मां नर्मदा सहित अन्य नदियों के अवैध उत्खनन एवं विभिन्न घांटो की सफाई एक चिंता जनक विषय है।


जबलपुुुर इन्हीं मुद्दों पर रायसेन जिले के बाद , आज जबलपुर जिले के माननीय कलेक्टर महोदय एवं अन्य माइनिंग अधिकारियों के साथ बैठक हुई एवं उन्हें निर्देश दिए गए!
अवैध खनन एवं घाटों कि सफाई पे जल्द से जल्द काम किया जाए!

नदी न्यास अध्यक्ष कंप्यूटर बाबा ने कहा नर्मदा व अन्य नदियों में अवैध उत्खनन को प्रदेश सरकार बंद कराएगी। साथ ही सभी नदियों की स्वछता व् पौधरोपण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत आने वाले सभी विभागों और माइनिंग अधिकारयों के साथ मैराथन बैठकों का दौर चल रहा है जिसके अध्यक्षता स्वयं कंप्यूटर बाबा ने अपने हाथ मे ली है |

टेलाइट तस्वीरों से बेनकाब हुआ पाकिस्तान, कहुटा में पकड़ा गया न्यूक्लियर प्लांट

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की सितंबर के मध्य में एक इंटरनेशनल मीडिया को दिए इंटरव्यू के इस अंश पर गौर करिए- “जब न्यूक्लियर हथियारों से लैस कोई देश अंत तक लड़ता है, मौत तक लड़ता है, तो इसके परिणाम होते हैं.”

अब उनके 30 अगस्त को न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखे  ‘ओपिनियन’ के इन शब्दों को देखिए- “अगर दुनिया कश्मीर और इसके लोगों पर भारत के हमले को रोकने के लिए कुछ नहीं करेगी, तो उसके पूरी दुनिया के लिए नतीजे होंगे क्योंकि न्यूक्लियर हथियारों से लैस दो देश सीधे सैन्य टकराव के करीब होंगे.”

(OSINT) ने अपनी जांच में जो पाया है वो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए हैरान करने वाला खुलासा हो सकता है. इस जांच से सामने आया है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के बयान खोखले जुबानी खर्च नहीं हैं. उनकी मानवता को बर्दाश्त ना की जा सकने वाली धमकी असल भी हो सकती है.

याद कीजिए, इस्लामाबाद न्यूक्लियर सामग्री और दक्षता के प्रसार के लिए दुनिया भर में कुख्यात रहा है. 2004 में पाकिस्तान अभूतपूर्व न्यूक्लियर स्कैंडल के केंद्र के तौर पर उभरा. पाकिस्तान के एटम बम के पिता माने जाने वाले अब्दुल कादिर खान की तब दुनिया की कुछ बेलगाम हुकूमतों को न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी चोरी छुपे पहुंचाने वाले स्मगलर के तौर पर पहचान बनी.

आइए अब सितबर 2019 पर आते हैं: रावलपिंडी ज़िले के कहुटा में स्थित न्यूक्लियर प्रोजेक्ट में पाकिस्तान चोरी छुपे यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम चला रहा है.

OSINT के निष्कर्षों से पता चला कि किलाबंद इस लोकेशन को गोपनीयता के पर्दे से ढकने की पूरी कोशिश की गई है. इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एसोसिएशन (IAEA) इस लैब को ‘न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी का अवैध स्रोत’ करार दिया है.  साथ ही इसे ‘न्यूक्लियर अप्रसार के लिए गंभीर खतरा’ भी बताया. 

OSINT टीम की ओर से हासिल की गई हाई रिजोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों से पुष्टि होती है जिस नई फैसिलिटी का निर्माण हुआ है वो कहुटा में खान रिसर्च लेबोरेट्री की पुरानी लैब से महज़ 800 मीटर की दूरी पर है.  

