अमित शाह बोले पासपोर्ट, आधार और वोटर ID सब कुछ हो एक कार्ड में

नई दिल्ली, । केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक मल्टीपरपज आईडी कार्ड की बात कही है। इस कार्ड में पासपोर्ट, आधार और वोटर कार्ड सब कुछ समाहित होंगे। देश में इस वक्त आधार, पासपोर्ट और वोटर कार्ड जैसे कई ID कार्ड हैं, जिन्हें एड्रेस और फोटो पहचान पत्र के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। अमित शाह ने इन सबको एक कार्ड में समाहित करने का आईडिया दिया है।

केंद्रीय गृहमंत्री ने जो आईडिया दिया है उसके अनुसार वे चाहते हैं कि आधार, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड जैसे अलग-अलग कार्ड सब एक कार्ड में समाहित हो जाएं। यही नहीं उन्होंने आईडिया दिया है कि बैंक अकाउंट को भी इसी कार्ड के साथ जोड़ दिया जाए। 

उन्होंने कहा, साल 2014 में नरेन्द्र मोदी जी के देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद हमारे सोचने की क्षमता में बदलाव होने लगा। देश को समस्याओं से मुक्त किया जाए, ऐसी प्लानिंग की शुरुआत 2014 के बाद हुई। इससे जनगणना रजिस्टर के सही उपयोग की शुरुआत हुई।

हर 10 साल में होने वाली जनगणना भी साल 2021 में होनी है। इस बीत अमित शाह ने बताया कि 2021 की जनगणना घर-घर जाकर नहीं बल्कि, मोबाइल ऐप के जरिए होगी। उन्होंने कहा कि कोई ऐसा सिस्टम भी होना चाहिए, जिसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर यह जानकारी अपने-आप पॉपुलेशन डाटा में जुड़ जाए।
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, देश के सामाजिक प्रवाह, देश के अंतिम व्यक्ति के विकास और देश के भविष्य के काम के आयोजन के लिए जनगणना आधार है। जनगणना का डिजिटल डाटा होने से अनेक प्रकार के विश्लेषण के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं। कई बदलाव और नई पद्धति के बाद आज जनगणना डिजिटल होने जा रही है। 

बता दें कि सन् 1865 में सबसे पहले जनगणना की गई तब से लेकर आज 16वीं जनगणना होने जा रही है।

ममता बनर्जी के लिए नीतीश कुमार की तरह आखिरी विकल्प NDA ही है!

ममता बनर्जी की हाल की दिल्ली यात्रा पुराने सभी दौरे से पूरी तरह अलग रही. चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक्सपायरी बाबू बता चुकीं ममता बनर्जी ने खुद पहले से वक्त लेकर मुलाकात की. वरना, शपथग्रहण से लेकर दूसरे सरकारी कार्यक्रमों से भी दूरी बनाती रहीं.

ममता बनर्जी प्रधानमंत्री मोदी से मिलने मिठाई और कुर्ता लेकर पहुंची थीं, जबकि पहले कह रही थीं कि वो मोदी को कंकड़ वाला रसगुल्ला भेज देंगी. हैरानी की बात ये रही कि ममता बनर्जी, प्रधानमंत्री के साथ साथ अमित शाह से भी ये कहते हुए मिलीं कि बड़ी खुशी होगी अगर मुलाकात का वक्त मिल पाया, लेकिन दिल्ली आकर भी सोनिया गांधी से नहीं मिलीं – क्या ये नये राजनीतिक समीकरणों की तरफ कोई इशारा है?

ममता की मोदी-शाह से मुलाकात के मायने

एक लंबे अरसे बाद ममता बनर्जी के चेहरे पर प्रधानमंत्री का नाम लेते हुए मुस्कुराहट भी देखने को मिली. प्रधानमंत्री के साथ मीटिंग को अच्छा बताते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलने से संबंधित उनका एजेंडा सबसे ऊपर है. ममता ने कहा, ‘हमने पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर बांग्ला करने पर चर्चा की और उन्होंने इसके बारे में कुछ करने का वादा भी किया है.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में ममता बनर्जी ने उन्हें पश्चिम बंगाल आने का न्योता भी दिया, इस आग्रह के साथ कि वो दुनिया के दूसरे सबसे बड़े कोल ब्लॉक का उद्घाटन पश्चिम बंगाल में आकर करें.

ममता बनर्जी का कहना रहा कि उनका दिल्ली आना कम ही होता है. खास कर आम चुनाव के नतीजे आने के बाद तो बिलकुल ही कम हो गया है. ममता बनर्जी के दिल्ली आने के मौके तो काफी आये लेकिन वो नहीं आयीं. न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण में और न ही ‘एक देश एक चुनाव’ को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से बुलायी गयी मीटिंग में.

