist Cadre Officers Recruitment) के पदों पर भर्तियों के लिए वैकेंसी हैं.

SBI में स्पेशलिस्ट कैडर ऑफिसर्स के पदों पर कॉन्ट्रेक्ट और रेगुलर दोनों आधार पर नियुक्तियां की जाएंगी. इन पदों पर आवेदन के लिए उम्मीदवारों को ग्रेजुएट्स होना जरूरी है.

फीस की बात करें तो सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 750 रुपये फीस निर्धारित है, जबकि SC/ST के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क नहीं है.

सभी पदों पर उम्मीदवारों का चयन इंटरव्यू के बाद मेरिट लिस्ट के आधार पर किया जाएगा. इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों को न्यूनतम 30,000 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलेगा यानी सालाना आय लाखों में होगी.

इन पदों पर नौकरी से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें. बता दें कि आवेदन की अंतिम तिथि 12 फरवरी 2020 है.

बहुत जल्द जारी होगा एक रुपये का नया नोट,

सरकार ने जारी की अधिसूचना,जाने पूरी खबर सरकार समय-समय पर नये नोट जारी करती रहती है, सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में एक और नये नोट के धपने की खबर आ रही है, आइए जानते है क्या है पूरी ख
सरकार की ओर से जारी गजट अधिसूचना में एक रुपये के नए नोट के रंग, मानक वजन और डिजाइन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। अंग्रेजी अखबार ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक नया नोट 9.7 x 6.3 सेमी के आयताकार साइज का होगा। इस नए नोट पर ‘गवर्नमेंट ऑफ इंडिया’ से ऊपर ‘भारत सरकार’ अंकित होगा।

आज के समय में नोट के रूप में सबसे छोटी मुद्रा है। इसे आरबीआई नहीं बल्कि भारत सरकार जारी करती है। यही वजह है कि एक रुपये के नोट पर रिजर्व बैंक के गवर्नर का हस्ताक्षर नहीं होता है। एक रुपये के नोट पर देश के वित्त सचिव अतनु चक्रवर्ती का दो भाषाओं में हस्ताक्षर होगे|

एक रुपये के पहले नोट का मुद्रण 30 नवंबर, 1917 को हुआ था।

मुम्बई में बड़े ही शानदार अंदाज़ में लॉन्च किया गया बबलू बैचलर का ट्रेलर

मुम्बईlमनोरंजन से भरपूर फ़िल्म बबलू बैचलर का ट्रेलर हाल ही में मुम्बई में फ़िल्म के कास्ट और क्रू की मौजूदगी में लॉन्च किया गया. इस मौके पर फ़िल्म के प्रमुख कलाकार शरमन जोशी, पूजा चोपड़ा और स्वीटी वालिया उपस्थित थे. इसके अलावा फ़िल्म के निर्माता अजय रजवानी, निर्देशक अग्निदेव चैटर्जी और फ़िल्म के वितरक मनोज नंदवाना भी इस ख़ास मौके पर मौजूद थे.

रफ़त फ़िल्म्स के बैनर तले इस फ़िल्म का निर्माण अजय राजवानी ने किया है और इसका निर्देशन और छायांकन अग्निदेव चैटर्जी ने किया है. फ़िल्म की कहानी, स्क्रीनप्ले और संवसद सौरव पांडे ने लिखे हैं. फ़िल्म का संगीत दिया है जीत गांगुली ने और इस फ़िल्म के गीत कुमार, रश्मि विराग और आशीष पांडे ने लिखे हैं. इस फ़िल्म को पार्थ वाय. भट्ट ने संपादित किया है. फ़िल्म की कोरियोग्राफ़ी का ज़िम्मा सरोज ख़ान, कुंजन जानी, रंजू वर्गीस और सैवियो ब्रेन्स ने उठाया है.

उल्लेखनीय है कि फ़िल्म के कुछ गीतों को जाने-माने गायकों – अरिजीत सिंह और पापोन ने अपनी आवाज़ें दी हैं. फ़िल्म में मुख्य भूमिकाओं में तेजश्री प्रधान, पूजा चोपड़ा, राजेश शर्मा, लीना‌ प्रभु और नीरज क्षेत्रपाल नज़र आएंगे.

बबलू बैचलर एक कॉमेडी फ़िल्म है, जिसमें शरमन जोशी मुख्य किरदार में हैं. फ़िल्म की कहानी उत्तर प्रदेश में रहनेवाले एक ऐसे आर्थिक तौर पर सक्षम परिवार की है, जो हमेशा से अपने बेटे की शादी बड़े ही तामझाम के साथ करने ख़्वाब देखा करता है. बबलू शर्मा का रोल निभा रहे शरमन जोशी अपनी शादी के लिए कई लड़कियों से जाकर मिलता है,‌ मगर उसे शादी योग्य लड़की नहीं मिलती. फिर उसकी मुलाकात पूजा चोपड़ा से होती है, जो किसी और से प्यार करती है और वर्जिन नहीं है. यह जानने के बाद वह शादी का प्रस्ताव ख़ारिज़ कर देता है.