इन तस्वीरों को बारीकी से देखने पर नोटिस किया जा सकता है कि कैसे 2014 में जो खाली हैलीपेड था, उस ज़मीन के टुकड़े को 2019 में संभावित न्यूक्लियर सेंट्रीफ्यूज फैसिलिटी में बदल दिया गया है.

इन घातक नई तस्वीरों के पीछे काला अतीत है. स्वतंत्र ग्लोबल थिंक टैंक्स के शोध पहले इशारा दे चुके हैं कि इसी लोकेशन पर कोई निर्माणाधीन ढांचा स्थित है.

‘द न्यूक्लियर थ्रेट इनीशिएटिव’ (NTI), जेन्स और द इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी सहमत थे कि उस समय जो ढांचा बन रहा था, वो न्यूक्लियर सेंट्रीफ्यूज से मिलता जुलता था. न्यूक्लियर सेंट्रीफ्यूज़ उस फैसिलिटी को कहते हैं जहां यूरेनियम को संवर्धित कर न्यूक्लियर बम बनाने लायक ताकतवर ईंधन बनाया जाता है.

कहुटा सेंटर पर निर्माण जारी था, इसलिए फॉरेन वॉचडाग्स किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे. इंडिया टुडे की ओर से हासिल की गई नई सैटेलाइट तस्वीरों से पुष्टि हुई कि ढांचा 6 हेक्टेयर में फैला है और अब पूरी तरह तैयार है. इसके चारों और दो मीटर मोटी बाउंड्री वॉल है. साथ ही छत को इस तरह बनाया गया है जिससे यहां की असलियत सामने ना आ सके. यानी दुनिया से इस फैसिलिटी को छुपा कर रखने की पूरी कोशिश की गई है.  

रिटायर्ड एयर वाइस मार्शल सुनील नानोदकर को जब इन ताजा तस्वीरों को दिखाया गया तो उन्होंने कहा, ‘मैंने जो सैटेलाइट तस्वीरें देखीं, उससे उनकी पहले से चली आ रही मंशा समझ आ गई. मैं समझता हूं कि ये बहुत हैरानी वाला है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस पर अधिक आवाज नहीं की. ये फैसिलिटी कहुटा में उस पुरानी फैसिलिटी के बहुत पास विकसित की जा रही है, जहां लैब में पाकिस्तान की न्यूक्लियर क्षमताओं का हथियारीकरण हो रहा है. मैं समझता हूं कि हमें इसे साफ तौर पर देखने की ज़रूरत है कि इसकी क्षमता क्या होगी. हम जानते हैं ये न्यूक्लियर फैसिलिटी है.’

डीआरडीओ के पब्लिक इंटरफेस डिवीजन के पूर्व निदेशक रवि कुमार गुप्ता भी कुछ ऐसी ही राय रखते हैं. वो कहते हैं, ‘ये दिखाता है कि पाकिस्तान अपनी न्यूक्लियर एनरिचमेंट फैसिलिटी का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है. हम इसकी अनदेखी नहीं कर सकते क्योंकि ये खान रिसर्च लैबोरेट्री के बिल्कुल पास है. वही जगह जहां पाकिस्तान न्यूक्लियर बम और मिसाइल विकसित करता है. ऐसे में विश्व समुदाय को इसे बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए.’

पाकिस्तान का सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम भी है जो चीन की मदद से चल रहा है. लेकिन खान रिसर्च फैसिलिटी IAEA के वैशविक सेफगार्ड्स के तहत नहीं है.

जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भविष्य के किसी न्यूक्लियर फ्लैशपाइंट की जिम्मेदारी वैश्विक समुदाय पर रख रहे हैं, ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि ये समय है अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दखल देने का है.

रिटायर्ड एयर वाइस मार्शल नानोदकर कहते हैं, “ये तस्वीरें आपको ईरान और नार्थ कोरिया की फैसिलिटी के करीब ले जाती हैं. अगर आज हम कहें कि ये सिर्फ़ ईरान और नॉर्थ कोरिया हैं और पाकिस्तान नहीं है, तो ज़रूर कुछ गड़बडी वाला है. मैं समझता हूं कि इसे हमें इसे उठाना चाहिए. हमें सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसे उठाने ती ज़रूरत है.

