PAK आर्मी ने तोड़ा इमरान का दूसरा भी वादा, कल भी श्रद्धालुओं से लेगा 20 डॉलर

पाकिस्तानी सेना ने अपने प्रधानमंत्री इमरान खान का दूसरा वादा भी रद्द कर दिया है. पाकिस्तान सेना ने साफ कर दिया कि कल यानी 9 नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर आने वाले भारतीय श्रद्धालुओं से 20 डॉलर वसूला जाएगा. इससे पहले इमरान खान ने ऐलान किया था कि करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के मौके पर भारतीय श्रद्धालुओं से 20 डॉलर नहीं लिया जाएगा.

करतारपुर साहिब के लिए यात्रा शुरु होने में चंद घंटे ही बचे हैं, मगर पाकिस्तान की पैंतरेबाजी है कि खत्म ही नहीं हो रहीय कैसे वो समझिए. सबसे पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट कर कहा कि करतारपुर साहिब दर्शन के लिए आने वाले भारतीय श्रद्धालुओं को पासपोर्ट की जरूरत नहीं होगी, लेकिन पाकिस्तानी सेना की तरफ से अपने ही पीएम की बात को खारिज कर दिया गया

इसके साथ ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि उद्घाटन और गुरु नानक देव की 550वीं जयंती पर आने वाले श्रद्धालुओं से एंट्री फीस नहीं वसूला जाएगा, लेकिन पाकिस्तानी सेना ने फिर अपने ही पीएम की बात को खारिज कर दिया. सेना ने कहा कि उद्घाटन के मौके पर आने वाले श्रद्धालुओं से भी एंट्री फीस वसूली जाएगी.

10 दिन पहले कराना होगा रजिस्ट्रेशन

इसके अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने तीसरा ऐलान किया था कि करतारपुर साहिब दर्शन के लिए रजिस्ट्रेशन की जानकारी दस दिन पहले पाकिस्तान को देनी जरूरी नहीं होगी, लेकिन उन्हीं की सरकार के प्रवक्ता ने इमरान की बातों से विपरीत बयान दिया. पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शाह फैसल ने कहा कि हमें 10 दिन पहले जानकारी देनी होगी.

पाकिस्तान की पैंतरेबाजी से भारत सतर्क

पाकिस्तान की नीयत से भारत वाकिफ है, इसलिए उसने यहां से जाने वाले श्रद्धालुओं को पहले ही कह दिया था कि भारत सरकार भारतीय श्रद्धालुओं की लिस्ट पाकिस्तान को दस दिन पहले भेजा करेगी. भारतीय श्रद्धालुओं को वैध पासपोर्ट अपने साथ रखना होगा और करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए पाकिस्तान सरकार को 20 डॉलर यानी करीब 1400 रुपये का सेवा शुल्क चुकाना होगा.

लालकृष्ण आडवाणी का जन्मदिन आज, PM मोदी ने घर जाकर दी बधाई,

आज भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी (लाल कृष्ण आडवाणी) का 92वां जन्मदिन है। लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन पर पीएम मोदी ने भी बधाई दी है। पीएम मोदी ने सिर्फ ट्वीट कर लाल कृष्ण आडवाणी को जन्मदिन की बधाई दी है, बल्कि वह उनसे मिलने उनके आवास पर भी पहुंचे।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी  के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। 

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पीएम मोदी लाल कृष्ण आडवाणी से उनके जन्मदिन पर मिलने उनके आवास गए। इस दौरान उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद थे।

पीएम मोदी ने कहा, विद्वान, राजनेता और सम्मानित नेताओं में से एक लालकृष्ण आडवाणी का भारत को सशक्त बनाने की दिशा में अहम योगदान है।  उनके जन्मदिन पर मैं उनकी लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन के लिए प्रार्थना करता हूं। 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के 92वें जन्मदिन पर उन्हें ‘हार्दिक शुभकामनाएं’ दीं। बनर्जी ने ट्वीट करके पूर्व उप प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य एवं खुशहाल जीवन की कामना की। उन्होंने ट्वीट किया, ”लाल कृष्ण आडवाणी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। मैं आपके अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करती हूं।

भाजपा के सह-संस्थापकों में शामिल आडवाणी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में 2002 से 2004 तक उपप्रधानमंत्री के रूप में सेवाएं दी थीं। उन्हें 2015 में देश से दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। 

13 से 15 नवंबर के बीच अयोध्या, राफेल, सबरीमाला पर आ सकते फैंसले.

