सैनिकों के लिए देश में बनी 40 हजार बुलेटप्रूफ जैकेट्स भेजी गईं

नई दिल्ली. भारतीय सेना को पहली बार देश में बनी 40 हजार बुलेटप्रूफ जैकेट्स की आपूर्ति की गई है। इन जैकेट्स की पहली खेप जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में जुटे सैनिकों को मिलेगी। इन्हें बनाने वाली कंपनी एसएमपीपी प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से मेजर जनरल अनिल ओबेरॉय ने बताया कि वे सेना को समय से पहले ही पूरा ऑर्डर मुहैया करा देंगे। सरकार ने यह ऑर्डर पूरा करने के लिए कंपनी को 2021 तक की तारीख दी है, लेकिन 2020 के अंत तक सारी जैकेट्स बन कर तैयार हो जाएंगी।

मेजर ओबेरॉय के मुताबिक, पहले साल उन्हें सेना के लिए 36 हजार जैकेट्स मुहैया करानी थीं, लेकिन कंपनी इस टारगेट से आगे चल रही है। देश में बनी यह बुलेटप्रूफ जैकेट्स हार्ड स्टील से बनी गोलियां झेल सकती है। यानी एके-47 और कई अन्य हथियार इस पर बेअसर होंगे। फिलहाल इन जैकेट्स को कानपुर स्थित सेंट्रल ऑर्डिनेंस डिपो पहुंचाया गया है। यहां से जल्द ही इन्हें जम्मू-कश्मीर भेजा जाएगा।

सेना को आधुनिक और हल्की बुलेटप्रूफ जैकेट्स मुहैया कराने के लिए रक्षा मंत्रालय ने पिछले साल ही एसएमपीपी के साथ 639 करोड़ रुपए का सौदा किया था। इसके तहत सेना को 1.86 लाख उच्च स्तरीय जैकेट्स मिलनी हैं। रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि इस प्रोजेक्ट से सरकार की मेक इन इंडिया योजना को भी बढ़ावा मिलेगा। इसे भारतीय सेना और उद्योगों का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।

नोबल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी की राय में ‘पकौड़ा’ बेचना कोई बुरी बात नहीं है।

नोबल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी की राय में ‘पकौड़ा’ बेचना कोई बुरी बात नहीं है। उन्होंने ‘टाम्स ऑउ इंडिया’ के साथ बातचीत में इस संबंध में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पकौड़ा बेचना बुरी बात नहीं है लेकिन इस धंधे में काफी सारे लोग हैं, जिनकी वजह से उन्हें काफी कम कीमत में इसे बेचना पड़ता है। दरअसल, जब बनर्जी से पूछा गया कि क्या भारत में श्रम गतिविधि में जाति एक बाहरी बाधा की तरह है? इस पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सभी लोग हर तरह के काम करना चाहते हैं। एनएसएसओ की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि 32 की उम्र सीमा तक बेरोजगारी दर काफी कम है। 30 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते भारतीय नागरिक कुछ न कुछ करना शुरू कर देते हैं।

इसके आगे जब अभिजीत बनर्जी से पूछा गया कि रोजगार मिले, भले ही वह पकौड़ा बेचने वाला ही क्यों न हो? इस पर बनर्जी ने अपनी बात रखी। टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में अभिजीत बनर्जी और उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो ने भारत की आर्थिक नीतियों के संदर्भ कई मुद्दों पर अपनी राय रखी है।

बनर्जी से जब पूछा गया कि उन्हें क्या लगता है कि भारतीय सरकार उन्हें अब गंभीरता से लेगी? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उनका काम सभी के साथ है। राज्य सरकारों के साथ काम ज्यादा है। चाहें, वह बीजेपी शासित गुजरात राज्य हो या तृणमूल शासित पश्चिम बंगाल। जहां बेहतर काम होता है, वहां करते हैं। उन्होंने कहा कि वे कई राज्यों की सरकारों के साथ जुड़े हैं और साथ मिलकर काम भी करते हैं। गौरतलब है कि अभिजीत बनर्जी दुनिया भर के उन 108 अर्थशास्त्रियों में शामिल थे, जिन्होंने मोदी सरकार पर डेटा के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए अपील जारी की थी। हालांकि, अपने जवाब में बहुचर्चित ‘पकौड़ा रोजगार’ पर उन्होंने कोई कटाक्ष नहीं किया।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव से पहले एक साक्षात्कार में पीएम मोदी ने रोजगार के संबंध में एक सवाल के जवाब में बताया था कि उनकी सरकार ने कई सारे युवाओं को लोन दिया है, जिससे वे पकौड़ा बेचने का रोजगार कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद लोकसभा चुनाव में इस पर काफी हो-हल्ला मचा था। विपक्षी दलों ने इस बयान के सहारे मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी। वहीं, सोशल मीडिया पर भी उनके इस बयान को काफी ट्रोल किया गया।

