मलीहा लोधी पर पाकिस्तान का पकड़ा गया झूठ, तो इमरान सरकार को देनी पड़ी सफाई

इस्लामाबाद, । संयुक्त राष्ट्र(यूएन) में पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी की बर्खास्तगी से जुड़ी ख़बर आने के बाद से ही पाकिस्तान में खलबली मच गई है। इस मामले पर पाकिस्तान सरकार की इतनी बेइज्जती हुई कि उन्हें अब इस मामले पर सफाई देनी पड़ी है। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने साफ किया है कि मलीहा लोधी को उनके पद से नहीं हटाया गया है।

दरअसल, कुछ दिनों पहले एक जानकारी आई थी कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान जैसे ही संबोधित करने के बाद पाकिस्तान लौटे तो उन्होंने मलीहा लोधी को उनके पद से हटा दिया। जिसके बाद अब इस मामले पर पाकिस्तान की ओर से सफाई दी गई है।

पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने इसपर सफाई देते हुए कहा कि पिछले दिनों एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि  संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की प्रतिनिधि मलीहा लोधी को उनके पद से हटा दिया गया थाष इस बात में कोई सच्चाई नहीं है कि मलीहा लोधी को किसी भी कारण से उनके पद से हटा दिया गया था। विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद ने शुक्रवार को एक ट्वीट में यह बात कही।

न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश कार्यालय ने मलीहा लोधी की यूएन में नई नियुक्ति के पीछे के कारणों को बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया था। विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने उनके बारे में जो कहा था, उसे दोहराते हुए फैजल ने मलीहा लोधी की सराहना की।

पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ‘उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया और जैसा कि विदेश मंत्री कुरैशी ने कहा है, उन्होंने पाकिस्तान को भेद और प्रतिबद्धता के साथ अपनी सेवाएं दीं और कौशल और समर्पण के साथ प्रधानमंत्री(इमरान खान) की सफल UNGA यात्रा का आयोजन किया।

विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि मुनीर अकरम लोधी की जगह संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के नए स्थायी प्रतिनिधि के रूप में आए।अकरम जो पहले 2002 से 2008 तक एक ही पद पर काम कर चुके हैं, अब संयुक्त राष्ट्र के न्यूयॉर्क मुख्यालय में तैनात रहेंगे।

कमलनाथ के कारण कांग्रेस में कलह, दो गुटों के बीच मारपीट |

भोपाल। राजधानी के रोशनपुरा चौराहा स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में शुक्रवार को कार्यकर्ताओं की समस्याओं को दूर करने के लिए बुलाई गई बैठक में जमकर बवाल हुआ। प्रभारी मंत्री डॉ. गोविंद सिंह (Dr. Govind Singh) व जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा (Minister PC Sharma) के सामने ही देखते ही देखते कार्यकर्ताओं के दो गुट आपस में भिड़ गए। उनके बीच मारपीट भी हुई। विवाद की जड़ मुख्यमंत्री कमलनाथ (Chief Minister Kamal Nath,) द्वारा भोपाल मेट्रो के नामकरण को लेकर थी। दरअसल, बीते दिनों मेट्रो शिलान्यास कार्यक्रम में भोपाल मेट्रो का नाम ‘भोज मेट्रो” रखा गया था।

पूर्व महापौर विभा पटेल ने सगीर का माइक छीनने की कोशिश की

कांग्रेस की बैठक की शुरुआत ही मेट्रो के नाम पर आपत्ति को लेकर हुई। इस पर कांग्रेसियों के दो गुट बंट गए। कांग्रेस नेता आसिफ जकी, अमित शर्मा, मोनू सक्सेना ने मुख्यमंत्री की मंशा पर कांग्रेसी नेताओं द्वारा सवाल खड़े करने का विरोध किया। वहीं निगम नेता प्रतिपक्ष मो. सगीर ने भोज मेट्रो नाम पर आपत्ति ली। इस दौरान पूर्व महापौर विभा पटेल ने सगीर का माइक छीनने की कोशिश की। विवाद बढ़ा तो दोनों कार्यकर्ताओं के दो गुटों में गाली-गलौच शुरू हो गई। देखते ही देखते आसिफ जकी व मो. सगीर के समर्थकों में मारपीट शुरू हो गई।

