राज्य प्रशासनिक सेवा के 18 अधिकारियों को प्रमोशन, IAS बनेंगे

भोपाल। मध्यप्रदेश में वर्ष 2020-21 में राज्य प्रशासनिक सेवा के 18 अधिकारियों को आईएएस बनने का मौका मिल सकता है। राज्य सरकार ने खाली पदों के हिसाब से तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री कमलनाथ से अनुमति लेकर एक माह के भीतर प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। चार साल बाद गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को भी आईएएस अवॉर्ड का मौका मिल सकता है। इनके लिए दो-तीन पद आरक्षित हो सकते हैं।

इसकी पहल करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने प्रमुख सचिव ‘कार्मिक” दीप्ति गौड़ मुकर्जी को पत्र लिखने के बाद नियमानुसार पद रखने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, इस मामले में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री लेंगे। विभागीय पदोन्नाति बैठक (डीपीसी) मार्च, 2020 में हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक 2019-20 में राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस बने अफसरों की सेवानिवृत्ति से मिले पदों के आधार पर आईएएस संवर्ग में पदोन्न्ति के लिए पद बनेंगे।

इस बार यह संख्या 18 रह सकती है। वहीं, राज्य प्रशासनिक सेवा संवर्ग के 133 पदों के अधिकतम 15 प्रतिशत पद गैर राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस अवॉर्ड के लिए रखे जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि आईएएस अवॉर्ड के लिए पदों का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने की तैयारी सामान्य प्रशासन विभाग ने शुरू कर दी है। इसमें गैर राप्रसे अफसरों के लिए पद तभी रखे जाएंगे, जब मुख्यमंत्री इस मामले में निर्देशित करें।मंत्री डॉ. गोविंद सिंह नियमानुसार आईएएस अवॉर्ड के लिए पद आरक्षित रखने के निर्देश सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर दे चुके हैं। अब इस मामले में निर्णय मुख्यमंत्री कमलनाथ, मुख्य सचिव सुधिरंजन मोहंती से चर्चा के बाद करेंगे। यदि मुख्यमंत्री की सहमति मिलती है तो फिर 2014-15 के बाद गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को मौका मिलेगा। लगभग दो सौ अधिकारी विभिन्न् विभागों में ऐसे हैं जो आईएएस अवॉर्ड की पात्रता रखते हैं।

56 साल तक मिलता है मौका

सूत्रों का कहना है कि चार साल से गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को आईएएस अवॉर्ड का मौका नहीं मिलने की वजह से आयु के पैमाने (अधिकतम 56 साल) के चलते कई अफसर अपात्र हो गए हैं। इनमें वीरेंद्र कुमार, नितिन नांदगांवकर, मनोज श्रीवास्तव, बीआर विश्वकर्मा, संजय वार्ष्णेय, सुरेंद्र भंडारी, सुरेश गुप्ता सहित कई अफसर शामिल हैं।

उधर, महिला बाल विकास में अपर संचालक सीमा सिंह, संयुक्त संचालक संध्या व्यास, विशाल नाडकर्णी, प्रज्ञा अवस्थी, अमिताभ अवस्थी, अक्षय श्रीवास्तव, स्कूल शिक्षा के प्रमोद सिंह, केके सिंह, धीरेंद्र चतुर्वेदी, डीएस कुशवाह के अलावा जनसंपर्क, आदिम जाति कल्याण, उच्च शिक्षा, उद्योग सहित अन्य विभागों के कई अधिकारी हैं जो आईएएस अवॉर्ड की पात्रता रखते हैं। गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के आईएएस में चयन के लिए साक्षात्कार की प्रक्रिया तो अपनाई ही जाती है, पांच साल का सर्विस रिकॉर्ड भी देखा जाता है।

