कश्मीर नहीं पाकिस्तान की जनता को इन दो चीज़ों की है चिंता, रिसर्च में हुआ खुलासा

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की जनता को कश्मीर की नहीं बल्कि सबसे ज्यादा चिंता आसमान छूती महंगाई और बेरोजगारी की सता रही है. गलप इंटरनेशनल ने आर्थिक संकट से जूझ रहे देश के सभी चार प्रांतों में एक सर्वेक्षण करवाया है जिसमें यह पता चला है.
‘गलप ऐंड गिलानी पाकिस्तान’ की ओर से किए गए इस अध्ययन में बताया गया कि अध्ययन में शामिल 53 फीसदी लोगों का मानना है कि देश के सामने सबसे बड़ी समस्या अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई है.

सर्वेक्षण के मुताबिक महंगाई के बाद 23 फीसदी लोगों ने बेरोजगारी, चार फीसदी ने भ्रष्टाचार और चार फीसदी ने जल संकट को चिंता का विषय बताया.

पाकिस्तान सरकार कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने के लिए जहां हर संभव प्रयास कर रही है वहीं सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से महज आठ फीसदी ने कश्मीर मुद्दे का नाम लिया.

सर्वेक्षण में लोगों ने राजनीतिक अस्थिरता, बिजली का संकट, डेंगू तथा अन्य मुद्दों का भी नाम लिया.

सर्वेक्षण के लिए बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध के लोगों से बात की गई.

बीते कुछ वर्षों से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट में है.

जुलाई में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा था कि पाकिस्तान कमजोर और असंतुलित विकास के कारण उल्लेखनीय आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है और देश की अर्थव्यवस्था इस अवस्था में है कि उसे सुधार की दिशा में महत्वाकांक्षी तथा बड़े कदम उठाने की जरूरत है.

बिहार : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के घर में छठ को लेकर उत्साह तो राबड़ी आवास पर उदासी

पटना 
समय और परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं। आस्था के महापर्व छठ पर कभी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के आवास पर उत्साह और गहमागहमी रहती थी, लेकिन इस साल यहां उदासी छाई हुई है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर छठ पर्व को लेकर खुशी का माहौल है।

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी छठ की तैयारी में दिवाली के बाद से ही लग जाते थे। नेताओं और कार्यकर्ताओं को घर बुलाकर प्रसाद खिलाया करते थे। फिलहाल, लालू चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता होने के कारण रांची की जेल में बंद हैं। स्वास्थ्य खराब रहने के कारण वह इन दिनों रांची के रिम्स में भर्ती हैं। आरजेडी के एक नेता की मानें तो लालू प्रसाद रिम्स के पेइंग वॉर्ड में ही छठ पर्व मना रहे हैं। लालू प्रसाद के पुत्र तेजप्रताप यादव मथुरा में हैं जबकि राबड़ी देवी की तबीयत खराब है। इस कारण इस साल व्रत नहीं हो सका। 

नीतीश के आवास पर पहुंचे राज्‍यपाल 
इधर, मुख्यमंत्री आवास में छठ पर्व पर गहमागहमी बनी हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भाभी और परिवार के कई अन्य सदस्य यहां पहुंचे हैं और छठ पर्व कर रहे हैं। शुक्रवार की रात खरना के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचे और प्रसाद ग्रहण किया। मुख्यमंत्री ने स्वयं राज्यपाल फागू चौहान का स्वागत किया और उन्हें खरना का प्रसाद खिलाया। मुख्यमंत्री आवास स्थित तालाब में शनिवार को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके लिए तालाब की साफ-सफाई कर उसे सजाया गया है। 

बिहार के मंत्रियों के घर भी उत्‍साह 
दूसरी ओर, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी के घर भी छठ पूजा का उत्साह है। चौधरी अपने पैतृक गांव दलसिंहसराय के केवटा पहुंचे हैं, जहां उनकी पत्नी छठ पूजा कर रही हैं। इसके अलावा, बिहार के कई मंत्रियों के यहां भी सूर्य उपासना के इस महापर्व को लेकर गहमागहमी और उत्साह है। बिहार के भवन निर्माण मंत्री अशजक चौधरी के आवास पर भी छठ पूजा की तैयारी हो रही है, जहां उनकी पत्नी भगवान भास्कर को अर्घ्य देंगी। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के घर भी छठ पूजा उत्‍साह के साथ मनाया जा रहा है। 

जासूसी कांड: क्या व्हाटस्एप रख रहा है आपकी हर गतविधि पर नजर…..?

