निर्मोही अखाड़ा बोला- अब सुनवाई 20-20 की तरह, खफा SC ने पूछा- क्या पहले टेस्ट था?

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या के श्रीरामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रही. गुरुवार को सुनवाई का 36वां दिन है और सुप्रीम कोर्ट के द्वारा हिंदू पक्षकारों की बहस खत्म होने की तारीख भी है. हिंदू पक्षकार की ओर से वकील सीएस. वैद्यनाथन ने गुरुवार को अपनी दलीलें आगे बढ़ाईं.

3 अक्टूबर की सुनवाई:

 सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान नरसिंहम ने स्कन्दपुराण के अयोध्या महात्यम के श्लोक को पढ़ा, उन्होंने इस दौरान कहा कि अयोध्या में राम जन्मस्थान की यात्रा मोक्षदाई है और मोक्ष हिन्दू दर्शन के चार पुरुषार्थों में से आखिरी है. उन्होंने कहा कि सिर्फ यही जगह नहीं कि जहां पर मंदिर के साथ मस्जिद बनाई गई, उनका मकसद रहा है कि हम अपनी श्रद्धा भूल जाएं लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

इसके बाद निर्मोही अखाड़ा की ओर से सुशील जैन ने दलील शुरू की. उन्होंने अदालत में कहा कि अयोध्या मामले की सुनवाई अब 20-20 की तरह हो गई है.

इससे कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आपको हमने साढ़े चार दिन दिए, अब आपको जवाब देना है तो अब आप इसे 20-20 कह रहे हैं? तो क्या आपकी पिछली बहस टेस्ट मैच थी?

इस दौरान निर्मोही अखाड़े के जवाब शुरू होने से पहले ही राजीव धवन ने कहा कि जवाब में मेरा नाम गलत लिखा हुआ है. सुशील जैन ने कहा कि मेरे जवाब थोड़े पेचीदा हैं. जस्टिस नज़ीर ने हंसते हुए कहा कि आप चिंता ना करें आप हारते भी है तो आप जीतने वालों की तरफ ही होंगे.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस दौरान सवाल किया कि क्या गुरूनानक देव भी अयोध्या गए थे? जिसपर हिंदू पक्ष की ओर से नोट देने की बात कही गई. उन्होंने कहा कि मस्जिद के मुख्य गुंबद में ही भगवान राम का जन्म हुआ था, ये लोगों का विश्वास है. इसी के साथ सीएस. वैद्यनाथन की दलीलें पूरी हुईं.

इसके बाद गोपाल सिंह विशारद की ओर से दलीलें पेश की गईं. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि निर्मोही अखाड़े को अपनी दलील 4 बजे तक पूरी करनी होगी. जिसके बाद 15 मिनट ब्रेक होगा और फिर 4.15 बजे से पीएन मिश्रा 5 बजे तक मुस्लिम पक्षकारों की आपत्तियों, दलीलों और तर्कों का प्रत्युत्तर देंगे.

 अदालत में सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि यह हिंदुओं के लिए महत्व का स्थान है, यह बौद्धों का पवित्र स्थान कभी नहीं रहा है. इसलिए यह एक उचित अनुमान है कि यह एक हिंदू मंदिर था. वकील की दलील पर जस्टिस चंद्रचूड ने पूछा कि क्या यह दावा करने के लिए उन विशेषताओं का हवाला दिया जा सकता है कि यह एक हिंदू मंदिर है जो बौद्ध विहारों में भी मौजूद है? दूसरे शब्दों में सबूत का बोझ आप पर यह साबित करने के लिए है कि यह एक हिंदू मंदिर है.

इसके जवाब में वकील वैद्यनाथन ने वेदों, श्रुति, स्मृति समेत उपनिषदों का हवाला देते हुए कहा कि हिंदुओं का यह विश्वास आज का नहीं काफी पुराना है. जिसके जवाब में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि हमने वेदों, उपनिषदों को चुनौती नहीं दी है और ना ही कुरान पर सवाल है. जो भी लिखित में है, वो अदालत के सामने है.

हिंदू पक्ष के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि कुरान में यह कहा गया है कि रसूल के विचारों को स्मृति में रखने के लिए उनसे सुनकर उन्हें लिखा गया. मेरा ये कहना है कि परंपरा और धर्मग्रन्थों को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में माना है.