वाराणसी: मालिक की हत्या के बाद कई घंटे तक शव के पास बैठा रहा मोर

वाराणसी 
इंसान तो इंसान, पशु-पक्षियों में भी काफी संवदेना होती है। रिश्‍तों को वह भी समझते और निभाते हैं। ऐसा ही एक वाकया मंगलवार को काशी हिन्‍दू विश्‍वविद्यालय (बीएचयू) में देखने को मिला। यहां एक चाय विक्रेता की हत्‍या के बाद उसके शव के पास पालतू मोर कई घंटे तक बैठा रहा। इस दौरान सुरक्षाकर्मी डंडा पटकते रहे, लेकिन वह घटनास्थल से हटा नहीं।बीएचयू कैंपस में आयुर्वेद विभाग के पास चाय की दुकान चलाने वाले रामजतन साहनी (65) की सोमवार देर रात सोते समय अज्ञात बदमाशों ने ईंट से सिर कूचकर हत्‍या कर दी। रामजतन का पालतू मोर सुबह ही दुकान के बाहर पहुंचा तो चारपाई पर पड़ी लाश के पास बैठा रहा। 

सुरक्षाकर्मी करते रहे कोशिश, नहीं हटा मोर 
अपने मालिक की मौत से दुखी मोर काफी देर तक यहीं बैठा रहा। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने मोर को हटाने के लिए कई बार डंडा पटका, लेकिन मोर पर इसका कोई असर नहीं हुआ। बाद में जब पुलिस ने शव कब्‍जे में लेकर पोस्‍टमॉर्टम के लिए भेजा तब मोर उड़कर कहीं चला गया। 

पक्षियों से था बहुत लगाव 
बीएचयू के लोग बताते हैं कि रामजतन को पशु-पक्षियों से काफी लगाव था। हर दिन मोर के साथ ही कई पक्षी उनकी दुकान पर दाना-पानी के लिए आते रहते थे। रामजतन इन्‍हें बड़े प्रेम से ब्रेड और नमकीन खिलाते थे। 

बैंक घोटाला: ED की रिपोर्ट में शरद पवार और अजित पवार का नाम

प्रवर्तन निदेशालय ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के मुखिया शरद पवार के खिलाफ ईसीआईआर दर्ज की है. साथ ही अजित पवार, आनंद राव, जयंत पाटिल के खिलाफ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक स्कैम मामले में ईसीआईआर दर्ज की गई है.

ईसीआईआर एफआईआर के बराबर ही होता है. इसमें पीएमएलए एक्ट के तहत ईडी एनफोर्समेंट केस इनफॉर्मेशन दर्ज करती है. इसपर शरद पवार ने कहा, ‘यदि उन्होंने मेरे खिलाफ मामला दर्ज किया है, तो मैं इसका स्वागत करता हूं. मैंने उन जिलों में जबरदस्त प्रतिक्रिया देखी है जिनमें मैंने और मेरे पार्टी के सहयोगियों ने दौरा किया है, खासकर युवाओं की प्रतिक्रिया बेजोड़ थी. इसके विपरीत लोगों की प्रतिक्रिया देखने के बाद मुझे आश्चर्य होता अगर मेरे खिलाफ कार्रवाई नहीं होती. मैं उन सभी को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने इस कार्रवाई की शुरुआत की है.

शरद पवार ने कहा, ऐसे समय में जब चुनाव सामने हैं, मेरे जैसे व्यक्ति का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है, जो भी इसमें फंसा हो…जब महाराष्ट्र के लोगों को इसका एहसास होगा, तो प्रभाव देखा जाएगा और मुझे यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि इससे किसे लाभ होगा.