इज़राइली कंपनी NSO के स्पष्टीकरण को सच माना जाए तो सरकार या सरकारी एजेंसियां ही पेगासस सॉफ़्टवेयर के माध्यम से जासूसी कर सकती हैं. ख़ुद अपना पक्ष रखने के बजाय, सरकार ने व्हाट्सऐप को 4 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है.

कैंब्रिज एनालिटिका मामले में भी फ़ेसबुक से ऐसा ही जवाब मांगा गया था. कैंब्रिज मामले में यूरोपीय क़ानून के तहत कंपनी पर पेनल्टी भी लगी, पर भारत में सीबीआई अभी आंकड़ों का विश्लेषण ही कर रही है.

कागज़ों से ज़ाहिर है कि व्हाट्सऐप में सेंधमारी का यह खेल कई सालों से चल रहा है. तो अब कैलिफ़ोर्निया की अदालत में व्हाट्सऐप द्वारा मुकदमा दायर करने के पीछे क्या कोई बड़ी रणनीति है?

व्हाट्सऐप का अमरीका में दायर मुक़दमा

व्हाट्सऐप ने अमरीका के कैलिफ़ोर्निया में इजरायली कंपनी एनएसओ और उसकी सहयोगी कंपनी Q साइबर टेक्नोलॉजीज़ लिमिटेड के ख़िलाफ़ मुकदमा दायर किया है. दिलचस्प बात यह है कि व्हाट्सऐप के साथ फ़ेसबुक भी इस मुकदमे में पक्षकार है. फ़ेसबुक के पास व्हाट्सऐप का स्वामित्व है लेकिन इस मुक़दमे में फ़ेसबुक को व्हाट्सऐप का सर्विस प्रोवाइडर बताया गया है जो व्हाट्सऐप को इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा कवच प्रदान करता है.

पिछले साल ही फ़ेसबुक ने यह स्वीकारा था कि उनके ग्रुप द्वारा व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम के डाटा को इन्टेग्रेट करके उसका व्यवसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है. फ़ेसबुक ने यह भी स्वीकार किया था कि उसके प्लेटफ़ॉर्म में अनेक ऐप के माध्यम से डाटा माइनिंग और डाटा का कारोबार होता है.

कैंब्रिज एनालिटिका ऐसी ही एक कंपनी थी जिसके माध्यम से भारत समेत अनेक देशों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई. व्हाट्सऐप अपने सिस्टम में की गई कॉल, वीडियो कॉल, चैट, ग्रुप चैट, इमेज, वीडियो, वॉइस मैसेज और फ़ाइल ट्रांसफ़र को इंक्रिप्टेड बताते हुए, अपने प्लेटफ़ॉर्म को हमेशा से सुरक्षित बताता रहा है.

कैलिफ़ोर्निया की अदालत में दायर मुक़दमे के अनुसार इज़रायली कंपनी ने मोबाइल फ़ोन के माध्यम से व्हाट्सऐप के सिस्टम को भी हैक कर लिया. इस सॉफ़्टवेयर के इस्तेमाल में एक मिस्ड कॉल के ज़रिए स्मार्ट फ़ोन के भीतर वायरस प्रवेश करके सारी जानकारी जमा कर लेता है. फ़ोन के कैमरे से पता चलने लगता है कि व्यक्ति कहां जा रहा है, किससे मिल रहा है और क्या बात कर रहा है?

