मध्यप्रदेश: रिश्वत लेते पकड़े जाने पर पटवारी ने चबाए रुपये, टीम ने पेट में घूंसे मारकर बाहर निकाले

मध्यप्रदेश के खंडवा में भूमि नामांतरण के नाम पर सेवानिवृत्त शिक्षक से चार हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पटवारी राजेश धात्रक को मंगलवार को लोकायुक्त पुलिस इंदौर ने उसी के घर में पकड़ लिया। जब आरोपी ने लोकायुक्त पुलिस को देखा तो वह रिश्वत की राशि को चबाने लगा और हाथों को मिट्टी में रगड़ने की कोशिश की, ताकि सबूतों को मिटा सकें। 

लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं होने दिया, उन्होंने पटवारी की पीठ और पेट में घूंसे मारकर 500-500 के आठ नोट बाहर निकलवा लिए और कोतवाली लेकर पहुंचे। लोकायुक्त निरीक्षक विजय चौधरी ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षक मांगीलाल प्यासे की गांव में कृषि भूमि है। उन्होंने नामांतरण के लिए पटवारी राजेश धात्रक से संपर्क किया था। जिसके बाद उसने आठ हजार रुपये रिश्वत की बात कही थी। 

पुलिस ने कहा कि मामला दर्ज कर लिया गया है और इस संबंध में आरोपी के ऊपर उचित कार्रवाई की जाएगी। 

दिल्ली चुनाव: एनसीपी ने जारी किए सात उम्मीदवारों के नाम, कमांडो सुरेंद्र सिंह को भी दिया टिकट

आम आदमी पार्टी से विधायक रहे कमांडों सुरेंद्र सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में शामिल हो गए हैं। सुरेंद्र सिंह को दिल्ली कैंट से एनसीपी ने अपना प्रत्याशी भी घोषित कर दिया है। बता दें कि आम आदमी पार्टी ने इस बार सुरेंद्र सिंह का टिकट काट दिया है, पार्टी ने उनकी जगह विरेंद्र सिंह कादियान को टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस ने इस सीट पर संदीप तंवर पर दांव लगाया है। 

इससे पहले सुरेंद्र सिंह ने ट्वीट कर अपना दर्द बयां किया। सुरेंद्र सिंह ने अपने त्यागपत्र की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि आज मैं बहुत दुखी होकर आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे रहा हूं। 

मालूम हो कि टिकट के लिए पार्टी की तरफ से इंकार किए जाने के बाद सुरेंद्र सिंह ने कहा था कि वो या तो किसी दूसरी पार्टी से या फिर निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। 

पाकिस्तानी ‘हल्क’ को चाहिए 100 किलो की दुल्हनिया, अब तक 300 रिश्ते ठुकराए

पाकिस्तान के ‘हल्क’ के नाम से जाने जाने वाले 27 वर्षीय अरबाब खिजर हयात एक वेटलिफ्टर हैं। उन्हें खान बाबा के नाम से भी जाना जाता है। उनका वजन 444 किलोग्राम है, लेकिन यह भारी वजन अब उनके लिए परेशानी का सबब बन गया है। उन्हें उनके साइज की दुल्हन नहीं मिल रही है। दरअसल, वो चाहते हैं कि उनकी होने वाली दुल्हन का वजन कम से कम 100 किलोग्राम हो, ताकि उनकी जोड़ी देखने में अच्छी लगे।

अरबाब खैबर पख्तूनख्वा जिले के मरदान के रहने वाले हैं। वह कहते हैं, ‘मेरे पिता चाहते हैं कि मैं शादी कर लूं। वो अपने लिए पोता-पोती चाहते हैं, लेकिन मुझे अब तक सही लड़की नहीं मिली है। पिछले सात सालों से मैं अपने प्यार की तलाश कर रहा हूं। इस दौरान मैंने 200-300 लड़कियों को देखा है, लेकिन वो सभी औसत वजन की थीं।’   

अरबाब के परिवार की शर्त ये है कि दुल्हन की लंबाई छह फीट चार इंच होनी चाहिए, क्योंकि अरबाब की लंबाई छह फीच छह इंच है। इसके अलावा लड़की को अच्छा खाना बनाना भी आना चाहिए। बता दें कि अरबाब की रोजाना डाइट 10 हजार कैलोरी है। वह हर रोज नाश्ते में 36 अंडे खाते हैं। इसके अलावा वह हर रोज चार मुर्गे खा जाते हैं और पांच लीटर दूध पीते हैं। 