हालांकि, 23 मई से पहले ममता बनर्जी का दिल्ली आना इतना भी कम नहीं होता रहा. ममता बनर्जी जब भी विपक्षी दलों की मीटिंग होती रही जरूर आती रहीं. जब तो दिल्ली आतीं तो सोनिया गांधी से भी मिलतीं जरूर थीं. भले ही राहुल गांधी से परहेज करते हुए उन्हें नजरअंदाज कर देती रहीं.

10, जनपथ से निकलने के बाद ममता बनर्जी ये भी अवश्य बतातीं कि शिष्टाचारवश वो दिल्ली आने पर यूं भी मिलती ही हैं. मगर, इस बार ऐसा नहीं हुआ. ममता बनर्जी दिल्ली आकर भी सोनिया गांधी से नहीं मिल सकीं. खबर तो यही आयी कि चूंकि सोनिया गांधी महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड चुनाव को लेकर तैयारियों में व्यस्त रहीं, इस कारण दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं हो सकी. वैसे ये बात हजम नहीं होती. ऐसी भी क्या व्यस्तता कि 10 मिनट का वक्त नहीं निकाला जा सका.

तो क्या ये समझा जाये कि ममता बनर्जी चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वक्त लेकर मिलने आयी थीं और शिष्टाचारवश अमित शाह मुलाकात कर लीं – इसलिए सोनिया गांधी से मिलने का कोई मतलब भी नहीं बनता. ममता बनर्जी वैसे भी नवीन पटनायक जैसी राजनीति तो करती नहीं हैं जो दोनों तरफ बराबर दूरी बनाकर चल सकें. ममता बनर्जी दोनों में से किसी एक तरफ रहती ही हैं – भले ही ये साथ ज्यादा लंबा नहीं चल पाता.

क्या ममता बनर्जी भी नीतीश कुमार को फॉलो करने वाली हैं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति ममता बनर्जी के व्यवहार में अचानक आया बदलाव काफी हद तक अरविंद केजरीवाल से मिलता जुलता नजर आ रहा है. इससे आगे का रास्ता वो है जिस पर चल कर नीतीश कुमार फिर से NDA में पहुंच गये हैं.

क्या ममता बनर्जी भी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए नीतीश कुमार को फॉलो करने वाली हैं?

महाराष्ट्र में विधानसभा के लिए चुनाव 21 अक्टूबर, 2019 को होने जा रहे हैं – और नतीजे भी 24 अक्टूबर को आ जाएंगे. उस दिन वोटों की गिनती होगी. जिस तरीके से बीजेपी ने महाराष्ट्र में अपना विस्तार किया है, निश्चित तौर पर ममता बनर्जी गौर फरमा रही होंगी. बीजेपी ने महाराष्ट्र में शरद पवार की पार्टी एनसीपी और कांग्रेस को पूरी तरह साफ कर दिया है. दोनों दलों के 16 विधायक और 30 बड़े नेता या तो बीजेपी या फिर गठबंधन की दूसरी पार्टी शिवसेना में पहुंच चुके हैं. अगर आपने इंडिया टुडे कॉनक्लेव देखा होगा तो पता ही होगा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कैसे आत्मविश्वास से भरपूर नजर आ रहे थे. साथ ही साथ, शिवसेना के आदित्य ठाकरे कैसे गठबंधन से जुड़े किसी भी सवाल का जवाब देने से बचते रहे. एक अहम बात और भी है कि किस तरह उद्धव ठाकरे ने वक्त की नब्ज पहचानते हुए बेटे आदित्य को मुख्यमंत्री की कुर्सी का सपना कुछ दिन के लिए होल्ड करने के लिए समझा लिया – वैसे भी सपनों को होल्ड करना सबसे खतरनाक नहीं होता.

बिहार में नीतीश कुमार के सामने की राजनीतिक चुनौतियां कैसी हैं, ममता बनर्जी अच्छी तरह समझती हैं. फिर भी महाराष्ट्र की तरह बीजेपी ऐसी स्थिति में तो नहीं ही है जो अपने बूते सरकार बना सके. जिस तरह बिहार में बीजेपी अब भी नीतीश कुमार पर निर्भर है, ठीक उसी तरह पश्चिम बंगाल में अकेले दम पर सरकार बनाना अभी की स्थिति में बीजेपी के लिए नामुमकिन सा है.

बिहार चुनाव में बीजेपी की बुरी तरह शिकस्त होने के अगले ही साल हुए पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी अपने बूते दोबारा सत्ता में लौटीं – लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की सत्ता में दोबारा वापसी होते होते ममता बनर्जी कमजोर हो चुकी हैं.

