13 से 15 नवंबर के बीच अयोध्या, राफेल, सबरीमाला पर आ सकते फैंसले.

 दिल्ली
इस समय पूरे देश की नजरें अयोध्या भूमि विवाद पर आनेवाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भी ऐक्टिव हो गए हैं और उन्होंने इस ऐतिहासिक फैसले से पहले यूपी के हालात की समीक्षा की है। उन्होंने यूपी के डीजीपी ओपी सिंह और मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी को राज्य के कानून-व्यवस्था की जानकारी लेने के लिए बुलाया। यूपी के दोनों वरिष्ठ अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर CJI को हालात की जानकारी दी।

आपको बता दें कि चीफ जस्टिस गोगोई ने अपने कार्यकाल के अंतिम तीन वर्किंग डेज को अयोध्या समेत चार महत्वपूर्ण मामलों में फैसला सुनाने के लिए चुना है। 13 से 15 नवंबर यानी 3 दिनों के बीच सुप्रीम कोर्ट जिन चार मामलों में फैसले सुनाएगा उनमें राफेल, सबरीमाला और CJI के कार्यालय को सूचना के अधिकार कानून के दायरे में लाने का मामला भी शामिल है।

वैसे दिवाली के अवकाश के बाद जब 4 नवंबर को कोर्ट फिर से खुला तो लोगों को उम्मीद थी कि इसी हफ्ते फैसला आ सकता है। हालांकि CJI की अध्यक्षता वाली पीठों ने कोई फैसला नहीं दिया। यह संकेत जरूर मिला है कि कार्य प्रगति पर है। अयोध्या का मामला 1858 से चल रहा है और उस पर 1885 से ही मुकदमेबाजी चल रही है।

अब उम्मीद की जा रही है कि कोर्ट 4-1 या 3-2 के बजाए सर्वसम्मति से फैसला देगा, जिससे आगे किसी भी संदेह की गुंजाइश न बचे। सीजेआई अयोध्या के अलावा सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश को अनुमति देने के फैसले, राफेल डील में सरकार को क्लीन चिट देने के फैसले पर पुनर्विचार याचिकाओं के साथ ही RTI ऐक्ट के दायरे में सीजेआई ऑफिस को लाने पर दायर याचिका की सुनवाई करने वाली तीन पीठों की भी अध्यक्षता कर रहे हैं।

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