बसपा प्रमुख मायावती ने हमीरपुर उपचुनाव परिणाम पर उठाया सवाल, कहा- ईवीएम में हुई धांधली

लखनऊ,। हमीरपुर सदर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में अपने प्रत्याशी नौशाद अली की हार के बाद बसपा प्रमुख मायावती ईवीएम में धांधली का आरोप लगाया है। मायावती ने उपचुनाव परिणाम पर सवाल उठाते हुए भाजपा को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ईवीएम में धांधली करके चुनाव परिणाम को प्रभावित किया गया है। उन्होंने इसे बसपा कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने की साजिश करार देते हुए कहा कि भाजपा की नीयत में खोट है।

बसपा प्रमुख मायावती ने ट्वीट करके कहा कि ‘बीजेपी द्वारा ईवीएम आदि की धांधली से चुनाव परिणाम को प्रभावित करने का क्रम यूपी के हमीरपुर विधानसभा उपचुनाव में भी जारी रहा, जबकि बारिश के कारण इनके वोटर निकले ही नहीं थे, यह सभी जानते हैं। अगर इनकी नीयत में खोट नहीं था तो सभी 12 सीटों पर एकसाथ उपचुनाव क्यों नहीं कराया गया?’

मायावती ने अपने अगले ट्वीट में कहा कि ‘हमीरपुर उपचुनाव में बीएसपी को धांधली के तहत तीसरे नंबर पर ढकेल कर अब अन्य 11 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव में पार्टी के मनोबल को गिराने की साजिश है, जो कतई सफल नहीं होने वाला है। बीएसपी जनसहयोग से इस नियोजित षड्यंत्र का मुंहतोड़ जवाब जरूर देगी।’ उनका कहना है कि ‘साथ ही, बीएसपी के लोगों से अपील है कि वे हमीरपुर के एक रिजल्ट से कतई मायूस न हों बल्कि और ज्यादा तैयारियों के साथ अगले माह होने वाले विधानसभा उपचुनावों के लिए पूरे जी-जान से काम करें ताकि ऐसी साजिशों को नाकाम किया जा सके। ईवीएम की रखवाली पर भी कड़ी नजर जरूर रखें।’

राजनीति छोड़ने पर अड़े अजीत पवार, सोनिया गांधी ने NCP प्रमुख से की बात

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार के प्रति सहानुभूति जताई है. सोनिया गांधी ने आज (शनिवार)  शरद पवार से करीब 15 मिनट फोन पर बात की और अजीत पवार के राजनीति छोड़ने के फैसले के बारे में जानने की कोशिश की. सूत्रों के मुताबिक अजीत पवार अपने राजनीति छोड़ने के फैसले पर पुनर्विचार करने को तैयार नहीं हैं.

इससे पहले बताया जा रहा था कि अजीत पवार महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में कई करोड़ का घोटाले में अपना और अपने चाचा शरद पवार का नाम आने से आहत थे.

क्रप्शन के आरोप से आहत

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने शुक्रवार को कहा था कि विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के पहले अजीत पवार ने अपने बेटे पार्थ पवार से कहा है कि राजनीति आज अपने निम्न स्तर पर है, इसलिए राजनीति छोड़ना बेहतर है. अजीत ने बेटे को भी राजनीति छोड़ने की सलाह देते हुए कहा है कि अब चलो खेती या कोई अन्य व्यवसाय करते हैं.

उन्होंने कहा कि जब से अजीत पवार को पता चला कि उनके खिलाफ आर्थिक अपराध का मामला दर्ज किया गया है, तब से वह बहुत बेचैन थे. अजीत ने अपने परिवार से भी चर्चा की थी. परिजनों से चर्चा में अजीत पवार ने कहा कि काका (शरद पवार) ने अपने जीवन के 50-52 साल सक्रिय राजनीति के लिए दिए हैं, जिसके लिए उन्हें जनता से सराहना भी मिली है.