बैठक के बाद भी हुआ विवाद

बैठक में विवाद को सुलझाने के लिए कांग्रेस जिलाध्यक्ष कैलाश मिश्रा ने मोर्चा संभाला। दोनों ही पक्षों को समझाइश भी दी, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया। अन्य कार्यकर्ताओं की आपत्ति के बाद दोनों ही पक्ष बाहर निकल गए। वहां भी जमकर विवाद शुरू हुआ।

वरिष्ठ नेताओं की भी अनदेखी

बैठक में मंत्री पीसी शर्मा, डॉ. गोविंद सिंह के अलावा जिला व प्रदेश कांग्रेस के भी कई पदाधिकारी मौजूद थे। पीसी शर्मा ने कार्यकर्ताओं को शांत कराने व अनुशासन का पाठ भी पढ़ाने की कोशिश भी की, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के निर्देशों को भी दरकिनार कर वे आपस में भिड़ते दिखाई दिए।

वाराणसी में 252 साल बाद भी जस की तस है मां दुर्गा की मिट्टी से बनी प्रतिमा

वाराणसी
ज्ञान-विज्ञान के दौर में बनारस की एक दुर्गा प्रतिमा किसी चमत्‍कार से कम नहीं है। बांस के फ्रेम में माटी-पुआल से बनी प्रतिमा 252 सालों में कई काल खंडों को पार कर चुकने के बाद भी जस की तस है। यहां तक कि मिट्टी भी नहीं झड़ी है। शिल्‍प के बेजोड़ नमूने वाली इस प्रतिमा को देखने कोने-कोने से लोग बनारस पहुंचने लगे हैं। अपने ढंग की इतनी पुरानी प्रतिमा शायद ही कहीं और देखने को मिले।

वैज्ञानिक भी हैं हतप्रभ

वाराणसी लघु बंगाल के रूप में भी प्रसिद्ध है और कई विशिष्‍टताओं के लिए भी जानी जाती है। यहां के मदनपुरा इलाके की पुरानी दुर्गाबाड़ी में वर्ष 1767 से स्‍थापित मां की प्रतिमा देख वैज्ञानिक भी हतप्रभ हैं। क्षरण रोकने के लिए न रासायनिक लेपन और न कोई अन्‍य प्रबंध फिर भी पांच फुट की अद‌्भुत प्रतिमा जैसे पहले वैसी ही आज भी है।

यथावत है मां की प्रतिमा

नवरात्र में दुर्गापूजा के समय इस प्रतिमा की स्‍थापना पश्चिम बंगाल के हुगली निवासी साधारण मुखोपाध्‍याय परिवार के मुखिया ने की थी। तब से प्रतिमा उसी वेदिका पर यथावत है जिसपर प्राण प्रतिष्‍ठा की गई थी

देवी ने किया निषेध

मुखोपाध्‍याय परिवार की नौवीं पीढ़ी के वर्तमान प्रतिनिधि प्रशांत मुखर्जी की माने तो विसर्जन का दिन आने पर देवी ने उनके पूर्वजों को काशीवास की इच्‍छा से विसर्जन का निषेध किया था। इसके बाद किसी ने कभी प्रतिमा विसर्जन के लिए सोचा ही नहीं। नियमित पूजन के साथ नवरात्र में प्रतिमा के शस्‍त्र-वस्‍त्र बदले जाते हैं।

सोलहवीं सदी की छाप

सदी तक समय के थपेड़े झेलने के बाद भी जस की तस प्रतिमा में सोलहवीं सदी की मूर्ति शिल्‍प कला की स्‍पष्‍ट छाप दिखाई देती है। तैलीय रंगो से गढ़ी दुर्गा प्रतिमा के साथ गणेश, लक्ष्‍मी, सरस्‍वती, कार्तिकेय और महिषासुर भी है। नवरात्र के दिनों में बंगीय समाज के लोग इस प्रतिमा का दर्शन जरुर करते हैं।

