राम मंदिर मामले में नागरिक सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन अंतरात्मा से करें – धैर्यवर्धन

भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्य समिति सदस्य धैर्यवर्धन ने राम मंदिर मुद्दे पर शीघ्रातिशीघ्र आ रहे फैसले पर शांतिपूर्वक कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है ।
धैर्यवर्धन ने कहा कि जगह जगह धारा 144 लग रही है !
क्या भारत के नागरिक स्वयं नियंत्रण में रहकर आदर्श प्रस्तुत नहीं कर सकते ?

वरिष्ठ भाजपा नेता धैर्य वर्धन द्वारा जारी की गई अपील में कहा गया है कि सभी धर्मो के लोग राम मंदिर के मद्देनजर माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसले को शांतचित्त होकर स्वीकारने का वातावरण बनाने में सहयोग करें । अड़ोस पड़ोस विशेषकर सोशल मीडिया पर भड़काने वाले लोगों की तत्काल क्लास लें, मजम्मत करे , हतोत्साहित करें । पिछले वर्षों में हाई कोर्ट के आदेश पर भी पूरे देश ने समझदारी और शांति का परिचय दिया था ।

प्रदेश भाजपा के मीडिया पैनलिस्ट धैर्यवर्धन ने कहा कि मंदिर के पक्ष में फैसला आए तो दरवाजे पर स्वांतः सुखाय हेतु चुपचाप दीपक जलाएं ,
खिलाफ फैसला आने पर भले ही अपना दिल जलाएं लेकिन किसी का घर न जलाएं । ऐसी ही अपेक्षा मेरी अल्पसंख्यक वर्ग के भाई बहिनों से भी है । बाबरी मस्जिद के पक्ष में कुछ आए तो फोन पर मुबारकबाद दें और खिलाफ आए तो सोचें कि बाबर ने हमारे कुल खानदान और भारत भूमि में जन्म ही नहीं लिया था ।

धैर्यवर्धन ने अपनी समझाइश में निवेदन किया है की प्रभु श्री राम को प्रसिद्ध मुस्लिम कवि इक़बाल की नज़र से देखने का प्रयास करें । उन्होंने अपनी कविता में लिखा है कि –

लबरेज़ है शराबे हक़ीक़त से जामे हिन्द

सब फ़लसफ़ी हैं खि़त्ता ए मग़रिब के राम ए हिन्द

यह हिन्दियों के फ़िक्र ए फ़लक रस का है असर
रिफ़अ़त में आसमां से भी ऊंचा है बामे हिन्द
इस देस में हुए हैं हज़ारों मलक सरिश्त
मशहूर जिनके दम से है दुनिया में नाम ए हिन्द
है राम के वुजूद पे हिन्दोस्तां को नाज


अहले नज़र समझते हैं उसको इमाम ए हिन्द


ऐजाज़ उस चराग़ ए हिदायत का है यही
रौशनतर अज़ सहर है ज़माने में शाम ए हिन्द
तलवार का धनी था शुजाअत में फ़र्द था
पाकीज़गी में जोश ए मुहब्बत में फ़र्द था बांगे दिरा मय शरह उर्दू से हिन्दी, पृष्ठ 467, एतक़ाद पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली 2 से प्रकाशित पुस्तक का उल्लेख करते हुए उन्होंने यह बात कही है । सुप्रीम कोर्ट का आदर न करना भी गैर जिम्मेदार नागरिक होने का परिचायक है । आखिर यह गठान देवठान त्यौहार के अवसर पर हमेशा के लिए खुल ही जानी चाहिए .

भाजपा नेता धैर्यवर्धन ने कहा कि जिस शहर में मीठी सेंवई खाकर ईद मुबारक कहते है, होली दीवाली पर हिन्दुओं को बधाई देते है उसी शहर में आपा खोकर वहीं लोग रिश्तों को खून से रंग देते हैं । बंदूक की गोली चलवा देती है जहरीली बोली । तलवार और बंदूक हिन्दू मुसलमान किसी को नहीं बख्शती है । सभी धर्मो के अपराधी प्रवित्ति के लोग लूटपाट के लिए ऐसी ही परिस्थिति का बेसब्री से इंतजार करते हैं ।
हालांकि शिवपुरी शहर शांत शहर है परन्तु भारत में कहीं भी लोग देश की साख को बट्टा न लगाएं ।
भाजपा नेता धैर्यवर्धन ने लोगों का ध्यानआकर्षित करते हुए कहा कि वैसे भी दिलजला पाकिस्तान ऐसी ही किसी अनहोनी के लिए आंखें गड़ाए बैठा है । देश विरोधी ताकतें मौके के इंतजार में है ।
सारी दुनिया मार काट पर उतारू है केवल भारत ही शांति का टापू है कृपया उसे स्वर्ग से सुंदर भूमि बनाए रखने में अपना अपेक्षित बहुमूल्य योगदान दीजिए ।

देश के बटवारे के समय के दंगे, सिख दंगे, गोधरा गुजरात के दंगे हों या अन्य कोई दंगा फसाद , हमको यही सिखाया है कि धीरे से लगाई गई आग भी बेकाबू हो जाती है , लाशें बिछ जाती हैं, करोड़ों – अरबों की संपत्ति स्वाहा हो जाती है और बुझने में बहुत समय लेती है। और घाव को और गहरा कर जाती है पीढ़ियों के मन में ।
भाजपा नेता धैर्यवर्धन ने नागरिकों से अपील की है कि फैसला आने पर एहतियात के तौर पर अपने नौनिहालों, पड़ोसियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे । जली कटी बातें न करें । किसी के भी कमजोर/ताकतवर या छोटे/बड़े की बात नहीं है , बात तो सिर्फ इतनी सी है कि हमें कैसा देश बनाना है , देश को किस दिशा में ले जाना है । छोटी सी चूक भी अर्थव्यवस्था को बहुत बहुत बड़ा झटका दे जाएगी ।

आजादी मार्च पर बुरे फंसे इमरान, PAK सेना ने भी छोड़ा साथ, कहा- हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं

इस्लामाबाद, । पाकिस्तान में इमरान खान के खिलाफ चल रहे आजादी मार्च को लेकर पाकिस्तानी सेना ने बड़ा बयान दिया है। पाकिस्तानी सेना ने बुधवार को दावा किया कि वह इमरान खान की अगुवाई वाली सरकार और विपक्ष के बीच इस मार्च के लिए मध्यस्थता नहीं करेगी। पाकिस्तानी सेना का कहना है कि आजादी मार्च एक राजनीतिक गतिविधि है और सेना का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

गफूर ने कहा कि पाकिस्तान सेना राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों से निपटने के लिए व्यस्त थी जो जेयूआई-एफ की आजादी मार्च जैसी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल थी।मेजर जनरल गफूर ने यह पूछे जाने पर कि क्या सेना प्रमुख पीटीआई के नेतृत्व में चल रहे में मध्यस्थता करेंगे या नहीं, उन्होंने कहा, ‘ हम राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा संबंधी मामलों में व्यस्त हैं और इन आरोपों का जवाब देना चाहते हैं।

बता दें, पाकिस्तान में पिछले 6 दिनों से जारी आजादी मार्च का उद्देश्य इमरान खान के इस्तीफे की मांग को लेकर है, जिन्हें पाकिस्तान में सरकार बनाए अभी बस एक साल से अधिक का समय हुआ है। फजलुर रहमान उर्फ ​​मौलाना डीजल के अनुसार आजादी मार्च  संविधान, लोकतंत्र और पाकिस्तान के लिए निकाला जा रहा है।

पाकिस्तान में इमरान खान सरकार के खिलाफ हो रहा आजादी मार्च देश के सबसे बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शन है। आजादी मार्च ने 2014 में नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली तत्कालीन पाकिस्तान सरकार में धरना देने वालों की संख्या को पार कर दिया है।

सेना के प्रवक्ता ने शनिवार को एक अन्य टीवी इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान सेना ने हमेशा कानून और संविधान के मुताबिक लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों का समर्थन किया है। सुरक्षा का हवाला देते हुए गफूर ने कहा, ‘सेना पिछले 20 सालों से राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारियों में लगी हुई है, खासकर पिछले 20 वर्षों से जैसा कि मैंने पहले भी कहा है। हमारी जिम्मेदारियां हमें किसी भी तरह की (राजनीतिक) गतिविधि में शामिल होने की अनुमति नहीं देती हैं।’

शंहशाह अभिताभ बच्चन के फिल्म जगत में 50 साल.

फिल्म इंडस्ट्री के ‘शहंशाह’ अमिताभ बच्चन के फिल्मी करियर को 50 साल पूरे हो जुके हैं. 7 नवंबर के ही दिन साल 1969 में उनकी पहली फिल्म सात हिंदुस्तानी रिलीज हुई थी. साल 1969 से शुरू हुआ अमिताभ बच्चन का सफर आज तक जारी है.

इस फिल्म में टीनू आनंद कवि की भूमिका में थे और अमिताभ बच्चन को टीनू आनंद के दोस्त के किरदार के रूप में चुना गया था. कवि का किरदार इस फिल्म में काफी अहम था. हालांकि होनी को कुछ और ही मंजूर था. हालात ऐसे बने की टीनू को ये फिल्म कुछ कारणों से छोड़नी पड़ी. जिसके बाद अमिताभ बच्चन को कवि का लीड रोल मिला और इसी तरह अमिताभ बच्चन का फिल्मी सफर शुरू हुआ.

कितनी मिली फीस?

हालांकि बहुत से लोग नहीं जानते हैं कि सात हिंदुस्तानी के लिए अमिताभ बच्चन को कितनी फीस मिली थी. दरअसल, उस दौरान अमिताभ को इस फिल्म के लिए 5 हजार रुपये बतौर फीस के लिए अदा किए गए. हालांकि उस दौर में अभिनेता की मांग इससे ज्यादा की होती थी. कम फीस के चलते भी अमिताभ बच्चन ने पीछे मुड़ के नहीं देखा और इस फिल्म के लिए तैयार हो गए. हालांकि ये फिल्म कुछ खास कमाल नहीं कर पाई, लेकिन इसके बावजूद इस फिल्म के बाद अमिताभ ने कई सुपरहिट फिल्में दी.

अयोध्या फैंसले से पहले सरकार सतर्क .

अयोध्या पर फैसले से पहले अंबेडकर नगर के अलग-अलग कॉलेजों में 8 अस्थाई जेल बनाई गई है. प्रशासन ने ऐसा फैसला सुरक्षा के मद्देनजर लिया है. अयोध्या में पहले से हाई अलर्ट है और जगह-जगह जवानों की तैनाती की गई है. प्रशासन हर परिस्थिति से निपटने के लिए सुरक्षात्मक मोड में हैं. संवेदनशील मामला होने की वजह से एहतियातन ऐसा किया गया है.

बता दें कि पुलिस मुख्यालय ने सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील 34 जिलों के पुलिस प्रमुखों को भी निर्देश जारी कर दिए हैं. इन जिलों में मेरठ, आगरा, अलीगढ़, रामपुर, बरेली, फिरोजाबाद, कानपुर, लखनऊ, शाहजहांपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और आजमगढ़ आदि हैं.

पुलिस तंत्र में जन संवाद सिस्टमों की महत्ता पर जोर देते हुए पूर्व पुलिस उप महानिदेशक (डीजीपी) ब्रजलाल ने याद करते हुए बताया था, ‘बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के दो दिन बाद एक सहयोगी ने मुझे सूचना दी कि मेरठ में मेरी हत्या की अफवाह फैल रही है और तनाव पैदा हो रहा है. तब मैं मेरठ का एसएसपी (वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक) था. मैंने जन संवाद सिस्टम के माध्यम से अफवाह को खारिज किया. आज वट्सऐप और एसएमएस से ऐसी अफवाहें खतरनाक गति से फैल सकती हैं.’

ब्रजलाल ने कहा कि सितंबर 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अयोध्या पर फैसले के समय वो सहायक डीजीपी (कानून व्यवस्था) थे और उन्होंने सभी जिलों में उचित स्थानों पर जनसंवाद सिस्टमों को सुनिश्चित कराया था. पुलिस विभाग अपने वाहनों की भी मरम्मत और सर्विस करा रहा है, जिससे आपातकाल में कोई समस्या ना आ जाए. उन्होंने कहा, ‘अफवाहों और गलत जानकारियों को फैलने से रोकने के लिए हम सोशल मीडिया पर  भी लगाम लगाने का प़यास जारी है.

मुंबई: शिवसेना थैली की राजनीति से भयभीत है सामना के संपादकीय में लिखा.

मुंबई
महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन के लिए बेहद कम वक्त बचा है लेकिन तस्वीर अभी भी पूरी तरह साफ नहीं है। गुरुवार का दिन महाराष्ट्र में सियासी हलचलों से भरा रहने वाला है। एक ओर बीजेपी नेता राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात करेंगे, तो दूसरी ओर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे पार्टी के सभी नवनिर्वाचित विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगे। इस बीच शिवसेना ने एक बार फिर हुंकार भरते हुए कहा है कि जनता की मांग है कि महाराष्ट्र में शिवसेना का ही मुख्यमंत्री होना चाहिए।

अपने विधायकों के टूटने के डर से शिवसेना अब और भी ज्यादा आक्रामक हो गई है और अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय के जरिए बीजेपी पर सीधा हमला बोला है। सामना में शिवसेना ने कहा है कि कुछ लोग नए विधायकों से संपर्क कर थैली की भाषा बोल रहे हैं। सामना के संपादकीय पेज पर बीजेपी पर निशाना साधते हुए लिखा गया है, ‘बीजेपी जिस महायुति (महागठबंधन) की बात कर रही है, उसमें शामिल कई दलों के एक भी विधायक नहीं हैं। बगैर विधायकों का महामंडल परसों राज्यपाल से मिला और सरकार गठन के बारे में चिंता व्यक्त की। यह चिंता राज्य की कम, अगली सरकार में अपनी क्या स्थिति होगी, इस पर ज्यादा थी।’

मोदी अमितशाह के पास शक्तशाली हथियार त्रिशूल है: जयराम रमेश


कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधा है. जयराम रमेश ने कहा कि नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के हाथों में एक बहुत शक्तिशाली हथियार त्रिशूल है. मोदी-शाह के त्रिशूल की नोंक पर तीन चीजें हैं, सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग.

जयराम रमेश ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह अपने विरोधियों पर इस त्रिशूल का इस्तेमाल कर रहे हैं और सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग से लोगों को परेशान कर रहे हैं. नागरिकता संशोधन विधेयक पर जयराम रमेश ने कहा कि अगर इसे लागू किया गया तो सबसे ज्यादा नुकसान पूर्वोत्तर के राज्यों को होगा और कांग्रेस इसका कड़ा विरोध करेगी.

असम नेशनल सिटीजन रजिस्टर पर जयराम रमेश ने कहा कि इससे लोगों के लिए एक बड़ी मानवीय समस्या पैदा हो रही है. कहा जा रहा था कि असम में एक करोड़ से अधिक अवैध प्रवासी रहते हैं, लेकिन एनआरसी की फाइनल लिस्ट में सिर्फ 19 लाख लोग निकले.

नेहरू मेमोरियल से हटाए गए जयराम रमेश

इससे पहले जयराम रमेश को मोदी सरकार ने नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी से बाहर निकाल दिया. इस पर जयराम रमेश ने कहा था कि अब एनएमएमएल, नागपुर मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी बन गया है. नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की याद में बनाया गया था.

चिदंबरम के खिलाफ चरित्र हरण अभियान

पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी पर जयराम रमेश ने कहा था कि उनके खिलाफ लगातार चरित्र हरण का अभियान चलाया गया है. इस अभियान में एक भी तथ्य सामने नहीं रखा गया है.

जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी निचले इलाकों में बढ़ेगी ठंड

नई दिल्ली

जम्मू और कश्मीर में बर्फबारी का दौर जारी है. मशहूर पर्यटन स्थल गुलगर्ग में चारों तरफ बर्फ ही बर्फ बिखरी हुई है. पहाड़ों की चोटियां पूरी तरह बर्फ से ढकी हुई हैं. इसी बीच श्रीनगर में खराब मौसम की वजह से हाईवे जाम है. भारी बर्फबारी के चलते कई पेड़ उखड़ गए हैं, वहीं जम्मू और श्रीनगर के बीच संपर्क भी टूट गया है. श्रीनगर के कई इलाकों में टेलीफोन लाइनें भी बर्फबारी की वजह से ठप हैं.

 
जम्मू और कश्मीर में बर्फबारी का दौर जारी है. मशहूर पर्यटन स्थल गुलगर्ग में चारों तरफ बर्फ ही बर्फ बिखरी हुई है. पहाड़ों की चोटियां पूरी तरह बर्फ से ढकी हुई हैं. इसी बीच श्रीनगर में खराब मौसम की वजह से हाईवे जाम है. भारी बर्फबारी के चलते कई पेड़ उखड़ गए हैं, वहीं जम्मू और श्रीनगर के बीच संपर्क भी टूट गया है. श्रीनगर के कई इलाकों में टेलीफोन लाइनें भी बर्फबारी की वजह से ठप हैं.

हनीप़ीत जमानत पर जेल से बाहर आई

सिरसा
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत पंचकूला हिंसा और दंगों के मामले में जमानत मिलने के बाद अंबाला जेल से बाहर आ गई हैं। जेल से बाहर आने के बाद वह सीधे सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के आश्रम में पहुंचीं, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। हनीप्रीत की एक झलक को देखने को बेताब डेरा समर्थक कतार में खड़े थे और उन्होंने इस मौके पर जमकर पटाखे भी फोड़े। इस दौरान हनीप्रीत ने मीडिया से कुछ भी बात नहीं की और सीधे डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय की ओर बढ़ गईं।

जेल अधिकारियों ने बताया कि पंचकूला हिंसा में जमानत मिलने के बाद शाम 5.45 बजे जेल से रिहाई की सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गईं और उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। अंबाला सेंट्रल जेल के एसपी लखबीर सिंह ने बताया कि जेल से बाहर आने के बाद अपने भाई साहिल के साथ हनीप्रीत डेरा मुख्यालय की ओर रवाना हो गईं। अंबाला पुलिस कुरुक्षेत्र सीमा तक उनके साथ थी। इसके बाद का सफर बिना पुलिस सुरक्षा के अपने रिश्तेदारों के साथ उन्होंने तय किया।

देव उठनी ग्यारस पर इस तरह करें भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा

 हिंदु धर्म में देवउठनी एकादशी का बहुत बड़ा महत्व माना गया है। यह एकादशी हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पड़ती है। इस बार यह दिन शुक्रवार, यानी 8 नवंबर को पड़ रहा है। इस दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी के साथ तुलसी की पूजा करने का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवउठनी एकादशी के दिन श्री हरी चार महीने के शयनकाल के बाद जाग जाते हैं।  

देवउठनी एकादशी व्रत मुहूर्त- 
7 नवंबर 2019 प्रात: 09:55 से 8 नवंबर 2019 को रात 12:24 तक

देव उठनी एकादशी के दिन पूजा करने का ये है सही तरीका-
इस दिन पूजा स्थल को साफ करके सांयकाल में वहां चूना और गेरू से रंगोली बनाएं। साथ ही घी के 11 दीपक देवताओं को निमित्त करते हुए जलाएं। द्राक्ष,ईख,अनार,केला,सिंघाड़ा,लड्डू,पतासे,मूली आदि ऋतुफल इत्यादि पूजा सामग्री के साथ ही रख दें। यह सब श्रद्धापूर्वक श्री हरि को अर्पण करने से व्यक्ति पर उनकी कृपा सदैव बनी रहती है।

मंत्रोच्चारण-
भगवान को जगाने के लिए इन मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए-
उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पतये। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥
उत्थिते चेष्टते सर्वमुत्तिष्ठोत्तिष्ठ माधव। गतामेघा वियच्चैव निर्मलं निर्मलादिशः॥
शारदानि च पुष्पाणि गृहाण मम केशव।