रात में मंदिरों के बाहर लगे दिग्विजय सिंह के विरोध में पोस्टर, हिंदू विरोधी बताया

भोपाल.मंगलवार को राजधानी में आयोजित संत समागम कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा साधू-संतों के बारे में दिए गए बयान के बाद शहर के मंदिरों में उनके खिलाफ विवादित पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टर में दिग्विजय सिंह को मंदिरों में प्रवेश रोकने के लिए कहा गया है।

पोस्टर किसने-कब और लगाए इसका खुलासा नहीं हो पाया। ये पोस्टर शहर के परशुराम मंदिर, हनुमान मंदिर, साईं मंदिर सहित कई मंदिरों के बाहर चस्पा किए गए हैं। पोस्टरों में दिग्विजय सिंह को मंदिरों में प्रवेश नहीं देने का संदेश लिखा है। पोस्टर पर दिग्विजय सिंह के फोटो पर क्रास किया गया। पोस्टर के अंत में निवेदक हिंदू समाज लिखा हुआ है। पोस्टर की जानकारी लगने के बाद मंदिरों से पोस्टर पुलिस ने हटवा दिए हैं।

कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल ने इस बारे में कहा कि संत समागम में जो कुछ कहा, वह उन्होंने कुछ घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में कहा था। भारतीय जनता पार्टीउसे तोड़मरोड़ कर अनर्गल तरीके से प्रचारित कर रही है। वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा कि दिग्विजय सिंह बार-बार हिंदू समाज को बदनाम करने की कोशिश करते हैं। ये समझे जाने की जरूरत है कि वे किस विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए इस प्रकार के बयान देते हैं।

क्या कहा था दिग्विजय सिंह ने: पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को मिंटो हाल में आयोजितसंत समागम में मुख्यमंत्री कमलनाथ की मौजूदगी में कहा था कि राम के नाम पर राजनीति करने वालों ने मठ-मंदिरों को अपनी राजनीति का अड्डा बना लिया था, जिन्हें भगवान कभी माफ नहीं करेगा। आजभगवा पहनने वाले चूरणबेच रहे हैं। भगवा वस्त्र पहने लोग बलात्कार कर रहे हैं। धर्म स्थलों तक पर ये दुराचार करते हैं।

स्वदेशी तेजस के सामने फेल है PAK-चीन का थंडरबर्ड, 2222 किमी रफ्तार

बेंगलुरु में स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में गुरुवार यानी आज रक्षामंत्री राजनाथ सिंह उड़ान भरेंगे. पहली बार देश के रक्षा मंत्री स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान भरने वाले हैं. 3 साल पहले ही तेजस को वायु सेना में शामिल किया गया था. अब तेजस का अपग्रेड वर्जन भी आने वाला है. तेजस ने अपनी पहली उड़ान 4 जनवरी 2001 को भरी थी. यह एक स्वदेशी मल्टीरोल फाइटर जेट है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि तेजस विमान को बनाने की जरूरत क्यों पड़ी. क्या ये इतना ताकतवर है कि इससे युद्ध जीता जा सके? क्या इस विमान से चीन और पाकिस्तान डरते हैं?

आइए आपको बताते हैं कि तेजस की खासियत और उसके विकास का इतिहास

तेजस बनाने का कारण था ‘फ्लाइंग कॉफिन’ को हटाना

कभी देश की शान रहे मिग-21 विमान अब पुराने हो चुके हैं. इनकी वजह से एयरफोर्स के करीब 43 जवान शहीद हो चुके हैं. इसलिए इन्हें फ्लाइंग कॉफिन भी कहते हैं. देश में पिछले 45 साल में करीब 465 मिग विमान गिर चुके हैं. वो भी दुश्मन से बिना लड़े. जंग के मैदान में तो सिर्फ 11 मिग विमान गिरे हैं. नए विमान की जरूरत देश को पड़ेगी, इसकी तैयारी 1980 में ही शुरू कर दी गई थी. करीब, दो दशकों की तैयारी और विकास के बाद 4 जनवरी 2001 को तेजस ने अपनी पहली उड़ान भरी थी.