क्या बोले एनसीपी प्रमुख

एनसीपी प्रमुख ने कहा कि अजीत ने परिजनों से बात करते हुए बोला है कि मैं (शरद पवार) भले ही उस सहकारी बैंक के सदस्य तक नहीं हूं, लेकिन संबंधित EOC में उनके खिलाफ मामला विचाराधीन है.

चर्चा है कि अजीत पवार अपने परिवार के सदस्यों के साथ थे. यह पूछे जाने पर कि क्या अजीत पवार ने राजनीति छोड़ने के बारे में संकेत दिया है, एनसीपी प्रमुख ने कहा कि अजीत पवार ने अपने बेटे पार्थ को सलाह दी है. वहीं आज तक से बात करते हुए पार्थ ने अजीत कहा कि उनके पिता बहुत बेचैन थे. उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया है, राजनीति से नहीं.

राम मंदिर केस पर फैसले से पहले चीफ जस्टिस रिटायर हुए तो ऐसे आएगा फैसला

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई 18 अक्टूबर से पहले पूरी करने को कहा है. चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कि अगर मामले की सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी नहीं हुई, तो इस पर फैसला देने का चांस खत्म हो जाएगा.

दरअसल, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पांच न्यायमूर्तियों की संविधान पीठ मामले की सुनवाई कर रही है और चीफ जस्टिस गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं. कार्यकाल खत्म होने के बाद रंजन गोगोई न तो मामले की सुनवाई कर पाएंगे और न ही फैसला सुना पाएंगे. लिहाजा वो चाहते हैं कि मामले पर फैसला उनके रिटायर होने से पहले ही हो जाए.

अब यहां सवाल यह उठ रहा है कि अगर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई लंबी खिंचती है, तो मामले पर फैसला कौन सुनाएगा? क्या इस मामले की सुनवाई करने और फैसला सुनाने के लिए रंजन गोगोई का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है?

रिटायर होने के बाद भी फैसला सुना सकते हैं रंजन गोगोई

इस पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष जितेंद्र मोहन शर्मा और सीनियर एडवोकेट उपेंद्र मिश्रा का कहना है कि अभी तक सुप्रीम कोर्ट के किसी भी न्यायमूर्ति का कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया है. हालांकि संविधान के अनुच्छेद 128 में प्रावधान किया गया है कि राष्ट्रपति की सहमति से रिटायर न्यायमूर्ति को किसी मामले की सुनवाई करने का अधिकार दिया जा सकता है, लेकिन ऐसे न्यायमूर्ति को सुप्रीम कोर्ट के दूसरे न्यायमूर्तियों की तरह अन्य मामलों की सुनवाई करने का अधिकार नहीं होगा.

इसका मतलब यह हुआ कि अगर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई लंबी चलती है, तो राष्ट्रपति की सहमति से चीफ जस्टिस रंजन गोगोई आगे भी मामले की सुनवाई कर सकते हैं. संविधान में इसका प्रावधान किया गया है. हालांकि रंजन गोगोई को सुप्रीम कोर्ट के किसी दूसरे न्यायमूर्ति या चीफ जस्टिस की तरह अधिकार नहीं होंगे. वो सिर्फ राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की ही सुनवाई कर पाएंगे और फैसला सुना पाएंगे.

सुनवाई करने वाली बेंच के न्यायमूर्ति ही सुनाते हैं फैसला

अभी तक यह परंपरा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्तियों की जो बेंच मामले की सुनवाई करती है, वही उस पर फैसला सुनाती है. अगर उस बेंच के न्यायमूर्ति रिटायर हो जाते हैं, तो उस मामले की सुनवाई के लिए नई बेंच का गठन किया जाता है. इसके बाद नई बेंच उस मामले की नए सिरे से सुनवाई करती है.

क्या दूसरे न्यायमूर्ति भी सुना सकते हैं फैसला?

वहीं, हिन्दू महासभा के एडवोकेट विष्णु शंकर जैन का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 128 के तहत राष्ट्रपति को किसी मामले की सुनवाई के लिए रिटायर न्यायमूर्ति के कार्यकाल को बढ़ाने का अधिकार है. इसके साथ ही सिविल प्रक्रिया संहिता यानी सीपीसी के ऑर्डर 20 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि अगर कोई जज किसी सिविल मामले पर फैसला लिख देता है, लेकिन उसका ऐलान नहीं करता है, तो उसकी जगह लेने वाला अगला जज उस फैसले का ऐलान कर सकता है.