200 करोड़ का मालिक, 2 साल अकेले हॉस्पिटल में पड़ा रहा, मरते वक्त भी अकेला था

मुंबई. यहां के पॉश एरिया में शुमार नेपियन सी रोड पर करीब 200 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी के मालिक निखिल झावेरी की जब बुधवार को मौत हुई, तब उनके पास कोई नहीं था। बेटा भी नहीं। निखिल दो साल से हॉस्पिटल में भर्ती थे। मानसिक और शारीरिक बीमारियों को झेल रहे निखिल का अंतिम समय में निमोनिया बिगड़ गया था। उनकी प्रॉपर्टी को लेकर फैमिली में विवाद चल रहा है। पुलिस भी काफी कोशिशों के बाद उनके बेटे से संपर्क कर सकी। उन्होंने दो शादियां की थीं। एक बेटा है, जो विदेश में रहता है।
बहन के घर से हुए थे गायब..
बात 2013 की है, जब निखिल कांदीवली में रहने वाली अपनी बहन के घर से अचानक गायब हो गए थे। हालांकि बाद में वे बोरीवली एरिया में मिले थे। तब उन्हें एक एनजीओ द्वारा संचालित आश्रम में भेज दिया गया था। तब तक उनकी पहचान तक नहीं हो पाई थी। जनवरी 2014 में जब निखिल की पहचान हुई, तब कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। कोर्ट ने निखिल की प्रॉपर्टी को थर्ड पार्टी से डील करने पर भी रोक लगा दी थी। हॉस्पिटल में भी निखिल अकेले ही भर्ती रहे।
दो शादियां की थीं..
बताते हैं कि झावेरी ने दो शादियां की थीं। हालांकि एक भी शादी नहीं टिक सकी। दूसरी पत्नी से उन्हें एक बेटा रेयान है। वो विदेश में रहता है। पुलिस ने उसी से संपर्क किया। निखिल की प्रॉपर्टी को लेकर उनकी दोनों पत्नियों के अलावा बहनों के पति विवाद कर रहे हैं। निखिल की पहली पत्नी दीप्ति पांचाल ने कोर्ट में हलफनामा भी दायर कर रखा है। मुंबई की इकनॉमिक ऑफेंस विंग मामले की जांच कर रही है।.

लालू प़साद यादव ने जमानत के लिये अरजी दी.बीमारी का हवाला दिया


रांची. जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव  ने दुमका कोषागार से अवैध निकासी के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की है. शुक्रवार को लालू की ओर से इस मामले में जमानत याचिका दायर की गई. इस अर्जी पर 25 अक्टूबर को सुनवाई होगी.

अदालत ने सुनाई थी 7-7 वर्ष बामशक्कत कैद की सजा

दुमका कोषागार मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू यादव को पिछले वर्ष 24 मार्च को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत सात-सात वर्ष बामशक्कत कैद की सजा सुनाई थी. इस मामले में उन पर 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था. इसके अलावा चारा घोटाले के तीन अन्य मामलों में भी वो सजायाफ्ता हैं. लालू यादव पर दुमका कोषागार से तीन करोड़ 13 लाख रुपए गबन करने के आरोप हैं.

बढ़ती उम्र और खराब सेहत का हवाला देकर मांगी जमानत

लालू ने जमानत के लिए अपनी बीमारी का हवाला देते हुए कहा कि वो रिम्स अस्पताल में भर्ती हैं और कई बीमारियों से पीड़ित हैं. बता दें कि लालू मधुमेह, हृदय और किडनी के मरीज हैं. पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है. याचिका में बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए जमानत देने की मांग की गई है.

