राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की घड़ी नजदीक, अयोध्या समेत पूरे प्रदेश में बढ़ी सतर्कता

लखनऊ, । भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या समेत पूरे प्रदेश में एक बार फिर पुलिस और खुफिया एजेंसियों की सरगर्मी बढ़ गई हैं। राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे ही पुलिस ने भी प्रदेश में संवेदनशील स्थानों की नब्ज टटोलनी शुरू कर दी है।

अयोध्या में अर्धसैनिक बल, पीएसी व पुलिस की मुस्तैदी बढ़ाये जाने के साथ ही आइबी भी लगातार नजर बनाये हुए है। इंटेलीजेंस के अधिकारी रोजाना सुरक्षा के सभी बिंदुओं की समीक्षा कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों को सभी जिलों में धर्मगुरुओं व विभिन्न संगठनों के साथ बैठक कर शांति-व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।

डीजीपी मुख्यालय स्तर से सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर की जा रही तैयारियों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। अयोध्या में करीब 47 कंपनी अर्धसैनिक बल व 15 कंपनी पीएसी तैनात की गई है। अतिरिक्त पुलिस बल भी मुस्तैद किया गया है।

अयोध्या के अलावा बलरामपुर, गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच समेत अन्य जिलों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मिली-जुली आबादी वाले क्षेत्रों में सभी संवेदनशील स्थानों को चिह्नित करने को कहा गया है, ताकि वहां अतिरिक्त पुलिस प्रबंध सुनिश्चित किए जा सकें। खासकर सभी जिलों में ऐसे लोगों पर कड़ी नजर रखी जा रही है, जिनकी गतिविधियां पहले भी संदिग्ध रही हैं।

पुलिस सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले सभी परिस्थितियां का आकलन भी कर रही है। सोशल मीडिया पर निगरानी भी बढ़ा दी गई है। खासकर भड़काऊ संदेशों पर नजर रखी जा रही है। आइजी कानून-व्यवस्था प्रवीण कुमार का कहना है कि सभी जिलों की पुलिस को हर स्तर पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने और गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं

छह पूजा पर कड़ी होगी सुरक्षा

दीपावली का त्योहार शांतिपूर्ण संपन्न कराने के बाद अब पुलिस छठ पूजा की सुरक्षा-व्यवस्था की तैयारियों में भी जुट गई है। डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि दीपावली पर होने वाली घटनाओं का ग्राफ पिछले वर्षों में लगातार घटा है। इस बार दीपावली के मौके पर केवल एक घटना हुई। दो व तीन नवंबर को छठ पूजा के दृष्टिगत लखनऊ समेत सभी जिलों में पूरी मुस्तैदी बरतने का निर्देश दिया गया है।

खासकर पूर्वांचल के जिलों में सुरक्षा के अतिरिक्त बंदोबस्त करने को कहा गया है। पुलिस को संबंधित विभागों से समन्वय कर नदी के किनारों व तालाबों की साफ-सफाई सुनिश्चित कराने का निर्देश भी दिया है। गोताखोरों को भी प्रबंध कराने को कहा गया है। इसके अलावा रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, बाजार व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा के बंदोबस्त करने के साथ ही भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाने को भी कहा गया है।

मध्यप्रदेश / स्थापना से पहले ग्वालियर के माेतीमहल में लगती थी मध्य भारत प्रांत की विधानसभा

ग्वालियर.1 नवंबर 1956 काे मध्यप्रदेश के गठन से पहले 16 जिलों को मिलाकर बनाए गए मध्य भारत प्रांत की विधानसभा ग्वालियर के मोतीमहल में लगती थी। 28 मई 1948 को पंडित जवाहर लाल नेहरू ने मध्य भारत प्रांत का उद् घाटन किया और महाराज जीवाजी राव सिंधिया को राजप्रमुख पद की शपथ दिलाई।

श्री सिंधिया ने पंडित लीलाधर जोशी को पहले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई थी। विधानसभा के पहले अधिवेशन का उद् घाटन 4 दिसंबर 1948 को सरदार बल्लभ भाई पटेल ने किया। इतिहास विद् डाॅ. आशीष द्विवेदी के अनुसार इंदौर की रियासत ने भी दावा किया इसलिए निर्णय हुआ कि वर्ष में 7 माह ग्वालियर और 5 माह इंदौर, प्रांत की राजधानी रहेगा, लेकिन विधानसभा ग्वालियर में ही रहेगी।

1 नवंबर को मध्यप्रदेश स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। इस दौरान पूरे प्रदेश में हर जगह अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मध्यप्रदेश की स्थापना को लेकर ये सवाल कि आखिर वो क्या कारण था जिनके चलते मध्य प्रदेश अस्तित्व में आया? यहां हम आपको प्रदेश की स्थापना से जुड़ीं खास जानकारियां हम आपको दे रहे हैं।