मैं शपथ लेता हूं कि …. ” मैं चमचा हूं “

** व्यंग **

ध्यप़देश की राजनीति में चमचा पुराण की चर्चा वर्तमान समय में चरम पर पहुंच आम हो गई है न शर्म उनको आ रही जिन्होंने संविधान की शपथ ली है न शर्म उनको है जिनके चमचे बन मंत्री पद पर बैठ मंत्री जी मलाई खा रहे हैं.
हमारे देश की बिडंबना ही कहेंगे कि संविधान की शपथ ले उस संविधान को ताक पर रख निम्न दर्जे की बात कर मध्यप़देश के मंत्री आखिर क्या साबित करना चाहते हैं.
शायद इनको ये भी याद नहीं होगा शपथ में कौन से शब्द इन्होंने बोले थे और उनका मंतव्य क्या था. शब्द साफ हैं न किसी से राग न द्वेष न भय न पक्षपात केवल संविधान के प़ति वफादारी रहेगी.
हम फिर इन चमचा मंत्री जी को वो शब्द याद करवाते हैं जो इस प़कार हैं.


मैं,   ईश्वर की शपथ लेता हूं / सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा, मैं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूंगा, मैं… राज्य के मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और शुद्ध अंत:करण से निर्वहन करूंगा तथा मैं भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना, सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार कार्य करूंगा. ’    ………… “

उपर जो शपथ का प़ारुप है उसमें साफ लिखा है श्रद्धा और निष्ठा केवल संविधान के प़ति होगी न कि किसी के चमचा बन किसी और के प़ति तो यह चमचा पुराण साफ तौर पर जाहिर कर रहा है कि आप संविधान की शपथ लेकर संविधान की अवमानना कर रहे हैं. क्यों न ऐसे चमचा मंत्रियों को पद से अलग कर दिया जाये.
जनता इनको चुनती है और ये जनता और संविधान के प़ति वफादार न होकर खुले आम चमचा होने की घोषणा करने लगते हैं क्या यह सही है , इन लोगों की इन्ही हरकतों के कारण इनके आका आज सड़क पर हैं. इनके आका भी इनको कई बार हिदायत दे चुके हैं कि चरण वंदना और चमचा पुराण की परंपरा बंद करो पर ये हैं कि मानते नहीं हैं. आज ऐसे ही चमचा लोगों के कारण इनके आका की हालत ऐसी हो गई है कि घर के रहे न घाट के और इन सबसे उपर है हमारा संविधान और प़जातांत्रिक ढांचा इन चमचा मंत्रियों को अपनी संवैधानिक मर्यादाओं और सीमाओं का तो ख्याल रखना ही चाहिये. 2020 के समय जब सोशल मीडिया प़जातंत्र का मजबूत स्तंम्भ साबित हो रहा तब क्या यह सब उचित है इस पर विचार करने का दायित्व बुद्धिजीवी और जनता का है
लेखक:
सत्येंद़ सिंह रघुवंशी
चीफ एडीटर द न्यूजलाईट
97,मयूर नगर,ग्वालियर

अनुच्छेद 370 पर दिए भगोड़े जाकिर नाइक के बयान का मोदी-शाह खंडन क्यों नहीं करते: दिग्विजय सिंह

 

इंदौर. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह नेभगोड़े जाकिर नाइक के एक बयान का जिक्र करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी औरगृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। सिंह ने कहा कि जिस जाकिर नाइक को देशद्रोही करार देकर उस पर मुकदमे दायर किए गए हैं, उस जाकिर नाइक के विवादास्पदबयान का मोदी- शाह ने खंडन क्यों नहीं किया?

दिग्विजय सिंह ने कहा किजाकिर नाइक का हाल में बयान आया था, इसमें उसने कहा था कि मोदी- शाह के मध्यस्थ अधिकारियों ने सितंबर 2019 में उनसे संपर्क कर जम्मू-कश्मीर पर अनुच्छेद-370 हटाने के केंद्र सरकार के निर्णय का समर्थन करने की मांग की थी। जाकिर ने ये भी दावा किया था कि उन अधिकारियों ने370 हटाने कासमर्थन करने के एवज में उस पर लगे सभी मुकदमों कोहटाने और भारत वापसी में मदद करने का आश्वासन भी दिया था।

बुधवार को इंदौर में दिग्विजय द्वारा यह आरोप लगाने के पहले उन्होंने इसी मुद्देपर ट्वीट भी किया। जाकिर नाइक भारतीय जांच एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में भगोड़ाघोषित है।

