गुटखा कंपनियों पर स्टेट जीएसटी और ईओडब्ल्यू का छापा; 100 करोड़ का मिलावटी गुटखा पकड़ा

भोपाल. राजधानी के गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार को तीन गुटखा कंपनियों के कारखानों पर स्टेट जीएसटी, खाद्य विभाग, बिजली विभाग और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की संयुक्त कार्रवाई की गई है। इन कारखानों में 100 करोड से अधिक की मिलावटी सामग्री, गुटखा बनाने की मशीनें जब्त की गई हैं। साथ ही 500 से ज्यादा बाल मजदूर भी काम करते पाए गए हैं।

ईओडब्ल्यू एसपी अरुण कुमार मिश्रा ने बताया कि कर चोरी मामले में अल सुबह गोविंदपुरा क्षेत्र स्थित तीन गुटखा कंपनियों में छापा मारा गया है। इस छापे में कंपनियों में लगभग 5 करोड़ रुपए कीमत का मिलावटी गुटखा पाया गया, जिसे देश के अलग-अलग स्थानों पर भेजने की तैयारी थी। उन्होंने बताया कि कंपनी में लगी मशीन में छेड़छाड कर तय सीमा से अधिक उत्पादन कर कंपनी द्वारा टैक्स चोरी भी की जा रही थी। वहीं बिजली की चोरी करने का मामला सामने आया है। बिजली चोरी कर गुटखा कारखानों में दिन रात उत्पादन किए जाने की भी बात सामने आई है। बिजली चोरी कितनी हुई है। इसका आकलन भी किया जा रहा है।

500 करोड़ की कर चोरी का मामला 
गोविंदपुरा में गुटखा कंपनियों के खिलाफ गुटखा की खुले बाजार में बिक्री करने की लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों पर ईओडब्ल्यू ने सभी प्रकार की गोपनीय जानकारी एकत्र करने के बाद छापामार कार्रवाई की रणनीति तैयार की थी। गुटखा कारखानों पर की गई संयुक्त कार्रवाई में करीब 500 करोड़ रूपए की कर चोरी करने का मामला भी सामने आया है।

ये हैं गुटका कंपनियां

छापामार कार्रवाई राजश्री गुटखा, कमला पसंद गुटखा और ब्लैक लेबल गुटखा पर की गई है। उत्पादन कर चोरी, बिजली चोरी के साथ सरकार को विभिन्न करों की चोरी की शिकायतें लगातार मिल रही थीं।

जम्मू-कश्मीर में जारी पाबंदियों की एक हफ्ते के अंदर समीक्षा हो, जहां जरूरत वहां इंटरनेट शुरू किया जाए : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद इंटरनेट बैन और लॉक डाउन के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज (शुक्रवार) फैसला सुनाया. जस्टिस एनवी रमणा, जस्टिस सुभाष रेड्डी और जस्टिस बीआर गवई की संयुक्त बेंच ने इस मामले में फैसला सुनाया. जस्टिस रमना ने फैसला पढ़ते हुए कश्मीर की खूबसूरती का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कश्मीर ने बहुत हिंसा देखी है. इंटरनेट फ्रीडम ऑफ स्पीच के तहत आता है. यह फ्रीडम ऑफ स्पीच का जरिया भी है. इंटरनेट आर्टिकल-19 के तहत आता है. नागरिकों के अधिकार और सुरक्षा के संतुलन की कोशिशें जारी हैं. इंटरनेट बंद करना न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है. जम्मू-कश्मीर में सभी पाबंदियों पर एक हफ्ते के भीतर समीक्षा की जाए.

अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि धारा 144 लगाना भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है. सरकार 144 लगाने को लेकर भी जानकारी सार्वजनिक करे. समीक्षा के बाद जानकारी को पब्लिक डोमेन में डालें ताकि लोग कोर्ट जा सकें. सरकार इंटरनेट व दूसरी पाबंदियों से छूट नहीं पा सकती. केंद्र सरकार इंटरनेट बैन पर एक बार फिर समीक्षा करे. इंटरनेट बैन की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए. पाबंदियों, इंटरनेट और बुनियादी स्वतंत्रता की निलंबन शक्ति की एक मनमानी एक्सरसाइज नहीं हो सकती.

