कॉलेज में ऐसे दिखते थे मुख्यमंत्री योगी, हिंदुत्व के लगाव में घर छोड़ा, मां ने सोचा-नौकरी करने गए

योगी आदित्यनाथ स्कूल के दिनों से ही विद्यार्थी परिषद के वर्कर के रूप में कार्य करते थे। शायद यही वजह था कि हिंदुत्व के प्रति उनका लगाव शुरू से रहा। वह अक्सर वाद विवाद प्रतियोगिता में भाग लिया करते थे। विद्यार्थी परिषद का कोई कार्यक्रम था, जहां पर तत्कालीन गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था।

उस कार्यक्रम में देश भर से आए कई छात्रों ने अपनी बात रखी। जब योगी ने अपनी बात रखनी शुरू की तो लोगों ने खूब सराहना की गई। भाषण सुन अवेद्यनाथ जी महराज बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने योगी आदित्यनाथ को अपने पास बुलाया और पूछा, कहां से आए हो, तब उन्होंने बताया कि वह उत्तराखंड के पौड़ी के पंचूर से तो उन्होंने कहा कि कभी मौका मिले तो मिलने जरूर आओ।

अवेद्यनाथ महराज भी उसी उत्तराखंड के रहने वाले थे। उनका गांव भी योगी के गांव से 10 किलो मीटर दूर था। उस पहली मुलाकात से योगी बहुत प्रभावित हुए। उनसे मिलने का वायदा कर के वहां से विदा लिए। उस मुलाकात के बाद योगी अवेद्यनाथ जी महराज से मिलने के लिए गोरखपुर आए। कुछ दिन बाद वह फिर अपने गांव लौट गए।
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वहां जाकर उन्होंने ऋषिकेश में ललित मोहन शर्मा कॉलेज के एमएससी में दाखिला ले लिया, पर उनका मन गोरखपुर स्थित गुरु गोरखनाथ की तप: स्थली की तरफ हमेशा घूमता रहता था। इसी बीच अवेद्यनाथ जी महराज बीमार पड़ गए। योगी उनसे मिलने पहुंचे। तब अवेद्यनाथ जी महराज ने उनसे कहा कि हम रामजन्म भूमि पर मंदिर के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। मैं, इस हाल में हूं यदि मुझे कुछ हो गया तो मेरे मंदिर को देखने वाला कोई नही होगा।

तब योगी ने उनसे कहा कि आप चिंता न करें आप को कुछ नहीं होगा। मैं गोरखपुर जल्द आऊंगा। थोड़े दिन बाद अपनी मां को गोरखपुर जाने की बात कह कर घर से चल दिए। तब मां ने सोचा था बेटा शायद नौकरी के लिए जा रहा है। यह कह कर वह 1992 में गोरखपुर आ गए।

मप्र / डीजीपी वीके सिंह का हटना तय, राजेन्द्र कुमार बनेंगे नए डीजीपी; कानून विशेषज्ञों से सलाह के बाद होगा फैसला

भोपाल | राज्य सरकार से लगातार तनातनी के बाद डीजीपी वीके सिंह का हटना तय हो गया है। डीजी साइबर और हनी ट्रैप मामले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख राजेन्द्र कुमार नए डीजी बनेंगे। सरकार ने इस पद के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा भेजे तीन नामों के पैनल को अस्वीकार कर दिया है। सोमवार को हाईकोर्ट में राज्य सरकार को इस मुद्दे पर जवाब देना है और उम्मीद है कि इसी दिन सरकार नया एसआईटी प्रमुख बनाए जाने की अनुमति हाईकोर्ट से लेगी। इसके बाद किसी भी दिन नए डीजीपी के नाम की घोषणा हो सकती है। सिंह की पदस्थापना कहां होगी, यह तय होना बाकी है। वे एक साल की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हटाए जाने वाले दूसरे डीजीपी होंगे। इससे पहले ऋषिकुमार शुक्ला को हटाया गया था। शुक्ला बाद में सीबीआई डायरेक्टर बने। सरकार और सिंह के बीच चार महीने से तनातनी चल रही थी और मुख्यमंत्री डीजीपी की कार्यशैली से काफी नाराज थे। हाल ही में राजगढ़ कलेक्टर को लेकर पुलिस की जांच रिपोर्ट के बाद यह तनातनी और बढ़ गई थी।