उत्‍सव का उल्‍लास

नवरात्र की षष्‍ठी तिथि शुक्रवार को शंख ध्‍वनि और ढाक की थाप के बीच दुर्गा प्रतिमाओं को पूजा पंडालों में लाकर स्‍थापित किया गया। इसी के साथ हर तरफ उत्‍सव का उल्‍लास बिखरा है। पंडालों की सजावट देखते ही बन रही है। नई सड़क स्थित सनातन धर्म के पूजा पंडाल में नौ फुट ऊंची दुर्गा प्रतिमा अचानक खड़ी होकर 16 फुट ऊंची मां काली के स्‍वरूप में परिवर्तित हो जाएगी। यह सारी गतिविधि इलेक्ट्रॉनिक शो के माध्‍यम से होगी। यहां पंडाल को बाहुबली के राज महल का स्‍वरूप प्रदान किया गया है।

7th Pay Commission: नरेंद्र मोदी सरकार से इन्हें खुशखबरी, बढ़कर मिलेगी सैलरी!

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार ने फेस्टिव सीजन में अपने कई कर्मचारियों को खुशखबरी दी है। दरअसल, केंद्र ने हाल ही में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत सरकारी कैंटीनों में काम करने वाले कन्फेक्शनर्स और असिस्सटेंट कन्फेक्शनर्स को कुकिंग अलाउंस देने का ऐलान किया है। सरकार इस भत्ते के रूप में इन कर्मचारियों को एक-एक हजार रुपए देगी और यह बढ़ोतरी एक अक्टूबर 2019 से तत्काल प्रभाव में आएगी। सरकार इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकाप ने अपने आदेश में केंद्र सरकार की कैंटीनों में नॉन स्टैटुअचरी डिपार्टमेंटल कैंटीनों में कार्यरत सैकड़ों असिस्टेंट कुक्स से कहा है कि वह उन्हें रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस भी मुहैया कराएगी।

जानकारी के अनुसार, इन कर्मचारियों को साल 2016 से पे पैनल का लाभ मिल रहा है। चूंकि, पैनल बेसिक पे की रकम बढ़ा चुका है, इसलिए भत्तों को खत्म कर दिया गया है। हालांकि, सरकार की ओर से कुछ भत्ते कर्मचारियों की मांग के बाद दोबारा मुहैया कराए गए।

इसी बीच, खबर है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों द्वारा लंबे समय से की जा रही डीए में बढ़ोतरी की मांग पूरी हो सकती है। सूत्रों के हवाले से कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि जल्द ही केंद्रीय कैबिनेट की इस सिलसिले में बैठक हो सकती है, जिसमें इस संदर्भ में फैसला भी हो सकता है।

हालांकि, इस चीज में महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव अड़ंगा बन सकते हैं। दरअसल, इन्हीं दोनों राज्यों में विस चुनाव की वजह से सरकार को पहले इस चीज के लिए पहले केंद्रीय चुनाव आयोग (भारतीय निर्वाचन आयोग) की अनुमति चाहिए होगी।

बता दें कि केंद्रीय कर्मचारी लंबे वक्त से न्यूनतम वेतन को बढ़ाने और फिटमेंट फैक्टर दुरुस्त करने की मांग पर अड़े हैं। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में भी उन्हें इस संदर्भ में कोई अच्छी खबर हाथ न लगी थी। सरकार के सूत्रों और मामले से जुड़े जानकारों की मानें तो केंद्र इस बाबत गंभीरता और गहनता से विचार कर रहा है। संभवतः दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव निपटने के बाद इस मामले में सरकार बड़ा ऐलान कर सकती है।

श्याम बेनेगल- पीएम को हमारा पत्र महज अपील था. मॉब लिंचिंग पर प़ाथमिकी दर्ज होने पर बोले.