पाकिस्तान-चीन के थंडरबर्ड से कई गुना दमदार है तेजस फाइटर

तेजस विमान पाकिस्तान और चीन के संयुक्त उत्पादन थंडरबर्ड से कई गुना ज्यादा दमदार है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब तेजस की प्रदर्शनी की बात की गई थी, तब पाकिस्तान और चीन ने थंडरबर्ड को प्रदर्शनी से हटा लिया था. ये बात है बहरीन इंटरनेशनल एयर शो की. तेजस चौथी पीढ़ी का विमान है, जबकि थंडरबर्ड मिग-21 को सुधारकर बनाया जा रहा है.

पूर्व पीएम अटल बिहारी बाजपेयी ने दिया था नाम ‘तेजस’

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा बनाए गए इस विमान का आधिकारिक नाम ‘तेजस’ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने दिया था. यह संस्कृत का शब्द है. जिसका अर्थ होता है अत्यधिक ताकतवर ऊर्जा. HAL ने इस विमान को लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) यानी हल्का युद्धक विमान प्रोजेक्ट के तहत बनाया है.

क्यों भारतीय सेनाओं के लिए खास है LCA तेजस?

तेजस हवा से हवा में हवा से जमीन पर मिसाइल दाग सकता है.इसमें एंटीशिप मिसाइल, बम और रॉकेट भी लगाए जा सकते हैं.तेजस 42% कार्बन फाइबर, 43% एल्यूमीनियम एलॉय और टाइटेनियम से बनाया गया है.तेजस सिंगल सीटर पायलट वाला विमान है, लेकिन इसका ट्रेनर वेरिएंट 2 सीटर है.यह अब तक करीब 3500 बार उड़ान भर चुका है.तेजस एक बार में 54 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है.LCA तेजस को विकसित करने की कुल लागत 7 हजार करोड़ रुपए रही है.

भारत को क्यों पड़ी तेजस की जरूरत?

एयरफोर्स के पास 33 स्क्वॉड्रन हैं. एक स्क्वॉड्रन में 16-18 फाइटर होते हैं.इन 33 में से 11 स्क्वॉड्रन्स में MiG-21 और MiG-27 फाइटर हैं.इनमें से भी सिर्फ 60% ही ऑपरेशन के लिए तैयार हैं.मिग-21 और मिग-27 की हालत अच्छी नहीं है. हादसे होते रहे हैं.एक्सपर्ट्स की मानें तो चीन-पाकिस्तान के खतरे को देखते हुए भारत को 45 स्क्वॉड्रन चाहिए.तेजस 34th स्क्वॉड्रन है. फ्रांस से राफेल मिलने पर वह 35th स्क्वॉड्रन होगी.

जानिए इसकी गति और ताकत के बारे में

2222 किमी प्रति घंटा की गति से उड़ान भरने में सक्षम.3000 किमी की दूरी तक एक बार में भर सकता है उड़ान.43.4 फीट लंबा और 14.9 फीट ऊंचा है तेजस फाइटर.13,500 किलो वजन होता है सभी हथियारों के साथ.

इन हथियारों से लैस हो सकता है तेजस विमान

6 तरह की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइले हो सकती हैं तैनात. ये हैं- डर्बी, पाइथन-5, आर-73, अस्त्र, असराम, मेटियोर. 2 तरह की हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें यानी ब्रह्मोस-एनजी और डीआरडीओ एंटी-रेडिएशन मिसाइल और ब्रह्मोस-एनजी एंटी शिप मिसाइल. इसके अलावा इसपर लेजर गाइडेड बम, ग्लाइड बम और क्लस्टर वेपन लगाए जा सकते हैं.

पी चिदंबरम के बाद अब डीके शिवकुमार को भेजा गया तिहाड़

मनी लॉन्ड्रिंग केस में हिरासत में लिए गए कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है. डीके शिवकुमार इलाज के लिए दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती थे. अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद गुरुवार को डीके शिवकुमार को तिहाड़ भेज दिया गया है.