हयात का कहना है कि उनका सपना दुनिया का सबसे ताकतवर इंसान बनना है। इसके लिए उन्होंने अपना वजन किशोरावस्था से ही बढ़ाना शुरू कर दिया था और ये सिलसिला अनवरत जारी है। वह बताते हैं कि उन्हें कोई बीमारी नहीं है और अपने वजन के साथ बिल्कुल फिट हैं और अच्छा महसूस करते हैं।  
अरबाब पहली बार तब चर्चा में आए थे, जब उन्होंने एक ट्रैक्टर को रस्सी से बांधकर खींचा था। उस समय उनका वीडियो खूब वायरल हुआ था। उनका दावा है कि साल 2012 में उन्होंने जापान में 5000 किलो वजन उठाया है। उनका यह भी दावा है कि उन्हें डब्ल्यूडब्ल्यूई (WWE) से मेडल मिला और उनका नाम गिनीज बुक में भी दर्ज है। हालांकि उनके ये दावे कितने सच हैं, ये साबित नहीं हो पाया है।

केरल के राज्यपाल बोले, नागरिकता कानून बन जाने के बाद उसका राज्यों में लागू होना जरूरी

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ केरल सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि कानून बन जाने के बाद उसका पालन करना जरूरी है। देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह देश के संविधान का पालन करे और उसका सम्मान करे। कानून को चुनौती देने के लिए कोर्ट जा सकते हैं पर ये नहीं कह सकते कि संसद द्वारा बनाए गए कानून को लागू नहीं करेंगे। अगर ऐसा किया जाता है कि तो गलत है।

वह अवध विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि केरला विधानसभा की नियमावली स्पष्ट है। जो विषय राज्य सरकार के अधीन नहीं नहीं आता। उस पर चर्चा नहीं हो सकती। ठीक इसी तरह कोर्ट जाने से पहले राज्यपाल के सामने फाइल पेश की जानी जरूरी है। मुझे इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई जो कि अनुचित है।

उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी विषय में जहां राज्य सरकार व केंद्र सरकार के रिश्तों का मामला या सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट से संबंध का मामला हो वहां बिना राज्यपाल के संज्ञान में लाए बिना फैसला नहीं लिया जा सकता। कानून बिल्कुल भी इसकी इजाजत नहीं देते। राज्यपाल का एक ही काम होता है सरकार संविधान और कानून के अनुरूप चले।

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान अवध विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुंचे हैं। कार्यक्रम का आयोजन इंडिया थिंक काउंसिल की ओर से किया जा रहा है। यहां पहुंचते ही उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अयोध्या मामले पर कोर्ट का निर्णय आ चुका है। अब बस एक ही मकसद होना चाहिए कि हम सब बहुत प्यार, सहयोग और भाई चारे के साथ रहें और एक दूसरे के लिए सदभावना रखें। जिससे पूरा मुल्क आगे बढ़े।

CAA पर रोक नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 144 याचिकाओं पर 4 हफ्ते में मांगा जवाब

नई दिल्ली 
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर दाखिल 144 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने सभी याचिकाओं पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को 4 हफ्ते का वक्त दिया है। अदालत ने कहा कि सरकार को इन सभी याचिकाओं पर 4 हफ्तों में जवाब देना होगा। कोर्ट ने साथ ही CAA पर अंतरिम रोक के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया। शीर्ष अदालत ने सभी हाई कोर्ट को CAA से जुड़े मामले की सुनवाई नहीं करने को कहा है। 

असम पर नहीं होगी अलग से सुनवाईचीफ जस्टिस बोबडे, जस्टिस अब्दुल नजीर, जस्टिस संजीव खन्ना की 3 जजों की पीठ ने आदेश देते हुए कहा कि असम पर अलग से सुनवाई नहीं होगी। बता दें कि सुनवाई के दौरान कानून को चुनौती देने वाले पक्ष की दलील रखते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि जबतक इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती तबतक इस को निलंबित कर दिया जाना चाहिए। सिब्बल ने संविधान पीठ के गठन की मांग भी की थी। चीफ जस्टिस ने कहा कि अभी अंतरिम आदेश पर कोई आदेश नहीं देंगे। 