इसका मतलब यह हुआ कि अगर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला नहीं सुना पाते हैं, तो उनकी जगह लेने वाला दूसरा जज फैसला सुनाएगा. राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामला एक सिविल मामला है. लिहाजा सीपीसी का ऑर्डर 20 इस मामले में लागू होता है.

इन न्यायमूर्तियों की संविधान पीठ कर रही है सुनवाई

6 अगस्त से राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की रोजाना सुनवाई हो रही है. सुप्रीम कोर्ट की जो संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है, उसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल हैं.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने पक्षकारों को मामले की सुनवाई 18 अक्टूबर से पहले पूरी करने का निर्देश दिया है. राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई करने वाली संविधान पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे हैं. लिहाजा उनको ही मामले पर फैसले का ऐलान करने का अधिकार है.

कश्मीर पर अमेरिका ने पाकिस्तान की खिंचाई की, कहा- चीन के मुसलमानों की ज्यादा चिंता करो

न्यू यॉर्क 
कश्मीर पर झूठी कहानी सुना रहे पाकिस्तान की अमेरिका ने भी खिंचाई की है। पाकिस्तान के दोहरे मापदंड को उजागर करते हुए अमेरिका ने कहा है कि वह जितनी चिंता कश्मीर पर जता रहा है कि उतनी चीन में नजरबंद मुसलमानों को लेकर भी दिखाए। अमेरिका की ऐक्टिंग असिस्टेंट सेक्रटरी (साउथ ऐंड सेंट्रल एशिया) ऐलिस वेल्स ने गुरुवार को यह सवाल खड़े किए कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान चीन के बारे में क्यों नहीं बोल रहे, जहां पर 10 लाख उइगर और अन्य तुर्की भाषा बोलने वाले मुसलमानों को नजरबंद रखा गया है। कश्मीर पर पाकिस्तान के पीएम की कथित चिंता को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए ऐलिस वेल्स ने कहा, ‘…मैं पश्चिमी चीन में नजरबंद किए गए मुसलमानों को लेकर भी उसी स्तर की चिंता देखना चाहूंगी, जो नाजी शिविरों की तरह के हालात में रह रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को चीन के मुसलमानों की ज्यादा चिंता करनी चाहिए क्योंकि वहां मानवाधिकारों का उल्लंघन ज्यादा है। वेल्स ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप प्रशासन ने पूरे चीन में मुसलमानों के साथ हो रही ज्यादती और भयानक हालात के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। 
वेल्स की प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म करने के भारत के फैसले पर दुष्प्रचार कर रहा है। वह मुस्लिम दांव भी चल रहा है। हाल में पाक पीएम इमरान खान ने न्यू यॉर्क में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि दुनिया चुप है क्योंकि मामला मुसलमानों का है। हालांकि चीन में मुसलमानों पर ही हो रहे अत्याचार पर चुप्पी से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का कश्मीर पर प्रॉपेगैंडा साफ हो जाता है। जब भी चीन में मुसलमानों के हालात पर इमरान खान से सवाल होते हैं तो वह यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि उनके अपने देश में काफी समस्याएं हैं, जिन पर उन्हें ध्यान देना है। 

बीते सोमवार को ही एक थिंक टैंक के कार्यक्रम में उइगरों को लेकर पूछे गए सवाल पर इमरान ने टिप्पणी करने से ही इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के चीन के साथ खास संबंध हैं और हम केवल निजी तौर यह मुद्दा उठाएंगे। उधर, पाक का सदाबहार दोस्त चीन अपने देश में रहने वाले अल्पसंख्यकों पर ऐक्शन की आलोचना करने वाले देशों की निंदा करता रहता है। 