ममता बनर्जी की मजबूरी ये है कि अगर बीजेपी के खिलाफ वो किसी भी पार्टी से गठबंधन कर लें तब भी कोई फायदा होने वाला नहीं हैं – क्योंकि न तो वाम दल और न ही कांग्रेस बीजेपी के बढ़ते दबदबे के दौरान ममता का मददगार बनने की हालत में है ही नहीं.

ये ठीक है कि बीजेपी के पास पश्चिम बंगाल में अभी ममता बनर्जी के मुकाबले खड़ा होने के लिए कोई नेता नहीं है – लेकिन ऐसी स्थिति में तो बीजेपी प्रदानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही आगे कर देती है और कामयाब भी रहती है. जब त्रिपुरा में लाल रंग पर मोदी ने अकेले दम पर भगवा पेंट कर दिया तो क्या पश्चिम बंगाल में ये असंभव होगा? एक पल के लिए तो नहीं लगता. वैसे राजनीति का क्या – क्या मालूम जिस तरह 2016 में चुनावों के ऐन पहले नारदा स्टिंग और सारदा घोटाले को नजरअंदाज करते हुए लोगों ने ममता बनर्जी को कुर्सी सौंप दी, चुनाव आते आते फिर से ऐसा कोई माहौल बन जाये.

वैसे आम चुनाव के नतीजों से ममता बनर्जी का जनाधार काफी खिसका हुआ लगता है. बीजेपी के प्रभाव को देखते हुए टीएमसी के नेता पार्टी की ओर काफी आकर्षित भी लग रहे हैं – और उनसे संवाद स्थापित करने के लिए मुकुल रॉय को तो बीजेपी ने पहले से ही झटक रखा है.

ये सच है कि ममता बनर्जी, नीतीश कुमार या अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बीजेपी उस हथियार का इस्तेमाल तो नहीं कर सकती है जिसे उसने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मोर्चे पर तैनात कर रखा है. मगर, एक सच ये भी है कि ममता बनर्जी के साथियों के खिलाफ तो भ्रष्टाचार वाले हथियार के साये में जांच एजेंसियां एक्टिव हो ही सकती हैं. ममता बनर्जी की मोदी-शाह से मुलाकात को कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के केस से भी जोड़ कर देखा गया. ममता बनर्जी के करीबी पुलिस अफसर को गिरफ्तार करने के लिए सीबीआई के अफसर हाथ धोकर पीछे पड़े हुए हैं. वो तो लोकेशन नहीं मिल पा रहा है, वरना कब दीवार फांद कर पी. चिदंबरम की तरह उठा ले जायें आसानी से समझा जा सकता है.

ममता बनर्जी के सामने जो चुनौतियां खड़ी हो रही हैं, वैसी हालत में उनके सामने बड़े ही सीमित विकल्प हैं. नीतीश कुमार को फॉलो करते हुए वो फिर से एनडीए में शामिल हो सकती हैं – और ऐसा करके वो ज्यादा कुछ तो नहीं लेकिन कुछ साल के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी जरूर बचा सकती हैं.

सुप्रीम कोर्ट में बढ़ी जजों की संख्‍या, चार नए सदस्‍यों ने शपथ ली

नई दिल्‍ली, । सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को चार नए जजों  ने पद की शपथ ली। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने हिमाचल प्रदेश के चीफ जस्‍टिस वी. रामासुब्रमण्‍यम, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्‍टिस कृष्‍ण मुरारी, राजस्‍थान के चीफ जस्‍टिस एस.ए. रवींद्र भट और केरल के चीफ जस्‍टिस  हृषिकेश रॉय को शपथ दिलाई। अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या 34 हो गई है।

केंद्र सरकार ने 18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट कालेजियम के सुझाए गए इन नामों पर मुहर लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या दस फीसद बढ़ाए जाने का विधेयक लोकसभा और राज्यसभा में पारित हुआ था। इसके साथ ही बढ़ी संख्‍या पर इनके वेतन के लिए भी धन आवंटित किया गया। इसे वित्त विधेयक के तौर पर दोनों सदनों से पारित किया गया।

कानून मंत्रालय के अनुसार, जुलाई माह में 11.5 लाख से अधिक लंबित मामले थे। इस साल के शुरुआत में चीफ जस्‍टिस गोगोइ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस कमी का उल्‍लेख कर पत्र के जरिए अवगत कराया। पत्र में उन्‍होंने यह भी लिखा जजों की कमी के कारण मुख्‍य मामलों की सुनवाई के लिए संवैधानिक बेंचों पर पर्याप्‍त संख्‍या नहीं रखी जा सकती।

हनीट्रैप / जांच के लिए भोपाल ले जाने से पहले आरोपी आरती की तबीयत बिगड़ी, आईसीयू में भर्ती