 दिल्ली
इस समय पूरे देश की नजरें अयोध्या भूमि विवाद पर आनेवाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भी ऐक्टिव हो गए हैं और उन्होंने इस ऐतिहासिक फैसले से पहले यूपी के हालात की समीक्षा की है। उन्होंने यूपी के डीजीपी ओपी सिंह और मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी को राज्य के कानून-व्यवस्था की जानकारी लेने के लिए बुलाया। यूपी के दोनों वरिष्ठ अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर CJI को हालात की जानकारी दी।

आपको बता दें कि चीफ जस्टिस गोगोई ने अपने कार्यकाल के अंतिम तीन वर्किंग डेज को अयोध्या समेत चार महत्वपूर्ण मामलों में फैसला सुनाने के लिए चुना है। 13 से 15 नवंबर यानी 3 दिनों के बीच सुप्रीम कोर्ट जिन चार मामलों में फैसले सुनाएगा उनमें राफेल, सबरीमाला और CJI के कार्यालय को सूचना के अधिकार कानून के दायरे में लाने का मामला भी शामिल है।

वैसे दिवाली के अवकाश के बाद जब 4 नवंबर को कोर्ट फिर से खुला तो लोगों को उम्मीद थी कि इसी हफ्ते फैसला आ सकता है। हालांकि CJI की अध्यक्षता वाली पीठों ने कोई फैसला नहीं दिया। यह संकेत जरूर मिला है कि कार्य प्रगति पर है। अयोध्या का मामला 1858 से चल रहा है और उस पर 1885 से ही मुकदमेबाजी चल रही है।

अब उम्मीद की जा रही है कि कोर्ट 4-1 या 3-2 के बजाए सर्वसम्मति से फैसला देगा, जिससे आगे किसी भी संदेह की गुंजाइश न बचे। सीजेआई अयोध्या के अलावा सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश को अनुमति देने के फैसले, राफेल डील में सरकार को क्लीन चिट देने के फैसले पर पुनर्विचार याचिकाओं के साथ ही RTI ऐक्ट के दायरे में सीजेआई ऑफिस को लाने पर दायर याचिका की सुनवाई करने वाली तीन पीठों की भी अध्यक्षता कर रहे हैं।

मायावती ने मुलायम सिंह यादव के खिलाफ केस लिया वापस 1995 गेस्ट हाउस कांड

बीएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्रा ने पुष्टि की है कि मायावती ने 24 साल पुराने गेस्ट हाउस कांड में दर्ज केस वापस ले लिया है। यह मुकदमा तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के खिलाफ दर्ज था।

1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के खिलाफ दर्ज केस बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने वापस ले लिया है। कहा जाता है कि इस कांड के बाद ही दोनों राजनीतिक दल एक-दूसरे के कट्टर विरोधी हो गए थे। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने आपसी मतभेदों को भुलाते हुए ऐतिहासिक गठबंधन किया था। यह जानकारी बीएसपी के 2 नेताओं ने गुरुवार (7 नवंबर) को दी।

बीएसपी ने की पुष्टि: इस मामले में एसपी की ओर से अभी कोई कंफर्मेशन नहीं मिला है। बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के चलते महज 5 महीने में ही एसपी-बीएसपी का ऐतिहासिक गठबंधन टूट गया था। वहीं, बीएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्रा ने पुष्टि की है कि मायावती ने 24 साल पुराने गेस्ट हाउस कांड में दर्ज केस वापस ले लिया है। हालांकि, उन्होंने इस मामले में कोई डिटेल नहीं दी।

क्या लालू यादव को झारखंड हाई कोर्ट आज जमानत देगा.

रांची,  Lalu Prasad Yadav राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के लिए आज बड़ा दिन है। शुक्रवार को झारखंड हाई कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होगी। इसके बाद यह तय होगा कि पूर्व रेल मंत्री जेल में रहेंगे या पटना जाकर अपना घर-परिवार संभालेंगे। इससे पहले उन्‍हें उच्‍च न्‍यायालय से देवघर कोषागार मामले में बेल मिल चुकी है। लालू प्रसाद के अधिवक्ता देवर्षि मंडल की ओर से अदालत से विशेष आग्रह करने पर कोर्ट लालू की जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए तैयार हुआ है। लालू ने चारा घोटाले के दुमका मामले में जमानत याचिका दाखिल की है। 