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि चीन में करीब 10 लाख उइगर और दूसरे मुसलमानों को नजरबंद किया गया है। हैरत की बात तो यह है कि चीन अपने हिरासत शिविरों को प्रशिक्षण शिविर बताता है। उसका कहना है कि इन शिविरों के जरिए वह कट्टरपंथ को खत्म करने के साथ ही लोगों की स्किल्स बढ़ा रहा है। हाल में अमेरिका के नेतृत्व में 30 से ज्यादा देशों ने शिनजियांग प्रांत में चीन द्वारा मुसलमानों पर किए जा रहे अत्याचार की आलोचना की थी। 

UN में पाकिस्तान को खरी-खरी, भारत ने कहा- इमरान का भाषण नफरत से भरा

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान के आरोपों का करारा जबाव दिया है. सुयंक्त राष्ट्र में भारत की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने कहा कि इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र के मंच का गलत इस्तेमाल किया है. उन्होंने कहा कि इमरान खान का भाषण नफरत से भरा है. विदिशा मैत्रा ने पाकिस्तान की पोल खोलते हुए कहा कि क्या पाकिस्तान इस बात को स्वीकार करेगा कि वो दुनिया का एकमात्र देश है जो वैसे शख्स को पेंशन देता है जिसे संयुक्त राष्ट्र ने अल कायदा और ISIS जैसे आतंकियों की लिस्ट में रखा है.

विदिशा मैत्रा ने कहा कि मानवाधिकार की बात करने वाले पाकिस्तान को सबसे पहले पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत देखनी चाहिए जिनकी संख्या 23 प्रतिशत से 3 प्रतिशत पर पहुंच गई है. पाकिस्तान को इतिहास नहीं भूलना चाहिए और याद रखना चाहिए कि 1971 में उन्होंने अपने लोगों के साथ क्या किया था. उन्होंने कहा कि क्या प्रधानमंत्री इमरान खान न्यूयॉर्क शहर को ये बात बताना नहीं चाहेंगे कि वे ओसामा बिन लादेन के खुलेआम समर्थक रहे हैं.

यूएन में भारत की सबसे नई सदस्य विदिशा मैत्रा ने पाकिस्तान की धज्जियां उड़ाते हुए कहा कि पाकिस्तान के पीएम जिस तरह से न्यूक्लियर हथियारों के इस्तेमाल की धमकी देते हैं वो एक राजनेता का व्यवहार नहीं है, बल्कि एक छोटे नेता का व्यवहार है.

UN से घोषित आतंकी पाकिस्तान में

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए कहा कि क्या पाकिस्तान इस बात से इनकार कर सकता है कि आज संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी करार दिए गए 130 लोग उसके देश में रहते हैं. क्या पाकिस्तान इससे इनकार कर सकता है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतबंधित 25 आतंकी संगठनों का ठिकाना पाकिस्तान है.

पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार का मुद्दा उठाने पर भारत ने फटकार लगाते हुए कहा कि एक ऐसा देश जो आतंकवाद और नफरत को मुख्यधारा में शामिल कर चुका है वो अब मानवाधिकारों का चैम्पियन बनकर अपना वाइल्डकार्ड इस्तेमाल करना चाहता है.

जनरल नियाजी से इमरान खान की तुलना

विदिशा मैत्रा ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को नियाजी संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को समझना चाहिए कि आज के लोकतंत्र में नरसंहार की कोई जगह नहीं है. उन्होंने अपनी इतिहास की धुंधली समझ को थोड़ा स्पष्ट करना चाहिए. विदिशा मैत्रा ने कहा कि पाकिस्तान 1971 की घटनाएं नहीं भूलनी चाहिए. जब लेफ्टिनेंट जनरल ए ए के नियाजी ने बांग्लादेश में अपने ही नागरिकों पर क्या जुल्म ढाया था. बता दें कि 1971 में बांग्लादेश युद्ध में जनरल नियाजी ने ही 90 हजार पाकिस्तानी सैनिकों के साथ भारत के सामने सरेंडर किया था.