ख़बरों के अनुसार एयरटेल और एमटीएनएल समेत भारत के 8 मोबाइल नेटवर्क का इस जासूसी के लिए इस्तेमाल हुआ. मुक़दमे में दर्ज तथ्यों के अनुसार इज़रायली कंपनी ने जनवरी 2018 से मई 2019 के बीच भारत समेत अनेक देशों के लोगों की जासूसी की. अमरीकी अदालत में दायर मुक़दमे के अनुसार व्हाट्सऐप ने इज़रायली कंपनी से मुआवज़े की मांग की है. सवाल यह है कि भारत में जिन लोगों के मोबाइल में सेंधमारी हुई उन्हें न्याय कैसे मिलेगा?

व्हाट्सऐप, सिटीज़न लैब और NSO

NSO इज़रायली कंपनी है लेकिन उसकी मिल्कियत यूरोपियन है.

इस साल फ़रवरी में यूरोप की एक प्राइवेट इक्विटी फ़र्म नोवाल्पिना कैपिटल एलएलपी ने NSO को 100 करोड़ डॉलर में ख़रीद लिया था. बिज़नेस इन्साइडर की बैकी पीटरसन की रिपोर्ट के मुताबिक़ एनएसओ का पिछले साल का मुनाफ़ा 125 मिलियन डॉलर था.

जासूसी करने वाली अनजान कम्पनी जब अरबों कमा रही है तो फिर फ़ेसबुक जैसी कंपनियां अपनी सहयोगी कंपनियों के साथ डाटा बेचकर कितना बड़ा मुनाफ़ा कमा रही होंगी?

NSO के अनुसार, उसका सॉफ़्टवेयर सरकार या सरकार अधिकृत एजेंसियों को बाल यौन उत्पीड़न, ड्रग्स और आतंकियों के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए दिया जाता है और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ जासूसी के लिए उनके सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल गलत है. इसके बाद शक की सुई अब भारत सरकार पर टिक गयी है. रिपोर्टों के अनुसार 10 डिवाइसों को हैक करने के लिए लगभग 4.61 करोड़ रूपए का ख़र्च और 3.55 करोड़ रूपए का इंस्टॉलेशन ख़र्च आता है.

सवाल यह है कि इज़रायली सॉफ्टवेयर के माध्यम से अनेक भारतीयों की जासूसी में करोड़ों का ख़र्च सरकार की किस एजेंसी ने किया होगा? यदि यह जासूसी केंद्र सरकार की एजेंसियों द्वारा अनाधिकृत तौर पर की गयी है तो इससे भारतीय क़ानून और सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का उल्लंघन हुआ है.

यदि जासूसी को विदेशी सरकारों या निजी संस्थाओं द्वारा अंजाम दिया गया है, तो यह पूरे देश के लिए ख़तरे की घंटी है.

दोनों ही स्थितियों में सरकार को तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देकर मामले की एनआईए या अन्य सक्षम एजेंसी से जांच करायी जानी चाहिए. कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ़ टोरंटो की सिटीज़न लैब ने पिछले साल सितंबर में कहा था कि 45 देशों में NSO के माध्यम से व्हाट्सऐप में सेंधमारी की जा रही है. भारत में 17 लोगों के विवरण अभी तक सामने आए हैं, जिनमे से अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी सिटीज़न लैब के माध्यम से मिली है. सवाल यह है व्हाट्सऐप के यूजर्स के साथ एग्रीमेंट में कहीं भी सिटीज़न लैब का जिक्र नहीं है. तो फिर व्हाट्सऐप ने अपने भारतीय ग्राहकों से इस सेंधमारी के बारे तुरंत और सीधा संपर्क क्यों नहीं किया?

टेलीफ़ोन टैपिंग पर सख़्त क़ानून, परन्तु डिजिटल सेंधमारी में अराज़कता

भारत में टेलीग्राफ़ क़ानून के माध्यम से परंपरागत संचार व्यवस्था को नियंत्रित किया जाता है. सुप्रीम कोर्ट ने भी PUCL मामले में अहम फ़ैसला देकर टेलीफ़ोन टैपिंग के बारे में सख़्त कानूनी व्यवस्था बनाई थी जिसे पिछले हफ्ते बॉम्बे हाईकोर्ट ने फिर से दोहराया है. व्हाट्सऐप मामले से जाहिर है कि मोबाइल और इंटरनेट की नई व्यवस्था में पुराने कानून बेमानी हो गए हैं. पिछले दशक में ऑपरेशन प्रिज़्म में फ़ेसबुक जैसी कंपनियों द्वारा भारत के अरबों डाटा की जासूसी के प्रमाण के बावजूद दोषी कंपनियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं हुई.