चारा घोटाला में सजायाफ्ता हैं लालू प्रसाद

चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद की जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में लालू प्रसाद की जमानत याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। पूर्व में अदालत ने लालू प्रसाद के अधिवक्ता देवर्षि मंडल के आग्रह पर जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए आठ नवंबर की तिथि निर्धारित की है। बता दें कि लालू प्रसाद को सीबीआइ की विशेष अदालत ने दुमका कोषागार (आरसी-38ए/96) से अवैध निकासी के मामले में सजा सुनाई है। उनकी ओर से सीबीआइ द्वारा दी गई सजा को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में सजा को निलंबित करते हुए जमानत की गुहार लगाई गई है।

इमरती देवी नहीं उतरेंगी सफाई करने

कमलनाथ सरकार के मंत्री प्रदुम्न सिंह तोमर ग्वालियर व शिवपुरी से लेकर भोपाल तक सफाई अभियान को बड़ा रहे है प्रदुम्न सिंह तोमर द्वारा ग्वालियर में बीते कुछ दिन पहले चार फुट गहरे नाले उतर कर सफाई की थी जिससे उनकी देश भर में सराहना हुई थी, मंत्री प्रदुम्न सिंह तोमर का सफाई अभियान शिवपुरी में भी चला जहां उन्होंने शिवपुरी की नालियों की सफाई की ।

परन्तु कमलनाथ सरकार की एक मंत्री जो हमेशा अपने वयानों से सुर्खियों में आ जाती है मंत्री इमरती देवी ने ग्वालियर में सफाई अभियान को लेकर एक बड़ा वयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि “हम तो नहीं उतरेंगे नाले में सफाई करने” ।

कमलनाथ सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी से पत्रकारों ने मंत्री प्रद्युम्न सिंह के सफाई अभियान पर सवाल किये तो उन्होंने कहा कि ग्वालियर में बड़े बड़े नाले और सीवर लाइन हैं,इसलिए वहा गंदगी ज्यादा है, जबकि डबरा में सीवर लाइन नहीं है इसलिए गंदगी भी कम है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या आप सफाई अभियान में उतरेगी तो उन्होंने कहा कि हम तो नहीं उतरेंगे सफाई करने नाले में।

अब देखना होगा कि मंत्री इमरती देवी का यह बयान सियासी बवाल खड़ा करता है।

आज नोटबंदी के तीन साल पूरे हुये लेकिन हालात जस के तस.

नोटबंदी को आज तीन साल पूरे हो गए हैं। आज ही के दिन 2016 में रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन करते हुए इसकी घोषणा की थी। तब उन्होंने इसे लागू करने के पीछे कई सारे कारण बताएं थे, जिस पर चोट करने की बात कही गई थी। काला धन, आतंकवाद, बड़े नोटों की जमाखोरी, नकली नोट जैसे मुद्दे प्रमुख थे। नोट बंद होने के बाद सरकार की तरफ से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की बात कही गई थी। 

बढ़ी दो हजार रुपये की जमाखोरी

नवंबर 2016 के बाद जहां डिजिटल भुगतान में बढ़ोतरी देखने को मिली, वहीं अन्य कारण जो उस वक्त बताए गए थे, उनमें किसी तरह की कमी नहीं आई है। नोटबंदी के बाद जो दो हजार रुपये का नोट शुरू किया गया था, लेकिन उसकी भी छपाई को रोक दिया है। आरबीआई ने इस नोट को एटीएम से भी देने पर रोक लगा दी है। बैंक अब एटीएम में से दो हजार रुपये के नोट की कैसेट को निकाल कर 500, 200 और 100 रुपये की कैसेट ज्यादा लगा रहे हैं। बैंक का तर्क है कि लोग दो हजार के नोट की जमाखोरी करने लगे हैं। इस वजह से इसकी छपाई रोक दी गई है। वहीं अब यह नोट केवल बैंक शाखाओं में मिल रहा है। 

डिजिटल भुगतान में हुआ इजाफा

नोटबंदी के दौरान सरकार ने कहा था कि वो नकदी का प्रचलन कम करने के लिए डिजिटल और कार्ड से भुगतान को ज्यादा बढ़ावा देंगे। तीन साल बाद जहां एक तरफ डिजिटल भुगतान में बढ़ावा देखने को मिला है, वहीं दूसरी तरफ नकदी आज भी लोगों की जरूरत है। नकदी का प्रचलन कहीं से भी कम नहीं हुआ है। 