यूपीएससी के भेजे तीनों नाम अस्वीकार, अब पसंद के अफसर को डीजीपी बनाएगी सरकार
यूपीएससी ने जो पैनल राज्य सरकार को भेजा था उसमें तीन नाम थे। विवेक जौहरी पर सहमति नहीं थी। मैथलीशरण गुप्ता को सरकार डीजीपी नहीं बनाना चाहती थी। वीके सिंह से सरकार की पटरी नहीं बैठ रही थी। यही वजह थी कि 15 नवंबर को अंतिम आदेश में वीके सिंह का नाम डीजीपी पद के लिए अप्रूव नहीं किया गया था। अब जब सरकार ने पैनल अस्वीकार कर दिया है तो सरकार के पास पसंदीदा वरिष्ठ आईपीएस को डीजीपी नियुक्त करने का विकल्प रहेगा। जब आरके शुक्ला को हटाकर वीके सिंह को डीजीपी बनाया गया था, तब भी सरकार के पास यूपीएससी का पैनल नहीं था। ऐसे में डीजीपी को हटाने के लिए राज्य सरकार उड़ीसा फॉर्मूले पर विचार कर सकती है। उड़ीसा में फायर का अतिरिक्त जिम्मा संभाल रहे डीजीपी को सरकार ने नोटिस देकर हटाया था।

वीके सिंह को हटाए जाने के पीछे ये तीन बड़ी वजह

  1. थप्पड़ कांड : पत्र से सीएम नाराज : राजगढ़ कलेक्टर थप्पड़ कांड में कलेक्टर के खिलाफ कार्रवाई को लेकर लिखे डीजीपी के पत्र से सीएम नाराज थे। उन्होंने कहा था कि कलेक्टर पर लगे आरोपों की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी से कराई गई। मुख्य सचिव से इस मामले में बात नहीं की गई। 
  2. हनी ट्रैप : एसआईटी चीफ नियुक्ति विवाद हनी ट्रैप मामले की जांच के लिए डीजीपी ने सरकार को भरोसे में लिए बिना एसआईटी चीफ बना दिया था। सरकार ने 48 घंटे में एसआईटी चीफ बदला।

3.पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर खींचतान :पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लेकर आईएएस और आईपीएस अफसरों के बीच खींचतान उजागर हुई थी। आखिरी मौके पर सीएम ने इससे किनारा कर लिया था।

थप्पड़ प्रमाणित होने पर सरकार में गहमागहमी : राजगढ़ कलेक्टर पर एएसआई को थप्पड़ मारने का आरोप प्रमाणित होने की खबर दैनिक भास्कर में प्रकाशित होने के बाद से सरकार में गहमागहमी थी। शुक्रवार दोपहर को सीएम ने अफसरों को बुलाया और इस मामले में यूपीएससी को तुरंत पत्र भेजने को कहा। शाम को ही पत्र भेज दिया गया।

गृह विभाग का यूपीएससी को पत्र चयन समिति की बैठक फिर बुलाएं : शुक्रवार सुबह गृह सचिव राजेश जैन ने यूपीएससी को भेजे पत्र में कहा कि उसने जो तीन नामों का पैनल भेजा है उसमें विवेक जौहरी की लिखित सहमति सरकार के पास नहीं थी। पत्र में कहा गया कि डीजीपी चयन समिति की बैठक फिर बुलाई जानी चाहिए।

पिछले साल पैनल में भेजे थे 32 नाम : नवंबर 2019 में सरकार ने यूपीएससी को 32 नामों का पैनल भेजा था, जिसमें 1984 से 88 बैच के एेसे सारे अफसर शामिल थे, जिनकी सर्विस के 30 साल पूरे हो गए हैं और जिनके कार्यकाल में छह माह से अधिक का समय बचा है। नए पैनल में भी सरकार ऐसा ही करेगी।

बाजार में लगा है प्याज का अंबार, फिर क्यों नहीं घट रहा दाम?

नई दिल्ली/नासिक 
प्याज अब भी आपका महीने का बजट बिगाड़ रहा है? बाजार में तो प्याज का अंबार है, तो ऐसा नहीं कहा जा सकता कि सप्लाई कम है इसलिए दाम मुंह चिढ़ा रहे हैं। दिल्ली की आज़ादपुर मंडी में रोज गुजरात और महाराष्ट्र से करीब 50 ट्रक प्याज पहुंच रहा है। यानी 20 टन प्याज रोज़ मंडी में पहुंच रहा है। फिर कैसे बजट बिगड़ रहा है?

