शिवपुरी चलों -शिवपुरी चलों दिनाक 4-11-20 प्रांगण पर. प्रातः 11बजे


कोलारस -केन्द्र की भाजपा सरकार की किसान विरोधी रवैये के खिलाफ एवं किसानो की फसल एवं प्राकृतिक आपदा ,अतिवर्षा से फसल वार्वदफसल का मुवाबजा की मॉग को लेकर दिनाक 4-11-2019को प्रातः ग्यारह बजे मघ्य प्रदेश केप्रभारी मंत्री प्रदुम्बन सिह तोमर के नेतृत्व में जिला अध्यक्ष एंव जिले के कांग्रेस जन महामहीम महोदय के नाम का ज्ञापन जिला कलेक्टर को दिया जाएगा यह जानकारी विधान सभा प्रवक्ता ओ० पी० भार्गव ने दी । .कांग्रेस के जिलाअध्यक्ष एव जिले के पदाधिकारी प्रदेश के पदाअधिकारी ब्लॉक के पदाअधिकारी कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष ,मण्डलम् अध्यक्ष ;पदाअधिकारी ;पूर्व विधायक ,वर्तमान विधायक नगर पंचायत के अध्यक्ष ,पार्षदगण ,मंडी के सदस्य .महिला कांग्रेस ,युवक कांग्रेस ‘एन० एस० यू० आई० के अध्यक्ष एवं कार्यकर्त्ता ,प्रदेश कांग्रेस के पदाअधिकारी एवं सेक्टर के शहर एब ग्रामीण क्षेत्र के कार्यकत्ताओं से अधिक से अधिक संख्या मे उपस्थित होने का अनुरोध किया है

अचलेश्वर मंदिर के सामने लजीज रेस्टॉरेंट में लगी आग

ग्वालियर अचलेश्वर मंदिर के सामने लज़ीज़ रेस्टॉरेंट वाली इमारत जलकर खाक। शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने अचानक पूरी इमारत को घेर लिया। जब तक दमकल की मदद पहुँचती तब तक लज़ीज़ रेस्टॉरेंट, हबीब ब्यूटी पार्लर और विक्टोरियन विटेंज कैफ़े पूरी तरह जलकर ख़ाक हो गया। हादसे में पाँच करोड़ से ज़्यादा का नुक़सान बताया जा रहा है।

केबिनेट मंत्री प़धुम्न सिंह तोमर नाले मेे उतर कर सफाई करते हुये.

ग्वालियर दृश्य स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर किए गए किसी दिखावे का नहीं है अपितु हम सबके लाड़ले नेता श्रीमन्त महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया जी के चहेते मध्य प्रदेश सरकार को गौरवान्वित करने वाले कैबिनेट मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर जी द्वारा उनके विधानसभा क्षेत्र ग्वालियर मैं किए जा रहे सफाई अभियान का है ग्वालियर नगर निगम पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है और ग्वालियर नगर निगम की निष्क्रियता इतनी अधिक बढ़ गई है कि लोगों को गंदगी भरा जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है ऐसी स्थिति मैं मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर जी ने ग्वालियर क्षेत्र में सफाई अभियान का बीड़ा उठा रखा है जब भी ग्वालियर में होते हैं तो निकल पड़ते हैं अपनी टोली के साथ और बंद पड़े नाले नालियों की सफाई में जुट जाते हैं उनका जनसेवा का जितना प्रबल है कि वह 5-5 फुट गहरे गड्ढों में भी सफाई हेतू उतरने से परहेज नहीं करते ना ही किसी भी तरह की गंदगी उनके मजबूत इरादों को रोक पा रही है यह दृश्य उन लोगों के ऊपर स्वच्छता अभियान का तमाचा है जो साफ जगहों पर झाड़ू लगाते हुए फोटो खिंचवाते हैं यदि उन्हें हकीकत में भारत को स्वच्छ करने की रुचि है तो वह भी आए और इसी तरह स्वच्छता अभियान के सहभागी बने मैं बार-बार नमन करता हूं हमारे मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री जन जन के लाडले आदरणीय श्री प्रदुमन सिंह तोमर जी को एवं उनके हौसले को जो जनसेवा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है .


बिजनौर में BJP विधायक को पुलिसकर्मियों ने नहीं किया नमस्ते, अब हुए लाइन हाजिर

मामला सामने आने के बाद एसपी ने जिले की पुलिस को निर्देश दिए कि जिले के जनप्रतिनिधियों के प्रति व्यवहार अच्छा होना चाहिए. जो भी समस्या वे बताते हैं उसे ध्यान से सुनें और निस्तारण करें.