कोर्ट ने अपने फैसले में सभी इंटरनेट सेवाओं के निलंबन के निर्देश और सभी सरकारी और स्थानीय निकाय वेबसाइटों की बहाली का आदेश दिया जहां इंटरनेट का दुरुपयोग न्यूनतम है. कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट पर अनिश्चितकाल के लिए प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता. जहां जरूरत हो वहां फौरन इंटरनेट बहाल हो. कोर्ट ने कहा कि व्यापार पूरी तरह से इंटरनेट पर निर्भर है और यह संविधान के आर्टिकल-19 के तहत आता है. कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट को धारा 144 के तहत पाबंदियों के आदेश देते समय नागरिकों की स्वतंत्रता और सुरक्षा को खतरे की अनुपालिका को देखकर विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए. बार-बार एक ही तरीके के आदेश जारी करना उल्लंघन है.

अदालत ने कहा कि इंटरनेट का अनिश्चितकालीन निलंबन स्वीकार्य नहीं है. धारा 144 सीआरपीसी के तहत बार-बार आदेश देने से सत्ता का दुरुपयोग होगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार को प्रतिबंधों के सभी आदेशों को प्रकाशित करना चाहिए और कम प्रतिबंधात्मक उपायों को अपनाने के लिए अनुपातिकता के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए. कोर्ट ने यह कहते हुए शुरू किया कि न्यायालय ने प्रतिबंधात्मक आदेशों के पीछे राजनीतिक मंशा पर वह नहीं गया है. हमारी सीमित चिंता सुरक्षा और लोगों की स्वतंत्रता के संबंध में एक संतुलन खोजना है. हम केवल यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि नागरिकों को उनके अधिकार प्रदान किए जाएं. कश्मीर में बहुत हिंसा हुई है. हम सुरक्षा के मुद्दे के साथ मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को संतुलित करने की पूरी कोशिश करेंगे.

अदालत ने इस दौरान जिन प्रमुख बातों पर जोर दिया वह है, संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में इंटरनेट का अधिकार शामिल है. इंटरनेट पर प्रतिबंधों पर अनुच्छेद 19 (2) के तहत आनुपातिकता के सिद्धांतों का पालन करना होगा. अनिश्चितकाल के लिए इंटरनेट का निलंबन मंजूर नहीं है. यह केवल एक उचित अवधि के लिए हो सकता है और वक्त-वक्त पर इसकी समीक्षा की जानी चाहिए. सरकार को पाबंदी के सभी आदेशों को प्रकाशित करना चाहिए ताकि प्रभावित लोग अदालत जा सकें. धारा 144 सीआरपीसी के तहत निषेधाज्ञा आदेश असंतोष जताने पर नहीं लगाया जा सकता. धारा 144 के तहत आदेश पारित करते समय मजिस्ट्रेट को व्यक्तिगत अधिकारों और राज्य की सुरक्षा के हितों को संतुलित करना चाहिए.

गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्र शासित राज्यों में बांट दिया गया था. जम्मू-कश्मीर में तब से इंटरनेट बंद है. सिर्फ ब्रॉडबैंड से ही संपर्क कायम है. सरकार ने लैंडलाइन फोन और पोस्टपेड मोबाइल सेवा भी हाल में ही शुरू की है. विपक्षी दल जम्मू-कश्मीर के हालातों को लेकर मोदी सरकार पर हमलावर हैं. पाकिस्तान भी इस मुद्दे को लेकर विदेशी मंच पर भारत को घेरने की कोशिश करता आ रहा है. हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के मुनीर अकरम ने घाटी के हालातों को लेकर भारत पर कई आरोप लगाए. जिसके बाद UN में भारत के प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने उन्हें करारा जवाब देते हुए कहा कि पाकिस्तान को भारत के खिलाफ झूठ फैलाना बंद कर देना चाहिए. वह भारत के खिलाफ झूठी कहानियां गढ़ता है. ऐसा कर वह अपनी परेशानी को छुपाने की कोशिश करता है. आज पाकिस्तान बुराई का प्रतीक बन चुका है.

MP में गांव-गांव में खुलेंगी शराब की दुकानें, पूर्व सीएम शिवराज बोले- ‘मध्यप्रदेश का नाम बदलकर ‘मदिराप्रदेश’ कर दें…’

मध्य प्रदेश में पांच साल बाद शराब की दुकानों की संख्या बढ़ेंगी. आबकारी विभाग ने मामूली लाइसेंस फीस देकर शराब की उप-दुकानें खोलने की अधिसूचना जारी की है. कमलनाथ सरकार ने शराब ठेकेदारों को शहरी क्षेत्र में पांच और ग्रामीण इलाकों में 10 किलोमीटर के दायरे में उप-दुकान खोलने की अनुमति दे दी है. इस फैसले पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ सरकार पर तंज कंसा है.