भारत में लोग डिजिटल लेनदेन के लिए यूपीआई (UPI) यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस का काफी इस्तेमाल करते हैं। तीन साल पहले लॉन्च हुए यूपीआई के जरिए अक्तूबर माह में एक अरब लेनदेन हुए हैं। वहीं पिछले महीने सितंबर में इसके जरिए 95.5 करोड़ लेनदेन हुए थे। इसके साथ ही यूपीआई सबसे तेजी से बढ़ने वाला सिस्टम बन गया है। 

हालांकि उस वक्त डिजिटल ट्रांजेक्शन में बढ़ावा देखने को मिला था, लेकिन जैसे-जैसे नकदी की स्थिति सुधरी डिजिटल ट्रांजेक्शन कम होने लगे। डिजिटल भुगतान में भी धोखाधड़ी के मामले ज्यादा सामने आने के चलते भी लोग फिर से नकद ट्रांजेक्शन ज्यादा करने लगे हैं। 

अर्थशास्त्री मोहन गुरुस्वामी का कहना है कि नोटबंदी के बाद लोगाें में बैंकों में धन जमा करने को लेकर शंका बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सांख्यिकी आंकड़ों के अनुसार, 2011-12 से 2015-16 तक बाजार में चल रही कुल नकदी की तुलना में महज 9-12 फीसदी नकदी ही लोग घरों में जमा करते थे। 2017-18 में यह आंकड़ा बढ़कर 26 फीसदी हो गया। हालांकि, इस दौरान डिजिटल लेनदेन को काफी बढ़ावा मिला है। अक्तूबर में यूपीआई के जरिये 1 अरब डिजिटल ट्रांजेक्शन किए गए। इसके अलावा पेटीएम, अमेजन-पे, गूगल-पे, फोन-पे जैसे भुगतान एप के जरिये भी डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहा है। 

काले धन पर नहीं लगी रोक

नोटबंदी का सबसे बड़ा कारण काला धन था। हालांकि यह कम होने के बजाए बढ़ता गया है। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा या फिर विधानसभा के चुनाव हों, बड़ी अरबों रुपये जांच एजेंसियों को दो हजार और पांच सौ के नोट मिले है, जिनका कोई हिसाब-किताब नहीं था। आयकर अधिकारियों द्वारा समय-समय पर मारे जा रहे छापों में भी यह बात सामने आ रही है, जिसमें लोगों के पास बड़ी संख्या में ऐसे नोट मिले हैं। 

नकली नोटों की संख्या बढ़ी

अगर नोटबंदी से पहले के समय की बात करें, तो नकली नोटों का प्रचलन काफी ज्यादा था। नोटबंदी के बाद इस बारे में आरबीई ने एक रिपोर्ट भी जारी की है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डाटा के मुताबिक, देश में नकली नोटों के मामलों में तेज बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2017-18 के मुकाबले पिछले वित्त वर्ष में नकली नोटों में 121 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 2,000 रुपये के नकली नोटों की बात करें, तो यह आंकड़ा 21.9 फीसदी है। 200 रुपये के 12,728 जाली नोट मिले, जबकि पिछले साल सिर्फ 79 ही पकड़े गए थे। 

वैल्यू के लिहाज से देखा जाए, तो मार्च 2019 के आखिर तक 500 और 2000 के नोटों की हिस्सेदारी कुल वैल्यू में 82.2 फीसदी थी। आरबीआई के मुताबिक, यह आंकड़ा मार्च 2018 के अंत में 80.2 फीसदी था। इसके अलावा, समान अवधि में क्रमशः 10, 20 और 50 रुपये में पाए गए नकली नोटों में 20.2 फीसदी, 87.2 फीसदी और 57.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। हालांकि 100 के मूल्यवर्ग में पाए गए नकली नोटों में 7.5 फीसदी की गिरावट देखी गई है। 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले दिनों सदन में एक सवाल के जवाब में कहा था कि 4 नवंबर, 2016 को बाजार में कुल 17,741 अरब रुपये के मूल्य के बराबर नकदी चलन में थी, जो 29 मार्च 2019 तक बढ़कर 21,137.64 अरब रुपये पहुंच गई। इस तरह बाजार में 3,396 अरब रुपये की नकदी ज्यादा चल रही है। इसी तरह, एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार 2016 में जहां 24.61 करोड़ के नकली नोट पकड़े गए थे, वहीं 2017 में यह बढ़कर 28 करोड़ पहुंच गया। हालांकि, इसके बाद नकली नोटों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। 