इससे पहले जुलाई में हाईकोर्ट ने दी थी जमानत

इससे पहले जुलाई में लालू यादव को झारखंड हाईकोर्ट ने देवघर कोषागार से अवैध निकासी के मामले में जमानत दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों में आधी सजा काटने पर जमानत देने का प्रावधान किया है. इसी को देखते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें देवघर मामले में जमानत दी थी.

अब घर बैठे पोस्ट ऑफिस अकाउंट में कर सकते हैं मोटी बचत, शुरू हुई ये खास सेवा

डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट (Department of Post) ने सेविंग्स अकाउंट के लिए मोबाइल बैंकिंग ऐप को लॉन्च कर दिया है. इस ऐप को बीते 15 अक्टूबर को ही लॉन्चकर दिया गया था.

नई दिल्ली. पोस्ट ऑफिस सेविंग्स स्कीम्स (Post Office Saving Schemes) का इस्तेमाल करना अब पहले से और आसान हो गया है. डिपॉर्टमेंट ऑफ पोस्ट (Department of Post) ने अपने सेविंग्स अकाउंट कस्टमर्स के लिए नया मोबाइल बैंकिंग ऐप (Post Office Mobile Banking App) लॉन्च कर दिया है. सभी पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट होडल्डर्स के लिए इस ऐप को 15 अक्टूबर को ही लॉन्च कर दिया गया है. एक साल पहले ही डिपॉर्टमेंट ऑफ पोस्ट ने इंटरनेट बैंकिंग सुविधा की शुरुआत की थी.

किसके लिए होगा यह मोबाइल बैंकिंग सुविधा

डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट के एक सर्कुलर के मुताबिक, CBS पोस्ट ऑफिस में पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट रखने वाले ग्राहक इसका लाभ ले सकते हैं. इंटरनेट बैंकिंग के लिए जिन ग्राहकों के पास वैलिड लॉग इन ID और पासवर्ड है मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस सुविधा का लाभ सिंगल और ज्वाइंट B टाइप के ग्राहक इस्तेमाल कर सकते हैं. ज्वाइंट, नाबालिग, अशिक्षित और ब्रांच ऑफिस अकाउंट के ग्राहक इस सुविधा का लाभ नहीं ले सकते हैं. बता दें कि जिस अकाउंट को एक से अधिक बालिग लोगों ने ज्वाइंटली खोला है, इस तरह के खातों को ज्वाइंट A टाइप का खाता कहा जाता है. वहीं, दूसरी तरफ जिन खातों को एक से अधिक बालिग लोगों ने खोला है और इसका ऑपरेशन कोई एक करता है तो इसे ज्वाइंट B टाइप का अकाउंट कहा जाता है.

किन चीजों की होगी जरूरत

पोस्ट ऑफिस सेविंग्स खातों की मोबाइल बैंकिंग सुविधा का लाभ लेने के लिए ग्राहक के पास वैलिड E-mail ID होना अनिवार्य है. साथ ही उनके पास PAN नंबर और वैलिड मोबाइल नंबर भी होना जरूरी है. कस्टमर ID को नाम, जन्मतिथि, पिता का नाम, जेंड, और वैध आईडी के साथ अपडेटेड होना चाहिए.

मोबाइल बैंकिंग के लिए कैसे कर सकते हैं आवेदन

अगर आपके पास पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट है तो आप अपने नजदीकी CBS हेड या सब पोस्ट ऑफिस में मोबाइल बैंकिंग के लिए आवेदन कर सकते हैं. सेविंग्स अकाउंट होल्डर को एक फॉर्म जमा करना, जोकि पोस्ट ऑफिस में उपलब्ध होगा. इस फॉर्म को उसी CBS पोस्ट ऑफिस में जमा करना होगा, जहां पर सेविंग्स बैंक अकाउंट है. अकाउंट होल्डर का KYC पूरा होना चाहिए. आवेदन के समय इस बात का ध्यान रखना होगा कि सभी अकाउंट के लिए अलग मोबाइल नंबर ही होना चाहिए. इस फॉर्म को ब्रांच में जमा करने के 24 घंटे के बाद मोबाइल बैंकिंग सेवा शुरू हो जाएगी. अपने स्मार्टफोन में इस ऐप को “India Post Mobile Banking” के नाम से डाउनलोड भी किया जा सकता है.

