मोदी सरकार ने किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए शुरू की नई स्कीम, 80 फीसदी पैसा देगी सरकार

नई दिल्ली. किसानों के लिए मोदी सरकार (Modi Government) की सबसे बड़ी सब्सिडी वाली स्कीम से खेती करना काफी आसान हो जाएगा. ओला, उबर की तरह आप CHC Farm Machinery ऐप पर ऑर्डर देकर अपनी खेती के लिए जरूरी मशीनरी (औजार) बहुत सस्ते रेट पर मंगवा सकते हैं. अगर आप एग्रीकल्चर मशीनरी से जुड़ा बिजनेस करना चाहते हैं, तो इससे हर साल लाखों की कमाई कर सकते हैं. इसके लिए 80 फीसदी तक की सरकारी आर्थिक सहायता मिलेगी. इस स्कीम का नाम है कस्टम हायरिंग सेंटर (Custom Hiring Centre). इसे हम कृषि यंत्र बैंक कह सकते हैं. स्कीम से जुड़े एक अधिकारी ने न्यूज18 हिंदी को बताया कि किसान को कई ऑप्शन मिलेंगे जिसमें वो चाहे जिस सेंटर से सस्ता-महंगा के हिसाब से किराए पर मशीन खरीद सकता है.

यह ऐप बिल्कुल ओला (Ola), उबर (Uber) की तरह है. मशीनरी का रेट सरकार तय नहीं करेगी. यह सुविधा पांच से 50 किलोमीटर के बीच मिलेगी. मंत्रालय में मैकनाइजेशन एंड टेक्नॉलोजी डिवीजन के एडिशनल कमिश्नर वीएन काले ने बताया कि मशीनरी का किराया सरकार नहीं तय कर रही है. इसे हमने कंपटीशन के लिए छोड़ दिया है. मार्केट में कंपटीशन रहेगा तो किसान को सस्ती और अच्छी सेवा मिलेगी. यदि आपके पास एक भी कृषि यंत्र है तो भी आप उसे किराये पर देने के लिए एप में रजिस्टर्ड करवा सकते हैं.

कितनी और कैसे मिलेगी सरकारी सहायता?

अगर आप निजी कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC)बनाएंगे तो सरकार 40 फीसदी पैसे की सहायता देगी. इसमें 60 लाख रुपये तक का प्रोजेक्ट पास करवा सकते हैं. यानी अपने क्षेत्र के किसानों की जरूरत के हिसाब से इतनी रकम की मशीनें खरीद सकते हैं. इस प्रोजेक्ट में 24 लाख रुपये की सरकारी सहायता मिल पाएगी. जबकि यदि आप कॉपरेटिव ग्रुप बनाकर भी मशीन बैंक तैयार करते हैं तो ग्रुप में 6 से 8 किसान होने चाहिए. इसमें 10 लाख रुपये तक का प्रोजेक्ट पास होगा. यानी आपको 8 लाख रुपये तक की सरकारी सहायता मिलेगी. सब्सिडी का लाभ लेने के लिए किसान भाई अपने-अपने राज्य के कृषि विभाग के इंजीनियरिंग डिवीजन में संपर्क कर सकते हैं.

लागत और रिस्क कम करने की कोशिश

समय के साथ खेती में आधुनिकीकरण बढ़ रहा है, नई-नई मशीनों की जरूरत महसूस होने लगी है. चाहे वो खरपतवार निकाले की हो या छिड़काव करने और रोपाई-कटाई करने की. लेकिन हर किसी के लिए महंगे उपकरण खरीदना आसान नहीं है. ऐसे में मोदी सरकार खुद एग्रीगेटर बन गई है.

कृषि मंत्रालय (Agriculture Ministry) ने कस्टम हायरिंग सेंटर बनाने और उसका लाभ लेने के लिए ऐप लॉन्च किया है. ये ऐप 12 भाषाओं में उपलब्ध है. अब तक इसके 50 हजार डाउनलोड हो चुके हैं. इस योजना से जुड़े अधिकारियों को उम्मीद है कि जब किसी मशीन को खरीदने की बजाय वह किराए पर मिलेगी तो लागत कम होगी, उनकी आय बढ़ेगी और कर्ज का चक्कर नहीं होगा. दूसरी ओर जो किसान इसका बिजनेस कर रहा है उसे सरकार आर्थिक सहयोग कर ही रही है.