अपने और 48 अन्य हस्तियों के खिलाफ कथित राजद्रोह का मामला दर्ज होने के बाद प्रसिद्ध फिल्मकार श्याम बेनेगल ने शुक्रवार को कहा कि इस ‘मामले’ का कोई मतलब नहीं बनता है.

श्याम बेनेगल ने मॉब लिंचिंग पर जताई थी चिंताबेनेगल ने पीएम मोदी को लिखा था खुला पत्रबेनेगल ने कहा- मेरा पत्र एक अपील था, धमकी नहीं

मुंबई : अपने और 48 अन्य हस्तियों के खिलाफ कथित राजद्रोह का मामला दर्ज होने के बाद प्रसिद्ध फिल्मकार श्याम बेनेगल (Shyam Benegal) ने शुक्रवार को कहा कि इस ‘मामले’ का कोई मतलब नहीं बनता है क्योंकि भीड़ की हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता प्रकट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) को लिखा गया खुला पत्र महज अपील था न कि कोई धमकी. मुजफ्फरपुर में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है. उनमें अनुराग कश्यप, अपर्णा सेन, मणिरत्नम, अडूर गोपालकृष्णन, सौमित्र चटर्जी, शुभा मुद्गल और इतिहासकार रामचंद्र गुहा भी शामिल हैं.

बेनेगल ने ‘पीटीआई- भाषा’ से कहा, ‘‘यह पत्र महज एक अपील था. लोगों का इरादा जो भी हो, जो प्राथमिकी स्वीकार कर रहे हैं और हम पर इन सभी तरह के आरोप लगा रहे हैं, इन बातों का कोई मतलब नहीं बनता है. यह प्रधानमंत्री से अपील करने वाला पत्र था. यह कोई धमकी या अन्य बात नहीं थी जो शांति बिगाड़ती या समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करती है.”

पत्र में कहा गया था कि मुसलमानों, दलितों और अन्य अल्पसंख्यकों को भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या करना तत्काल रूकना चाहिए. बिना असंतोष के लोकतंत्र नहीं होता है. जयश्रीराम भड़काऊ नारा हो गया है. वैसे अपर्णा सेन ने प्राथमिकी पर कुछ कहने से इनकार कर दिया.

उन्होंने कहा कि मामला अदालत के विचाराधीन है. फिल्मकार गोपालकृष्णन ने कहा कि उनके और अन्य हस्तियों पर राजद्रोह का मामला दर्ज किये जाने पर उन्हें बिल्कुल विश्वास नहीं होता. 

मुंबई आरे कॉलोनी 2700 पेड़ काटने पर विरोध बढ़ा, हिरासत में ली गईं प्रियंका चतुर्वेदी

शिवसेना खुलकर सीएम देवेंद्र फडणवीस का विरोध कर रही है. आरोप है कि करीब 400 पेड़ रातो रात काट दिए गए. कल बॉम्बे हाईकोर्ट ने पेड़ काटने के खिलाफ दायर याचिकाएं इस आधार पर खारिज कर दी कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी में लंबित है

मुंबईमुंबई के गोरेगांव में आरे कॉलोनी में 2700 पेड़ काटने पर विरोध बढ़ता जा रहा है. मुंबई मेट्रो के लिए कार शेड बनाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने आरे कॉलोनी के जंगल के 2702 पेड़ काटने के आदेश दे दिए हैं. कल इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने पेड़ काटने के आदेश के खिलाफ दायर हुईं सभी याचिकाएं खारिज कर दी थी. अब इलाके में धारा 144 लगाकर पेड़ों की कटाई शुरू की गई है. इसका विरोध करने पर शिवसेना की उपनेता प्रियंका चतुर्वेदी को हिरासत में ले लिया गया है.