आपको प्याज अब भी सस्ता नहीं मिल रहा क्योंकि खाने का जायका बढ़ाने वाले इस आइटम के रिटेल और थोक भाव में अब भी काफी अंतर है। थोक मंडी में जहां प्याज का दाम 15 से 25 रुपये के बीच चल रहा है, वहीं रिटेलर इसे 40-60 रुपये किलो से भाव बेच रहे हैं। आमतौर पर विक्रेता ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज आदि की लागत को देखते हुए दाम में 15 रुपये का मार्जिन रखते हैं लेकिन 100% का मार्जिन ग्राहकों की जेब पर असर डाल रहा है। कई ट्रेडर्स इसकी वजह नहीं बता पा रहे हैं। 

दिल्ली को सबसे ज्यादा प्याज की सप्लाई नासिक से होती है। पिछले कुछ हफ्तों में प्याज की औसत थोक कीमत काफी कमी आई है। शुक्रवार को एक क्विंटल प्याज का 1600 रुपये था, 31 जनवरी 2019 को 2600 रुपये था। 18 दिसंबर को महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में औसत थोक भाव ऑल टाइम हाई यानी 8,625 रुपये प्रति क्विंटल था। लासलगांव प्याज की सबसे बड़ी प्याज मंडी है। इस हिसाब से देखें तो 16 दिसंबर के बाद प्याज के थोक भाव में 81% की गिरावट दर्ज हो चुकी है। ,

20 जनवरी को एक क्विंटल प्याज के थोक भाव 4100 रुपये थे। यानी 20 जनवरी से अबतक इसमें 64 फीसदी की गिरावट आ चुती है, लेकिन रिटेल में प्याज उतना सस्ता नहीं हुआ है। मिड दिसंबर से मिड जनवरी तक प्याज के थोक भाव 100 से 60 रुपये के बीच रहे, लेकिन खुदरा ग्राहकों को यह 80 से 120 रुपये किलो के भाव मिलता रहा। शुक्रवार को नई दिल्ली के माता सुंदरी कॉलेज के पास प्याज स्टॉल पर यह 50 रुपये किलो के भाव बिक रहा था। इसी तरह दिल्ली के समसपुर में यह 55 से 60 रुपये के दाम पर बेचा जा रहा था। दुकानदार ने कहा,प्याज के दाम घट रहे हैं और एक महीने में भाव 30-40 रुपये कम हो गए हैं। साउथ दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में प्याज 50 रुपये के भाव बिक रहा था। 

भोगल सब्जी मार्केट में राजन पाल नाम के एक प्याज विक्रेता ने कहा, कुछ महीनों पहले प्याज काफी सस्ता था लेकिन लंबे समय तक इसके भाव 100 रुपये से ऊपर बने रहे। अब यह 55 रुपये के भाव पर मिल रहा है। उन्होंने आगे कहा, ‘हम अफगानिस्तान और अन्य देशओं से प्याज मंगाते हैं लेकिन भारतीय लोगों को यहीं का प्याज पसंद है।’ 

आजादपुर मंडी के अनियन ट्रेडर्स असोसिएशन के सेक्रटरी श्रीकांत मिश्रा कहते हैं कि वह थोक और खुदरा भाव में बड़े अंतर से हैरान हैं। उन्होंने कहा, ‘प्याज की सप्लाई कम नहीं है लेकिन रिटेल दाम काफी ज्यादा हैं।’ उधर लासलगांव एपीएमसी के अधिकारियों ने कहा, देश में जहां भी प्याज का उत्पादन होता है, पिछले महीने ज्यादा ही हुआ है लेकिन डिमांड में कोई बदलाव नहीं आया। ऐसे में थोक मूल्य में कमी आई है। इस मंडी की चेयरपर्सन सुवर्णा जगताप ने कहा, ‘सरकार को प्याज व्यापारियों पर से रोक हटानी चाहिए, चाहे वे थोक विक्रेता हों या खुदरा।’ 

PM मोदी ने राज्यसभा में ऐसा कौन सा ‘शब्द’ इस्तेमाल किया, जिसे सदन की कार्यवाही से हटाना पड़ा