बता दें, महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है. दरअसल, 22 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार समेत 70 लोगों पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया था.
मुंबई पुलिस ने महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससीबी) घोटाला मामले में बंबई हाईकोर्ट के निर्देशों पर 26 अगस्त को एनसीपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित पवार 10 नवंबर 2010 से 26 सितंबर 2014 तक उपमुख्यमंत्री रहे थे.

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की जांच के साथ ही महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसायटीज कानून के तहत अर्द्ध न्यायिक जांच आयोग की तरफ से दायर आरोप पत्र में नुकसान के लिए पवार और अन्य आरोपियों के ‘निर्णयों, कार्रवाई और निष्क्रियताओं’ को जिम्मेदार ठहराया गया था. स्थानीय कार्यकर्ता सुरिंदर अरोड़ा ने 2015 में ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराई और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी.

अमिताभ बच्चन को दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड मिलने का हुआ ऐलान तो रजनीकांत का यूं आया रिएक्शन

नई दिल्ली: अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) को अब भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान ‘दादा साहेब फाल्के अवार्ड (Dada Saheb Phalke Award)’ से सम्मानित किया जाएगा. इस बात की जानकारी खुद पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दी है. हाल ही में, प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javdekar) ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए कहा, ‘लेजेंड अमिताभ बच्चन जिन्होंने दो पीढ़ियों का मनोरंजन किया है, उन्हें बाबा साहब फाल्के के लिए चुना गया है. पूरा देश और अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय इस बात से काफी खुश है. मेरी तरफ से भी उनको ढेर सारी शुभकामनाएं.’ जैसे ही अमिताभ बच्चन को अवॉर्ड देने की घोषणा हुई, तो बॉलीवुड से ट्वीट आने लगे. रजनीकांत, करण जौहर और मधुर भंडारकर ने अमिताभ बच्चन को बधाई दी है. रजनीकांत ने ट्वीट में लिखा है कि आप इस सम्मान को डिजर्व करते हैं.

अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) को मिलने वाले इस सम्मान को लेकर अब बॉलीवुड सेलेब्रिटीज भी उन्हें बधाइयां दे रहें हैं. हाल ही में फिल्ममेकर करण जौहर ने ट्वीट करके अमिताभ बच्चन को बधाई दी. करण जौहर (Karan Johar) ने कहा ‘भरतीय सिनेमा के सबसे प्रेरणादायक लीजेंड. वो एक रॉकस्टार हैं. मैं उनकी सदी में जन्म लेकर काफी गर्व महसूस कर रहा हूं.’
अनिल कपूर (Anil Kapoor) ने भी अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) को बधाई देते हुए लिखा ‘भारतीय सिनेमा का इस लेजंड के बिना जिक्र ही नहीं हो सकता. उन्होंने अपने हर किरदार के साथ सिनेमा को रीडीफाइन किया है. भरतीय सिनेमा में अपने योगदान के लिए वह प्रशंसा के हकदार हैं! बधाई!’

Mission Kashmir पर इमरान खान ने डाले हथियार, कहा- नहीं मिला दुनिया का समर्थन

न्यूयॉर्क, । पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कश्मीर मुद्दे पर अपनी हार स्वीकार कर ली है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने स्वीकार किया है कि पाकिस्तान कश्मीर मु्ददे के अंतरराष्ट्रीयकरण के अपने प्रयासों में फेल रहा है। इमरान खान ने मंगलवार को कहा कि वह इस मुददे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन हासिल ना कर पाने से निराश हैं।

इमरान खान ने ये स्वीकार किया कि कश्मीर से आर्टिकल 370 (Article 370) हटाए जाने के भारत के फैसले को ज्यादातर देशों ने समर्थन किया है और पाकिस्तान को किसी भी मंत पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का सहयोग नहीं मिल पाया है।

