निर्मोही अखाड़ा बोला- अब सुनवाई 20-20 की तरह, खफा SC ने पूछा- क्या पहले टेस्ट था?

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या के श्रीरामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रही. गुरुवार को सुनवाई का 36वां दिन है और सुप्रीम कोर्ट के द्वारा हिंदू पक्षकारों की बहस खत्म होने की तारीख भी है. हिंदू पक्षकार की ओर से वकील सीएस. वैद्यनाथन ने गुरुवार को अपनी दलीलें आगे बढ़ाईं.

3 अक्टूबर की सुनवाई:

 सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान नरसिंहम ने स्कन्दपुराण के अयोध्या महात्यम के श्लोक को पढ़ा, उन्होंने इस दौरान कहा कि अयोध्या में राम जन्मस्थान की यात्रा मोक्षदाई है और मोक्ष हिन्दू दर्शन के चार पुरुषार्थों में से आखिरी है. उन्होंने कहा कि सिर्फ यही जगह नहीं कि जहां पर मंदिर के साथ मस्जिद बनाई गई, उनका मकसद रहा है कि हम अपनी श्रद्धा भूल जाएं लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

इसके बाद निर्मोही अखाड़ा की ओर से सुशील जैन ने दलील शुरू की. उन्होंने अदालत में कहा कि अयोध्या मामले की सुनवाई अब 20-20 की तरह हो गई है.

इससे कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आपको हमने साढ़े चार दिन दिए, अब आपको जवाब देना है तो अब आप इसे 20-20 कह रहे हैं? तो क्या आपकी पिछली बहस टेस्ट मैच थी?

इस दौरान निर्मोही अखाड़े के जवाब शुरू होने से पहले ही राजीव धवन ने कहा कि जवाब में मेरा नाम गलत लिखा हुआ है. सुशील जैन ने कहा कि मेरे जवाब थोड़े पेचीदा हैं. जस्टिस नज़ीर ने हंसते हुए कहा कि आप चिंता ना करें आप हारते भी है तो आप जीतने वालों की तरफ ही होंगे.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस दौरान सवाल किया कि क्या गुरूनानक देव भी अयोध्या गए थे? जिसपर हिंदू पक्ष की ओर से नोट देने की बात कही गई. उन्होंने कहा कि मस्जिद के मुख्य गुंबद में ही भगवान राम का जन्म हुआ था, ये लोगों का विश्वास है. इसी के साथ सीएस. वैद्यनाथन की दलीलें पूरी हुईं.

इसके बाद गोपाल सिंह विशारद की ओर से दलीलें पेश की गईं. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि निर्मोही अखाड़े को अपनी दलील 4 बजे तक पूरी करनी होगी. जिसके बाद 15 मिनट ब्रेक होगा और फिर 4.15 बजे से पीएन मिश्रा 5 बजे तक मुस्लिम पक्षकारों की आपत्तियों, दलीलों और तर्कों का प्रत्युत्तर देंगे.

 अदालत में सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि यह हिंदुओं के लिए महत्व का स्थान है, यह बौद्धों का पवित्र स्थान कभी नहीं रहा है. इसलिए यह एक उचित अनुमान है कि यह एक हिंदू मंदिर था. वकील की दलील पर जस्टिस चंद्रचूड ने पूछा कि क्या यह दावा करने के लिए उन विशेषताओं का हवाला दिया जा सकता है कि यह एक हिंदू मंदिर है जो बौद्ध विहारों में भी मौजूद है? दूसरे शब्दों में सबूत का बोझ आप पर यह साबित करने के लिए है कि यह एक हिंदू मंदिर है.

इसके जवाब में वकील वैद्यनाथन ने वेदों, श्रुति, स्मृति समेत उपनिषदों का हवाला देते हुए कहा कि हिंदुओं का यह विश्वास आज का नहीं काफी पुराना है. जिसके जवाब में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि हमने वेदों, उपनिषदों को चुनौती नहीं दी है और ना ही कुरान पर सवाल है. जो भी लिखित में है, वो अदालत के सामने है.

हिंदू पक्ष के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि कुरान में यह कहा गया है कि रसूल के विचारों को स्मृति में रखने के लिए उनसे सुनकर उन्हें लिखा गया. मेरा ये कहना है कि परंपरा और धर्मग्रन्थों को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में माना है.

: हिंदू पक्षकार की वजह से सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि मकर की आकृति वाला परनाला हिंदू मंदिरों का प्रतीक है, क्योंकि ये गंगा का वाहन है. वहां पर 16 नंबर की दीवार 10-11वीं की सदी होने का पता लगता है. जबकि ASI की रिपोर्ट में दीवार का दावा बहुत बाद का है. सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि दीवार नंबर 16 को 6 मीटर तक खोदा गया लेकिन बाद में खुदाई बंद करनी पड़ी. उन्होंने इस दौरान ASI की तस्वीरों का हवाला भी दिया.

इस दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आस्था-विश्वास पूरी तरह से अलग दलीलें हैं. बेशक आस्था-विश्वास के लिए कोई सबूत नहीं हो सकते, लेकिन हम मुख्य साक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं.

कब तक चलेगी सुनवाई?

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में 5 अगस्त से इस मामले की सुनवाई जारी है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस मामले की सुनवाई के लिए 18 अक्टूबर तक का समय दिया है. CJI का कहना है कि अगर मामले की सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी नहीं हुई तो मामला लंबा खिंच सकता है.

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