बीजेपी के स्टेज स्पोकपर्सन रजनीश अग्रवाल ने ट्वीट करते हुए लिखा, ”कांग्रेस सरकार की सौगात. बड़ी दुकान, छोटी दुकान इसके नीचे उप-दुकान. बताओ अब कुल कितनी दुकान. मध्यप्रदेश कें गांव-गांव होगी शराब दुकान. मालवा की कहावत है- ”पग-पग रोटी डग-डग नीर” के स्थान पर अब ”पग-पग दारू हर पल दारू?” उनके इस ट्वीट को रि-ट्वीट करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, ”सही कहा… रजनीश जी, मुझे लगता है थोड़े दिनों में कमलनाथ जी एक और सरकारी फ़रमान जारी कर मध्य प्रदेश का नाम बदल कर ‘मदिराप्रदेश’ कर देंगे!”

शिवराज सिंह चौहान ने फिर इस फैसले की आलोचना करते हुए तीन ट्वीट किए और कमलनाथ सरकार से तत्काल अधिसूचना वापिस लेने की मांग की. उन्होंने कहा, ”मैंने मुख्यमंत्री कमलनाथ जी से शराब की दुकानें न खोलने की अपील की है. चिट्ठी लिखकर भी अपील कर रहा हूं कि शराब की उप-दुकानें खोलने का यह फैसला प्रदेश को तबाह और बर्बाद करने वाला है. यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो हम जनता के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे.”

बता दें, सरकार ने ये कदम शराब की अवैध बिक्री पर रोक लगाने और राजस्व नुकसान के मद्देनजर उठाया है. उप दुकान के लिए फीस के तीन स्लैब बनाए गए हैं, जिसमें 15, 10 और 5 प्रतिशत राशि देने के बाद कारोबारी उप दुकान खोल सकेगा.

राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल के आदेशों की शिवपुरी जिले में अवहेलना