: हिंदू पक्षकार की वजह से सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि मकर की आकृति वाला परनाला हिंदू मंदिरों का प्रतीक है, क्योंकि ये गंगा का वाहन है. वहां पर 16 नंबर की दीवार 10-11वीं की सदी होने का पता लगता है. जबकि ASI की रिपोर्ट में दीवार का दावा बहुत बाद का है. सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि दीवार नंबर 16 को 6 मीटर तक खोदा गया लेकिन बाद में खुदाई बंद करनी पड़ी. उन्होंने इस दौरान ASI की तस्वीरों का हवाला भी दिया.

इस दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आस्था-विश्वास पूरी तरह से अलग दलीलें हैं. बेशक आस्था-विश्वास के लिए कोई सबूत नहीं हो सकते, लेकिन हम मुख्य साक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं.

कब तक चलेगी सुनवाई?

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में 5 अगस्त से इस मामले की सुनवाई जारी है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस मामले की सुनवाई के लिए 18 अक्टूबर तक का समय दिया है. CJI का कहना है कि अगर मामले की सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी नहीं हुई तो मामला लंबा खिंच सकता है.

मध्‍य प्रदेश में देर रात दर्दनाक हादसा, यात्री बस पुल से गिरी, 7 की मौत

भोपाल। मध्‍य प्रदेश में बीती रात एक दर्दनाक हादसा घट गया। यहां भोपाल से छतरपुर जा रही एक यात्री बस रायसेन के पास पुल से नीचे आ गिरी। इस हादसे में 7 यात्रियों की मौत हो गई और 3 दर्जन से ज्‍यादा लोग घायल हो गए। पुलिस सहित एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई है और स्‍थानीय लोगों की मदद से घायलों को बाहर निकाला 

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार एक यात्री बस राजधानी भोपाल से छतरपुर जा रही थी। करीब 1.30 बजे रायसेन के निकट एक दरगाह के पास रिछन नदी के पुल से यह बस अनियंत्रित होकर नदी में जा गिरी। इस दुर्घटना में 7 यात्रियों की मौत हो गई, वहीं 3 दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं।

कोतवाली पुलिस सहित एसडीआरईफ की टीम मौके पर पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि बस पुल के नीचे पानी मे आधी डूबी है। घायलों को निकालने में स्थानीय लोग भी मदद को पहुँचे गए हैं। घायलों को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है।

लाख के बजट में आने वाली Maruti Suzuki की ये कार देती है 32.99km का माइलेज

नई दिल्ली, । भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इस समय मीडियम क्लास परिवारों के लिए काफी कारें मौजूद हैं। अगर आपका बजट काफी कम है और आप अपने लिए कोई अच्छी और किफायती कार खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो आज हम भारतीय बाजार में उपलब्ध किफायती और अधिक माइलेज देने वाली कार के बारे में बात कर रहे हैं।

देश की जानी-मानी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki  अपने एंट्री लेवल कार Maruti Suzuki Alto की पेशकश करती है, यहां जानें कि ऑल्टो के फीचर्स और स्पेशिफिकेशन कैसे हैं।

इंजन और पावर

इंजन और पावर के मामले में Maruti Suzuki Alto में 796cc का 3 सिलेंडर वाला इंजन दिया गया है जो कि 6000 Rpm पर 35.3kw की पावर और 3500 Rpm पर 69Nm का टॉर्क जेनरेट करता है। यह इंजन 5 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन के ऑप्शन में आता है।

डाइमेंशन

डाइमेंशन की बात करें तो Maruti Suzuki Alto की लंबाई 3445 mm, चौड़ाई 1490 mm, ऊंचाई 1475 mm, व्हीलबेस 2360 mm, कुल वजन 1185 किलो है। वहीं फ्यूल टैंक की बात करें तो इस कार में 35 लीटर की क्षमता वाला फ्यूल टैंक दिया गया है।

ब्रेकिंग सिस्टम और सस्पेंशन

ब्रेकिंग सिस्टम की बात करें तो Maruti Suzuki Alto के फ्रंट में डिस्क और रियर में ड्रम ब्रेक दिए गए हैं। वहीं सस्पेंशन के मामले में इस कार के फ्रंट में Mac Pherson Strut और 3-Link Rigid Axle सस्पेंशन दिए गए हैं।