बिजनौर. बिजनौर जनपद में तैनात पुलिसकर्मियों ने चांदपुर की बीजेपी (BJP) विधायक कमलेश सैनी को देखकर कुर्सी से खड़े नहीं हुए और न ही उन्हें नमस्कार किया. बस फिर क्या था पुलिसकर्मियों के इस व्यवहार से बीजेपी विधायक को गुस्सा आ गया. उन्होंने इसकी शिकायत एसपी (SP) संजीव त्यागी से की. एसपी ने भी तुरंत कार्रवाई करते हुए चांदपुर थाने में तैनात दो दरोगाओं को विधायक (MLA) से नमस्ते नहीं करने पर लाइन हाजिर कर दिया. बात यहीं खत्म नहीं हुई एसपी ने वायरलेस के जरिये जिले भर की पुलिस को संदेश भिजवाया कि अगर आगे से किसी भी नेता के सम्मान में कोई कमी हुई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

मामला सामने आने के बाद एसपी ने जिले की पुलिस को निर्देश दिए कि जिले के जनप्रतिनिधियोंके प्रति व्यवहार अच्छा होना चाहिए. जो भी समस्या वे बताते हैं उसे ध्यान से सुनें और निस्तारण करें. दुर्व्यवहार बिल्कुल न करें और संयमित भाषा का प्रयोग करें. अगर भविष्य में चांदपुर जैसी घटना की पुनरावृत्ति होती है तो सस्पेंड किया जाएगा.

इससे पहले डीजीपी ओपी सिंहने पुलिसकर्मियों को धैर्य व शांतिपूर्व तरीके से अपना काम करने की नसीहत दी. उन्होंने कहा कि मित्र पुलिस आम जनता के साथ मित्रवत व्यवहार व अपराधियों के साथ सख्ती बरते. वहीं जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ थाने व चौकियों में बुजुर्गों को उचित सम्मान दें.

दिल्ली तीस हजारी विवाद पार्किंग को लेकर भिड़े वकील और पुलिस

नई दिल्ली,तीस हजारी कोर्ट में हुए विवाद की गंभीरता को देखते हुए जांच अधिकारियों ने देर रात तक न सिर्फ सीसीटीवी कैमरे खंगाले बल्कि प्रत्यक्षदर्शियों से भी जानकारी जुटाई गई। प्राथमिक जांच के आधार पर पुलिस अधिकारियों का दावा है कि पार्किंग को लेकर हुए मामूली विवाद ने उग्र रूप तब धारण किया जब साथियों के साथ पहुंचे वकीलों ने पुलिस से मारपीट शुरू की है। घटना की अधिकांश तस्वीरें सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई हैं।

पुलिस और वकीलों के बीच झड़प के बाद करीब 80 विचाराधीन कैदी कोर्ट परिसर में मौजूद थे। इनके एक सुरक्षित जगह पर रखा गया था। मामला शांत होने पर इन सभी कैदियों को तिहाड़ जेल वापस भेज दिया गया। यह जानकारी पुलिस के एक अधिकारी ने दी।

पार्किंग के विवाद में हुई हिंसक झड़प

प्राथमिक जांच में पता चला है कि वकीलों व पुलिसकर्मियों के बीच बवाल का मुख्य कारण पार्किंग ही है। जांच में बताया गया है कि लॉक-अप (तीस हजारी कोर्ट) के सामने दोपहर 2 बजे एक हरे रंग की जीप नंबर डीएल 8 सी एपी 0436 को पार्क किया गया। इसमें तीन वकील मौजूद थे। वहीं पर दिल्ली आम्र्ड पुलिस के सिपाही प्रदीप मेन लॉक-अप गेट के बाहर संतरी की ड्यूटी कर रहे थे। उन्होंने उक्त विशेष स्थान पर जीप पार्क नहीं करने के लिए वकील से कहा, क्योंकि वह जगह केवल जेल वैन के लिए आरक्षित है।

वकीलों ने की पुलिस के साथ हाथापाई

इस पर तीनों वकीलों ने सिपाही प्रदीप के साथ र्दुव्‍यवहार कर हाथापाई की। इसके बाद वहां से चले गए और कुछ देर बाद साथी वकीलों के साथ दोबारा आकर लॉकअप के मेन गेट को तोड़ दिया और अंदर आ गए। मारपीट में आम्र्ड पुलिस के जवान मनीष अहमद, हवलदार कुलदीप और एएसआइ कार्तिक घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए अरुणा आसफ अली अस्पताल भेजा गया। इसके बाद वकीलों ने जिप्सी व जेल वैन के कांच को भी चकनाचूर कर दिया। 