केंद्र की बात सुने बिना आदेश नहीं-SC 
चीफ जस्टिस ने कहा कि वह केंद्र की पूरी बात सुने कोई एकतरफा आदेश नहीं दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि सभी याचिकाओं को केंद्र के पास पहुंंचना जरूरी है। 

जब CJI सिब्बल से बोले, यह तो रोक वाली बात ही होगी 
चीफ जस्टिस ने असम के तर्क को अलग रखते हुए कहा कि वहां की स्थिति अलग है। उन्होंने कहा कि हर याचिका सरकार के पास जानी जरूरी है। सिब्बल की निलंबन वाली दलील पर चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा कि यह एक तरीके से रोक की ही बात होगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि असम और त्रिपुरा से दाखिल CAA विरोधी याचिकाओं की अलग से सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CAA पर अब 144 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई नहीं होगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि अब इससे ज्यादा याचिका दाखिल नहीं होगी। 

सिब्बल ने दी निलंबन की दलील 
सिब्बल ने कहा कि नागरिकता देकर वापस नहीं ली जा सकती है। उन्होंने दलील दी कि इसपर कोई अंतरिम आदेश जारी होना चाहिए। सिब्बल ने कहा कि हम कानून पर रोक की मांग नहीं कर रहे हैं बल्कि इसे दो महीने के लिए निलंबित कर दें। 

अटॉर्नी जनरल ने जवाब के लिए मांगा 6 हफ्तों का वक्त 
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट में भीड़ का सवाल उठाते हुए कहा कि कोर्ट का मौहाल शांतिपूर्ण होना चाहिए। सिब्बल ने कहा कि इस पहलू पर तुरंत सुनवाई होनी चाहिए। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इन याचिकाओं पर जवाब देने के लिए सरकार 6 हफ्तों का वक्त चाहिए। 

और याचिकाओं पर रोक की भी मांग 
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि हमने 60 याचिकाओं पर जवाब तय किए हैं जबकि कोर्ट में 144 याचिकाएं हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट अब और पिटिशन दाखिल करने की इजाजत नहीं दे। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में वह जल्दबाजी में कोई आदेश नहीं दे सकती है। 

इन्हें मिलेगी भारत में नागरिकता 
बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के तहत तीन पड़ोसी देशों- पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के शिकार अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। इसके तहत तीनों देशों के धार्मिक अल्पसंख्यकों यानी हिंदू, सिख, बौद्ध और क्रिश्चन समुदाय के ऐसे लोगों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए थे। 

इन याचिकाओं में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और कांग्रेस नेता जयराम रमेश की याचिकाएं भी शामिल हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 दिसंबर को नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 को मंजूरी दी थी जिससे यह कानून बन गया था। 

नागरिकता कानून का विरोध कर रहे कपिल सिब्बल की सबसे बड़ी दलील क्या थी 
CAA को 2 महीने के लिए निलंबित किया जाए। संविधान पीठ को भेजा जाए मामलाCJI की सबसे बड़ी टिप्पणी क्या थी 
चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि यह एक तरह से रोक जैसा ही होगा। कोर्ट ने इस मामले पर कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया।सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को क्या आदेश दिया 
शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को सभी 144 याचिकाओं पर जवाब के लिए केंद्र सरकार को 4 हफ्ते का वक्त दिया।

फिल्म एक्ट्रेस जूही चावला ने क्यों थामा शादीशुदा जय मेहता का हाथ

पूर्व मिस इंडिया और फिल्मो में ज़ोरदार अभिनय करने वाली जूही चावला को कौन नही जानता है.नब्बे के दशक में जूही चावला का फिल्मो में सिक्का चलता था. उन्होंने आमिर खान के साथ फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’से अपना फ़िल्मी करियर शुरू किया और उनकी ये फिल्म ज़बरदस्त तरीके से सफल रही.