अस्थायी प्रावधान था 370

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 एक आउटडेटेड और अस्थायी प्रावधान था, और इससे वहां के विकास में बाधा आ रही थी. विदिशा मैत्रा ने कहा कि जहां पाकिस्तान आतंकवाद और नफरत की बात कर रहा है वहीं पर भारत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रहा है. विदिशा मैत्रा ने कहा कि भारत के लोगों को वैसे शख्स से भाषण कतई नहीं चाहिए जो नफरत की विचारधारा का पालन करते हुए आतंक को उद्योग का रुप दे चुका है. 

**धरती पर इंद्र का अवतार है फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र**

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[संपादक करुणेश शर्मा शिवपुरी मध्य प्रदेश की कलम से]

भारत अपनी स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ रहा था. स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में अंग्रेजो के द्वारा दमनकारी चक्र चलाकर भारतीयों को विशेषकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को अंग्रेज कुचल रहे थे , देश महात्मा गांधी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आजादी आजादी की लड़ाई लड़ रहा था.
ऐसे समय में दिसंबर 1935 को धर्म सिंह देओल आज के धर्मेंद्र का जन्म हेड मास्टर श्री केवल कृष्ण देव जी के यहां नसरोली पंजाब में हुआ .
धर्मेंद्र जी देओल परिवार में सबसे बड़े बेटे व देओल परिवार की प्रथम संतान हैं , अपने भाई-बहनों में धर्म जी सबसे बड़े पुत्र हैं इस कारण माता पिता ने बड़ी उम्मीदों के साथ  साहनेवाल स्थित प्राइमरी स्कूल में जिसमें स्वयं धर्मेंद्र के पिता हेड मास्टर थे , दाखिला कराया ताकि उनके मार्गदर्शन में बच्चा शिक्षा प्राप्त करें.
घर में अन्य जाट परिवारों की तरह धार्मिक व संस्कारित माहौल घर में था . हम कह सकते हैं कि धर्मेंद्र का जन्म देहात की मजबूत मिट्टी से हुआ .
धर्मेंद्र के पिता अनुशासन प्रिय ईमानदार शिक्षक थे वह चाहते थे कि उनका पुत्र बड़ा होकर कॉलेज का प्रोफेसर बनकर खानदान का नाम रोशन करें .
उम़ की  पहली पायदान पर पैर रखते ही धर्मेंद्र की पढ़ाई में रुचि कम हो गई , किसी प्रकार कॉलेज की पढ़ाई फगवाड़ा में रहकर उन्होंने पूरी की इसी दौरान 19 वर्ष की आयु में उनका विवाह संस्कारी परिवार की पुत्री प्रकाश कौर के साथ हो गया . इस प्रकार पढ़ाई के उपरांत पारिवारिक जवाबदारियाॆ बढ़ चुकी थी. हालांकि संयुक्त परिवार के चलते यह बोझ काफी कम हो जाता है किंतु धर्म जी को अपनी जिम्मेदारी का एहसास था , इस अवधि में धर्मेंद्र जी ने पढ़ाई के दौरान ही अभिनेता दिलीप कुमार की फिल्म फगवाड़ा में देखी यहीं से उनके मन में फिल्म अभिनेता बनने का विचार आया . फिल्मों में जाने का विचार इस हद तक जुनून के रूप में था की मुंबई की ओर जाने वाली फ्रंटियर मेल ट्रेन को वह हसरत भरी नजरों से देखा करते थे , अपने  इंटरव्यू में उन्होंने फ्रंटियर मेल का जिक्र किया है. लुधियाना से मुंबई उस समय यही ट्रेन जाया करती थी धर्मेंद्र ने फैसला किया कि वह मुंबई जाकर फिल्मों में काम करेंगे एवं फिल्मों में दिखाई जाने वाली अप्सराओं से अवश्य मिलेंगे