बिपिन रावत बने चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के हेड, बीएस धनोआ ने सौंपी बैटन

वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने शुक्रवार को चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (COSC) की कमान सेना प्रमुख बिपिन रावत के हाथ में सौंप दी. बीएस धनोआ 30 सितंबर को अपने पद से रिटायर हो रहे हैं और इसी के साथ COSC के प्रमुख का पद भी खाली हो रहा है. जिसकी जिम्मेदारी अब वरिष्ठ होने के नाते बिपिन रावत संभालेंगे.

शुक्रवार को नई दिल्ली में एयरचीफ मार्शल बीएस धनोआ ने एक कार्यक्रम में COSC चीफ के बैटन को बिपिन रावत को पास किया. इस दौरान यहां पर नेवी प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह भी मौजूद रहे. आपको बता दें कि ये कमेटी अभी सेना से जुड़े सभी बड़े फैसले लेती है, जिसकी अध्यक्षता तीनों सेना प्रमुखों से सबसे वरिष्ठ अधिकारी करता है.

एयरचीफ मार्शल बीएस धनोआ इस महीने के आखिर में वायुसेना प्रमुख के पद से रिटायर हो रहे हैं, उनकी जगह आरकेएस भदौरिया इस पद को संभालेंगे. बता दें कि 8 अक्टूबर को ही वायुसेना दिवस है ऐसे में इस बड़े दिन से पहले वायुसेना को उनका नया प्रमुख मिल चुका होगा.

नया पद संभालने के बाद बिपिन रावत को बधाई मिलना भी शुरू हो गया है, भाजपा सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने ट्वीट कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं.

क्या करती है ये कमेटी?

आपको बता दें कि चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (COSC)  के चेयरमेन के पास तीनों सेनाओं के बीच तालमेल सुनिश्चित करने और देश के सामने मौजूद बाहरी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सामान्य रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी होती है.

जल्द लागू होगी नई व्यवस्था

गौरतलब है कि इसी साल 15 अगस्त को लालकिले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CODS) की नियुक्ति करने का ऐलान किया था. इसकी मांग करगिल युद्ध के बाद से हो रही थी, लेकिन इस मांग को पूरा किया मोदी सरकार ने.

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CODS) सिस्टम भारत के अलावा कई देशों के पास है, जिनमें अमेरिका, चीन, यूनाइटेड किंगडम, जापान सहित दुनिया के कई देशों के पास चीफ ऑफ डिफेंस जैसी व्यवस्था है.

चीन बॉर्डर पर तैनात होगा दुनिया का सबसे घातक फाइटर जेट राफेल

बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भारत के लिए सीमा की सुरक्षा ज्यादा अहम हो गई है. ऐसे में राफेल फाइटर विमान काफी महत्वपूर्ण हो गया है. दुनिया का सबसे घातक फाइटर जेट राफेल जल्द ही बॉर्डर पर भारत की ताकत बढ़ाएंगे. ये चीन सीमा पर तैनात किए जाएंगे.

दरअसल, भारतीय वायु सेना ने फ्रांस से मिले लड़ाकू विमान राफेल को पूर्वोत्तर क्षेत्र में तैनात करने का फैसला किया है. इन विमानों को पाकिस्तान बॉर्डर से पहले चीन बॉर्डर पर तैनात किया जाएगा. विमानों को लेकर चीन के साथ किसी भी तरह के हालात से निपटने के लिए तैयारी पूरी की जा रही है. 

शिलांग में सेना के प्रवक्ता ने बताया है कि जल्दी ही राफेल को चिनूक और अपाचे हेलिकॉप्टरों के साथ पूर्वोत्तर में तैनात किया जाएगा. पूर्वी कमान क्षेत्र में अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन का रुख आक्रामक रहता है. ऐसे में राफेल की तैनाती काफी अहम मानी जा रहा है. 

पूर्वोत्तर में तैनात किए जा रहे ज्यादातर राफेल विमानों की तैनाती चीन की सीमा के आसपास होगी. इन विमानों के उतरने के लिए आठ लैंडिंग ग्राउंड तैयार किए गए हैं, जो किसी भी समय चालू किए जा सकते हैं.

भारतीय वायुसेना को जल्द ही दुनिया का सबसे घातक फाइटर जेट राफेल मिलने जा रहा है. 8 अक्टूबर यानी विजयादशमी के दिन पहला राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट वायुसेना को आधिकारिक तौर पर मिल जाएगा. वायुसेना को कुल 36 राफेल लड़ाकू विमान मिलेंगे.