कई सुपरहिट फिल्मों में काम करने वाली जूही की लव स्टोरी भी बेहद दिलचस्प है। जूही ने एक शादीशुदा शख्स से शादी की है। उनके पति का नाम जय मेहता है। हालांकि जय से जब जूही पहली बार मिलीं तो उनकी पत्नी सुजाता बिड़ला की मौत हो चुकी थी। सुजाता की मौत एक प्लेन क्रैश में हुई थी। इस हादसे के बाद ही जूही और जय के बीच नजदीकियां बढ़ीं और फिर दोनों ने शादी कर ली थी।

बता दें कि जूही के पति उनसे उम्र में महज 7 साल ही बड़े हैं लेकिन दिखने में काफी उम्रदराज नजर आते हैं।

बात 1992 की है, इस दौरान जूही फिल्म ‘कारोबार’ की शूटिंग कर रही थी। फिल्म के डायरेक्टर राकेश रोशन और बिजनेसमैन जय मेहता के बीच काफी अच्छी दोस्ती थी। शूटिंग के दौरान ही राकेश ने जूही और जय की मुलाकात करवाई थी।

शूटिंग के दौरान ही जूही-जय की कई बार मुलाकात हुई। हालांकि, दोनों ने ही एक-दूसरे के प्रति खास इंट्रेस्ट नहीं दिखाया था। जब जूही को पता चला कि जय की वाइफ की एक प्लेन हादसे में मौत हो चुकी है तो जय के प्रति उनका व्यवहार बदला। दोनों में दोस्ती बढ़ी और फिर अफेयर हो गया।

दोनों ने जब शादी के बारे में सोचा तो उसके कुछ वक्त बाद ही जूही की मां की एक कार एक्सीडेंट में मौत हो गई। इस हादसे ने जूही को तोड़कर रख दिया। उस वक्त वे शादी को लेकर कोई डिसीजन नहीं पा रही थीं। जूही को इस गम से निकालने में जय ने काफी मदद की। और आखिरकार जूही ने 1995 में जय मेहता से शादी कर ली। दोनों के दो बच्चे, बेटी जाह्नवी और बेटा अर्जुन हैं।

BJP सांसद से भिड़े जीतू पटवारी, बोले- उठाकर बाहर कर सकता हूं

बीजेपी सांसद और खेल मंत्री जीतू पटवारी में विवाद काफी हद तक बढ़ गया था. इस दौरान मंत्री पटवारी ने बीजेपी सांसद से यहां तक कह दिया कि नियमों के तहत मैं आपको उठाकर इस बैठक से बाहर कर सकता हूं.

जीतू पटवारी ने बीजेपी सांसद को बीच बैठक धमकाया
जीतू पटवारी बोले- उठाकर बैठक से बाहर कर सकता हूं
मध्य प्रदेश के खेल मंत्री जीतू पटवारी का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वो बीजेपी सांसद महेन्द्र सोलंकी से झगड़ते नजर आ रहे हैं. यह वीडियो देवास में जिला योजना समिति की मंगलवार को हुई बैठक का बताया जा रहा है.

बीजेपी सांसद और खेल मंत्री जीतू पटवारी में विवाद काफी हद तक बढ़ गया था. इस दौरान मंत्री पटवारी ने बीजेपी सांसद से यहां तक कह दिया कि नियमों के तहत मैं आपको उठाकर इस बैठक से बाहर कर सकता हूं.

ANI

@ANI
#WATCH Madhya Pradesh: A verbal spat erupted between state Minister Jitu Patwari and BJP MP Mahendra Solanki during a district planning committee meeting in Dewas, today.

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9:06 PM – Jan 21, 2020
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अधिकारियों के सामने ही भिड़ गए जन प्रतिनिधि

जानकारी के मुताबिक मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में जिले के प्रभारी मंत्री जीतू पटवारी, कलेक्टर, एसपी, जिला पंचायत सीईओ, प्रशासन के अन्य अधिकारियों के अलावा देवास से बीजेपी सांसद महेन्द्र सिंह सोलंकी भी उपस्थित थे.

ANI

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· 13h
#WATCH Madhya Pradesh: A verbal spat erupted between state Minister Jitu Patwari and BJP MP Mahendra Solanki during a district planning committee meeting in Dewas, today.

ANI

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Jitu Patwari, Madhya Pradesh Minister: He (BJP MP) has been disrupting & diverting the meeting agendas for the past three meetings. I urge him to keep in mind that he is not a common man anymore but a representative of people. His behaviour should reflect the same.