मध्यभारत प्रांत का गठन 28 मई 1948 को किया गया था, जिसमें ग्वालियर और मालवा का क्षेत्र शामिल था। मध्यभारत प्रांत के पहले राजप्रमुख ग्वालियर रियासत के महाराजा जीवाजी राव सिंधिया थे। प्रांत की दो राजधानियां थीं। ग्वालियर विंटर कैपिटल थी तो वहीं इंदौर कोग्रीष्म राजधानी का रूतबा हासिल था। मध्यप्रदेश का पुनर्गठन भाषाई आधार पर किया गया। वहीं 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के बाद देश में सन् 1952 में पहले आम चुनाव हुए, जिसके कारण संसद एवं विधान मण्‍डल कार्यशील हुए।

प्रशासनिक दृष्टि से इन्‍हें श्रेणियों में विभाजित किया गया था। सन् 1956 में राज्‍यों के पुनर्गठन के फलस्‍वरूप 1 नवंबर 1956 को नया राज्‍य मध्‍यप्रदेश अस्तित्‍व में आया। इसके घटक राज्‍य मध्‍यप्रदेश, मध्‍यभारत, विन्‍ध्‍य प्रदेश और भोपाल थे, जिनकी अपनी विधानसभाएं थीं। डॉ. पटटाभि सीतारामैया मध्यप्रदेश के पहले राज्यपाल हुए। जबकि पहले मुख्यमंत्री के रूप में पंडित रविशंकर शुक्ल ने शपथ ली थी। वहींपंडित कुंजी लाल दुबे को मध्यप्रदेश का पहला अध्यक्ष बनाया गया।

भोपाल चुनी गई राजधानी: 1 नवंबर 1956 को प्रदेश के गठन के साथ ही इसकी राजधानी और विधानसभा का चयन भी कर लिया गया। मध्यप्रदेश के राजधानी के रूप में भोपाल को चुना गया। इस राज्य का निर्माण तत्कालीन सीपी एंड बरार, मध्य भारत, विंध्यप्रदेश, और भोपाल राज्य को मिलाकर हुआ। ऐसा कहा जाता है कि भोपाल को राजधानी बनाए जाने में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. शंकर दयाल शर्मा, भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्ला खान और पं. जवाहर लाल नेहरू की महत्वपूर्ण भूमिका रही। राजधानी बनाए जाने के बाद 1972 में भोपाल जिला के रूप में घोषित हो गया। अपने गठन के वक़्त मध्यप्रदेश में 43 जिले थे। आज मध्यप्रदेश में 51 जिले हैं। कई लोगों का यहां तक मानना है कि जवाहरलाल नेहरू इसे राजधानी बनाना चाहते थे।

ग्वालियर बनाई जानी थी राजधानी

राजधानी के लिए दावा ग्वालियर के साथ इंदौर का था। यही नहीं जबलपुर भी नए राज्य की राजधानी का दावा करने लगा। दूसरी ओर भोपाल के नबाब भारत के साथ संबंध ही नहीं रखना चाहते थे। वे हैदराबाद के निजाम के साथ मिलकर भारत का विरोध कर रहे थे। केन्द्र सरकार नहीं चाहती थी कि देश के हृदय स्थल में राष्ट्र विरोधी गतिविधियां बढ़ें। इसके चलते सरदार पटेल ने भोपाल पर पूरी नजर रखने के लिए उसे ही मध्य प्रदेश की राजधानी बनाने का निर्णय लिया।

मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस आज शिवपुरी में धूमधाम से मनाया गया

*करुणेश शर्मा संपादक*

शिवपुरी मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस आज तात्या टोपे प्रांगण में प्रशासन ने धूमधाम से मनाया इस अवसर पर कलेक्टर पुलिस अधीक्षक एसडीओपी पुलिस एडिशनल एसपी जिला पंचायत सीईओ एवं बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी व नागरिक मौजूद थे इस अवसर पर महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पत्रकार श्री प्रेम नारायण नागर को कलेक्टर व एसपी ने पुष्प पुष्प मालाएं देकर सम्मानित किया इस अवसर पर सारे पत्रकार गण मौजूद थे द न्यूज़ लाइट इस अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर रिपोर्ट दी
इस अवसर पर कलेक्टर महोदय ने प्रशासनिक अधिकारियों को शपथ दिलवाए.