शिवकुमार को तिहाड़ जेल नंबर 7 के वार्ड नंबर 2 में रखा गया है. इसी जेल परिसर में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम भी बंद हैं. चिदंबरम पर आईएनएक्स मीडिया मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है.

इससे पहले 17 सितंबर को दिल्ली की एक अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कर्नाटक के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डी.के. शिवकुमार को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. जज ने ईडी को कहा कि वह शिवकुमार को डॉक्टर के पास ले जाए, उनके स्वास्थ्य का ख्याल रखे और फिर उनसे पूछताछ करे. इसके बाद उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया था.

ईडी ने उनकी पांच दिन की हिरासत मांगी थी. इसका विरोध करते हुए शिवकुमार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि उनके मुवकिल हाई ब्लड प्रेसर सहित गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं. ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में शिवकुमार से चार दिनों तक पूछताछ करने के बाद उन्हें तीन सितंबर को गिरफ्तार किया था.

भारत उठा ले ये कदम तो PAK को खोलना ही पड़ेगा PM मोदी के लिए एयरस्पेस?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए पाकिस्तान ने अपना एयरस्पेस खोलने से इनकार कर दिया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि पाकिस्तान पीएम मोदी को अपने हवाई मार्ग के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देगा. 
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि यह फैसला कश्मीर के हालात को देखते हुए किया गया है. पाक विदेश मंत्री ने बताया, भारत की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए 20 सितंबर को जर्मनी जाने और 28 सितंबर की रिटर्न फ्लाइट के लिए एयरस्पेस खोलने की अपील की गई थी.

पाकिस्तान के इस कदम की विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने निंदा की. उन्होंने कहा कि दो सप्ताह के भीतर दूसरी बार पाकिस्तान ने अपना एयरस्पेस बंद किया है. किसी भी सामान्य देश द्वारा नियमित रूप से ये प्रदान किया जाता है. गौरतलब है कि सितंबर महीने में भी पाकिस्तान ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की फ्लाइट के लिए अपना एयरस्पेस खोलने से इनकार कर दिया था.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 सितंबर को अमेरिका पहुंचने के लिए पाकिस्तानी एयरस्पेस का इस्तेमाल करने वाले थे. पीएम मोदी हाउस्टन में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित भी करेंगे. इसके बाद, पीएम मोदी 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे.

कश्मीर पर सारी कूटनीतियां असफल होने के बाद पाकिस्तान एयरस्पेस बंद करने का पैंतरा अपना रहा है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक पाकिस्तान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल के लिए अनुमति देनी पड़ सकती है. अगर पाकिस्तान भारत के अनुरोध को खारिज करता है तो भारत अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन में अपील दायर कर सकता है. इसके बाद पाकिस्तान को भारी जुर्माना भी भरना पड़ सकता है.

अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, किसी भी देश के क्षेत्र से 12 नॉटिकल मील या 22.2 किमी की दूरी तक उसका एयरस्पेस माना जाता है और उस देश का अपने एयरस्पेस पर पूरा नियंत्रण होता है.

समुद्र के ऊपर एयरस्पेस को लेकर अंतरराष्ट्रीय समझौते लागू होते हैं. अंतरराष्ट्रीय एयरस्पेस के नियंत्रण और इस्तेमाल को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय समझौते अस्तित्व में हैं. संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन (ICAO) की निगरानी में सभी समझौतों और नियमों पर अमल सुनिश्चित होता है.

पाकिस्तान के बार-बार अनुचित तरीके से अपने एयरस्पेस को बंद करने को लेकर भारत संयुक्त राष्ट्र की संस्था ICAO में जा सकता है. पाकिस्तान एयरस्पेस बंद करके ICAO के समझौते का उल्लंघन कर रहा है.