भाजपा ने दिग्विजय पर लगाए थे आरोप
भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कांग्रेस और दिग्विजय सिंह पर जाकिर से संबंध रखने के आरोप लगाए थे। भाजपा प्रवक्ता ने कहा था कि जाकिर नाइक फाउंडेशन से कांग्रेस को डोनेशन मिलता रहा है। कांग्रेस और नाइक के बीच हमेशा से ही अच्छे संबंध रहे हैं।

2016 में मेलेशिया भाग गया था जाकिर
डॉक्टर जाकिर नाइक भारतीय जांच एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में भगोडा घोषित है। वह 2016 में भारत से भागकर मलेशिया चला गया था। मलेशिया सरकार ने जाकिर नाइक को स्थायी तौर पर रहने की इजाजत दे दी थी। जाकिर पर आरोप है कि उसने भारत में भड़काऊ भाषण दिए और युवाओं को आतंकी गतिविधि में शामिल होने के लिए भड़काया था।

वाराणसी के ‘काशी शुभांगी’ को वैज्ञानिकों ने बताया गुणकारी फल, इन बीमारियों से करता है रक्षा

वाराणसी: प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का काशी शुभांगी या छप्पन भोग कद्दू बड़े-बड़े गुणों से लबालब हैं. यह आमदानी बढ़ाने वाला तो है ही, स्वास्थ्य के लिए गुणकारी है. इसमें न सिर्फ किसानों को ताकत देने की क्षमता है, बल्कि स्वास्थ को भी दुरुस्त रखने की भी क्षमता है.

यह संभव किया है वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने. संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक सुधाकर पांडेय ने बताया कि छप्पन कद्दू कद्दूवर्गीय की महत्वपूर्ण सब्जी फसल ही नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से लबरेज है. छोटे पौधे वाला यह कद्दू बड़े-बड़े गुणों से भरा हुआ है. किसानों को आर्थिक मजबूती देने वाला यह पौधा औषधीय गुणों से भरपूर है. इसमें हाई डिसिज रिस्क, ब्लड प्रेशऱ, मोटापा कम करने की क्षमता है.

50 से 55 दिन में प्रथम तुड़ाई और लगातार 70 दिन तक फल देने वाली इस फसल में लगभग सभी प्रकार के विटामिन एवं खनिज तत्व हैं. इनमें मुख्य रूप से विटामिन ए (211 मिग्रा), विटामिन सी (20़.9 मिग्रा) तथा पोटैग्रायम (319 मिग्रा) एवं फॉस्फोरस (52 मिग्रा) मिलता है. यह प्रति 100 ग्राम फल में पाया जाता है. इतना ही नहीं, इस सब्जी में पोषक तत्वों की प्रचुरता है. आईआईवीआर में विकसित इस प्रजाति को खेत के अलावा गमले में भी लगाया जा सकता है.

भूमि की अच्छी तरह जुताई करें. 4-5 बार गहरी जुताई करके पाटा चलाएं. तैयार खेत में निश्चित दूरी पर बेड़ बनाएं. 3़5-4़5 किग्रा प्रति हेक्टेयर बीज को बुवाई से पहले फफूंदी नाशक दवा (2़5 ग्राम कैप्टान या 3.0 ग्राम थिरम) से उपचारित करें. पूर्वी उत्तर प्रदेश में फसल की बुआई सितंबर माह के द्वितीय पखवाड़े से लेकर नवंबर के प्रथम पखवाड़े तक करें. लोटनेल की सुविधा होने पर दिसंबर महीने में भी बुआई की जा सकती है.

खेत में उपयुक्त नमी न हो तो बुवाई के समय नाली में हल्का पानी लगाएं। बीज का जमाव अच्छा होगा. 10-15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहें। अच्छी पैदावार के लिए टपक सिचाई प्रणाली का उपयोग करें.

उन्होंने बताया कि फल कोमल एवं मुलायम अवस्था में तोड़े. 2-3 दिनों के अन्तराल पर फलों की तुड़ाई करें. छप्पन कद्दू की औसत उपज 325-350 कुंतल पति हेक्टेयर है. वैज्ञानिक खेती से लागत लाभ का अनुपात 1:3 का होता है.