इस अवधि में एक ट्यूबवेल कंपनी में उन्होंने नौकरी कर ली जिससे वह अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें किंतु दिव्य स्वप्नों ने उन्हें यह नौकरी नहीं करने दी उन्होंने अपने मन की बात अपनी मां व पत्नी को बता दी मां ने सुनकर कहा तेरे पिताजी इजाजत नहीं देंगे वह चाहते हैं कि तू नौकरी कर परिवार का नाम रोशन करें इस अवधि में उनकी पत्नी प्रकाश कौर ने सदैव इन हौसला दिया धर्मेंद्र मन मसोसकर नौकरी करते रहे, किंतु विधाता ने  तो धर्मेंद्र को इंद्र का अवतार बनाकर धरती पर भेजा था.
किंतु दिवा सपनों ने उन्हें ज्यादा दिन तक नौकरी नहीं करने दी.
क्योंकि विधाता को इंद्र के इस अवतार को  फिल्म उद्योग में अप्सराओं के पास भेजना था. इस कारण ऐसे संयोग पैदा हुए कि उसी समय फिल्म फेयर कॉन्टेस्ट का एक विज्ञापन प्रसारित किया गया, जिसे धर्मेंद्र जी ने अपने फोटो के साथ मुंबई चुपचाप भेज दिया इंटरव्यू के लिए बुलाना आया तो वह उसी फ्रंटियर मेल में बैठकर मुंबई जा पहुंचे . इंटरव्यू में सिलेक्ट होने के बाद उन्हें थोड़ा संतोष हुआ कि अब मेरी मंजिल दूर नहीं है.
इतने बड़े कांटेस्ट में जीतने के बाद भी धर्मेंद्र को एक भी फिल्म में काम नहीं मिला था .  कॉन्टेस्ट के निर्माता विमल राय शक्ति सामंत इत्यादि उन्हें काम देने के लिए कह चुके थे , इनमें शायद गुरुदत्त भी शामिल है , किंतु इनकी फिल्में उस समय शुरू नहीं हुई थी. कॉन्टेस्ट में जीतने के बाद भी धर्मेंद्र जी खाली थे उसी पीरियड में अर्जुन हिंगोरानी उनके मित्र ने उन्हें अपनी फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरा में काम करने का अवसर दिया . अर्जुन हिंगोरानी के इस एहसान को धर्मेंद्र जी आज तक मानते हैं
इसी समय से धर्मेंद्र की ख्याति फिल्म उद्योग में खूबसूरत अभिनेता के रूप में हो चुकी थी. इसी अवधि में वह अपने परिवार को साहनेवाल से मुंबई ले आए परिवार के साथ रहकर उन्होंने फिल्मों में तेजी से काम करना शुरू किया.