जल्द ही एक शादी के कार्यक्रम में शरमन की मुलाक़ात तेजश्री प्रधान से होती है और दोनों ही जल्द शादी के लिए राज़ी हो जाते हैं. लेकिन इस प्रेम कहानी में उस वक्त सबसे बड़ा ट्विस्ट आ जाता है, जब तेजश्री शादी छोड़कर भाग जाती है और उसके नाम पर एक ख़त छोड़ जाती है. उस ख़त के ज़रिए इस बात का खुलासा होता है कि तेजश्री हमेशा से ही एक एक्टर बनना चाहती थी और अब उसे मुम्बई में एक रियलिटी शो में बतौर लीड एक्टर काम भी मिल गया है.

शरमन जोशी अपनी होनेवाली पत्नी तक पहुंचने की हरसंभव कोशिश करता है और वह मुम्बई तक भी चला जाता है. संयोगवश वहां उसकी मुलाकात एक बार फिर से पूजा चोपड़ा से हो जाती है, जो उस चैनल की क्रिएटिव हेड के तौर पर काम कर रही होती है, जिस चैनल के शो में तेजश्री प्रदाम को काम मिला है. वह शरमन की मदद के लिए तैयार हो जाती है और आख़िरकार जब शरमन की ज़िंदगी में तेजश्री प्रधान वापस लौट आती है तो तेजश्री को उसकी ज़िंदगी में लाने के लिए पूजा चोपड़ा द्वारा की गयी कोशिश के चलते उसे पूजा चोपड़ा से प्यार हो जाता है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि शरमान इन दोनों में से किस लड़की से शादी करता है.

ट्रेलर लॉन्च के इस ख़ास मौके पर फ़िल्म के निर्देशक अग्निदेव चैटर्जी ने कहा, “यह एक कॉमेडी और मनोरंजन से भरपूर फ़िल्म है. इसमें ऐसे पंच लाइन्स हैं जो दर्शकों को हंस-हंसकर लोटपोट होने पर मजबूर कर देंगे. इस फ़िल्म के सभी कलाकारों ने उम्दा काम किया है और हमें इस फ़िल्म से काफ़ी उम्मीदें हैं.”

इस फ़िल्म की शूटिंग पूरी कर ली गईं है और इसे जय विरात्रा एंटरटेनमेंट लिमिटेड द्वारा 20 मार्च, 2020 को देशभर में रिलीज़ किया जाएगा.

मध्यप़देश: कलेक्टर जाने जायेंगे अब नए नाम से.

भोपाल। प्रदेश में सरकार कलेक्टर के पदनाम को बदलने जा रहीं हैं, जल्द ही राज्य में कलेक्टरों के नए पदनाम की घोषणा हो सकती है। प्रदेश मे सत्ता के आने के बाद ही सरकार ने निर्णय लिया था की इस पद का नाम बदला जायेगा। वर्तमान में कलेक्टर पदनाम से अंग्रेजो की गुलामी की परम्परा का एहसास होता हैं। इस पदनाम को बदलने को लेकर सरकार का तर्क हैं की यह अंग्रेजो द्वारा सृजित किया गया पद हैं, उन्होंने यह पदनाम उन अधिकारियो के लिए सृजित किया था जो जिले से राजस्व कलेक्ट करते थे। राजस्व वसूली करने वाले अधिकारी को कलेक्टर कहा जाता था। सरकार का मानना है की वर्तमान में अब कलेक्टर का कार्य सिर्फ राजस्व वसूलना नहीं हैं, इसलिए अब बदलाव की जरूरत है, नया नाम आधुनिक होना चाहिए जिस पर विचार किया जा रहा है।

पदनाम बदलने के लिए सरकार ने पांच अधिकारीयों की एक कमिटी का गठन किया हैं जिसका अध्यक्ष अपर मुख्य सचिव आईपीसी केसरी को बनाया गया हैं। इस कमेटी में पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी विशेष गढ़पाले और सागर कलेक्टर प्रीति मैथिल के साथ राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी शामिल है। यह कमेटी आपस में विचार मंथन करने के साथ-साथ अन्य लोगों से भी इस बारे में राय लेगी कि कलेक्टर का नया नाम क्या हो। हालांकि खुद मुख्यमंत्री कलेक्टर के नए नाम के बारे में जिला अधिकारी और जिलाधीश नाम सुझा चुके हैं।

क्या कहते है जानकार

देश में अंग्रेजी हुकूमत के समय भारत के पहले गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स ने वर्ष 1772 में जिला कलेक्टर पद का सृजन किया था। उस समय इस पद पर नियुक्ति इंडियन सिविल सर्विसेज से होती थी। आजादी एक बाद इस पद पर नियुक्ति भारतीय प्रशासनिक सेवा के द्वारा होती हैं।