कश्मीर पर फिर रोए इमरान

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा से पहले एक प्रेस वार्ता में कहा, ‘ मैं कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से निराश हूं। मैं ये पूछना चाहता हूं कि अगर आठ मिलियन यूरोपी नागरिकों या यहूदियों या आठ अमेरिकियों को ऐसे बंदी बनाकर रखा गया होता तो क्या तब भी यही प्रतिक्रिया होती ? इमरान ने आगे कहा कि पीएम मोदी पर बंद हटाने को लेकर कोई दबाव नहीं है। हम दबाव डालते रहेंगे..9 लाख सैनिक वहां क्या कर रहे हैं ? एक बार कर्फ्यू हटा लेने के बाद भगवान जानता है कि उसके बाद क्या होने वाला है..आपको लगता है कि कश्मीरी चुपचाप स्वीकार कर लेंगे कि कश्मीर को मिटा दिया गया है ?’

इस दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की दूत मलीहा लोधी भी मौजूद रहीं।

बता दें, पाकिस्तानी पीएम इमरान खान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिलहाल UNGA सत्र में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क में हैं, जहां 27 सितंबर को दोनों नेता अपना संबोधन देंगे। पाकिस्तान ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह UNGA में कश्मीर का मुद्दा उठाएगा तो वहीं पीएम मोदी भी कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरने की कोशिश करेंगे।

ट्रंप का कश्मीर पर मध्यस्थता से इनकार !

दोनों देश के प्रधानमंत्रियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं, जिन्होंने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने की अपनी पेशकश को नए सिरे से रेखांकित किया कि वह ऐसा केवल तभी मध्यस्थता करेंगे जब दोनों पक्षों द्वारा इसके लिए कहा जाएगा।

‘भारत के कद से हारा पाकिस्तान’

इमरान खान ने इस दौरान भारत के आर्थिक कद और वैश्विक प्रमुखता को स्वीकार करते हुए कहा कि इसी वजह से कश्मीर पर पाकिस्तान के बयान की अनदेखी की जा रही है।उन्होंने कहा, ‘इसका कारण भारत है, लोग भारत को 1.2 बिलियन लोगों के बाजार के रूप में देखते हैं। वे इसे एक बाजार के रूप में समझते हैं।’

बता दें, इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान के गृह मंत्री ब्रिगेडियर एजाज अहमद शाह ने स्वीकार किया था कि पाकिस्तान, कश्मीर मुद्दे पर अपने रुख को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन पाने में विफल रहा है। मंत्री एजाज शाह ने कहा था कि, लोग हम परप विश्वास नहीं करते हैं लेकिन वे उनपर (भारत) भरोसा करते हैं।

जम्मू- कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के भारत के फैसले का पूरी दुनिया समर्थन कर रही है लेकिन इस फैसले के खिलाफ पाकिस्तान इस मुद्दे को एकबार फिर संयुक्त राष्ट्र में रखेगा, जहां 27 सितंबर को इमरान खान का संबोधन है।

MiG 21 Crash: ग्वालियर में हुआ हादसा, दोनों पायलट सुरक्षित बाहर निकले

ग्‍वालियर, एजेंसियां। मध्‍य प्रदेश के ग्‍वालियर में बुधवार सुबह वायुसेना का एक MiG 21 Trainer विमान क्रैश हो गया। इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। समय रहते ही विमान से एक ग्रुप कैप्टन और स्क्वाड्रन लीडर समेत दोनों पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विमान नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था जो ग्‍वालियर एयरबेस के नजदीक सुबह 10 बजे के करीब दु‍र्घटना का शिकार हो गया। भारतीय वायु सेना ने इस हादसे की कोर्ट ऑफ इन्‍क्‍वायरी के आदेश दिए हैं। कर्नल रैंक के एक अधिकारी को इस हादसे की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गौरतलब है कि इस साल मिग क्रैश होने की यह तीसरी घटना है। हाल के दिनों में मिग विमानों के क्रैश होने की घटनाएं बेहद आम हो गई हैं। करीब पांच दशक पुराने इन विमानों को बदलने की मांग लंबे वक्‍त से हो रही है। उड़ता ताबूत के तौर पर बदनाम इन विमानों को हल्‍के स्‍वदेशी तेजस से बदलने की भी चर्चाएं हो रही हैं। 