इंदौर. हनीट्रैप मामले में सोमवार को भोपाल ले जाने से पहले आरोपी आरती दयाल की एक बार फिर से तबीयत खराब हो गई।पुलिसकमरे से उठाकर उसे बाहर लाई और गाड़ी में लिटाकर अस्पताल पहुंचाया, जहां उसे आईसीयू में भर्ती किया गया है।इंदौर पुलिस आगे की पड़ताल के लिए सोमवार को मोनिका यादवऔर आरतीको भोपाल लेकर रवाना होने वाली थी। पुलिस भोपाल के अलावा इन्हें लेकर छतरपुर और राजगढ़ भी ले जा सकती है।

एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र ने बताया कि आरती और मोनिका कोपुलिस रिमांड पर लिया गया है। भोपाल, राजगढ़, और छतरपुर आदि जगहों पर पुलिस को जांच करनी है। इन्हें लेकर टीम भोपाल जा रही है। इंदौर के होटलों में अब तक वर्क किया जा चुका है। यहां के दो होटल से कुछ जानकारी मिली है, जहां फेक आईडी से जुड़ी जानकारी मिली है।

इसके पहले रविवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरती और मोनिका रोने लगीं। पेशी के बाद थाने पहुंचते ही दोनों की तबीयत खराब हो गई तो उन्हें एमवाय अस्पताल ले जाया गया। डिहाइड्रेशन की शिकायत के चलते दोनों को उपचार देकर रात को ही वापस महिला थाने भेज दिया गया था।

दोनों27 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर

हनी ट्रैप केस की आरोपी आरती दयाल और मोनिका यादव का रिमांड बढ़ाने के लिए रविवार को पहली बार पुलिस ने कोर्ट में कहा कि दोनों ने कई बड़ी हस्तियों को ब्लैकमेल किया। ये फर्जी आधार कार्ड बनाकर होटलों में रुकीं और मोबाइल से कई वीडियो बनाए। आगे की जांच और उनके घरों पर छापे मारने के लिए 28 सितंबर तक का रिमांड चाहिए। कोर्ट ने इन्हें शुक्रवार यानी 27 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर सौंपा है, जबकि ड्राइवर ओमप्रकाश को जेल भेज दिया।

कोर्ट में पलासिया थाने के नए टीआई शशिकांत चौरसिया खुद पेश हुए और कहा कि दोनों ही आरोपी काफी शातिर हैं। इनके पास कई फर्जी आधार कार्ड हैं। इनसे निगम इंजीनियर हरभजन सिंह से वसूले गए रुपए जब्त करना है, इसलिए इनका रिमांड चाहिए। न्यायाधीश ने पुलिस से छतरपुर की दूरी पूछी। टीआई ने कहा कि लगभग 650 किमी का सफर करना होगा।

आरोपियों के वकील ने कहा कि पुलिस ने सारी चीजें जब्त कर ली, अब उन्हें सिर्फ परेशान किया जा रहा है। इन्होंने और किसी बड़ी हस्ती को ब्लैकमेल किया है, तो पुलिस नाम जाहिर करें। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने रिमांड बढ़ा दिया। सुनवाई के दौरान ही दोनों फूट-फूटकर रोने लगी थी।

हरभजन को खुद फंसाना चाहती थी आरती, असफल रही तो मोनिका को आगे किया
आरती और मोनिका से पूछताछ में कई खुलासे हो रहे हैं। आरती को श्वेता ने नगर निगम इंजीनियर हरभजन सिंह से मिलवाया था, तभी आरती ने उसे फंसाने की स्क्रिप्ट तैयार कर ली थी। पहले तो आरती ने खुद हरभजन पर डोरे डाले और रिलेशन बनाने के लिए वॉट्सएप पर कई मैसेज भेजे। दो-तीन बार इंदौर के कैफे और रेस्त्रां में मुलाकात भी की, लेकिन जब उसे लगा कि वीडियो बनाना आसान नहीं है तो फिर उसने इस गेम में मोनिका को शामिल किया। उसे वह समझाकर लाई कि इंजीनियर बड़ा आसामी है। मुझे पैसा और तुम्हें सरकारी नौकरी मिलेगी। इसमें आरती को लगा कि अगर धमकाने के दौरान कभी वीडियो वायरल भी हो गया तो उसकी बदनामी नहीं होगी।

हरभजन से नहीं मिली थी रूपा
होटल इन्फिनिटी में 30 अगस्त को मोनिका और आरती के साथ रूपा अहिरवार भी आई थी। अब तक की जांच में पता चला है कि रूपा हरभजन से नहीं मिली। वह होटल आई और किसी काम का बोलकर चली गई थी। पुलिस उसके बारे में और जानकारी जुटा रही है। पुलिस ने होटल श्री और इन्फिनिटी को नोटिस देकर सीसीटीवी फुटेज मांगे हैं।