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9:29 PM – Jan 21, 2020
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जीतू पटवारी ने दी अपनी सफाई

विवाद के बाद जीतू पटवारी ने मीडिया से कहा कि वह (बीजेपी सांसद) पिछली तीन बैठकों से लगातार बैठक के एजेंडे को बाधित करते रहे हैं. मैं उनसे यह ध्यान रखने का आग्रह किया था कि वह अब आम आदमी नहीं हैं, बल्कि लोगों के प्रतिनिधि हैं. उनका व्यवहार भी उसी के अनुरूप होना चाहिए.

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· 13h
Replying to @ANI
Jitu Patwari, Madhya Pradesh Minister: He (BJP MP) has been disrupting & diverting the meeting agendas for the past three meetings. I urge him to keep in mind that he is not a common man anymore but a representative of people. His behaviour should reflect the same.

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Mahendra Solanki, BJP MP from Dewas: He (Jitu Patwari) even said that I will not become MP next time. I said that this is an insult to voters who elected me as their MP. #MadhyaPradesh

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9:29 PM – Jan 21, 2020
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सोलंकी ने भी रखी अपनी बात

वहीं दूसरी ओर देवास से बीजेपी सांसद महेंद्र सोलंकी ने इस विवाद पर कहा कि उन्होंने (जीतू पटवारी) यहां तक कहा कि मैं अगली बार सांसद नहीं बनूंगा. मैंने कहा कि यह मतदाताओं का अपमान है जिन्होंने मुझे अपना सांसद चुना.

सत्ता के गरुर में मंत्री जी ने कलेक्ट्रेट से बाहर फिकवा दिया कांग़ेस के कार्यकर्ता को


मध्य प्रदेश के हरदा में एक कांग्रेस नेता को उन्ही के मंत्री ने उठवाकर कलेक्ट्रेट से बाहर करवा दिया. दरअसल, किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव शैलेंद्र वर्मा हरदा कलेक्ट्रेट पहुंचे थे.

शैलेंद्र वर्मा को बाहर ले जाते हुए अधिकारी
कांग्रेस किसान नेता को मंत्री ने करवाया कलेक्ट्रेट से बाहर
मध्य प्रदेश के मंत्री ने दी किसान नेता को धमकी
मध्य प्रदेश के हरदा में एक कांग्रेस नेता को उन्ही के मंत्री ने उठवाकर कलेक्ट्रेट से बाहर करवा दिया. दरअसल, किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव शैलेंद्र वर्मा हरदा कलेक्ट्रेट पहुंचे थे.

वो कमलनाथ सरकार में राज्य के कानून और कानूनी मामलों के विभाग के राज्य मंत्री पीसी शर्मा के सामने अपनी बात रखना चाहते थे. लेकिन उन्होंने जैसे ही अपनी बात को रखना चाहा, कमलनाथ के मंत्री ने उन्हें कलेक्ट्रेट परिसर से जबरन उठवाकर बाहर करवा दिया.
घटना के बारे में जानकारी देते हुए शैलेंद्र वर्मा ने कहा, ‘मंत्री जी ने मुझे डांटा और कहा कि मुझे पुलिस स्टेशन में बंद कर दो.’

वर्मा ने कहा, ‘वो सरकार का हिस्सा हैं, वो हमारी चिंताओं को सुनने वाले हैं. मैं किसान कांग्रेस का राज्य महासचिव हूं, इसके बाद भी वो इसी तरह मेरे साथ व्यवहार कर रहे हैं.’

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#WATCH Madhya Pradesh: Kisan Congress state general secretary Shailendra Verma forcibly removed from Harda Collectorate premises, allegedly after he spoke loudly to state minister PC Sharma.

यही नहीं उन्होंने वहां मौजूद बाकी के नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘कई अन्य कांग्रेस नेता वहां मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी एक शब्द तक नहीं बोला. सभी चाटुकार हैं.’
जानकारी के मुताबिक दोपहर करीब 3 बजे कांग्रेस नेता शैलेंद्र वर्मा हरदा कलेक्ट्रेट पहुंचे थे. यहां उनकी तेज आवाज में कही गई बात कमलनाथ के मंत्री पीसी शर्मा को बुरी लग गई.

उन्होंने न सिर्फ वर्मा को डांटा बल्कि उन्हें उठाकर जेल में डालने की धमकी भी दी. इसके बाद पीसी शर्मा ने वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों से वर्मा को बाहर करने को कहा. मंत्री के कहे अनुसार पुलिस अधिकारियों ने वर्मा को उठाकर कलेक्ट्रेस परिसर से बाहर कर दिया.