राफेल फाइटर जेट की खासियत ये है कि यह कई तरह के रोल निभा सकता है. हवा से हवा में मार कर सकता, हवा से जमीन पर भी आक्रमण करने में सक्षम है. इसमें परमाणु बम गिराने की भी ताकत है. एक मिनट में विमान के दोनों तरफ से 30 MM की तोप से 2500 राउंड गोले दागे जा सकते हैं.

राफेल में एक सिस्टम है जो दुश्मनों के क्षेत्र में लड़ाई कर वापस आने में भी मदद कर सकता है. यह जेट इतना फ्लेक्सिबल है कि कम से कम ऊंचाई से लेकर अधिक से अधिक ऊंचाई तक, दोनों ही स्थितियों में बेहतर एक्शन ले सकता है.

बता दें कि राफेल विमान डील काफी चर्चा में रहा. विपक्ष की ओर से सरकार पर इस मामले में गलत डील करने का आरोप लगाया गया. लोकसभा चुनाव में राफेल डील मुद्दा बना रहा लेकिन केंद्र सरकार इस पर पीछे नहीं हटी और आखिरकार अब राफेल जल्द ही भारतीय वायुसेना की ताकत बनने वाला है.

UPSC Mains: आप IAS बनेंगे या IPS, रैंक से नहीं अब ऐसे होगा तय

UPSC की सिविल सर्विर्सेज परीक्षाओं में अब उम्मीदवारों के कैडर तय करने का तरीका बदलने वाला है. अब UPSC में रैंकिंग के हिसाब से नहीं बल्कि उम्मीदवार की लीडरशिप एप्रेाच व अन्य क्षमताओं के हिसाब से कैडर तय होगा. 

डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) के सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार जल्द ही यूपीएससी सिविल सर्विसेज में इस तरह के बदलावों पर सोच रही है. पीएमओ ने डीओपीटी से इस बारे में रिपोर्ट भी मांगी है. 
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DoPT स्रोतों ने इन तथ्यों की पुष्टि की है लेकिन अभी कागज पर ऐसा कुछ भी नहीं है. सूत्रों का कहना है कि यही नहीं, केंद्र सरकार DoPT को भी दो हिस्सों में बांटना चाहती है. जिससे कार्मिक मामलों और प्रशिक्षण को संभालने के लिए दो अलग-अलग विभाग हों. DoPT सूत्रों का कहना है कि सरकार  पाठ्यक्रम की तुलना में बदलते समय के अनुकूल  प्रशिक्षण और व्यक्तिगत दक्षता पर ध्यान दे रही है. 

बता दें, आम चुनाव से पहले सिविल सर्विसेज परीक्षा में बदलाव को लेकर विवाद हुआ था. जब ये प्रस्ताव आया कि सिविल सर्विसेज में सफल उम्मीदवार को फाउंडेशन कोर्स पूरा करके उसमें मिले नंबरों के आधार पर राज्य और सर्विस कैडर तय होगा. इस पर विवाद होने पर सरकार ने सफाई दी थी कि अभी सिर्फ इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है. 

ये हो सकते हैं बदलाव 

इस प्रस्ताव में कहा गया है कि मोदी सरकार सिविल सर्विसेज परीक्षा के बरसों पुराने सिस्टम में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर रही है. इसके अनुसार सिविल सर्विस में सफल लोगों को परीक्षा और कैडर देने के लिए उनके किताबी ज्ञान के साथ ही उनका व्यवहारिक ज्ञान भी मुख्य भूमिका निभाएगा. 

उनके बेसिक ज्ञान से ही जो अंक मिलेंगे, उसी से तय होगा कि वो किस सेवा और राज्य में भेजने के लिए उपयुक्त हैं. कहा जा रहा है कि इससे परीक्षा में टॉपर को IAS कैडर न मिलने या ट्रेनिंग में बेहतर प्रदर्शन करने वाले को आईएएस बनने का मौका मिल सकता है. अभी सिविल सर्विसेज में रैंक के आधार पर कैडर मिल जाया करता है, ज्यादातर टॉपर को सामान्य रूप से IAS या बड़े राज्य कैडर के रूप में मिलते हैं. 

आरक्षण में उम्र की छूट नहीं 

डीओपीटी ने अपनी ही सरकार के दूसरे मंत्रालय के आग्रह को खारिज करते हुए, आर्थिक रूप से कमजोर उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सुविधा के तहत उम्र में छूट देने से मना कर दिया था. सरकार ने हाल ही में 10 फीसदी आरक्षण का कानून बनाया तो उसके तहत परीक्षा में बैठने के लिए उम्र में छूट नहीं दी थी.