संपादक करुणेश शर्मा की रिपोर्ट
शिवपुरी जिले में शिक्षा विभाग की ओर से राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल के आदेशों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है राज्य शासन के राज्य शिक्षा केंद्र के आदेश अनुसार शिक्षकों से शिक्षा के अलावा गैर शैक्षिक कार्य ना कराए जाएं ऐसा आदेश भोपाल से पहले ही हो चुका है किंतु जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा आदेशों की अवहेलना करके शिक्षा विभाग की स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों को बीएलओ बनाना बीपीएल कार्ड का सर्वे करना ऑफिसों में अटैच करना जैसे गैर शिक्षण के कार्य कराए जा कर राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल के आदेशों की खुली अवहेलना की जा रही है जबकि शिक्षक पहले ही शासन के आदेश अनुसार स्कूल की गतिविधियों की जानकारी देने को लेकर अत्यधिक व्यस्त हैं ऐसे व्यस्त कार्यक्रम में बच्चों को घर से लाकर पढ़ाने तक का कार्य शिक्षा विभाग के शिक्षक कर रहे हैं उसी समय शिक्षकों से गैर शिक्षण कार्यक्रम करवाना न सिर्फ आदेशों की अवहेलना है बल्कि मानवी भी है.
यहां पर शिक्षा विभाग का ऐसा अजीब नमूना देखने को मिला है कि जिस शाला में 2 शिक्षक हैं उन्हीं में से एक शिक्षक को बीएलओ बनाकर गैर शिक्षण का कार्य दे दिया गया है वह दूसरे शिक्षक को विभाग ट्रेनिंग करवा रहा है ऐसी हालत में बच्चों को कौन पढ़ आएगा यह प्रशासन से पूछा जाए जबकि अन्य जिलों में जिलाधीश होने शिक्षकों से शिक्षा के अलावा कोई भी गैर शिक्षीय कार्य नहीं करा रहे हैं किंतु शिवपुरी जिला इस मामले में एक मिसाल कही जा सकती है आपको शिवपुरी जिले में एक बात और देखने को मिलेगी कि यहां पर सातवें वेतनमान का द्वितीय किस्त अभी तक कर्मचारियों को नहीं मिली है इसी प्रकार 2 परसेंट डीए जो शासन द्वारा बनाया गया था उसका भी भुगतान शिक्षकों को अभी तक नहीं किया गया है इसी प्रकार 24 साल वाला समय मान वेतनमान का भुगतान आज दिनांक तक नहीं किया गया है.
30 साल पूर्ण करने पर शिक्षकों को जो समय मान वेतनमान दिया जाता है उसकी भी फाइल है शिक्षा विभाग में धूल खा रही हैं शिक्षकों का इस प्रकार का शोषण शिवपुरी में ही देखा जा सकता है यहां पर शिक्षक विभागीय प्रशिक्षण राज्य सरकार के कर्मचारियों द्वारा किया जाने वाला चेकिंग अभियान के अध्यक्ष के कार्य जैसे बीएलओ बनाना बीपीएल कार्डों की जांच करना इत्यादि इतना अधिक बोझ शिक्षकों पर डाल दिया गया है कि वह बच्चों को कब पढ़ाएंगे यह समझ से परे है एसी कमरों में बैठकर प्लानिंग करना बहुत आसान है इस कारण शिक्षक विभागीय उलझनों में उलझे हुए दिखाई देते हैं बच्चों को पढ़ाने का वक्त कब मिलेगा यह मुख्यमंत्री जी से सवाल है कृपया मुख्यमंत्री महोदय शिक्षकों पर बच्चों को पढ़ाने के अलावा किसी प्रकार का बोझ ना डालें जिससे शिक्षकों का 100% मेहनत पढ़ाई पर करें जिससे बच्चों का भविष्य उज्जवल हो सके और स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ सके.
मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष श्री अनिल गुप्ता एवं कर्मचारी नेता सुशील जी ने बताया की शिक्षकों पर इस समय इतना बोल शासन ने डाल दिया है कि उनको पढ़ाने के लिए शिक्षकों पर समय ही नहीं है हर माह कम से कम चार प्रशिक्षण विभाग द्वारा करवाए जा रहे हैं इसके अलावा विभागीय जानकारियों का बोझ जिनको समय सीमा में देना होता है उसके बाद प्रशासन की मॉनिटरिंग को फेस करना इन सारे कार कारणों से शिक्षकों का मानसिक संतुलन डामाडोल हो चुका है इस कारण वह चाहते हुए भी बच्चों को पढ़ाने के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं इसके अलावा नेता द्वय ने कहा किस शिक्षकों के भुगतान इत्यादि समस्या के लिए हम कई बार ज्ञापन कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी को दे चुके हैं किंतु शिक्षकों के भुगतान सम्मेद संबंधी निराकरण विभाग ने आज दिनांक तक नहीं किया है.
इसी प्रकार युक्तियुक्त करण में डाले गए 60 शिक्षक जो शिवपुरी शहर में पदस्थ हैं उन्हें गैर शैक्षिक कार्य में नहीं लगाया जा रहा है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय पर 2 शिक्षक हैं जिनमें से एक शिक्षक को गैर शैक्षिक कार्य में लगाया गया है जबकि दूसरा शिक्षक विभागीय ट्रेनिंग कर कर विभाग की जानकारियां दे रहा है ऐसे उदाहरण कई विद्यालयों में देखे जा सकते हैं.
कर्मचारी नेता अनिल गुप्ता एवं सुशील जी ने बताया कि प्रभारी प्रधानाध्यापक इस समय सबसे ज्यादा समस्या से जूझ रहे हैं उन्हें विभागीय ट्रेनिंग भी करनी होती है विभाग की जानकारी भी देनी होती है और बच्चों को भी पढ़ा ना होता है इन सारी परिस्थितियों से जूझते हुए प्रभारी प्रधानाध्यापक सिर्फ अकेला इसका शिकार हो रहा है क्योंकि साथी शिक्षक ना तो प्रधानाध्यापक को सहयोग करते हैं ना ही जानकारी बनाने में मदद करते हैं ना ही विद्यालय समय पर आते हैं ना ही विद्यालय से समय पर जाते हैं इन शिक्षकों की जवाबदारी शासन को विद्यालय के प्रति तय करनी होगी बल्कि ऐसा नियम बनाया जाना चाहिए कि प्रभारी प्रधानाध्यापक का चार्ज प्रतिवर्ष हर शिक्षक को दिया जाए जिससे विद्यालय के मैनेजमेंट में कसावट आएगी व प्रत्येक शिक्षक विद्यालय के लिए जवाबदार होगा अभी सारी जवाबदारी आ प्रभारी प्रधानाध्यापक की ही रहती हैं यह शासन को प्रभारी प्रधानाध्यापक हटाकर स्थाई प्रधानाध्यापक बनाने होंगे क्योंकि प्रभारी प्रधानाध्यापक को ना तो आर्थिक लाभ है.
इसके अलावा प्रभारी प्रधानाध्यापक बच्चों को पढ़ाने के लिए कब वक्त निकालेगा यह विचारणीय प्रश्न है.
सरकारी नीतियों का पालन करने में शिक्षक कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं किंतु फिर भी वह हर समय शासन प्रशासन के निशाने पर रहते हैं इसके अलावा विकलांग शिक्षक कर्तव्य का पालन करने में कोताही बरतते हुए.
देखे जा सकते हैं वह अपनी विकलांगता के आधार पर ना तो विभागीय ट्रेनिंग करते हैं ना बच्चों को पढ़ाने में रुचि लेते हैं कलेक्टर महोदय को इस दिशा में गंभीर जांच की दरकार है. जिलाधीश महोदय ने पूरी इमानदारी से विद्यालयों में कसावट लाने की कोशिश की है जिसमें वह काफी हद तक सफल भी हुई हैं किंतु राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल की नीतियों को बदलना आवश्यक है क्योंकि इन नीतियों में शिक्षकों पर अत्यधिक बोझ डाल दिया गया है जिससे उनका ध्यान बच्चों को पढ़ाने में कम कागजी कोठे को पूरे करने में लगा रहता है यह विद्यालयों में अक्सर देखा जा सकता है. जिलाधीश महोदय से अनुरोध है की शिक्षकों के भुगतान संबंधी प्रकरणों को गंभीरता से निपटाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी शिवपुरी को निर्देशित करें.