भाई को पढ़ा रही इंदौर में
पता चला है कि आरती का भाई इंदौर के एक कॉलेज में पढ़ाई करता है। रविवार को आरती की कोर्ट में पेशी के दौरान वह भी आया था। पुलिस जानकारी जुटा रही है कि आरती भाई से मिलने के लिए इंदौर आती थी तो किन-किन लोगों से मिलती थी। जब पुलिस ने आरती को गिरफ्तार किया था तो उसके भाई ने हरभजन सिंह को मैसेज कर बहन को छुड़वाने की आग्रह किया था। यह मैसेज भी पुलिस के पास है।

श्वेता का वीडियो वायरल हुआ तो नेता के साथ पहुंची थी साइबर सेल
उधर, जेल में बंद सागर की श्वेता जैन ने कुछ समय पहले एक व्यक्ति का वीडियो बनाया था। फिर उसे ब्लैकमेल करने वाली थी, लेकिन उसके पहले उसी व्यक्ति ने श्वेता का वीडियो वायरल कर उसे एक्सपोज कर दिया। इससे वह काफी गुस्सा हुई थी और एक नेता के साथ भोपाल साइबर सेल पहुंचकर इस वीडियो को डिलीट करवाने व अपना नाम हटवाने की मांग की थी।

738.50 फीट भरने से पहले ही खोले तिघरा के गेट, बहा दिया 2 हजार क्यूसेक पानी

ग्वालियर. तिघरा बांध के तीन गेट रविवार दोपहर 12 बजे एक फीट तक खोल कर 2000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। गेट दो घंटे तक खुले रखे गए। जलस्तर 738.25 फीट पर पहुंचने पर इस सीजन में पहली बार गेट खोले गए हैं। इससे पहले पांच बार सायरन बजाकर सांक नदी के आसपास बसे गांवों के लोगों को अलर्ट किया गया। इस दौरान कलेक्टर अनुराग चौधरी, नगर निगम कमिश्नर संदीप माकिन व अन्य प्रशासनिक, नगर निगम व जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। कई अफसरों का परिवार भी गेट खुलने का नजारा देखने के लिए मौजूद रहे। शहर व आसपास गांव के लोग भी बड़ी तादाद में पहुंचे। 
तिघरा की क्षमता 740 फीट है, लेकिन हर साल इसे 739 फीट तक भरा जाता है। पहले 738.50 पर गेट खोलने का निर्णय लिया गया था, लेकिन प्रशासनिक अफसरों के निर्णय पर 0.25 फीट कम पर ही गेट खोल दिए गए। आगे जलाशय की निर्धारित क्षमता के बाद ही गेट खोले जाएंगे। जल संसाधन विभाग की ओएंडएम टीम के कर्मचारी अधिकारियों ने पहले 4 नंबर गेट, फिर 5 नंबर और अंत में 3 नंबर गेट खोला। दोपहर दो बजे तक तीनों गेटों को एक-एक फीट खोल कर दो हजार क्यूसेक यानि 10 एमसीएफटी पानी छोड़ा गया। जल संसाधन विभाग के कर्मचारियों ने गेट खोलने से पहले पांच बार बजा सायरन बजाया, जिसकी आवाज तीन किलोमीटर दूर तक सुनाई दी।

जनता का हुजूम उमड़ा
तिघरा के गेट खुलने की खबर सुनकर लोगों का हुजुम उमड़ पड़ा। गेट खुलने का दृश्य लोगों ने अपने मोबाइल में कैद किया और सोशल मीडिया पर तिघरा के साथ अपने फोटो पोस्ट किए।

डेढ़ दर्जन गांव में हाईअलर्ट
गेट खोलने से पहले तिघरा थाना पुलिस को सूचना दी गई और आसपास के करीब डेढ़ दर्जन गांव में हाईअलर्ट जारी किया गया। बीती रात से ही गांवों में पानी छोड़े जाने की सूचना टेलीफोन के जरिए दी गई। इसके बाद कुछ अधिकारी और कर्मचारी सांक नदी के किनारे बसे गांवों में भी पहुंचे, जहां लोगों को सचेत किया गया और जानवरों व लोगों को नदी से दूर रहने की सलाह दी गई।

कैचमेंट में बारिश, इसलिए खोले गेट
तिघरा के कैचमेंट एरिया में लगातार बारिश हो रही है, जिसका पानी जलाशय में आ रहा है। इसलिए जलस्तर स्थिर रखने के लिए गेट खोले गए हैं। 

14.5 किमी का ऑटो किराया बसूला 4300 रुपये, पुणे का किस्सा.