ये मुंबईकरो का मुद्दा है प्रियंका चतुर्वेदी

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, ‘’जो फैसला आया है, हम उसके खिलाफ हैं. दूसरे भी ऑप्शन थे पर उसे नजरंदाज कर दिया गया. लोगों से बात भी नहीं की गई. इससे बहुत गलत संदेश गया है.’’ उन्होंने कहा, ‘’चुनाव सिर पर हैं. क्या इस मुद्दे को लेकर शिवसेना और बीजेपी के बीच में टकराव नहीं होगा? ये मुंबईकरो का मुद्दा है. बीजेपी या शिवसेना नहीं.’’

करीब 400 पेड़ रातो रात काट दिए गए– कार्यकर्ताओं का आरोप

कल बॉम्बे हाईकोर्ट ने पेड़ काटने के खिलाफ दायर याचिकाएं इस आधार पर खारिज कर दी कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी में लंबित है. इसके बाद पेड़ काटने के लिए एमएमआरसीएल के लोग पहुंचे गए तो आरे बचाओ मुहिम के कार्यकर्ता उनसे भिड़ गए. इस दौरान जमकर हाथापाई भी हुई. झ़ड़प इतनी बढ़ गई कि पुलिस ने विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया. आरोप है कि करीब 400 पेड़ रातो रात काट दिए गए.



आदित्य ठाकरे ने किया आरे का समर्थन

‘आरे बचाओ मुहिम’ को लेकर महाराष्ट्र सरकार में ही दो फाड़ हो गया है. बीजेपी सरकार ने पेड़ काटने की इजाजत दी लेकिन शिवसेना ने खुलकर विरोध कर दिया है. आदित्य ठाकरे ने इसी बहाने टविटर पर पीएम मोदी के जलवायु बचाओ मुहिम पर निशाना साध दिया है.

आदित्य ठाकरे ने कहा,”जलवायु परिवर्तन पर केंद्र सरकार के मंत्रालय का कोई मतलब नहीं है. मुंबई मेट्रो के निर्माण के साथ प्लास्टिक प्रदूषण के बारे में बात करना है संवेदनहीनता है. आरे के आसपास के क्षेत्र में पर्यावरण को तबाह किया जा रहा है. अहंकार की लड़ाई इसे बनाने के उद्देश्य को नष्ट कर रही है.” आदित्य ठाकरे ने आगे कहा, ” मुबई मैट्रो उन सभी चीजों को खत्म कर रहा है जिसकी बात भारत ने यूएन में की थी.”


सजय राउत ने भी साधा निशाना

आदित्य ठाकरे के रुख से साफ है कि मुंबईकर के मुद्दे पर शिवसेना मुंबईकर के साथ रहेगी न कि बीजेपी के फैसले के साथ. शिवसेना खुलकर सीएम देवेंद्र फडणवीस का विरोध कर रही है. संजय राउत ने टविटर पर एक कार्टून पोस्ट करके निशाना साधा है. कार्टून इसलिए क्योंकि सरकार कह रही है कि आरे फोरेस्ट लैंड नहीं है. पेड़ काटे ही जाएंगे.

लंदन में 64 साल पुराना निजाम के खजाने से जुड़ा केस भारत ने जीता

लंदन में 64 साल पुराना निजाम के खजाने से जुड़ा केस भारत ने जीतानिजाम के मंत्री मोईन ने 1948 में आनन-फानन में जमा कराया था पैसा1948 की तुलना में अब संपत्ति की कीमत 3 अरब रुपये से ज्यादा हो गई

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को फिर से पाकिस्तान पर जीत मिली है. ब्रिटेन के एक हाई कोर्ट ने 64 साल पुराने हैदराबाद के 7वें निजाम मीर उस्मान अली खान के खजाने से जुड़े केस में भारत के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. ब्रिटिश कोर्ट ने पाकिस्तान को जोर का झटका देते हुए अपने फैसले में कहा कि लंदन के बैंक में जमा निजाम की रकम पर भारत और निजाम के उत्तराधिकारियों का हक है.