भारत व रूस के संबंधों पर अमेरिका का आया बड़ा बयान.

अमेरिका ने कहा है कि भारत व रूस के बीच ऐतिहासिक रिश्ते हैं. रक्षा मामलों में दोनों देश पुराने साझीदार रहे हैं. अमेरिका उन रिश्तों को खराब किए बिना भारत के साथ काम करने की बात कर रहा है. दरअसल, अमेरिका ने पहले रूस से भारत के एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद मामले पर बयान दिए थे. अब उसके रुख में बदलाव होता दिख रहा है….


अमेरिका ने कहा है कि वह भारत और रूस के ऐतिहासिक रिश्तों के बावजूद नई दिल्ली पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता। विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका ऐसा रास्ता निकालना चाहता है, जिससे रक्षा मामलों में भारत की रूस पर निर्भरता से कोई फर्क न पड़े और हम दोनों देश साथ काम जारी रखें। भारत ने दिसंबर 2018 में रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने का समझौता किया था। अमेरिका ने उस वक्त भारत को प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी। हालांकि, अब तक ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

अधिकारी ने कहा कि नई दिल्ली ने मॉस्को से समझौता किया है उसका यह मतलब नहीं कि हमने उसे कोई छिपी हुई छूट दो रखी है। हालांकि, प्रतिबंध लगाने से पहले हर मामले को अलग तरह से देखा जाएगा। वॉशिंगटन नहीं चाहता कि भारत की रक्षा क्षमताएं कहीं से भी कमजोर हों। अफसर ने कहा कि काट्सा के तहत लगने वाले प्रतिबंध किस पर लग रहे हैं, इस पर भी विचार होता है। इस मामले में हमारे पास कई विकल्प मौजूद हैं। इसलिए हम भारत को इन प्रतिबंधों से बचाने के लिए रास्ता निकालना चाहते हैं। अमेरिकी संसद ने 2017 के रक्षा बजट में भारत को प्रमुख रक्षा सहयोगी का दर्जा दिया था। अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि आप देख सकते हैं, अमेरिका दुश्मनों से समझौता करने वालों पर कैसी कार्रवाई कर रहा है।

अधिकारी का कहना है कि हमने अपने नाटो पार्टनर तुर्की को भी एस-400 खरीदने के लिए कड़ा संदेश दिया है। अमेरिका ने हाल ही में रूस से रक्षा समझौता करने के लिए तुर्की को लॉकहीड मार्टिन के एफ-35 फाइटर जेट बेचने पर रोक लगाई थी। एस-400 मिसाइल सिस्टम 400 किलोमीटर के दायरे में आने वाली मिसाइलों और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भी खत्म कर देगा। एस-400 डिफेंस सिस्टम एक तरह से मिसाइल शील्ड का काम करेगा, जो पाकिस्तान की एटमी क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से भारत को सुरक्षा देगा। यह सिस्टम अमेरिका के सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट एफ-35 को भी गिरा सकता है। वहीं, 36 परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों को एकसाथ नष्ट कर सकता है।