पाकिस्तान का हवाई मार्ग यूरोप और अमेरिका की फ्लाइट्स के लिए काफी अहम है. जब पाकिस्तान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था तो यूरोप और अमेरिका जाने वाली अधिकतर फ्लाइट्स का किराया बढ़ गया था. दूसरी तरफ, भारत के एयरस्पेस बंद करने से पाकिस्तान को भी नुकसान पहुंचा. दक्षिण-पूर्व देशों को जाने वाली सारी पाकिस्तानी फ्लाइट्स को या तो अपना रूट बदलना पड़ रहा था या ज्यादा लागत की वजह से फ्लाइट रद्द करनी पड़ रही थीं. पाकिस्तान को दोतरफा नुकसान हो रहा था. एक तरफ, उसे अपने एयरस्पेस से गुजरने वाले कॉमर्शियल फ्लाइट्स से मिलने वाला राजस्व बंद हो गया और दूसरा उसकी एयरलाइंस को दक्षिण-पूर्वी देशों की फ्लाइट्स पर नुकसान उठाना पड़ा.

फरवरी महीने में भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक के बाद भी पाकिस्तान ने भारतीय एयरलाइंस के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था. बाद में पाकिस्तान को करोड़ों का नुकसान होने के बाद अपना फैसला वापस लेना पड़ा जिसके बाद पीएम मोदी फ्रांस दौरे पर जाने के लिए पाकिस्तानी एयरस्पेस से गुजरे थे. विश्लेषकों का कहना है कि पिछली बार भी भारत के पास मौजूद कानूनी-राजनीतिक विकल्पों की वजह से भी पाकिस्तान को अपना एयरस्पेस खोलने के लिए मजबूर होना पड़ा था.

सुपर 30 के आनंद कुमार को अमेरिका में मिला मिला ” ऐजूकेशन ऐक्सीलेंस” पुरस्कार.

नई दिल्ली: IIT प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने वाली कोचिंग संस्था ‘सुपर 30′ (Super 30) के संस्थापक और गणित के विख्यात शिक्षक आनंद कुमार (Anand Kumar) को अमेरिका में शिक्षण से जुड़े एक प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया है. यह पुरस्कार उन्हें जरूरतमंद विद्यार्थियों को शिक्षा मुहैया कराने में दिए गए उनके योगदान के लिए दिया गया. आनंद कुमार को ‘फाउंडेशन फॉर एक्सीलेंस’ (एफईई) संगठन ने ‘द एजुकेशन एक्सीलेंस अवॉर्ड 2019′ पुरस्कार से नवाजा. इस संगठन के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर कैलिफोर्निया के सैन जोस में आयोजित एक समारोह में कुमार को इस पुरस्कार से सप्ताहांत में नवाजा गया.

आनंद ने इस कार्यक्रम में अपने भाषण में कहा, ‘‘लोगों तक गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की पहुंच होने से विश्व में बड़ा बदलाव आएगा क्योंकि इससे गरीबी, बेरोजगारी, जनसंख्या विस्फोट, पर्यावरण क्षरण सहित कई अन्य समस्याओं को सुलझाने में मदद मिलेगी.” आनंद कुमार का स्वागत लोगों ने तालियां बजाकर किया और इस समारोह में कई दिग्गज हस्तियां शामिल हुईं.

कुमार ने कहा, ‘‘भारतीय अमेरिका सहित पूरे विश्व में विभिन्न क्षेत्रों में अच्छा काम कर रहे हैं और अगर वह अपने समाज को वापस कुछ देते हैं तो यह उनके लिए बेहद संतुष्टिजनक होगा और शिक्षा से ज्यादा कीमती कोई उपहार नहीं हो सकता है.”
कुमार ने कहा कि शिक्षित दुनिया बेहतर दुनिया होगी क्योंकि उसमें समझ और करूणा ज्यादा होगी.

उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा समय में खालीपन बढ़ता जा रहा है और इस खालीपन को सिर्फ शिक्षा ही भर सकती है. किसी को भी अच्छा अवसर दें तो वह अच्छा करके दिखाएगा. अंतत: अवसर ही मायने रखता है.” हाल ही में कुमार पर बनी फिल्म ‘सुपर 30′ रिलीज हुई थी. इसमें ऋतिक रोशन मुख्य भूमिका में थे.