पाकिस्तान ने दावा किया था कि लंदन में पाकिस्तान हाई कमीशन के साथ हैदराबाद की निजाम सरकार ने 1948 में 1 मिलियन पाउंड जमा कराए थे. जिसकी वैल्यू बढ़कर अब 35 मिलियन पाउंड हो गई है. अब लंदन स्थित नेटवेस्ट बैंक में रखे 35 मिलियन पाउंड (करीब 3 अरब 8 करोड़ 40 लाख रुपये) अब निजाम के वंशज प्रिंस मुकर्रम जाह और उनके छोटे भाई मुफ्फखम जाह को मिलेंगे.

आनन-फानन में वित्त मंत्री ने जमा कराई राशि

हैदराबाद के निजाम ने स्थानीय लोगों की इच्छाओं के विरुद्ध जाते हुए आजाद रहने का फैसला किया और पाकिस्तान ने निजाम का समर्थन करते हुए उम्मीद थी कि यह पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) की तरह पाकिस्तान का तीसरा हिस्सा हो सकता है.

इस बीच निजाम ने भारत की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ पाकिस्तान से हथियार और शस्त्र की मांग की. हैदराबाद के निजाम के वित्त मंत्री और विदेश मंत्री नवाब मोईन नवाज जंग ने निजाम की ओर से ब्रिटेन के हबीब इब्राहिम रहिमटोला के खाते में 1,007,940 स्टर्लिंग पाउंड पाकिस्तानी उच्चायुक्त को हस्तांतरित कर दिया.

बाद में 1948 में हैदराबाद पर भारत ने आधिपत्य जमा लिया. निजाम मीर उस्मान अली खान ने बाद में कहा कि उनके मंत्री ने उनकी अनुमति के बिना धन हस्तांतरित कर दिया था.

1954 में निजाम ने किया केस

1954 में वह ब्रिटिश कोर्ट चले गए जिसमें उन्होंने पाकिस्तान हाई कमीशन के साथ जमा की गई राशि वापस करने की मांग की. लेकिन पाकिस्तान ने ऐसा नहीं किया. 2013 में निजाम के निधन तक यह केस चलता रहा.

इस बीच निजाम में लोगों के हित के लिए वेलफेयर ट्रस्ट का गठन किया. 1960 में उन्होंने अपने पोतों को ट्रस्ट में शामिल कर लिया.

निजाम ने लोगों के कल्याण के लिए एक वेलफेयर ट्रस्ट का गठन किया. यह 1960 के दशक में, उन्होंने अपने पोतों को ट्रस्ट में शामिल कर लिया. भारत के राष्ट्रपति के नाम पर फंड पर दावा किया. इससे पहले रियासत और भारत के बीच विलय को लेकर सौदा हो चुका था.

कोर्ट ने किस आधार पर सुनाया फैसला?

मामला तब चर्चा में आ गया जब 2013 पाकिस्तान ने निजाम के फंड के संरक्षक, नेशनल वेस्टमिंस्टर बैंक पर केस दायर कर दिया. इससे यह पुराना मुकदमा पुनर्जीवित हो गया. पाक की ओर से केस किए जाने से यह मतलब हुआ कि उसने उसकी संप्रभु समाप्त मान लिया जिसे उसने 65 साल पहले लागू किया था.

सुनवाई शुरू हुई और पाकिस्तान ने इस संपत्ति पर फिर से दावा किया. पाक ने भारत के दावे का यह कहकर विरोध किया कि निजाम की संपत्ति पर भारत का दावा का समय खत्म हो गया है. भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने पूरी प्रक्रिया को बाधित कर रखी है. कोर्ट ने पाक के दावे को 2 आधार पर खारिज कर दिया.

लंदन के रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस के जज मार्कस स्मिथ का कहना है कि पहला, रियासत और भारत के राष्ट्रपति के बीच विलय पर आपसी समझौता हुआ. दूसरा, ब्रिटिश सरकार ने हैदराबाद के भारत में विलय को मान्यता प्रदान कर रखी है. इन 2 वजहों से कोर्ट ने भारत के पक्ष में फैसला सुना दिया.