नई दिल्ली: गुरुवार को पीएम मोदी ने राज्यसभा में विपक्ष पर जमकर हमला बोला. नागरिकता कानून से लेकर एनपीआर तक कई मुद्दों को लेकर विपक्ष के गतिरोध पर सवाल उठाए. इस दौरान पीएम मोदी के भाषण से एक शब्द सदन की कार्यवाही से निकाल दिया गया. पीएम मोदी ने विपक्ष पर एनपीआर को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया था. ‘झूठ’ असंसदीय शब्द है इसलिए इसे निकाल दिया गया.  राष्‍ट्रपति के अभिभाषण पर राज्‍यसभा में चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने शाम 6 बजकर 20 मिनट पर सभापति को संबोधित करते हुए कहा कि किन जिलों से ज्यादा माइग्रेशन हो रहा है, किन जिलों से लोग जिला छोड़कर जा रहे हैं, इसकी जानकारी के बिना उन जिलों के डेवलेपमेंट को आप प्राथमिकता नहीं दे सकते हैं. इसके लिए यह आवश्यक है.

प्रधानमंत्री के भाषण के शब्दों को संसदीय कार्रवाही से हटाना दुर्लभ घटना है. ऐसा बहुत कम ही हुआ है. 2013 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के भाषण के कुछ अंश भी राज्य सभा की कार्यवाही से निकाले जा चुके हैं. तब तत्कालीन विपक्ष के नेता अरुण जेटली के भाषण के कुछ अंश भी हटाए गये थे. इस बार भी ऐसी ही हुआ है. विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आजाद के भाषण से भी एक शब्द निकाला गया है. उन्होंने गुमराह शब्द का प्रयोग किया था जोकि असंसदीय श्रेणी में आता है. 

ब़िटेन की अदालत ने अनिल अंबानी को 10 करोड़ डालर जमा करने को कहा

ब्रिटेन की एक अदालत ने रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी को शुक्रवार को निर्देश दिया कि वह छह सप्ताह के भीतर 7 अरब 15 करोड़ 16 लाख रुपए (10 करोड़ डॉलर) जमा करें। अदालत चीन के शीर्ष बैंकों की एक अर्जी की सुनवाई कर रही थी, जिसमें अनिल अंबानी से 48 अरब 63 करोड़ 88 लाख रुपए (68 करोड़ डॉलर की वसूली की मांग की गई है। इंडस्ट्रियल एंड कर्मिशयल बैंक आफ चाइना लिमिटेड की मुंबई शाखा ने अपनी ओर से तथा चाइना डेवलपमेंट बैंक और एक्जिम बैंक आफ चाइना ने अंबानी के खिलाफ सरसरी तौर पर पैसा जमा कराने का आदेश जारी करने की अपील की थी.

इन बैंकों का कहना है कि अनिल अंबानी ने फरवरी 2012 में पुराने कर्ज को चुकाने के लिए करीब 65 अरब 83 करोड़ 4 लाख 78 हजार रुपए (92.5 करोड़ डॉलर) के कर्ज के लिए कथित तौर पर व्यक्तिगत गारंटी का पालन नहीं किया है। अंबानी (60) ने इस तरह की किसी गारंटी का अधिकार देने की बात का खंडन किया। ऋण अनुबंध के तहत इसीलिए बैंकों ने यह मामला ब्रिटेन की अदालत के सामने रखा है। न्यायाधीश डेविड वाक्समैन ने 7 अरब 15 करोड़ 16 लाख रुपए (10 करोड़ डॉलर) की राशि जमा करने के लिए अंबानी को छह सप्ताह की समय सीमा देते हुए कहा कि वह अंबानी के बचाव में कही गई इस बात को नहीं मान सकते कि उनका नेटवर्थ लगभग शून्य है या उनका परिवार संकट की स्थिति में उनकी मदद नहीं करेगा।

रिलायंस ग्रुप ने अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करने का संकेत दिया। अनिल अंबानी के एक प्रवक्ता ने कहा, “श्री अंबानी ब्रिटिश अदालत के आदेश की समीक्षा कर रहे हैं और अपील के संबंध में कानूनी सलाह लेंगे।” इंग्लैंड और वेल्स के उच्च न्यायालय के वाणिज्यिक विभाग में चीन के तीन बैंकों को रिलायंस कम्युनिकेशंस के प्रमुख के खिलाफ पिछले साल दिए गए सशर्त आदेश की शर्तें तय करने से संबंधित सुनवाई के दौरान अंबानी के वकीलों ने यह स्थापित करने का प्रयास किया कि यदि उनकी देनदारियों को जोड़ा जाए तो अंबानी का नेटवर्थ शून्य होगा।