श्रीलंका के सबसे बड़े हाथी की सुरक्षा करेंगे हथियारबंद जवान, सरकार ने दी मंजूरी

श्रीलंका की सरकार ने देश के सबसे बड़े हाथी की सुरक्षा में हथियारों से लैस सेना के जवान तैनात किए हैं। 65 साल के हाथी नंडुनगमुवा राजा की ऊंचाई 10.5 फीट है। हाथी नंडुनगमुवा श्रीलंका का सबसे बड़ा हाथी है। 

हाथी की देखभाल करने वालों लोगों ने जानकारी दी कि नंडुनगमुवा कई उत्सवों में हिस्सा लेने के लिए मुख्य मार्गों से गुजरता है। इसे देखते हुए सरकार ने इनकी सुरक्षा बढ़ाने का फैसला लिया है। 

हाथी के मालिक ने बताया कि 2015 में एक तेज रफ्तार मोटरसाइकिल हाथी से टकराते-टकराते रह गई थी। जिसके बाद सरकार को इस घटना की जानकारी मिली, सरकार ने सीसीटीवी फुटेज देखे और हाथी के मालिक से संपर्क किया। सरकार ने हाथी नंडुनगमुवा के मालिक से सुरक्षा देने की पेशकश की।

सरकार की इस पेशकश पर हाथी के मालिक ने हामी भरी। जिसके बाद से ही हाथी को सुरक्षा प्रदान की जा रही है। भीड़ भरे इलाकों में हाथी के चलने के दौरान उसकी सुरक्षा में दो सैनिक तैनात रहते हैं, साथ ही देखरेख के लिए महावत भी होते हैं। 

नंडुनगमुवा श्रीलंका के उन चुनिंदा हाथियों में से एक हैं, जो गौतम बुद्ध के अवशेष वाले पिटारे को वार्षिक झांकी के दौरान पवित्र बौंद्ध मंदिर तक लेकर जाता है। बौद्ध मंदिर तक पहुंचने के लिए हाथी को कैंडी हिल रिसॉर्ट तक 90 किलोमीटर की यात्रा करनी होती है। हर साल अगस्त के महीने में यह धार्मिक आयोजन होता है, जिसमें सौ से अधिक हाथी भाग लेते हैं। 

श्रीलंका में हाथियों के साथ दुर्व्यहार का मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है। पिछले मंगलवार को एक 70 साल के हाथी टिकरी की मौत हो गई थी, जिसनें एक धार्मिक कार्यक्रम में भाग लिया था। 

हाथी टिकरी की शरीर हड्डियों के ढ़ांचे जैसा नजर आता था। कुछ दिनों पहले ही उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई थी। गौरतलब हैं कि श्रीलंका में कई अमीर लोग हाथी पालते हैं, लेकिन वह उनकी समुचित देखरेख नहीं करते हैं। 

मध्यप्रदेश / सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने परिवहन विभाग चलाएगा अभियान

भोपाल.परिवहन विभाग द्वारा प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए हाईवे और सभी 52 जिलों के एंट्री और एग्जिट पर मुख्यमंत्री की ओर से दुर्घटनाओं में कमी लाने संबंधी अपील व जागरूकता संबंधी होर्डिंग लगाए जाएंगे। इतना ही नहीं सभी आरटीओ साफ-सुथरे हों और उनमें आम लोगों की पहुंच आसान हो, इसके लिए बिल्डिंग में सुधार किए जाएंगे।

ट्रांसपोर्ट कमिश्नर डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि जागरूकता अभियान की तैयारियों की समीक्षा की जा रही है। प्रदेश में हर साल 50 हजार से अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत होती है। मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर परिवहन विभाग ने इसमें कमी लाने और लोगों को जागरूक करने अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इसी के तहत हाई-वे से लेकर जिलों की एंट्री और एग्जिट पर जागरूकता संबंधी बोर्ड व होर्डिंग लगाए जा रहे हैं।

विंडो तक आम लोगों की पहुंच आसान करने किया रिनोवेशन

विभाग ने सभी आरटीओ में आम लोग आसानी से विंडो तक पहुंच सकें, ऐसी व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर का कहना है कि भोपाल सहित अधिकतर आरटीओ की नई बिल्डिंग बन चुकी हैं। इनमें आम लोगों की सुविधा के अनुसार परिवर्तन किया जा रहा है, जिससे वे आसानी से हर शाखा तक पहुंच सकें।