एक फल 800-900 ग्राम का होगा. लंबाई 68-75 सेमी तथा गोलाई 21-24 सेमी होगी. प्रति पौधा औसतन 8-10 फल मिलेंगे. 325-350 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त होगा। एक हेक्टेयर में 7000-7500 पौधे लगाए जाते हैं.

31 जनवरी से शुरू होगा संसद का बजट सत्र, एक हाथ से देकर दूसरे हाथ से पैसे निकालेंगी वित्त मंत्री

उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने 31 जनवरी से संसद के बजट सत्र की बैठक बुलाई है। बजट सत्र के तीन अप्रैल 2020 तक जारी रहने की संभावना है। एक फरवरी को केन्द्र सरकार बजट पेश करेगी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश की खुशहाली का संकेत देते हुए एक हाथ से जनता को आर्थिक राहत देकर दूसरे हाथ से पैसे निकालेंगी। हालांकि देश के आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस बजट से अभी बहुत उम्मीद न की जाए, क्योंकि सरकार के हाथ बहुत तंग हैं। वहीं भाजपा के नेताओं का कहना है कि मोदी सरकार-2 के सत्ता में आने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह बजट काफी अच्छी सौगातें लेकर आएगा।

परंपरा के अनुसार हर साल संसद का पहला सत्र राष्ट्रपति संबोधित करते हैं। संसद के केन्द्रीय कक्ष में राज्यसभा और लोकसभा के सदस्यों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति अपनी सरकार के कामकाज, उसकी दशा-दिशा तथा भावी एजेंडे की रुपरेखा रखते हैं। इस बार भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 31 जनवरी को दिन में 11 बजे संसद के संयुक्त सदन को संबोधित करेंगे। राष्ट्रपति का यह अभिभाषण काफी अहम माना जा रहा है।

सीएए और एनपीआर के विरोध में अहम होगा राष्ट्रपति का अभिभाषण
31 जनवरी को राष्ट्रपति का अभिभाषण काफी अहम होगा। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून-2019 को देश भर में संसद और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद लागू किया है। इसके साथ-साथ केन्द्र सरकार राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकरण (एनपीआर) और जनसंख्या के सांख्यिकीय आंकड़े जुटाने को मंजूरी दे दी है। यह प्रक्रिया शुरू हो रही है। नागरिकता कानून और जनसंख्या पंजीकरण को लेकर देश के तमाम हिस्सों में विरोध हो रहा है। दिल्ली के शाहीन बाग में भी महिलाएं सत्याग्रह कर रही हैं। असम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल जैसे राज्य की सरकार इसका विरोध कर रही हैं। कई राज्य अपने यहां इसे न लागू करने की आवाज उठा रहे हैं। समझा जा रहा है कि राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद अपने अभिभाषण में इस पर प्रकाश डालेंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार-2 ने जम्मू-कश्मीर की वैधानिक स्थिति में बदलाव किया है। अनुच्छेद 370 को राज्य से हटाया, स्वतंत्र राज्य के दर्जे को समाप्त किया है और लद्दाख, जम्मू-कश्मीर को नया केन्द्र शासित प्रदेश बनाया है। सरकार ने यह बदलाव संसद और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद किया है। समझा जा रहा है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में इसे भी स्थान मिल सकता है।

तीसरा बड़ा मुद्दा देश के तमाम विश्वविद्यालयों में छात्रों के विरोध की स्थिति की है। दिल्ली के दो बड़े विश्वविद्यालयों के छात्र भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जेएनयू में फीस वृद्धि के विरोध में हिंसक प्रदर्शन हुआ तो जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में बिना कुलपति की अनुमति के प्रवेश कर पुलिस ने छात्रों पर कार्रवाई की। विश्वविद्यालय की कुलपति खुद इसको लेकर असहज हैं। समझा जा रहा है कि इस मुद्दे पर भी राष्ट्रपति प्रकाश डाल सकते हैं। देश के छात्रों से संयम बरतने, देश के विकास में योगदान देने की अपील कर सकते हैं।