भारत की सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की बेंच में पुट्टास्वामी मामले में निजता के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार माना गया. फिर व्हाट्सऐप और फ़ेसबुक जैसी कंपनियां भारत के करोड़ों लोगों के निजी जीवन में दखलअंदाजी करके उनके जीवन के साथ खिलवाड़ कैसे कर सकती हैं? सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों के मामलों को एक जगह स्थानांतरित करके जनवरी 2020 में सुनवाई करने का आदेश दिया है. सरकार तो कुछ करने से रही तो क्या अब मोबाइल और डिजिटल कंपनियों की सेंधमारी रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा सख्त जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए?

सुरक्षा के मसले पर दलीय राजनीति क्यों

केन्द्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने प्रणब मुखर्जी और जनरल वीके सिंह के साथ हुई जासूसी को उछालते हुए, इसे दलीय मामला बनाने की कोशिश की है, पर यह आम जनता की निजता और सुरक्षा से जुड़ा अहम् मामला है.

कर्नाटक में कांग्रेसी और जेडीएस की पुरानी सरकार ने भाजपा नेताओं की जासूसी कराई थी, जिसकी जांच हो रही है. नेताओं के साथ जजों के टेलीफोन टैपिंग के आरोप लग चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद, ऐसी कोई भी जासूसी लोगों के जीवन में दखलअंदाजी और उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है. भारत में 40 करोड़ से ज्यादा व्हाट्सऐप यूज़र हैं. इज़राइली सॉफ्टवेर के माध्यम से फ़ोन को ट्रैक करके इस्तांबुल में सऊदी अरब के दूतावास में वाशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जमाल खशोज्जी की हत्या कर दी गयी थी. इसलिए इन खुलासों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार को पारदर्शी और ठोस कदम उठाकर, जासूसी के गोरखधंधे पर विधिक लगाम लगाना चाहिए.

व्हाट्सएप की रणनीति

NSO जैसी दर्जनों इज़राइली कंपनियां डिजिटल क्षेत्र में जासूसी की सुविधा प्रदान करती हैं.

अमरीका की अधिकांश इंटरनेट और डिजिटल कंपनियों में इज़राइल की यहूदी लॉबी का अधिपत्य है. फ़ेसबुक जैसी कंपनियां अनेक एप्स और डाटा ब्रोकर्स के माध्यम से डाटा के कारोबार और जासूसी को खुलेआम बढ़ावा देती हैं. तो फिर व्हाट्सऐप ने एनएसओ और उसकी सहयोगी कंपनी के ख़िलाफ़ ही अमरीकी अदालत में मामला क्यों दायर किया है?

भारत में सोशल मीडिया कंपनियों के नियमन के लिए आईटी एक्ट में सन 2008 में बड़े बदलाव किए गए थे. जिसके बाद वर्ष 2009 और 2011 में अनेक इंटरमीडिटीयरी कंपनियों और डाटा सुरक्षा के लिए अनेक नियम बनाए गए. उन नियमों का पालन कराने में पुरानी यूपीए सरकार को, सोशल मीडिया कंपनियों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा.

सोशल मीडिया कंपनियों के असंतोष को भाजपा और आप जैसी पार्टियों ने राजनीतिक लाभ में तब्दील किया. मोदी सरकार ने डिजिटल इंडिया के नाम पर इंटरनेट कंपनियों को अराजक विस्तार की अनुमति दी, पर उनके नियमन के लिए कोई प्रयास नहीं किये. राष्ट्रीय सुरक्षा पर लगातार बढ़ते ख़तरे और न्यायिक हस्तक्षेप के बाद पिछले वर्ष दिसंबर 2018 में इंटरमीडिटीयरी कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए ड्राफ़्ट नियम का मसौदा जारी किया गया.

