आईपीसी और मोटर वीइकल ऐक्ट दोनों के तहत केस दर्ज किया जा सकता है सुप़ीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रैफिक नियम तोड़नेवालों पर सख्ती दिखाते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि ट्रैफिक नियम तोड़ने, रैश ड्राइविंग से होनेवाले हादसों में आईपीसी और मोटर वीइकल ऐक्ट दोनों के तहत केस दर्ज किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि ट्रैफिक नियमों की अनदेखी या खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने से होनेवाले हादसों में दोनों ही प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया जाना उचित है।
गुवाहाटी हाई कोर्ट का फैसला पलटा सुप्रीम कोर्ट ने एक केस की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन मामले में आईपीसी की धारा नहीं लगाई जा सकती। दोषी को मोटर वीइकल ऐक्ट के तहत ही सजा दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने इस फैसले को पलट दिया। दो जजों की बेंच ने कहा, ‘ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का स्तर अलग-अलग होता है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषी के खिलाफ आईपीसी और मोटर वीइकल ऐक्ट दोनों के तहत केस चल सकता है।’

IPC और MV ऐक्ट दोनों के तहत मिल सकती है सजा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, मोटर वीइकल ऐक्ट स्पेशल कानून है और इसे सामान्य कानून से अलग का दर्जा प्राप्त है। बेंच ने अपने फैसले में खास तौर पर कहा कि रोड ऐक्सिडेंट से संबंधित घटनाओं में किसी अपराध में दोषी करार दिए शख्स को आईपीसी और मोटर वीइकल ऐक्ट दोनों के ही तहत सजा दी जा सकती है।

आईपीसी का उद्देश्य दोषी को सजा, एमवी मुआवजे के लिए
कोर्ट ने अपने फैसेल में कहा कि मोटर वीइकल ऐक्ट का प्राथमिक उद्देश्य हादसे में पीड़ित परिवार को उपयुक्त मुआवजा देना है। आईपीसी का उद्देश्य कानून के नजर में दोषी को सजा देना है। आईपीसी अपने मूल रूप में दंडात्मक और अलग प्रकृति का कानून है।

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