जिस होटल में ठहरे राष्ट्रपति- वहीं होने वाली थी विदेशी महिला की शादी, और फिर हुआ कुछ ऐसा

जिस होटल में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ठहरने वाले थे उसी में एक विदेशी महिला की शादी होने वाली थी। राष्ट्रपति ने महिला को शुभकामनाएं दीं और उसकी परेशानी दूर करने के लिए खास कदम उठाया।

जिस होटल में ठहरे राष्ट्रपति- वहीं होने वाली थी विदेशी महिला की शादी, और फिर हुआ कुछ ऐसा
नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के कार्यालय के हस्तक्षेप से एक विदेशी दुल्हन की मंगलवार को यहां के एक होटल में शादी हो सकेगी। राष्ट्रपति कार्यालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राष्ट्रपति के यहां के एक होटल में ठहरने के दौरान उसी होटल में हो रही शादी किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होनी चाहिए। महिला ने रविवार को राष्ट्रपति भवन से ट्विटर पर शादी तय कार्यक्रम के मुताबिक होने में सहयोग की अपील की थी। राष्ट्रपति ने मंगलवार को ताज विवांता में होने वाली शादी के लिए महिला को शुभकामनाएं भी दीं।

राष्ट्रपति के मंगलवार को लक्षद्वीप दौरे के दौरान रात में उनके होटल में ठहरने को देखते हुए एश्ले हॉल की शादी में समस्या दिखाई पड़ रही थी जिसके बाद उन्होंने ट्विटर पर राष्ट्रपति भवन को टैग करते हुए मदद की अपील की थी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कोविंद का सचिवालय तुरंत हरकत में आया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि उनकी सुरक्षा के कारण हॉल की शादी प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

सूत्रों के मुताबिक महिला अमेरिकी है। शादी कुछ महीने पहले होटल में होनी तय हुई थी। बाद में उन्हें पता चला कि उसी होटल में सोमवार की रात कोविंद ठहरेंगे। भावी दुल्हन ने ट्वीट करते हुए सुचारू रूप से अपनी शादी के लिए सहयोग मांगा।
राष्ट्रपति भवन ने उनके ट्वीट को देखते ही हस्तक्षेप किया।

नगर के शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने स्थिति का आकलन किया और व्यवस्था सुनिश्चित की कि राष्ट्रपति का दौरा और विदेशी महिला की शादी बिना बाधा के साथ- साथ हो सके। ट्विटर के माध्यम से जवाब देते हुए राष्ट्रपति भवन ने कहा, ‘हमें खुशी है कि मुद्दे का समाधान हो गया है। राष्ट्रपति कोविंद खुशी के इस मौके पर आपको शुभकामनाएं देते हैं।’

इसके बाद महिला ने राज्य के अधिकारियों और होटल के कर्मचारियों को धन्यवाद दिया और उम्मीद जताई कि ‘सम्मानीय’ राष्ट्रपति के आशीर्वाद से उसकी शादी हो सकी। होटल ने महिला और उसकी शादी के बारे में विस्तार से जानकारी देने से इंकार कर दिया।

. ज्योतिरादित्य को राज्यसभा नहीं जाने देंगे दिग्विजय भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा.