अभी एक हफ्ते पहले ही कर्नाटक के चित्रदुर्गा में डीआरडीओ का मानव रहित एयर व्‍हीकल (UAV) दुर्घटनाग्रस्‍त हो गया था। चित्रदुर्गा जिले के डीआरडीओ के टेस्‍ट रेंज, चैलकेरे एरोनॉटिकल टेस्ट रेंज (एटीआर) में इसका परीक्षण किया जा रहा था। यही नहीं एक महीने पहले ही असम के तेजपुर में वायुसेना का सुखोई-30 विमान क्रैश हो गया था। इस हादसे में भी दोनों पायलट सुरक्षित बच गए थे। बताया जाता है कि दुर्घटना के वक्त Su-30 विमान नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था। 

उल्‍लेखनीय है कि भारतीय वायुसेना के बेड़े में MiG विमानों के साथ पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। इसी साल मार्च महीने में राजस्थान के बीकानेर में भारतीय वायुसेना का मिग-21 बाइसन लड़ाकू विमान क्रैश हो गया था। हालांकि, इस हादसे में भी पायलट ने विमान क्रैश होने से पहले ही पैराशूट से छलांग लगा दी थी। इसी महीने में राजस्थान के जोधपुर में मिग-27 यूपीजी विमान क्रैश हो गया था जिसमें पायलट ने समय रहते इजेक्‍ट करके अपनी जान बचा ली थी। 

बता दें कि भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के दुर्घटनाग्रस्‍त होने के मामलों को लेकर फरवरी में दाखिल एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी तल्‍ख टिप्‍पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश ने कहा था कि वायुसेना के मिराज विमान काफी पुराने हैं जो क्रैश होने ही हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जुर्माना लगाने की चेतावनी देते हुए याचिका को खारिज कर दिया था। याचिका में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग की गई थी। 

लोकतंत्र को धन्ना सेठों की तिजोरियों में रखा – धैर्यवर्धन

शिवपुरी आज मध्य प्रदेश की केबिनेट द्वारा नगरीय निकाय के चुनावों को पार्षदों से कराने को मंजूरी देकर लोकतंत्र को तिजोरियों में गिरवी रखने का पाप किया है ।
भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश की कार्यकारिणी के सदस्य धैर्यवर्धन ने इस तानाशाही निर्णय पर अपनी कठोर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आम जनता को चाहिए कि कांग्रेस सरकार के मंत्रियों के पुतले फूंके ।
भाजपा नेता धैर्यवर्धन ने कहा कि सोशल मीडिया पर कार्टून बनाकर लानत भेजे, विरोध जताए क्योंकि इस निर्णय ने दरअसल जनता के अधिकार में ही कटौती की है ।
लोगों को संकोच त्यागकर अपने क्षेत्र के विधायक से मिलकर पूरी नम्रता से अपनी नाराज़गी जताई जानी चाहिए ताकि वे आगामी सत्र में विधानसभा में इस संशोधन को पारित करने के लिए खड़े न हों ।

धैर्यवर्धन ने आम जन को सलाह दी कि वे विधायकों से कहें कि हमारे अधिकारों में कटौती कतई स्वीकार्य नहीं है और हमारे जन प्रतिनिधि के नाते विधायकों को हमारी भावना की कदर करनी चाहिए ।
आम जन का छीना अधिकार
हम लड़ेंगे आर पार ।

तो अभी ,आज इसी क्षण से विरोध जताना प्रारंभ कीजिए ।

साक्षी 180 फ़ीट ऊंची पानी की टँकी से देखते ही देखते लगा दी छलांग.