राष्ट्रपति तीनों सेनाओं के सर्वोच्च सैन्य कमांडर हैं। केन्द्र सरकार ने तीनों सेनाओं में समन्य स्थापित करने, तालमेल बढ़ाने के लिए बहुप्रतीक्षित चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति करते हुए पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत को यह पद दिया है। राष्ट्रपति इस पर भी अपनी राय दे सकते हैं।

बजट में कितना कर पाती है सरकार?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने 2019-2024 के कार्यकाल में भारत को पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प लिया है। ऐसे में एक फरवरी को केन्द्र सरकार द्वारा पेश किया जा रहा बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लिए बड़ी चुनौती है। देश उच्च बेरोजागी के दौर से गुजर रहा है। औद्योगिक उत्पादन, रीयल स्टेट, अच्छा संकेत नहीं दे रहे हैं। सरकार का राजस्व भी अच्छा संकेत नहीं दे रहा है। राजकोषीय घाटा नई चेतावनी है। तमाम सरकारी विभाग और राज्य अपनी योजना, कार्यक्रमों के परिचालन में अधिक बजट की मांग कर रहे हैं।

आयकरदाता, घरेलू उद्योग, लघु, मझोले उद्योग, किसान, मजदूर, गांव सब अपने लिए राहत की उम्मीदें संजोए हैं। जीएसटी अब भी केन्द्र सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। बीएसएनएल, एमटीएनएल, एयर इंडिया, रेलवे जैसे संस्थान, देश के शिक्षण संस्थान सभी की उम्मीदें हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस तरह के हालात में अभी वित्त मंत्री से कोई बड़ी जादूगरी की उम्मीद करना बेमानी होगी। फिर भी देखना है कि वित्त मंत्री लोगों की उम्मीद पर कितना खरा उतर पाती हैं।,

PAK में बोले कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर- NRC पर मोदी-शाह में मतभेद

अपने विवादित बयानों के लिए सुर्खियों में रहने वाले कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने फिर से पाकिस्तान में भारत के आंतरिक मामलों पर चर्चा करके मुसीबत को आमंत्रित किया है. मणिशंकर अय्यर ने लाहौर में एक पैनल चर्चा के दौरान दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बीच एनपीआर और एनआरसी को लेकर मतभेद है.

मणिशंकर अय्यर ने कहा कि यह जोड़ी देश में हिंदुत्व का चेहरा है. मणिशंकर अय्यर सोमवार को पाकिस्तान के लाहौर में एक कार्यक्रम में थे, जिसमें पत्रकार नजम सेठी भी मौजूद थे.

मणिशंकर अय्यर ने कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर(एनपीआर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी नहीं माना कि यह राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर(एनआरसी) का उत्तराधिकारी है. संसद में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि एनपीआर एनआरसी का ही रूप होगा. वास्तविक रूप से एनपीआर ही एनआरसी है.

विवादित बयानों के लिए चर्चा में मणिशंकर अय्यर

इससे पहले मंगलवार को दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे मणिशंकर अय्यर ने एक विवादित बयान दिया था. शाहीन बाग मेंमणिशंकर अय्यर ने कहा था कि जो मैं आपके लिए कर सकता हूं वो मैं करने को तैयार हूं. मैं ये वादा करता हूं. अब देखें कि किसका हाथ मजबूत है, हमारा या उस कातिल का? मणिशंकर का इशाराप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की ओर था.

कई बार विवादित बयान दे चुके हैं मणिशंकर अय्यर

इससे पहले गुजरात विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव के दौरान उनके बयानों से अच्छा खासा सियासी बवाल मचा था. लोकसभा चुनाव के दौरान मणिशंकर अय्यर ने 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए अपने विवादास्‍पद बयान ‘नीच इंसान’ को सही ठहराते हुए एक लेख लिखा और पूछा क्या मैं सही नहीं था.