पुलिस कर्मियों को पीटने के दौरान कुछ वकीलों ने एक संतरी की राइफल भी छीन ली। इसके बाद दिल्ली आम्र्ड पुलिस के सिपाही शोभित की बाइक, पुलिस की जिप्सी नंबर डीएल 2 सी एएल 8550 और 15-20 दिल्ली पुलिस कर्मचारियों की व्यक्तिगत दो पहिया वाहनों को लॉक-अप के मुख्य द्वार के पास खड़ा करके आग लगा दी। भीड़ जब और अधिक हिंसक हो गई, तब आत्मरक्षा में एएसआइ पवन कुमार ने हवा में तीन राउंड फायर किए।

भोपाल अयोध्या मामले पर फैसले के मद्देनजर धारा 144 लागू अगले 2 महीने तक लागू रहेगी धारा

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल हाई अलर्ट पर है. अयोध्या मामले में फैसले के चलते शहर में धारा 144 लागू कर दी गई है. संवदेनशील जिला होने के कारण अयोध्या मामले में फैसला आने से पहले कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने शनिवार को भोपाल में धारा 144 लागू करने का आदेश जारी किया है.

दरअसल, अयोध्या राम मंदिर-मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं. कलेक्टर के आदेश के अनुसार भोपाल में अगले 2 महीने तक धारा 144 लागू रहेगी.

इसके साथ ही जुलूस, धरना और प्रदर्शन पर भी प्रतिबंध रहेगा. कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने संवेदनशील जिला होने के कारण और आगामी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए धारा 144 के तहत आदेश जारी किया. जिसमें समूह में लोगों के एकत्रित होकर किसी समुदाय के प्रति प्रदर्शन पर भी रोक लगाई गई है.

किन चीजों पर लगा प्रतिबंध?

इसके साथ ही आदेश जारी किया कि पुलिस को सूचना दिए बगैर कोई भी व्यक्ति अपने मकान में किराएदार और पेइंग गेस्ट नहीं रखेगा.  होटल, लॉज और धर्मशाला में रुकने वालों की जानकारी रजिस्टर में लिख कर थाने में देनी होगी. सार्वजनिक जगहों पर किसी भी तरह के आयोजन पर भी कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने प्रतिबंध लगा दिया है. इस दौरान सिर्फ धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम किए जा सकेंगे. इसके लिए भी स्थानीय प्रशासन को पहले से जानकारी देनी होगी.

2 नवंबर से ही भोपाल जिले में धारा 144 लागू

कलेक्टर ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति जिले में प्रदर्शन, धरना या आंदोलन का ना तो आयोजन करेगा और ना ही उसका नेतृत्व करेगा. सार्वजनिक स्थान पर कोई भी व्यक्ति अपने साथ चाकू, डंडा, धारदार हथियार या कोई अन्य घातक हथियार साथ में नहीं रख सकेगा अन्यथा उसे गिरफ्तार किया जाएगा. 2 नवंबर से ही पूरे भोपाल जिले में धारा 144 लागू कर दी गई है.

पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द

बता दें कि आगामी दिनों में अयोध्या जमीन मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसले आने की उम्मीद है, जिसके मद्देनजर पुलिस-प्रशासन और कानून व्यवस्था पूरी तरीके से मुस्तैद है. मध्य प्रदेश पुलिस ने भी अयोध्या पर संभावित फैसले को देखते हुए पूरे राज्य के पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं.

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मुकेश नायक के खिलाफ चुनाव जीते भाजपा विधायक प़हलाद लोधी की सदस्यता समाप्त

भोपाल.10 दिन पहले झाबुआ विधानसभा उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद भाजपा को एक और झटका लगा है। तहसीलदार से मारपीट और बलवे के मामले में राजधानी की विशेष अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए पन्ना जिले की पवई सीट से भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता विधानसभा ने शनिवार को समाप्त कर दी। साथ ही नोटिफिकेशन की प्रक्रिया कर केंद्रीय चुनाव आयोग को पवई सीट रिक्त होने की सूचना भी भेज दी। गुरुवार को न्यायालय ने लोधी को दो साल की सजा दी थी। इस फैसले की प्रमाणित प्रति शनिवार को विधानसभा पहुंची तो अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कोर्ट के फैसले के पालन में लोधी की सदस्यता समाप्त कर दी। लोधी ने इस फैसले को तानाशाहीपूर्ण बताया है और कहा है कि मुझे इसकीकोई सूचना नहीं दी गई। मैं इस फैसले को बड़ी अदालत में चुनौती दंूगा।