उनके वकीलों ने सुनवाई के दौरान कहा, “श्री अंबानी का नेटवर्थ 2012 से लगतार नीचे आ रहा है। भारत सरकार की स्पेक्ट्रम देने की नीति में बदलाव से भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में नाटकीय बदलाव आया है।” उनके वकील रॉबर्ट होवे ने कहा, “2012 में अंबानी का निवेश सात अरब डॉलर से अधिक का था। आज यह 6 अरब 36 करोड़ 49 लाख 24 हजार रुपए (8.9 करोड़ डॉलर) रह गया है। यदि उनकी देनदारियों को जोड़ा जाए, तो यह शून्य पर आ जाएगा।” हालांकि बैंकों के वकीलों ने अंबानी के इस दावे पर सवाल उठाते हुए उनके विलासिता की जीवनशैली का उल्लेख किया। बैंकों के वकीलों ने कहा कि अंबानी के पास 11 या अधिक लग्जरी कारें, एक प्राइवेट जेट, एक याट और दक्षिण मुंबई में एक विशिष्ट सीविंड पेंटहाउस है।

न्यायाधीश डेविड वाक्समैन ने सवाल किया, “श्री अंबानी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि वह व्यक्तिगत रूप से दिवालिया हो चुके हैं। क्या उन्होंने भारत में दिवालिया आवेदन किया है।” अंबानी के वकीलों की टीम में शामिल देश के प्रमुख अधिवक्ता हरीश साल्वे ने इसका जवाब ‘न’ में दिया। इसके बाद अदालत में भारत की दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) पर संक्षिप्त उल्लेख हुआ।

होवे ने कहा, “कुल मिलाकर स्थिति है कि श्री अंबानी 5 खरब 6 करोड़ 12 लाख रुपए (70 करोड़ डॉलर) अदा करने की स्थिति में नहीं हैं।” बैंकों के वकीलों ने कई ऐसे उदाहरण दिए जब उनके परिवार के सदस्यों ने उन्हें संकट से बाहर निकलने में मदद की। वहीं, बचाव पक्ष के वकीलों से यह स्थापित करने का प्रयास किया कि अंबानी के पास अपनी मां कोकिला, पत्नी टीना अंबानी और पुत्रों अनमोल और अंशुल की संपत्तियों और शेयरों तक कोई पहुंच नहीं है। इस पर वकीलों ने कहा कि क्या हम गंभीरता से यह मान सकते हैं कि संकट के समय उनकी मां, पत्नी और पुत्र उनकी मदद नहीं करेंगे।

बैंकों के वकीलों ने अदालत को यह भी बताया कि अनिल अंबानी के भाई मुकेश अंबानी एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं और वह फोर्ब्स की सूची में दुनिया के 13वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। उनका अनुमानित नेटवर्थ 55 से 57 अरब डॉलर है।

जीवाजी विश्विद्यालय ने प़थम वर्ष नामांकन की लिंक 14 तक तारीख बढ़ाई


ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को स्नातक प्रथम वर्ष की नामांकन की लिंक बंद कर दी। लिंक बंद होने के बाद छात्र जेयू पहुंचे और अधिकारियों से समस्या बताई। 8 फरवरी नामांकन की आखिरी तारीख थी, लेकिन एक दिन पहले ही लिंक बंद की गई। छात्रों की समस्या सुनने के बाद फिर से लिंक खोली गई। साथ ही 14 फरवरी तक नामा

ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को स्नातक प्रथम वर्ष की नामांकन की लिंक बंद कर दी। लिंक बंद होने के बाद छात्र जेयू पहुंचे और अधिकारियों से समस्या बताई। 8 फरवरी नामांकन की आखिरी तारीख थी, लेकिन एक दिन पहले ही लिंक बंद की गई। छात्रों की समस्या सुनने के बाद फिर से लिंक खोली गई। साथ ही 14 फरवरी तक नामांकन करने के लिए तारीख बढ़ाई गई।