उद्धव की दो टूक- ‘सीएम पद पर किसी का दावा परमानेंट नहीं, बीजेपी, कांग्रेस और एनसीपी के भी टच में हूं’

उद्धव ठाकरे ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले मेरे व अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस के बीच सत्ता के बराबर बंटवारे के फॉर्म्यूले पर फैसला हुआ था। हम चाहते हैं कि उस समय जैसा निर्णय हुआ था वैसा ही हो।

महाराष्ट्र में चुनाव परिणाम की घोषणा के 8 दिन बीतने के बाद भी सरकार गठन को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं हो पाई है। बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के बाद भी भाजपा-शिवसेना गठबंधन में अभी सीएम पद और सत्ता के बराबर बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है।

इस बीच शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा को दो टूक कहा है कि मुख्यमंत्री पद पर किसी का भी दावा स्थायी नहीं है। उद्धव ठाकरे ने कहा है कि वह भाजपा के साथ ही कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के संपर्क में हैं। शिवसेना प्रमुख के बयान से यह साफ है कि वह राज्य में सरकार गठन के लिए भाजपा के अलावा अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।

उद्धव ठाकरे ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले मेरे व अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस के बीच सत्ता के बराबर बंटवारे के फॉर्म्यूले पर फैसला हुआ था। हम चाहते हैं कि उस समय जैसा निर्णय हुआ था वैसा ही हो। शिवसेना प्रमुख ने कहा कि कोई भी मुख्मंत्री की कुर्सी पर अपना स्थायी दावा नहीं ठोक सकता है। मैं भाजपा, कांग्रेस और एनसीपी के संपर्क में भी हूं।

बृहस्पतिवार को शिवसेना नेता व सांसद संजय राउत ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में राउत ने कहा कि इसे शिष्टाचार के नाते होने वाली मुलाकात बताया। राउत ने कहा कि मैं पवारसाहेब से मिलता रहा हूं… इस बार मैं उन्हें दिवाली की शुभकामनाएं देने गया था।

सरकार बनाने के लिए एनसीपी की समर्थन के सवाल पर राउत ने कहा, ‘मैं समझता हूं कि हमारे पार्टी प्रमुख ने पहले ही सारी चीजें स्पष्ट कर दी हैं… उन्होंने साफ कहा कि है कि  सभी विकल्प खुले हुए हैं।’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण के शिवसेना की तरफ से प्रस्ताव के इंतजार वाली टिप्पणी पर राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह किस-किस के संपर्क में हैं।

इससे पहले शिवसेना प्रमुख ने भाजपा विधायक दल के नेता और सीएम देवेंद्र फडणवीस की उस टिप्पणी पर नाखुशी व्यक्त की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा शिवसेना के बीच सत्ता के बराबर बंटवारे को लेकर कोई बात नहीं हुई थी।

छठ पूजा का व़त शुरु 36 घंटे निर्जला उपवास रविवार सूर्य अर्घ्य देने के साथ संपन्न होगा.

रविवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ व्रत संपन्न हो जाएगा और छठव्रती अन्न-जल ग्रहण करेंग
(Chhath) गुरुवार से नहाय-खाय के विधि-विधान के साथ शुरू हो चुका है. दूसरे दिन यानि आज खरना पर भगवान भास्कर को भोग लगाने के बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास (Fasting) शुरू होगा. इस दिन को लोक मान्यताओं में खरना के नाम से जाना जाता है. इसके प्रसाद में में चावल, चने की दाल, पूरी, गन्ने का रस या गुड़ से बनी रसिया जैसी चीजें बनाई जाती हैं. गोधूली बेला (सूर्यास्त से पहले का पहर) में भगवान सूर्य के प्रतिरूप को लकड़ी की पाटिया पर स्थापित करने के बाद पारंपरिक रूप से पूजा की जाती है.

खरना के साथ शुरू होगा छठ व्रतियों का कठिन उपवास

पूजा के अंत में भगवान को सभी प्रसाद का भोग लगाया जाता है और फिर सभी लोग प्रसाद को सामूहिक रूप से ग्रहण करते हैं. इससे साथ ही छठ व्रतियों का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है. रविवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ व्रत संपन्न हो जाएगा और छठव्रती अन्न-जल ग्रहण करेंगे.

पूजा के अंत में भगवान को सभी प्रसाद का भोग लगाया जाता है और फिर सभी लोग प्रसाद को सामूहिक रूप से ग्रहण करते हैं. इससे साथ ही छठ व्रतियों का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है. रविवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ व्रत संपन्न हो जाएगा और छठव्रती अन्न-जल ग्रहण करेंगे.

परिजनों की मंगलकामना के लिए कठिन व्रत 

बता दें कि किसी भी अनहोनी से अपनी संतानों और परिजनों को सलामत रखने की मंगलकामना के साथ महिलाएं ये निर्जला व्रत रखती हैं. गौरतलब है कि अनुष्ठान  के पहले दिन गुरुवार को नहाय-खाय को छठव्रतियों ने कद्दू-भात बनाकर अपने परिजनों के साथ प्रसाद ग्रहण किया.