माइलेज

माइलेज की बात करें तो Maruti Suzuki Alto प्रति लीटर पेट्रोल में 22.05 किमी का माइलेज दे सकती है और प्रति किलो सीएनजी में 32.99 किमी का माइलेज दे सकती है।

कीमत

कीमत की बात करें तो Maruti Suzuki Alto की शुरुआती एक्स शोरूम कीमत 2,88,689 रुपये है।

गौमूत्र और गोबर के ईंधन से उड़ान भरेगा भविष्य का रॉकेट, NIT की प्रो. दुलारी का दावा

जमशेदपुर। गोबर के मिश्रण से उच्चकोटि की हाइड्रोजन गैस बनती है। आवश्यक परिष्करण कर इसका इस्तेमाल रॉकेट के प्रोपेलर में ईंधन के रूप में भी किया जा सकता है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) आदित्यपुर (झारखंड) में इस पर शोध चल रहा है। जमशेदपुर से सटे आदित्यपुर में एनआइटी की सहायक प्रोफेसर दुलारी हेंब्रम बीते कुछ वर्षों से इस विषय पर शोध में जुटी हुई हैं। शुरुआती रिसर्च पेपर प्रस्तुत कर उन्होंने दावा किया है कि यह संभव है। वह अभी दो और शोध पत्र जमा करने वाली हैं और अपने शोध के निष्कर्ष को लेकर उत्साहित हैं।

देश में बिजली की समस्या भी होगी दूर

प्रो. दुलारी के अनुसार, ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाली हाइड्रोजन गैस के उत्पादन पर फिलहाल प्रति यूनिट सात रुपये खर्च आ रहा है। यदि सरकार इसके उत्पादन को प्रोत्साहित करती है तो इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर हो सकता है। देश में बिजली की समस्या भी दूर हो सकती है। यही नहीं, इसे रॉकेट में प्रयुक्त होने वाले ईंधन के सस्ते विकल्प के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।

प्रो. दुलारी हेंब्रम के शोध का विषय है- गोमूत्र और गोबर से वैकल्पिक ऊर्जा का उत्पादन। वह कहती हैं कि कॉलेज की प्रयोगशाला छोटी है। इस प्रोजेक्ट को किसी तरह की सरकारी मदद भी नहीं मिल रही है, सो अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। सरकारी मदद पाने के लिए प्रयास कर रही हैं।

गोबर और मूत्र से उत्पादित मीथेन का इस्तेमाल

दुलारी कहती हैं कि गाय के गोबर और मूत्र से उत्पादित वैकल्पिक ऊर्जा (मीथेन) का इस्तेमाल अभी चारपहिया वाहन चलाने, बल्ब जलाने के लिए हो रहा है, लेकिन इससे निकलने वाली हाइड्रोजन गैस को उच्चकोटि के ईंधन के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल रॉकेट के प्रोपेलर में ईंधन के रूप में हो सकता है।

फिलहाल जिस माध्यम से गोबर और गोमूत्र से वैकल्पिक ऊर्जा के रूप में हाइड्रोजन गैस निकालने का काम होता है, उसे और उन्नत बनाने पर शोध किया जा रहा है। इस समय छोटे स्तर पर इसके उत्पादन पर प्रति यूनिट सात रुपये खर्च आ रहा है। बिजली का खर्च भी लगभग ढाई से तीन रुपये तक है। यदि माध्यम और उन्नत हो जाए तो लागत और भी कम हो जाएगी। दुलारी ने बताया कि तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले में स्थापित महर्षि वाग्भट्ट गोशाला व पंचगव्य विज्ञान केंद्र में भी गोमूत्र-गोबर से हाइड्रोजन गैस के उत्पादन पर काम हो रहा है। केंद्र सरकार इसपर ध्यान दे तो वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में यह बड़ा कारगर सिद्ध हो सकता है। देश में गाय, गोबर और गोमूत्र की कमी नहीं है।

क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन के लिए उपयुक्त

एनआइटी की सहायक प्रोफेसर दुलारी हेंब्रम का दावा है कि गोमूत्र-गोबर के मिश्रण से उच्चकोटि की हाइड्रोजन गैस प्राप्त की जा सकती है।