इन नियमों को लागू करने के बाद व्हाट्सऐप जैसी कंपनियों को भारत में अपना कार्यालय स्थापित करने के साथ नोडल अधिकारी भी नियुक्त करना होगा. इसकी वजह से इन कंपनियों को भारत में क़ानूनी तौर पर जवाबदेह होने के साथ बड़ी मात्रा में टैक्स भुगतान भी करना होगा.

राष्ट्रहित और जनता की प्राइवेसी के रक्षा का दावा कर रही सरकार भी इन कंपनियों के साथ मिलीभगत में है जिसकी वजह से इन नियमों को अभी तक लागू नहीं किया गया. पिछले महीने सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा देकर कहा कि अगले 3 महीनों में इन नियमों को लागू करके सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय कर दी जायेगी. अमरीका में मुक़दमा दायर करके और सेंधमारी के भय को दिखाकर, व्हाट्सऐप कंपनी कहीं, भारत में सरकारी नियमन को रोकने का प्रयास तो नहीं कर रहीं?

मुंबई: शिवसेना और भाजपा के बीच पेंच अभी भी फंसा हुआ है. अभी भी तसवीर साफ नहीं

50-50 फॉर्मूले पर अड़ी शिवसेना, बीजेपी तैयार नहींबीजेपी-शिवसेना ने मिलकर लड़ा था विधानसभा चुनावबीजेपी को 105 और शिवसेना को 56 सीटों पर मिली जीत

महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिवसेना ने मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था. दोनों पार्टियों ने मिलकर सूबे में सरकार बनाने का वादा भी किया था, लेकिन अब तक नई सरकार की तस्वीर साफ नहीं हो पाई है. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आए एक हफ्ते से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अभी तक बीजेपी और शिवसेना में सरकार बनाने को लेकर बात नहीं बन पा रही है.

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने अपने बेटे आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री की शपथ लेते देखने की उम्मीद अभी तक नहीं छोड़ी है, तो दूसरी तरफ बीजेपी सरकार बनाने को लेकर बेसब्र हो रही है. बीजेपी खेमा 5 नवंबर को नई सरकार की शपथ की तैयारी कर रहा है. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने शपथ के लिए 5 नवंबर को वानखेड़े स्टेडियम भी बुक कर दिया है. हालांकि अभी बीसीसीआई की इजाजत मिलनी बाकी है, लेकिन शिवसेना के तेवर तो कुछ अलग ही कह रहे हैं.

सीएम पद को लेकर बीजेपी-शिवसेना में खींचतान

महाराष्ट्र की राजनीति में सब कुछ गोल-गोल घूम गया. दोनों पार्टियों के बीच खींचतान जारी है. शिवसेना फिफ्टी-फिफ्टी फार्मूले के साथ ही मुख्यमंत्री पद के लिए अड़ी है, जबकि बीजेपी साफ कर चुकी है कि अगले पांच साल तक देवेंद्र फडणवीस ही मुख्यमंत्री होंगे. इस बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार की मुलाकात की. इसके बाद महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज हो गई.

संजय राउत बोले- शिवसेना का होगा अगला सीएम

शरद पवार से मुलाकात के बाद संजय राउत ने दावा किया कि महाराष्ट्र में अगला मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा. संजय राउत ने ये भी दावा कि शिवसेना बिना बीजेपी के भी सरकार बना सकती है.

एनसीपी प्रमुख शरद पवार से संजय राउत की मुलाकात के बाद से ही शिवसेना के तेवर बदले बदले से हैं. शुक्रवार सुबह ही संजय राउत ने बीजेपी पर तंज कसता हुआ ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, ‘साहिब, मत पालिए, अहंकार को इतना, वक्त के सागर में कई सिकन्दर डूब गए.’

एनसीपी ने शिवसेना को दिया तगड़ा झटका

शिवसेना महाराष्ट्र में सरकार गठन से पहले 50-50 फॉर्मूला लागू करने के लिए बीजेपी पर पूरी तरह से दबाव बना देना चाहती है. यही वजह है कि वो एनसीपी के करीब पहुंच रही है, लेकिन शिवसेना-एनसीपी गठबंधन की सरकार बनना इतना आसान नहीं है. सरकार बनाने के लिए शिवसेना को एनसीपी के साथ ही कांग्रेस के समर्थन की भी जरूरत है.