घर में घिरे इमरान, PPP सांसद बोले- PAK के लिए खतरा, विदेशी दौरों पर लगे रोक

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान संयुक्त राष्ट्र में जम्मू-कश्मीर का मसला उठाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिल रही है. हर जगह उन्हें मुंह की खानी पड़ रही है और अब पाकिस्तान के नेताओं को भी ये बात समझ आ गई है. यही कारण है कि पाकिस्तान में इमरान खान इस वक्त विपक्षी पार्टी के निशाने पर हैं.

पाकिस्तान की विपक्षी पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) का कहना है कि इमरान खान के विदेशी दौरे पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं, ऐसे में उनके विदेशी दौरों पर रोक लगा देनी चाहिए. क्योंकि वह जब भी देश से बाहर जाते हैं उससे पाकिस्तान को ही घाटा हो रहा है.

विपक्षी दल पीपीपी ने खोला मोर्चा

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के सेनेटर मुस्तफा नवाज़ खोखर ने गुरुवार को कहा कि इमरान खान दुनिया में पाकिस्तान का पक्ष रखने की बजाय अपने मुल्क के खिलाफ ही बोल रहे हैं, जिसकी वजह से भारतीय मीडिया में पाकिस्तान का मज़ाक उड़ रहा है.

आपको बता दें कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की पार्टी है, इस वक्त पार्टी के प्रमुख उनके बेटे बिलावल भुट्टो ज़रदारी हैं.

ऐसा क्या किया इमरान खान ने?

दरअसल, पाकिस्तान में इमरान खान के विरोध का कारण भी जायज है. क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान को वैश्विक मंचों पर मात खानी पड़ रही है. फिर चाहे वह जम्मू-कश्मीर के मसले पर हर मंच पर कूटनीतिक हार हो या फिर आतंकवाद के मसले पर खुली पोल है.

अभी न्यूयॉर्क में ही इमरान खान ने इस बात को स्वीकार किया था कि अमेरिका के कहने पर पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने अलकायदा के आतंकवादियों को ट्रेनिंग दी थी, लेकिन जब काम खत्म हुआ तो अमेरिका वहां से चला गया. जिसके बाद पाकिस्तान को काफी कुछ भुगतना पड़ा.

इसके अलावा इमरान खान ने कहा था कि 9/11 के बाद अमेरिका पर भरोसा करना पाकिस्तान की सबसे बड़ी भूल थी. इन मसलों के अलावा जम्मू-कश्मीर पर अमेरिका का भारत के प्रति दोस्ती का रुख भी पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका ही है.

भारतीय प़शासनिक सेवा की परीक्षा पद्धति में बदलाव कर सकती है केंद़ सरकार.

सरकार यूपीएससी परीक्षा के पैटर्न में बड़ा बदलाव करने जा रही है. खबर है कि सरकार विचार कर रही है कि अब सिविल सर्विसेज परीक्षा में सफल उम्‍मीदवारों को उनकी रैंक के आधार कैडर नहीं बल्‍कि लीडरशिप स्‍किल और अन्‍य क्षमताओं के आधार पर होगा. जी हां अब आप IAS बनेंगे या IPS ये रैंक नहीं बल्‍कि उनका व्‍यवहारिक ज्ञान तय करेगा.

इसके तहत ही डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग (DOPT ) के सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार यूपीएससी में इस तरह के बदलाव पर विचार कर रही है. पीएम (PM MODI) ने डीओपीटी से इस बारे में रिपोर्ट भी मांगी है. डीओपीटी स्त्रोतों ने इन तथ्‍यों की पुष्‍टि की है. हालांकि  अभी ऑफिशियिली इस बारे में अभी कोई घोषणा नहीं की गई है.

दरअसल मोदी सरकार सिविल सर्विसेज परीक्षा के बरसों पुराने सिस्‍टम में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर रही है. आज तक की खबर के मुताबिक मोदी सरकार सिविल सर्विस में सफल लोगों को परीक्षा और कैडर देने के लिए उनकी किताबी ज्ञान के साथ-साथ उनका व्‍यवाहारिक ज्ञान भी मुख्‍य भूमिका निभाएगा.