नासा के माध्यम से अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला सुनीता विलियम का जन्मदिन है आज

नई दिल्ली  नासा के माध्यम से अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला सुनीती विलियम्स का आज जन्मदिन है। उनका जन्मदिन 19 सितंबर, 1965 यूक्लिड, ओहायो में हुआ था। वो अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के माध्यम से अंतरिक्ष जाने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला है। यह भारत के गुजरात के अहमदाबाद से ताल्लुक रखती है। इन्होंने एक महिला अंतरिक्ष यात्री के रूप में 195 दिनों तक अंतरिक्ष में रहने का विश्व किर्तिमान स्थापित किया है। उनके पिता दीपक पाण्डया अमेरिका में एक डॉक्टर हैं।

शुरुआती जीवन

वैसे सुनीता को सुनीता विलियम्स पुकारा जाता है मगर उनका पूरा नाम सुनीता लिन पांड्या विलियम्स है। उनका जन्म अमेरिका के ओहियो राज्य में यूक्लिड नगर (स्थित क्लीवलैंड) में हुआ था। मैसाचुसेट्स से हाई स्कूल पास करने के बाद 1987 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की नौसैनिक अकादमी से फिजिकल साइन्स में बीएस (स्नातक उपाधि) की परीक्षा उत्तीर्ण की। तत्पश्चात 1995 में उन्होंने फ़्लोरिडा इंस्टिट्यूट ऑफ़ टैक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में एम.एस. की उपाधि हासिल की।

उनके पिता डॉ॰ दीपक एन. पांड्या एक जाने-माने तंत्रिका विज्ञानी (एम.डी) हैं, वो भारत के गुजरात राज्य से हैं। उनकी मां बॉनी जालोकर पांड्या स्लोवेनिया की हैं। उनका एक बड़ा भाई जय थॉमस पांड्या और एक बड़ी बहन डायना एन, पांड्या है। जब वे एक वर्ष से भी कम की थी तभी पिता 1958 में अहमदाबाद से अमेरिका के बोस्टन में आकर बस गए थे। हालांकि बच्चे अपने दादा-दादी, ढेर सारे चाचा-चाची और चचेरे भाई-बहनों को छोड़कर ज्यादा खुश नहीं थे, लेकिन परिवार ने पिता दीपक को उनके चिकित्सा पेशे में प्रोत्साहित किया। 

30 अंतरिक्ष यानों में 2270 उड़ानें भरी

जून 1998 में सुनीता का अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा में चयन हुआ और प्रशिक्षण शुरू हुआ। सुनीता भारतीय मूल की दूसरी महिला हैं जो अमरीका के अंतरिक्ष मिशन पर गईं। वो अभी तक कुल 30 अलग-अलग अंतरिक्ष यानों में 2770 उड़ानें भरी हैं। उन्होंने सितंबर / अक्टूबर 2007 में भारत का दौरा भी किया। सुनीता सोसाइटी ऑफ एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलेट्स, सोसाइटी ऑफ फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर्स और अमेरिकी हैलिकॉप्टर एसोसिएशन जैसी संस्थाओं से भी जुड़ी हुई हैं। 

निजी जीवन

सुनीता विलियम्स का विवाह माइकल जे. विलियम्स से हुआ। वे नौसेना पोत चालक, हेलीकाप्टर पायलट, परीक्षण पायलट, पेशेवर नौसैनिक, गोताखोर, तैराक, धर्मार्थ धन जुटाने वाली, पशु-प्रेमी, मैराथन धावक और अब अंतरिक्ष यात्री एवं विश्व-कीर्तिमान धारक हैं। उन्होंने एक साधारण व्यक्तित्व से ऊपर उठकर ये मुकाम हासिल किए। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत तथा आत्मविश्वास का इस्तेमाल किया और ये सारी चीजें हासिल की।