 दिल्ली: बेंगलुरु के रहने वाले एक युवक को पुणे में ऑटो की सवारी करना महंगा पड़ गया. महंगा भी ऐसा कि लगभग 14.5 किलोमीटर की यात्रा के लिए युवक को 4300 रुपये का किराया चुकाना पड़ा. पहली बार जिसने भी यह सुना वो पूरी तरह से हैरान रह गया. क्योंकि जिस दूरी के लिए युवक ने ऑटो लिया था उसका सामान्य रूप से किराया 300 से 400 रुपये के आसपास होता है.

दरअसल, बेंगलुरु शहर के रहने वाले शख्स ने कटराज से पुणे के यरवदा तक सवारी की. दोनों गंतव्यों के बीच की दूरी लगभग 14.5 किमी है और पहुंचने में लगभग 47 मिनट लगते हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, युवक जो कि इंजीनियर है, नौकरी के लिए पुणे में था और बुधवार को सुबह करीब 5 बजे कटराज में बस से उतरा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवक ने फिर अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए कैब बुक करने की कोशिश की. लेकिन जब कैब बुक नहीं हुई तो उसने एक ऑटो लेने का फैसला किया जो उसे उसके स्थान पर छोड़ने के लिए सहमत हो गया.

इंजीनियर के लिए उसके दफ्तर वालों ने यरवदा पुलिस स्टेशन के पास एक आवास बुक किया था. लेकिन अपने गंतव्य पर पहुंचने के बाद, ऑटो का किराया जानकर वह हैरान रह गया. ड्राइवर ने यह कहकर 4,300 रुपये की मांग की कि मीटर यही दिखा रहा है. जब आदमी ने विरोध किया तो ऑटो ड्राइवर ने बताया कि उसे शहर में प्रवेश करने और छोड़ने के लिए 600 रुपये का भुगतान करना होगा. आखिरकार इंजीनियर ने किराया दिया, लेकिन बाद में पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई.

शिवपुरी शहर की प़तिभा: प़सिद्घ गायक पंडित आत्मानंद

शिवपुरी की प्रतिभा देखिए प्रख्यात भजन गायक आत्मानंद शर्मा एवं निर्माता करुणेश शर्मा द्वारा प्रसारित भजन संग्रह में से एक भजन जो रन्नौद शिवपुरी छतरी पिछोर कमलेश्वर खेरवा पिछोर सिद्ध स्थान खिरिया पर फिल्माया गया इसके साथ साथ इसका फिल्मांकन तृषा टा घाट अमोला पर इसका फिल्मांकन किया कृपया एक नजर शिवपुरी की प्रतिभाओं को देखिए

ह्यूस्टन में हाउडी मोदी की धूम रही, यादगार पलों को दुनिया याद रखेगी

ह्यूस्टन
अमेरिका के टेक्सस का ह्यूस्टन शहर। 22 सितंबर की सुबह (स्थानीय समयानुसार) यहां का एनआरजी स्टेडियम करीब 50,000 भारतीय-अमेरिकियों से ठसाठस भरा हुआ था। ‘हाउडी मोदी’ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप आने वाले थे। इस ऐतिहासिक लम्हे का इंतजार हो रहा था। मंच पर अमेरिका के तमाम राज्यों के गवर्नर और अमेरिकी सांसद भारत-अमेरिका संबंधों की नई ऊंचाई का खुद गवाही दे रहे थे। सांसदों में रिपब्लिकन भी थे और डेमोक्रैट्स भी। …जब स्टेडियम पहुंचे पीएम मोदी

भारत में रात के साढ़े 9 बज रहे थे। ‘हाउडी मोदी’ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था। करीब 10 मिनट बाद प्रधानमंत्री मोदी स्टेडियम पहुंचते हैं। उनके दस्तक के साथ ही स्टेडियम में लोगों का जोश और उत्साह सातवें आसमान पर चढ़ जाता है। पीएम मंच पर आते हैं और वहां मौजूद हजारों भारतीय-अमेरिकियों का झुककर सलाम करते हैं। वह मंच पर बारी-बारी से अमेरिकी सांसदों और गवर्नरों से मुलाकात करते हैं। अमेरिकी नेता गर्मजोशी से भारतीय प्रधानमंत्री का इस्तकबाल करते हैं। स्वागत के बाद ह्यूस्टन के मेयर सिल्वेस्टर टर्नर ने पीएम मोदी को ह्यूस्टन शहर की प्रतीकात्मक चाबी भेंट की, जो देश की उन जगहों में से एक है जहां भारतीय-अमेरिकी समुदाय की संख्या बहुत ज्यादा है।