संयुक्त राष्ट्र / कश्मीर पर चीन-पाकिस्तान को फिर नाकामी मिली, भारत बोला- अच्छे रिश्तों के लिए सही मुद्दे उठाएं

न्यूयॉर्क. जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर चीन-पाकिस्तान को बुधवार को संयुक्त राष्ट्र मेंएक बार फिर नाकामी हाथ लगी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में चीन-पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर समर्थन जुटाने में असफल रहे। भारत ने कहा कि हमारे साथ संबंध बेहतर करने के लिए पाकिस्तान के लिए जरूरी है कि वह सही मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे। यूएनएससी के कई सदस्यों ने कहा कि कश्मीर, भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा है। लिहाजा, इसे दोनों देशों के बीच बातचीत से ही हल होना चाहिए।

बुधवार को चीन के दबाव में कश्मीर पर यूएनएससी की बैठक बुलाई गई। इस ‘क्लोज्ड डोर मीटिंग’ में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के अलावा किसी को शामिल नहीं किया जाएगा।

‘एक बार फिर उनकी हार हुई’
यूएन में भारत के प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, ‘‘हमने एक बार फिर देखा कि एक सदस्य देश की कोशिशों की हार हुई। ये हमारे लिए खुशी की बात है कि पाकिस्तान के प्रतिनिधि द्वारा कश्मीर में खतरे की स्थिति को नकार दिया गया। पाकिस्तान कश्मीर को लेकर लगातार आधारहीन आरोप लगाता रहा है। कई देशों का कहना है कि कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय तरीके से ही हल किया जाना चाहिए।’’

पिछली बैठक में पाकिस्तान को निराशा हाथ लगी
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के सहयोगी चीन ने इस बैठक के लिए दबाव बनाया। अगस्त में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटे जाने के बाद भी चीन ने इस मुद्दे पर यूएनएससी की बैठक बुलाई थी। हालांकि, तब चीन और पाकिस्तान को इससे कुछ भी हासिल नहीं हुआ, क्योंकि सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने इसे भारत का आंतरिक मुद्दा करार देते हुए कार्रवाई से इनकार कर दिया था। इसके बाद दिसंबर में भी चीन ने कश्मीर पर चर्चा कराने के लिए बैठक का आग्रह किया था, लेकिन तब बैठक नहीं हुई।

चीन के अलावा सभी सदस्य भारत के साथ
यूएनएससी में 5 स्थायी सदस्य देश हैं, जबकि 10 निर्वाचित सदस्यों का निश्चित कार्यकाल होता है। अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन इसके स्थायी सदस्य हैं। चीन के अलावा बाकी 4 सदस्य देश कश्मीर मुद्दे पर दखल देने से इनकार करते रहे हैं। भारत सरकार के रुख का समर्थन करते हुए इन देशों ने सभी विवाद भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत से सुलझाने को कहा है।

मंगलवार को कमलनाथ सख्त लहजे में बोले- हाउसिंग सोसायटियों की जांच करो, जरूरत पड़े तो कर लो टेकओवर