दरअसल, क्रायोजेनिक (निम्नतापी) रॉकेट इंजन में अत्यधिक ठंडी और द्रवीकृत गैसों को ईंधन और ऑक्सीकारक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसमें हाइड्रोजन गैस मुख्य घटक के रूप में प्रयुक्त होती है, जो ऑक्सीकारक के साथ मिल कर दहन करती है। ठोस ईंधन की अपेक्षा यह ईंधन कई गुना शक्तिशाली सिद्ध होता है और रॉकेट को अधिक बूस्ट देता है। विशेषकर लंबी दूरी और भारी रॉकेटों के लिए यह तकनीक (क्रायोजेनिक) आवश्यक होती है।

INX मीडिया केस: पी चिदंबरम ने जमानत के लिए खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, तुरंत सुनवाई की मांग की

आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में तिहाड़ जेल में बंद पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जमानत के लिये बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। न्यायमूर्ति एन वी रमणा, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस मामले का उल्लेख करते हुये शीघ्र सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

पीठ ने कहा कि चिदंबरम की याचिका सूचीबद्ध करने के संबंध में निर्णय के लिये याचिका प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के पास भेजी जायेगी। चिदंबरम इस समय न्यायिक हिरासत में हैं और दिल्ली उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुये कहा था कि वह इस मामले की जांच अग्रिम दौर में है और उनके द्वारा गवाहों को प्रभावित करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

यही नहीं, उच्च न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज करते हुये अपने फैसले में यह भी कहा था कि यदि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि यदि चिदंबरम के खिलाफ मामला साबित हो गया तो यह समाज, अर्थव्यवस्था, वित्तीय स्थिरता और देश की अखंडता के साथ अपराध होगा।

अदालत ने कहा था कि हालांकि चिदंबरम द्वारा साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गुंजाइश नहीं है लेकिन जमानत पर रिहा होने की स्थिति में निश्चित ही वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। अदालत ने विशेष अदालत द्वारा उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने के निर्णय को सही ठहराया था।

केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने 74 वर्षीय चिदंबरम को 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था। अदालत ने यह भी कहा था कि चिदंबरम देश के एक ताकतवर वित्त मंत्री और गृह मंत्री रह चुके हैं और इस समय राज्य सभा के सदस्य हैं। चिदंबरम के जहां तक देश छोड़कर भागने के जोखिम का सवाल है तो इसके लिये उन्हें पासपोर्ट जमा कराने, उनके लिये लुक आउट नोटिस जारी करने और अदालत की अनुमति के बगैर देश से बाहर नहीं जाने जैसी शर्ते लगायी जा सकती हैं।

अदालत ने यह भी कहा था कि पेश सामग्री से ऐसा लगता है कि विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड इकाई ने 4.62 करोड़ रूपए के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिये प्रस्ताव तैयार किया था और आईएनएक्स मीडिया को मंजूरी देते समय इसे पारित कर दिया गया था। अदालत ने इस तथ्य का भी उल्लेख किया कि 4.62 करोड़ रूपए की बजाये आईएनएक्स मीडिया बगैर किसी मंजूरी के 403 करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाया। 

संप्रग सरकार के कार्यकाल में 2004-14 के दौरान चिदंबरम वित्त मंत्री और गृह मंत्री थे। सीबीआई ने 2007 में बतौर वित्त मंत्री चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान आईएनएक्स मीडिया समूह को विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड द्वारा 305 करोड़ रूपए के निवेश की मंजूरी दिये जाने में कथित अनियमितताओं को लेकर 15 मई, 2017 को एक प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। इसके बाद, प्रवर्तन निदेशालय ने भी इस प्रकरण में धन शोधन का मामला दर्ज किया था।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि सीबीआई द्वारा सीलबंद लिफाफे में पेश दस्तावेजों के अनुसार जांच के दौरान पता चला है कि आईएनएक्स मीडिया के पूर्व प्रमोटर पीटर मुखर्जी ने विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड में आवेदन दायर करने से पहले चिदंबरम से कथित रूप से मुलाकात की थी और उन्होंने बोर्ड की मंजूरी का आश्वासन देते हुये इसके बदले अपने पुत्र कार्ति चिदंबरम के ‘व्यापारिक हितों का ध्यान रखने का निर्देश दिया था।