ट्रंप को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किया रिसीव
पीएम मोदी के आने के बाद अब सभी को इंतजार है अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का। थोड़ी देर में ट्रंप का काफिला एनआरजी स्टेडियम पहुंचता है। गेट पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत के लिए मौजूद रहते हैं। दोनों हाथ मिलाते हैं और कुछ सेकंड आपस में बात करते हैं। यहां से ट्रंप स्टेडियम में बने मंच के लिए आगे बढ़ते हैं।

मंच पर एक साथ आते हैं मोदी-ट्रंप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को लेकर मंच पर पहुंचते हैं। उससे पहले ट्रंप स्वागत के लिए खड़े एक बच्चे के पास थोड़ी देर के लिए रुकते भी हैं और दोनों नेता उसके साथ सेल्फी भी लेते हैं। जोश से लबरेज भीड़ मोदी-मोदी और ट्रंप के नारों के साथ दोनों नेताओं का स्वागत करती है। प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप का हाथ उठाकर भीड़ का अभिवादन करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे भारत की रैलियों खासकर चुनावी रैलियों में नेता एकता और अपनेपन के इजहार के लिए एक दूसरे का हाथ पकड़कर ऊपर उठाते हैं।

मोदी ने ‘विशेष मेहमान’ के तौर पर कराया ट्रंप का परिचय
दोनों नेता मंच पर हैं। अब प्रधानमंत्री मोदी माइक पकड़ते हैं और अंग्रेजी में अपने ‘दोस्त’ का परिचय ऐसे शख्स के तौर पर कराते हैं, जो परिचय का मोहताज नहीं है और जिसका नाम दुनिया के घर-घर में जाना जाता है। मोदी मंच से ट्रंप और अमेरिका की शान में कसीदे पढ़ते हैं, बगल में खड़े अमेरिकी राष्ट्रपति बीच-बीच में मुस्कुरा देते हैं।

मोदी याद दिलाते हैं- अबकी बार, ट्रंप सरकार
ट्रंप को संबोधन के लिए बुलाने से पहले प्रधानमंत्री मोदी उनके परिचय में ही एक संक्षिप्त भाषण दे देते हैं। इसमें वह बताते हैं कि ‘दोस्त’ ट्रंप के साथ उनके संबंध कितने मधुर हैं और भारत व अमेरिका के रिश्ते ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं। मोदी ट्रंप के नारे ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ का जिक्र तो करते ही हैं, अपने भी बहुचर्चित नारे ‘अबकी बार, मोदी सरकार’ के तर्ज पर ‘अबकी बार, ट्रंप सरकार’ का भी जिक्र करते हुए वाइट हाउस में ट्रंप के दिवाली सेलिब्रेशन की याद दिलाते हैं। ध्यान रहे, अमेरिका में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होने हैं।

ट्रंप का संबोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्रंप को मंच पर बुलाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिका के विकास में भारतीयों के योगदान की तारीफ के साथ भाषण की शुरुआत करते हैं। वह भारत और अमेरिका के मजबूत होते संबंधों का जिक्र करते हैं। वह बताते हैं कि किस तरह वह ‘अमेरिका को एक बार फिर महान बनाने’ के अपने सपने को साकार कर रहे हैं। वह जोर देकर कहते हैं कि उनके नेतृत्व में अमेरिका और मजबूत हुआ है और साथ में यह भी याद दिलाते हैं कि भारत में उनके दोस्त मोदी भी इसी तरह भारत को मजबूत कर रहे हैं। वह दुनिया के सबसे बड़े चुनाव भारतीय आम चुनाव का जिक्र करते हुए कहते हैं कि 60 करोड़ से ज्यादा लोगों ने उसमें हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री मोदी को दोबारा चुना। ट्रंप ने पीएम मोदी को चुनाव में मिली जीत और हाल में 17 सितंबर को बीते उनके जन्मदिन की भी बधाई देते हैं।

जब ट्रंप की एक बात पर तालियों की गड़गड़ाहट से देर तक गूंजता रहा स्टेडियम
डॉनल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका संबंधों की गर्मजोशी और दोनों देशों की साझा चुनौती का जिक्र करते हुए आतंकवाद पर हमला बोलते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जब यह कहते हैं कि भारत और अमेरिका कट्टर इस्लामी आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं, तो पूरा स्टेडियम देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज जाता है। लोग स्टैंडिंग ओवेशन देते हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी खड़े होकर तालियां बजाते दिखते हैं। इसके बाद ट्रंप ने इशारों-इशारों में अनुच्छेद 370 में किए गए बदलावों को लेकर भारत का समर्थन करते हैं। वह कहते हैं कि सीमा सुरक्षा अमेरिका के साथ-साथ भारत के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। ट्रंप कहते हैं कि सीमा सुरक्षा को लेकर वह भारत की चिंताओं को समझते हैं और इस मुद्दे पर दोनों देश साथ है.