“आत्महत्या” का घातक निर्णय लेकर पहले ही जगह चिन्हित कर चुकी थी साक्षी….
180 फ़ीट ऊंची पानी की टँकी से देखते ही देखते लगा दी छलांग हुई मौत.”
शिवपुरी
पानी की टँकी से कूदकर आत्महत्या करने बाली साक्षी के आत्महत्या के कारण भले फिलहाल अज्ञात है किंतु यह बात अवश्य स्पस्ट हो चुकी है कि उसके मन मे आत्महत्या का विचार काफी पहले आ चुका था।सिर्फ इतना ही नही वह जगह तक चिन्हित कर चुकी थी।
24 सितंबर की सुबह 10.30 बजे के लगभग प्रियदर्शनी कॉलोनी निवासी कॉलेज की छात्रा साक्षी तिवारी अचानक दो बत्ती से फिजिकल मार्ग पर के पी सिंह कोठी के नजदीक बनी पानी की टँकी पर चढ़ गयी।जब लोगो ने देखा तो पुलिस को सूचना दी जिस पर फिजिकल पुलिस ने मौके पर पहुच कर उसे नीचे से ही समझाने-बुझाने का तमाम प्रयास किया।इस दौरान भारी संख्या में लोग भी इकट्ठा हो गये।साक्षी काफी देर तक पानी की टंकी के पूर्वी भाग पर बैठी रही।टँकी की तरफ किसी के भी जाने पर वह कूदने का प्रयास करने लगती थी जिसके कारण पुलिस व लोग रुक जाते थे।इस दौरान फिजिकल थाना प्रभारी ने वन अमले से जाल मंगवाने का भी प्रयास किया। तकरीबन 45 मिनट बैठे रहने के बाद साक्षी टँकी के दक्षिणी ओर लगे जीने के नजदीक आ गयी।एक बार को यह भी लगा कि शायद वह नीचे उतर आएगी किन्तु वह ऊपर मौजूद प्लर पर चली और उसी पर बैठ गयी।पुलिस और मौजूद लोग उसे उतारने की तरकीब ही खोज रहे थे कि उसने नीचे छलांग लगा दी।देखते ही देखते कुछ पल हवा में रहने के बाद साक्षी का शरीर जमीन से टकराया।छटपटाती अवस्था मे तत्काल पुलिस उसे अस्पताल ले गयी जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
टंकी तक पहुचने के प्रमुख रास्ते पर ऊंची दीवारे व ताला लगा हुआ ऊंचा गेट है जिसे कूदकर जाना संभव नही है।निश्चित तौर पर उसने वहाँ पहुचने के लिये फिजिकल ग्राउंड बाले रास्ते को अपनाया।इसके अलावा साक्षी ने एक लंबा समय 180 फ़ीट की उस ऊँचाई पर बिताया जहाँ से नीचे देखने मात्र से कंपकपी आ जा रही थी।टँकी के ऊपर जीने ओर टँकी को जोड़ने के लिये भी एक प्लर लगा है जिस पर भी साक्षी कूदने के कुछ मिनट पहले बिना किसी सहारे के चली।फिर उसी प्लर के बीच मे बेठ भी गयी।वहाँ से नीचे झांकना भी कम ख़ौफ़नाक नही था।कुछ मिनट बाद ही साक्षी वहाँ से कूद गयी.
वह स्थान ऐसा है कि कोई भी अपना निर्णय नीचे गिरने की कल्पना मात्र से बदल देगा किन्तु साक्षी का ह्रदय परिवर्तन नही हुआ और उसने कूदने का दुस्साहसिक निर्णय ले ही डाला.
साक्षी की मौत अपने पीछे तमाम रहस्य छोड़ गयी है।सूत्र बताते है कि वह बाथरूम में कपड़े बदल कर बिना किसी को कुछ कहे घर से निकल गयी।उसके परिवार के लोग उसे तलाशने भी निकले किन्तु जब तक वे पहुचते तब तक देर हो चुकी थी.निश्चित तौर पर जब साक्षी आत्मघाती कदम उठाने के बारे में पहले ही सोच चुकी थी तो उसके पीछे वजह भी कोई बड़ी ही रही होगी।पुलिस को भी इस दिशा में काम अवश्य करना चाहिए ।