भोपाल। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को अफसरों पर सख्त तेवर अपनाए। भूमाफिया पर कार्रवाई, हाउसिंग सोसाटियों और आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी जताई। उन्होंने हाउसिंग सोसायटियों को लेकर कहा कि जनता की जीवनभर की पंूजी हड़प कर धोखाधड़ी करने वाली हाउसिंग सोसाटियों की जांच की जाए। इसमें दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। इसमें औपचारिकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राज्य मंत्रालय में जनाधिकार कार्यक्रम में कलेक्टर-कमिश्नरों से वीडियो कांफ्रेसिंग के दौरान उन्होंने कहा कि हाउसिंग सोसायटियों की जांच का बड़ा अभियान चलाया जाए। इस दौरान भोपाल कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने कहा कि ५०० से ज्यादा सोसायटी की हम जांच कर रहे हैं। इनमें २३ पर कार्रवाई की गई है, तो सीएम ने कहा कि भोपाल में जब इतना बड़ा भू-माफिया चलित है, तो पूरे प्रदेश में कितना होगा? कितने मिडल क्लास और लोअर मिडल क्लास के लोग इन मुसीबतों का सामना कर रहे होंगे? हालत एेसी है कि जनता तो इन समस्या को बताने में भी डरती होगी। जिन सोसायटी में ज्यादा गड़बड़ी हैं, उन्हें जरूरत पड़े तो टेकओवर कर लो। मुख्य सचिव को उन्होंने कहा कि इस पर अभियान चले। पुलिस एक्शन की भी रिपोर्ट दो।
अफसर कान खोलकर सुन लें, सख्त कार्रवाई करूंगा…
सीएम ने आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में बेहद खराब फीडबैक का हवाला देकर सख्त तेवर में कहा कि बड़े अफसर कान खोलकर सुन लें, कलेक्टर अपनी जिम्मेदारी तय कर लें। इसमें ढि़लाई पर अब सख्त कार्रवाई करूंगा। यह कार्यक्रम औपचारिकता बन गया है। इसमें कोई काम नहीं हो रहा। शिकायतें आ रही है कि कोई फॉलोअप नहीं है। बस, कागज लेकर रख लेते हो। इसलिए लिखकर रख लो कि अब इस कार्यक्रम में कोई लापरवाही न हो। काम का सोच व कल्चर बदल लो।
कार्रवाई में माफिया का अंतर जरूरी…
कमलनाथ ने कहा कि माफिया के खिलाफ कार्रवाई में कोई ढ़ील नहीं आनी चाहिए, लेकिन माफिया और सामान्य नियमों के उल्लंघन में अंतर किया जाए। निशाने पर माफिया होना चाहिए। माफिया पर कार्रवाई में दुश्मनी नहीं निकाली जाए। छोटे प्रकरणों पर कार्रवाई न की जाए। कम्पाउंडिंग के केस अलग रखे जाएं। उन्होंने कहा कि शुद्ध के लिए युद्ध में मिलावटी दवाओं के खिलाफ अभियान चलें।
४ कलेक्टर नहीं आए-
सीएम ने आते ही पूछा कि कितने कलेक्टर मौजूद नहीं है? इस पर पता चला कि पन्ना, शहडोल, बैतूल व बड़वानी कलेक्टर नहीं आए। इस पर सीएम ने नाराजगी जाहिर की।
ये भी अहम निर्देश-जो अफसर तबादले के बावजूद रिलीव नहीं, उन्हें तुरंत रिलीव किया जाए। इसमें सख्ती हो।

पीडीएस पर गुणवत्ता पर ध्यान दो। भंडारण की तैयारी समय पर हो।

वनाधिकार पट्टे में गलत तरीके से आवेदन रद्द न किए जाए। पात्रों को अनिवार्य रूप से पट्टे मिले।

सरकारी जमीन पर खेती करने वालों की सूची बनाई जाए। कहां क्या कार्य हो रहा है, इसकी एक महीने में सूची दो।

खाद की ब्लैक मार्केटिंग न हो सके। कर्जमाफी की सूची का डाटा क्रासचेक हो।
राशन की दुकानों में भारी गड़बड़ी-
कमलनाथ ने कहा कि राशन की दुकानों में बहुत गड़बड़ी हो रही है। ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें आ रही है। शुद्ध का युद्ध में कड़ी कार्यवाही की जरूरत है। नाबार्ड से कर्ज नहीं मिलने या बैंक से मंजूरी में देरी की शिकायतें हैं। इसमें देखा जाए कि लोगों को परेशान न किया जाए। नीमच में एक खदान की ब्लास्टिंग से पास की फसलें खराब होने की शिकायत आई, तो सीएम ने नाराज होकर कहा कि एेसी खदानें क्यों चल रही है। जो खदानंे आम जीवन को प्रभावित करें, वो तुरंत बंद होनी चाहिए।
दो अफसरों पर एक्शन-
शिवपुरी में गरीब व्यक्ति अपनी जमीन का कब्जा पाने में आठ साल परेशान रहा, इस पर सीएम ने कहा कि दोषियों पर तत्काल कार्रवाई हो। उन्होंने बुरहानपुर में किसान के गलत प्रकरण में बैंक मैनेजर और सीईओ जिला पंचायत को निलंबित करने के निर्देश दे दिए। भोपाल के एक प्रकरण में निराकरण में भारी देरी पर सीएम ने कहा कि क्या अधिकारी का निलंबन किया गया। सीधी में बीमा की राशि किसान को नहीं मिलने पर भी सीएम ने काफी नाराजगी जताई। कहा कि इस तरह की समस्या सीएम हेल्पलाइन में आने के पहले ही हल होनी चाहिए।