सम्मान और पुरस्कार

सुनीता ने सन 2008 में भारत सरकार द्वारा विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। उन्हें नेवी कमेंडेशन मेडल (2), नेवी एंड मैरीन कॉर्प एचीवमेंट मेडल, ह्यूमैनिटेरियन सर्विस मेडल जैसे कई सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने कई मिशन पूरे किए और उनके नाम पर कई उपलब्धियां भी रही हैं।

अंतरिक्ष में जाने वाली युवतियों के लिए प्रेरणा

सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में जाने वाली युवतियों के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत सरीखी है। स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाली हजारों स्टूडेंट्स के मन में अंतरिक्ष में जाने वाली अंतरिक्षयात्री बनने का होता है। ऐसे सभी बच्चों के लिए इस तरह के अंतरिक्षयात्री एक आदर्श होते हैं वो उनके जीवन से प्रेरणा लेते हैं और उनके जैसा बनना चाहते हैं। कई बार अंतरिक्ष में जाने वाले ऐसे लोगों से मिलकर अंतरिक्ष के बारे में और भी अधिक जानकारी हासिल करना चाहते हैं।  

ममता बनर्जी ने कल प़धानमंत्री से की मुलाकात आज अमित शाह से मिलने मांगा है वक्त

शारदा घोटाले पर पत्रकारों को नहीं दिया जवाब

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। ममता ने त्योहारी मौसम के बाद प्रधानमंत्री को पश्चिम बंगाल में खनन परियोजना के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया। इतना ही नहीं ममता ने आज (बृहस्पतिवार को) केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने का वक्त भी मांगा है।

प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद ममता ने इससे जुड़ी जानकारियों को लेकर पत्रकारों से बातचीत की। शाह से मुलाकात पर ममता ने कहा कि जब मैं दिल्ली आती हूं तो हमेशा गृह मंत्री से मिलती हूं। अगर वह मुझे वक्त देते हैं तो मैं उनसे मुलाकात करुंगी। इसके बाद जब पत्रकारों ने उनसे सारदा घोटाले से जुड़ा सवाल पूछा तो ममता बनर्जी भड़क गईं। पश्चिम बंगाल की सीएम ने कहा कि मुझसे इस तरह के सवाल ना पूछें, मुझे जो कहना है वह मैंने कह दिया है, बहुत-बहुत धन्यवाद।

इससे पहले पीएम के साथ मुलाकात में ज्यादातर विकास के मुद्दों पर चर्चा की गई लेकिन एनआरसी प्रक्रिया पर चर्चा नहीं हुई। ममता ने बंगाल में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू करने के मुद्दे पर कहा कि इस प्रक्रिया में असली नागरिकों की सूची तैयार करने का प्रावधान पश्चिम बंगाल पर लागू नहीं होता।

प्रधानमंत्री के आवास पर हुई यह मुलाकात करीब आधे घंटे तक चली। बनर्जी ने कहा कि चर्चा राजनीतिक नहीं थी लेकिन राज्य के विकास के मुद्दों पर बात की गई। ममता दिल्ली में तीन दिन के दौरे पर आई हुई हैं। उन्होंने मोदी के साथ बीएसएनएल, रक्षा आयुध निर्माण फैक्टरी, रेलवे और कोयला जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

पश्चिम बंगाल को नया नाम देना मुख्य एजेंडाः तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने यह भी कहा कि उन्होंने पश्चिम बंगाल को नया नाम देने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मोदी इस विचार से असहमत नहीं हैं।उन्होंने कहा, ‘बंगाल को नया नाम देना हमारा मुख्य एजेंडा है इसलिए हमने बांग्ला को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव दिया है। प्रधानमंत्री ने हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।’ पश्चिम बंगाल विधानसभा ने राज्य को नया नाम ‘बांग्ला’ देने के प्रस्ताव को पारित कर दिया है।

उन्होंने कहा, ‘हमने अपने अनुरोधों को पुख्ता करने के लिए काफी दस्तावेज सौंपे। बंगाल की जीडीपी 12.8 प्रतिशत है जो देश में सबसे अधिक है। हमने अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों को उजागर करते हुए उन्हें दस्तावेज भी दिए।’

नए मोटर व्हीकल एक्ट के विरोध में उतरी ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन दिल्ली में हड़ताल

दिल्ली-एनसीआर में 51 संगठनों ने  हड़ताल की घोषणा की, स्कूलों में कर दी गई छुट्टी.