आतंकवाद में नहीं लगी कोई लगाम

नोटबंदी के वक्त कहा गया था, कि इससे आतंकी और कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आएगी। हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।  दक्षिण एशिया आतंकी पोर्टल (एसएटीपी) के डाटा के अनुसार 2016,2017 और 2018 में 2015 के मुकाबले आतंकी घटनाओं में इजाफा देखा गया। 2015 में जहां 728 लोग आतंकी हमले का शिकार हुए थे, वहीं इनकी संख्या 2016 में 905, 2017 में 812 और 2018 में 940 पर पहुंच गई। 

अयोध्या पर फैसले से पहले सीएम योगी ने की बैठक

अयोध्या फैसला

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले केंद्र सरकार, राज्य सरकारें कानून व्यवस्था के मद्देनजर तैयारियां कर रही हैं. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक बैठक की जिसमें यूपी सरकार की तैयारियों पर चर्चा की गई. आपको बता दें कि केंद्र ने अर्द्धसैनिक बलों के करीब 4,000 जवानों को उत्तर प्रदेश भेजा है. साथ ही रेलवे पुलिस ने अपने कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और 78 बड़े स्टेशनों तथा ट्रेनों में चौकसी बढ़ा दी है.

मुख्यमंत्री ने लखनऊ में आला अधिकारियों के साथ भी एक बैठक की है जिसमें डीजीपी, मुख्य सचिव से लेकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे. अयोध्या पर फैसले के मद्देनजर लखनऊ महोत्सव की तारीख जनवरी के तीसरे सप्ताह तक के लिए बढ़ा दी गई है.

6 हजार लोगों को रेड कार्ड

उत्तर प्रदेश पुलिस ने बरेली ज़ोन में 6 हजार से ज्यादा ऐसे लोगों को चिन्हित किया है जो फैसले के बाद उपद्रव कर सकते हैं. ऐसे शरारती तत्वों को रेड कार्ड जारी किया गया है, यानी उन पर पुलिस की सख्त नजर रहेगी. इसके अलावा कई अस्थाई जेलें भी बनाई जा रही हैं. बरेली जोन के शहर शाहजहापुर, बदायूं, पीलीभीत, रामपुर, मुरादाबाद, संभल, अमरोहा और बिजनौर में 4 हजार से अधिक ऐसे लोग चिन्हित किए गए हैं, ये वो लोग हैं जो बवाल करवा सकते हैं. इसके अलावा 90 ऐसे स्थान चिन्हित किये गए है जो संवेदनशील हैं.

एडीजी अविनाश चंद्र ने बताया कि जोन में सभी जगह शांति बनी रहे उसके लिए संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे है और ड्रोन कैमरे से भी निगरानी की जा रही है. सभी थानों में पीस कमेटी और पुलिस मित्रों की मीटिंग की जा रही है. इसके अलावा हर थाना क्षेत्र में फ्लैग मार्च भी किया जा रहा है. उन्होंने कहा की सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है. फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर पर भी नजर रखी जा रही है. उनका कहना है कि अगर किसी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अफवाह फैलाई, कोई विवादित टिप्पणी की तो उसे छोड़ा नहीं जायेगा


फैसले की तारीख

अयोध्या पर अगले 10 दिन में कभी भी फैसला आ सकता है. सुनवाई पूरी होने के बाद इस समय सभी पक्षों के वकीलों के दावों और सबूतों की जांच के साथ ही फैसला लिखा जा रहा है. इस बीच कोर्ट के गलियारों और आम लोगों के बीच यह चर्चा है कि फैसला किस तारीख को आ सकता है. कयास ये भी हैं कि अयोध्या पर फैसला शुक्रवार 8 नवंबर को ही आ जाएगा और इसका वक्त दोपहर साढ़े तीन बजे का हो सकता है. लेकिन खबर ये भी है कि सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की विशेष पीठ मंगलवार यानी 12 नवंबर के बाद इस मामले में फैसला सुनाएगी. यानी 13 से 16 नवंबर के बीच किसी भी दिन इस सबसे बड़े विवाद पर फैसला आ सकता है.

इन संभावित तारीखों में से 13 नवंबर या फिर 14 नवंबर को फैसला आने की संभावना जताई जा रही है. कोर्ट के कैलेंडर पर गौर करें तो कार्यदिवसों में सात और आठ नवंबर शामिल है. नौ, दस, ग्यारह और बारह नवंबर को छुट्टियां हैं. फिर कार्तिक पूर्णिमा के बाद कोर्ट 13, 14 और 15 नवंबर को ही खुलेगा. 16 नवंबर को शनिवार और 17 को रविवार है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई रविवार को रिटायर हो रहे हैं, ऐसे में फैसला उनके कार्यकाल के दौरान ही आ सकता है.