वार्ड नंबर 2 में पानी की बर्बादी जबकि शहर की जनता तरस रही है, बूंद बूंद पानी के लिए.

[करुणेश शर्मा संपादक की कलम से]


शिवपुरी वार्ड क्रमांक 2 के फेरन सिंह पटवारी के मकान के सामने पाइपलाइन लगभग 15 दिनों से टूटी हुई है , उसको सही कराने के लिए पार्षद सहित नगर पालिका को नागरिकों ने कई बार शिकायत की किंतु नगर पालिका की लापरवाही के कारण काफी मात्रा में पानी अप व्यय हो रहा है . जहां शहर की जनता को एक एक बूंद के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है वहीं वार्ड क्रमांक 2 में पानी 15 दिनों से फैल रहा है. किंतु ना तो पार्षद को चिंता है ना नगर पालिका प्रशासन को कलेक्टर महोदय से अनुरोध करेंगे की पाइपलाइन को स्थाई रूप से जुड़वा कर पानी का अपव्यय रोकें ताकि जनता को होने वाली कीचड़ से राहत मिल सके . यह पाइप लाइन लगभग 7 घंटे तक इसी प्रकार चलती रहती है नागरिकों ने वार्ड पार्षद सहित नगर पालिका को कई बार सूचित कर चुके हैं किंतु कोई भी नागरिकों की इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा है.

शरद अरविंद बोबड़े हो सकते उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश.


सुप्रीम कोर्ट में अगले चीफ जस्टिस नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. मौजूदा मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई अगले महीने की 17 तारीख को रिटायर हो रहे हैं, ऐसे में अब उन्होंने केंद्र सरकार को अगले चीफ जस्टिस का नाम सुझाया है. CJI की ओर से जस्टिस एस.ए. बोबडे का नाम सुझाया गया है, ऐसे में संभावना है कि वो देश के अगले मुख्य न्यायाधीश होंगे.  

जस्टिस बोबडे इस वक्त रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई कर रही पीठ का हिस्सा हैं, इसके अलावा कई बड़े फैसलों में शामिल रहे हैं. जस्टिस बोबडे से जुड़ी कुछ बातें जानिए

जस्टिस अरविंद शरद बोबडे (एस. ए. बोबडे) का जन्म 24 अप्रैल, 1956 को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था.

नागपुर विश्वविद्यालय से बी.ए. और एल.एल.बी डिग्री ली है.

 1978 में जस्टिस बोबडे ने बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र को ज्वाइन किया था.

इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में लॉ की प्रैक्टिस की, 1998 में वरिष्ठ वकील बने.

–    साल 2000 में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में बतौर एडिशनल जज पदभार ग्रहण किया. इसके बाद वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने.

2013 में सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज कमान संभाली. जस्टिस एस. ए. बोबड़े 23 अप्रैल, 2021 को रिटायर होंगे.

18 नवंबर को जस्टिस बोबडे बतौर चीफ जस्टिस शपथ ले सकते हैं, मौजूदा CJI की सिफारिश को केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद प्रक्रिया शुरू होगी.

नीलामी के बीच मजदूर लेकर पहुंचा नायाब हीरा… जानें अभी क्यों नहीं बदली किस्मत

पन्ना में उथली खदानों से मिले हीरों की तीन दिन से नीलामी चल रही थी. इसी बीच खदान से एक आदिवासी मजदूर को नायाब हीरा मिल गया. उसे लेकर वह नीलामी स्थल पर पहुंच भी गया पर उसे अपनी किस्मत बदलने के और इंतजार करना होगा.