1947 में भारत विभाजन के दौरान हैदराबाद के 7वें और अंतिम निजाम मीर उस्मान अली खान ने लंदन स्थित नेटवेस्ट बैंक में 1,007,940 पाउंड (करीब 8 करोड़ 87 लाख रुपये) जमा कराए थे. जो रकम बढ़कर 70 साल में करीब 35 मिलियन पाउंड (करीब 3 अरब 8 करोड़ 40 लाख रुपये) हो चुकी है.

PMC घोटाला: ED ने जब्त की HDIL मालिक की 3500 करोड़ की संपत्ति जब्त कई गिरफ्तारियां भी.

मुंइ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 4,355 करोड़ रुपये के पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक धोखाधड़ी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करके एचडीआईएल के मालिक की 12 महंगी कारों को जब्त किया है. इसमें दो रॉल्स रॉयस, दो रेंज रोवर और एक बेंटली शामिल है. मुंबई के छह स्थानों पर छापे के बाद एचडीआईएल के चेयरमैन राकेश वाधवान और उनके बेटे सारंग वाधवान की ये कारें जब्त की गईं. इस बीच ईडी ने पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक के लापता प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस को गिरफ्तार किया है.

पिछले चार दिनों से लापता थॉमस की गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब दो दिन पहले गुरुवार को रियलिटी कंपनी एचडीआईएल के अध्यक्ष राकेश कुमार वधावन और प्रबंधन निदेशक सारंग वधावन को इसी विभाग ने गिरफ्तार किया था और उनकी 3,500 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली थी. ईडी ने हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचडीआईएल) और उसके प्रमोटरों के खिलाफ धन शोधन निरोधक कानून (पीएमएलए) की विभिन्न धाराओं के तहत प्रवर्तन मामले की जांच रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की है और मामले की जांच शुरू कर दी है. ईडी द्वारा दर्ज मामले में एचडीआईएल के कार्यकारी अध्यक्ष राकेश वाधवान और समूह के उपाध्यक्ष और उनके बेटे सारंग को नामजद किया गया है.

ईडी ने मामले में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है.पीएमसी बैंक धोखाधड़ी में कथित भूमिका को लेकर गुरुवार को मुंबई पुलिस ने राकेश वाधवान और उनके बेटे सारंग को गिरफ्तार किया था. पिता और पुत्र दोनों को मुंबई पुलिस के ईओडब्ल्यू कार्यालय में बुलाया गया और जब जांचकर्ताओं ने पाया कि वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, तो उन्होंने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

ईओडब्ल्यू के प्रमुख राजवर्धन सिन्हा ने कहा, “हमने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है.” यह आरोप लगाया गया है कि एचडीआईएल, जो दिवालियेपन की कार्यवाही का सामना कर रहा है, और उसकी समूह की कंपनियों ने पीएमसी बैंक से भारी कर्ज लिया था. एफआईआर पीएमसी बैंक के रिकवरी डिपार्टमेंट के मैनेजर जसबीर सिंह मट्टा द्वारा दर्ज कराई गई. यह भी आरोप लगाया गया है कि 21,049 जाली बैंक खातों को कथित रूप से ऋण को छिपाने के लिए तैयार किया गया था, जो भारतीय रिजर्व बैंक के मानदंडों का उल्लंघन करते थे.

उल्लेखनीय है कि आर्थिक अपराध शाखा ने पिछले सोमवार को पीएमसी बैंक और एचडीआईएल के खिलाफ कथित तौर पर 4335 करोड़ रुपये का बैंक को नुकसान पहुंचाने के लिए एक मामला दर्ज किया था. ईडी सूत्रों ने कहा कि पीएमसी बैंक के प्रबंधक (रिकवरी डिपार्टमेंट) की शिकायत के बाद एक मामला दर्ज किया गया. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एडीआईएल के संकटग्रस्त ऋण खातों को दबाने के लिए 21,000 से अधिक फर्जी खाते बनाए गए. मुंबई पुलिस की प्राथमिकी में थॉमस, सिंह, वाधवान और अन्य अधिकारियों के नाम हैं और मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल गठित किया गया है.