अपने कैरियर की शुरुआत में ही धर्मेंद्र ने मीना कुमारी ,आशा पारेख ,सायराबानो, वहीदा रहमान ,शर्मिला टैगोर ,नंदा ,मुमताज जैसी टॉक की हीरोइनों के साथ रोमांटिक फिल्में की. शुरुआती दौर में हर हीरोइन धर्मेंद्र के साथ काम करना चाहती थी क्योंकि रोमांटिक लीड में धर्मेंद्र काफी खूबसूरत व चर्चित अभिनेताओं में गिने जाने लगे थे .यह धर्मेंद्र का स्वर्ण में काल रहा है .अब धर्मेंद्र का दिवास्वप्न पूरा हो चुका था वह इंद्र की तरह अप्सराओं के साथ रहकर देश के खूबसूरत कलाकार के रूप में स्थापित हो चुके थे.
लंबा चौड़ा गठे हुए शरीर वाले खूबसूरत और कई विशेषताओं से युक्त धर्मेंद्र फिल्म उद्योग में लवर बॉय के रूप में प्रसिद्ध हो चुके थे . देश में युवतियों में व फिल्म हीरोइनों में उनका क्रेज इंद्र देवता की तरह सर चढ़कर बोल रहा था. इस पीरियड में उन्होंने कई हिट फिल्में फिल्म उद्योग को दीं.  इसी अवधि में फिल्म उद्योग में उन्होंने सहयोग पूर्ण रवैया अपनाते हुए,  अपने यार दोस्तों , रिश्तेदारों को भी फिल्म जगत  में   स्थापित कर दिया,  जो आज करोड़ों के स्वामी बन चुके हैं . इस प्रकार का कार्य कोई देवता ही कर सकता है.
धर्मेंद्र के बारे में यह कहा जाता है कि विधाता ने धर्मेंद्र को बनाकर वह सांचा ही तोड़ दिया है तो अतिशयोक्ति न होगी .इतना सुंदर अभिनेता आज तक इस दुनिया में नहीं आया है . यह कहावत धर्मेंद्र जी के बारे में पूर्ण प्रचलित है.
इस प्रकार के सुंदर अभिनेता को अगर इंद्र का अवतार ना कहें तो क्या कहें . कैरियर के अगले पड़ाव में हेमा मालिनी के साथ उनकी जोड़ी काफी लोकप्रिय हुई हेमा मालिनी ड्रीम गर्ल के रूप में प्रसिद्ध थी . धर्मेंद्र के आकर्षण को
स्वीकार करके उनसे विधिवत विवाह किया.
इसके उपरांत धर्मेंद्र ने सैकड़ों लोकप्रिय हिट फिल्में फिल्म उद्योग को दी इसी अवधि में उन्हें एंग्री इमेज की उपाधि से भी विभूषित किया गया .जनता उन्हें अपना आदर्श अभिनेता मानती है .आज की युवा पीढ़ी में भी धर्मेंद्र का क्रेज देखा गया है , युवा पीढ़ी जब उनकी पुरानी फिल्मों को देखती है तो वह उनकी खूबसूरती व अभिनय की कायल हो जाती है.
हिंदुस्तानी फिल्म उद्योग के लिए धर्मेंद्र एक ईश्वर की देन है , व पूरा देश उन्हें बेहद प्यार करता है आज इस दौर में भी वह सक्रिय भूमिका निभाते हुए देखे जा सकते हैं. धर्मेंद्र जी के जीवन पर उनके पुत्र सनी देओल अगर बायोग्राफी के रूप में एक मूवी का निर्माण करें तो यह फिल्म निश्चित ही सुपर हिट होगी ऐसी आशा है.
(करुणेश शर्मा
खुड़ा,
सरकिट हाउस के पीछे
शिवपुरी मध्यप़देश
मो.6264806398)

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संयुक्त राष्ट्र महासभा मेें मोदी और इमरान के भाषण में दिखा अंतर

इमरान खान ने 50 मिनट लंबा भाषण दियापाकिस्तानी पीएम ने फिर अलापा कश्मीर राग

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र को संबोधित किया. अपने भाषण में इमरान खान कश्मीर का राग अलापते रहे. अपने संबोधन में यूएन को उसकी जिम्मेदारी की याद दिलाने वाले इमरान ने संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन भी किया. इमरान खान से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महासभा को संबोधित किया, लेकिन उन्होंने नियमों का पालन करते हुए 17 मिनट में अपना भाषण समाप्त कर दिया.  

पीएम मोदी के ठीक उलट इमरान ने 50 मिनट का भाषण दिया जो सीधे तौर पर यूएन के नियम का उल्लंघन है. इमरान जिस वक्त भाषण दे रहे थे उस दौरान माइक के साथ मौजूद रेड लाइट लगातार जल रही थी, लेकिन इसके बाद भी इमरान नहीं रुके.

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में सभी नेताओं को अपनी बात रखने के लिए 15 मिनट का समय दिया जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका पालन किया, वहीं पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने समय सीमा को ताक पर रखकर करीब 50 मिनट तक भाषण दिया.

एक ओर जहां इमरान खान अपने भाषण में कश्मीर का राग अलापते रहे तो वहीं पीएम मोदी ने अपने संबोधन में एक बार भी कश्मीर और पाकिस्तान का जिक्र नहीं किया. पीएम मोदी का जोर विकास, जन कल्याण जैसे मुद्दों पर था, लेकिन उन्होंने अपने भाषण में पाकिस्तान को कड़ा संदेश जरूर दिया.