पन्ना. बुंदेलखंड में पन्ना की धरती इन दिनों बड़ी संख्या में हीरे उगल रही है. यह बात गुरुवार को भी उस समय  साबित हुई जब हीरों की नीलामी ( diamond auction) का अंतिम दौर चल रहा था. उसी समय एक गरीब आदिवासी मजदूर (Poor tribal laborer) रमेश को यहां की सकरिया चोपरा में उथली खदान से 7 कैरेट 68 सेंट का बड़ा हीरा मिला. यह आदिवासी गरीब मजदूर इस नायाब हीरे को लेकर सीधे पन्ना के नई कलेक्ट्रेट भवन में हो रही नीलामी स्थल पर पहुंच गया. उस हीरे को हीरा कार्यालय के वैल्यूअर ने जांचा परखा और नाप तौल कर उसे जमा कर लिया.

मजदूर को अगली नीलामी तक करना होगा इंतजार

दिवाली के मौके मिले इस हीरे ने रमेश की किस्मत को तो चमका दी है लेकिन इस गरीब आदिवासी मजदूर को हीरे की लाखों रुपए रकम पाने के लिए अगली हीरा नीलामी तक इंतजार करना होगा.  करीब 2 माह बाद फिर हीरों की नीलामी होगी.  गरीब मजदूर रमेश को बेशकीमती हीरा मिलने से जीवन में खुशियों की बहार तो आ ही गई है. प्रदेश में मात्र पन्ना जिले की धरती ही एक ऐसी जगह है जहां रातों-रात चंद पलों में ऐसे गरीब मजदूर लखपति-करोड़पति बन जाते हैं.

15 से 17 अक्टूबर तक चली नीलामी में देश भर से जुटे थे हीरा व्यापारी 

पन्ना में उथली खदानों से प्राप्त हीरों की नीलामी 15 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक चली. तीन दिनों तक चली नीलामी गुरुवार को ही समाप्त हो गई. इस नीलामी में 224 हीरे रखे गए थे जिसमें से 81 हीरे ही बिक सके.  इनसे 35 लाख 10 हजार 480 रुपए मिले. नीलाम हुए हीरो में सबसे बड़ा हीरा 5.68 कैरेट का रहा जो कि 14 लाख 20 हजार 630 रुपए में बिका. बिके हुए हीरो की सरकारी रॉयल्टी काटकर इसकी रकम हीरा मालिकों को जल्द ही दे दी जाएगी. पेंडिंग रहे हीरो को अगले 2 माह के अंदर पुनः नीलामी के लिए रखा जाएगा. इस नीलामी में 10 बड़े नायाब हीरे भी रखे गए थे जिन्हें खरीदने के लिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, सूरत, अहमदाबाद, जयपुर, इंदौर जैसे कई शहरों से हीरा व्यापारी आए थे.

हीरा व्यापारियों के लिए इस नीलामी में 29.46 कैरेट और 18.13 कैरेट के दो बड़े नायाब हीरे रहे जो कि किसी भी व्यापारी को नहीं मिल सके. 29. 46 के बड़े हीरे की अधिकतम बोली 3 लाख 10 हजार प्रति कैरेट तक बोली गई. दूसरे बड़े हीरे 18.13 कैरेट के हीरे की अधिकतम अंतिम बोली 4 लाख प्रति कैरेट तक बोली गई, फिर भी इन बड़े नयाब हीरों को पन्ना के हीरा अधिकारी ने उच्चतम बोली न आने के कारण पेंडिंग रख दिया.

शेर के सामने बाड़े में कूदा आदमी शेर पास आया और वापिस लौट गया

दिल्ली
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के चिड़ियाघर से गुरुवार को सामने आए विडियो को जिसने भी देखा, सन्न रह गया। मौत के मुंह से जिंदा बचकर आना शायद इसे ही कहते हैं। शेर जैसे खूंखार जानवर के सामने 15 मिनट रहने के बाद भी इंसान का सुरक्षित तरीके से बचना वाकई में किसी करिश्मे से कम नहीं है। हालांकि दिल्ली जू में शेर के बाड़े में कूदे युवक के जिंदा बचने की कहानी इतनी ही नहीं है। इसके लिए पूरी प्लानिंग के साथ शेर का ध्यान भटकाया गया था और फिर 10 कर्मचारियों की टीम बड़ी बहादुरी से युवक को बचाने बाड़े में कूद पड़ी। मौका मिलते ही बाड़े में उतरे 10 कर्मचारी

दरअसल, गुरुवार को शेर के बाड़े पर गार्ड लेखराज ड्यूटी पर थे। सुंदरम नामक शेर के बाड़े में कूदने से उन्होंने रेहान खान को रोकने की कोशिश की पर नाकाम रहे। ऐसे में उन्होंने रेहान की जान बचाने के लिए सुंदरम को पुकारना शुरू कर दिया। उन्हें उम्मीद थी कि शेर का ध्यान इससे भटकेगा और तब तक अकेले में रेहान को बचाने का मौका मिल जाएगा। मौका मिलते ही 10 अन्य कर्मचारियों की टीम (जिसमें जू रेंजर्स और गार्ड शामिल थे) बाड़े में उतरी।

लेखराज ने बाद में बताया, ‘हमारी पहली प्राथमिकता उस व्यक्ति की जान बचाना था। शेर को भले ही पाला गया था पर वह होता तो जानवर ही है। हमारे लिए बड़ा खतरा था लेकिन हमें हर हाल में इसे करना था।’ गार्डों ने जैसे ही शेर का ध्यान हटाया, दूसरे साइड से बड़ी सावधानी से टीम बाड़े में उतरी। इसके बाद शेर को निश्चित दायरे में रखते हुए जू डॉक्टरों ने उसे ट्रैंक्विलाइज़र से बेहोश किया।

6-7 मिनट इंतजार फिर आगे बढ़े कर्मचारी
एक जू अधिकारी ने कहा, ‘ट्रैंक्विलाइज़र का असर शुरू होने में 6-7 मिनट लगते हैं। इस दौरान हमने रेहान को बचाने की कोशिश नहीं की क्योंकि ऐक्टिविटी से शेर का ध्यान हमारी तरफ हो सकता है जो खतरनाक होता।’ शेर के बेहोश होते ही फायर डिपार्टमेंट के कर्मचारी ने रस्सी और सीढ़ी नीचे की और खान को बाहर निकाल लिया गया।

जू अधिकारियों ने कहा कि खान लकी था क्योंकि 2014 में ऐसी ही एक घटना घटी थी और तब वाइट टाइगर ने बाड़े में गिरे व्यक्ति की जान ले ली थी। क्यूरेटर रियाज खान ने बताया कि अगर रेहान बैठ गया होता या बेहोश हो जाता तो शेर ज्यादा आक्रामक हो सकता था। उन्होंने कहा कि टाइगर या तेंदुआ खतरे को जल्दी से भांपकर फैसला करते हैं जबकि शेर अपने खतरे का आकलन करने में समय लेता है। शायद यही वजह है कि रेहान को सामने देख शेर धीमी चाल से उसके करीब आया था और कुछ देर रुका और लौट गया।

घटना के बाद जू प्रशासन मामले की जांच कर रहा है कि 24 साल के युवक को बाड़े में कूदने से रोका क्यों नहीं जा सका। जू अधिकारियों ने यह भी बताया कि बाड़े को तार से घेरा नहीं गया है क्योंकि इसे नैशनल जू अथॉरिटी के नियमों के हिसाब से बनाया गया है। इसके तहत जानवरों के बाड़े को प्राकृतिक रूप से उनके रहने लायक बनाना होता है।

जिन्होंने सबकुछ अपनी आंखों से देखा
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बाड़े के पास मौजूद लोगों ने उसे अंदर घुसने से रोकने की कोशिश की पर उसने अनसुना कर दिया। परिवार समेत चिड़ियाघर घूमने आए जमीर आलम ने बताया, ‘अंदर घुसने के बाद वह शेर को फुसलाने की कोशिश कर रहा था। अगर जू प्रशासन जल्दी से नहीं पहुंचता तो शेर उसे नहीं छोड़ता।’ बताते हैं कि रेहान खान पहले बाड़े के बाहर से ही शेर को पुचकार रहा था और उसे कुछ नहीं सूझा तो वह अंदर कूद गया।

गार्ड ने उसका हाथ भी पकड़ा पर वह खींचकर भाग गया। 10 मिनट के भीतर जू प्रशासन, पुलिसकर्मी, फायर टीम बाड़े पर पहुंच गए थे। बाद में रेहान को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और उसे मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उसे हाथ पर एक खरोंच आई है। बताया गया है कि उसने शराब पी हुई थी।