लोधी पर यह आरोप थे
लोधी समेत 12 लोगों पर आरोप था कि उन्होंने रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई करने वाले रैपुरा तहसीलदार को बीच रोड पर रोककर मारपीट की। बलवा किया। सांसदों-विधायकों के मामले देखने वाली विशेष अदालत ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई थी।

कांग्रेस ने साजिश के तहत मेरी सदस्यता रद्द कर दी- प्रहलादलोधी

प्रहलाद लोधी ने बताया ‘मैं जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा तो मुझे मुकेश नायक ने रोका। जीता तो कांग्रेस के लोगों ने ट्रक चढ़ाकर मेरी हत्या की कोशिश की। विधानसभा चुनाव में मैंने मुकेश नायक को 24 हजार वोट से हराया था। मेरे साथ यह बदले की कार्रवाई की गई। आज तक मुझे कोई नोटिस नहीं दिया गया। कोर्ट ने मुझे जमानत दे दी है। 12 दिसंबर तक हाईकोर्ट जाने का मौका दिया, लेकिन इसके पहले ही साजिश के तहत मेरी सदस्यता रद्द कर दी गई। जनता मेरे साथ है। पवई से कोई नहीं जीत सकता। जिसको मैं जितवाऊंगा, वहीं जीतेगा। विधायक मेरा ही बनेगा। मैं ही विधायक बनूंगा। कोर्ट से न्याय मांगूंगा, दिल्ली तक जाऊंगा। ‘

क्या कहता है नियम… जनप्रतिनिधि को दो साल या इससे ज्यादा की सजा हुई तो वह अपने आप हो जाएगा अयोग्य
विधानसभा का कहना है कि दि रिप्रेजेंटेशन आॅफ दि पीपुल एक्ट 1951 की धारा 8(3) में स्पष्ट है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या इससे अधिक सजा हुई है तो वह अयोग्य हो जाएगा। सिर्फ दो साल से कम सजा मिलने पर ही अपील, सुनवाई और फैसला होने तक सदस्यता बरकरार रहती है। इसका प्रावधान 8 (4) में है। इसमें 30 से लेकर 60 दिन का वक्त अपील के लिए मिलता है।

ऐसा पहले भी हुआ

2013 में भैयाराजा की पत्नी भाजपा विधायक आशारानी की सदस्यता हुई थी समाप्त नौकरानी तिज्जी बाई की आत्महत्या के मामले में 2013 में अदालत ने बड़ा मलहरा से भाजपा विधायक आशारानी और उनके पति पूर्व विधायक भैयाराजा को 10-10 साल की सजा सुनाई थी। इसी के बाद आशारानी की सदस्यता समाप्त कर दी गई थी।

राजनीतिक दुर्भावना से लिया फैसला
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा किविधानसभा अध्यक्ष का निर्णय अलोकतांत्रिक और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध है। उन्होंने राजनीतिक दुर्भावना से काम किया। पवई विधायक को उच्च न्यायालय में जाने का अधिकार है और हम जाएंगे भी।

लोधी को मौका नहीं दिया
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा किकिसी भी व्यक्ति को उसका पक्ष रखने का अधिकार है। यह नैसर्गिक न्याय है, लेकिन लोधी को मौका नहीं दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने जल्दबाजी की। यह निंदनीय है।

फैसला सरकार को बचाने की कोशिश
पूर्व मंत्रीनरोत्तम मिश्रा ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को सिर्फ अनुशंसा का अधिकार है। सीट रिक्त तो चुनाव आयोग करता है। लोधी के मामले में अफसरों ने विधानसभा अध्यक्ष को सही जानकारी नहीं दी है। यह राजनीतिक द्वेष के साथ कमलनाथ सरकार को बचाने की कोशिश है।

जो कुछ भी हुआ, नियमों से हुआ :विधानसभाअध्यक्ष
मप्र विधानसभाअध्यक्षएनपी प्रजापति ने कहा किविशेष न्यायालय से प्रहलाद लोधी को सजा हुई है। जैसे ही दो साल की सजा होती है तो संबंधित विधायक की सदस्यता स्वत: ही शून्य हो जाती है। यही प्रावधान है। जो कुछ भी हुआ, वह नियमों के तहत ही हुआ। इसके आदेश जारी कर दिए गए। साथ ही नोटिफिकेशन की प्रक्रिया हो रही है। ’

राजनीतिक फायदे के लिए फैसला
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का निर्णय एकतरफा है। लोधी को उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार है। विधानसभा अध्यक्ष विधायकों के संरक्षक होते हैं। यह फैसला एक पार्टी को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए लिया गया है।

सदन की तस्वीर..