उन्होंने अपने भाषण में 5 बार आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने दुनिया को युद्ध नहीं बुद्ध दिया है. इसलिए आतंकवाद के खिलाफ भारत में आक्रोश दिखता है. वहीं इमरान खान ने कश्मीर में खून-खराबे की गीदड़भभकी दी. इमरान ने कहा कि भारत को कश्मीर से कर्फ्यू हटाना ही चाहिए. साथ ही इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र को उसकी जिम्मेदारी की भी याद दिलाई. उन्होंने यूएन को बताया कि क्यों उसका गठन हुआ था.

भारतीय नौसेना में शामिल हुआ ‘साइलेंट किलर’ खंडेरी

भारतीय नौसेना (Indian Navy) पिछले कुछ सालों से INS कलवरी का इस्तेमाल कर रही है. INS खंडेरी (INS Khanderi) उसी की अगली पीढ़ी की ताकतवर और अत्याधुनिक पनडुब्बी ह

नई दिल्ली. भारतीय नौसेना (Indian Navy) की पनडुब्बी INS खंडेरी (INS Khanderi) को बेड़े में शामिल कर लिया गया है. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने खंडेरी को नौसेना के बेड़े में शामिल किया. इसके निर्माण में पूरे 10 साल का समय लगा. यहां तक पंहुचने के क्रम में ये कई कड़ियों से होकर गुजरा है. जिसमें इंजिनियरों की दिनरात मेहनत और कई फेज की टेस्ट‍िंग शामिल है. ये समंदर में 350 मीटर की गहराई तक गोता लगाने में सक्षम है. इसमें मौजूद परमानेंटली मैग्नेटाइज्ड प्रोपलसन मोटर के कारण ये पनडुब्बी समुद्र में एकदम साइलेंट रहती है और दुश्मनों को इसका पता भी नहीं चल पाता.

 इसलिए रखा गया खंडेरी नाम

खंडेरी का नाम महान मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के खंडेरी दुर्ग के नाम पर रखा गया है. इस दुर्ग या किले की खासियत यह थी कि यह एक जल दुर्ग था मतलब चारों और पानी से घिरा हुआ इसलिए दुश्‍मन के लिए अभेद्य था.

12 हजार किमी जाने में सक्षम

INS खंडेरी समंदर में पूरे 45 दिन तक रहकर 12 हजार किमी जाने में सक्षम है. इससे पहले कलवरी स्कॉर्पीन श्रेणी की पहली पनडुब्बी थी. इसके बाद INS खंडेरी के निर्माण की कार्य शुरू हुआ था. भारतीय नौसेना पिछले कुछ सालों से INS कलवरी का इस्तेमाल कर रही है. INS खंडेरी उसी की अगली पीढ़ी की ताकतवर और अत्याधुनिक पनडुब्बी है.

INS खंडेरी समंदर में पूरे 45 दिन तक रहकर 12 हजार किमी जाने में सक्षम है.

बगैर आवाज किए चलती है ये पनडुब्बी

INS खंडेरी की लंबाई लगभग 67.5 मीटर है. इसकी चौड़ाई 12.3 मीटर है. ये समुद्र में 350 मीटर की गहराई तक गोता लगाने सक्षम है. साथ ही ये पानी के अंदर बिल्कुल खामोश रहती है. समंदर की सतह के ऊपर से देखने पर किसी तरह की हलचल का पता लगा पाना कठिन है. INS खंडेरी अपने बेस से 12 हजार किमी की दूरी तक गहरे समुद्र में दौड़ लगा सकता है.

INS खंडेरी की लंबाई लगभग 67.5 मीटर है. इसकी चौड़ाई 12.3 मीटर है.

इसकी रफ्तार है इसकी ताकत

खंडेरी समंदर के भीतर पानी में करीब 20 समुद्री मील और पानी के ऊपर करीब 11 मील की रफ्तार से चलने की क्षमता से लैस है. INS खंडेरी में कुल 360 बैटरियां हैं. इसमें से हर बैटरी का वजन 750 किग्रा है. इसमें स्थित परमानेंटली मैग्नेटाइज्ड प्रोपलसन मोटर की वजह से पनडुब्बी समंदर में एकदम शांत रहती है.