नई दिल्ली. देशभर में नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद से लगातार हो रहे भारी-भरकम चालानों को लेकर विरोध के सुर उठने लगे हैं. इसे लेकर अब ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन ने गुरुवार 19 सितंबर को हड़ताल की घोषणा की है. अब दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार को सार्वजनिक वाहन नहीं चलेंगे. बताया जा रहा है कि 51 संगठनों ने इस हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की है. इस हड़ताल में सार्वजनिक वाहनों के साथ-साथ स्कूल बस और कैब भी शामिल हैं.

25 हजार ट्रक और 50 हजार टैक्‍सियों के थमेंगे चक्के

नए मोटर व्हीकल एक्ट में कई गुना तक बढ़े जुर्माने, बीमा की राशि और आरएफआइडी टैग की अनिवार्यता सहित अन्य मसले को लेकर ट्रक, टेंपो, बस, ऑटो, टैक्सी और कैब सर्विस ने हड़ताल का ऐलान किया है. इस दौरान तकरीबन 25 हजार ट्रक, 35 हजार ऑटो, 50 हजार टैक्सी और कैब नहीं चलेंगी. स्कूल बस और स्कूल कैब संचालकों ने भी हड़ताल में शामिल होने का ऐलान किया है.

स्कूलों ने कर दी बच्चों की छुट्टी

हड़ताल की घोषणा के बाद दिल्ली-एनसीआर के कई स्कूलों ने छुट्टी कर दी है. स्कूल बस नहीं चलने के चलते ज्यादातर स्कूलों ने सातवीं क्लास तक की छुट्टी करने का निर्णय लिया है. वहीं कुछ स्कूलों ने सभी क्लास नहीं लगाने का फैसला किया है. इस संबंध में स्कूलों ने अभिभावकों को नोटिस भेजकर सूचित किया है. दिल्ली के अलावा एनसीआर में आने वाले- गाजियाबाद, गुरुग्राम (गुड़गांव) और नोएडा के स्कूलों ने भी छुट्टी की घोषणा कर दी है.

ग्वालियर की डॉ.गीता सिंह ने पूरे देश में लहराया परचम,25 को होगा सम्मान


चंबल की धरा को फिर महिला शक्ति ने किया गौरान्वित।

भोपाल।फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया(PEFI) ने खेल और शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले दिग्गजों को सम्मानित करने के लिए प्रतिष्ठित चतुर्थ पेफ़ी राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा कर दी है।पुरुस्कार आयोजन समिति के सचिव डॉ.चेतन कुमार ने इस विषय की जानकारी देते हुए बताया कि शारीरिक शिक्षा और खेलकूद मानव जीवन के अभिन्न अंग हैं।और इसके प्रशिक्षकों और संस्थाओं को पेफी विगत 4 वर्ष से सम्मानित कर रही है।

इस बार चयन समिति ने कड़ी मेहनत के बाद पूरे देश से आए आवेदनों में से 11 श्रेणियों में 28 लोगों और संस्थाओं को इस पुरस्कार के लिए चयनित किया है, यह पुरस्कार देश के उन चुनिंदा लोगों और संस्थाओं को दिया जाता है जिन्होंने देश में शारीरिक शिक्षा और खेलकूद को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है और शारीरिक शिक्षा और खेल के क्षेत्र में समाज और देश के लिए प्रेरणा बने हैं चुने गए अंतर्राष्ट्रीय संगठन दिल्ली को 25 सितंबर को दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित स्पोर्ट्स इंडिया 2019 के दौरान हॉल नंबर 8 में खेल एवं राजनीति जगत के दिग्गजों के हाथों पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा