7 हजार करोड़ की बैंक धोखाधड़ी के मामले में CBI की देशभर में 169 जगहों पर छापेमारी जारी

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सात हजार करोड़ रुपए से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामले में मंगलवार को दिल्ली, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और गुजरात समेत देश के विभिन्न राज्यों में 169 स्थानों पर छापेमारी की। सीबीआई ने सात हजार करोड़ रुपए से अधिक के बैंक धोखाधड़ी के मामले में 35 मामले भी दर्ज किए हैं।

ब्यूरो से प्राप्त जानकारी के अनुसार, देशभर में 169 स्थानों पर छापे मारे गए। यह छापे दिल्ली, आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़, गुजरात, हरियाणा, कनार्टक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दादरा एवं नगर हवेली में यह छापेमारी की गई है।

सीबीआई ने रोजवैली घोटाले की जांच के सिलसिले में आईपीएस अधिकारी से की पूछताछ
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने करोड़ों रूपये के रोजवैली घोटाले की जांच के सिलसिले में उपायुक्त (बंदरगाह संभाग) वकार रजा से सोमवार को पूछताछ की। सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि आईपीएस अधिकारी रजा आरोपी नहीं हैं लेकिन जब रोजवैली समूह ने कथित रूप से वित्तीय अनियमितताएं की थी तब उनकी बतौर सीआईडी अधिकारी क्या भूमिका थी, उसका पता लगाने के लिए उन्हें यहां सीबीआई के सीजीओ परिसर कार्यालय में तलब किया गया था।

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार इस समूह ने निवेशकों को 15,000 करोड़ रुपये का चूना लगाया था जिसमें ब्याज और जुर्माने की राशि भी शामिल है। कंपनी पर निवेशकों के प्रति अपनी देनदारियों को दबाने के लिए अपनी सहायक कंपनियों में निवेश करने का आरोप है। केंद्रीय एजेंसी ने 2015 में समूह के अध्यक्ष गौतम कुंडू को गिरफ्तार किया था और होटलों और रिसोर्ट समेत 2300 करोड़ रूपये की संपत्ति कुर्क की थी। सीबीआई इस घोटाले की जांच के तहत तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं और बंगाली फिल्मोद्योग के कई कलाकारों से पूछताछ कर चुकी है।

मध्य प्रदेश / भाजपा सांसद ने कहा- किसानों से कर्ज वसूली के लिए आए तो हाथ तोड़ देंगे, गला दबाकर मार डालेंगे

भोपाल.मध्य प्रदेश के भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने विवादास्पद बयान दिया। रीवा में सोमवार को पार्टी के किसान आक्रोश आंदोलन के दौरान उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस या पुलिस का कोई व्यक्ति किसानों से वसूली करनेआएगा तो उसका हाथ तोड़ देंगे, गला दबाकर मौत के घाट उतार दिया जाएगा। प्रदेश के भाजपा कार्यकर्ता मजबूती से किसानों के साथ खड़े हैं।

जनार्दन मिश्रा (63 साल) पहले भी कई विवादित बयान दे चुके हैं। रीवा संसदीय सीट से दो बार चुनाव जीत चुके हैं। भाजपा ने 2014 और 2019 में उन्हें चुनाव मैदान में उतारा था। मिश्रा ने रीवा के कार्यक्रम में कहा कि कमलनाथ सरकार मध्य प्रदेश में विभाजन और विनाश की राजनीति कर रही है।

निगम आयुक्त को जिंदा गाड़ने की धमकी दी थी

भाजपा सांसद मिश्रा ने सितंबर में रीवा के निगम आयुक्त सभाजीत यादव (आईएएस) को जिंदा गाड़ने की धमकी दी थी। एक बैठक में उन्होंने कहा था कि जब निगम आयुक्त आपके पास आए और पैसे मांगे तो मुझे बुलाना। मैं आऊंगा और एक गड्ढा खोदकर उसे जिंदा गाड़ दूंगा। अगर मैं समय पर नहीं आ सका तो आप लोगों को ये करना होगा। इसलिए सभी लोग कुदाल और कुल्हाड़ी नुकीली करके रखवा लो। सांसद के इस बयान का वीडियो वायरल हुआ था।

…जब कांग्रेस का शिवसेना से हुआ था गठबंधन, महाराष्ट्र में कुछ भी असंभव नहीं

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी संग्राम मचा हुआ है. शिवसेना और बीजेपी अपने-अपने जिद पर कायम है, इसी का नतीजा है कि अभी तक सरकार गठन नहीं हो सका. कांग्रेस-एनसीपी मौके की सियासी नजाकत को भांपने में जुटे हैं और अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं. इसके बावजूद शिवसेना शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस के दम पर सरकार बनाने का दम दिखा रही है. ऐसे में वैचारिक रूप से एक दूसरे के विरोधी कांग्रेस और शिवसेना साथ आते हैं तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि कभी बालसाहेब ठाकरे ने इंदिरा गांधी को समर्थन दिया था. हालांकि अब गेंद कांग्रेस के पाले में है.

बता दें कि शिवसेना की स्थापना 1966 में बालासाहेब ठाकरे ने मुंबई में की थी. शिवसेना की छवि एक कट्टर कांग्रेस विरोधी दल की थी. बालासाहेब ठाकरे अपने कार्टूनों में इंदिरा गांधी को खूब निशाना बनाया करते थे. इसके बाद भी शिवसेना ने कांग्रेस से हाथ मिलाया था. 1975 में बालासाहेब ने इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का सपोर्ट करके सबको चौंका दिया था.

1977 के चुनाव में भी बालासाहेब ठाकरे ने कांग्रेस को समर्थन किया था, लेकिन शिवसेना को ये सपोर्ट काफी भारी पड़ा था. 1978 के विधानसभा चुनाव और बीएमसी चुनाव में शिवसेना को मुंह की खानी पड़ी. शिवसेना को इतना बड़ा धक्का लगा कि बालासाहेब ने शिवाजी पार्क की एक रैली में अपना इस्तीफा तक ऑफर कर दिया था. हांलाकि शिवसैनिकों के विरोध के बाद ये इस्तीफा उन्होंने वापस ले लिया.

1975 में आपातकाल लगने के बाद विपक्षी नेताओं को जेल भेजा जा रहा था. कहा ये जाता है कि महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शंकरराव चव्हाण ने बालासाहेब के सामने दो विकल्प रखे या तो दूसरे विपक्षी नेताओं की तरह गिरफ्तार हो जाएं या फिर आपातकाल के समर्थन का ऐलान कर दें. बाला साहेब ने जेल जाना मुनासिब नहीं समझा और आपातकाल के पक्ष में हो गए.

इससे पहले भी 1971 में बालासाहेब ने कांग्रेस के दूसरे धड़े के साथ मिलाया था. 1969 में कांग्रेस का बंटवारा हो गया था. पीएम पद पर बैठीं इंदिरा गांधी को कांग्रेस के पुराने नेताओं ने पार्टी से निकाल दिया. इंदिरा गांधी के खिलाफ खड़े इन नेताओं के वर्ग को ‘कांग्रेस के सिंडिकेट’ के नाम से जाना जाता था. 1971 में बालासाहेब ने कांग्रेस (O) से हाथ मिलाया लोकसभा चुनाव के लिए तीन उम्मीदवार खड़े किए थे. हालांकि ये तीनों ही हार गए.

वैसे कहा ये जाता है कि कांग्रेस ने ही कम्युनिस्टों के खिलाफ लड़ने के लिए शिवसेना को खड़ा करने में मदद की थी. शुरुआती दिनों में उस समय के मुख्यमंत्री वसंतराव नाइक के नाम पर शिवसेना को विरोधी, वसंत सेना कहते थे. 1980 में शिवसेना ने कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में समर्थन किया था. बालासाहेब ने कांग्रेस के खिलाफ शिवसेना के प्रत्याशी  नहीं उतारे थे. इसकी बड़ी वजह बताई गई तत्कालीन मुख्यमंत्री एआर अंतुले के साथ बालासाहेब के निजी रिश्ते.

यही नहीं बालासाहेब ने प्रतिभा पाटिल और प्रणव मुखर्जी दो कांग्रेसी उम्मीदवारों का राष्ट्रपति चुनाव के लिए समर्थन किया था.

1984 के चुनाव में बालासाहेब ने अपनी पार्टी के दो उम्मीदवार बीजेपी के चुनाव निशान पर खड़े किए थे. 1989 में बीजेपी-शिवसेना ने अपना गठबंधन फाइनल किया इसमें प्रमोद महाजन का बड़ा योगदान था. इस गठबंधन में शिवसेना हमेशा बड़े भाई की भूमिका में रही.

1990 के चुनाव में शिवसेना 288 में से 183 सीटों पर लड़ी. छोटे सहयोगियों को शिवसेना ने अपने कोटे से सीट दीं थी. 1995 में भी यही फॉर्मूला कायम रहा, जब बीजेपी-शिवसेना सत्ता में आए. इस फॉमूर्ले में थोड़ा बदलाव 1999 और 2004 में किया गया. वजह सुनने में आई बालासाहेब का लकी नंबर 9 है. शिवसेना171 और बीजेपी 117 सीटों पर चुनाव लड़ी. इस नंबर में एक मामूली बदलाव 2009 के विधानसभा चुनाव में हुआ,  जिसके बाद शिवसेना 169 और बीजेपी 119 सीट पर लड़ी. लेकिन महाराष्ट्र की सत्ता 15 साल कांग्रेस-एनसीपी के हाथों में रही.  

नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बीजेपी में उभार के बाद भगवा दलों का समीकरण बदल गया. 2014 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना और बीजेपी का गठबंधन टूट गया, दोनों अलग अलग चुनाव लड़े. शिवसेना को सिर्फ 63 और बीजेपी को 122 सीटें मिलीं. हालांकि चुनाव के बाद शिवसेना और बीजेपी ने मिलकर सरकार बनाई.

2019 में बीजेपी 164 और शिवसेना 124 सीटों पर चुनाव लड़ी. इस दौरान कहा गया कि सत्ता के समान बंटवारे के लिए एक फॉर्मूला तय हुआ है. पर ये सीक्रेट फॉर्मूला है क्या, ना तो बीजेपी और ना ही शिवसेना ने इसका खुलासा किया. अब शिवसेना कह रही है कि मुख्यमंत्री पद के ढाई-ढाई साल के बंटवारे की बात हुई है जबकि बीजेपी इससे इनकार कर रही है.

महाराष्ट्र में जो इस समय हो रहा है वो शायद भारत में पहले कभी नहीं हुआ. बहुमत नहीं होने पर राजनैतिक दल किसी तरह दूसरे दलों से जोड़तोड़ करके सरकार बनाने की कोशिश करते हैं भले ही वो विचारधारा के स्तर में एक दूसरे से कितने भी अलग हों एक दूसरे के कितने भी बड़े विरोधी रहे हों लेकिन यहां तो सहयोगी ही आपस में भिड़े हुए हैं. महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए 9 नवंबर तक की डेडलाइन है.

105 अरब डॉलर का व्यापार घाटा, चीनी प्रभुत्व, इन 5 कारणों से RCEP से पीछे हटा भारत

भारत ने 16 देशों के RCEP व्यापार समझौते का हिस्सा नहीं बनने का फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले की सत्ता पक्ष तो तारीफ कर ही रहा है, वहीं विपक्ष भी इसे अपनी जीत बता रहा है. हालांकि, पीएम मोदी ने इस समझौते में शामिल न होने के पीछे भारत के हितों को बताया है.

पीएम मोदी ने कहा है, ‘RCEP समझौते का मौजूदा स्वरूप बुनियादी भावना और मान्य मार्गदर्शक सिद्धांतों को पूरी तरह जाहिर नहीं करता है. यह मौजूदा परिस्थिति में भारत के दीर्घकालिक मुद्दों और चिंताओं का संतोषजनक रूप से समाधान भी पेश नहीं करता है.’ ऐसे में ये सवाल भी उठ रहे हैं कि भारत को RCEP समझौते में शामिल होने से क्या नुकसान होने वाले थे.

इन कारणों से बाहर भारत ने खींचे हाथ

बताया जा रहा है कि RCEP पर चर्चा में कई मसलों पर भारत को भरोसा नहीं मिल पाया. इनमें आयात में बढ़ोतरी से होने वाले अपर्याप्त संरक्षण,  RCEP सदस्य देशों के साथ 105 बिलियन डॉलर का व्यापार घाटा, बाजार पहुंच पर भरोसे की कमी, नॉन-टैरिफ प्रतिबंधों पर असहमति और नियमों के संभावित उल्लंघन शामिल हैं. चीन इसमें सबसे बड़ी वजह है.

-दरअसल, इस समझौते से बाहर होने का सबसे बड़ा कारण चीन से आयात बताया जा रहा है. अगर भारत RCEP समझौता करता तो भारतीय बाजार में सस्ते चाइनीज सामान की बाढ़ आ जाती.

RCEP यानी क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी में 10 आसियान देशों के अलावा 6 अन्य देश ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, न्यूजीलैंड और दक्षिण कोरिया भी शामिल हैं. समझौता करने वाले देशों के बीच मुक्त व्यापार को बढ़ावा मिलता है. लिहाजा, भारत के समझौते में शामिल होने से चीन को भारतीय बाजार में पैर पसारने का अच्छा मौका मिल जाता.

-RCEP में शामिल देशों के साथ भारत का निर्यात से ज्यादा आयात होता है. समझौते के तहत ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे अगर आयात बढ़ता है तो उसे नियंत्रित किया जा सके. यानी चीन या किसी दूसरे देश के सामान को भारतीय बाजार में पर्याप्त अनुपात में अनुमति देने पर स्थिति स्पष्ट नहीं थी.

-इस समझौते में शामिल देशों को एक-दूसरे को व्यापार में टैक्स कटौती समेत तमाम आर्थिक छूट देनी होगी. लेकिन समझौते में नॉन-टैरिफ प्रतिबंधों को लेकर कोई भरोसेमंद वादा शामिल नहीं है.

-RCEP में जो देश शामिल हैं, उनके साथ भारत का व्यापार भी फायदेमंद नहीं रहा है. पिछले एक साल का वित्तीय घाटा 105 बिलियन डॉलर का रहा है. यानी इस लिहाज से भी भारत के लिए यह समझौता मुफीद नहीं था.

इन तमाम वजहों से ही भारत में RCEP का विरोध किया जा रहा था. विपक्षी कांग्रेस से लेकर मजदूर संगठन भी इसकी मुखालफत कर रहे थे, जिसके बाद मोदी सरकार ने आंतरिक हितों का हवाला देते हुए खुद RCEP से बाहर कर लिया.

मंत्री जी के आगे पानी पानी मुन्नालाल,शर्म के चलते थामा फावड़ा |

शिवपुरी। आज शिवपुरी नगर पालिका का सफाई पर सबालियां निशान लगाते हुए खुद प्रभारी मंत्री प्रधुम्मन सिंह तोमर ने अपने हाथ में फाबडा लेकर सफाई की। इस दौरान प्रभारी मंत्री के साथ उन्हीं की पार्टी के नगर पालिका अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह भी मौजूद रहे। जैसे ही मंत्रीजी ने फावडा उठाया मुन्नालाल शर्म से पानी पानी हो गए और उन्होंने भी फावडा थाम लिया।

फावड़ा उठाकर खुद नाली साफ करने उतरे मंत्री जी..! सफेद वस्त्रों में पहले तो खड़े रहे नगर पालिका अध्यक्ष मुन्ना लाल,फिर आई शर्म तो फावड़ा उठाकर नाली साफ करने में बटाया हाँथ,5 सालों में पहली बार चलाना पकडा फावड़ा !चौतरफा गन्दगी देख बिफरे केबिनेट मंत्री प्रधुम्न सिंह ओर 15 दिन में शहर की गंदगी दूर करने का दिया प्रशाशन को अल्टीमेटम..! कांग्रेस शासित नगर पालिका में सफाई के दावे खोखले,अपनी ही पार्टी के नपा अध्यक्ष के सामने मंत्री को साफ करनी पड़्ी गंदगी।
सफाई नहीं की तो जनता शहर से बाहर कर देगी:प्रभारी मंत्री

शिवपुरी नवीन बस स्टेण्ड गंदगी को देखकर प्रभारी मंत्री जब नगर पालिका के अधिकारी सहित नपा अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि शहर में फैली गंदगी को यदि साफ नहीं किया गया तो जनता उन्हें बाहर का रास्ता दिखा देगी। प्रभारी मंत्री के इस वक्तव्य से कई कांग्रेसी कानाफूसी करते हुए नजर आए और दबी जुवान से नपाध्यक्ष को कोसते हुए  दिखे।
दुकानदारों से हाथ जोडक़र कूड़ादान रखने का किया आग्रह

जिले के प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह ने शहर में फैली गंदगी को देखकर जहां एक ओर नगर पालिका प्रशासन तथा नगर पालिका अध्यक्ष को न केवल खरी खोटी सुनाई, वहीं दूसरी ओर चाय, होटल एवं अन्य दुकानदारों से अपनी दुकान के आगे हाथ जोडक़र कहा कि अपनी दुकान के आगे कूड़ादान रखे जिससे शहर भी साफ रहेगा साथ ही आपकी दुकान के सामने गंदगी नहीं होगी और ग्राहक भी अधिक संख्या में सफाई देखकर आऐंगे। साथ ही शहर में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों से बचा जा सकेगा। 

56 सीटें जीतने वाली शिवसेना ने कैसे जुटा लिए 170 विधायक, देखती रह गई BJP

मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के 12 दिन बाद भी सरकार बनाने की कवायद किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। इसी बीच सरकार गठन की खींचतान महाराष्ट्र से निकलकर दिल्ली तक पहुंच गई है, लेकिन रहस्यों के पर्दा हटने का इंतजार अब भी इंतजार ही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि जल्द ही सरकार बनेगी। लेकिन सवाल है कि क्या वाकई ये उतना है, जितना कि फडणवीस है? अगर हां तो फिर चुनावी नतीजों के 12 दिन बाद भी नई सरकार क्यों नहीं बनी? क्यों बीजेपी की सहयोगी शिवसेना इतिहास के पन्ने पन्ने पलट रही है? क्यों शिवसेना बीजेपी को 170 विधायकों का धौंस दिखा रही है।

हालांकि बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे की माने तो जनता ने बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को जनादेश दिया है। दानवे कहते हैं कि हमारे बीच कोई लड़ाई नहीं है, हम बैठकर सभी मुद्दे सुलझा लेंगे। लेकिन सवाल कि इन 12 दिनों के अंदर कई बैठके हुई और हो भी रही है, लेकिन महाराष्ट्र को अब तक कोई सीएम क्यों नहीं मिला? वहीं इन सभी मामलों के बीच शिवसेना नेता संजय राउत के नये दावे ने बीजेपी और शिवसेना के बीच गहरी होती खाई की खुदाई कर दी है। एक तरफ शिवसेना प्रमुख के राइट हैंड और राज्यसभा सांसद संजय राउत अंतिम समय तक गठबंधन धर्म निभाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ वह बीजेपी को 170 से 175 विधायकों के समर्थन का भी धैंस दिखा रहे हैं।

अब जरा ये गणित भी समझिए कि आखिर 56 सीटें जीतने वाली शिवसेना 170 से 175 विधायकों के समर्थन का दावा कैसे कर रही है।

दरअसल, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के तहत 288 सीटों पर हुए चुनाव में 105 सीटें जीत कर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। और सूत्रों का दावा है कि निर्दलीय और अन्य छोटी पार्टियों की मदद से बीजेपी को 121 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। जबकि 56 सीटें जीतने वाली शिवसेना एनसीपी की 54 और कांग्रेस के 44 सीटों और कुछ अन्य विधायकों के सहारे 170 से 175 विधायकों के समर्थन का दावा कर रही है। हालांकि शिवसेना के लिए यह राह उतनी भी आसान नहीं है, लेकिन अगर वाकई ऐसी गणित बनती है तो यह बीजेपी के किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अगर वाकई शिवसेना विरोधियों को दोस्त बनाने में सफल रहती है तो उसका सीएम का सपना भी साकार होने करीब है। जिसके लिए वह अपनी 30 साल पुरानी सहयोगी के साथ दो-दो हाथ करने को तैयार है।

आपको बता दें कि 12 दिन बाद भी महाराष्ट्र में नई सरकार की तस्वीर साफ नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से इन दिनों बैठकों का दौर चल रहा है। उससे ऐसा संभव है कि आने वाले दिनों में सरकार पर जारी संस्य खत्म हो सकती है। लेकिन ऐसा कब तक होगा इसके लिए अभी थोड़ा इंतजार और करना होगा।

प़भारी मंत्री प़धुम्न सिंह तोमर केवल नोटंकी कर रहे प़शासन पर पकड़ नहीं: नरेंद़ बिरथरे

*करुणेश शर्मा संपादक
*भाजपा नेता नरेंद़ बिरथरे का प्रभारी मंत्री *प़धुम्न तोमर पर सफाई को लेकर निशाना
विधायक अवैध व्यापार में संलग्न जनता की चिंता नहीं.
शिवपुरी,
प्रभारी मंत्री प्रद्युम्मन सिंह तोमर द्वारा शिवपुरी व ग्वालियर में स्वयं सफाई व्यवस्था के लिए हाथ में फावड़ा लेकर सफाई करने पर भाजपा नेता व पूर्व विधायक नरेंद्र बिरथरे ने निशाना साधा है। प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं पूर्व विधायक पोहरी नरेंद्र विरथरे ने कहा कि शिवपुरी के प्रभारी मंत्री नौटंकी कर रहे हैं आप एक मंत्री भी हैं जब एक कर्मचारी आपकी बात नहीं मानता तो फिर आप की सरकार में रहने का क्या फायदा वे सिर्फ दिखावे के लिए नौटंकी का काम कर रहे हैं।
पूर्व विधायक बिरथरे ने कहा कि इस जिले से भी तीन विधायक हैं एक रेत के व्यापार, दूसरा पत्थर खदान में लिप्त और तीसरा अपने आप को मंत्री नहीं बनाए जाने से रोना रोते रहते हैं कमलनाथ सरकार में विधायकों के दबाव में आकर अधिकारी पिछोर में झूठे मुकदमे दर्ज कर रहे हैं। वहां पर भाजपा का कार्य करने वाले कार्यकर्ता पर जबरदस्ती झूठे मुकदमे लादे जा रहे हैं जिसको भाजपा जिला एवं प्रदेश नेतृत्व कभी सहन नहीं करेगा और किसानों आमजन गरीब के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी हमेशा आंदोलन कर इसका पुरजोर विरोध करेगी।

गौरतलब है कि इस समय पिछले कुछ दिनों से प्रभारी मंत्री प्रद्युम्मन सिंह तोमर द्वारा शिवपुरी व ग्वालियर में स्वयं सफाई व्यवस्था के लिए हाथ में फावड़ा लेकर सफाई अभियान चलाया हुआ है। शिवपुरी शहर के पोहरी रोड पर गंदगी मिलने के बाद स्वयं प्रभारी मंत्री ने सफाई की लेकिन बाद में नगर पालिका के कुछ कर्मचारियों पर गाज गिरा दी गई। जबकि होना यह चाहिए था कि जो वरिष्ठ अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार हैं उन पर कार्रवाई की जाती।
नरेंद़ बिरथरे का कहना है कि प़भारीमंत्री की न भोपाल में न स्थानीय प़शासन में सुनी जा रही केवल समय निकालने के लिये नोटंकी जारी है, बेहतर है प़भारी प़शासनिक कसावट ला भ़ष्टाचार पर रोक लगायें.

नगरीय प़शासन अधिकारी उपयंत्री निलंबित कई को कारण बताओ नोटिस


ग्वालियर।  नगरीय प्रशासन एवं आवास के प्रमुख सचिव संजय दुबे एवं नगरीय प्रशासन एवं आवास और जनसंपर्क आयुक्त पी नरहरि ने ग्वालियर एवं चंबल संभाग के नगरीय निकायों के अधिकारियों की बैठक लेते हुए कहा कि नगरीय निकायों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के कार्य को प्राथमिकता दें। इस कार्य में स्थानीय पार्षद एवं अन्य जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लें। जिससे इस कार्य में और अधिक गति आ सके। 

बैठक में कार्य में लापरवाही बरतने एवं रुचि नहीं लेने के कारण नगर पंचायत कैलारस के मुख्य नगर पालिका अधिकारी संतोष शर्मा, नगर पंचायत विजयपुर के उपयंत्री अभय प्रताप सिंह चौहान और नगर निगम ग्वालियर के उपयंत्री विष्णु पाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है| वहीं नगर पंचायत पोरसा के मुख्य नगर पालिका अधिकारी बालकृष्ण कौरव, डबरा के मुख्य नगर पालिका अधिकारी राजबाबू गुप्ता, दतिया के बाबूलाल कुशवाह, अम्बाह के रामनिवास शर्मा, बड़ोनी के विजय बहादुर सिंह, साढ़ोरा के रवि बुनकर, शिवपुरी के कृष्णकांत पटेरिया, ईको ग्रीन व जल वितरण को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।