वहीं, शिवसेना की उम्मीदों को बड़ा झटका देते हुए एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने साफ कर दिया कि उनकी पार्टी विपक्ष में बैठेगी. उन्होंने कहा कि जनता ने हमें विपक्ष के रूप में चुना है. लिहाजा हम विपक्ष में बैठेंगे.

शिवसेना के समर्थन पर कांग्रेस का क्या है रुख?

इसके अलावा शिवसेना को समर्थन देने पर कांग्रेस भी दो फाड़ है. कांग्रेस के कुछ नेता शिवसेना को समर्थन देने के पक्ष में हैं, जबकि बाकी इसका विरोध कर रहे हैं. अब मामला कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी तक पहुंच चुका है.

शुक्रवार को महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं ने इस मामले को लेकर सोनिया गांधी से मुलाकात की, लेकिन अभी तक कांग्रेस का स्पष्ट रुख सामने नहीं आया है. इन सबके बीच सोनिया गांधी ने शनिवार को पार्टी के नेताओं की बैठक बुलाई है. इस बैठक के बाद ही शिवसेना को समर्थन देने के मसले पर कांग्रेस का रुख साफ हो पाएगा.

क्या है सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा

महाराष्ट्र चुनाव के नतीजे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पक्ष में आए जरूर हैं. बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को जीत मिली है, लेकिन नतीजे वैसे नहीं रहे जैसी उन्हें उम्मीद थी. बीजेपी ने 105 सीटें जीती हैं, तो उसकी गठबंधन सहयोगी शिवसेना को 56 सीटों पर जीत मिली है.

अगर बीजेपी और शिवसेना मिलकर सरकार बनाते हैं, तो बहुमत संयुक्त रूप से दोनों के पक्ष में है. अगर साथ नहीं आते हैं, तो किसी पार्टी के पास अपने दम पर सरकार बनाने के लिए बहुमत नहीं है. महाराष्ट्र विधानसभा में सदस्यों की संख्या 288 है. ऐसे में सूबे में सरकार बनाने के लिए 146 सीटों का जादुई आंकड़ा छूना जरूरी है.

अमिताभ बच्‍चन सामने रो पड़ीं हिमा दास, कहा- मां बीमार थी और मैं देश के लिए खेल रही थी केबीसी

अमिताभ बच्‍चन की मेजबानी वाले इस शो में हिमा दास (Hima Das) केबीसी कर्मवीर (KBC Karmveer) एपिसोड के तहत नजर आईं. इसमें उन्‍होंने वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) के साथ मिलकर पैसे भी जीते और अपने करियर के बारे में भी बात की.

मुंबई. युवा ए‍थलीट हिमा दास (Hima Das) शुक्रवार को दुती चंद (Dutee Chand) और वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) के साथ कौन बनेगा करोड़पति 11 में शामिल हुईं. अमिताभ बच्‍चन (Amitabh Bachchan) की मेजबानी वाले इस शो में वह केबीसी (KBC) कर्मवीर एपिसोड के तहत नजर आईं. इसमें उन्‍होंने सहवाग के साथ मिलकर पैसे भी जीते और अपने करियर के बारे में भी बात की. हिमा, दुती और सहवाग ने शो में साढ़े 12 लाख रुपये जीते. आईएएएफ वर्ल्ड अंडर 20 चैंपियनशिप में गोल्‍ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट हिमा दास का बचपन काफी गरीबी में बिता था. उनके पास रेस वाले जूते भी नहीं हुआ करते थे, लेकिन बाद में अपने खेल से उन्‍होंने न केवल नाम कमाया बल्कि आज वह एडिडास जैसी स्‍पोर्ट्स का सामान बनाने वाली कंपनी की ब्रैंड एंबेसेडर भी हैं.