मध्य प्रदेश में सरकारी सेवाओं की होगी होम डिलीवरी


मध्य प्रदेश में अब सरकारी सेवाओं की होम डिलीवरी होगी. इस 26 जनवरी से कमलनाथ सरकार ‘आपकी सरकार आपके द्वार’ नाम से इस योजना की शुरुआत करने जा रही है.

भोपाल: ऑनलाइन शॉपिंग और फूड आइटम्स की होम डिलीवरी के बाद अब सरकारी सुविधाओं की भी होम डिलेवरी का वक्त आ गया है. सरकारी दफ्तर में लोगों की भीड़ कम करने के लिए मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने ‘आपकी सरकार आपके द्वार’ नाम से नई स्कीम शुरू करने का फैसला लिया है.

इस 26 जनवरी को मुख्यमंत्री कमलनाथ इस योजना की शुरुआत करेंगे. इंदौर में इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाएगा. इसके बाद मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में भी इसका प्रसार किया जाएगा.

इंदौर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर होगी शुरुआत
लोक सेवा प्रबंधन विभाग के तहत शुरू होने वाली इस योजना का जिम्मा इंदौर कलेक्टर लोकेश जाटव को सौंपा गया है. शुरुआत में इस योजना के अंतर्गत 5 सरकारी सुविधाओं की होम डिलीवरी की जाएगी. इसमें आय प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र, खसरा-खतौनी की नकल समेत, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों को शामिल किया गया है.

इस योजना के तहत लोगों को ऑनलाइन या लोक सेवा केंद्र में जाकर आवेदन करना होगा. आवेदक से 50 रुपये की फीस लेकर तय समयसीमा के अंदर दस्तावेज उसके घर पहुंचा दिया जाएगा.

इस योजना से कम होगी सरकारी दफ्तरों की भीड़
इस योजना से सरकारी दफ्तरों में लगने वाली लाइनों और आवेदकों को होने वाली परेशानी को कम किया जा सकेगा. योजना का मकसद है कि लोगों को सरकारी सेवाएं अब उनके घर पर ही मिलें. मध्य प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि इस योजना के जरिये सरकार घर-घर नागरिक सुविधा देने की मंशा रखती है.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ बेहतर मैनेजमेंट से सरकार चला रहे हैं. लोगों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिले यही इस सरकार का मकसद है.

भाजपा नेता ने शिवराज सरकार को दिया क्रेडिट
कांग्रेस के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष सैयद जाफर ने कहा कि बीजेपी के 15 वर्षों के शासनकाल में लोग सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर थे. सीएम कमलनाथ बार-बार ये बात कहते आ रहे थे कि योजना कितनी भी अच्छी क्यों न हो, डिलीवरी सिस्टम ठीक नहीं होगा तो फायदा नहीं होगा. इस योजना के तहत अब डिलीवरी सिस्टम मजबूत किया जा सकेगा. इससे सरकारी दफ्तरों की भीड़ खत्म हो जाएगी.

पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक विश्वास सारंग ने कहा कि लोक सेवा गारंटी कानून के तहत शिवराज सरकार में हर सेवा की मियाद तय की गई थी. तत्कालीन सीएम शिवराज ने ही कानून बनाकर इसे लागू किया था और अफसरों की जिम्मेदारी तय की थी. मुख्यमंत्री कमलनाथ केवल इसी योजना पर लीपापोती कर रहे हैं. सारंग ने कहा कि ऐसी कई घोषणाएं कर चुके हैं.

गांवों में ‘गांधी सर्विस सेंटर’ देगा यह सुविधा
सरकार ने इस होम डिलीवरी सिस्टम का पूरा खाका तैयार कर रखा है. ग्रामीण इलाकों के लिए महात्मा गांधी सेवा केंद्र खोले जा रहे हैं. इसमें कलेक्टर दफ्तर की हर सुविधा के साथ टेलीफोन, बिजली के बिल जमा करने की सुविधा होगी. कोशिश इसकी भी है कि यहां रेलवे के टिकट भी उपलब्ध कराए जा सकें.

गांधी सेवा केंद्र पर एटीएम की तरह किसी भी वक्त निकालने की सुविधा देने की भी कोशिश की जा रही है. इसका जिम्मा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग देखेगा. विभाग ने युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है. जल्द ही इस सेवा को शुरू कर दिया जाएगा.