भाजपा : 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी के 109 विधायक थे। झाबुआ उपचुनाव में हार और लोधी की सदस्यता समाप्त होने के बाद अब उसके 107 विधायक बचे हैं।

कांग्रेस : झाबुआ चुनाव जीने के बाद पार्टी ने 115 विधायकों के साथ बहुमत को छुआ था। अब पवई सीट रिक्त होने से विधानसभा सदस्यों की संख्या घटकर 229 हो गई है। ऐसे में कांग्रेस अब पूर्ण बहुमत में है।

अब ट्रेन छूटने पर आसानी से मिलेगा रिफंड

IRCTC की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, किसी यात्री ने कनेक्टिंग ट्रेन (Connecting Train Ticket) की टिकट ली है और उनकी यह ट्रेन छूट जाती है तो उस यात्री का पूरा पैसा रिफंड किया जाएगा.

नई दिल्ली. भारतीय रेलवे  लगातार अपने यात्रियों की सुविधा को बेहतर करने के लिए कदम उठा रहा है. अगर आप भी दिवाली और छठ पूजा की लंबी छुट्टियों के बाद घर लौट रहे हैं तो आपको बता दें कि रेलवे ने 1 अप्रैल से पीएनआर संबंधी एक नियम में बदलाव किया है. नए नियम के मुताबिक, अगर अब आपकी  ट्रेन छूटती है तोरिफंड (Train Ticket Cancels Refund) पानाआसान हो गया है. अगर आसान शब्दों में कहें तो किसी यात्री ने कनेक्टिंग ट्रेन की टिकट ली है और उनकी यह ट्रेन छूट जाती है तो उस यात्री का पूरा पैसा रिफंड किया जाएगा. हालांकि, यह तब होगा जब पहली ट्रेन देर से अपने गंतव्य पर पहुंचती है और इस वजह से यात्री अपनी दूसरी ट्रेन पकड़ न पाए. इसके अलावा रेलवे बोर्डिंग से जुड़ा नियम भी बदल चुका है.

PNR से जुड़ा नियम बदला- IRCTC की ओर से ट्वीट के जरिए बताया गया है कि यात्रियों के दो PNR एक यात्रा के दौरान साथ में लिंक होंगे. अब यात्रियों को आईआरसीटीसी ‘ई टिकट’ और पीआरएस काउंटर टिकट दोनों एक साथ उपलब्ध कराए जाएंगे.

अब तक दो पीएनआर एक साथ लिंक न होने की वजह से ट्रेन छूटने की दशा में यात्रियों को रिफंड नहीं मिल पाता था.

इस नए नियम के मुताबिक अगर दो टिकट एक साथ लिंक होते हैं तो एक ट्रेन के लेट होने और दूसरी ट्रेन के छूट जाने पर केवल पहले ट्रेन के पैसे कटेंगे और दूसरे ट्रेन के पैसे समय से रिफंड कर दिए जाएंगे.

अगर आसान शब्दों में कहें तो कनेक्टिंग ट्रेन के लिए एक ही पीएनआर मिलेगा. ऐसे में ट्रेन छूटने पर पूरे पैसे रिफंड करना आसान हो गया है. यह फैसला यात्रियों की सुविधा के लिए किया गया है.

अक्सर पहली ट्रेन के समय पर अपने गंतव्य स्थल तक नहीं पहुंचने की वजह से काफी सारे यात्रियों की दूसरी कनेक्टिंग ट्रेन छूट जाती थी.

नए नियम के अनुसार, अब यात्रियों को दूसरे टिकट का पूरा पैसा रिटर्न होगा, बशर्ते उन्होंने अपने दोनों टिकट में पूरी और सही जानकारी दी हो.

 इसके अलावा, पहले टिकट का गंतव्य स्थल और दूसरे टिकट के द्वारा यात्रा शुरू करने का स्थल एक होना चाहिए.