हिमा दास अभी पीठ की चोट के चलते रेसिंग ट्रैक से दूर हैं. उन्‍होंने केबीसी में बताया कि वह जल्‍द ही इस चोट से उबर जाएंगी और वापसी करेंगी. अगले साल टोक्‍यो में होने वाले ओलिंपिक खेलों में जगह बनाने की तैयारी करेंगे. हिमा दास पिछले दिनों यूरोप में तैयारी कर रही थीं और वहां उन्‍होंने कुछ ही दिनों में कई गोल्‍ड मेडल जीते हैं.

अपने परिवार की बात होने पर हिमा दास ने बताया कि उनकी मां बीमार थी लेकिन वह उनके पास नहीं थीं, क्‍योंकि वह देश के लिए बाहर गई हुई थी. वह इंडिया का नाम ऊंचा करना चाहती थी इसलिए खेल रही थी. पीछे मां बीमारी से जूझ रही थी. ऐसा कहते हुए वह रोने लगीं. यह देखकर सहवाग और बिग बी भी इमोशनल हो गए.

हिमा दास ने बताया कि वह खेल की दुनिया में इंडिया का तिरंगा लहराना चाहती हैं. जब भी उन्‍हें इंडिया का नाम सुनाई देता है तो काफी गर्व होता है. इस दौरान हिमा दास ने अमिताभ बच्‍चन से पूछा कि आप इस उम्र में इतना काम कैसे कर लेते हैं तो बिग बी झेंप गए, लेकिन बाद में संभलते हुए उन्‍होंने कहा कि काम करते रहने से प्रेरणा मिलती है. वहीं सीनियर बच्‍चन ने भी खेल से जुड़ा एक वाकया बताया कि जब पीटी ऊषा 1984 के लॉस एंजिल्‍स ओलिंपिक खेलों में फाइनल में हिस्‍सा ले रही थीं तब वे स्‍टेडियम में मौजूद थे. पूरे स्‍टेडियम में केवल दो ही भारतीय थे.

बड़ा गांव स्कूल में रेस्क्यू टीम ने पकड़ा साढ़े पांच फीट लंबा रसेल बाइपर

शिवपुरी। सरकारी स्कूलों में बारिश के बाद सांपों की आमद लगातार सामने आ रही है। रातौर स्कूल में एक साथ 6 घोड़ापछाड़ सांप निकलने का मामला हाल ही में सामने आया था तो वहीं शुक्रवार को जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर बड़ा गांव की एकीकृत पाठशाला में जब बच्चों का लंच ब्रेक चल रहा था और पांचवी कक्षा में शिक्षक उमाचरण भार्गव साफ-सफाई के लिए कक्ष के कोने में रखी अभ्यास पुस्तिकाओं को उठा रहे थे उसी दौरान पुस्तकों के बीच में छिपे बैठे रसेल बाइपर पर उनका हाथ पड़ा तो वह फुसकारा जिससे शिक्षक चीख उठे। आवाज सुनकर अन्य कक्षों में मौजूद मिडिल व प्रायमरी के शिक्षक सुरेश पाठक, गुणसागर शर्मा व हेडमास्टर जा पहुंचे। जब पुस्तकों के बीच में झांककर देखा तो सांप कुंडली लगाए बैठा था। इस बीच ग्रामीण भी पहुंच गए जिन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे सांप को मार देते हैं, लेकिन शिक्षकों ने मना कर दिया और वन विभाग की रेस्क्यू टीम को फोन पर सूचना दी। सूचना मिलने के बाद करीब 3ः30 बजे वन विभाग की रेस्क्यू टीम में शामिल दाताराम आर्य व नरेंद्र झा मौके पर पहुंच गए और देखते ही बताया कि यह बेहद जहरीली प्रजाति का रसेल बाइपर है। टीम ने कुछ देर में ही सांप को पकड़ लिया और अपने साथ ले आए और जंगल में छोड़ दिया। सांप को पकड़े जाने के बाद शिक्षकों और बच्चों ने राहत की सांस ली। स्कूल के स्टाफ के मुताबिक करीब दो साल पहले भी स्कूल में किंग कोबरा प्रजाति का सांप निकला था। सौभाग्य का विषय यह रहा कि जिस समय सांप निकला उस समय बच्चे कक्ष से बाहर थे और शिक्षकों ने सजगता दिखाकर वन विभाग की टीम के जरिए उसे पकड़वा दिया।