छठ व्रतियों को न हो कोई परेशानी- सीएम नीतीश

गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ने स्टीमर से दानापुर के नासरीगंज से पटना सिटी के कंगन घाट तक गंगा घाटों पर सफाई, सुरक्षा और स्वच्छता के इंतजाम का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने छठव्रतियों के आने-जाने के लिए सुगम रास्ते का प्रबंध करने के साथ-साथ पार्किंग की व्यवस्था और घाटों तक ठीक ढंग से बैरिकेडिंग करने का आदेश दिया.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने छठ पूजा की दी बधाई 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने छठ पर प्रदेश और देशवासियों को बधाई दी है. कहा है कि लोक आस्था का यह महापर्व आत्मानुशासन का पर्व है, जिसमें लोग आत्मिक शुद्धि और निर्मल मन से अस्ताचल और उदीयमान सूर्य को अर्घ देते हैं.

मुख्यमंत्री ने छठ पर भगवान भास्कर से राज्य की प्रगति, सुख, समृद्धि, शांति व सौहार्द के लिए प्रार्थना की. उन्होंने राज्यवासियों से अपील की कि वे इस पर्व को आपसी प्रेम, पारस्परिक सद्भाव और शांति के साथ मनाएं.

कांग़ेस की शिवसेना को सलाह हिम्मत है तो बना ले अपना मुख्यमंत्री

मुंबई: महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर शिवसेना और बीजेपी में कोई बात बनती अभी तक दिख नहीं रही है. शिवसेना 50-50 फॉर्मूले पर अड़ी हुई है. इस बीच कांग्रेस ने शिवसेना पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं. शिवेसना को खुला ऑफर दिया और मुख्यमंत्री पद तक देने की बात कही है. पार्टी के सीनियर नेता और राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई ने कहा कि अगर शिवसेना हमारे साथ आती है तो मुख्यमंत्री उन्हीं का होगा.

हुसैन दलवई ने कहा कि अगर शिवसेना ढाई ढाई साल के मुख्यमंत्री की बात कर रही है लेकिन बीजेपी वो मान नहीं रही है. अब शिवसेना इस पर क्या करती है ये हमलो देखेंगे. इसके साथ ही दलवई बोले, ‘’शिवसेना अगर प्रपोजल देती है तो शिवसेना का मुख्यमंत्री बन सकता था. लेकिन उसके लिए जो डेयरिंग (हिम्मत) चाहिए वो शिवसेना के पास नहीं है.’’
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बता दें कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस चौथे नंबर पर रही है. इस बार के चुनाव में कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत दर्ज की है. उसने शरद पवार की पार्टी एनसीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. एनसीपी राज्य की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है. एनसीपी ने 54 सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं शिवसेना के पास 56 सीटें हैं. तीनों के आंकड़े को मिला दें तो ये 154 होता है. यानी तीनों मिलकर सरकार बना सकती है. शिवसेना को सीएम पद देने के लिए कांग्रेस राजी है. इस पर एनसीपी ने कोई बयान नहीं दिया है. हालांकि बुधवार को पार्टी के सीनियर नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा था कि अगर हालात बदलते हैं तो वे देखेंगे कि क्या किया जा सकता है..

शिवसेना अपने मांग के साथ डटी हुई है कि ढाई ढाई दोनों पार्टियों के सीएम हों. संजय राउत बुधवार को कहा था कि महाराष्ट्र की कुंडली तो हम ही बनाएंगे. कुल मिलाकर शिवसेना लगातार अपने कड़े तेवर जाहिर किए हुए है. अब महाराष्ट्र की सियासत में ये सब कितने दिन और चलेगा, ये देखना दिलचस्प होगा.

मध्यप्रदेश के मंत्री दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ धरना प़दर्शन करेंगे

भोपाल। मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में मंत्रालय में मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अतिवृष्टि की वजह से प्रदेश के 55 लाख किसान प्रभावित हुए हैं, इससे 16 हजार करोड़ रुपए की फसलों को नुकसान हुआ है। किसानों को मुआवजा देने के लिए सभी मंत्री अपनी एक महीने की सैलरी देंगे। इसके साथ ही सभी मंत्री केंद्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश से किए जा रहे भेदभाव के खिलाफ दिल्ली में धरना देंगे। मंत्री शर्मा ने कहा कि सीएम कमलनाथ किसानों के लिए उपवास रखेंगे।

मंत्रिमंडल की बैठक में इसके अलावा भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिसमें अवैध होर्डिंग को लेकर बात हुई। अब शहरों में होर्डिंग लगाने के लिए नगर निगम की अनुमति लेना जरूरी होगा। मध्यप्रदेश सरकार का 17 साल पुराना विमान बेचने पर भी सहमति बन गई है इसके साथ नया विमान खरीदने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई। वरिष्ठ पत्रकार सम्मान निधि बढ़ाई गई है।