भोपाल. मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। अटकलें लगाई जा रही हैं कि अप्रैल में ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभी भेजा जा सकता है। लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के राज्यसभा भेजे जाने की अटकलों पर भाजपा ने हमला बोला है। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को जो हश्र कांग्रेस की सरकार में हुआ है उतना हश्र तो अंग्रेजों के शासनकाल में भी नहीं हुआ है। रामेश्वर शर्मा ने कहा- कांग्रेस सिंधियाजी को राज्यसभा भेजने का झूठा आश्वसन दे रही है।
दिग्विजय नहीं जाने देंगे राज्यसभा
रामेश्वर शर्मा ने कहा- कांग्रेस ने सिंधियाजी को राज्यसभा का लॉलीपाप दे दिया है लेकिन फिर राजा उठेगा और कोई नया खेल-खेल जाएगा। बता दें कि मध्यप्रदेश की सियासत में ज्योतिरादित्य सिंधिया को महाराजा और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को राजा के नाम से संबोधित किया जाता है। रामेश्वर शर्मा ने दिग्विजय सिंह का नाम लिए बिना ही कहा कि राजा सिंधिया के खिलाफ कोई नया गेम खेलेंगे और सिंधिया राज्यसभा की दौड़ से बाहर हो जाएंगे।
कमलनाथ नहीं देखते सिंधिया का लेटर
रामेश्वर शर्मा ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ हमार सहानुभूति है। ज्योतिरादित्य सिंधिया की जितनी उम्र हो गई वो कमलनाथ को उतने लेटर लिख चुके हैं। लेकिन दादा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के किसी लेटर को देखता हूं नहीं है। बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया हाल ही में सीएम कमलनाथ को कई लेटर लिखे हैं। इन लेटरों को सिंधिया ने ट्विटर पर शेयर भी किया था।
सिंधिया को राज्यसभा भेजने की अटकलें
बता दें कि अप्रैल में मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। इन तीन सीटों में से दो सीटें कांग्रेस के पक्ष में जाने की संभावना है। क्योंकि राज्य में इस बार कांग्रेस की सरकार है और भाजपा के मुकाबले कांग्रेस की सीटें ज्यादा हैं। अटकलें लगाई जा रही हैं एक सीट में दिग्विजय सिंह रिपीट हो सकते हैं तो एक सीट में ज्योतिरादित्य सिंधिया को भेजा जा सकता है। बता दें कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद सिंधिया के पास कोई बड़ा पद नहीं है।

कांग्रेस सरकार को शिवराज की चेतावनी- कैलाश विजयवर्गीय की गिरफ्तारी हुई तो…

शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ सरकार पर साधा निशाना.
इंदौर. भारतीय जनता पार्टी के राष्‍ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) पर एफआईआर (FIR) के बाद गिरफ्तारी की तलवार लटकने से सियासी घमासान तेज होता जा रहा है. इस मामले को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं. जबकि आज इंदौर पहुंचे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने कांग्रेस सरकार को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि कैलाश विजयवर्गीय तो महासचिव हैं किसी भी कार्यकर्ता को दबाने की कोशिश की तो पूरा प्रदेश सड़कों पर उतरेगा और एक जन आंदोलन होगा. शिवराज ने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय के बाद मैं भी आंदोलन की आग लगाने की बात कह रहा हूं.

कांग्रेस पर शिवराज ने लगाया ये आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सत्ता के मद में मध्य प्रदेश की सरकार चूर हो गई है. ये लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश की जा रही है. यदि जनता की आवाज उठाई जाती है तो क्या मुकदमे दर्ज किए जाएंगे. एफआईआर लिखी जाएंगी. कितनों के खिलाफ एफआईआर करेंगे. आपके एफआईआर करते करते हाथ थक जाएंगे, लेकिन लड़ने वालों की कमी नहीं आएगी. मैं सीएम कमलनाथ को चेतावनी देना चाहता हूं कि ये अन्याय की अति है और जुर्म की पराकाष्ठा है. यदि कैलाश विजयवर्गीय जैसे वरिष्ठ नेता सांसद और विधायकों के साथ इंदौर की जनता की समस्याओं के लिए अधिकारियों से समय मांगते हैं तो अफसरों के पास समय नहीं है, फिर अफसर किस काम के लिए हैं. क्या जनता की आवाज नहीं सुनी जाएगी. क्या जननेता अनदेखा किए जाएंगे और यदि धरना दे दे तो मुकदमा बनाए जाएंगे. लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत जनता की है. यदि दमन करने कोशिश की गई तो आपका ताज बचेगा नहीं बल्कि जमीन पर आ जाएगा. जनता के हितों पर कुठाराघात होगा तो हमारे नेता और कार्यकर्ता उनकी लड़ाई लडेंगे.

रेत, परिवहन और शराब माफियाओं पर कार्रवाई करे सरकार

चौहान ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को माफियाओं पर कार्रवाई करना है तो रेत माफिया पर कार्रवाई करे, वे खुलेआम लूट रहे हैं. इसमें मंत्री भी शामिल हैं. ट्रांसपोर्ट माफिया के खिलाफ कार्रवाई करो, महाराष्ट्र से मध्य प्रदेश में घुसते ही वाहनों से 7-7 हजार रुपए अवैध रूप से वसूले जा रहे हैं. शराब माफियाओं पर कार्रवाई नहीं की जा रही है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने भी माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाया था. माफियाओं को कुलचने में न हमने कसर छोड़ी, न हम समर्थन में कसर रखेंगे, लेकिन माफिया की आड़ में हम आम आदमी को नहीं कुचलने देंगे.