‘हाउडी मोदी’ का पीएम ने दिया जवाब, भारत में सबकुछ अच्छा
ट्रंप का भाषण खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन शुरू होता है। प्रधानमंत्री ‘हाउडी मोदी’ के जवाब में हिंदी समेत कई भारतीय भाषाओं में बताते हैं कि भारत में सबकुछ ठीक है। ट्रंप इस दौरान मुस्कुराते रहते हैं। पीएम मोदी अपने भाषण में अपनी सरकार की उपलब्धियों का बखान करते हैं और भारतीयों की आकांक्षाओं को सलाम करते हैं। भारतीयों के बारे में वह कहते हैं- लक्ष्य ऊंचा है और उपलब्धियां उससे भी ऊंची।

पीएम ने ट्रंप को बताया ‘आर्ट ऑफ डील’ का मास्टर
पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा, राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप मुझे टफ नेगोशिएटर बुलाते हैं, लेकिन वह खुद आर्ट ऑफ डील के मास्टर हैं। मैं उनसे बहुत कुछ सीख रहा हूं।

मोदी ने 370 और आतंक पर पाकिस्तान को घेरा
मोदी ने अमेरिका की धरती से पाकिस्तान पर उसका नाम लिए बिना करारा हमला बोला। प्रधानमंत्री ने कहा कि 9/11 हो या मुंबई में 26/11 हो, उसके साजिशकर्ता कहां पाए जाते हैं? उन्होंने कहा कि इन लोगों ने भारत के प्रति नफरत को ही अपनी राजनीति का केंद्र बना दिया है, ये वो लोग हैं, जो अशांति चाहते हैं। प्रधानमंत्री जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने पर पाक के विरोध को लेकर भी तंज कसते हैं। वह कहते हैं कि भारत अपने यहां जो कर रहा है, उससे कुछ ऐसे लोगों को भी दिक्कत हो रही है, जिनसे खुद अपना देश संभल नहीं रहा है। इस दौरान भीड़ का जोश चरम पर पहुंच जाता है।

आखिर में ट्रंप ने मोदी को लेकर स्टेडियम का लगाया चक्कर
मोदी अपना भाषण खत्म करते हैं। भारत में आधी रात हो चुकी होती है। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को लेकर स्टेडियम का चक्कर लगाते हैं। दोनों नेता उत्साहित भीड़ का अभिवादन करते हैं। इस तरह मेगा ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम यादगार छाप छोड़ते हुए संपन्न हो जाता है।

मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी तिहाड़ जेल पहुंचे, पी चिदंबरम से मिलने.



नई दिल्ली पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी आज पी चिदंबरम से मुलाकात के लिए तिहाड़ जेल पहुंचे. इससे पहले चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम भी तिहाड़ जेल गए और पिता से मुलाकात की. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सीबीआई ने आईएनक्स मीडिया केस में 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था. जिसके बाद कुछ दिनों तक चिदंबरम जांच एजेंसी की रिमांड पर रहे और फिर उन्हें पांच सितंबर को तिहाड़ जेल भेज दिया गया.
19 सितंबर को दिल्ली की एक अदालत ने आईएनएक्स मीडिया मामले में चिदंबरम की न्यायिक हिरासत की अवधि तीन अक्टूबर तक बढ़ा दी थी. पी चिदंबरम को लेकर बीजेपी कांग्रेस पर निशाना साधती रही है. इस बीच कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने चिदंबरम से मुलाकात की है. कांग्रेस की कोशिश चिदंबरम के प्रति एकजुटता दिखाने की है. माना जा रहा है कि मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी चिदंबरम से उनकी खैरियत पूछेंगे.
पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल और गुलाम नबी आजाद ने तिहाड़ जेल जाकर पी चिदंबरम से मुलाकात की थी. कांग्रेस का कहना है कि चिदंबरम पर मोदी सरकार राजनीतिक बदले की कार्रवाई कर रही है.
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चिदंबरम के खिलाफ बड़े बड़े शब्द इस्तेमाल किए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि वह किंगपिन हैं. किसके किंगपिन हैं? क्या 11 अधिकारियों के किंगपिन हैं? दरअसल, साजिश पूर्व वित्त मंत्री की नहीं, बल्कि सरकार की है. जो गिरफ्तार हैं वो किंगपिन नहीं है. जो चरित्रहनन का अभियान चला रहे हैं वे लोग किंगपिन हैं.
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की सर्वोत्तम मिसाल है. अगर यही स्थिति रही तो कोई भी मंत्री फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं करेगा.