मार्च में स्नातक परीक्षाएं शुरू होनी है, इसके लिए ऑनलाइन नामांकन किए जा रहे हैं। अभी करीब एक हजार से ज्यादा छात्र अपना नामांकन नहीं करा पाए थे। इससे ही लिंक बंद हो गई। नामांकन की लिंक नहीं खुलने से छात्र परेशान हो गए। सुबह अधिकारियों को समस्या बताने जेयू पहुंच गए। कंप्यूटर सेल प्रभारी को लिंक बंद करने के बारे में पूछा तो उसने बताया कि आखिरी तारीख निकल गई। इसके बाद परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि 8 फरवरी आखिरी तारीख है। एक दिन पहले लिंक क्यों बंद की गई। छात्र हित को देखते हुए परीक्षा नियंत्रक आरकेएस सेंगर ने नामांकन की तारीख भी बढ़ा दी और लिंक खोल दी गई।

Aadhaar में मोबाइल नंबर अपडेट करना हुआ बहुत आसान, डॉक्यूमेंट भी नहीं दिखाना होगा

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) आधार नियमों में संशोधन करता है अगर संसोधन के बाद आपको आधार कार्ड में अपनी जानकारी अपडेट करनी है तो नियमों को जानना बहुत जरूरी है समझ लीजिए अगर आपके आधार के साथ मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है तो कई सेवाओं का फायदा आप नहीं ले पाएंगे ऐसे में आज ही तुरन्त अपने आधार के साथ मोबाइल नंबर अपडेट कर लें UIDAI ने Aadhaar में मोबाइल नंबर बदलवाने के लिए तरीका बताया है.

UIDAI के मुताबिक, अगर आपने अभी तक अपने लेटेस्ट मोबाइल नंबर को आधार में अपडेट नहीं किया है तो आप बिना किसी डॉक्यूमेंट के इसे अपडेट कर सकते हैं आपको सिर्फ अपना आधार कार्ड लेकर किसी भी नजदीकी आधार सेवा केंद्र में जाएं और मोबाइल नंबर अपडेट करने के रिक्वेस्ट दे सकते हैं.
अपडेट न होने पर होगा नुकसान

अगर आप आधार नंबर का इस्तेमाल किसी वेरिफिकेशन प्रक्रिया के लिए करेंगे तो आपके नंबर पर एक ओटीपी आएगा यह ओटीपी आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी पर आएगा ऐसे में अगर आपका गलत या पुराना नंबर आधार पर पड़ा होगा तो आपको ओटीपी नहीं आएगा इसके कारण आप अपने प्रोसेस को पूरा नहीं कर पाएंगे इसके अलावा आधार को किसी दस्तावेज से लिंक भी नहीं करा सकेंगे.

सिर्फ 50 रुपए में अपडेट होगा नंबर

आप अपने मोबाइल नंबर से आधार को लिंक कराना चाहते हैं तो आपको अपने पास वाले आधार सेवा केंद्र पर जाना होगा यहां आपको मोबाइल नंबर अपडेट कराने के लिए 50 रुपए देने होंगे. इसके बाद आपका मोबाइल नंबर आधार के साथ लिंक हो जाएगा और दूसरी सर्विसेज के लिए भी मान्य होगा.

इस नंबर पर कर सकते हैं संपर्क

आधार से जुड़ी कोई भी परेशानी है तो आप टोल फ्री नंबर 1947 पर कॉल कर सकते हैं या फिर आप ऑफिसियल ईमेल पर ई-मेल के जरिए भी अपनी शिकायत या समस्या को लिख सकते हैं UIDAI जल्द से जल्द आपकी समस्या को सुलझाने का प्रयास करेगा.

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सट्टा बाजार के अनुसार दिल्ली में आप पार्टी की जीत है पक्की

दिल्ली चुनाव से पहले हम तरह तरह पार्टियों के सर्वे देख चुके हैं। अलग अलग सर्वे में कहीं आप तो कही बीजेपी की सरकार बनती नजर आ रही है। वहीं अब दिल्ली में सट्टा बाजार के मुताबिक आप की सरकार बनती दिख रही है।

लेकिन बीजेपी के भाव में दिनों दिन वृद्धि हो रही है। जहाँ पहले बीजेपी को 10 से 12 सीटें मिलती नजर आ रही थी वहीं अब बीजेपी पक्ष में ज्यादा सीटें आ सकती है। लेकिन सटोरियों के अनुसार दिल्ली में आप की सरकार को गिराना मुमकिन नहीं है।