क्लाइमेट चेंज पर मोदी की फैन हुईं US स्पीकर, कहा- गांधी के मूल्यों को बरकरार रखा

क्लाइमेट चेंज की चुनौतियों से लड़ने के लिए पूरी दुनिया एकजुट होने लगी है और भारत इस मिशन की अगुवाई करने वाले देशों में से एक है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा जलवायु परिवर्तन को लेकर उठाए जाने वाले कदमों की तारीफ अब अमेरिका में भी हो रही है. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की है और प्रकृति को बचाने में किए जा रहे प्रयासों को सराहा है.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर वाशिंगटन में संबोधन के दौरान नैन्सी पेलोसी ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने क्लाइमेट चेंज के मसले पर महात्मा गांधी के मूल्यों को बरकरार रखा है. बता दें नैन्सी पेलोसी ने ही डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग को मंजूरी दी थी, इसके अलावा ट्रंप के कई फैसलों पर वह अड़ंगा लगाती रही हैं.

उन्होंने कहा कि जब पीएम मोदी ने अमेरिकी कांग्रेस के सेशन को संबोधित किया था, तब उनकी जलवायु परिवर्तन पर बात हुई थी. इस दौरान पीएम मोदी ने उनसे महात्मा गांधी और क्लाइमेट चेंज पर खुलकर चर्चा की थी. जिसमें वह सफाई के साथ-साथ जल संरक्षण के मसलों पर बड़ी बारीकी से छूते हैं.

नैन्सी पेलोसी अमेरिका में भारतीय दूतावास में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं, जिसमें उनके साथ भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी शामिल थे. जयशंकर ने इस दौरान कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के बड़े मंचों पर शौचालय की बात की तो काफी आलोचना हुई, लेकिन महात्मा गांधी भी मानते थे कि सफाई काफी जरूरी है.

आपको बता दें कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर दुनियाभर में कार्यक्रम हुए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स में लेख लिखा, जिसका शीर्षक ‘भारत और दुनिया को गांधी की जरूरत क्यों है’ था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण के दौरान क्लाइमेट चेंज पर जोर दिया था और भारत के द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दुनिया को दी. भारत में लगातार सौर ऊर्जा, जल संरक्षण, सिंगल यूज़ प्लास्टिक बैन और स्वच्छता पर जोर दिया जा रहा है.

ऐसी है वैष्णो देवी वाली वंदे भारत एक्सप्रेस, हरी झंडी दिखाई

नई दिल्ली : गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार (3 अक्टूबर) को दिल्ली-कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। दिल्ली- कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस का पांच अक्टूबर से व्यावसायिक संचालन शुरू होगा, हालांकि टिकटों की बुकिंग आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर पहले ही शुरू हो गई है। हाई स्पीड ट्रेन चलने से दिल्ली और कटरा के बीच यात्रा का समय 12 घंटे से कम होकर आठ घंटे रह जाएगा।

क्या है टाइमिंग
नई दिल्ली से यह ट्रेन सुबह 6 बजे सफर की शुरुआत करेगी और 8:10 पर अंबाला पहुंचेगी। 9:19 पर यह ट्रेन लुधियाना और दोपहर 12:38 पर जम्मू तवी में दो-दो मिनट रुकने के बाद 2 बजे कटड़ा पहुंचेगी। कटड़ा से लौटने वाले यात्रियों को लेकर यह ट्रेन 3 बजे खुलेगी, 4:13 बजे जम्मू तवी, 07:32 पर लुधियाना और 8:48 पर अंबाला कैंट पहुंचेगी तो दिल्ली में रात 11 बजे सफर समाप्त होगा। 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल करने में सक्षम यह ट्रेन अत्याधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस है।ट्रेन में घुमावदार कुर्सी सहित कई अत्याधुनिक सुविधाएं हैं।

कितना है किराया?
नई दिल्ली से कटड़ा के लिए एसी चेयर कार का किराया 1630 रुपये है तो एक्जिक्युटिव कार में सफर के लिए 3,015 रुपये देने होंगे। नई दिल्ली से जम्मू तवी के लिए एसी चेयर कार का किराया 1300 रुपये है तो लुधियाना तक सफर के लिए 905 रुपये देने होंगे। अंबाला तक के लिए इस क्लास का किराया 715 रुपये है।

कटड़ा से नई दिल्ली का किराया एसी चेयरकार में 1570 रुपये है तो यही दूरी एग्जिक्युटिव चेयरकार में तय करने के लिए आपको 2965 रुपये देने होंगे। जम्मू तवी से नई दिल्ली के लिए एसी चेयरकार का किराया 1,465 रुपये है तो एग्जिक्युटिव क्लास के लिए 2,755 रुपये देने होंगे।

ट्रेन में क्या सुविधा
ट्रेन में 2 ड्राइवर कार, 2 एग्जिक्युटिव चेयर कार और 12 चेयर कार सहित कुल 16 कोच लगाए जाएंगे। नई दिल्ली से कटड़ा जाते हुए इस ट्रेन का नंबर 22439 और कटड़ा से नई दिल्ली आते हुए 22440 होगा|

9 साल जेल में रहे थे लालबहादुर शास्त्री कुछ और उनके जीवन से

देश के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने अपने कार्यकाल के दौरान देश को कई संकटों से उबारा. साफ-सुथरी छवि के कारण ही विपक्षी पार्टियां भी उन्हें आदर और सम्मान देती है. जानिए उनके बारे में कुछ ऐसी बातें जिसे आप अभी तक नहीं जानते होंगे.

9 साल जेल
भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में देश के दूसरे प्रधानमंत्री 9 साल तक जेल में रहे. असहयोग आंदोलन के लिए पहली बार वह 17 साल की उम्र में जेल गए लेकिन बालिग न होने की वजह से उनको छोड़ दिया गया. इसके बाद वह सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिए 1930 में ढाई साल के लिए जेल गए. 1940 और फिर 1941 से लेकर 1946 के बीच भी वह जेल में रहे है. इस तरह कुल नौ साल वह जेल में रहे.

आम लाने पर पत्नी का विरोध
स्वतंत्रता की लड़ाई में जब वह जेल में थे तब उनकी पत्नी चुपके से उनके लिए दो आम छिपाकर ले आई थीं. इस पर खुश होने की बजाय उन्होंने उनके खिलाफ ही धरना दे दिया. शास्त्री जी का तर्क था कि कैदियों को जेल के बाहर की कोई चीज खाना कानून के खिलाफ है.
उनमें नैतिकता इस हद तक कूट कर भरी थी कि एक बार जेल से उनको बीमार बेटी से मिलने के लिए 15 दिन की पैरोल पर छोड़ा गया. लेकिन बीच में वह चल बसी तो शास्त्री जी वह अवधि पूरी होने से पहले ही जेल वापस आ गए.

दहेज में ली खादी
शास्त्री जी जात-पात के सख्त खिलाफ थे. तभी उन्होंने अपने नाम के पीछे सरनेम नहीं लगाया. शास्त्री की उपाधि उनको काशी विद्यापीठ से पढ़ाई के बाद मिली थी. वहीं अपनी शादी में उन्होंने दहेज लेने से इनकार कर दिया था. लेकिन ससुर के बहुत जोर देने पर उन्होंने कुछ मीटर खादी का दहेज लिया.

जय जवान जय किसान की कहानी
1964 में जब वह प्रधानमंत्री बने थे तब देश खाने की चीजें आयात करता था. उस वक्त देश PL-480 स्कीम के तहत नॉर्थ अमेरिका पर अनाज के लिए निर्भर था. 1965 में पाकिस्तान से जंग के दौरान देश में भयंकर सूखा पड़ा. तब के हालात देखते हुए उन्होंने देशवासियों से एक दिन का उपवास रखने की अपील की. इन्हीं हालात से उन्होंने हमें ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया.

महिलाओं को जोड़ा ट्रांसपोर्ट सेक्टर से
ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर के तौर पर सबसे पहले उन्होंने ही इस इंडस्ट्री में महिलाओं को बतौर कंडक्टर लाने की शुरुआत की. यही नहीं, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए उन्होंने लाठीचार्ज की बजाय पानी की बौछार का सुझाव दिया था.

क्या वह वाकई हार्ट अटैक था?
पाकिस्तान के साथ 1965 की जंग को खत्म करने के लिए वह समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए ताशकंद गए थे. इसके ठीक एक दिन बाद 11 जनवरी 1966 को खबर आई कि हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई है. हालांकि इस पर अभी भी संदेह बरकरार है और हाल ही में उनके परिवार ने भी उनकी मौत से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करने की मांग सरकार से की है.

हनी ट्रैप कांड के लिए 9 दिन में बनीं 3 SIT

हनी ट्रैप कांड की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी के प्रमुख अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक संजीव शमी का तबादलानई एसआईटी का गठन किया गया है, इस कांड की जांच के लिए बनी एसआईटी में नौ दिन के भीतर यह तीसरा बदलाव23 सितंबर को इस मामले की एसआईटी जांच के लिए डीजीपी डी. श्रीनिवास वर्मा की अगुवाई में टीम गठित की गई थीश्रीनिवास इंदौर के लिए रवाना हो पाते कि उससे पहले 24 सितंबर को दूसरी एसआईटी बनाई गई, संजीव शमी प्रमुख बने.

भोपाल
मध्य प्रदेश के हनी ट्रैप कांड की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी (विशेष जांच टीम) के प्रमुख अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक संजीव शमी का तबादला कर दिया गया है। साथ ही नई एसआईटी का गठन किया गया है। राज्य में हड़कंप मचाने वाले इस कांड की जांच के लिए बनी एसआईटी में नौ दिन के भीतर यह तीसरा बदलाव है। इससे पहले भी दो बार एसआईटी प्रमुख बदले गए, जिसपर सवाल उठ रहे हैं। 23 सितंबर को एसआईटी जांच के लिए डीजीपी डी. श्रीनिवास वर्मा की अगुवाई में टीम गठित की गई। वह इंदौर के लिए रवाना हो पाते कि उससे पहले 24 सितंबर को दूसरी एसआईटी बनाई गई, जिसका प्रमुख संजीव शमी को बनाया गया। शमी ने तेजी से काम करना शुरू भी कर दिया था, तब उनको भी हटा दिया गया।

हवाला के जरिए रकम भेजने का काम
हनी ट्रैप सेक्स कांड की महिला किरदारों की जद में सिर्फ मध्य प्रदेश के ही नेता, नौकरशाह और कारोबारी नहीं आए हैं, बल्कि उनका जाल छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गोवा तक फैला हुआ था। छत्तीसगढ़ के नेताओं ने तो इन महिलाओं को हवाला के जरिए और सीधे भोपाल तक रकम भेजने का काम किया है।

कई मंत्री और अफसर भी फंसे हैं जाल में
हनी ट्रैप सेक्स कांड का खुलासा इंदौर में दो महिलाओं के पकड़े जाने के बाद हुआ। उसके बाद पुलिस और एटीएस ने तीन और महिलाओं को भोपाल से पकड़ा। एसआईटी कई महत्वपूर्ण लोगों से जुड़े विडियो क्लिप से लेकर दूसरे लेन-देन के दस्तावेज बरामद कर चुकी है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी के हाथ लगी एक डायरी में खुलासा हुआ है कि छत्तीगसढ़ के तीन पूर्व मंत्री, दो अफसरों और एक कारोबारी को अपने जाल में फंसाकर महिलाओं ने मोटी रकम वसूली थी।

क्लिपिंग की 4,000 से ज्यादा फाइलें
मामले की जांच कर रही एसआईटी के सूत्रों का कहना है कि पकड़ी गईं महिलाओं के मोबाइल, लैपटॉप और पेन ड्राइव से बड़ी संख्या में विडियो क्लिपिंग मिली हैं। क्लिपिंग की 4,000 से ज्यादा फाइलें हाथ लगी हैं और कुछ तस्वीरें व ऑडियो-क्लिप भी बरामद हुए हैं। गिरोह की महिलाएं अपने जाल में फंसाए गए व्यक्ति की गुप्त तरीके से विडियो-क्लिप बनाती थीं।

‘मेरा प्यार’ और ‘पंछी’ कोडवर्ड
उधर, हनी ट्रैप कांड से एक के बाद एक परतें उघड़ती जा रही हैं और जो तस्वीर उभर रही है, वह और ज्यादा चौंकाने वाली है। पकड़ी गई महिलाओं के पास से एसआईटी (विशेष जांच दल) के हाथ एक डायरी लगी है, जिसमें शिकार बनाए गए लोगों से वसूली गई रकम और बकाया का तो ब्यौरा है ही, साथ ही उपयोग में लाए जाने वाले कोडवर्डों का भी जिक्र है। ‘ मेरा प्यार’ और ‘पंछी’ इस गिरोह के प्रमुख कोडवर्ड थे। कई बार कोडवर्ड ‘वीआईपी’ का भी उपयोग किया गया।