हर्ष फायर, डीजे और बारात के नियम बनाये सरकार ने पड़ सकते कानूनी पचड़े में.


नई दिल्ली. दिवाली के तुरंत बाद ही शादियों का मौसम (Wedding Season) शुरू हो जाएगा. एक दिन में कई बरातें निकलेंगी और जगह-जगह पंडाल सजेंगे. अगर आप भी शादी करने जा रहे हैं तो होशियार हो जाएं! कहीं ऐसा न हो कि आपकी शादी की खुशियों में खलल पड़ जाए. सरकार द्वारा अब सख्ती के साथ लागू किए गए इन 6 नियमों का शादी के दौरान खयाल रखें वरना दूल्हा ससुराल की जगह जेल भी जा सकता है.

कुछ नियम नए तो कुछ पुराने हैं, लेकिन इनकी अनदेखी के चलते होने वाली परेशान को लेकर सरकार सख्ती के मूड में है. शादी और खुशियों के नाम पर अब सरकार से ढिलाई मिलने की उम्मीद कम ही है. अगर आप कड़ाई के साथ इन नियमों का पालन नहीं करेंगे तो आपकी शादी की खुशियों के रंग में भंग पड़ सकता है.

नियम नंबर एक- हर्ष फायरिंग

शादी ही नहीं दूसरे मौकों पर भी सरकार ने हर्ष फायरिंग पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है. अगर कहीं किसी समारोह में हर्ष फायरिंग होती है तो बैंक्‍वेट हॉल संचालक और समारोह के आयोजक पुलिस को सूचना देंगे. लेकिन पुलिसको अगर फायरिंग के बारे में कोई और सूचना देता है या बाद में कोई वीडियो सामने आता है, हर्ष फायरिंग के चलते किसी की मौत या उसका घायल होना छिपाया जाता है तो संचालक और आयोजक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

नियम नंबर दो- प्लास्टिक पर रोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक को लेकर गंभीर हैं. कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मौकों पर उन्होंने इस पर पूरी तरह से बैन की बात कही है. 2 अक्टूबर गांधी जयंती के मौके पर भी इसका जोरशोर से प्रचार किया गया था. अगर शादी के दौरान प्लास्टिक मिलती है तो उसे जब्त कर लिया जाएगा. वहीं, ज्यादा मात्रा में मिलने पर आयोजक के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी.

नियम नंबर तीन- सड़क पर जाम

अब सड़क पर नाचते-गाते, हंसी-खुशी बरात लेकर जा रहे हैं, लेकिन आपको इस बात का खयाल ही नहीं रहता कि आपकी वजह से पीछे जाम लगा हुआ है. इसमें कुछ जरूरतमंद लोग भी फंसे हो सकते हैं. कई बार तो खुद दूल्हा ही जाम में फंस जाता है. अगर ऐसा हुआ तो पुलिस इस मामले में गिरफ्तारी भी कर सकती है.

नियम नंबर चार- आतिशबाजी बंद

हल्की सर्दी के इस मौसम में कई तरह से हवा में प्रदूषण की मात्रा बढ़ जाती है. खासतौर से दिल्ली-एनसीआर में तो इसे कम करने को लेकर कई तरह की कोशिश की जाती हैं. इसी को देखते हुए शादी-समारोह के दौरान सरकार ने आतिशबाजी को बंद कर दिया है. अगर कहीं आतिबाजी होती है तो उस मामले में विस्फोटक अधिनियम के तहत आयोजक पर मामला भी दर्ज हो सकता है.

नियम नंबर पांच- 100 मीटर चलेगी बरात

बरात अगर मुख्य सड़क पर है तो आप ये तय मान लिजिए कि जाम तो लगेगा ही. शायद इसी को देखते हुए बरात चढ़ाने की दूरी के मामले में भी सरकार ने एक नियम बना दिया है. अगर आप बरात चढ़ा रहे हैं तो किसी भी हाल में बरात 100 मीटर से ज्यादा दूर नहीं चलनी चाहिए. मतलब जहां बरात जानी है उस जगह से 100 मीटर की दूरी से आप बरात चढ़ा सकते हैं.