नए भाव के तहत आप का भाव 57:58 का लगाया गया है वहीं भाजपा का भाव 11:13 कर दिया गया है। बाजार की रिपोर्ट के मुताबिक बीते 24 घंटों में सबसे ज्यादा दांव भाजपा पर लगाया गया है।

दिल्ली में इस बार किसकी सरकार बनती है ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। दिल्ली में चुनाव आज 8 फरवरी को हैं और नतीजे 11 फरवरी को आने वाले हैं। इसके बाद इस बात का खुलासा हो जाएगा कि दिल्ली के गढ़ को कौन जीतता है।

जयवर्धन अड़े: सीएम ने प्रस्ताव को वापस किया, अब मधुसूदनगढ़ बनी रहेगी नगर पंचायत

गुना। मधुसूदनगढ़ नगर पंचायत जिसका दर्जा प्रदेश सरकार ने छीनकर कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेज दिया। कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के नगरीय विकास एवं प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह अड़े, उनका कहना था कि मधुसूदनगढ़ नगर पंचायत आबादी के मापदंड पर खरी उतरती है।
इसलिए इसे नगर पंचायत ही बनी रहने दी जाए, जिसको सीएम ने माना और इसको लेकर आए प्रस्ताव को वापस किया। जयवर्धन के अड़ जाने से मधुसूदनगढ़ को नगर पंचायत का दर्जा जो प्रदेश सरकार ने एक प्रस्ताव के जरिए छीन लिया था, उस पर केवल कैबिनेट की मोहर लगनी थी, उससे जिससे वह ग्राम पंचायत बनने से बच गई।
यह नगर पंचायत ही रहेगी। मधुसूदनगढ़ नगर पंचायत का दर्जा प्रदेश सरकार द्वारा छीन लिए जाने की खबर को पत्रिका ने प्रमुखता से छापा था। जयवर्धन के अड़ जाने और मधुसूदनगढ़ का नगर पंचायत का दर्जा बने रहने पर जनता ने हर्ष व्यक्त किया है।
दरअसल, कैबिनेट की बैठक के बाद ग्वालियर संभाग के गुना जिले की मधुसूदनगढ़, अशोकनगर की पिपरई, शिवपुरी की पोहरी, मगरौनी, शहडोल संभाग के अनूपपुर जिले की राजनगर, सागर संभाग के पन्ना जिले की गुन्नौर और इंदौर संभाग के बड़वानी जिले की निवाली बुर्जुग नगर पंचायत बनी रहीं। बाकी 22 को विघटित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी।
जयवर्धन अड़े, बची नगर परिषद: मधुसूदनगढ़ समेत दस संभाग की तीस ग्राम पंचायतों को तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने नगर परिषद बना था। उसकी वर्तमान प्रदेश सरकार ने इन तीस नगर पंचायतों को विघटित किए जाने का प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में रखा गया। बैठक में प्रजेन्टेंशन प्रस्तुत किया गया।
मंत्री जयवर्धन सिंह अपने गृह जिले की मधुसूदनगढ़ नगर पंचायत के नाम को लेकर अड़े, उनका कहना था कि मधुसूदनगढ़ नगर पंचायत आबादी के मापदंड पर खरी उतरती है, इसको नगर पंचायत ही बनी रहने दी जाए। इसके अलावा सात और नगर परिषदों को लेकर चर्चा हुई। सिंह के अड़ जाने और उनके कहने पर सीएम ने परिषद को विघटित कर ग्राम पंचायत बनाने के प्रस्ताव को वापस कर दिया।
सीएम से की चर्चा…
प्रदेश की तीस नगर पंचायतों को लेकर एक प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में आया था। जिसमें मधुसूदनगढ़ नगर पंचायत भी शामिल थी। तीस में से 22 ऐसी थीं जो आबादी आदि मापदंड पर खरी नहीं उतर रहीं थीं। मधुसूदनगढ़ समेत 8 ऐसी नगर परिषद थीं जो आबादी आदि के मापदंड को पूरा कर रहीं थीं। सीएम से इस मसले पर चर्चा की और वे मान गए, मधुसूदनगढ़ परिषद ही बनी रहेगी।
जयवर्धन सिंह, नगरीय विकास मंत्री