इस नए नियम से ये भी संभव है कि UPSC में टॉप करने वाले को IAS  कैडर न मिल कर बल्‍कि ट्रेनिंग में बेहतर परफॉर्म करने वाले को ये मौका मिल जाए, अभी सिविल सर्विसेज में रैंक के आधार पर तय होता था कि उम्‍मीदवार को किस सेवा और कैडर में भेजा जाएगा.

सिविल सर्विसेज परीक्षा बदलाव को लेकर पिछले काफी समय से बवाल चल रहा था. दरअसल एक ये प्रस्‍ताव आया था कि सिविल सर्विसेज में सफल उम्‍मीदवार को फाउंडेशन कोर्स पूरा करके उसमें मिले नंबरों के आधार पर ही राज्‍य और सर्विस कैडर तय होगा. हालांकि इस पर विवाद होने पर सरकार ने सरकार ने सफाई दी थी कि अभी सिर्फ इस प्रस्‍ताव पर विचार किया जा रहा है.

क्यों डूब रहा महाराष्ट्र का पीएमसी बैंक?

आरबीआई ने पंजाब एंड महाराष्ट्र कॉ-ऑपरेटिव (PMC) बैंक पर 6 माह के लिए ऑपरेश्नल प्रतिबंध लगा दिया है। इस अवधि के दौरान बैंक किसी को लोन भी नहीं दे सकेगा और बैंक के खाताधारक इस अवधि के दौरान बैंक से सिर्फ 10,000 रुपए ही निकाल सकेंगे। गौरतलब है कि पीएमसी बैंक का कॉरपोरेट ऑफिस मुंबई में भानदुप स्टेशन के नजदीक बनी बिल्डिंग ड्रीम्स मॉल में स्थित है। जिस बिल्डिंग में पीएमसी बैंक का ऑफिस है, उसे वाधवा द्वारा प्रमोटेड हाउसिंग डेवलेपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (HDIL) द्वारा विकसित किया गया है। हालांकि बैंक और HDIL कंपनी के बीच का संबंध इससे भी आगे का है।

पीएमसी बैंक, कंपनी के लिए इन-हाउस बैंकर के रुप में काम कर रहा था। बता दें कि HDIL कंपनी इन दिनों नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के सामने दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही है। पीएमसी बैंक के चेयरमैन वर्यम सिंह 9 साल एचडीआईएल कंपनी के बोर्ड में शामिल रहे हैं। उन्होंने साल 2015 में निदेशक पद से इस्तीफा दिया था।

इसके साथ ही कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्यम सिंह के साल 2015 में HDIL कंपनी में 1.91 प्रतिशत शेयर भी थे। वहीं दीवान हाउसिंग फाइनेंस (DHFL) के चेयरमैन रहे राजेश वाधवा भी पीएमसी बैंक के बोर्ड में शामिल रह चुके हैं।

खास बात ये है कि जब HDIL कंपनी दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही थी, उस दौरान पीएमसी बैंक द्वारा कंपनी को 96.50 करोड़ रुपए का लोन दिया गया था। हालांकि बैंक के एमडी जॉय थॉमस का कहना है कि बैंक के पास राकेश वाधवा के बेटे और एचडीआईएल कंपनी के वाइस चेयरमैन और एमडी सारंग वाधवा की निजी गारंटी के साथ ही जमानत राशि पर्याप्त मात्रा में जमा है।

बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ने रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन बिजनेस और हाउसिंग के लिए 984.69 करोड़ रुपए का एडवांस दिया है। वहीं बैंक सूत्रों के अनुसार, एक्सपोजर इससे कहीं ज्यादा करीब 1500-2500 करोड़ होने का अनुमान है।
आरबीआई द्वारा पीएमसी बैंक पर प्रतिबंध लगाने के बाद इस धांधली के तार भाजपा नेताओं के साथ भी जुड़ रहे हैं। दरअसल बैंक के एक निदेशक रजनीत सिंह, बैंक में सह-निदेशक के पद पर हैं और मुंबई के मुलुंड से 4 बार भाजपा विधायक रह चुके हैं। रजनीत खुद भी भाजपा के सदस्य हैं और आगामी विधानसभा चुनावों में टिकट पाने के दावेदार हैं। रजनीत सिंह के अलावा बैंक के 12 अन्य निदेशकों का भी भाजपा से जुड़ाव बताया जा रहा है। हालांकि रजनीत सिंह का कहना है कि बैंक में हुई गड़बड़ के साथ उनका कोई लेना-देना नहीं है।