निर्भया कांड: गर्दन की नाप लेते ही फूट-फूट कर रोने लगे चारों दोषी, चुप कराने के लिए बुलाने पड़े काउंसलर

Nirbhaya Gang Rape: तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने निर्भया कांड के सभी चारों दोषियों के गले की नाप ली है. इस दौरान वे सभी फूट-फूट कर रोने लगे और जेल अधिकारियों (Tihar Jail) से गुहार लगाने लग

नई दिल्‍ली. निर्भया गैंगरेप और मर्डर (Nirbhaya Gang Rape & Murder) के चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने को लेकर लगातार अदालती प्रक्रिया चल रही है. निचली अदालत ने फांसी की तिथि 22 जनवरी मुकर्रर की है. हालांकि, इस जघन्‍य अपराध के दोषी सभी न्‍यायिक विकल्‍पों को आजमाने में जुटा है. इस बीच, तिहाड़ जेल में निर्भया के गुनहगारों को फांसी पर लटकाने की तैयारियां चल रही हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जेल प्रशासन ने चारों दोषियों के गले की नाप भी ले ली है. हालांकि, इस दौरान सभी दोषी (मुकेश सिंह, अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा और पवन गुप्‍ता) फूट-फूट कर रोने लगे. चारों दोषी जेल अधिकारियों से गुहार भी लगाने लगे.

बुलाने पड़े काउंसलर

अधिकारियों द्वारा गले की नाप लेते ही निर्भया कांड के सभी चारों दोषी फूट-फूट कर रोने लगे. हालात इतने बिगड़ गए कि जेल अधिकारियों को उन्‍हें चुप कराने और सांत्‍वना दिलाने के लिए काउंसलर तक बुलाना पड़ा टाईम्स आफ इंडिया  में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, काउंसलर की इसलिए मदद लेनी पड़ी की ये लोग कोई गलत कदम न उठा लें. सूत्रों ने बताया कि डमी फांसी के दौरान रेत के बोरों का इस्‍तेमाल किया गया, जिसका भार दोषी के वजन से तकरीबन डेढ़ गुना ज्‍यादा था.

अधिकारियों द्वारा गले की नाप लेते ही निर्भया कांड के सभी चारों दोषी फूट-फूट कर रोने लगे. हालात इतने बिगड़ गए कि जेल अधिकारियों को उन्‍हें चुप कराने और सांत्‍वना दिलाने के लिए काउंसलर तक बुलाना पड़ा  टाईम्स आफ इंडिया  में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, काउंसलर की इसलिए मदद लेनी पड़ी की ये लोग कोई गलत कदम न उठा लें. सूत्रों ने बताया कि डमी फांसी के दौरान रेत के बोरों का इस्‍तेमाल किया गया, जिसका भार दोषी के वजन से तकरीबन डेढ़ गुना ज्‍यादा था.

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट से खारिज हो चुकी है याचिका

निर्भया कांड के दोषी सभी संभावित कानूनी विकल्‍पों को आजमा रहे हैं. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से इन दोषियों की याचिका तीन बार खारिज हो चुकी है. निचली अदालत और हाई कोर्ट द्वारा फांसी पर रोक लगाने वाली अर्जी ठुकराए जाने के बाद इन दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था. इसके बाद इन्‍होंने रिव्‍यू पिटीशन दायर की थी जो खारिज हो गई थी. इसके बाद चार में से एक दोषी ने क्‍यूरेटिव याचिका दाखिल की थी. शीर्ष अदालत ने उनकी यह याचिका भी ठुकरा दी थी. इसके बाद दोषियों में से एक मुकेश ने डेथ वारंट को दिल्‍ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. उच्‍च न्‍यायालय ने उन्‍हें ट्रायल कोर्ट जाने का आदेश दिया है.