इंदौर की तिरंगा रैली को नहीं मिली अनुमति

नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में इंदौर में होने वाली बीजेपी की रैली को प्रशासन अनुमति न मिलने पर पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने नाराजगी जाहिर की है. उन्हो़ने कहा कि उज्जैन में भी रैली को अनुमति नहीं दी गई थी, इसलिए ये रैली रैला में बदल गई. रतलाम मे भी रैली हुई है और इंदौर में भी 12 जनवरी को तिरंगा यात्रा निकलेगी. जनता के सैलाब को रोकना सत्ता के बस में नहीं है. सरकार के अहंकार को हम चूर कर देंगे. बीजेपी इस रैली में दो लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटाने का दावा कर रही है और इसकी तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं. चिमनबाग मैदान से राजबाड़ा तक निकालने वाली इस रैली में तिरंगा हाथ में लेकर लोग चलेंगे, लेकिन प्रशासन की अनुमति न मिलने से बवाल मचना शुरू हो गया है.

आईसीयू में भर्ती बीजेपी विधायक का हाल जानने आए थे शिवराज

आगर मालवा से बीजेपी के विधायक मनोहर ऊंटवाल इन दिनों इंदौर के मेंदाता अस्पताल में भर्ती हैं. उन्हें देखने के लिए पूर्व सीएम शिवराज इंदौर पहुंचे थे. उन्होंने ऊंटवाल के बेटे बंटी से बातचीत की और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया. शिवराज के साथ इंदौर सांसद शंकर लालवानी और प्रदेश उपाध्यक्ष सुदर्शन गुप्ता भी अस्पताल पहुंचे थे. ऊंटवाल के बेटे ने बताया कि लगातार सिर में दर्द होने के कारण उन्हें बुधवार दोपहर इंदौर के मेंदाता अस्तपाल में भर्ती कराया गया था. फिलहाल ऊंटवाल को आईसीयू में रखा गया है. जबकि उनके लिवर का उपचार पहले से चल रहा है.

मध्य प्रदेश सरकार की नई पहल, अब इन लोगों को दिए जाएंगे लैपटॉप


मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में राजस्व विभाग (Revenue Department) के अभिलेखों का डिजिटाइजेशन किया जाएगा.

ख़ास बातें

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में राजस्व विभाग (Revenue Department) के अभिलेखों का डिजिटाइजेशन किया जाएगा.
इसके साथ ही पटवारियों को लैपटॉप (Laptop) दिए जाने की योजना पर जल्दी ही अमल किया जाएगा.
यह बात बुधवार को प्रदेश के राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत (Govind Singh Rajpoot) ने समीक्षा बैठक में कही.
भोपाल:

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में राजस्व विभाग (Revenue Department) के अभिलेखों का डिजिटाइजेशन किया जाएगा. इसके साथ ही पटवारियों को लैपटॉप (Laptop) दिए जाने की योजना पर जल्दी ही अमल किया जाएगा. यह बात बुधवार को प्रदेश के राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत (Govind Singh Rajpoot) ने समीक्षा बैठक में कही. राजस्व एवं परिवहन मंत्री राजपूत ने प्रशासन अकादमी में राजस्व विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि समस्त राजस्व रिकॉर्ड जैसे खसरे, नक्शे एवं राजस्व अभिलेखों का डिजिटाइजेशन (डिजिटलीकरण) किया जायेगा. इसके साथ प्रदेश में पटवारियों के रिक्त पदों को शीघ्र ही प्रतीक्षा सूची से भरा जाएगा.

राजपूत ने आगे जानकारी दी कि पटवारियों की भर्ती प्रक्रिया के साथ ही प्रोसेस सर्वर को भृत्य (चपरासी) के पद पर नियमितीकरण करने की कार्यवाही की जाएगी. पटवारियों को लेपटॉप देने की प्रस्तावित कार्यवाही शीघ्र पूरी की जाएगी. इसके अलावा छोटे किसानों को राजस्व में छूट प्रदान की जाएगी.

मंत्री राजपूत ने अधिकारियों को निर्देष दिए कि वे भूमि सुधार आयोग के माध्यम से राजस्व विभाग का रोडमेप बनाएं. इसके साथ ही अधिकारी राजस्व वसूली के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाएं. राजस्व विभाग में शीघ्र ही टाइटल प्रणाली लागू की जाएगी. इससे भूमि की रजिस्ट्री के साथ ही क्रय भूमि का नामांतरण भी खरीददार के नाम पर तुरंत ही हो सकेगा.