नियम नंबर छह- नहीं बढ़ेगी डीजे की आवाज

रात 10 बजे के बाद तो डीजे बजाने पर पहले से ही रोक है. इस नियम का उल्लघंन करने पर कई लोग हवालात का मुंह भी देख चुके हैं. लेकिन, इसी में सरकार ने एक और नियम जोड़ दिया है और वो है तेज आवाज में डीजे न बजाना.

आईपीसी और मोटर वीइकल ऐक्ट दोनों के तहत केस दर्ज किया जा सकता है सुप़ीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रैफिक नियम तोड़नेवालों पर सख्ती दिखाते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि ट्रैफिक नियम तोड़ने, रैश ड्राइविंग से होनेवाले हादसों में आईपीसी और मोटर वीइकल ऐक्ट दोनों के तहत केस दर्ज किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि ट्रैफिक नियमों की अनदेखी या खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने से होनेवाले हादसों में दोनों ही प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया जाना उचित है।
गुवाहाटी हाई कोर्ट का फैसला पलटा सुप्रीम कोर्ट ने एक केस की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन मामले में आईपीसी की धारा नहीं लगाई जा सकती। दोषी को मोटर वीइकल ऐक्ट के तहत ही सजा दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने इस फैसले को पलट दिया। दो जजों की बेंच ने कहा, ‘ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का स्तर अलग-अलग होता है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषी के खिलाफ आईपीसी और मोटर वीइकल ऐक्ट दोनों के तहत केस चल सकता है।’

IPC और MV ऐक्ट दोनों के तहत मिल सकती है सजा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, मोटर वीइकल ऐक्ट स्पेशल कानून है और इसे सामान्य कानून से अलग का दर्जा प्राप्त है। बेंच ने अपने फैसले में खास तौर पर कहा कि रोड ऐक्सिडेंट से संबंधित घटनाओं में किसी अपराध में दोषी करार दिए शख्स को आईपीसी और मोटर वीइकल ऐक्ट दोनों के ही तहत सजा दी जा सकती है।

आईपीसी का उद्देश्य दोषी को सजा, एमवी मुआवजे के लिए
कोर्ट ने अपने फैसेल में कहा कि मोटर वीइकल ऐक्ट का प्राथमिक उद्देश्य हादसे में पीड़ित परिवार को उपयुक्त मुआवजा देना है। आईपीसी का उद्देश्य कानून के नजर में दोषी को सजा देना है। आईपीसी अपने मूल रूप में दंडात्मक और अलग प्रकृति का कानून है।

तलाक का मामला: जज को कराना पड़ा एक पति पत्नि की तीसरी संतान का डीएनए टेस्ट पति बोला था मुझसे नहीं .

ग्वालियर  में एक बेहद ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जहां पत्नी के चरित्र पर पति को शक था. इसके समाधान के लिए पत्नी को कैरेक्टर टेस्ट से गुजरना पड़ा. यह वाकया है ग्वालियर का , जहां पत्नी को कोर्ट के आदेश पर डीएनए टेस्ट कराना पड़ा.

दरअसल ग्वालियर के कुटुंब न्यायालय में एक पति ने अपनी पत्नी से तलाक की अर्जी लगाई थी, लेकिन जब जज को इसकी वजह पता चली तो वह हैरान रह गए. पति ने तलाक लेने के पीछे तीसरी संतान को वजह बताते हुए कहा कि पत्नी करीब एक साल से उससे अलग दूसरे शहर में रह रही है. ऐसे में यह संतान उसकी हो ही नहीं सकती.

कोर्ट में जब पत्नी को बुलाया गया तो उसने अपने पति के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि यह संतान उसे पति से ही मिली है. कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद तीसरी संतान और पति दोनों के डीएनए टेस्ट कराने के निर्देश दिए थे. अब डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट आते ही पत्नी का दावा सही और पति के आरोप झूठे साबित हुए.

डीएनए टेस्ट से साफ हो गया कि महिला की तीसरी संतान उसके पति से ही है. हालांकि पीड़िता के वकील की मानें तो पत्नी को अभी भी उसका हक नहीं मिला है क्योंकि डीएनए टेस्ट की परीक्षा पास करने के बावजूद पति उसे अपने साथ रखने को राजी नहीं है. दोनों पक्षों में समझौते की कोशिश जारी है.